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Antarvasnasex बैंक की कार्यवाही
06-09-2018, 01:30 PM,
#61
RE: Antarvasnasex बैंक की कार्यवाही
मैंने सोनल की तरफ देखा। सोनल ने मुझे सांत्वना दी। लगभग 15-20 मिनट बाद अंकल वापिस आये, साथ में आंटी भी थी।
सोनल खड़ी हो गई। मुझे तो कोई होश ही नहीं था, अगर सोनल मेरा हाथ पकड़कर नहीं उठाती तो।
बैठो, बैठो, बेटा, कहते हुए आंटी और अंकल हमारे सामने वाले सोफे पर बैठ गये।
अंकल आपको शायद पता ही होगा कि अपूर्वा की शादी की बात समीर से हुई थी, नवरीत ने शायद आपको बताया होगा, सोनल ने कहा।
हां बेटा, खुद भाईसाहब ने ही बताया था हमें,,, आंटी ने कहा।
तो फिर शायद बाद में क्या हुआ, वो भी बताया होगा, हम अभी उनके घर पर ही गये थे, पर वहां पर लॉक था, सोनल ने कहा।
बेटा, हमारी भी समझ में नहीं आ रहा उन्होंने ऐसा क्यों किया, मैंने उन्हें समझाने की कोशिश भी की थी, परन्तु वो मानने को तैयार ही नहीं हो रहे थे, अंकल ने कहा।
उन्होंने कुछ तो बताया होगा कि वो ऐसा क्यों कर रहे हैं, सोनल ने कहा।
बेटा, मैंने बहुत पूछा था उनसे, पर उन्होंने कुछ बताया नहीं, अंकल ने कहा।

अब वो कहां पर हैं, आपको तो पता होगा, सोनल ने पूछा।
वो सभी इंडिया से बाहर गये हुए हैं, अभी भाईसाहब एक दिन के लिए आये थे, कुछ जरूरी काम था, इधर, फिर वापिस चले गए हैं, आंटी ने कहा।
उनका वहां का कॉन्टैक्ट नम्बर तो होगा ही आपके पास, सोनल ने कहा।
बेटा, मेरी उनके साथ थोड़ी कहासुनी हो गई थी इस बारे में, तो अभी तो उनका कोई कॉन्टैक्ट मेरे पास नहीं है, अंकल ने कहा।
अंकल आपके चेहरे के हाव-भाव से मुझे ऐसा लग रहा है कि आप कुछ छुपा रहे हैं, सोनल ने खड़े होते हुए कहा।
ऐसा कुछ नहीं है बेटा,,, अंकल और आंटी भी खड़े हो गए।
तभी नवरीत चाय लेकर आ गई। नवरीत ने मेरी तरफ देखा। मेरी तरफ देखते ही वो कुछ विचलित सी हो गई।
बेटा चाय पीकर जाना आराम से,,, कहते हुए अंकल बाहर चले गए।
नवरीत ने हमें चाय दी, वो हमारे दोनों के लिए ही चाय बनाकर लाई थी।
मेरी नजरें उस पर ही टिकी थी, इस आस में कि क्या पता यहीं से कुछ पता चल जाए।
ओके बेटा मैं नाश्ते की तैयारी कर लेती हूं, तेरे अंकल को जाना है, आप चाय पीओ,, कहते हुए आंटी बाहर चली गई।
आंटी के जाते ही नवरीत मेरे पास आई और घुटनों के बल नीचे बैठ कर मेरे चेहरे को हाथों में समेट कर मेरे चेहरे को देखने लगी।
क्या तुम मुझे कुछ बता सकती हो अपूर्वा के बारे में, वो कहां पर है, और मेरे साथ ऐसा क्यों कर रही है,,, कहते हुए मेरी आंखों में आंसु आ गए।
आई एम सॉरी, पर मुझे किसी ने कुछ नहीं बताया ये सब क्यों हो रहा है, नवरीत ने मेरे आंसु पौंछते हुए कहा।
तुम तो उनके साथ गई हुई थी ना विदेश में, मैंने कहा।
हां, मैं उनके साथ ही गई हुई थी, अभी अंकल आए तब उनके साथ आ गई थी,, नवरीत के चेहरे पर मायूस साफ दिख रही थी।
वो कहां गये हुए हैं, मैं वहीं जाकर अपूर्वा से मिल लूंगा, मैंने नवरीत से विनती करते हुए कहा।
मैं नहंी बता सकती,,, कहते हुए नवरीत की आंखें नम हो गई।

नवरीत बेटा,, बाहर से अंकल की आवाज आई।
नवरीत मायूस नजरों से मेरी तरफ देखते हुए बाहर चली गई। उसकी आंखे नम थी। नवरीत के चेहरे के भावों से मेरा दिल बैठा जा रहा था। जो कुछ भी सोनल के आने से थोड़ा बहुत सुकून मिला था वो एक पल में ही गायब हो चुका था। मुझे किसी अनहोनी की आंशका ने घेर लिया था। अब तो मैं अपूर्वा से मिलने के लिए पहले से भी ज्यादा व्याकुल हो उठा था। परन्तु कोई रास्ता नहीं सूझ रहा था। मेरी आंखों से झर झर आंसु बह रहे थे।
मुझे लग रहा है कि ये कुछ छुपा रहे हैं, सोनल ने खड़े होते हुए कहा।
मैं भी खड़ा होकर बाहर की तरफ चल दिया। हम बाहर आये तो सामने से आंटी हमारी तरफ ही आ रही थी। मेरी आंखों से बहते आंसुओं को देखकर वो मेरे पास आई और मुझे अपने सीने से लगा लिया।
सब कुछ ठीक हो जायेगा बेटा, आंटी के मुंह से इतना ही निकला।
आंटी आप बता दीजिए ना, वो कहां पर गये हैं, मैं वहीं पर चला जाउंगा,,, मेरी आवाज दब रही थी, ऐसा लग रहा था कि कुछ आवाज को बाहर निकलने से रोक रहा है।
आंटी ने मुझे अपने से अलग किया और मेरे सिर में हाथ फेरते हुए कहा, ‘बेटा अब मैं क्या बताउं, तुम्हारे अंकल को ही नहीं पता’।
ऐसा कैसे हो सकता है आंटी, वो आपको कुछ भी बताये बिना कैसे जा सकते हैं, और फिर नवरीत तो उनके साथ भी गई थी, तो कैसे आपको नहीं पता,, मैंने कहा।
अब कुछ भी समझ लो बेटा, कहकर आंटी अंदर चली गई। उनकी आंखों में आंसु थे।
मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि ये सब क्यों रो रहे हैं, ये क्यों इतने दुखी हैं, जबकि ये सब कुछ जानते हैं।
मैं वहीं पर खड़ा हुआ अंदर की तरफ देखता रहा।
चलो, मुझे कहीं और से कुछ पता करना पड़ेगा,,, सोनल ने मुझे बाहर लाते हुए कहा।
मैं अभी भी अंदर ही देखे जा रहा था, इस उम्मीद में कि शायद कोई कुछ बता ही दे।
घर आकर हम उपर आ गये।उपर आते ही सोनल ने मुझे अपने गले लगा लिया।
सब कुछ ठीक हो जायेगा बेबी,,, मैं आ गई हूं ना अब,,, कहते हुए सोनल मुझे बाहों में भरे हुए अंदर आ गई।
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06-09-2018, 01:31 PM,
#62
RE: Antarvasnasex बैंक की कार्यवाही
अंदर आकर हम बेड पर बैठ गये। मैं बस अपूर्वा से बात करने के लिए तड़प रहा था। सुबह से मेरे दिमाग में बस अपूर्वा का पक्ष जानने की बात घूम रही थी। अंकल की कही गई बातों से मुझे कोई फर्क नहीं पड़ना था, अगर अपूर्वा हां कर दे तो। परन्तु उससे बात कैसे हो समझ नहीं आ रहा था। मुझे पूरा विश्वास था कि अपूर्वा कभी भी मुझे धोखा नहीं दे सकती, इसलिए अब मेरी उदासी गायब हो रही थी, क्योंकि अंकल की बातों का अब कोई मायने नहीं रहे थे, मुझे बस अपूर्वा का पक्ष जानना था। बस रह गई थी तो बैचेनी अपूर्वा से बात करने की।
मन से अंकल की बात का असर खत्म होते ही मैं उदासी को छोड़कर बस इसी उधेड़ बुन में लग गया था कि किस तरह से अपूर्वा से बात हो। उदासी खत्म होते ही मुझे अपनी मूर्खता पर हंसी आने लगी। कैसे मैं अंकल की बातों से ही दो दिनों तक इस तरह गुम गया था, कि जैसे मेरी पूरी दुनिया उजड़ गई हो, जबकि अपूर्वा ने तो ऐसा कुछ नहीं कहा था। मुझे गुस्सा भी आ रहा था खुद पर, यदि उदास होने की बजाय मैं अपूर्वा से मिलने की, उससे कॉन्टेक्ट करने की कोशिश करता तो अब तक शायद कुछ तो सफलता हाथ लगती।
मैंने अपूर्वा का नम्बर डायल किया परन्तु पूरी रिंग जाने के बाद भी किसी ने नहीं उठाया, मैंने दो-तीन बार टराई किया, परन्तु सिी ने नहीं उठाया। मैंने टाइम देखा तो साढ़े नौ बज चुके थे।
श्श्शि्शट् यार, ऑफिस के लिए लेट हो गया। उदासी के बादल छंटते ही दिमाग ने फिर से काम करना शुरू कर दिया था। अब पहले से काफी अच्छा लग रहा था, दिल थोड़ा सा हल्का हो गया था, क्योंकि मैं जानता था कि अपूर्वा कभी भी मुझे धोखा नहीं देगी, वो मुझे दिलोजान से चाहती है।
उसकी इसी चाहत ने तो मुझे उसका दिवाना बनाया था, नहीं तो मैं तो जानता भी नहीं था कि मैं उसे प्यार करता हूं, मैं तो इस प्यार को दोस्ती माने बैठा था।
मैं ऑफिस के लिए तैयार होता हूं, कहकर मैं उठा और बाथरूम में घुस गया। जब मैं नहा-धोकर बाहर निकला तो सोनल ने नाश्ता तैयार कर लिया था।
थैंक्स यार, नहीं तो आज भूखा ही रहना पड़ता, कहते हुए मैंने सोनल को बाहों में भरकर उसके होंठों को चूम लिया।
सोनल आश्चर्य से मेरे चेहरे को देखे जा रही थी।
जल्दी से नाश्ता करता हूं, कहते हुए मैं रसोई में गया और एक थाली में परोंठे और अचार ले आया।
मुझमें अचानक आये परिवर्तन से सोनल असमंझस में थी। उसे समझ नहीं आ रहा था कि अचानक मुझे क्या हुआ। वो बेड के पास खड़ी हुई बस मुझे घूरे जा रही थी।
क्या हुआ, चलो बैठो, नाश्ता करो, फिर मुझे ऑफिस के लिए भी निकलना है, मैंने बेड पर बैठते हुए कहा।
ऑफिस जाना जरूरी है क्या, सोनल ने बैठते हुए कहा।
मैंने उसकी तरफ देखा तो उसके चेहरे पर थोड़ी सी उदासी थी।
क्या हुआ, मैंने परोंठे का कौर उसके मुंह के आगे करते हुए कहा।
मैंने अभी ब्रुश-----उउउउउउउउ, अभी उसने अपनी बात पूरी भी नहीं की थी, मैंने उसके मुंह खोलते ही परांठा उसके मुंह में घुसा दिया।
मैं आज पूरा दिन तुम्हारे साथ रहना चाहती हूं, फिर मम्मी और दीदी आ जायेंगी तो इतना मौका नहीं मिलेगा, उसने मुंह का कौर खत्म करते हुए कहा।
मैंने अपना मोबाइल उठाया और बॉस को फोन करके तबीयत खराब होने की कह दी। बॉस ने डॉक्टर से दिखाने के कहकर आराम करने को कहा।
थैंक्स, सोनल ने मुझे अपने हाथ से परांठा खिलाते हुए कहा।
थैंक्स तो मुझे तुम्हारा कहना चाहिए यारा, अगर तुम नहीं होती तो पता नहीं मैं कब तक ऐसे ही बेवकूफों की तरह आंसु बहाता रहता।
मेरी समझ में नहीं आ रहा है कि अचानक तुम्हारी उदासी कैसे दूर हो गई, मेरा मतलब मैं बहुत खुश हूं तुम्हें इस तरह उदासी रहित देखकर, परन्तु मेरी समझ में नहीं आ रहा कि ऐसा क्या हुआ जो तुम-------।
हम्ममम, अंकल की बात सुनकर मेरा दिमाग काम करना बंद कर गया था, मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था ऐसा कैसे हो सकता है, वो मेरे साथ ऐसा कैसे कर सकते हैं, गम मुझे इस बात से आगे कुछ सोचने ही नहीं दे रहा था, जबकि एक्चुअली ये गम होना ही नहीं चाहिए था, थोड़ा बहुत हो सकता था, परन्तु इतना नहीं होना चाहिए था। अपूर्वा ने थोड़े ही मना किया है, वो तो अंकल ने ही मना किया है। मुझे पूरा विश्वास है कि अपूर्वा कभी भी मुझे धोखा नहीं दे सकती, वो मुझे बहुत प्यार करती है। और ये बात मेरी समझ में अभी अभी आई है, थैंक्स सोनल, अगर तुम नहीं होती तो शायद ये बात मेरी समझ में नहीं आती, कहकर मैं मुस्करा दिया।
थैंक्स गोड, तुम खुश तो हुए, मेरी तो कल से जान निकली जा रही थी, मैं तुम्हें सहारा तो दे रही थी, परन्तु तुम्हें दुखी देखकर मैं तुमसे ज्यादा दुखी हो गई थी। मैं तुम्हें दुखी नहीं देख सकती, कहते हुए सोनल की आंखों में आंसु आ गये और वो मेरे गले लग गई।
मेरा प्यारा बेबी, जब मेरा सोहना बाबु मेरे पास है तो मैं ज्यादा देर दुखी कैसे रह सकता हूं, मैंने उसके गालों की पप्पी लेते हुए कहा।
मैं दही लेकर आता हूं, ऐसे खाने में मजा नहीं आ रहा, कहते हुए मैं उठने लगा।
हम्मम, तब तक मैं भी फ्रेश हो जाती हूं, फिर आराम से खायेंगे, कहते हुए सोनल भी उठ गई।
मैं पैसे लेकर दही लेने चल दिया और सोनल बाथरूम में घुस गई। वापिस आया तो सोनल अभी बाथरूम में ही थी, शॉवर से पानी गिरने की आवाज आ रही थी।
मैं उसका इंतजार करने लगा और बार-बार अपूर्वा को फोन टराई करता रहा। परन्तु रिंग तो जा रही थी, कोई उठा नहीं रहा था।
थोड़ी देर बाद सोनल अपने बाल सुखाते हुए बाहर आई। उसे देखते ही मेरी आंखें खुली की खुली रह गई। आज कई दिनों बाद मैं सोनल को नग्न देख रहा था। मेरे लिंग ने तुरंत हरकत की और अपना दरवाजा खटखटाया।

कपड़ो को क्या हुआ, मैंने सोनल से पूछा।
वो नीचे गिर गये नहाते समय हाथ लगकर, गीले हो गये हैं, सोनल ने ऐसे ही तौलिये से बाल सुखाते हुए कहा।
मैं उठा और अपनी शॉर्ट और शर्ट उसे पहनने के लिए दी। सोनल कुछ देर तक तो मेरे सामने खड़ी मेरे चेहरे की तरफ देखती रही, फिर उसने मुस्कराते हुए मेरे हाथ से कपड़े लेकर पहन लिए।
वैसे तो उसकी उसकी और मेरी फिटिंग एक जैसी ही थी, परन्तु शर्ट उसे बहुत ही टाइट आई और, आगे से उसकी नाभि तक उठ गई। उसके उभार शर्ट के बटन तोड़ने को उतारू लग रहे थे।
उसने अपने सिर पर तौलिया लपेटा और हम नाश्ता करने लगे।
सॉरी यार, कल से खामखां खुद भी परेशान हो रहा था और तुम्हें भी इतना परेशान कर रखा था।
हम्मम, वो तो है, पर अब सारा बदला लूंगी, सोनल ने मुझे परांठा खिलाते हुए कहा।
स्योर, जैसे चाहो, तुम्हारा तो पूरा का पूरा हक है मुझपर, तुम्हारे जैसी दोस्त पाकर तो मैं खुद को बहुत ही भाग्यशाली समझ बैठा हूं, मैंने उसे परांठा खिलाते हुए कहा।
नाश्ता खत्म करके सोनल ने बर्तन रसोई में रखे और फिर हम बेड पर दीवार से कमर लगाकर एक-दूसरे से सटकर बैठ गये।
सोनल ने मेरा हाथ अपने हाथ में ले लिया और सहलाने लगी। ऐसे ही बैठे हुए मैं सोनल के चेहरे को देखता रहा और सोनल मेरे। दोनों मौन थे, बस एक दूसरे को महसूस कर रहे थे।

तभी नीचे की बैल बजी। अब कौन आ सकता है कहते हुए सोनल उठी और बाहर चली गई।
मैं भी उठकर बाहर आ गया और मुंडेर पर से नीचे देखने लगा। मेरे आश्चर्य का ठिकाना ना रहा, नीचे नवरीत खड़ी थी। तब तक सोनल नीचे पहुंच चुकी थी।
सोनल ने दरवाजा खोला और वो दोनों गले लगी। सोनल नवरीत को लेकर उपर आ गई।
वाट ए प्लीजेंस सरप्राइज, मैंने नवरीत के गले मिलते हुए कहा।
नवरीत पागलों की तरह मुझे देखने लगी।
ऐसे क्या देख रही हो, मैंने उसके गाल पर चिकोटी काटते हुए कहा।
आइइइइइई, दर्द होता है, कहते हुए नवरीत अपने गाल को सहलाने लगी।
क्या कोई स्पेशल बात हुई है, जिसका मुझे नहीं पता हो, क्योंकि सुबह तो तुम बहुत उदास थे, नवरीत ने मेरे गालों को दोनों हाथों में भरते हुए कहा।
हम्मममम, मैंने कहा। अंकल के मना करने के बाद मेरे दिमाग ने काम करना बंद कर दिया था, जिससे मैं कुछ सोच नहीं पाया। तुम्हारे घर से आने के बाद मुझे इस बात का ख्याल आया कि अपूर्वा ने तो मना नहीं किया है, और वो मुझसे बहुत प्यार करती है वो मुझे धोखा नहीं दे सकती, बस फिर क्या था, उदासी अपने आप रफूचक्कर हो गई।
मैं दीदी से बात करवाने के लिए ही आई हूं, नवरीत ने कहा।
सच में, मेरे आश्चर्य का ठिकाना ना रहा, कहां तो मैं दो दिन से कुछ सोच समझ नहीं पा रहा था और कहां अब एक साथ सारी प्रॉब्लम अपने आप सॉल्व होती जा रही थी।
हम अंदर आ गये। मैं इतना खुश हुआ था कि मैंने नवरीत को अपनी बाहों में भर लिया और बेतहाशा उसके माथे को चूमने लगा। नवरीत भी मेरी बाहों में सिमटी रही।
अब जल्दी से फोन मिलाओ, मैंने उसे अपनी बाहों की जकड़ने से आजाद करते हुए कहा।
उसके चेहरे के भावों से मुझे ठीक महसूस नहीं हो रहा था। उसने नम्बर डायल किया।
हैल्लो दीदी, लीजिए आप बात कीजिए----- हां मैं उनके रूम पर ही हूं------ कहते हुए नवरीत ने फोन मुझे दे दिया।
हैल्लो अपूर्वा, कैसी हो तुम, मेरी खुशी का ठीकाना नहीं था। मैं बाकी सब कुछ भूल चुका था।
हाय समीर, मुझे माफ कर देना, कहते हुए अपूर्वा की आवाज बीच में ही रूक गई।
क्या बात है अपूर्वा, ऐसा क्यों कह रही हो तुम, उसकी बात और आवाज में रूआंसापन सुनकर मेरा दिल बैठने लगा था।
मैं तुमसे शादी नहीं कर सकती, प्लीज हो सके तो मुझे माफ कर देना, अपूर्वा की बहुत ही धीमी आवाज आई, जैसे उसके होंठों ने शब्दों को बीच में ही पकड़ लिया हो।
ये तुम क्या कह रही हो अपूर्वा, ऐसा कैसे हो सकता है, मैं तुमसे इतना प्यार करता हूं, और,,, और,,, तुम तो मुझसे भी ज्यादा प्यार करती हो मुझसे।
मुझे पता है कि तुम मुझसे बहुत प्यार करते हो, परन्तु सच्चाई तो ये है कि मैं तुमसे प्यार नहीं करती, अपूर्वा की आवाज अबकी बार एकदम स्पष्ट थी।
पर तुमने खुद ही अपने प्यार का इजहार किया था अपूर्वा, तुम--- तुम---- कहते हुए शब्द गले में ही अटक गए।

वो तो बस तुम्हारे मजे लेने के लिए एक नाटक था।
मैं इतना ही सुन पाया, मोबाइल मेरे हाथों से छूट गया और मेरी आंखों के आगे अंधेरा छा गया। मैंने खुद को बहुत ही गहरी खाई में गिरते हुए महसूस किया। उसके बाद क्या हुआ मुझे कुछ मालूम नहीं चला।
जब मुझे होश आया तो मैं मेरे बालाें में किसी का हाथ रखा हुआ महसूस हुआ, थोड़ा थोड़ा होश आने पर पता चला कि मेरा सिर किसी की गोद में है। मैंने आंखें खोलने की कोशिश, परन्तु जैसे ही थोडी सी आंखें खोली, लाइट का तेज चमका लगने के कारण वापिस बंद हो गई। ‘‘वो तो बस तुम्हारे मजे लेने के लिए एक नाटक था’’ होश में आते ही ये शब्द मेरे कानों में गूंजने लगे थे। मेरी आंखों से आंसू बह चले। मैं वैसे ही लेटा रहा और आंसू बहते रहे। अचानक मेरे सिर पर रखा हाथ हिला और मेरे गालों पर छुकर देखने लगा।
समीर, मेरे कानों में एक मधुर सी आवाज पड़ी।
ये तो नवरीत की आवाज थी। मतलब मैं नवरीत की गोद में लेटा हुआ हूं।
हूं, मैंने बस इतना ही कहा।
सोनल, समीर को होश आ गया है, नवरीत ने लगभग चिल्लाते हुए कहा और अपने हाथों से मेरे आंसु पौंछने लगी।
मैंने अपनी आंखों खोलने की कोशिश की और धीरे धीरे रोशनी का अभ्यस्त होते हुए आंखे खोलने में कामयाब हो गया।
तभी बाहर से सोनल ओर उसके साथ एक आदमी और अंदर आते हुए दिखाई दिये। मुझे ऐसा लग रहा था कि वो बहुत दूर से अंदर आ रहे हैं।
ये तो डॉक्टर है, मतलब मैं हॉस्पिटल में हूं, सोचते हुए मैंने इधर उधर सिर घुमा कर देखा, परन्तु ये तो मेरे रूम जैसा ही लग रहा है। मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि मैं कहां पर हूं।
अब घबराने की कोई बात नहीं है, और न ही अब हॉस्पिटल जाने की जरूरत है, डॉक्टर ने सोनल की तरफ देखते हुए कहा।
मैंने थोड़ा धयान देकर देखने की कोशिश की तो पता चला कि मैं अपने ही रूम में था।
थैंक्यू डॉक्टर, जैसे ही मम्मी आती है, मैं आपकी फीस पहुंचा दूंगी, सोनल ने डॉक्टर से कहा।
नो प्रॉब्लम बेटा, जब टाइम मिलें तब पहुंचा देना, कहते हुए डॉक्टर चला गया।
सोनल मेरे पास आकर बैठ गई और मेरे माथे पर हाथ रखकर धीरे धीरे सहलाने लगी।
क्या हुआ था मुझे, मैंने सोनल का हाथ पकडते हुए कहा।
तुम फोन पर बात करते हुए अचानक गिर गये थे, सोनल की आंखों में मुझे नमी दिखाई दी।
हैल्लो दीदी, उनको होश आ गया है, मेरे कानों में नवरीत की आवाज पड़ी।
फिर से अपूर्वा का धयान आते ही मेरे दिल में बहुत ही दर्दनाक टीस उठी और मैं कराह उठा।
क्या हुआ, सोनल एकदम तड़प कर मेरी तरफ झुकी और मेरे गालों पर से आंसु पौंछने लगी।
मैंने अपनी आंखें फिर से बंद कर दी। आंसु लगातार बह रहे थे। नवरीत का हाथ मेरे बालों में सहला रहा था। सोनल मेरे उपर इतनी झुक गई थी कि उसके उभार मेरी छाती पर टिक गये थे। मेरे कानों में बार बार अपूर्वा की कही आखिरी बात गूंज रही थी और दिल में दर्द को बढ़ा रही थी। अब दर्द असहनीय होता जा रहा था।
मैं अब चलती हूं, अपना और समीर का धयान रखना, नवरीत ने उठते हुए कहा। तुरंत ही सोनल ने मेरे सिर को अपनी गोद में रख लिया।
तभी मेरे कानों में पहले से भी भयंकर बम सा फूटा, ‘जल्दी ही दीदी की शादी कहीं और हो जायेगी’, नवरीत ने दरवाजे पर से पिछे देखते हुए कहा और बाहर निकल गई।
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06-09-2018, 01:32 PM,
#63
RE: Antarvasnasex बैंक की कार्यवाही
पता नहीं कितनी ही देर तक ये आवाज मेरे कानों को फोड़ती रही, मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे मेरे दिमाग का पुर्जा पुर्जा हिल रहा हो। अब मुझे इस कमरे में पड़े पड़े घुटन महसूस हो रही थी। मैंने उठने की कोशिश की, सोनल ने सहारा देकर मुझे बैठाया, परन्तु जैसे ही मैं बैठा, मेरे आंखों के आगे फिर से अंधेरा छा गया और मैं वापिस सोनल की बाहों में झूलते हुए उसकी गोद में पहुंच गया।
तुम आराम से लेटे रहो, तुम्हें आराम की जरूरत है, सोनल ने मेरे गालों को सहलाते हुए कहा।
मुझे यहां घुटन हो रही है, मैं बाहर जाना चाहता हूं, मेरे मुंह से बहुत ही धीमी सी आवाज में निकला। मुझे नहीं लग रहा था कि सोनल तक मेरी आवाज पहुंची होगी, क्योंकि मुझे ही ठीक तरह से सुनाई नहीं दिया था कि मैंने क्या कहा है।
परन्तु शायद सोनल ने सुन लिया था। उसने धीरे से सहारा देकर मुझे उठाया और अपनी बाहों में भर लिया। मेरी कमर उसके सीने से चिपक गई। कुछ देर ऐसे ही बैठे रहने से मुझे लगा कि अब चक्कर नहीं आयेंगे तो मैं बेड से नीचे उतरने लगा। सोनल ने आराम से मुझे बेड के किनारे लाकर मेरे पैर नीचे कर दिए और खुद नीचे उतरकर मुझे सहारा देकर उठाया। उठने पर एक बार तो मुझे लगा कि फिर से चक्कर आ जायेगा, परन्तु हल्का सा चक्कर आकर मैं सम्भल गया। मैंने चप्पल पहनी और सोनल का सहारा लेते हुए बाहर आ गया।
बाहर की ठण्डी हवा ने सुकून देने की बजाय मेरे दिल की टीस को और भी बढ़ा दिया। मेरा दिमाग बुरी तरह बज रहा था। ऐसा लग रहा था जैसे कोई सिर पर हथोड़ा मार रहा हो। गली में थोड़ी बहुत चहल पहल थी, मतलब रात के 9 के आस पास का टाइम हो चुका था। मतलब मैं 8 घण्टे बेहोश रहा था।

काश वो समझते इस दिल की तड़प को,
तो यूं हमें रूसवा ना किया होता,
उनकी ये बेरूखी जुल्म भी मंजूर थी हमें,
बस एक बार हमें समझा तो दिया होता,

सोनल ने मुझे कसके अपनी बाहों में भर लिया। मैं उसके सीने पर सिर रखकर फूट फूट कर बच्चों की तरह रोने लगा। जब आंसुओं ने भी मेरा साथ छोड़ दिया तो मैं सोनल से अलग हुआ और पागलों की तरह इधर उधर देखने लगा। मेरी ये हालत देखकर सोनल तड़प उठी।
कुछ देर यूं ही पागलों की तरह इधर उधर देखते रहने के बाद अचानक ही मैं नीचे की तरफ चल दिया। सीढ़ियों से उतरते हुए मेरे पैर लड़खड़ा रहे थे। सोनल जल्दी से मेरे पिछे पिछे आई और मुझे पकड़ लिया। नीचे उतरने के बाद मैं कुछ देर तक नीचे आंगन में इधर से उधर घूमता रहा, और फिर गेट खोलकर बाहर निकल गया। मैं कहां जा रहा हूं, क्या कर रहा हूं, कुछ ख्याल नहीं रहा। पता नहीं कितनी देर तक मैं ऐसे ही बिना किसी मंजिल के भटकता रहा। कई बार मैं लड़खड़ा कर गिरने को हुआ तो ही पता चला कि सोनल मेरे साथ ही है।
जब चल चलकर थक गया तो एक दुकान के सामने की पौड़ी पर बैठ गया। आंखों से आंसु कभी सूख जाते थे और कभी फिर बहने लग जाते थे।
‘वो तो बस तुम्हारे मजे लेने के लिए एक नाटक था’ ‘जल्दी ही दीदी की शादी कहीं और हो जायेगी’ दिमाग में दोनों बातें हथोड़े की तरह लग लगातार लग रही थी।
यहां पर कैसे बैठे हो इतनी रात को, सामने से आवाज आई।
मैंने उधर देखा तो एक पुलिस वाला मेरी तरफ ही चला आ रहा था। मैं पागलों की तरह उसी की तरफ देखने लगा।
पुलिस वाला मेरे पास आकर एकबार तो ठिठका और फिर मेरे पास बैठ गया।
क्या हुआ भाई, इतनी रात को यहां ऐसे अकेले, वो भी इस हालत में, उसने मेरे कंधे पर हाथ रखते हुए कहा।

मत पूछो मेरे दिल का हाल, आपके भी दिल बिखर जायेंगे,
सुनाना नहीं चाहते हम ये दर्द किसी को, ये सुनके तो तन्हाई के भी आंसु निकल जायेंगे,


हम भी बने हैं शायर होके इश्क में नाकाम, हमने भी किया है नाम होके इश्क में बदनाम,
प्यार में उनके हमें दो नियामतें मिली, एक हाथ में कलम है और दूजें में जाम----- कहते हुए उसने मेरे सामने दारू की बोतल कर दी।

मैं थोड़ी देर तो उसकी तरफ देखता रहा, और फिर उसके हाथ से बोतल लेकर अपने होंठों से लगा दी।
अरे भाई, खोल तो लो, बगैर खोले ही खाली करोगे क्या, उसने हंसते हुए कहा और मेरे हाथ से बोतल लेकर उसे खोलकर वापिस मुझे पकड़ा दी।
मैंने होंठों से लगाई, जैसे ही एक घूंट मुंह में गई, मैंने उसे गटका और उसकी तरफ बोतल बढ़ा दी।
मैं तो अभी ड्यूटी पर हूं भाई, घर जाकर पीयूंगा, तुम पीओ, उसने कहा।

मैंने फिर से बोतल होंठों से लगाई और एक ही सांस में कितने घूंट अंदर उतर गये पता नहीं। काफी देर तक मैं वहां उस पुलिस वाले के साथ बैठा रहा। शराब के नशे ने गम को कुछ कम कर दिया था। मैंने उससे अपना दर्द और उसने अपना दर्द मुझसे शेयर किया। वो भी किसी के इश्क में ठोकर खा चुका था, बस फरक इतना था कि उसे अभी भी आशा थी, जबकि मेरी आशा पूरी तरह खत्म हो चुकी थी।
अच्छा भाई अब मैं अपनी ड्यूटी संभालता हूं, कहते हुए वो उठ खडा हुआ और शराब की बोतल को बंद करके वापिस अपनी शर्ट के नीचे छुपा लिया और चौराहे की तरफ बढ़ गया।
मैं भी खड़ा हुआ, परन्तु जैसे ही खड़ा हुआ लड़खड़ा कर वापिस बैठ गया। थोड़ी देर बाद मैं फिर से खड़ा हुआ, और लड़खड़ता हुआ घर की तरफ चल दिया। जब चलते हुए काफी देर हो गई और घर नहीं आया तो रूककर इधर उधर देखा। परन्तु कुछ समझ में नहीं आया कि मैं कहां पर हूं। मैं पागलों की तरह इधर उधर देखता रहा, परन्तु समझ में नहीं आ रहा था कि मैं कहां पहुंच गया हूं।
तभी मुझे एक लडकी अपनी तरफ आती हुई दिखाई दी, मैंने उसे आवाज देकर अपने पास बुलाया।
मैडम जी, मैं अपने घर का रस्ता भूल गया हूं, वो आज पहली बार कुछ ज्यादा ही पी ली, तो पता नहीं चल रहा किधर जाना है, किधर नहीं, क्या आप बता सकती हैं, लड़खड़ाती आवाज में मैंने कहा।
चलिये, उसने मेरा हाथ पकड़ा और मेरे साथ साथ चल पड़ी।
2 मिनट में ही मैं अपने घर पहुंच गया।
आपका बहुत बहुत धन्यवाद, आप नहीं आती तो पता नहीं मैं कब तक भटकता रहता ऐसे ही, मैंने गेट खोलते हुए लड़खड़ाती आवाज में कहा।
जैसे ही मैंने उसकी तरफ देखा, मुझे उसकी आंखों में आंसु दिखाई दिए।
अरे, अरे, आप रो क्यों रही हैं, अच्छा लगता है आपका भी किसी ने मेरी तरह दिल तोड़ा है, मैंने उसके आंसु पौंछते हुए कहा।
रोईये मत, देखिये मैं भी नहीं रो रहा, रोने से कुछ नहीं होने वाला, उसे इन आंसुओ से कुछ फर्क नहीं पड़ेगा, मेरी आवाज बुरी तरह लड़खड़ा रही थी।

मोहब्बत यहां बिकती है, इश्क निलाम होता है, भरोसे का कत्ल यहां खुले आम होता है,
जमाने से ठोकर मिली तो चले हम मैखाने में, और जमाना हमें शराबी का नाम सरे आम देता है,

इसलिए आंसु पौंछिए और जाम छलकाईये, मैं उंची आवाज में कहा।
चलिये आपको उपर तक छोड़ देती हूं, उस लडकी ने अपने आंसु पौंछते हुए कहा और मेरा हाथ पकड़ कर अंदर की तरफ चल दी।
अरे, आप क्यों कष्ट कर रही हैं, मैं चला जाउंगा, आपको अपने घर भी तो जाना होगा।
परन्तु उसने मेरी बात पर धयान नहीं दिया और मेरा हाथ पकड़कर सहारा देते हुए उपर ले आई।
उपर आकरह मैं सीधा रूम में आया और बेड पर गिर गया। तभी किसी ने मेरे पैरों से चप्पत निकाली और मेरे पैरों को उपर करके बेड पर अच्छी तरह लेटा दिया।
सॉरी, वो थोड़ा दूर तक चला गया था घूमने के लिए, देर हो गई, मैंने आंखें बंद करते हुए बड़बड़ाते हुए कहा।
कोई बात नहीं, तुम आ गये हो, अब आराम से सो जाओ, सोनल ने कहा और दरवाजा बंद करके लाइफ ऑफ करके नाइट लैम्प ऑन कर दिया और बेड पर मेरे पास आकर लेट गई। उसने मेरी तरफ करवट करके मेरे सिर को अपने हाथ पर रख दिया और अपने होंठ मेरे गालों से सटा दिये। उसका दूसरा हाथ मेरी छाती को सहला रहा था।

ऐसे ही लेटे लेटे जल्दी ही मैं नींद के आगोश में समा गया।



(जिन दोस्तों को समझ में नहीं आया हो कि वो लड़की कौन थी, जो मुझे घर पर छोड़ गई, तो उनको बताना चाहूंगा कि वो सोनल ही थी, समीर ज्यादा पीने के कारण उसे पहचान नहीं पा रहा था)

दोस्तों अब यहां से एक दर्द भरे सैक्सी सफर की शुरूआत होती है, जो पता नहीं कहां जाकर रूकेगी। बस आपके साथ की उम्मीद है।
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06-09-2018, 01:32 PM,
#64
RE: Antarvasnasex बैंक की कार्यवाही
सुबह आंख खुली तो सिर दर्द के मारे फटा जा रहा था। दिल में भी एक टीस थी। शायद सपना भी कुछ भयानक ही था, सही तरह से याद तो नहीं आ रहा था, परन्तु जिस तरह से आंखे खुलते ही गालों पर आंसु लुढक आये थे, उससे अंदाजा लगाया जा सकता है।

‘‘जल्दी ही दीदी की शादी कहीं और हो जायेगी’’ नींद खुलते ही ये शब्द मेरे कानों में फिर से गूंजने लगे।

मैंने थोड़ा हिलने की कोशिश की तो पाया कि सोनल पूरी तरह से मुझसे चिपकी हुई है। उसका सिर मेरी छाती पर था। उसका एक पैर मेरे पैरों पर था और उसका हाथ मुझे अपनी बांहों में जकड़े हुए था। मेरे पेट पर उसके उभार दबे हुए थे।
मेरे हिलते ही सोनल ने अपना सिर उठाया और मेरी तरफ देखा। उसकी आंखें एकदम लाल थी।
क्या हुआ तुम्हारे आंखे इतनी लाल क्यों हैं? रूंधी हुई आवाज गले से निकली और मेरा हाथ सोनल की आंखों पर पहुंच गया।
नहीं, बस ऐसे ही, सोनल ने मेरे गालों पर लुढक आये आंसु पौंछते हुए कहा।
मैंने डॉक्टर अंकल को फोन कर दिया है, वो बस आते ही होंगे, सोनल ने मेरे गाल पर एक किस करते हुए कहा।
डॉक्टर, वो किसलिए, तुम्हारी तबीयत तो ठीक है, मैंने उसके माथे पर हाथ लगाकर देखते हुए कहा।
मुझे कुछ नहीं हुआ, रात से तुम्हें तेज बुखार है, सोनल ने मेरे सिर पर से कपड़ा उठाते हुए कहा।
मैंने अपने सिर पर हाथ लगाकर देखा तो बहुत ही तेज तप रहा था। सोनल कपड़ा लेकर रसोई में चली गई और उसे गीला करके ले आई। जैसे ही उसने मेरे माथे पर कपड़ा रखा, मेरे शरीर में सिहरन दौड़ गई। बहुत ही ठण्डा था।
बर्फ में भिगोया है क्या, मैंने माथे पर रखे कपड़े को छूकर देखते हुए कहा।
बर्फ तो रात में ही खत्म हो गई, अभी और बनी नही है, बस ठण्डे पानी में ही भिगोया है, सोनल ने मेरा हाथ पकड़कर अपने सिने से सटाते हुए हाथ की उंगलियों पर एक चुम्मी दे दी।
पर मुझे तुम्हारी तबीयत भी ठीक नहीं लग रही, तुम्हारी आंखे कितनी लाल हैं, मैंने करवट बदल कर लेटते हुए दूसरा हाथ सोनल की गोद में रख दिया।
अगर सोनल जैसी दोस्त साथ हो तो आदमी किसी भी दर्द-दुख को बहुत ही आसानी से झेल सकता है, बस यही मेरे साथ हो रहा था, मुझे गम तो था अपूर्वा की बेवफाई से, परन्तु सोनल की आंखें लाल देखकर मैं अपने गम को भूल सा गया था और मुझे उसकी ही चिंता हो रही थी।
वो तो नींद सही से नहीं ले सकी, इसलिए हैं, सोनल ने मेरे गालों पर हाथ फेरते हुए कहा।

मेरी आंखें छलक आई।
तुम कितनी केयर करती हो मेरी, सच अगर तुम ना होती तो पता नहीं क्या होना था, कहते हुए मैंने सोनल को अपनी बांहों में भरकर अपने उपर खिंच लिया। सोनल किसी गुड़िया की तरह मेरी बांहों में खिंचती हुई मेरे उपर आ गई। उसने मेरे चेहरे को अपने हाथों में भर लिया और प्यार से मेरे चेहरे को देखने लगी।
कुछ पल तक मेरे चेहरे को निहारने के बाद उसने हलका सा अपना चेहरा मेरे चेहरे की तरफ बढ़ा दिया। मैंने उसकी आंखों में देखा और अगले ही पल दोनों के लब एक दूसरे में गुम हो गये। सोनल बहुत ही प्यार से मेरे होंठों को चूम रही थी, चूस रही थी।
तभी नीचे की बैल बजी।
शायद डॉक्टर आ गया है, सोनल ने अपने लबों को मेरे लबों की जकड़न से छुड़ाते हुए कहा और फिर मेरे हाेंठों पर छोटी सी किस्सी लेकर नीचे चली गई।
रात को आपने ड्रिंक की थी, डॉक्टर ने मेरे पास बैठकर हाथ देखते हुए कहा।
जिस तरह से कल आप बेहोश हुए थे और आज फीवर है, मुझे नहीं लगता कि ऐसी स्थिति में ड्रिंक आपकी सेहत के लिए अच्छी है। वैसे बेहोशी का कोई खास कारण तो मालूम नहीं हुआ, परन्तु फिर भी ऐतिहात बरतनी चाहिए, डॉक्टर ने इंजेक्शन तैयार करते हुए कहा।
चलिये उलटे लेट जाइये, कहते हुए डॉक्टर खड़ी हो गई।
कुल्हें पर इंजेक्शन लगाते हुए मुझे डर लगता है, प्लीज हाथ पर लगा दीजिये ना, मैंने याचना करते हुए कहा।
जल्दी से उलटे हो जाइये, ये इंजेक्शन हाथ पर नहीं कुल्हे पर ही लगेगा, डॉक्टर ने कहा।
मैं मायूस होकर उलटा हो गया। डॉक्टर ने मेरी शॉर्ट को नीचे किया पर जैसे ही इंजेक्शन लगाने के लिए हाथ हटाया वो वापिस उपर हो गई।

आप इसे पकड़िये, डॉक्टर ने सोनल से कहा।
सोनल ने मेरी शॉर्ट को पकड़ते हुए आधे से ज्यादा कुल्हों से नीचे कर दिया। मैंने जोर से आंखें बंद कर ली।
ईइइइइइइइइइ, सुई महसूस होते ही मेरे मुंह से निकला।
इतने बड़े होकर भी इंजेक्शन से इतना डर, डॉक्टर की हंसी छूट गई।
सही बताउं तो मुझे बस हल्का सा पता चला था कि सुई लगी है, नहीं तो पता ही नहीं चला कि कब इंजेक्शन लगा दिया। वो तो बाद में जब रूई का फाहा रखकर डॉक्टर ने हल्का सा मसला तब पता चला कि इंजेक्शन लग चुका है।
मैं सीधा होने लगा।
अभी एक और लगाना है, मुझे सीधा होते हुए देखकर डॉक्टर ने कहा।
डॉक्टर ने एक इंजेक्शन और लगाया।
अगर कुछ खाया नहीं है तो अभी हल्का फुल्का कुछ खा लिजिए और ये दवाई हैं, कहते हुए डॉक्टर ने सोनल को दवाई समझा दी।
शाम को एकबार फिर से आ जाउंगी, और यदि तबीयत ठीक हो जाये तो मेरे क्लिनिक पर ही आ जाना, कहते हुए डॉक्टर खड़ी हो गई। सोनल डॉक्टर को नीचे तक छोड़कर आई।

अभी भी इंजेक्शन से डर लगता है, सोनल ने मुस्कराते हुए कहा।
मैं दूध लेकर आ रही हूं, कहते हुए सोनल बाहर चली गई।
मैं लेटे हुए सोनल के बारे में ही सोचता रहा। अपूर्वा ने जो गम दिया था सोनल ने उसे बहुत ही कम कर दिया था। अब तो मुझे शक हो रहा था कि मैं अपूर्वा से प्यार करता भी था या नहीं। क्योंकि उसने मुझे धोखा दिया था, उसके बावजूद एक-दो दिन में ही मेरा गम हल्का हो गया था।


‘‘पता है प्यार करके क्या मिला,
अजीब रिश्ता रहा कुछ अपनों से मेरा,
ना नफरत की वजह मिली न मोहब्बत का सिला’’

मैं ऐसे ही छत की तरफ देखते हुए सोच में डूब गया था। पहले तो मैं अपने प्यार को सिर्फ दोस्ती ही समझता रहा और जब पता चला कि मैं उससे कितना प्यार करता हूं, तो वो बेवफाई कर गई। बस इतने ही दिन की थी मेरे प्यार की उम्र। सोचते हुए मेरी आंखों में आंसु आ गये।
दरवाजा खुलने की आवाज ने मेरी सोच का तारतम्य तोड़ा। सोनल दूध ले आई थी। वो सीधी मेरे पास आई और मेरे गालों पर लुढक आये आसुंओ को देखकर बैचेन हो उठी। शायद वो समझ चुकी थी कि अकेले होते ही मैं विचारों में गुम होकर गम में डूब जाता हूं। उसने मेरे गालों पर अपने लब रखे और उन आंसुओं को पी गई। कुछ देर वो मेरे गालों को चूमती रही और फिर मेरे होंठों पर एक किस्सी देकर उठकर रसोई में चली गई।
अजीब कसमकस हो गई थी, सोनल के पास आते ही गम दूर हो जाता था, और सोनल के थोड़ा सा दूर होते ही कम घेर लेता था। मैं समझ ही नहीं पा रहा था कि क्या हो रहा है।
सोनल ने ब्रेड टोस्ट किए और खाने के बाद मैंने दवाई ली। तभी फिर से नीचे की बैल बजी।
अब कौन आ गया, सोनल ने उठते हुए कहा और नीचे चली गई।
हाये, अनन्या ने अंदर आते हुए कहा।

हाये, कैसी हो, मैंने कहा।
हेहेहेहे, बिमार को दूसरे की तबीयत की ज्यादा चिंता रहती है, अनन्या ने हंसते हुए कहा।
उसकी बात सुनकर मेरे चेहरे पर मुस्कराहट आ गई।
मैं तरस गई थी इस चेहरे को मुस्कराता हुआ देखने के लिए, कहते हुए सोनल मेरे पास आकर बैठ गई और मेरे चेहरे को हाथों में भर लिया।
सॉरी, मैं सोनल के गालों पर चिकोटी काटते हुए फिर से मुस्करा दिया। सोनल ने मेरे माथे पर एक चुम्मी ली।
मैं फ्रेश होके आती हूं, तब तक आप दोनों बातें कीजिए, कहते हुए सोनल बाहर चली गई।

अब कैसी है तबीयत, अनन्या ने बेड पर बैठते हुए पूछा।
अभी डॉक्टर इंजेक्शन लगा कर गई है।
ओह माई गोड, तुम्हें तो बहुत तेज फीवर है, अनन्या ने मेरा हाथ चैक करते हुए कहा।
हम्ममम, मैंने बस इतना ही कहा।
इतने तेज फीवर में तुम ऐसे नोर्मल बात कैसे कर रहे हो, अनन्या ने शॉक्ड होते हुए पूछा।
वो तो मुझे भी समझ में नहीं आ रहा, नहीं तो मैं तो थोड़े से फीवर में ही सुध-बुध खो देता हूं।
मुझे विश्वास ही नहीं हो रहा, इतना तेज बुखार होने पर भी तुम नॉर्मल लग रहे हो।
सोनल रातभर ठण्डे पानी की पट्टियां रखती रही सिर पर, शायद उसी का कमाल है, मैंने कहा।
सोनल रात को------- तुम्हारे साथ थी------- तुम्हारे रूम में-------- अनन्या ने आश्चर्य से पूछा।
हां, ज्यादातर इधर ही होती है रात में, मैंने कहा।

मतलब तुम्हारे और उसके बीच में----------?????
अनन्या की बात सुनकर मुझे अपनी गलती का अहसास हुआ, परन्तु अब तीर निकल चुका था। मैंने उसके चेहरे को धयान से देखा। वो थोड़ा सा शॉक्ड लग रही थी, परन्तु उसके चेहरे पर कुछ मुस्कराहट की रेखाएं भी दिख रही थी।
हां, मैंने बस इतना ही कहा।
मैं तो सोच रही थी कि---- कहते हुए अनन्या के चेहरे पर हल्की सी उदासी छा गई।
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06-09-2018, 01:32 PM,
#65
RE: Antarvasnasex बैंक की कार्यवाही
क्या सोच रही थी, मैंने पूछा।

सिर्फ जिस्मानी है, या फिर प्यार----- अनन्या ने कुछ देर सोचने के बाद पूछा।
पहले सिर्फ जिस्मानी था, पर अब हम बहुत अच्छे दोस्त हैं, मैंने कहा।
मतलब कोई चांस नहीं बचा है अब, अनन्या ने उदास होते हुए कहा।
किस बात का चांस, मैं कुछ समझा नहीं, मैंने कन्फयूज होते हुए कहा।

अनन्या ने मेरा हाथ जो उसने पकड़ा हुआ था अपनी जांघों पर रख कर उपर से अपना हाथ रख लिया और हल्के से मेरे हाथ को सहलाने लगी।

बड़े नासमझ हो, अनन्या ने हंसते हुए कहा।
लड़कियों की बातें कभी भी मेरी समझ में नहीं आती, मैंने सिर खुजलाते हुए कहा।
मैं पट्टी को गीली करके लाती हूं, शायद फिर समझ में आ जाये, अनन्या ने मेरे सिर पर रखी पट्टी को हाथ लगाकर देखते हुए कहा और पट्टी लेकर रसोई में चली गई।
फ्रीज में बर्फ रखी है क्या, अनन्या ने रसोई में से ही पूछा।

देख लो, शायद रखी होगी, मैंने कहा।
कुछ देर में अनन्या पट्टी में बर्फ रखकर ले आई और मेेरे सिर पर रख दी। वो बेड पर मुझसे सट कर बैठ गई।
सिर्फ सोनल ही है या कोई और भी------- अनन्या ने पूछा।
मतलब, मैंने कहा।
तुम्हारा चक्कर सिर्फ सोनल से ही है या------।
अब क्या बताउं, जिस्मानी तो कईयों से रह चुका है, पर तुम यही सब क्यों पूछ रही हो।
देख रही हूं, मेरा चांस है या नहीं, अनन्या ने मुस्कराते हुए कहा।
ओह तो इस चांस की बात कर रही थी तुम, मैंने अपने हाथ को हरकत देते हुए उसकी जांघों को दबा दिया।
आहहहह,, अनन्या ने मुंह से एक मादक सिसकारी निकली।
समीर मैं जल रही हूं, मुझे हर रोज सैक्स की आदत पड़ चुकी है, और जब से यहां आई हूं तो एक बार भी नहीं किया है, अनन्या ने कहते हुए अपना हाथ मेरी जांघों पर रख दिया।
तभी सीढ़ियों से उपर आने की आवाज आई। अनन्या थोड़ा दूर होते हुए बैठ गई।
बुखार कुछ कम हुआ क्या, सोनल ने अंदर आते हुए पूछा।
आपने बदली है पट्टी, सोनल ने सिर पर रखी पट्टी को हाथ लगाते हुए अनन्या की तरफ देख कर पूछा।
हां वो सूखी-सूखी सी हो गई थी, अनन्या ने हड़बड़ाते हुए कहा।

थैंक्स, मैं बदलना भूल गई, सोनल ने बैठते हुए कहा।
सोनल के शरीर से मादक महक उठ रही थी, शायद वो नहाकर आई थी। मैंने उसके बालों की तरफ देखा तो वो गीले थे। उसके फ्रेश नहाए शरीर से उठती मादक महक मुझे मदहोश कर रही थी। सोनल मोबाइल उठाने के लिए, जो कि मेरे दूसरी साइड में रखा था, मेरे उपर झुकी तो उसके बाल मेरे चेहरे पर आ गये। उनसे आती भीनी भीनी खूशबू ने मुझे मदहोश कर दिया। उसका हाथ दूसरी साइड में रखी चद्दर पर पड़ा और चद्दर सिल्क की थी तो चद्दर फिसल गई और साथ में उसका हाथ भी और सोनल मेरे उपर गिर गई। उसके उभार मेरी छाती में दब गये। उसके मुंह से एक आह निकली, पता नहीं मजे की थी या फिर दर्द की, पर मेरे मुंह से जरूर मजे की आह निकली थी। अगर अनन्या ना होती तो शायद कुछ हो जाना था।
सोनल जल्दी से उठी। उसका चेहरा शर्म से लाल हो गया था।
मैं लन्च तैयार कर देती हूं, तब तक आप बात करो, कहते हुए सोनल रसोई में चली गई।
अनन्या ने एक बार रसोई की तरफ देखा और फिर जल्दी से मेरी तरफ झुकते हुए मेरे होंठों को चूमा और उसके हाथ ने मेरी जांघों पर पहुंच कर मेरे लिंग को दबा दिया। मेरे मुंह से एक मादक आह निकली।
जल्दी से ठीक हो जाओ, फिर तुम्हें ऐसे मजे दूंगी कि याद रखोगे, कहते हुए अनन्या ने अपनी एक आंख दबा दी और उठते हुए एक बार फिर से मेरे होंठों को कसकर चूस लिया।
ओके मैं भी चलकर नाश्ता तैयार कर लेती हूं, अनन्या ने खड़ी होते हुए कहा।
अरे, मैं बना रही हूं, यहीं खा लेना, सोनल ने रसोई में से कहा।
नहीं, वो मैं आधी तैयारी करके रखी है, खामखां वो खराब हो जायेगा, अनन्या ने कहा और फिर बाये बोलकर चली गई।
जब तक सोनल ने नाश्ता तैयार किया मैं फ्रेश हो लिया। सोनल ने रोटी सब्जी ही बनाई थी। हमने नाश्ता किया।
सोनल जाकर नीचे का गेट बंद कर आई। उपर आकर उसने रूम के दरवाजे को भी कुंडी लगाकर बंद कर दिया।
आजकल पूनम दिखाई नहीं दे रही, मैंने उससे पूछा।
क्यों, हूजूर का क्या इरादा है, सोनल ने मेरे पास बैठते हुए कहा।
बस ऐसे ही पूछ रहा था, कई दिनों से दिखाई नहीं दी, मैंने कहा।
कहीं गई होगी, सोनल ने कहा और मेरे कंधे पर सिर रखकर मेरी छाती को सहलाने लगी। मैं दीवार के साथ कमर लगाकर बैठा था।
उसके खुले हुए गीले बाल मेरे गालों को छुने लगे। मैंने अपना हाथ उसकी कमर पर रख दिया और हल्के हल्के सहलाने लगा।
मेरा प्याला बाबू, रात भर सोया नहीं, अब सो जा, कहते हुए मैंने उसे अपनी बांहों में कस लिया और नीचे को सरकते हुए लेट गया और सोनल का अपनी छाती पर रख लिया।
सोनल मुझसे चिपक गई। उसका हाथ मेरे पेट पर सहलाने लगा। मेरा हाथ उसके बालों को संवार रहा था तो दूसरा हाथ उसकी कमर को सहला रहा था।
मेरा बुखार उतर सा गया था। बस मुझे हल्का हल्का महसूस हो रहा था। सोनल का हाथ पेट को सहलाते हुए धीरे धीरे नीचे सरक रहा था। उसने मेरी टी-शर्ट को उपर करते हुए मेरे नंगे पेट पर अपना हाथ रख दिया और गुदगुदी करने लगी।

क्या है, सो जाओ आराम से, मैंने उसके हाथ को पकड़ते हुए कहा।
कुछ देर तक उसने हाथ को कोई हरकत नहीं दी। मैंने अपना हाथ फिर से उसके बालों में रख दिया। कुछ देर तक तो उसने कुछ नहीं किया, परन्तु फिर हल्के हल्के अपने हाथ को हरकत दी और मेरे पेट को सहलाने लगी। उसने अपनी एक उंगली मेरी नाभि में डाल दी और बाकी की उंगलियों को घोड़े की तरह चलाते हुए नीचे की तरफ ले जाने लगी। थोड़ा सा नीचे तक ले जाती और फिर उपर ले आती।
अचानक उसने अपना चेहरा उठाकर मेरी तरफ देखा। मैंने आंखों ही आंखों में उसके पूछा कि क्या हुआ। उसने ना में गर्दन हिला दी और फिर अपना सिर वापिस मेरी छाती पर रख लिया और वापिस पेट पर उंगलियों के घोड़े दौड़ाने लगी। उसकी हरकतों से मेरा लिंग हरकत में आने लगा था और धीरे धीरे अपनी पोजीशन ले रहा था।
मैं आंखें बंद करके उसकी हरकतों को महसूस करने लगा। थोड़ी देर बाद उसने अपना हाथ मेरी शॉर्ट से बस हल्का सा उपर रखते हुए वहां पर सहलाने लगी। उसका हाथ बार बार शॉर्ट के किनारों से टच हो रहा था। उसके इस टच में बहुत ज्यादा सेंसेशन था। मेरा लिंग पूरी तरह अपनी पोजीशन ले चुका था और शॉर्ट में एक तम्बू बन गया था।
अचानक उसने अपनी एक उंगली शॉर्ट के किनारों के साथ साथ फिरानी शुरू कर दी और ऐसे ही फिराते हुए धीरे से हल्की सी अंदर की तरफ सरका दी और फिराने लगी। शॉर्ट थोड़ी सी उपर उठ गई थी उसकी उंगली के कारण और उसकी उंगली धीरे धीरे और नीचे जाती जा रही थी। मैं बस आंखें बंद किये महसूस किये जा रहा था। जॉकी ने कुछ देर तक उसकी उंगली को बाहर ही रोके रखा, परन्तु फिर उसने बाधा को भी पार कर लिया और धीरे धीरे अपना हाथ अंदर डालते हुए मेरे लिंग के पास जाकर रूक गई। मेरे शरीर में आनंद की लहरे उठ रही थी। कुछ देर तक उसने वहीं पर अपनी उंगली को फिराया और फिर धीरे धीरे मेरे लिंग पर एक उंगली को फिराने लगी। मेरी हालत खराब होती जा रही थी, मुझसे अब रूकना मुश्किल होता जा रहा था, परन्तु फिर भी मैं खुद को कुछ भी करने से रोके हुए था। मेरा लिंग झटके खा खाकर पागल हो रहा था। बेचारे को हिलने डुलने के लिए खुली जगह नहीं मिल पा रही थी, जिससे वो पगला रहा था।
अचानक सोनल ने एकदम से लिंग को मुट्ठी में भर लिया। कुछ देर वो ऐसे ही पकड़े रही और फिर आहिस्ते आहिस्ते अपने हाथ को हरकत दी और हाथ को आगे पिछे करने लगी।
उसने अपना चेहरा उठाया और उपर करके मेरे होंठों पर अपने तपते होंठ रख दिये। बस मेरे सब्र का बांध टूट गया और मैंने उसकी कमर को पकड़ते हुए उसे उपर की तरफ खींचा और उसकेे सिर के पिछे हाथ लगाते हुए बुरी तरह उसके होंठों को चूसने और काटने लगा। सोनल के हाथ की हरकत मेरे लिंग पर बढ़ गई और वो तेजी से हाथ को चलाने लगी।
अचानक उसने अपना हाथ बाहर निकाला और खड़ी हो गई। खड़ी होते ही उसने अपना टॉप उतार फेंका और फिर अपनी ब्रा को भी खोल कर एक तरफ फेंक दिया और फिर नीचे बैठकर मुझे बैठाया और मेरी टी-शर्ट को भी उतार कर एक तरफ फेंक दिया। वो बस बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी, उसके हर एक एक्ट में बहुत ही ज्यादा उतावलापन था। उसने मेरी शॉर्ट को भी उतार दिया और फिर एकबार तो वो मेरे दोनों तरफ पैर करके मेरी जांघों पर बैठने वाली थी परन्तु फिर पता नहीं क्या सोचकर वो मेरे साइड में लेट गई और मुझे अपनी बांहों में भरकर अपने तपते हुए होंठों से मेरे होंठों को जकड़ लिया। उसकी चुचियां मेरे सीने में दब गई, मेरे शरीर में एक लहर दौड़ गई और मैं अपने लिंग को उसकी योनि पर रगड़ने लगा। वो पागलों की तरह मेरे होंठों को चूसे जा रही थी। मैंने अपना एक हाथ उसके नितम्बों पर रख दिया और जोर जोर से भींचने लगा। अभी कुछ देर पहले ही बुखार से तप रहा मेरा शरीर ठीक होने के बावजूद फिर से प्यार के बुखार में तपने लगा।
वो खुद को कब तक रोकती, आखिरकार वो मेरे उपर आ ही गई और अपनी योनि को मेरे लिंग पर रगड़ती हुई मेरे उपर लेट गई और अपने उरोजों को मेरी छाती में रगड़ते हुए मेरे होंठों को चूसने लगी।
मैं भी अब बर्दाश्त की हद को पार कर चुका था, मैंने उसे पकड़कर नीचे करने की कोशिश की तो वो तुरंत उठ कर बैठ गई और आंखों से ना का ईशारा करते हुए वापिस मेरे होठों पर टूट पड़ी। होंठों को चूसते हुए ही अपना एक हाथ पिछे ले जाकर उसने अपनी पेंटी को नीचे सरका दिया और फिर मेरे जॉकी को भी नीचे सरका दिया। उसकी योनि और मेरे लिंग का मिलन आज कई दिनों बाद हुआ था, पर ऐसा लग रहा था जैसे कई वर्षाेर् के बाद हुआ हो। वो मेरे लिंग पर अपनी योनि को जोर जोर रगड़ने लगी। उसकी योनि से निकलता गर्म गर्म रस मेरी जांघों पर से गहता हुआ नीचे जाने लगा।
अचानक जैसे ही वो योनि को रगड़ते हुए उपर हुई तो कुछ ज्यादा ही उपर हो गई और जब वापिस नीचे जाने लगी तो मेरा लिंग सीधा उसकी योनि में समा गया। वो बहुत तेजी से अपनी योनि को रगड रही थी जिस कारण जब तक उसे पता चलता लिंग पूरा अंदर जा चुका था। लिंग अंदर जाते ही वो उपर को उठी और उसके और मेरे मुंह से एक मादक आह निकली।
सोनल बहुत तेजी से मेरे लिंग पर उछलने लगी। कई दिन से रूके हुए थे, इसलिए हम दोनों बहुत ज्यादा उतेजित हो गये थे। मैंने भी उसकी कमर को पकड़कर नीचे से जोर जोर से धक्के लगाने शुरू कर दिये। बहुत ज्यादा उतेजित होने के कारण ज्यादा देर ना मैदान में नहीं टिक पाये और मेरे लिंग ने अपना प्रेमरस उसके अंदर अर्जित कर दिया। मेरे लिंग से निकलती पिचकारियों को महसूस करते ही सोनल भी जोर से चिखते हुए अपना प्रेमरस बहाने लगी। हम दोनों ने एक दूसरे को बांहों में इस तरह जकड़ लिया जैसे एक दूसरे को बीच में से तोड़ना चाहते हों। जब प्यार का ये ज्वर थमा तो हमारे दोनों के शरीर ढीले पड़ गये और दोनों ही बुरी तरह से हांफ रहे थे। सोनल निढ़ाल होकर मेरे उपर ही लेट गई और मैंने उसे अपनी बांहों में भरकर आंखें बंद कर ली। मेरा लिंग अभी भी उसकी योनि में हल्के हल्के झटके खा रहा था और उसकी योनि ने अभी भी मेरी लिंग को जकड़ रखा था। उसकी योनि मेरे लिंग को एकबार हल्का सा ढीला छोड़ती, फिर तुरंत ही जकड़ लेती, मानों उसे डर हो कहीं ये भाग ना जाये।
ऐसे ही लेटे हुए हम अपनी सांसे नॉर्मल करने की कोशिश करते रहे। मुझे ज्यादा ही थकावट महसूस हो रही थी, इसलिए मुझे नींद आने लगी और जल्दी ही मैं नींद के आगोश में शमा गया।
जब आंख खुली तो सोनल साइड में मुझसे चिपक कर लेटी हुई थी। उसने हमारे उपर एक चद्दर डाल ली थी। उसका सिर मेरे कंधे पर था। मुझे उसकी गर्म सांसे अपने गालों पर महसूस हो रही थी। उसका हाथ मेरे लिंग को पकड़े हुए था जो कि सोनल के मुलायम हाथ को ही बिस्तर बनाकर आराम से सो रहा था।
मुझे बाथरूम लगा था, परन्तु मैं सोनल को उठाना नहीं चाहता था, इसलिए मैं ऐसे ही लेटा रहा और सोनल के उठने का इंतजार करता रहा।
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06-09-2018, 01:32 PM,
#66
RE: Antarvasnasex बैंक की कार्यवाही
सोनल के हाथ में मेरे लिंग ने धीरे धीरे हरकत करनी शुरू कर दी और जल्दी ही निंद्रा से उठकर अपने चारों तरफ का जायजा लेने लगा। जाना पहचाना स्पर्श पाकर एक सलामी दी और फिर मोर्चा संभाल लिया। लिंग के उतेजित हो जाने के कारण सोनल के हाथ की कसावट बढ़ गई थी। मेरे शरीर में एक झुरझुरी सी फैली और शरीर ने एक कंपकंपी ली।
मेरे शरीर में हुई हरकत से सोनल थोड़ी सी हिली और उसका हाथ मेरे लिंग पर और भी कस गया। उसने अपने गालों को मेरी छाती पर रगड़ा और आंखें खोलते हुए गर्दन को उपर की तरफ करके मेरे चेहरे की तरफ देखा। उसकी और मेरी नजरें मिली और होंठों पर एक मुस्कराहट आ गई। सोनल ने चेहरा उपर किया और मेरे होंठों पर एक किस्सी ली और फिर मेरे गाल से अपना गाल रखकर लेट गई। मैं उसकी कमर को सहलाने लगा और वो मेरी छाती में हाथ फिराने लगी। मैंने करवट ली और उसे अपनी बांहों में जकड़ लिया। मेरा लिंग उसकी योनि से छेड़खानी करने लगा जिससे उसकी योनि आंसु बहाने लगी। सोनल ने अपने कुल्हों को थोड़ा सा आगे की तरफ प्रैस किया तो मेरा लिंग फिसलकर उसकी योनि को कुचलता हुआ उपर की तरफ आकर उसके दाने को कुचलता हुआ उसकी योनि की लम्बाई में सैट हो गया। सोनल हल्के हल्के अपनी योनि को मेरे लिंग पर प्रैस करने लगी। इस तरह भी काफी मजा आ रहा था।
अचानक सोनल हल्के से थोड़ा पिछे हुई और जैसे ही मेरा लिंग उसकी योनि द्वार पर पहुंचा वो एकदम से आगे हो गई। मेरा लिंग उसकी योनि को खोलता हुआ अंदर घुस गया। दोनों के मुंह से एक आह निकली और हमारे हाेंठ एक दूसरे से मिल गये। मैंने सोनल की कमर में हाथ डालकर उसे अपनी तरफ खींचकर खुदसे चिपका लिया। उसकी चूचियां मेरी छाती में दब गई। मैंने भी अपनी कमर को हरकत दी और दोनों के कमर के धक्कों से लिंग पूरा अंदर बाहर होने लगा। सोनल ने अपना एक पैर मेरे उपर डालकर मुझे कस लिया और तेज तेज धक्के लगाने लगी। उसकी योनि की पकड़ से मैं भी आवेश में आ चुका था और हमारे धक्को की स्पीड एकाएक बढ़ गई और हम मंजिल की तरफ बढ़ चले। जल्दी ही मैंने अपना सारा रस सोनल के रस में मिला दिया और हम निढाल होकर लेट गये।
एक तो बुखार और उपर से दो दो बार सैक्स, मैं बहुत ही थक और फिर से आंखें बंद होने लगी। मेरा लिंग छोटा सा होकर योनि से निकल आया। सोनल ने मेरे होंठों पर छोटी-छोटी किस्सी की और उठकर बाथरूम में चली गई। मैं आंखें बंद किये लेटा रहा।
उठो, उठठठठो भी अब, कितना सोओगे------------- सोनल की आवाज सुनकर मेरी आंख खुली। आंख खुलते ही सोनल ने मेरे होंठों पर एक किस्सी की।
चलो अब उठो और फ्रेश हो जाओ, खाना लगा रही हूं, कहते हुए सोनल रसोई में चली गई।
मैं बैठकर कुछ देर तो ऐसे ही इधर उधर देखता रहा, फिर उठकर फ्रेश होने के लिए बाथरूम में चला गया। पानी एकदम ठण्डा महसूस हो रहा था। शरीर पर पानी लगाने का मन ही नहीं कर रहा था। पूरा शरीर काफी गर्म था। मैं वापिस बाहर आया और सोनल से गर्म पानी के कहा। मैं नंगा ही था। सोनल ने ब्रा और पेंटी पहन ली थी, बाकी के कपड़े उसने भी नहीं पहने थे। वैसे तो हल्की हल्की सर्दी हो चुकी थी, पर अभी अभी किये सैक्स की वजह से सर्दी शायद उसे भी सर्दी नहीं लग रही थी। मुझे हल्की हल्की सर्दी महसूस हो रही थी। सोनल ने गैस पर पानी रख दिया गर्म होने के लिए। मैं उसके पास गया और उसके पिछे खड़े होते हुए अपने हाथ उसके पेट पर कस दिये। उसके शरीर की गर्मी मिलते ही सारी सर्दी गायब हो गई और मेरा लिंग मोर्चा संभालते हुए उसकी पैंटी के उपर से ही उसके कुल्हों की दरार में घुसने की कोशिश करने लगा। मैंने अपने होंठे सोनल की गर्दन पर रख दिये।
कब तक उसके गम में रहोगे, तुम्हारे चेहरे पर ये उदासी बिल्कुल भी अच्छी नहीं लग रही, अपूर्वा ने अपना चेहरा पिछे करते हुए मेरे होंठों पर एक किस्सी करते हुए कहा।
हम्म्ममम, मुझे बिल्कुल विश्वास नहीं हो रहा कि उसका प्यार सिर्फ एक मजाक था, कहते हुए मेरी आंखों में आंसु आ गये और दिल में एक टीस सी उठी।
मेरी ही गलती थी, जो उसके प्यार को सच्चा समझकर उसे इतना चाहने लगा, काश उस शाम उसने इजहार ना किया होता तो मैं बस उसे दोस्त ही मानता रहता, कम से कम दिल तो नहीं टूटता, कहते हुए मैं सोनल की बाहों में फूट फूट कर रोने लगा।
सोनल ने मुझे कसके अपनी बाहों में भींच लिया। मुझे अपनी कमर पर कुछ गीला गीला महसूस हुआ। मैंने अपने आंसु पौंछते हुए सोनल के चेहरे को सामने किया। उसकी आंखों से आंसु बह रहे थे।
तुम्हें भी कितना परेशान कर रहा हूं मैं, पर क्या करूं भूलने की इतनी कोशिश कर रहा हूं, परन्तु बार बार दिल में टिस उठती है और बस रहा नहीं जाना, अपने आप आंसु बहने लगते हैं--- सोनल के आंसु साफ करते हुए मैंने उसके चेहरे को हाथों में भरकर उसके होंठों को चूम लिया।
नहीं ऐसी बात नहीं है, पर मुझे तुम्हें ऐसे तड़पते हुए नहीं देखा जाता, कहते हुए सोनल ने मेरे सिर को अपनी छाती से चिपका लिया।
कुछ देर तक हम ऐसे ही खड़े रहे। मेरे हाथ सोनल की कमर पर थे और सोनल मेरे बालों को सहला रही थी।
पानी गर्म हो गया, अब नहा लो, फिर खाना भी खाना है, कहते हुए सोनल ने मुझे अलग किया और गैस बंद करके पानी बाल्टी में डालकर बाथरूम की तरफ चल दी।
उसके पिछे पिछे मैं भी बाथरूम में आ गया। सोनल ने मेरा हाथ पकड़कर मुझे नीचे बैठाया और फिर अपनी ब्रा भी उतार दी और मेरे साथ ही बैठ गई।

मैं नहा लूंगा, मैंने उसे देखते हुए कहा।
चुपचाप बैठे रहो, मैं नहला रही हूं ना, सोनल ने आंखें निकालते हुए कहा और बाल्टी से पानी लेकर मेरे सिर पर डालने लगी।
आहहह, इसमें ठंडा तो मिला लो, मैंने कहा।
ये ठंडा ही तो है, सोनल ने गर्म पानी की बाल्टी में हाथ डालते हुए कहा।
नहीं इसमें ठण्डा मिला लो, बहुत गर्म लग रहा है, मैंने कहा।
सोनल ने ठण्डा पानी मिलाया और फिर बहुत ही प्यार से मुझे नहलाया। नहलाने के बाद हम बाहर आ गये और सोनल ने तौलिये से मेरे बदन को पौंछा और फिर ट्राउजर और टी-शर्ट पहना दी।

सोनल बिल्कुल एक छोटे बच्चे की तरह मुझे ट्रीट कर रही थी। उसके सामने मैं खुद को छोटा बच्चा ही समझने लगा था। मुझे सोनल पर बहुत प्यार आ रहा था। वो मेरा कितना ख्याल रख्ाती है।
ये सब सोचकर मेरी आंखें नम हो गई परन्तु सोनल के देखने से पहले ही मैंने आंसु पौंछ दिये।
मैं खाना लगाती हूं, यहां आराम से बैठो, कहकर सोनल रसोई में चली गई और कुछ देर बाद एक थाली में खाना लेकर आ गई।
बेड पर बैठकर उसने अपने हाथ से मुझे खिलाना शुरू कर दिया। मैंने भी उसे अपने हाथ से खाना खिलाया।

शाम के 5 बज चुके थे, सोनल मेरे सिर को अपनी गोद में रखकर मेरे बालों से खेल रही थी, तभी नीचे की बैल बजी। सोनल उठकर नीचे चली गई। मैं भी चेयर लेकर बाहर आ गया और मुंडेर के पास चेयर डालकर बैठ गया।
कुछ देर बाद अनन्या और सोनल उपर आई।
हाये, अब तबीयत कैसी है, अनन्या ने पास आते हुए कहा।
ठीक ही लग रही है, मैंने कहते हुए हाथ को उसकी तरफ बढ़ा दिया। जो उसकी जांघों से जाकर टकरा गया। अनन्या ने एक बार सोनल की तरफ देखा, वो अंदर चली गई थी। अनन्या ने तुरंत ही मेरा हाथ पकड़ कर अपनी योनि से रगड़ते हुए उपर की तरफ किया और मेरी नब्ज देखने लगी। सोनल अंदर से चेयर ले आई और दोनों बैठ गई।
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06-09-2018, 01:33 PM,
#67
RE: Antarvasnasex बैंक की कार्यवाही
कुछ देर तक सोनल और अनन्या बातें करती रही। कुछ गम और कुछ बुखार, मुझे बोलने का मन ही नहीं हो रहा था, इसलिए चुपचाप बैठा रहा। सोनल और अनन्या अपनी बातों में मग्न थी। अचानक मेरी छींक से उनकी बातों का सिलसिला खत्म हुआ। सोनल मुझे अंदर ले आई। अंदर आकर मैं बेड पर लेट गया और सोनल और अनन्या मेरे पास ही बेड पर बैठ गई। सोनल ने मेरे माथे पर हाथ रखकर देखा और फिर चद्दर ओढा दी। उसने मोबाइल उठाया और डॉक्टर से बात की। डॉक्टर ने उधर ही आने के लिए बोला। हम सभी नीचे आ गये और सोनल ने अपनी स्कूटी निकाली। अनन्या अपने घर चली गई। कुछ ही देर में हम डॉक्टर के क्लिनिक पर थे। ज्यादा दूर नहीं था, पास में ही था।
डॉक्टर ने चैकअप किया और आराम करने की सलाह दी। डॉक्टर से चैक करवाकर हम वापिस आ गये। अनन्या नीचे गली में ही खड़ी थी। उसने मेरी तबीयत के बारे में पूछा, डॉक्टर ने क्या कहा। तो सोनल ने उसे बता दिया कि अब ठीक ही है, बस आराम की जरूरत है। हमारे साथ अनन्या भी उपर आ गई।
मैं सब्जी ले आती हूं, फिर खाना भी बनाना है, कहते हुए सोनल अनन्या को वहीं रूकने का बोलकर वापिस चली गई।
सोनल के जाते ही अनन्या मेरे पास होकर बैठ गई और मेरा हाथ अपने हाथ में लेकर अपनी जांघों पर रखकर धीरे धीरे सहलाने लगी।
अब कैसा महसूस हो रहा है, अनन्या ने मेरे हाथ को सहलाते हुए कहा।
हम्मम, आराम है, मैंने कहा। परन्तु वास्तव में मुझे कुछ थकावट महसूस हो रही थी और तबीयत भी कुछ सही नहीं लग रही थी।
अनन्या एकदम से उठकर बाहर गई और कुछ देर बाद वापिस आई।

क्या हुआ, मैंने पूछा।
सोनल को देखने गई थी, वो चली गई है या नहीं, कहते हुए अनन्या मेरे पास बैठी और बैठते ही अपना हाथ मेरी शॉर्ट के उपर से ही लिंग पर रख दिया और हल्के हल्के सहलाने लगी।
शैतान एकदम तैयार है, अनन्या ने मुस्कराते हुए मेरी जांघों की तरफ देखते हुए कहा।
मैंने उसका हाथ पकड़ा और उसे खींच कर अपने उपर गिरा दिया। गिरते ही उसके उभार मेरी छाती में दब गये। वो थोड़ा एडजस्ट होते हुए मेरे बगल में मुझसे चिपक कर लेट गई और मेरे गालों पर किस करने लगी।
मैंने अपना चेहरा उसकी तरफ किया और उसके होंठ मेरे होंठों से टकरा गये। उसने मेरे होंठों पर एक किस्सी दी और फिर चेहरा पिछे करके मेरे चेहरे की तरफ देखने लगी। अनन्या ने एक पैर मेरी जांघों पर रख दिया और हाथ को मेरी छाती में फिराने लगी। वो मेरे होंठों पर छोटी छोटी किस्सी कर रही थी। मुझे भी इन छोटी छोटी किस्सी में बहुत मजा आ रहा था।
मैंने उसके पैर को हटाया और उसे चद्दर के अंदर कर लिया और फिर उसकी तरफ करवट लेकर लेट गया और उसे खिंचकर खुद से सटा लिया। उसके उभार मेरी छाती में थोड़े से दब गये। उसके एकदम कड़े निप्पल छाती में चुभ रहे थे। मेरे अपना पैर उसके पैरों पर डाल दिया और हाथ से उसके कुल्हों को मसलने लगा। हमारे होंठ एक दूसरे में समा चुके थे और छोटी छोटी किस्सी, एक लम्बे चुम्बन में बदल चुकी थी। वो धीरे धीरे अपनी योनि को मेरे लिंग पर रगड रही थी।
अचानक वो उठकर बैठ गई। सोनल आने वाली होगी, उसने हांफते हुए कहा और मेरी चद्दर को थोडा साइड में कर दिया। ‘जब तक वो आये तब तक देख तो सकती ही हूं’, कहते हुए उसने मेरी शॉर्ट को अपनी उंगलियों से नीचे सरकाना शुरू कर दिया। अचानक वो उठ कर मेरे पैरों के बीच में आई और पिछे सरक कर इस तरह लेट गई कि उसका मुंह मेरी जांघों के पास था। उसने शॉर्ट को थोड़ा सा नीचे किया और नंगे हो चुके पेट पर अपने होंठ टिका दिये और चाटने लगी। वो शॉर्ट को थोड़ा सा नीचे करती और फिर नई नंगी हुई जगह पर जीभ फिराने लगती। मजे के मारे मेरी आंखें बंद हो रही थ।
उसके उभार मेरी जांघों पर दबे हुए थे। धीरे धीरे उसने शॉर्ट को जांघों से नीचे कर दिया और लिंग झटका खाकर बाहर आ गया। उसने चेहरा थोड़ा उपर किया और शॉर्ट को छोउ़कर लिंग को पकड़ लिया और गौर से देखने लगी। उसका हाथ लगते ही पूरे शरीर में एक झुरझुरी सी छौड़ गई और लिंग ने एक झटका खाकर उसे सलामी दी।
हेहेहे,,,, कैसे झूम रहा है मेरे हाथों में आकर, कहते हुए अनन्या ने लिंग पर एक हल्की सी किस्स की।
मेरे तो पूरे शरीर में करण्ट दौड़ गया और कंपकंपी सी उठी। तभी नीचे का दरवाजा खुलने की आवाज आई। उसने जल्दी से मेरी शॉर्ट उपर की और चद्दर ओढ़ा दी और खुद थोड़ा साइड में होकर बैठ गई और अपने बालों को ठीक करने लगी। कुछ देर में सोनल उपर आई और सब्जी रसोई में रख दी।
ओके मैं चलती हूं, मैं भी कुछ बना लेती हूं, कहते हुए अनन्या उठ गई।
इधर ही बना लेते हैं ना, अब अकेली के लिए ही तो बनाओगी, खामखां परेशान होगी, इधर ही बना लेते हैं, सोनल ने रसोई से आते हुए कहा।
अब रोज ही बनाना है, तो परेशान तो होना ही पड़ेगा, एकदिन इधर बना लिया, बाकी दिन तो उधर बनाना ही है, अनन्या ने सोनल की तरफ देखते हुए कहा।
तो मैं कौनसा रोज रोज इधर ही खाने के लिए कह रही हूं, वैसे आईडिया बुरा भी नहीं है, मैं तो दिवाली के बाद चली जाउंगी, तो फिर समीर को भी फायदा हो जायेगा, तुम्हारे रोज ही इधर बनाने से, सोनल ने बैठते हुए कहा।
अनन्या कुछ सोचती रही और फिर बोली, ‘ओके, चलो बनाते हैं’।
तभी सोनल का मोबाइल बजने लगा। उसने कॉल रिसीव की और बात करके फोन काट दिया। मॉम थी, कह रही थी कि आज नहीं आ पाई, कल सुबह आयेगी, कहते हुए सोनल उठी और वो दोनों रसोई में चली गई।
रसोई में उनके बातें करने और हंसने की आवाजें आ रही थी। मैं चद्दर से मुंह ढककर लेट गया और आंखें बंद कर ली। आंखें बंद करते ही अपूर्वा और नवरीत की कहीं बातें कानों में गुंजने लगी और नवरीत का वो मायूस सा चेहरा, जब वो जाते वक्त कह रही थी कि ‘दीदी की शादी कहीं और होने वाली है’ आंखों के सामने घूमने लगा। सोचते सोचते कब अपूर्वा के संग बिताये लम्हों में पहुंच गया पता ही नहीं चला।
विचारों की ये श्रृंखला तब टूटी जब मुझे अपने उपर कोई हलचल महसूस हुई। फिर भी विचारों से बाहर आते आते कुछ समय लग ही गया। और जब मैं पूरी तरह वर्तमान में आ गया तो गालों पर गीलापन महसूस हुआ। मैंने आंसु पौंछे और चद्दर हटाकर देखना चाहा तो सोनल मेरे पास ही मेरी तरफ करवट करके लेटी थी और उसका हाथ मेरी छाती पर था। मैंने धयान दिया तो पाया कि अब चद्दर के अलावा मेरे उपर बलेंकेट भी था। मैंने सोनल की तरफ देखा, उसकी आंखें बंद थी, परन्तु उसका हाथ मेरी छाती पर सहला रहा था। मैं जैसे ही थोड़ा सा हिला सोनल ने अपनी आंखें खोल दी।
उठ गये, सोनल ने कहा और अगले ही पल वो एकदम से बैठ गई। उसके चेहरे के भावों से वो एकदम बैचेन दिख रही थी।

क्या हुआ, मैंने बैठते हुए कहा।
उसने एक बार मेरे गालों पर हाथ लगाकर देखा, जैसे कि कुछ चैक कर रही हो और फिर तकिये की तरफ देखा। मैंने भी उसकी नजरों को पिछा करते हुए देखा तो तकिया काफी भीगा हुआ था।
ओह तेरे की, इतने सारे आंसु निकल गये, पता ही नहीं चला, मैंने मन ही मन सोचा और मेरे माथे पर कुछ बैचेनी की सिलवटें आ गई। मैं नहीं चाहता था कि सोनल को मेरे आंसुओं का पता चले, पर अब क्या किया जा सकता था। वो सब समझ चुकी थी। उसने मुझे बाहों में भर लिया और सीने से लगाकर सिर को सहलाने लगी। उसकी बाहों में जाते ही मैं खुद को संभाल नहीं पाया और खूब रोकने की कोशिश के बावजूद आंखों से आंसु और गले से सुबकियां निकलने लगी। सोनल को मेरी सुबकियां और आंसुओं को महसूस करते देर नहीं लगी और उसने मुझे और जोर से बाहों में जकड़ लिया। मैं उसकी बाहों में पिघलता गया और वो मुझे अपने में समेटती गई। उसका इतना प्यार मुझे संभाल भी रहा था, हिम्मत भी दे रहा था, और साथ ही साथ में बिखेर भी रहा था।
सोनल को दोस्त के रूप में पाकर मैं खुद को बहुत भाग्यशाली भी समझ रहा था, परन्तु मेरे कारण उसे कितनी तकलीफ हो रही थी, मैं उसे भी नहीं सह पा रहा था, मैं बहुत कोशिश कर रहा था कि खुद को इस गम से निकाल लूं, परन्तु जितना मैं इससे निकलने की कोशिश करता उतना ही उसमें डूबता जा रहा था।
कितनी ही देर तक मैं ऐसे ही उसकी बाहों में पिघलता रहा, और जब सोनल की बाहों ने, उसके अथाह प्यार ने मुझे वापिस से खुद को समेटने की ताकत दी तो मैं अपने आंसु पौंछता हुआ उससे अलग होने लगा। सोनल ने अपनी बांहों का कसाव कम किया और मुझे उससे आजाद करते हुए मेरे चेहरे की तरफ देखने लगी। जब मेरी नजर सोनल के कपड़ो पर गई तो वो मेरे आंसुओं में भीग कर पारदर्शी हो चुके थे।
सॉरी, मैंने आराम से बैठते हुए कहा। परन्तु जैसे ही मैं सीधा होकर बैठने लगा मुझे अपनी कमर में बेहद असहनीय दर्द महसूस हुआ और मेरे मुंह से दर्दभरी आह निकल गई। ये मेरे साथ अक्सर होता था, जब भी मैं अपनी मॉम की बाहों में टूटता था, तो उसके बाद एक-दो दिन तक असहनीय दर्द रहता था, नॉर्मल पेनकिलर भी कुछ खास असर नहीं कर पाती थी।
मेरी आह सुनते ही सोनल एकदम से बैचेन हो गई। ‘क्या हुआ’, उसने मुझे पकड़ते हुए कहा।
कमर में दर्द, मैंने कहा और धीरे से दीवार के साथ सटकर बैठ गया।
सोनल तुरंत उठी और पेन किलर लाकर दी। मैंने पेन किलर ली और कुछ देर ऐसे ही बैठे रहने के बाद भी जब दर्द में आराम नहीं हुआ तो मैं लेटने की कोशिश करने लगा। सोनल ने सहारा देकर मुझे लिटाया। लेटते के कुछ देर बार राहत महसूस हुई। सोनल मेरे पास ही बैठी रही और मेरा हाथ अपनी गोद में लेकर सहलाती रही।
कल मम्मी आ जायेगी, और दीदी भी आ जायेगी, सोनल ने मेरी तरफ देखते हुए कहा।
मुझे लगता है कि मुझे घर जाना चाहिए, अपनों से मिलूंगा तो शायद कुछ राहत मिले, मैंने आंखें बंद करते हुए कहा।

मैं क्या तुम्हें अपनी नहीं लगती----
उसकी बात सुनते ही मैंने वापिस आंखें खोल दी, उसकी आंखें नम हो गई थी। मैं एक झटके से उठा। दर्द के बारे में मैं भूल गया था, जैसे ही मैं उठा तो एकदम से भयानक दर्द हुआ और मैं आधा ही उठ पाया। सोनल ने मुझे पकड़कर वापिस लेटा दिया।
अगर तुम नहीं होती तो पता नहीं अब तक क्या हो चुका होता, और तुम कहती हो कि अपनी नहीं लगती, मैंने उसके गालों पर लुढक आये एक आंसु को अपने हाथों से पौंछते हुए कहा।
सोनल, तुम मेरे लिए अपनों से भी ज्यादा हो। तुम मुझे अपनी नहीं लगती, इस बात को अपने मन से ही निकाल दो, तुम तो मेरी जान बन चुकी हो। मैंने उसके होंठों पर उंगली फिराते हुए कहा। उसने मेरी उंगली को अपने होंठों के बीच दबा लिया।
मैं तो बस इसलिए कह रहा था कि कल आंटी और रीत आ जायेगी, फिर तुम मेरे पास इतना नहीं रह पाओगी, और अकेले होते ही मुझे ये गम खाने को दौड़ता है, इस इसीलिए कह रहा था, कहते हुए मैंने अपने अंगूठे से उसके होंठों को रब करने लगा।
तो क्या हुआ, मम्मी और दीदी को मैं आप संभाल लूंगी, मैं बिल्कुल भी अकेला नहीं होने दूंगी तुमको, सोनल ने कहा और मेरा हाथ अपने गाल पर रखकर हाथ को अपने गाल और कंधे के बीच दबा लिया।
तुम औंधे होकर लेट जाओ, मैं तेल की मालिश कर देती हूं, दर्द जल्दी ठीक हो जायेगा, सोनल ने कहा और मुझे उलटा लिटाने के लिए अपना हाथ मेरी कमर में डाल दिया।
मैं धीरे धीरे करके उलटा लेट गया। सोनल उठकर बाहर चली गई और कुछ देर बाद एक कटोरी हाथ में लिए वापिस आई। बेड पर बैठकर उसने मेरी टी-शर्ट को उपर कर दिया और मालिश करने लगी। गर्म तेल कमर पर पड़ते ही शरीर में एक झुरझुरी सी दौड़ गई। कुछ देर की मालिश से ही काफी राहत महसूस हुई। मालिश के बाद काफी देर तक मैं ऐसे ही लेटा रहा।
फिर सोनल ने खाना लगाया और मैं दीवार के साथ बैठ गया। सोनल ने अपने हाथ से ही मुझे खाना खिलाया। खाना खाकर कुछ देर हम बाहर टहले और फिर वापिस अंदर आकर बेड पर बैठ गये। सोनल ने लैप्पी में मूवी लगा दी और हम दीवार के साथ बैठ गये। सोनल ने मेरे कंधे पर अपना सिर रख दिया और मैंने उसके सिर पर। उसने मेरी बाजू को पकड़कर अपने सीने से चिपका लिया और हम मूवी देखने लगे।
हॉलीवुड की थ्रीलर मूवी थी, शुरूआत के ही हॉट सीन्स ने हमें गर्म कर दिया और सोनल का हाथ मेरी जांघों पर पहुंच गया। उसने हाथ अंदर डाल दिया और मेरे लिंग को पकड़कर धीरे धीरे सहलाने लगी। मैं भी अपनी कोहनी से उसके उभारों को दबाने लगा। तभी एक ऐसा सीन आया कि एक आदमी ने एक औरत को बीच में से काट दिया। ये मूवी वैसे तो मेरे लैप्पी में काफी समय से पड़ी थी पर मैंने भी कभी देखी नहीं थी। सोनल एकदम से डर गई और मुझसे चिपक गई। उसका हाथ भी बाहर आ गया था। पूरी मूवी ही बेहद डरावनी थी और सोनल मुझसे चिपकी रही। मूवी खत्म होने पर मैंने महसूस किया कि सोनल की सांसे काफी तेज चल रही थी। थोड़ी देर हम ऐसे ही बैठे रहे। नींद ने हमें घेरना शुरू कर दिया था। ग्यारह बजने को हो गये थे। सोनल ने उठकर लैप्पी को टेबल पर रख दिया। मेरी कमर का दर्द भी काफी हद तक कम हो गया था। परन्तु अभी एक-दो दिन तो इसे और झेलना था।
सोनल ने बेड पर आने से पहले अपने सारे कपड़े उतार दिये, ब्रा तो उसने पहनी ही नहीं थी, पेंटी को भी उसने उतार दिया और फिर मेरे पास आकर उसने मेरे भी सारे कपड़े उतार दिये। उसे नग्न देखकर मेरा लिंग अपनी औकात में आ चुका था। उसने मेरे लिंग पर एक किस्सी दी और हम एक दूसरे की बाहों में समा कर लेट गये। कंबल में जल्दी ही गर्मी महसूस होने लगी। हम दोनों एक दूसरे की तरफ करवट लेटकर लेटे हुए थे। मेरा लिंग उसकी योनि पर सटा हुआ था और हमारे बाहें एक दूसरे को जकड़े हुई थी। अचानक सोनल ने अपना हाथ नीचे किया और मेरे लिंग को योनि के द्वार पर सैट करके हल्का सा आगे की तरफ सरक गई। मैंने भी अपने कुल्हों को हल्का सा आगे किया, परन्तु दर्द के कारण ज्यादा हिलडुल नहीं पा रहा था। सोनल मेरी स्थिति को समझ रही थी, उसने मेरे कुल्हों पर अपना एक हाथ रखा और अपने कुल्हों को हरकत देते हुए लिंग को अपनी योनि में समाने लगी। उसके सख्त मखमली उभारों की मेरी छाती में रगड़ मुझे पल-बा-पल और ज्यादा उतेजित करती जा रही थी और कब मैं भी अपनी कमर को हरकत देने लगा पता ही नहीं चला। जब चरम पर पहुंच कर हम शांत हुए तो कमर के दर्द के कारण में एक पल भी करवट लेकर नहीं लेट सका और सीधा होकर लेट गया। सीधे होते हुए लिंग सोनल की योनि से बाहर आ गया और उसकी योनि से हमारा मिला-जुला रस निकल कर उसकी जांघों से होता हुआ मेरी जांघों पर आने लगा। सोनल ने अपना एक हाथ मेरी छाती पर रखा और अपना एक पैर मेरे पैरों पर रखते हुए मुझसे चिपक गई। मैंने अपना हाथ उसके सिर के पिछे से दूसरी साइड करके उसकी कमर में रख दिया। उसके उभार साइड से मेरी छाती में दब गये थे। ऐसे ही लेटे लेटे हम सपनों की दुनिया में गुम हो गये। जब आंख खुली तो अलार्म की कर्कश आवाज कानों को फोड़ने लगी। मैंने हाथ बढ़ाकर अलार्म को बंद किया और सोनल की तरफ देखा। वो सोती हुई इतनी मासूम लग रही थी कि उसे उठाने का मन ही नहीं कर रहा था। मैं ऐसे ही लेटे लेटे उसके उठने का इंतजार करने लगा। इंतजार करते करते कब मेरी भी आंख लग गई पता ही नहीं चला।
वो तो नीचे से आ रही आंटी की आवाजों से उसकी आंख खुली। जैसे ही वो उठने लगी तो मेरी भी आंख खुल गई।
मम्मी आ गई, सोनल ने हड़बड़ी में उठते हुए कहा और भागकर बाथरूम में घुस गई। बाथरूम से फ्रेश होकर वो बाहर आई और अपने कपड़े पहने और मेरे होंठों पर एक लम्बी किस्स करते हुए जल्दी ही आने के लिए कहकर नीचे चली गई। मैंने टाइम देखा तो 6 बज चुके थे।
आज सोनल ज्यादा उपर तो नहीं आ पायेगी, इसलिए मैंने भी ऑफिस चलने की सोची। कुछ देर मैं लेटा रहा। कुछ देर और कुछ देर और करते करते 7 बज गये। 7 बजे में हिम्मत करके में उठा और उठकर ऑफिस के लिए तैयार होने लगा। कमर का दर्द हल्का हल्का महसूस हो रहा था। 8 बजे तक तैयार होकर मैं बाहर आ गया और चेयर पर बैठ गया। अकेला पड़ते ही अपूर्वा की याद में आंखों में नमी आ जाती थी। मैं बैठा हुआ था कि तभी सोनल उपर आई।
कहां जाने की तैयारी है, इतनी जल्दी सज-धज कर बैठे हो, सोनल ने कहा और साथ लाई थाली लेकर अंदर चली गई। उसके पिछे पिछे मैं भी अंदर आ गया।
सोनल नाश्ता लेकर आई थी। हमने साथ में नाश्ता किया। नाश्ता करते हुए मैंने सोनल को ऑफिस जाने के बारे में बताया। एक बार तो वो नाराज हुई पर मेरे मनाने पर उसने हाफ डे करने के लिए कह दिया। उसकी प्रीत (सोनल की बड़ी बहन जिसको सोनल और आंटी प्यार से रीत ही कहते हैं) शाम को आने वाली थी। वो दिल्ली से जयपुर ट्रेन से आयेगी। नाश्ता करके हम नीचे आ गये और मैं ऑफिस के लिए निकल गया।
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06-09-2018, 01:33 PM,
#68
RE: Antarvasnasex बैंक की कार्यवाही
सोनल नाश्ता लेकर आई थी। हमने साथ में नाश्ता किया। नाश्ता करते हुए मैंने सोनल को ऑफिस जाने के बारे में बताया। एक बार तो वो नाराज हुई पर मेरे मनाने पर उसने हाफ डे करने के लिए कह दिया। उसकी प्रीत (सोनल की बड़ी बहन जिसको सोनल और आंटी प्यार से रीत ही कहते हैं) शाम को आने वाली थी। वो दिल्ली से जयपुर ट्रेन से आयेगी। नाश्ता करके हम नीचे आ गये और मैं ऑफिस के लिए निकल गया।

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कमर में दर्द के कारण बाइक सही तरह से ड्राइव नहीं कर पा रहा था, इसलिए धीरे धीरे ही चलाते हुए एक घण्टे में ऑफिस पहुंचा। बाईक पर लगे झटकों से कमर का दर्द बढ गया था, इसलिए जाते ही चेयर पर पसर गया। आज रामया और मनीषा में से कोई एक नहीं आई थी, सुमित काम में बिजी था, इसलिए उसे मेरे आने का अहसास नहीं हुआ।
बॉस अंदर ही हैं क्या, मैंने सुमित से पूछा। मेरी आवाज सुनकर उसने चौंकते हुए मेरी तरफ देखा।
क्या बात है बॉस, कहां गायब थे दो दिन से, सुमित ने मेरे पास आते हुए कहा।
उसकी आवाज सुनकर उस लड़की ने भी मेरी तरफ देखा और देखकर मुस्करा दी।
गुडमॉर्निंग, मैंने उस लड़की से कहा।
गुडमॉर्निंग सर, उसने कहा।
तुम्हारा नाम क्या है, मैंने पूछा।

मनीषा सर, उसने कहा।
ये सर सर क्या लगा रखा है, मैं कोई सर नहीं हूं, तुम्हारी तरह ही काम करता हूं, मैंने कहा।
वो दूसरी नहीं आई, मैंने पूछा।
वो आज उसे कुछ काम था, तो इसलिए वो नहीं आई, मनीषा बात करते हुए मुस्करा रही थी।
बॉस हैं क्या अंदर, मैंने सुमित की तरफ देखते हुए कहा।
नहीं आज बॉस अभी तक आये ही नहीं हैं, सुमित ने कहा।
मैंने जेब से मोबाइल निकाला और बॉस को फोन मिलाया। सुमित ने अपनी चेयर मेरे पास कर ली और बैठ गया।
मैं भी आ जाउं, मनीषा ने सुमित की तरफ देखते हुए कहा और फिर मेरी तरफ देखने लगी।
काम नहीं है क्या, मैंने कहा।
तभी बॉस ने फोन उठा लिया। बॉस ने मेरी तबीयत के बारे में पूछा। मैंने उन्हें बताया और कहा कि ऑफिस आ गया हूं। बॉस ने कहा कि उनको अभी दो-तीन घण्टे लगेंगे ऑफिस आने में, तब तक हम काम करें। फोन कटने के बाद मैं सुमित से बातें करने लगा। मैं अभी बातें कर ही रहा था कि मनीषा हमारे पास आ गई।
हाय, उसने मेरी तरफ हाथ बढ़ाते हुए कहा। उसके चेहरे की मुस्कराहट कातिलाना लग रही थी। जब पहले उसे देखा था तो वो कुछ सांवली लग रही थी, लग तो अभी भी रही थी परन्तु अब रंग साफ दिखाई दे रहा था, उतनी नहीं लग रही थी जितनी पहली बार लगी थी।
हाय, मैंने उससे हाथ मिलाते हुए कहा। उसके हाथ की पकड़ मासाअल्लाह, क्या जबरदस्त थी, एकदम जोशीली।
आज उसने सलवार-सूट पहन रखी थी जिसमें उसका कातिलाना फिगर गजब ढ़ा रहा था। बेशक रंग सांवला था, परन्तु तीखे नयन-नक्ख और कर्वी फिगर उसे गोरे रंग वाली लड़कियों से भी ज्यादा कातिल बना रहा था। शायद उसने भी मुझे उसके जिस्म को ताड़ते हुए महसूस कर लिया था, परन्तु उसने कुछ रियक्ट नहीं किया और नोर्मल ही मुझसे बाते करती रही। मैंने उससे उसके एक्सपीरियंस और पहले की नौकरियों के बारे में पूछा। वो मुझे सीनियर समझ रही थी, इसलिए सभी कुछ एकदम सलीके से बता रही थी।
यार, चाय के लिस बोल दो, मैंने सुमित की तरफ देखते हुए कहा। सुमित ने पियोन को चाय के लिए बोला दिया।
अब कैसी है आपकी तबीयत, मनीषा ने चेयर के सहारे खड़े होते हुए पूछा।
अब तो ठीक है, तुम्हें कैसे पता, मैंने कहा।
बॉस कह रहे थे कि आपकी तबीयत ठीक नहीं है, इसलिए आप नहीं आये, मनीषा ने कहा।

बस बुखार हो गया था हल्का सा, मैंने कहा।
हम तीनों बातें करते रहे। कुछ देर बाद पियोन चाय ले आया। चाय पीते हुए हम बातें करते रहे। चाय पीकर हम अपने अपने काम में लग गये।
लंच टाइम में मैंने चाय के लिए बोला। मनीषा घर से खाना पैक करवाकर लाती थी। उसने जबरदस्ती मुझे भी खाना खिलाया। काफी स्वादिष्ट था। लंच टाइम में हमारे बीच काफी दोस्ती हो गई थी।
शाम को 3 बजे के आसपास बॉस आये। मेरी तबीयत के बोर में पूछ कर वो अपने केबिन में चले गये। तभी मेरे सैल पर सोनल का फोन आया। मैं तो भूल ही गया था कि आज आधे दिन के लिए ही आया हूं। मैंने बॉस को तबीयत डाउन होने का कहा और सबको बाये बोलकर घर के लिए निकल गया। कमर का दर्द लगभग खत्म ही हो गया था। फिर भी धीरे धीरे ड्राइव करके ही गया और घर पहुंचते पहुंचते 4 बज गये।
उपर पहुंचा तो वहां छत पर पूरी मंडली लगी हुई थी। आंटी, सोनल, प्रीत, और नवरीत भी वहीं पर थी। वो सभी धूप में बैठे हुए धूप सेक रहे थे।
मैं उनके पास गया और सबको हाय कहा। प्रीत को देख कर एकबार तो मेरा मुंह खुला का खुला हर गया। परन्तु मैंने तुरंत ही अपने मुंह को बंद किया। प्रीत से मैं पहली बार ही मिल रहा था। सोनल ने प्रीत से मेरा परिचय करवाया। प्रीत ने गले मिलकर मुझसे हाय कहा। उसने बदन से गजब की मादक महक आ रही थी। शायद वो कुछ देर पहले ही नहाई हो और उसने कोई बहुत ही कामुम खूशबू प्रयोग की हो। नवरीत से मुझसे गले मिली। उसने गले मिलते हुए एक बार तो मुझे कसके अपनी बांहों मेंं भर लिया। उसका चेहरा उतरा हुआ था, परन्तु फिर भी वो मुस्कराने की कोशिश कर रही थी। सोनल अंदर से एक चेयर ले आई। मैं बैठ गया। आंटी ने मेरी तबीयत के बारे में पूछा। कुछ देर तक हम बैठे हुए बातें करते रहे। फिर धूप जाने के बाद सभी उठ गये। प्रीत और आंटी नीचे चले गये। सोनल, नवरीत और में अंदर आ गये।
हाये, नवरीत ने अंदर आते ही मुझसे कहा और मेरा हाथ पकड़कर वापिस बाहर ले आई।
क्या हुआ, मैंने पूछा। वो मुझे एक तरफ ले आई और एक बार रूम की तरफ देखा। सोनल दरवाजे पर आकर खड़ी थी।
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06-09-2018, 01:33 PM,
#69
RE: Antarvasnasex बैंक की कार्यवाही
नवरीत कुछ देर तक मेरे चेहरे की तरफ देखती रही और मैं समझने की कोशिश करता रहा कि वो क्या चाहती है, परन्तु कुछ समझ नहीं पाया।
मुझे समझ नहीं आ रहा कि मैं क्या कहूं, कहते हुए नवरीत की आंखें नम हो गई।
हेहेहे, जब समझ ही नहीं आ रहा तो फिर कहने की जरूरत ही क्या है, मैंने हंसते हुए कहा।
नवरीत वैसे ही मेरी आंखों में देखती रही।
देखो मुझे पता है तुम क्या कहना चाहती हो, मैं अब उसे भूलने की कोशिश कर रहा हूं, अच्छा हुआ कि प्यार दो-तीन दिन का था, नहीं तो भूलने में बहुत तकलीफ होती, कहते हुए मेरी आंखें नम हो गई।
मुझे भी समझ नहीं आ रहा कि ऐसी क्या बात हो गई, जो दीदी ने शादी से मना कर दिया, आपके बीच कोई झगड़ा हुआ था क्या, नवरीत ने कहा।
तुम उसकी दीदी हो, तुम्हें पता होना चाहिए।
मैंने दीदी से पूछने की बहुत कोशिश की थी, पर किसी ने कुछ नहीं बताया, कहते हुए नवरीत मेरे कुछ नजदीक हो गई।
उस रात के बाद तो हमारी कोई बात ही नहीं हो पाई, कई बार फोन भी ट्राई किया था, परन्तु किसी ने नहीं उठाया, और जब वापिस आया तो ये सब, कहते कहते आंखों से आंसु टपकने लगे।
नवरीत ने मेरे गालों पर हाथ रख दिये और आंखों से निकलते आंसुओं को पौंछने लगी। आंसु पौंछते पौंछते उसने अपनी एक उंगली मेरे होंठों पर रख दी। वो लगातार मेरे चेहरे की तरफ ही देखे जा रही थी। उसके चेहरे पर उदासी थी, परन्तु उसकी आंखों में कुछ बैचेनी थी, शायद वो कुछ कहने के लिए आई थी, परन्तु कह नहीं पा रही थी।
मुझे लगता है कि तुम कुछ कहना चाहती हो, पर कह नहीं पा रही हो, मैंने अपने गाल पर रखे उसके हाथ पर अपना हाथ रखते हुए कहा।
नहीं कुछ नहीं, नवरीत ने एक हाथ से अपने आंखों से आंसु पौंछते हुए कहा।
अगर कुछ कहना नहीं था तो, फिर यहां अकेले में क्यों लेकर आई।

मेरी समझ नहीं आ रहा है कि कैसे कहूं, नवरीत ने कहा।
अंदर चलो, वहां आराम से बैठ कर बातें करते हैं, मैंने कहा।
हम्मम, नवरीत ने कहा और हम अंदर आ गये। सोनल वहां पर नहीं थी, शायद नीचे चली गई।
अब बोलो क्या बात है, मैंने कहा। हम बेड पर आमने सामने बैठे हुये थे।
तभी बाथरूम का दरवाजा खुला और सोनल बाहर निकली। दीदी का फोन आया है, उनके साथ जा रही हूं, तब तक तुम दोनों बातें करो, कहते हुए सोनल मेरे पास आई और माथे पर हाथ लगाकर चैक किया। अब बुखार नहीं है, पर फिर भी एकबार डॉक्टर के चलेंगे मेरे आने के बाद, सोनल ने कहा।
हम्मम, मैंने कहा। सोनल नीचे चली गई।
बुखार हो गया था, नवरीत ने मेरे हाथ पर अपना हाथ रखते हुए पूछा।
हां, कल बुखार था, आज तो ठीक है, मैंने कहा।
तुम क्या कहना चाह रही थी, अब बताओ।
मुझे पता है, दीदी ने आपके साथ सही नहीं किया, परन्तु क्या हम दोस्त रह सकते हैं, नवरीत ने मेरी आंखों में ही जवाब ढूंढते हुए कहा।
ये लो, ये भी कोई पूछने की बात है, हम पहले भी दोस्त थे, अब भी दोस्त हैं, अब धोखा तुम्हारी दीदी ने दिया है, इसमें तुम्हारी क्या गलती है।
मेरी बात सुनकर नवरीत के चेहरे पर खुशी छा गई। उसने दरवाजे की तरफ देखा और फिर एकदम से अपने घुटनों के बदल उठती हुई मेरे चेहरे को अपने हाथों में पकडा और मेरे होंठों पर अपने गुलाब की पंखुडियों से मुलायम होंठ टिका दिये। मैं शॉक्ड था, मैंने सोचा भी नहीं था कि नवरीत ऐसा करेगी। पिछे गिरने से बचने के लिए मेरे हाथ पिछे की साइड टिक चुके थे। और नवरीत पागलों की तरह मेरे होंठों को चूूम रही थी। मेरी आंखें बंद हो गई। परंतु जैसी ही मेरी आंखें बंद हुई मैंने एक झटके से नवरीत को खुदसे अलग कर दिया। नवरीत ने हैरानी से मेरी तरफ देखती रह गई। मैं समझ नहीं पाया कि ये क्यों हुआ। जैसे ही मेरी आंखें बंद हुई थी अपूर्वा को उदास चेहरा मेरे सामने घूमने लगा था।
क्या हुआ, नवरीत ने मायूस होते हुए पूछा।
कुछ नहीं, हम कुछ ज्यादा ही आगे बढ़ रहे हैं, मैंने कहा।
क्यों, अच्छा नहीं लगा, नवरीत ने हांफते हुए कहा और मेरी आंखों में उतर ढूंढने लगी।
बात सिर्फ दोस्ती की हुई थी, मैंने मुस्कराते हुए कहा।

हेहेहे, मेरी बात सुनकर नवरीत हंसने लगी।
मैंने कुछ गलत कहा, तुमने दोस्ती के लिए ही तो कहा था, मैंने हंसते हुए कहा।
हेहेहे, धीरे-धीरे तुम्हें पता चल जायेगा कि नवरीत से दोस्ती करने का क्या अंजाम होता है, नवरीत ने हंसते हुए कहा।
लगता है तुमसे बचकर रहना पड़ेगा, पता नहीं कितना भयानक अंजाम करने वाली हो, मैंने डरा हुआ चेहरा बनाते हुए कहा।
हेहेहे, बच्चू अब नहीं बच सकते, अब तो मेरे जाल में फंस चुके हो, नवरीत ने खिलखिलाते हुए कहा।
मैं उसके साथ हंस तो रहा था, परन्तु अंदर ही अंदर बैचेनी बढ़ती जा रही थी। पता नहीं क्यों, नवरीत को देखते ही अपूर्वा की याद आनी शुरू हो जाती थी और फिर से दिल में वो टीस उठने लगती थी जो सोनल के प्यार से कुछ कम हो गई थी।
फंसा तो तुम्हारी दीदी के जाल में भी था, ऐसा हाल किया कि कहीं का नहीं छोड़़ा, मेरी आंखें नम हो गई थी, परन्तु मैंने किसी तरह चेहरे पर मुस्कराहट बनाए रखी। मेरी बात सुनते ही नवरीत एकदम से सीरियस हो गई।

तभी नवरीत का मोबाइल बजा।
हैल्लो मॉम, नवरीत ने कान से मोबाइल लगाते हुए कहा।
समीर के रूम पर हूं, ------- हां, अब क्या बताउं, ठीक ही है,,,,, हां----- फिर भी------ हां, बस थोड़ी देर में आउंगी,,,, बाये मॉम, लव यू,,,,।
बात करते हुए नवरीत की आवाज में उदासी झलक रही थी।
मैंने कोशिश तो बहुत की दीदी से पूछने की, पर वो कुछ बता ही नहीं रही हैं, नवरीत ने कहा।
बता तो दिया, और कैसे बतायेगी, मुझसे मजाक किया था, प्यार का नाटक किया था, बाकी ही क्या रह गया, जब इतना बोल दिया, कहते हुए आंखों से आंसु टपक पड़े।
मैं कभी सोच भी नहीं सकता था, मेरे साथ ही ऐसा क्यों किया, एक बार दर्द उठा तो क्या का क्या मैं बोलता चला गया पता ही नहीं चला। नवरीत ने मुझे बांहों में भर लिया। जब कुछ नोर्मल हुआ तो मैं नवरीत की बांहों से अलग हुआ।
सॉरी, मैंने गालों पर से आंसु पौंछते हुए कहा।
तभी दरवाजा खुला तो मैंने दरवाजे की तरफ देखा। सोनल और प्रीत थी। प्रीत को देखते ही मैं एकदम से खडा हो गया और रसोई में जाकर पानी पिया और मुंह धोया ताकि उसे आंसुओं का पता ना चले।
वो आकर बेड पर बैठ गई।
हाय, मैंने रूमाल से मुंह पौंछते हुए कहा।
क्या बात हुई, तुम दोनों की आंखों में आंसु क्यों थे, प्रीत ने मेरी और फिर नवरीत की तरफ इशारा करते हुए कहा।

नहीं ऐसा तो कुछ नहीं-----
मैंने सब देख लिया है, ज्यादा चालाक बनने की जरूरत नहीं है, हां नहीं बताना चाहते वो अलग बात है, प्रीत ने मेरी बात को बीच में ही काटते हुए कहा।
मुझे हैरानी थी आज हम पहली बार ही एक दूसरे से मिले हैं और वो इस तरह से बात कर रही है जैसे हम काफी अच्छे दोस्त हैं।
ऐसा कुछ नहीं है, वो तो बस ऐसे ही आ गये थे, मैंने कहा और चेयर लेकर बैठ गया।
डॉक्टर को दिखाने चलें, सोनल ने उठते हुए कहा।
क्या हो रखा है, प्रीत ने आश्चर्य से पूछा।
वो कल से बुखार है, आज तो वैसे आराम है, पर फिर भी,,, सोनल ने कहा।

मैं भी खड़ा हो गया।
तब तक आप बतियाओ, हम आते हैं, सोनल ने दोनों से कहा और हम नीेचे आ गये।
डॉक्टर के पहुंचे तो डॉक्टर एक मरीज को देख रही थी। हम बाहर बैठकर इंतजार करने लगे। उसके देखने के बाद डॉक्टर ने हमें बुलाया।
अब कैसी है तबीयत, डॉक्टर ने मुस्कराते हुए पूछा।
आराम है अब तो, मैंने बैठते हुए कहा।
डॉक्टर ने मेरी छाती में स्टेथोस्कोप और मुंह में थर्मामीटर लगाकर बुखार चैक किया। सब कुछ नोर्मल मिला। फिर भी डॉक्टर ने एतिहायत के तौर पर एक इंजेक्शन और लगा दिया कुल्हे पर।
दवाई लेकर हम वापिस रूम पर आ गये। नवरीत और प्रीत बाहर चेयर डालकर बैठे हुए थे। हम भी उनके साथ ही बैठ गये। कुछ देर तक हम बतियाते रहे। प्रीत यू-एस- के बारे में बताती रही। फिर मेरे बारे में पूछने लगी। मैं तो शर्मा ही गया जब उसने मुझसे गर्लफ्रेंड के बारे में पूछा। अब ये कैसे बताउं कि उसकी बहन ही मेरी गर्लफ्रेंड है और वो भी दुनिया कि सबसे बेस्ट गर्लफ्रेंड।
देखो, कैसे लड़कियों की तरह शरमा रहा है, ऐसे लड़के भी बचे हुए हैं मुझे तो पता ही नहीं था, मैं तो सोच रही थी लड़का तो कोई शरमाने वाला बचा ही नहीं होगा दुनिया में, प्रीत ने चुटकी लेते हुए कहा।
उसकी बात सुनकर मैं झेंप गया। वो तीनों हंसने लगी। काफी देर तक ऐसे ही हंसी मजाक चलता रहा।
ओके अब मैं चलती हूं, मम्मी इंतजार कर रही होगी, नवरीत ने उठते हुए कहा।
सोनल और प्रीत ने उसे गले लगाया। तुम गले नहीं लगोगे, नवरीत ने मेरे पास आकर कहा। मैंने उसे गले लगाया। नवरीत ने कसके मुझे अपनी बांहों में भींच लिया। मेरे मुंह से हल्की सी मजे की आह निकल गई।
बदमाश, देखों कैसे आहें निकाल रहा है, प्रीत ने हंसते हुए कहा।
अब छोड़ दे, नहीं तो तेरी भी आहें निकलनी शुरू हो जायेंगी, प्रीत ने नवरीत से कहा।
हेहेहे, नवरीत ने मुझसे अलग होते हुए कहा और फिर बायें बोलती हुई चली गई।
चलो यार हम भी चलते हैं, ठण्ड लगने लग गई और फिर डिनर भी तैयार करना है, प्रीत ने उठते हुए कहा।
दीदी आप चलो, मैं कुछ देर में आती हूं, सोनल ने प्रीत से कहा।
प्रीत ने शक भरी निगाहों से सोनल की तरफ देखा और फिर मेरी तरफ देखा और फिर मुस्कराते हुए नीचे चली गई।

हम दोनों अंदर आ गये।
तुम्हारी आंखों में आंसु क्यों थे, सोनल ने मुझसे अंदर आते ही पूछा।
कब, मैंने पूछा।
जब हम आई थी, तुम दोनों की आंखों में आंसु थे, तुम्हारी और रीत की।
वो तो बस, ऐसे ही, अपूर्वा की बात चल पड़ी थी, इसलिए, मैंने कहा।
क्या कह रही थी रीत अपूर्वा के बारे में, सोनल ने पूछा।
यही कर रही थी कि मैंने बहुत कोशिश की उससे पूछने की, पर उसने कुछ भी नहीं बताया।
किस बारे में, सोनल ने कहा।
इसी बारे में, उसने धोखा क्यों दिया, कहते हुए मेरी आंखें फिर से नम हो गई।
अब पूछने के लिए रह ही क्या गया जब उसने ही साफ साफ कह दिया, क्यों उसको बार-बार याद करके दुखी हो रहे हो, सोनल ने मेरे आंसु पौंछते हुए कहा और मेरा सिर अपनी छाती पर रख लिया।
सोनल की बांहों में जाते ही मैं बस टूट जाता था और आंखों से आंसु बहने लगते थे। उसके सीने से लगते ही सब्र का सारा बांध टूट जाता था और उसके आंचल को भीगो देता था। काफी देर तक मैं ऐसे ही सोनल के सीने पर सिर टिकाए उसे भिगोता रहा। जब कुछ नोर्मल हुआ तो मैं सीधा खड़ा हुआ, परन्तु फिर वही कमर में भयंकर दर्द, सीधा हुआ ही नहीं गया और मैं सहारा लेते हुए बेड पर बैठ गया। मेरे चेहरे के भावों से सोनल भी समझ गई थी। उसने सहारा देकर मुझे लेटाया। बहुत ही मुश्किल से कमर सीधी कर पाया। हां, एकबार सीधी होने पर आराम महसूस हुआ। सोनल ने पेन किलर दी। तभी नीचे से प्रीत ने सोनल को आवाज दी और सोनल कुछ देर में आने की कहकर चली गई।
अकेला होते ही अपूर्वा की बेवफाई की टीस उठने लगी। जब सहन नहीं हुई तो मैं उठकर बाहर आ गया। पेनकिलर ने असर दिखाया था, परन्तु दर्द फिर भी बना हुआ था। मैं आराम से सीढ़ियां उतरता हुआ नीचे आ गया और बाजार की तरफ निकल गया।

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तुम पीकर आये हो, सीढियों पर लड़खड़ा कर चढ़ते हुए देखकर सामने चेयर पर में बैठी प्रीत ने कहा। उसकी आवाज सुनकर सोनल बाहर आई और मुझे सहारा देकर उपर ले गई।
गड़गड़ हो गई यार, दीदी बहुत सख्त है इस मामले में, पता नहीं अब क्या होगा, सोनल ने मुझे बेड पर लिटाते हुए कहा।
सॉरी, वो बस अपने आप कदम मैखाने की तरफ बढ गये, आगे से नहीं पीउंगा, मैंने लड़खड़ाती आवाज में कहा।
हां, मैखाने की तरफ बढ गये, अंदाज तो देखो जनाब का, दारू का अड्डा कहते हैं उसे, सुबह बात करती हूं तुझसे तो, प्रीत ने अंदर आते हुए कहा।
सोनल ने जल्दी से मुझे ब्लैंकट ओढ़ाया और प्रीत के साथ नीचे चली गई। मैं नशे में कुछ का कुछ बड़बड़ाता रहा और कब सपनों की दुनिया में गायब हुआ कुछ होश न रहा।
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06-09-2018, 01:33 PM,
#70
RE: Antarvasnasex बैंक की कार्यवाही
अचानक एकदम से उठकर बैठ गया। पूरा शरीर पसीने से तर-बतर था। सांसे उखड़ी हुई थी, और दिल बहुत तेजी से धड़क रहा था। बहुत सोचा पर कुछ समझ नहीं आया। कोई बहुत ही भयंकर सपना था, याद करने की काफी कोशिशों के बावजूद भी याद नहीं आया। उठकर मैं बाहर आ गया और चेयर डालकर खुले आसमान के नीचे बैठ गया। गर्दन पिछे की तरफ लुढका कर चेयर पर टिका दी। आसमान में तारें खिले हुए थे। आसमान में देखते ही अपूर्वा के घर की वो रात याद आ गई, जब छत पर हम दोनों बैठे आसमान को निहार रहे थे। अपूर्वा की याद आते ही दो आंसु लुढक कर गालों को भिगो गये। उसकी वो कही गई बाते, वो इतना ज्यादा प्यार।
नहीं, ऐसा कैसे हो सकता है, वो मजाक में इतना पयार कैसे जता सकती है, उसकी तो हर बात से प्यार ही प्यार छलक रहा था, नहीं नहीं वो केवल मजाक नहीं हो सकता, वो सच में मुझसे प्यार करती थी, फिर ऐसा क्या हुआ कि उसने ऐसी बात कही कि उसका प्यार बस एक मजाक था, मन में द्वंद चल रहा था। दिल ये बात मानने को तैयार ही नहीं था कि उसका प्यार महज एक मजाक था। क्योंकि उसकी हर एक बात से इतना प्यार छलकता था। बेशक मैं उस वक्त सिर्फ दोस्त की नजर से देखता था, परन्तु अब सोचने पर तो पता चलता ही है कि वो कितना प्यार करती थी। क्या बात हो सकती है कि अपूर्वा ने शादी से मना कर दिया।
एक तेज दर्द लगातार सीने में उठ रहा था। सोनल के सामने, या फिर दिन में मैं ये जताने की कोशिश जरूर करता था मैं अपूर्वा को भूल चुका हूं या भुलाने की कोशिश कर रहा हूं और इस दर्द को अंदर दबाता रहता हूं, परन्तु हर एक पल उसकी याद मुझे अंदर ही अंदर तोड़ती रहती है। मैं सोनल को परेशान भी नहीं करना चाहता हम वक्त गम में डूबा रहकर, परन्तु क्या करूं, ये दर्द मौका मिलते ही दुगुने वेग से बाहर आता है।
अपूर्वा तुने मेरे साथ ऐसा क्यों किया, गला रूंध चुका था, आसमान में तारे धूंधले दिखाई देने लगे और गाल पर आसुंओ की धार बहकर नीचे जा रही थी। सीने में उठने वाली टीस असहनीय होती जा रही थी।

-----------
समीर, समीर, मेरे कानों में धीमी धीमी आवाज पड़ी। मैंने धीरे से आंखें खोली तो आंखों में रूका पानी गालों पर आ गया। कंधे पर हाथ महसूस हुआ तो मैंने उस तरह गर्दन घुमा कर देखना चाहा। गर्दन में एकदम दर्द का अहसास हुआ और हाथ अपने आप गर्दन के पिछे चला गया। हाथ के सहारे से गर्दन को उठाया और साइड में देखा। एक धुंधला सा साया नजर आया। एक हाथ गर्दन को ही सहला रहा था। दूसरे हाथ से आंखों को मसल कर फिर देखा तो सामने सोनल खड़ी थी।
हा-----------य, मैंने बोलना चाहा, परन्तु गला रूंधा हुआ था। गला साफ करके मैंने हाय कहा।
जब नींद थोड़ी सी खुलने लगी तो पता चला कि मैं चेयर पर ही सो गया था।
तुम यहां क्यों सो रहे थे, दूसरी तरफ से थोड़ी तेज आवाज मेरे कानों में पड़ी। मैंने गर्दन घुमा कर देखा तो प्रीत खड़ी थी। उसने अपने हाथों को सीने पर बांध रखा था।
हूंहहहह, मैं असमंझस में इधर उधर देखने लगा। पता नहीं, शायद शाम को इधर बैठे बैठे ही आंख लग गई होगी, कहते हुए मैं उठने लगा। पूरा शरीर अकड़ सा गया था।
शाम को, रात को हम अंदर सुला कर गये थे, फिर शाम को कैसे नींद आ गई होगी, प्रीत ने सख्त लहजे में कहा। मैंने दिमाग पर जोर डालते हुए याद करने की कोशिश की, पर याद ही नहीं आ रहा था कि मैं यहां पर कैसे आया और प्रीत कब मुझे सुला कर गई थी। मैंने एक कदम आगे बढ़ाया तो पैरों में हल्के सा दर्द महसूस हुआ और लड़खड़ा गया। एकदम से सोनल ने मुझे पकड़ लिया।
नहीं, बस वो रात भर चेयर पर रहने से शरीर थोड़ा सा अकड सा गया है, मैंने सोनल से कहा।
जब बस की नहीं है तो जरूरी है शराब पीनी, प्रीत की आवाज कानों में पड़ी। मैंने अंगडाई लेते हुए उसकी तरफ देखा। अंगडाई खत्म करके आंखें खोली तो किसी दूसरी तरफ ही चेहरा हो गया था। मैंने घुमते हुए उसकी तरफ देखा।
सॉरी, वो आदत नहीं है, तो शायद थोड़ी सी ही ज्यादा असर कर गई, कहते हुए मैं कुर्सी के सहारे खड़ा हो गया।
ये कोई शराबियों को अड्डा नहीं है, घर है, प्रीत ने कहा।
उसकी बात सुनकर मेरा सिर शर्म से झुक गया। सॉरी, आगे से नहीं होगा, मैंने उसकी तरफ देखते हुए कहा और फिर से नीचे देखने लगा।
ऐसे लड़खड़ाते हुए आ रहे थे, आस-पड़ोस वाले क्या सोचेंगे कि यहां पर शराबी रहते हैं, प्रीत मुझे माफ करने के मूड में नहीं दिखाई दे रही थी।

सॉरी, मैं वैसे ही नजरें झुकाए खड़ा रहा।
यहां रहना है तो अपनी लिमिट में रहो, ये कोई लुच्चे लफंगों की कॉलोनी नहीं है, शरीफ लोग रहते हैं यहां पर, प्रीत ने कहा।
आगे से धयान रखूंगा।
दीदी, बस भी करो, सोनल की आवाज आई।
क्यों बस करूं, यहां शराबियों के लिये नहीं बना रखा ये घर, प्रीत और भी भड़क गई।
दीदी, सोनल की आवाज कुछ तेज थी, परन्तु सलीके में थी। सोनल प्रीत की तरफ गई और उसका हाथ पकड़कर पिछे ले जाने लगी। आप चलो नीचे, मैं समझा दूंगी, सोनल ने प्रीत का हाथ पकड़कर खींचते हुए कहा।
अच्छा, तू समझा देगी, ऐसी समझाने वाली होती तो अब तक समझा ना चुकी होती, प्रीत ने नीचे जाते हुए कहा।
बाप रे, इससे तो बचके रहना पड़ेगा, एकदम तीखी मिर्ची है, मैंने मन ही मन सोचा और अंदर आ गया और धड़ाम से बेड पर लेट गया।
सिर में हलका हलका दर्द भी महसूस हो रहा था। तभी मेरा मोबाइल बजने लगा। देखा तो मम्मी का फोन था। मैंने कॉल कट की और उठकर बाथरूम में जाकर मुंह धोकर, फ्रेश होकर आया। आकर देखा तो 2 मिस कॉल हो चुकी थी। मैंने मम्मी को फोन मिलाया।
गुड मॉर्निंग मॉम, मैंने कहा।
गुड मॉर्निंग बेटा, इतनी देर कैसे लग गई, मम्मी ने पूछा।
अभी उठा था सोकर, तो मुंह धोने चला गया था, मैंने कहा।
अभी सोकर उठा है, ऑफिस की छुट्टी है आज? मॉम ने पूछा।
नहीं, वो आंख नहीं खुली बस, अभी जल्दी से तैयार होकर निकलता हूं ऑफिस के लिए, मैंने कहा।
दिवाली से दो-तीन दिन पहले आ जाना, मम्मी ने कहा।

क्यों, क्या हुआ, मैंने पूछा।
होना के था, अभी आया था तब भी अगले ही दिन भाग गया था, मम्मी ने कह।
ठीक है, देखूंगा, शायद पहले ही दिन आया जायेगा, मैंने कहा।
देख लिये, अभी कह दे छूट्टी के लिए, कहीं बाद में कहे कि छूट्टी नहीं मिली, मम्मी ने कहा।
ठीक है, मैंने कहा।
तेरी तबीयत तो ठीक है ना, मम्मी ने कहा।
हां बिल्कुल ठीक है, क्यों, मैंने कहा।
नहीं तेरी आवाज से कुछ ऐसा लग रहा है कि तबीयत खराब हो, मम्मी ने कहा।
वो तो बस नींद सही तरह से नहीं खुली है इसलिए लग रहा होगा, मैंने कहा और जानबूझ कर एक जम्हाई लेने लगा।
फिर कुछ देर तक इधर-उधर की बातें होती रही। मम्मी ने निशा के बारे में पूछा कि उससे मिला या नहीं, तो मैंने दीवाली के बाद उनके घर चलने के लिए कह दिया। मम्मी ये सुनकर बहुत खुश हुई। थोड़ी देर और बात करने के बाद मैं नहा धोकर ऑफिस के लिए तैयार हुआ। आज अपूर्वा की यादें कुछ ज्यादा ही आ रही थी, इसलिए मन उदास था। इसका कारण शायद ये भी था कि सोनल पास नहीं थी। तैयार होकर मैं नीचे आ गया और बाईक उठाकर ऑफिस के लिए निकल गया। अभी कुछ दूर ही पहुंचा था कि मोबाइल बजा। मैंने बाईक रोककर देखा तो सोनल की कॉल थी।
हाय, मैंने मोबाइल को हैलमेट में सैट करते हुए कहा।

कहां जा रहे हो।
ऑफिस, मैंने कहा।
कम से कम मिल कर तो चले जाते, मैं आवाज लगाती रह गई, सोनल ने कहा।
यार, सुबह सुबह तो मिले थे, अब हिम्मत नहीं हुई दुबारा से मिलने की, मैंने कहा।
सॉरी यार, वो दीदी को पता नहीं है ना, इसलिए वो इतनी गुस्सा हो रही थी।
उनकी बात ठीक ही तो है, मुझे इतनी नहीं पीनी चाहिए थी, मैंने कहा।
पीनी तो बिल्कुल भी नहीं चाहिए थी, पीने से कौनसा वो वापिस आ जायेगी, सोनल ने कहा। सोनल की बात से एक टीस सी उठी।
यार वापिस तो नहीं आयेगी, पर भूलने में तो मदद हो ही जायेगी, मैंने कहा।
अच्छा शाम को जल्दी आ जाओगे क्या, दीदी अपनी फ्रेंड के यहां जा रही है तो, सोनल ने कहा।
देखता हूं, अगर बॉस ने आने दिया तो, मैंने कहा।
कोशिश करना, प्लीज, सोनल ने कहा।
ओके, कोशिश करूंगा, बाये, मैंने कहा। सोनल ने भी बाये किया ओर फोन रख दिया।
ऑफिस पहुंचा तो सामने पानी पीते हुई रामया को देखता ही रह गया। उसने एकदम टाईट फॉर्मल ड्रेस पहनी हुई थी। उसकी शर्ट कुल्हों से उपर ही थी और एकदम टाईट पेंट में उसके गोल गोल कुल्हें गलब ढा रहे थे। एकदम परफैक्ट साइज था। उसकी पेंटी लाइन दूर से ही विजिबल हो रही थी। और पेंटी लाइन से ही पता चल रहा था कि पेंटी बहुत ही छोटी-सी है और उसके आधे से भी कम कुल्हों को ढके हुए है। वो पानी पीकर मुड़ी तो मैं तो शॉक होकर खड़ा ही रह गया। सामने से उसकी पेंट उसकी योनि की पूरी शेप उजागर कर रही थी। मैंने एकदम से अपनी सिर को झटका और उसके चेहरे की तरफ देखा, उसके चेहरे पर थोड़ा सा गुस्सा दिखाई दिया। हमारी नजरे मिलते ही वो फीकी मुस्कान मुस्कराई और हाय किया।
मैंने भी उसे हाय कहा। यू आर लुकिंग सो हॉट एण्ड सैक्सी, मैंने इतने धीरे से कहा कि किसी को सुनाई ना दे।
आप कुछ कर रहे हैं, रामया ने मेरे होंठ हिलते हुए देखकर पूछा।
हां, नहीं, कुछ नहीं, मैंने हड़बड़ाते हुए कहा।
रामया अपनी चेयर पर जाकर बैठ गई। इस सबमें उसके बूब्स तो देख ही नहीं पाया था। सबको हाय बोलता हुआ मैं बॉस के केबिन की तरफ बढा और जाते हुए एकबार रामया की तरफ नजर घुमाकर देखा तो एक और झटका लगा। शर्ट में कसे हुए उसके बूब्स कहर ढा रहे थे। बटन मुश्किल से डटे हुए थे। मैं सिर को झटक कर बॉस के केबिन की तरफ चल पड़ा। नॉक करने पर बॉस ने अंदर आने के लिए कहा।
अंदर सामने बॉस बैठे हुए थे और उनके सामने चेयर पर एक लड़की बैठी हुई थी।

गुड मॉर्निंग बॉस, मैंने अंदर आकर कहा।
गुड मॉर्निंग, बॉस ने कहा और घड़ी की तरफ देखने लगे।
तबीयत कैसी है अब तुम्हारी, बॉस ने घडी से नजरें हटाते हुए कहा।
ठीक ही लग रही है बॉस, मैंने कहा।
मैं आगे आकर बॉस की टेबल के साइड में खडा हो गया और जैसे ही उस लड़की पर मेरी नजर पड़ी मैं तो बस खुशी और आश्चर्य से हक्का बक्का रह गया।
हाय, आप कब आई, सामने चेयर पर कोई और नहीं कोमल बैठी थी।
हाय, कहते हुए कोमल ने मेरी तरफ हाथ बढा दिया। बस अभी अभी आई ही हूं, सीधे इधर ही आई हूं, कोमल ने कहा।
ये लो पवन, ये बिल्स हैं, इनकी एंट्री करवा देना रामया से, बॉस ने एक फाइल मेरी तरफ बढ़ाते हुए कहा। उनका धयान टेबल पर रखी फाइल पर ही था। वो कोई टेंडर फाइल लग रही थी।
ओके बॉस, मैंने वो फाइल लेकर कहा और कोमल की तरफ आंख मारता हुआ बाहर आ गया।
बाहर आकर रामया को मैंने वो फाइल दी और उसके पास ही खडा रहा। उपर से देखने पर उसके बूब्स की लाइन कुछ ज्यादा नीचे तक दिखाई दे रही थी। शर्ट का कलर डार्क था, इसलिए ब्रा के बारे में कोई अंदाजा नहीं हो पा रहा था। क्या मस्त चूचियां हैं यार, मजा आ जायेगा अगर ये पट गई तो, मैंने बड़बड़ाते हुए कहा।
आपने कुछ कहा, रामया ने उपर मेरी तरफ देखते हुए कहा।
नहीं, लगता है तुम्हारे कान कुछ ज्यादा ही सेंसेटिव हैं, मैंने मुस्कराते हुए कहा।
जी नहीं, ऐसा कुछ नहीं है, मुझे लगा कि आपने कुछ कहा है, रामया ने कहा।
हेहेहे, तभी तो की रहा हूं, मैंने कुछ कहा भी नहीं तुम्हें सुन गया, मैंने हंसते हुए कहा।
ओके, काम करो, मैं भी काम करता हूं, मैंने कहा।
वैसे नॉजरिंग अच्छी है, तुम पर खूब जंच रही है, मैंने अपने नाक पर हाथ लगाते हुए कहा।
थैंक्स, कहते हुए रामया थोड़ी सी शरमा गई। मैं आकर अपनी चेयर पर बैठ गया।
मेरे बैठते ही सुमित ने अपनी चेयर थोड़ी सी मेरी तरफ सरका ली।
बॉस आज तो क्या मस्त माल आई हुई है इंटरव्यू देने, सुमित ने धीरे से मेरी तरफ झुकते हुए कहा।
फाले, वो बॉस की साली है, कहीं नौकरी से हाथ धो बैठे, मैंने हंसते हुए कहा।

क्या बात करते हो, कैसे पता, सुमित ने आश्चर्य से पूछा।
खूब चाय पी चुका हूं इसके हाथ की, जब घर ऑफिस शिफ्रट कर रखा था तब, कहते हुए मेरे होंठों पर एक मुस्कराहट आ गई।
हाय, काश मैं भी होता यार, क्या मस्त माल है, बस मन कर रहा था कि पकड़ कर भींच दूं, सुमित ने आहे भरते हुए कहा।
घास भी नहीं डालेगे वो तुझे, मुझसे ही कितने दिनों बाद ठीक से बात करने लगी थी, मैंने कहा।
मनीषा को पटा रहा हूं मैं, सुमित ने कॉलर को स्टाईल से झटकते हुए कहा।
क्या बात है, कहां तक पहुंचा, मैंने मुस्कराते हुए कहा।
कल साथ साथ पानीपूरी खाई थी।
वाह, बड़ी जल्दी हाथ मार लिया, मैंने कहा।
खुले विचारों वाली है, जल्दी ही पट जायेगी, सुमित ने खुश होते हुए कहा।
खुश रहो बेटा, जल्दी हाथ साफ कर लो, नहीं तो क्या पता फिर बाद में पछताओ, मैंने कहा और काम में धयान लगा दिया।
इसे तो मैं पटा कर ही रहूंगा, चाहे कुछ भी करना पडे, सुमित ने कहा और चेयर को सरका कर काम करने लगा।
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