Chudai Kahani वो शाम कुछ अजीब थी
06-11-2017, 08:59 AM,
#11
RE: Chudai Kahani वो शाम कुछ अजीब थी
अहह!!!! आराम से भाई.

रूबी ज़ोर से चीखी जब रमण ने अपना लंड एक ही बार में उसकी चूत में पेल दिया.

‘क्या करूँ यार तू है ही इतनी मस्त रहा नही जाता’

‘उफफफ्फ़ जान निकलोगे क्या मेरी’

‘नही मेरी जान तुझे मस्ती की उन उँचाइयों तक ले जाउन्गा जो कभी सोची भी ना होगी’ रमण अपने लंड को हरकत में डालता हुआ बोलता है.

हाई हाईईईईईईईईईईईई उम्म्म धीरे धीरे

रमण झुक के रूबी के होंठ चूसने लगता है और रूबी मस्त होती चली जाती है – रूबी के होंठ उसकी कमज़ोरी थे, रमण जब भी उन्हें चूस्ता रूबी के जिस्म में आग फैलने लगती और उसकी चूत रस छोड़ना शुरू कर देती.

जैसे जैसे रमण उसके होंठ चूस्ता गया वैसे वैसे रूबी की कमर लचकने लगी, इतना इशारा रमण के लिए काफ़ी था.
उसने अपने झटके तेज कर दिए.

रूबी ने अपने होंठ रमण से छुड़वाए और बोली -जल्दी कर लो माँ आती होगी.

‘यार जल्दी में मज़ा नही आता’

‘रात को आराम से चोद लेना पर अब तो जल्दी पेलो – हाई मेरी चूत बहुत खुज़ला रही है’

रमण तेज़ी से उसे चोदने लगा अब बिल्कुल मशीन की तरहा उसका लंड रूबी की चूत में घुसता और बाहर निकलता.

सिसकियाँ लेती हुई रूबी भी उसका साथ दे रही थी अपनी गान्ड उछाल उछाल कर.

दोनो तेज़ी से अपने चर्म की तरफ बढ़ रहे थे कि-

अहह श्श्श्श्शूऊऊऊओन्न्न्न्न्न्न्न्नाआआआआल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल चीखता हुआ रमण उसकी चूत में झड़ने लगा और उसी वक़्त रूबी भी झड़ने लगी. वो एक जोंक की तरहा रमण से चिपक गयी.

जब दोनो की साँसे थोड़ी ठीक हुई तो रूबी ने पूछ ही लिया –

‘आज तुम्हारे मुँह से सोनल का नाम क्यूँ निकला’

रमण कुछ देर तो चुप रहा.

रूबी ने फिर पूछा – उसके चेहरे पे नाराज़गी सॉफ जाहिर हो रही थी.

रमण : यार जब से सोनल की रीसेंट फोटो देखी हैं तब से दिमाग़ खराब हो गया है उसके लिए. कई बार तो तुम्हें चोदते हुए सोचता हूँ कि सोनल को चोद रहा हूँ.

रूबी : ओह तो अब मुझ से तुम्हारा मन भर गया जो मौसी की बेटी पे भी नज़र गढ़ाए बैठे हो.

रमण : नही यार ग़लत मत समझ – पता नही क्या हो गया है मुझ को.

रूबी नाराज़ हो कर उठ के बाथरूम में चली गयी.


दो साल से रमण उसे चोद रहा था – पर आज उसके मुँह से सोनल का नाम सुन रूबी के सीने में आग लग गयी – उसे इसमे अपना अपमान लगा और गुस्सा इतना चढ़ा कि दिल कर रहा था कि अभी रमण के चेहरे को अपने थप्पड़ो से लाल कर दे.
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06-11-2017, 08:59 AM,
#12
RE: Chudai Kahani वो शाम कुछ अजीब थी
जब तक रूबी बाथरूम से निकलती माँ आ चुकी थी. रूबी अपनी माँ से बोल अपनी सहेली के यहाँ चली गयी. उसने रमण से बिकुल भी बात नही करी.

रूबी शाम को देर से आई और खाना खा के अपने रूम में बंद हो गयी. जब दोनो के माँ बाप सो गये तो रमण ने बहुत कोशिश करी की रूबी रूम खोलदे, पर उसने कोई जवाब तक नही दिया. अंदर बैठी वो आँसू बहा रही थी – उसे रमण से ये उम्मीद ना थी कि वो उसे छोड़ किसी और के बारे में सोचने लगेगा और वो भी बड़ी मासी की बेटी सोनल के बारे में.

मन मसोसता हुआ रमण अपने कमरे में चला गया – सारी रात वो सो नही पाया और यही सोचता रहा कैसे रूबी को मनाए. वो अपने आप को गालियाँ दे रहा था कि क्यूँ उसके मुँह से सोनल का नाम निकल गया.
रूबी भी एमबीबीएस पढ़ रही थी पर मुंबई में और उसकी और सुनील की उम्र लगभग बराबर थी बस कुछ दिनो का ही फ़र्क था और यही अंतर था रमण और सोनल की उम्र में. सोनल और रमण दोनो डॉक्टर बन चुके थे. रमण तो आगे एमडी करने लग गया था पर सोनल ने तो सुनील की देखभाल के लिए अपना साल जाया कर दिया था. 

इनकी माँ आपस में सग़ी बहने थी पहले सभी देल्ही में रहती थे पर बाद में रमण और रूबी का परिवार मुंबई शिफ्ट हो गया था. जब भी गर्मी की छुट्टियाँ होती तो या तो सुमन का परिवार मुंबई जाता या संगीता ( सुमन की छोटी बहन) का परिवार देल्ही आता.

चारों भाई बहन में अच्छी दोस्ती थी और एक दूसरे का खूब ख़याल रखते थे. आज जब रमण के मुँह से रूबी ने सोनल के बारे में सुना तो उसका तन मन दोनो जल गया. वो तो रमण के साथ अपनी पूरी जिंदगी जीने का सपना लेटी थी. कोई रात ऐसी ना थी जब वो आने वाले कल के बारे में ना सोचती – एक तरहा से रूबी ने रमण को अपना भावी पति ही समझ रखा था और उसे यकीन था कि रमण भी उसे भावी पत्नी के रूप में देखता है.

उसके सारे सपने आज धूल में मिल गये थे. कोई बच्ची तो थी नही जो इतना भी ना समझती कि उसे चोद्ते वक़्त रमण के ख़यालों में सोनल थी जिस्म रूबी का था पर ख़यालों में रमण सोनल को चोद रहा था. और ये रूबी कभी नही बर्दाश्त कर सकती थी.

अपने बिस्तर पे लेटी आँसू बहाती रूबी उन यादों में खो गयी जब रमण उसकी जिंदगी में एक पुरुष बनके आ गया जिसमे वो अपना सब कुछ देखने लगी – जिसे अपने दिल के मन-मंदिर में वो स्थान दे दिया जो लड़की सिर्फ़ अपने पति को देती है.

दो साल पहले की वो रात जब मम्मी पापा कुछ दिनो के लिए बाहर गये हुए थे तो दोनो भाई बहन अकेले घर में रह गये थे क्यूंकी दोनो ही उनके साथ नही जा सकते थे क्यूंकी पढ़ाई का बहुत नुकसान होता.

मोम डॅड को गये दो दिन हो चुके थे, तीसरे दिन रमण अपने दोस्तों के साथ एक पार्टी में गया था और जब वापस लोटा तो नशे में धुत था. उस रात………रूबी लड़खड़ाते हुए रमण को सहारा दे उसके बेडरूम तक ले गयी. रमण उसके साथ जोंक की तरहा चिपका हुआ था और रूबी को उसे संभालना बहुत मुश्किल पड़ रहा था.

किसी तरहा वो रमण को उसके बिस्तर तक ले गयी और जब वो उसे बिस्तर पे लिटाने लगी रमण के पंजे उसके उरोज़ पे कस गये कुछ पल के लिए. रूबी को ज़ोर का झटका लगा क्योंकि पहली बार उसे एक मर्द के हाथों का अहसास अपने उरोज़ पे हुआ था. उसके जिस्म में बिजली सी कोंध गयी – होंठों से चीख निकलते निकलते बची. रमण बिस्तर पे लूड़क गया और उसके मुँह से धीमे से निकला – लव यू रूबी – फिर वो नींद के आगोश में चला गया.

रूबी काँपती टाँगों से अपने कमरे में गयी और अपने बिस्तर पे लेट गयी. रमण के हाथों का अहसास अब भी उसे अपने उरोज़ पे महसूस हो रहा था और रमण के मुँह से निकले अल्फ़ाज़ – लव यू रूबी – उसके कानो में हथौड़े की तरहा बज रहे थे. – ये लव यू – एक भाई बहन के बीच प्यार को दर्शा रहा था या फिर एक मर्द और एक औरत के बीच.

रूबी बहुत परेशान हो गयी – उसे ख्वाब में भी ये गुमान ना था कि रमण उसे बहन की तरहा नही एक लड़की की तरहा देखता है.
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06-11-2017, 08:59 AM,
#13
RE: Chudai Kahani वो शाम कुछ अजीब थी
रूबी अब इतनी छोटी भी नही थी कि उसे कुछ पता ही ना हो – अपनी सहेलियों से और एमबीबीएस की पढ़ाई के दोरान वो सेक्स के बारे में काफ़ी कुछ जान चुकी थी. बार बार उसके दिमाग़ में यही ख़याल आ रहा था कि क्या उसका भाई उसे एक लड़की की हैसियत से देखने लग गया है – पर भाई बहन में ये सब तो एक गुनाह है – भाई इतना अकल्मंद होते हुए भी कैसे ये सब सोचने लग गया.

उसने किसी से सुना था कि शराब पीने के बाद आदमी सच बोलता है – और जो हरकत रमण ने उसके साथ करी थी वो भाई तो कभी नही कर सकता बहन के साथ. क्या ये अंजाने में हुआ था या फिर रमण ऐसा कर उसे कुछ कहना चाहता था.
रात भर रूबी सोचती रही – एक पल भी उसकी आँख बंद ना हुई.

अगले दिन सुबह रूबी ने नाश्ता टेबल पे लगा दिया था. रमण हॅंगओवर की वजह से अपना सर पकड़ता हुआ टेबल पे आके बैठ गया. रूबी बड़े गौर से उसे देखने लगी – उसकी आँखों में कयि सवाल थे वो रमण से कुछ पूछना चाहती थी पर उसकी शर्म उसे कुछ कहने नही दे रही थी. रमण ने चुप चाप नाश्ता किया और अपने कमरे में चला गया. दोनो के बीच कुछ खास बात नही हुई.

किचन में बर्तन रख रूबी जब रमण के कमरे की तरफ बढ़ी तो दरवाजे पे ही उसके कदम रुक गये. रमण के हाथ में उसकी फोटो थी जिसे वो चूमता जा रहा था और बार बार- लव यू रूबी – रूबी के पैरों तले ज़मीन निकल गयी. आँखें फाडे कुछ देर वो रमण को देखती रही फिर अपने कमरे में जा के बैठ गयी.

रात के वो लम्हें जब रमण ने उसका उरोज़ पकड़ दबाया था फिर उसकी नज़रों के सामने आ गया और जिस्म में हलचल मचनी शुरू होगयि. जितना वो इस ख़याल को दिमाग़ से बाहर निकालने की कोशिश करती उतना ही ये ख़याल उसे और तंग करता.- कानो में बार बार रमण के अल्फ़ाज़ कोंधने लगे – लव यू रूबी ----

रूबी का जिस्म रमण के हाथ को अब भी अपने उरोज़ पे महसूस कर रहा था. कभी वो रमण को एक भाई की नज़रिए से सोचती तो कभी एक मर्द की तरहा. ........................

दिमाग़ में उथल पुथल मच चुकी थी.......................

हॉल में टेबल पर एक चिट छोड़ वो अपनी सहेली के घर चली गयी. अपनी आदत के अनुसार उसने बेल बजाने की जगह पहले दरवाजे पे हाथ का ज़ोर लगाया और वो खुलता ही चला गया.

अंदर हॉल में कोई नही था. उसे ताज्जुब हुआ कि ऐसे कोई अपना घर खुल्ला भी छोड़ सकता है क्या.

उसने नीचे आंटी को आवाज़ लगाई पर कोई जवाब नही. फिर वो उपर चली गयी अपनी सहेली के कमरे की तरफ और जैसे ही उसके कदम कमरे के नज़दीक होते गये उसे सिसकियों की आवाज़ें सुनाई देने लगी . दरवाजा खुला था और अंदर का नज़ारा देख उसके होश उड़ गये. बिस्तर पे उसकी सहेली नग्न लेटी हुई थी और उसका बड़ा भाई वो भी नग्न उसके उपर लेटा हुआ उसके निपल चूस रहा था और साथ ही साथ उसका मोटा लंबा लंड उसकी सहेली की चूत में अंदर बाहर हो रहा था.

ये मंज़र देख रूबी के होंठ सुख गये – दिल की धड़कन बढ़ गयी- उसे अपनी आँखों पे भरोसा ही नही हुआ जो उसने देखा . इससे पहले कि उसके काँपती टाँगें उसके बदन का साथ छोड़ती – वो जैसे आई थी वैसे अपने घर वापस चली गयी.
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06-11-2017, 08:59 AM,
#14
RE: Chudai Kahani वो शाम कुछ अजीब थी
अपनी चाभी से दरवाजा खोल चुप चाप अपने कमरे में बिस्तर पे जा गिरी. उसकी साँसे बहुत तेज चल रही थी. जो मंज़र उसने देखा था वो उसे बहुत उत्तेजित कर चुका था – उसकी चूत बहुत गीली हो चुकी थी इतनी कि पैंटी पूरी भीग चुकी थी और उसका असर उसकी सलवार पे भी पड़ने लग गया था. 

अपनी आँखें बंद कर वो अपनी सहेली के बारे में सोचने लगी –लेकिन उसे जो नज़र आने लगा वो मंज़र कुछ और था – अपनी सहेली की जगह वो खुद को महसूस कर रही थी और उसके भाई की जगह अपने भाई रमण को.



रूबी ने खुद अपने उरोज़ मसल्ने शुरू कर दिए और मुँह से रमण रमण निकलने लगा.

अहह रमण…. लव मी रमण……

यही वो वक़्त था जब रमण उसके कमरे में घुसा शायद उसे कुछ काम था – लेकिन जो उसने देखा और सुना वो काफ़ी था उसे उत्तेजना की उँचाइयों पे ले जाने के लिए.

जिस तरहा वो रूबी के बारे में सोचता था और डरता था कुछ कहने के लिए आज वो डर ख़तम हो गया था क्यूंकी उसे सॉफ दिखाई पड़ रहा था कि रूबी भी उसके बारे में वही ख़याल रखती है. अब पहल तो हमेशा मर्द ही करता है चाहे रिश्ता कुछ भी हो – हालात कुछ भी हों.

रमण के कदम रूबी के बिस्तर की तरफ बढ़ गये. उसने अपनी शर्ट उतार फेंकी और रूबी के बिस्तर पे बैठ वो रूबी के चेहरे पे झुकता चला गया और अपने होंठ रूबी के होंठों पे रख दिए.

रूबी यही सोच रही थी कि रमण उसके ख़यालों में उसके होंठ चूम रहा है – उसके होंठ अपने आप खुल गये और रमण की ज़ुबान उसके मुँह में घुस गयी जिसे वो चूसने लगी.
रमण से भी और बर्दाश्त ना हुआ और वो उसके मम्मे मसालने लगा.

खुद अपने मम्मे मसलना और किसी मर्द के हाथों द्वारा मसले जाने में बहुत फरक होता है – इसका असर रूबी पे पड़ा और उसे उसकी जिंदगी का पहला ऑर्गॅज़म हो गया. एक चीख के साथ वो रमण से लिपट गयी. रमण को समझते देर ना लगी कि रूबी अपने चर्म पे पहुँच चुकी है.

थोड़ी देर में रूबी शांत हुई उसने आँखें खोली तो खुद को रमण से चिपका हुआ पाया.

एक चीख के साथ – भाई तूमम्म्मममममम………….. झटके से रमण से अलग हो गयी – उसकी आँखों में आँसू आ चुके थे जो भरभरा कर उसके चेहरे को भिगोने लगे.

जो वो ख्यालों में सोच रही थी वो हक़ीक़त में हो रहा था – सच का ये अहसास उसे सहन नही हुआ मर्यादा अपना सर उठाने लगी .
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06-11-2017, 08:59 AM,
#15
RE: Chudai Kahani वो शाम कुछ अजीब थी
रमन को भी झटका लगा कहाँ वो उसका नाम पुकार रही थी और कहाँ यूँ बिदकी है जैसे रमन ने उसके साथ ज़बरदस्ती की हो. रमन को बहुत चोट पहुँची उसकी भी आँखों में आँसू आ गये. वो चुप चाप रूबी के कमरे से बाहर निकल गया और अपने कमरे में जा के सोचने लगा की जो उसने किया वो ठीक था या नही अब रूबी उसके बारे में क्या सोचेगी. वो रूबी की फोटो के सामने बैठ गया जो उसने अपने कमरे में लगा रखी थी. आँखों से टॅप टॅप आँसू गिरने लगे.

रूबी से दूरी वो हरगिज़ बर्दाश्त नही करसकता था. जब से उसके दिल-ओ-दिमाग़ में रूबी छाई थी उसने किसी और लड़की की तरफ मूडके नही देखा था यहाँ तक की 4 साल से चल रहे अपने अफेयर में भी दरारें डाल ली थी क्यूंकी वो हर वक़्त रूबी के ही करीब रहना चाहता था.

रमन के बाहर जाने के बाद थोड़ी देर बाद जब रूबी अपनी ग्लानि से बाहर निकली तो उसे धयान आया की रमन जब कमरे से बाहर निकला था उसकी आँखों में भी आँसू थे.

रूबी को समझ नही आ रहा था की इस स्थिति में वो क्या करे. वो रमण से बहुत प्यार करती थी – लेकिन ये प्यार अब भाई बहन की सीमा रेखा को पार करने लगा था. उसे बहुत घबराहट हो रही थी – एक दर उसके दिल-ओ-दिमाग़ में छा गया था. क्या ये सब ठीक है? आयेज इसका परिणाम क्या होगा? क्या ये प्यार सिर्फ़ वासना की भूख मिटाने का ज़रिया है जब तक दोनो की शादी नही होती या फिर ये वास्तव में प्रेम है जो एक लड़का एक लड़की से और एक लड़की एक लड़के से करती है.

बहुत से सवाल रूबी के दिमाग़ में घूम रहे थे. समाज उनके रिश्ते को कभी मान्यता नही देगा. समाज तो छोड़ो पहले मोम डेड ही उन्हें मार डालेंगे अगर ऐसा कुछ उनके सामने आया.

तो फिर क्यूँ रमन मेरी फोटो चूमता रहता है क्यूँ मेरी फोटो से बात करता है क्यूँ आइ लव यू मेरी फोटो की आगे बोलता रहता है.
उफफफफ्फ़ कुछ समझ नही आ रहा.

रूबी के कदम रमन के कमरे की तरफ बॅड गये और जो उसने देखा – उसे देख उसके दिल में कहीं एक तीर जा के खुब गया – रमन उसकी फोटो के आगे आँसू बहा रहा था. 
रूबी के कदम अपने आप उसे रमन के करीब ले गये.

रूबी ने उसके कंधे पे हाथ रखा – ‘भाई ये……’

रमन एक दम पलटा और रूबी को अपनी बाँहों में ले उसके चेहरे को चुंबनो से भरते हुए बस – एक ही बात बोल रहा था – आइ लव यू रूबी – आई लव यू रूबी.
रमन के प्यार के आगे रूबी पिघलने लगी और उसके साथ चिपक गयी.,

थोड़ी देर बाद रूबी ने खुद को रमन से अलग किया, उसकी साँसे तेज चल रही थी. 
‘भाई ये ग़लत है – हम भाई – बहन के बीच ये सब……’
‘कुछ ग़लत नही – तुझे मुझ पे भरोसा है ना’

कोई दरवाजा खटखटाने लगा और रूबी अपनी यादों के झरोखे से बाहर निकल आई. दरवाजा खोला तो सामने रमन खड़ा था.

रूबी का आँसुओं से भीगा चेहरा देख रमन उसके कदमो में गिर पड़ा और माफी माँगने लगा.

रूबी ने रमन की तरफ कोई धयान नही दिया और पलट के अपने बिस्तर के पास जा के खड़ी हो गयी
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06-11-2017, 08:59 AM,
#16
RE: Chudai Kahani वो शाम कुछ अजीब थी
उधर सुनील ने बड़ी मेहनत कर एक ही महीने में पिछला सारा बॅक लॉग पूरा कर लिया अब वो सकुन से क्लास के साथ चल सकता था. इस कड़ी मेहनत ने उसे बहुत थका दिया था. सनडे का दिन था और सुनील 10 बज चुके थे तब भी सोया हुआ था.

सोनल उसके कमरे में घुसी उसे उठाने के लिए तो देखा वो सिर्फ़ एक शॉर्ट पहन कर सोया हुआ था. उसकी चौड़ी छाती पे घुँगराले बाल सोनल को अपनी तरफ खींचने लगे. 

सोनल सुनील के पास जा के बैठ गयी और प्यार से उसकी छाती पे हाथ फेरते हुए उसे उठाने लगी.

‘उठ जा भाई 10 बज चुके हैं’

सुनील कुन्मूनाता हुआ बोला.

‘सोने दे ना यार बहुत दिनो बाद चैन की नींद आ रही है’

सोनल प्यार भरी नज़रों से अपने भाई को देखने लगी – वो मंज़र उसकी आँखों के सामने फिर आ गया – कैसे सुनील तीन के साथ अकेला लड़ रहा था. उसे अपने भाई पे बहुत प्यार आया उसके माथे को चूम वो उठ गयी और उसे सोने दिया.

सोनल जब कमरे से बाहर निकली तो देखा उसके मोम डॅड रेडी थे कहीं जाने के लिए.

सोनल : आप लोग कहीं जा रहे हो.

सुमन : हां बेटी तेरे पापा के दोस्त ने बुलाया है किसी ज़रुरू काम से दोपहर तक आ जाएँगे. सुनील उठा के नही.

सोनल : नही मोम उसे सोने दो बहुत थका हुआ लग रहा था – इसलिए मैने ज़ोर नही दिया और उसे सोने दिया.

सुमन : ठीक है, जब उठे उसे नाश्ता करवा देना. लंच तक हम आजाएँगे.

ये कह सागर और सुमन चले गये.

सोनल वहीं हाल में बैठी टीवी चला के चॅनेल इधर से उधर करने लगी.
तभी उसके मोबाइल पे माधवी का फोन आ गया.

‘हाई माधवी – आज कैसे फोन किया’

‘यार मैं कल से नही आउन्गि – मेरा रेसिग्नेशन तुझे भिजवा दूँगी प्लीज़ सब्मिट कर देना’

‘रेसिग्नेशन !!!! क्या हुआ’

‘मेरी शादी फिक्स हो गयी है – कल ही हम सब लोग मुंबई के लिए निकल रहे हैं’

‘ओह – दट’स गुड- कोंग्रथस. कब वापस आएगी’

‘वापसी का कोई चान्स नही लड़का वहीं का है तो वहीं रहना पड़ेगा.’

‘करता क्या है मेरा जीजा’

‘सर्जन है’

‘ह्म्म गुड – अच्छा मेरी मासी वहीं मुंबई रहती है तुझे उनका डीटेल भेज दूँगी एसएमएस पे – कोई भी ज़रूरत पड़े बेझिझक उनसे बात कर लेना.’

‘थॅंक्स यार – तो सुना तेरी कब शादी हो रही है – कोई लड़का फिक्स किया हुआ है या नही’

‘ना यार मैं तो लड़कों से दूर ही रहती हूँ – पहले एमडी फिर सोचेंगे’

‘कोई तो होगा जिसे तू चाहती है – बता ना’

‘नही यार कोई नही है’

‘हो ही नही सकता इस उम्र में कोई भी लड़का तेरे दिमाग़ में ना हो जिसने तेरे दिल पे क़ब्ज़ा ना कर रखा हो – ये बात अलग है तेरी उससे इस बारे में कोई बात ना हुई हो’

‘अरे सच कह रही हूँ ऐसा कोई नही है’

‘मैं नही मानती – रात को कॉन तेरे सपनो में आता है – किसके बारे में तू हर दम सोचती है. आज जब सोना तो ध्यान रखना किसके बारे में सोचती है तू – सब क्लियर हो जाएगा’

‘चल हट ऐसा कुछ नही है – ये बता डेट क्या फिक्स हुई है’

’20 दिन बाद की तुझे कार्ड भेज दूँगी – आना ज़रूर’

‘हां ज़रूर इस बहाने मासी से भी मिल लूँगी’

‘चल रखती हूँ – मेरी बात पे गौर ज़रूर करना’

‘ओके चल बाइ’
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06-11-2017, 09:00 AM,
#17
RE: Chudai Kahani वो शाम कुछ अजीब थी
उधर सुनील ने बड़ी मेहनत कर एक ही महीने में पिछला सारा बॅक लॉग पूरा कर लिया अब वो सकुन से क्लास के साथ चल सकता था. इस कड़ी मेहनत ने उसे बहुत थका दिया था. सनडे का दिन था और सुनील 10 बज चुके थे तब भी सोया हुआ था.

सोनल उसके कमरे में घुसी उसे उठाने के लिए तो देखा वो सिर्फ़ एक शॉर्ट पहन कर सोया हुआ था. उसकी चौड़ी छाती पे घुँगराले बाल सोनल को अपनी तरफ खींचने लगे. 

सोनल सुनील के पास जा के बैठ गयी और प्यार से उसकी छाती पे हाथ फेरते हुए उसे उठाने लगी.

‘उठ जा भाई 10 बज चुके हैं’

सुनील कुन्मूनाता हुआ बोला.

‘सोने दे ना यार बहुत दिनो बाद चैन की नींद आ रही है’

सोनल प्यार भरी नज़रों से अपने भाई को देखने लगी – वो मंज़र उसकी आँखों के सामने फिर आ गया – कैसे सुनील तीन के साथ अकेला लड़ रहा था. उसे अपने भाई पे बहुत प्यार आया उसके माथे को चूम वो उठ गयी और उसे सोने दिया.

सोनल जब कमरे से बाहर निकली तो देखा उसके मोम डॅड रेडी थे कहीं जाने के लिए.

सोनल : आप लोग कहीं जा रहे हो.

सुमन : हां बेटी तेरे पापा के दोस्त ने बुलाया है किसी ज़रुरू काम से दोपहर तक आ जाएँगे. सुनील उठा के नही.

सोनल : नही मोम उसे सोने दो बहुत थका हुआ लग रहा था – इसलिए मैने ज़ोर नही दिया और उसे सोने दिया.

सुमन : ठीक है, जब उठे उसे नाश्ता करवा देना. लंच तक हम आजाएँगे.

ये कह सागर और सुमन चले गये.

सोनल वहीं हाल में बैठी टीवी चला के चॅनेल इधर से उधर करने लगी.
तभी उसके मोबाइल पे माधवी का फोन आ गया.

‘हाई माधवी – आज कैसे फोन किया’

‘यार मैं कल से नही आउन्गि – मेरा रेसिग्नेशन तुझे भिजवा दूँगी प्लीज़ सब्मिट कर देना’

‘रेसिग्नेशन !!!! क्या हुआ’

‘मेरी शादी फिक्स हो गयी है – कल ही हम सब लोग मुंबई के लिए निकल रहे हैं’

‘ओह – दट’स गुड- कोंग्रथस. कब वापस आएगी’

‘वापसी का कोई चान्स नही लड़का वहीं का है तो वहीं रहना पड़ेगा.’

‘करता क्या है मेरा जीजा’

‘सर्जन है’

‘ह्म्म गुड – अच्छा मेरी मासी वहीं मुंबई रहती है तुझे उनका डीटेल भेज दूँगी एसएमएस पे – कोई भी ज़रूरत पड़े बेझिझक उनसे बात कर लेना.’

‘थॅंक्स यार – तो सुना तेरी कब शादी हो रही है – कोई लड़का फिक्स किया हुआ है या नही’

‘ना यार मैं तो लड़कों से दूर ही रहती हूँ – पहले एमडी फिर सोचेंगे’

‘कोई तो होगा जिसे तू चाहती है – बता ना’

‘नही यार कोई नही है’

‘हो ही नही सकता इस उम्र में कोई भी लड़का तेरे दिमाग़ में ना हो जिसने तेरे दिल पे क़ब्ज़ा ना कर रखा हो – ये बात अलग है तेरी उससे इस बारे में कोई बात ना हुई हो’

‘अरे सच कह रही हूँ ऐसा कोई नही है’

‘मैं नही मानती – रात को कॉन तेरे सपनो में आता है – किसके बारे में तू हर दम सोचती है. आज जब सोना तो ध्यान रखना किसके बारे में सोचती है तू – सब क्लियर हो जाएगा’

‘चल हट ऐसा कुछ नही है – ये बता डेट क्या फिक्स हुई है’

’20 दिन बाद की तुझे कार्ड भेज दूँगी – आना ज़रूर’

‘हां ज़रूर इस बहाने मासी से भी मिल लूँगी’

‘चल रखती हूँ – मेरी बात पे गौर ज़रूर करना’

‘ओके चल बाइ’
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06-11-2017, 09:00 AM,
#18
RE: Chudai Kahani वो शाम कुछ अजीब थी
जब सोनल और रमण छोटे थे तब से ये दोनो बहने आपस में स्वापिंग करने लग गये थे क्यूंकी दोनो भी अपना टेस्ट बदलना चाहते थे और इनके पति तो अपनी साली पे लार टपकाया ही करते थे.

एक बार स्वापिंग का मामला कुछ लंबा ही हो गया था. यानी सविता एक महीने के लिए सागर के साथ उसकी पत्नी बन के रही और सुमन समर के साथ.

जिस्मो की ख्वाहिश पूरी करते हुए चारों एक ज़रूरी बात को ध्यान में ना रख पाए और नतीजा ये निकला कि महीने बाद सुमन और सविता दोनो ही प्रेग्नेंट हो चुकी थी.

चारों देखा जाए तो चार जिस्म और एक जान बन चुके थे इस लिए दोनो ने ही अपनी पत्नी को प्रेग्नेन्सी टर्मिनेट नही करने दी.

नतीजा ये हुआ कि सुनील का असली पिता था समर और रूबी का असली पिता था सागर. ये बात सिर्फ़ ये 4 ही जानते थे.

यानी सोनल और सुनील सगे भाई बहन नही थे और यही हाल रमण और रूबी का था. पर बचपन से ही ये बिल्कुल सगे भाई बहन की तरहा ही रहे और इनका प्रेम भी बिल्कुल ऐसा ही था.

जैसे जैसे बच्चे बड़े होते गये ये लोंग जो पहले हर महीने मिला करते थे वो उसमे लंबे ब्रेक आने लगे और अब हाल ये हो चुका था कि साल में एक बार छुट्टी के बहाने ही मिल पाते थे. और ये छुट्टी वो हमेशा किसी बीच पे ही मनाते थे – जहाँ ये चारों भूल जाते थे कि इनका आपस में क्या रिश्ता है – बस 4 जिस्म की क्रियाओं में लिप्त हो जाया करते थे.

कल ये चारों गोआ में मिलने वाले थे और इस बार का सारा खर्चा समर उठा रहा था, उसने ही सारे अरेंज्मेंट्स किए थे.

रात को सोनल को सुनील के खाने पीने का ध्यान रखने को कह सुमन और सागर अपने कमरे में जा के सो गये – सुबह 10 बजे इनकी फ्लाइट थी गोआ के लिए जो मुंबई हो कर जानी थी जहाँ समर और सविता ने भी बोर्ड करना था.


अगले दिन सुनील - सुमन और सागर को एरपोर्ट छोड़ने के लिए चला गया.
जब वो वापस आया तो उसने काफ़ी बेल बजाई पर किसी ने दरवाजा ना खोला. हार कर उसने अपनी चाबी से दरवाजा खोला और सीधा अपने मोम दाद के रूम में गया कुछ समान रखने. 

जैसे ही वो रूम में दाखिल हुआ उसी वक़्त सोनल बाथरूम से बाहर निकली जिसने बाथ टवल लपेटा हुआ था.

सोनल की नज़र सुनील पे नही पड़ी . लेकिन सुनील की आँखें सोनल को इस रूप में देख चोंधिया गयी.

सोनल सीधा ड्रेसिंग टेबल पे गयी और अंगड़ाई लेते हुए कुछ सोचने लगी. सोनल की आँखें उस वक़्त बंद थी.





इससे पहले की कोई ग़लत ख़याल सुनील के दिमाग़ में आते वो सर झटक रूम से बाहर चला गया और हॉल में जा के बैठ गया - खुद को बिज़ी करने के लिए उसने टीवी चला लिया

उधर......................
जब फ्लाइट मुंबई लंड करी तो समर और सविता भी फ्लाइट में चढ़ गये. जैसे ही वो बिज़्नेस क्लास कॅबिन में पहुँचे अदला बॅड्ली वहीं शुरू हो गयी – सुमन अपनी जगह से उठी और सविता के गले मिली फिर वो समर के साथ बैठ गयी और सविता सुमन की जगह पे बैठ गयी.

समर तो जैसे सुमन के लिए पागल हुआ पड़ा था. जैसे ही वो बैठी – समर ने उसे अपनी बाँहों में समेट लिया और किसी की परवाह ना करते हुए अपने होंठ उसके होंठो से चिपका दिए. कुछ ऐसा ही हाल सागर और सविता के बीच था.

दोनो औरतों ने मुश्किल से खुद को छुड़ाया और अपने चेहरे पे हाथ रख बैठी रही – दोनो को ही यूँ खुले में चुम्मि देने मे बड़ी शर्म आई थी.

उधर सोनल तयार हो कर हॉल में आ गयी और सुनील के सामने बैठ गयी. सफेद टाइट टॉप और नीली जीन्स जिसमे से उसकी पैंटी का टॉप झाँक रहा था.
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06-11-2017, 09:00 AM,
#19
RE: Chudai Kahani वो शाम कुछ अजीब थी
सोनल : भाई कहीं घूमने चलें - बहुत बोर हो गयी हूँ.

सुनील : कहाँ चलना है .

सोनल : चल कोई मूवी देखने चलते हैं.

सुनील : ह्म्म्मे ठीक है चलो पहले बाहर कुछ खाएँगे फिर मूवी देखेंगे.

दोनो भाई बहन घर लॉक कर निकल पड़ते हैं.

वहाँ घंटे के बाद फ्लाइट गोआ उतर गयी और ये चारों अपने होटेल की तरफ रवाना हो गये. दोनो औरतों ने मर्दों को छेड़ खानी से रोका हुआ था - जब तक होटेल नही पहुँच जाते.

इस लिए सागर और समर चेहरा लटकाए बैठे रहे और दोनो बहने मंद मंद मुस्कुराती रही.

होटेल पहुँच के जब चेक इन किया तो समर लगभग खींचते हुए सुमन को अपने कमरे में ले गया उसने लगेज आने का भी इंतजार नही किया और सुमन पे टूट पड़ा.

सागर का कमरा इनके साथ वाला कमरा था.

समर ने सुमन को कुछ कहने का मोका तक ना दिया और उसके होंठ चूस्टे हुए उसके मम्मे ज़ोर ज़ोर से मसल्ने लगा.

सागर थोड़ा रोमॅंटिक किस्म का था उसने कमरे में घुसते ही पहले वाइन मँगवाई और तब तक समान भी आ गया.

सविता को बहुत शर्म आ रही थी - वो खिड़की की तरफ जा के खड़ी हो गयी. इतने में रूम सर्विस वाला वाइन भी ले आया.

सागर ने दो ग्लास में वाइन डाल ली और टेबल पे रख वो सविता के पीछे जा के खड़ा हो गया और अपने दोनो हाथ उसके कंधों से सरकाते हुए उसकी उंगलियों में अपनी उंगलियाँ फसा ली.
सविता की साँसे तेज चलने लगी.

सविता : पहले नहा के फ्रेश हो जाते हैं. ---- उखड़ी हुई सांसो से उसने मुश्किल से बोला.

सागर : एक साथ नहाएँगे.

सविता बाथ रूम में घुस गयी और सागर दोनो वाइन ग्लास ले कर बाथरूम में घुस गया.

सविता ने बाथ टब रेडी किया - और दोनो ने अपने कपड़े उतारे और बाथ तब में घुस गये.

सागर ने सविता को अपने उपर ले लिया दोनो वाइन सीप करते हुए बाथ टब में नहाने का मज़ा लेने लगे.



दूसरे कमरे में जब वेटर ने समान देने के लिए बेल बजाता है तो समर को मजबूरन सुमन को छोड़ना पड़ता है. सुमन के बाल बिखर चुके थे, होंठों की लिपस्टिक समर खा चुका था. ब्लाउस पूरा सिलवटों से भर गया था. 

सुमन खुद को वेटर की नज़रों से बचाने के लिए बाथरूम में घुस गयी.

समर ने समान जगह पे रखा तो सुमन को आवाज़ दी. सुमन ने बाथरूम से ही बोला अभी फ्रेश हो के आती हूँ. उसने दरवाजा अंदर से लॉक कर लिया था. समर ने बहुत बार कहा कि दरवाजा खोलो पर सुमन ने खिलखिला के जवाब दिया - अभी नही आराम से नहाने दो.

समर भुन्भुनाता हुआ हाल में बैठ गया और बियर की बॉटल खोल ली.

सुमन बाथ टब में पूरी मस्ती के साथ नहा रही थी और समर बाहर बैठा कूद रहा था.



दूसरे कमरे में सागर और सविता का हाल कुछ इस तरहा था - दोनो पूरी मस्ती में एक दूसरे को चूम रहे थे.

...............................................

सोनल और सुनील देल्ही में पहले पिज़्ज़ा खाने चले गये फिर सुनील सोनल को चाणक्या ले गया जहाँ जायदातर इंग्लीश मूवीस ही लगती थी.

सुनील ने कुछ ज़यादा ध्यान ना देते हुए एक ऐक्शन मूवी की टिकेट्स ले ली.

दोनो को कॉर्नर की सीट्स मिली थी इस बात से सोनल को काफ़ी राहत पहुँची और वो कॉर्नर वाली सीट पे बैठ गयी. सुनील अंदर की तरफ बैठ गया.
ज़यादा तार यहाँ पे कॉलेज के जोड़े ही आते हैं मुश्किल से कोई सिंगल होगा.

जैसे ही फिल्म शुरू हुई और अंधेरा हुआ जोड़े हरक़त में आ गये.
सोनल के बिल्कुल सामने वाला जोड़ा किस्सिंग करने लग गया.

चारों तरफ यही महॉल था और दोनो भाई बहन को उस हालत में वहाँ बैठना मुश्किल लग रहा था. सुनील तो अपनी नज़रें स्क्रीन पे जमा के बैठा रहा अब बहन के साथ होते हुए इधर उधर नज़रें दौड़ाना उसे ठीक नही लग रहा था.

तभी स्क्रीन पे एक बहुत ही हॉट सीन आ गया . सोनल को अपने भाई के साथ ऐसे सीन देखने में बड़ी शर्म आ रही थी. सुनील उसकी परेशानी समझ गया और खुद ही बाय्ल उठा - दी चलते हैं.

सोनल ने राहत की साँस ली और सुनील के साथ घर चली आई. दोनो भाई बहन अपने अपने कमरे में चले गये.
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06-11-2017, 09:00 AM,
#20
RE: Chudai Kahani वो शाम कुछ अजीब थी
सुनील तो पढ़ने बैठ गया पर सोनल के दिमाग़ से हाल का वो महॉल और हॉट सीन नही निकल रहा था.

वो आँखें बंद कर के बिस्तर पे लेट गयी और उसे उस सीन में अपने साथ सुनील दिखाई देने लगा.

वो घबरा के आँखें खोल बैठी और अपनी इस सोच पे खुद को लानत भेजने लगी तभी उसे माधवी की बातें याद आई और वो सोचने पे मजबूर हो गयी कि क्या वो अपने भाई से ही प्यार करने लगी है. नही - नही ये कभी नही हो सकता. खुद को लानत देती हुई वो बाथरूम में जा कर शवर के नीचे खड़ी हो गयी.

सोनल ठंडे पानी से नहाई और रात के खाने की तैयारी करने लगी.
सुनील जब पढ़ के फ्री हुआ तो सोचने लगा – दी को कितना अजीब लगा होगा – कैसी वाहियात फिल्म थी – काश पता होता तो टिकेट बिल्कुल भी नही लेता उस फिल्म की.

फिर सुनील को यकायक याद आया कि जब फिल्म में पहले एक रोमॅंटिक सीन चला था तो दी ने अपना सर उसके कंधों पे रख दिया था.

ऐसा क्यूँ हुआ – क्या दी भूल गयी थी कि वो मेरे साथ हैं . फिर उसके दिमाग़ में वो पल भी आया की जब सीन कुछ अडल्ट वाला आया था तो दी ने एक पल को उसका हाथ दबा दिया था और फिर अपना सिर उसके कंधे से हटा लिया था. जिसके बाद वो दोनो बाहर निकल गये.

‘ना ना ‘ क्या ऊटपटांग सोच रहा हूँ मैं – ऐसा कुछ नही – फिल्म कुछ ज़यादा अडल्ट निकली तो दी का बोखला जाना वाजिब था – आख़िर एक भाई के साथ ऐसी फिल्म कॉन बहन देख सकती है .

सुनील अपने बिस्तर पे लेट गया और आँखें बंद कर ली.

कुछ ही पलों में उसकी आँखों के आगे सोनल की वो छवि आ गयी जब वो नहा के सिर्फ़ एक टवल लपेटे हुए बाथरूम से बाहर निकली थी.

वो घबरा के उठ गया. ये ये…. उसे कुछ समझ नही आया – कि कैसे उसके जेहन में अपनी बड़ी बहन की वो छवि क़ैद हो के रह गयी.

वो खुद को कोसने लगा.

अब हाल ये था कि सुनील जब तक माँ बाप वापस नही आ जाते सोनल को अकेला नही छोड़ सकता था – उधर रूबी रमण से इतना नाराज़ हो गयी थी – या यूँ कहिए कि जिंदगी को ढंग से सोचने लगी थी - कि एक पल भी रमण के साथ अकेले में नही गुज़ारना चाहती थी – जैसे ही दोनो के माँ बाप गये – रूबी भी अपनी सहेली के घर चली गयी और रमण घर में अकेला रह गया.

दोस्तो अब ज़रा देखते हैं गोआ में क्या हो रहा है................................

अपने बालों को सुखाती हुई सुमन बाथरूम से बाहर निकली - वो इस वक़्त बात टवल में लिपटी हुई थी. इस वक़्त कोई भी सुमन को देख लेता तो सीधा उसका रेप करने पे उतारू हो जाता.
समर तो वैसे ही उफना हुआ बैठा था.

'अरे अभी से बियर !' सुमन समर को चिड़ाते हुए बोली.

'अभी बताता हूँ!' समर ने बियर कोई बॉटल टेबल पे रखी और सुमन की तरफ लपका. सुमन खिलखिलाती हुई इधर से उधर रूम में फुदकने लगी और समर उसे पकड़ने के लिए उसके पीछे पीछे - थोड़ी देर सुमन उसे छकाती रही फिर खुद ही बिस्तर पे हस्ती हुई गिर पड़ी और समर ने सीधा उसपे छलाँग ही लगा दी.

ऊऊऊऊओउुुुुुुुऊउक्कककककचह सुमन चीखी पर समर ने आगे उसे कुछ कहने का मोका ना दिया और पागलों की तरहा उसके होंठ चूसने लग गया. साथ ही उसके हाथ टवल में घुसा ज़ोर ज़ोर से सुमन के मम्मे मसल्ने लगे.

कुछ देर समर पागलों की तरहा सुमन को चूमता और मसलता रहा, उसके इस जंगलीपन में भी सुमन को बड़ा मज़ा आ रहा था.

फिर समर ने अपने कपड़े उतार फेंके और सुमन का टवल भी खींच के अलग कर डाला. सुमन का तराशा हुआ बदन उसमे और भी आग भड़का गया और वो सुमन पे टूट पड़ा. सुमन भी उसका साथ दे रही थी. समर के जंगलीपन की वजह से सुमन की चीखें निकलने लगी - जो दूसरे रूम तक जाने लगी और सागर और सविता की मस्ती को बढ़ाने लगी.



समर सुमन को ऐसे निचोड़ रहा था जैसे उसने बरसों से औरत को देखा ही ना हो.

म्म्म्मुममममममममाआआआआआआआआआआआआआआआ

सुमन ज़ोर से चीखी जब समर ने एक ही बार में अपना लंड उसकी चूत में घुसा डाला - सुमन की ये चीख शायद पूरे होटेल में हर गेस्ट ने ज़रूर सुनी होगी.

अहह उूउउफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ हहाआआआईयईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई

समर सटा सट सुमन को चोदने लग गया और सुमन चिल्लाती रही


अहह आअहह उूुउउफफफफफ्फ़ ऊऊऊऊओ उूुुुुुुउउइईईईईईईईईईईई

द्द्द्द्द्दद्धहिईीईईईइइर्र्र्र्रररीईईई म्म्म्मईममाआआआआआ

सुमन की सिसकियाँ तेज होने लगी - समर के जंगलीपन से उसे मज़ा आने लगा - शुरू में जो दर्द हुआ था वो अब मज़े में बदल गया था.
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