Click to Download this video!
Hindi Chudai Kahani मैं और मेरी स्नेहल चाची
06-21-2018, 10:58 AM,
#1
Lightbulb Hindi Chudai Kahani मैं और मेरी स्नेहल चाची
जब स्नेहल चाची काफ़ी सालों के बाद हमारे घर कुछ दिन रहने को आयीं तब मैंने सपनों में भी नहीं सोचा था कि उनकी उस विज़िट में कुछ ऐसे मोड़ मेरी जिंदगी में आयेंगे जो मुझे कहां से कहां ले जायेंगे. बात यह नहीं है कि जो कुछ हुआ, वह एकदम असंभव था; कुछ परिस्थितियों में और कुछ खास व्यक्तियों के बीच ऐसा कुछ ऐसा जरूर हो सकता था पर ऐसा हमारे यहां, मेरे साथ और वो भी स्नेहल चाची के कारण होगा, ये मैं कभी सोच भी नहीं सकता था, मेरे लिये ये एकदम असंभव सी बात थी. याने स्नेहल चाची जैसी वयस्क, संभ्रांत, हमारे रिश्ते में की और मेरी मां से भी बड़ी महिला मेरे जीवन में ऐसी उथल पुथल पैदा कर देंगी, ये अगर उस समय कोई मुझे कहता तो मैं उसे पागल कहता. अब हमारे यहां आते वक्त स्नेहल चाची के मन में क्या था यह मुझे नहीं मालूम, शायद उनसे पूछें तो वे भी यही कहेंगी कि हमारे यहां आते यह सब होगा ऐसा उन्होंने नहीं सोचा था.

मेरा नाम विनय है. जब यह सब शुरू हुआ उसी समय मैंने इंजीनीयरिंग पास की थी. हमारा घर पूना में है और मेरा सारा एजुकेशन वहीं हुआ है. घर में बस मां और पिताजी हैं. मैं इकलौता हूं इसलिये वैसे काफ़ी लाड़ प्यार में पला हूं. दिखने में साधारण एवरेज और बदन से जरा दुबला पतला सा हूं. याने वीक नहीं हूं, तबियत फ़र्स्ट क्लास है, बस दिखने में जरा नाजुक सा और छोटा लगता हूं. पढ़ाई लिखाई में मैं काफ़ी आगे रहा हूं पर मेरा स्वभाव पहले से शर्मीला सा रहा है. इसलिये लड़कियों से ज्यादा घुलमिल कर बात करने में हिचकिचाता हूं. गर्ल फ़्रेंड वगैरह भी कोई नहीं है.

स्नेहल चाची याने मेरे पिताजी के चचेरे भाई माधव चाचा की दूसरी पत्नी. उनका पूरा नाम स्नेहलता है पर सब स्नेहल ही कहते हैं. अभी उमर करीब पचास के आस पास होगी, शायद एकाध साल कम, मुझे ठीक पता नहीं है. उनका घर गोआ में है. माधव चाचा काफ़ी पहले जो ऑस्ट्रेलिया गये, वो वहीं रह गये. बाद में स्नेहल चाची भी गई थीं पर दो महने रह कर वापस आ गयीं. उन्हें वहां बिलकुल भी अच्छा नहीं लगा. उसके बाद वे एकाध दो बार और गयीं, वो भी बेमन से, उसके बाद वहां न जाने की जैसे उन्होंने कसम खा ली. माधव चाचा साल में एक बार दो हफ़्ते को छुट्टी लेकर आते थे. फ़िर वे दो साल में एक बार आने लगे और बाद में उन्होंने भी यहां आना करीब करीब बंद ही कर दिया.

लोग उनकी इस अजीब मैरिड लाइफ़ के बारे में पीठ पीछे बहुत कुछ कहते थे. कोई कहता कि उनमें बिलकुल नहीं बनती और उन्होंने एक दूसरे का मुंह न देखने की ठान ली है. कोई कहते कि उनका डाइवोर्स हो गया है पर किसी को बताया नहीं है. कोई कहता कि वहां ऑस्ट्रेलिया में माधव चाचा ने दूसरी शादी कर ली है, वगैरह वगैरह. धीरे धीरे लोगों ने इस बारे में बात करना छोड़ दिया, पर शायद इन सब बातों की वजह से स्नेहल चाची ने किसी के यहां आना जाना ही छोड़ दिया. लोग भी उनके बारे में दस तरह की बातें करते कि बड़े तेज स्वभाव की हैं, बहुत घमंड है वगैरह वगैरह. अब करीब छह सात साल बाद वे मां के आग्रह पर दस दिन के लिये हमारे यहां आयी थीं. इस बीच में दो तीन बार परिवार में शादी ब्याह के मौकों पर मिली थीं. मेरा और मां और पिताजी का तो यही अनुभव है कि वे जब भी मिलतीं तो बड़े प्रेम से बातें करती थीं. मुझे तो उनके स्वभाव में ऐसा कुछ दिखा नहीं कि जिससे लोग उनसे कतराते हों. पिछली बार जब मैं उनसे मिला था तब से चाची के बारे में मेरा दृष्टिकोण जरा सा बदल गया था. उसके बारे में आगे फिर बताऊंगा.

उनका बेटा अरुण दो साल से नाइजीरिया में था. अरुण असल में उनका सौतेला बेटा था, माधव चाचा की पहली पत्नी का बेटा जो स्नेहल चाची की मौसेरी बहन थीं. उनके दिवंगत होने के बाद चाची की शादी माधव चाचा से हुई थी, तब अरुण चार साल का था. चाची ने उसे बड़े लाड़ प्यार से अपने सगे बेटे जैसा पाल पोसकर बड़ा किया था. जहां तक मुझे मालूम है, अरुण को भी उनसे बहुत लगाव था. बाकी लोग उनके बारे में कुछ भी कहें, इस पर सबका एकमत था कि अरुण को उन्होंने बड़े प्रेम से पाला पोसा था.

अरुण ने काफ़ी दिन शादी नहीं की. लोग पूछ पूछ कर थक गये. आखिर अभी अभी एक साल पहले ही उसकी शादी हुई. उसकी पत्नी नीलिमा करीब करीब अरुण की ही उमर की थी, याने तैंतीस चौंतीस के आस पास की होगी. वह चाची के पास याने अपनी सास के पास गोआ में रहती थी. शादी के बाद वह नाइजीरिया गयी थी पर दो माह में ही लौट आयी, उसे वहां बिलकुल अच्छा नहीं लगा. वैसे अरुण की इच्छा थी कि नीलिमा और स्नेहल चाची, दोनों उसके साथ नाइजीरिया में रहें. अच्छी नौकरी थी, बड़ा बंगला था. पर उसने ज्यादा जोर नहीं दिया, वहां राजनीतिक अस्थिरता के साथ साथ लॉ एंड ऑर्डर का भी प्रॉब्लम था. स्नेहल चाची का भी यही विचार था कि फ़ैमिली का वहां रहना ठीक नहीं. इसलिये नीलिमा के वहां न जाने के निर्णय से वे सहमत थीं. अरुण का प्लान किसी तरह अमेरिका पहुंचने का था. पर वीसा वगैरह कारणों से वह प्लान बस आगे सरकता रहा. अब शायद एक साल और लगेगा ऐसा चाची कहती थीं.

मुझे ये सब डीटेल्स मालूम हैं इसका कारण यह नहीं है कि मैं चाची के सम्पर्क में रहा था. सब सुनी सुनाई बातें हैं. मैं तो अब तक उनके यहां गोआ वाले घर भी नहीं गया था. बाकी रिश्तेदार भले उनसे कतराते हों, मां से उनके बहुत अच्छे संबंध हैं इसलिये मां को सब जानकारी रहती है. नीलिमा भाभी से - अब चाची की बहू याने मुझे भाभी ही कहना होगा - मैं कभी मिला नहीं था, हां शादी के ग्रूप फोटॊ में देखा था.
Reply
06-21-2018, 10:59 AM,
#2
RE: Hindi Chudai Kahani मैं और मेरी स्नेहल चाची
जब वे आयीं तो स्नेहल चाची में मुझे कोई चेंज नहीं दिखा, तीन चार साल पहले देखा था वैसी ही थीं. वैसे मुझे जहां तक याद है, मैं बचपन से जब से उन्हें देख रहा हूं, वे वैसी ही दिखती हैं, थोड़ा स्थूल नाटा बदन, दिखने में वैसे ही जैसे सब उमर में बड़ी चाचियां मामियां बुआएं होती हैं. गोरा रंग, जूड़े में बंधे बाल, हमेशा साड़ी यह पहनावा, मंगलसूत्र, हाथ में कंगन या चूड़ियां वगैरह वगैरह. असल में उनमें बदलाव जरूर आया होगा, पंधरा साल में याने जब से मुझे उनके बारे में याद है, रूप रंग काफ़ी बदल जाता है. हां हमें यह बदलाव सिर्फ़ बच्चों और विनय युवक युवतियों में ही महसूस होता है, क्योंकि वे अचनाक बड़े हो जाते हैं, बाकी सब बड़े तो बड़े ही रहते हैं. एक बात यह भी है कि देखने का नजरिया कैसा है, किसी में बहुत इंटरेस्ट हो तो उसके रंग रूप की ओर बड़ा ध्यान जाता है, नहीं तो कोई फरक नहीं पड़ता. यह साइकलाजी अधिकतर टीन एजर्स की होती है.

इस बार जब स्नेहल चाची हमारे यहां आईं तब मैंने नौकरी की तलाश शुरू कर दी थी. पिताजी की इच्छा थी कि आगे पढ़ूं पर मैं बोर हो गया था और एक दो जगह से अपॉइन्टमेन्ट लेटर आने की भी उम्मीद थी, क्योंकि इन्टरव्यू अच्छा हुआ था. संयोग की बात यह कि जब इस बार वे हमारे यहां आयीं, तब मेरा भी गोआ जाने का प्लान बन रहा था. उनके आने के दो दिन पहले ही मुझे एक ऑफ़र आया था. नौकरी अच्छी थी. पोस्टिंग नासिक में थी पर तीन महने की ट्रेनिंग थी गोआ में. वहां कंपनी का गेस्ट हाउस था और वहां मेरे रहने की व्यवस्था कंपनी ने कर दी थी.

स्नेहल चाची के आने के दूसरे दिन जब हमारी गपशप चल रही थी तब इस बारे में बातें निकलीं. वैसे हर बार चाची मुझसे बड़े स्नेह से बोलतीं थीं. बाकी लोगों का उनके प्रति कुछ भी विचार हो, मुझे तो बचपन से बड़ी गंभीर रिस्पेक्टेबल महिला लगती थीं. बैठकर उनसे बातें करते वक्त मैंने उनकी ओर जरा और गौर से देखा. इस बार वे करीब चार साल बाद मिली थीं. जैसा मैंने पहले कहा, मुझे उनमें ज्यादा फरक नहीं लगा. हां बदन थोड़ा और भर गया था और बालों में एक दो सफ़ेद लटें दिखने लगी थीं. मुझसे इस बार उनकी काफ़ी जम गयी थी, कई बार गपशप होती थी.

उस दिन जब मेरी नौकरी के बाते में बातें निकलीं, तब हम सब बैठकर बातें कर रहे थे. मां और चाची गोआ में बसे कुछ दूर के रिश्तेदारों के बारे में बातें कर रही थीं. मैंने कुछ नाम भी सुने, लता - मां की कोई बहुत दूर की कज़न, गिरीश - मां की एक पुरानी फ़्रेंड का भाई जो शायद गोआ में बस गया था, सरस्वती बुआ - ऐसी ही कोई दूर की बुआजी आदि आदि. मैंने उसमें ज्यादा इंटरेस्ट नहीं लिया. चाची ने भी सिर्फ़ लता के बारे में डीटेल में बताया कि वह अब गोआ में एक बड़ी कंपनी में ऊंचे ओहदे पर है. बाकी लोगों से शायद वे ज्यादा संपर्क में नहीं थीं.

मेरे कॉलेज के बारे में चाची ने पूछा, आगे और पढ़ने का इरादा नहीं है क्या, कहां कहां घूम आये हो, गोआ अभी तक क्यों नहीं आये, वगैरह वगैरह. मैंने तब तक उनको इस नये ऑफ़र के बारे में नहीं बताया था. आखिर मां ने ही बात छेड़ी कि विनय को नासिक में नौकरी मिली है, गोआ में ट्रेनिंग है.

स्नेहल चाची मेरी ओर देखकर जरा शिकायत के स्वर में बोलीं. "विनय, तूने बताया नहीं अब तक, दो दिन हो गये, मैं पूछ भी रही थी कि आगे क्या प्लान है. और यहां तेरे को गोआ में, हमारी जगह में नौकरी मिल रही है और तू छुपा रहा है"

मैंने झेंप कर कहा "चाची ... सच में आप से नहीं छुपा रहा था ... वो पक्का नहीं है अब तक कि जॉइन करूंगा या नहीं ... कभी लगता है कि अच्छा ऑफ़र है और कभी ... वैसे पोस्टिंग गोआ में नहीं है, सिर्फ़ तीन महने की ट्रेनिंग वहां है"

"अरे ... गोआ जैसी जगह में ट्रेनिंग है और तू नखरे कर रहा है. चल, उनको चिठ्ठी भेज दे कल ही, वहां रहने की भी परेशानी नहीं है" चाची ने जोर देकर कहा.

मैंने सकुचाते हुए कहा "हां स्नेहल चाची ... उन्होंने अपने गेस्ट हाउस में इंतजाम किया है ..."

"गोआ आकर गेस्ट हाउस में रहने का क्या मतलब है? अपना घर है ना वहां?"

मैंने सफ़ाई दी "चाची, गेस्ट हाउस भी पणजी में है, और ट्रेनिंग भी वहीं बस स्टेशन के पास के ऑफ़िस में है, इसलिये ..."

"तो अपना घर कौन सा कोसों दूर है? पोरवोरिम में तो है, चार किलोमीटर आगे. और खूब बसें मिलती हैं" फ़िर मां की ओर मुड़कर बोलीं "वो कुछ नहीं आशा, ये हमारे यहां ही रहेगा. वहां हमारा घर होते हुए विनय और कहीं रहे ये शरम की बात है"

"पर चाची ... वो ..." मैं समझ नहीं पा रहा था कि उनसे क्या कहूं. असल में उनके यहां रहने में संकोच हो रहा था. सगी मौसी या मामा के यहां, जिनसे घनिष्ट संबंध होते हैं, रहना बात अलग है और रिश्ते की जरा दूर की चाची के यहां की बात और ...... मन में ये भी इच्छा थी कि पहली बार अकेला रहने को मिल रहा है, तो गेस्ट हाउस में रहकर ज्यादा मजा आयेगा, गोआ में थोड़ी ऐश भी हो जायेगी, किसी का बंधन नहीं रहेगा. होस्टल में तो मैं रहा नहीं था, होस्टल में रहते दोस्तों से जलन होती थी, सोचा इसी बहाने होस्टल का भी एक्सपीरियेंस हो जायेगा.

"अरे इतना बड़ा बंगला है. बीस साल पहले लिया था सस्ते में, आस पास बगीचा है एक एकड़ का. और बस मैं और नीलिमा ही रहते हैं वहां. अरुण तो कई सालों से नहीं है. तू आयेगा तो हमें भी कंपनी मिलेगी, जरा अच्छा लगेगा." चाची ने फ़िर आग्रह किया.

मैंने मां की ओर देखा, उसकी तो पहले ही स्नेहल चाची से अच्छी पटती थी. उसने मेरे मन की जान ली, बोली कि हां चाची, आप ठीक कह रही हैं. मैं अड़ने वाला था कि गेस्ट हाउस में ही रहूंगा पर मां के तेवर देखकर चुप रहा. उसने मुझे इशारा किया कि फालतू तू तू मैं मैं मत कर, बाद में देखेंगे.
Reply
06-21-2018, 10:59 AM,
#3
RE: Hindi Chudai Kahani मैं और मेरी स्नेहल चाची
उस समय मैं बात टाल गया. सौभाग्य से दूसरे दिन एक नजदीकी शादी का फ़ंक्शन था तो सब उसमें बिज़ी थे. इसलिये बात फ़िर से नहीं निकली. मैं मना रहा था कि चाची भूल ही जायें कहकर तो अच्छा है. सोचा कि हो सकता है उन्होंने सिर्फ़ फ़ॉर्मलिटी में कह दिया हो. वैसे उनके चेहरे पर से लगता नहीं था कि उन्होंने बस शिष्टाचार के लिये कहा होगा, उनके चेहरे के भाव में सच में आत्मीयता थी जब उन्होंने मुझसे साथ रहने का आग्रह किया था. मां ने दूसरे दिन एक बार मुझे कहा कि अरे चाची ठीक कह रही हैं. वहां रह लेना, तेरा खूब खयाल रखेंगीं वे, तीन महने की तो बात है. उनको अच्छा लगेगा, हम भी आश्वस्त रहेंगे कि तेरे को खाने पीने की कोई परेशानी नहीं है. मैंने कहा कि मां सोच के बताता हूं एक दो दिन में, चाची तो अभी हैं ना कुछ दिन.

दो तीन दिन ऐसे ही निकल गये. उन दिनों में स्नेहल चाची से मेरी जान पहचान थोड़ी और गहरी हो गयी. अब तक जब भी वे मिली थीं, मेरा बचपन ही चल रहा था. ऐसे उनके साथ रहना भी नहीं हुआ था. अब बड़ा होने के बाद पहली बार उनके साथ रह रहा था, उनके स्वभाव, उनके रहन सहन, उनके बोलने हंसने की ओर ध्यान जाने लगा. उनके प्रति मेरे मन में सम्मान की भावना थोड़ी बढ़ गयी. बड़ा शांत सादा स्वभाव था. साथ ही उनसे थोड़ा डर भी लगता था, याने जैसा बच्चों को किसी स्ट्रिक्ट लेडी प्रिन्सिपल के प्रति लगेगा वैसा डर, सम्मान युक्त डर. इनके साथ ज्यादा पंगा नहीं लिय जा सकता, यह भावना. और बाद में मां ने एक बार बताया भी कि वे कुछ साल पहले एक स्कूल में प्रधान अध्यापिका थीं. फ़िर नौकरी छोड़ दी. याने मुझे वे जो किसी स्ट्रिक्ट डिसिप्लिनेरियन जैसी लगती थीं, वो मेरा वहम नहीं था. मां भी उनको बड़ा रिस्पेक्ट देती थीं. उनका रहन सहन सादा ही था, याने घर में भी साड़ी पहनती थीं, गाउन नहीं. पर साड़ी हमेशा एकदम सलीके से पहनी हुई होती थी, प्रेस की, प्रेस का ब्लाउज़, फ़िटिंग भी एकदम ठीक, कोई ढीला ढाला पन नहीं.

अब असली मुद्दे पर आता हूं. मेरी नयी नयी जवानी थी, खूबसूरत लड़कियों और आंटियों की तरफ़ ध्यान जाने लगा था. इस उमर के लड़कों की तरह अब राह चलती खूबसूरत सूरतों को तकने का मन होता था. फ़िर इन्टरनेट का चस्का लगना शुरू हुआ. घर में पी सी था, वह पिताजी भी यूज़ करते थे. इसलिये उसपर कोई ऐसी वैसी साइट्स देखने का सवाल ही नहीं था. जब मन होता, तो उस वक्त तक इन्तजार करना पड़ता था जब तक किसी दोस्त का, खास कर होस्टल में रहने वाले दोस्त का लैपटॉप ना उपलब्ध हो.

स्नेहल चाची के आने के तीन चार दिन बाद एक दिन मैं अपने दोस्त से मिलने होस्टल गया. वह अब भी होस्टल में था, एक दो सब्जेक्ट क्लीयर करने थे. गप्पें मारते मारते जब काफ़ी वक्त हो गया, वो बोला "यार बैठ, मैं नहा कर आता हूं. आज देर से उठा, दिन भर ऐसा ही गया. तब तक ये एक साइट खुली है, जरा देख." और मुझे आंख मार दी. रंगीन मिजाज का बंदा था, अकेला भी रहता था. मेरा भी कभी मन होता था खूबसूरत जवान रंगीन तस्वीरें देखने का तो उसीका लैपटॉप काम आता था. और उसे मालूम था कि मेरा दिल आज कल आंटियों पर ज्यादा आता है.

अब पहले मैंने आप को बताया था कि मेरा स्वभाव जरा शर्मीला है, गर्ल फ़्रेंड वगैरह भी नहीं है अब तक. अब शर्मीला स्वभाव होने का मतलब यह नहीं है कि लड़कियों में मेरी कोई दिलचस्पी नहीं है. उलटे बहुत ज्यादा है, और जवान लड़कियों से ज्यादा अब धीरे धीरे मेरी दिलचस्पी आंटियों में ज्यादा होने लगी है. बड़ी तकलीफ़ होती है, अब जवानी भी जोरों पर है और ये मेरा बदमाश लंड बहुत तंग करने लगा है, कई बार हस्तमैथुन करके भी इसकी शांति नहीं होती.

वो साइट खोली तो जरा अजीब सा लगा. मुझे लगा कि आंटी वांटी के फोटो होंगे. पर उन महाशय ने मेच्योर याने उमर में काफ़ी बड़ी औरतों की एक साइट खोल रखी थी. वैसे मुझे उनमें कोई खास दिलचस्पी नहीं थी, मैं तो जवान मॉडल टाइप या फ़िर तीस पैंतीस साल की आंटियों की तस्वीरें देखने में ज्यादा दिलचस्पी दिखता था. पर यहां अधिकतर पैंतालीस, पचास की उमर की औरतें थीं. वैसे उनमें से कुछ अच्छी सेक्सी थीं. मैं इन्टरेस्ट से देखने लगा. स्क्रॉल करते करते एक तस्वीर पर मैं ठिठक गया. एक गोरी चिट्टी औरत चश्मा लगाकर पढ़ रही थी पर थी बिलकुल नंगी. पचास के ऊपर की थी, ऊंची पूरी, मांसल सेक्सी बदन की, हाइ हील पहने हुए, लटके हुए पर मस्त मम्मे, मोटी चिकनी गोरी गोरी जांघें. याने उसके सेट की सब तस्वीरें देखने लायक थीं. पर मैं इसलिये चौंका कि उसे देखते ही मुझे न जाने क्यों चाची की याद आ गयी. उसका चेहरा या बदन चाची से जरा नहीं मिलता था, चाची नाटी सी हैं, यह औरत ऊंची पूरी थी, चाची जूड़े में बाल बांधती हैं, इस औरत के बॉब कट बाल थे, चाची पूरी देसी हैं, यह औरत पूरी फिरंगी थी. पर सब मिलाकर जिस अंदाज में वह सोफ़े पर पैर ऊपर करके बैठी थी, चाची को भी मैंने कई बार वैसे ही पैर ऊपर करके पढ़ते देखा था. और उसने चाची जैसा ही सादे काले फ़्रेम का चश्मा लगाया हुआ था. और सब से संयोग की बात यह कि मुस्कराते हुए उसके दो जरा टेढ़े दांत दिख रहे थे, चाची के दो दांत भी आगे बिलकुल वैसे ही जरा से टेढ़े हैं.

देखकर अजीब लगा, थोड़ी गिल्ट भी लगी कि चाची को मैंने उस नंगी मतवाली औरत से कम्पेयर कर लिया. मैं आगे बढ़ गया. पर पांच मिनिट बाद फ़िर उसी पेज पर वापस आकर उस महिला के सब फोटो देखने लगा. और न जाने क्यों लंड एकदम खड़ा हो गया. अब वो उस नग्न परिपक्व महिला का खाया पिया नंगा बदन देखकर हुआ था या उस तस्वीर को देखकर चाची याद आ गयी थीं इसलिये हुआ था, मुझे भी नहीं पता. वैसे एक छोड़कर बाकी किसी तस्वीर में उस औरत और चाची के बाच कोई समानता नहीं दिखी मुझे. उस दूसरी तस्वीर में भी वह औरत मुस्करा रही थी और उसके दांत साफ़ दिख रहे थे.

मेरा दोस्त वापस आया तब तक मैंने लैपटॉप बंद कर दिया था. उसने पूछा "यार देखा नहीं?"

"देखा यार पर ये तेरे को क्या सूझी कि आंटियों से भी बड़ी बड़ी औरतों को - नानियों को - देखने लगे?" मैंने मजाक में कहा.

"अरे यार, हर तरह की साइट देखता हूं मैं, जब मूड होता है, वही सुंदर जवान लड़कियां आखिर कितनी देखी जा सकती हैं. और तेरे को भी तो अच्छी लगती हैं साले, बन मत मेरे सामने. और नानी तो नानी सही, ऐसी नानियां दादियां हों तो मुझे चलेंगी"
Reply
06-21-2018, 10:59 AM,
#4
RE: Hindi Chudai Kahani मैं और मेरी स्नेहल चाची
घर वापस आते वक्त बार बार मन में चाची ही आ रही थीं. याने ऐसा नहीं था कि अब मैं उनको बुरी नजर से देखने लगा था, बल्कि इसलिये कि आज जो कुछ देखा था, और उसका मेरे मन पर जो प्रभाव पड़ा था, उसे मैं समझने की कोशिश कर रहा था. तभी मुझे चार साल पहले की वह घटना याद आ गयी जिसका जिक्र मैंने पहले किया था. उस समय हम सब एक शादी के सिलसिले में नासिक गये थे. मेरे मामा के मकान में रुके थे. चाची भी आयी थी. वहां से शादी का हॉल दूर था. सुबह सब जल्दी चले गये, चाची रात देर से आयी थीं इसलिये थकी हुई थीं. वे सब से बाद नहाने गयीं. मां ने मुझे कहा कि तू रुक और फ़िर चाची को साथ लेकर आ. आधे घंटे बाद जब मैं चाची के कमरे में गया कि वे तैयार हुईं कि नहीं, तब वे साड़ी ही लपेट रही थीं. मुझे देखकर बोलीं "विनय, अब जरा जल्दी मेरे सूटकेस से वो गिफ़्ट एन्वेलप निकाल कर उसमें ये ५०० रु रख दे, मैं बस पांच मिनिट में तैयार होती ही हूं.

उस काम को करते करते सहज ही मेरी नजर चाची पर जा रही थी. उन्होंने आंचल ठीक किया, फ़िर थोड़ा स्नो और पाउडर लगाया और फ़िर बिंदी लगाई. उन्होंने एकदम मस्त गहरे ब्राउन रंग की साड़ी और ब्लाउज़ पहना हुआ था. उनके गोरे रंग पर वह अच्छी निखर आयी थी. तब तक मैंने चाची के बारे में बस अपने रिश्ते की एक बड़ी उमर की महिला इसी तरह सोचा था. अब हम सब की पहचान वाली और रिश्ते में उस उमर की बहुत महिलायें होती हैं और उनसे बात करते वक्त ऐसा वैसा कुछ कभी दिमाग में भी नहीं आता. पर तब चाची को उस अच्छी साड़ी और ब्लाउज़ में देखकर और खास कर उस महीन कपड़े से सिले ब्लाउज़ की पीठ में से दिखती काली ब्रा की स्ट्रैप देखकर एकदम से जैसे इस बात का एहसास हुआ कि शायद वे भी एक ऐसी स्त्री हैं जिसे सुंदर स्मार्ट दिखने की और उसके लिये अच्छे सटीक कपड़े पहनने की इच्छा है. याने बस एक उमर में बड़ी रिश्तेदार महिला, इसके आगे भी उनका एक स्त्री की हैसियत से कोई अस्तित्व है. उसके बाद एक बार मामी के यहां के पुराने एलबम में चाची के बहुत पुराने फोटो देखे. तब वे जवान थीं. सुन्दर न हों फ़िर भी अच्छी खासी ठीक ठाक दिखती थीं.

बस ऐसे ही स्नेहल चाची के बारे में सोचते हुए मैं घर आया. घर वापस आया तो बस पांच मिनिट के अंदर एक और झटका लगा. और यह झटका जोर का था, उससे मेरे मन की उथल पुथल शांत होने के बजाय और बढ़ गयी. हुआ यूं कि दोपहर का खाना खाकर मां और चाची बाहर ड्रॉइंग रूम में बैठे थे. मां टी वी देख रही थी और चाची पढ़ रही थीं. और संयोग से बिलकुल वही हमेशा का पोज़ था, याने सोफ़े पर पैर ऊपर करके एक तरफ़ टिक कर चश्मा लगाकर चाची पढ़ रही थीं. न चाहते हुए भी मुझे उस साइट की वह औरत याद आ गयी. मैं बैठ कर जूते उतारने लगा. मां नौकरानी को कुछ कहने को अंदर चली गयी, शायद मेरे लिये खाना भी लगाना था. चाची ने किताब बाजू में की और चश्मा नीचे करके मेरी ओर देखकर स्नेह से मुस्करायीं "आ गये विनय! आज दिखे नहीं सुबह से"

"हां चाची, वो दोस्त से मिलने गया था, देर हो गयी" मैंने धड़कते दिल से कहा.

वे मुस्करायीं और चश्मा ठीक करके फ़िर से पढ़ने लगीं. मैं अंदर जाकर कपड़े बदलकर हाथ मुंह धो कर वापस आया और पेपर पढ़ने लगा. पेपर पढ़ते पढ़ते बार बार चोरी छिपे नजर चाची की ओर जा रही थी. अब वे साड़ी पहनी थीं इसलिये बदन ढका ही था पर कोहनी के नीचे उनकी बाहें और पांव दिख रहे थे. पहली बार मैंने गौर किया कि थोड़ी मोटी और भरी भरी होने के बावजूद उनकी बाहें कितनी सुडौल और गोरी चिकनी थीं. पांव भी एकदम साफ़ सुथरे और गोरे थे, नाखून ठीक से कटे हुए और उनपर पर्ल कलर का पॉलिश. हो सकता है कि अगर अब इस वक्त कुछ नहीं होता तो शायद मैं फ़िर से संभल जाता, चाची के बारे में सोचना बंद कर देता और फ़िर से उनकी ओर सिर्फ़ उमर में मां से भी बड़ी एक स्त्री जो रिश्ते में मेरी दूर की चाची थीं, देखने लगता. पर जो आगे हुआ उसकी वजह से मेरे मन की चुभन और तीव्र हो गयी.

मां ने अंदर से उन्हें किसी काम से आवाज लगायी. वे जरा जल्दी में उठीं और स्लीपर पहनने लगीं. जल्दबाजी में उनके हाथ की किताब नीचे गिर पड़ी. उन्होंने नीचे देखा तो चश्मा भी नीचे गिर पड़ा. वे पुटपुटाईं "ये मेरा चश्मा ... हमेशा गिरता है आजकल ..." और किताब और चश्मा उठाने को नीचे झुकीं. उनका आंचल कंधे से खिसक कर नीचे हो गया. किताब और चश्मा उठाने में उन्हें जरा वक्त लगा और तब तक बिलकुल पास से और सामने से उनके ढले आंचल के नीचे के वक्षस्थल के उभार के दर्शन मुझे हुए. उनके ब्लाउज़ के नेक कट में से मुझे उनके गोरे गुदाज स्तनों का ऊपरी भाग साफ़ दिखा. उनके स्तनों के बीच की गहरी खाई में उनका मंगलसूत्र अटका हुआ था. ब्लाउज़ के सामने वाले भाग में से उनकी सफ़ेद ब्रा के कपों का ऊपरी भाग भी जरा सा दिख रहा था. सीधे होकर उन्होंने आंचल ठीक किया और अंदर चली गयीं. मैं आंखें फाड़ फाड़ कर उनके उस शरीर के लावण्य को देख रहा था, इस बात की ओर उनका ध्यान गया या नहीं, मुझे नहीं पता. अंदर जाते वक्त भी मेरी निगाहें उनकी पीठ पर टिकी हुई थीं. वैसे उनकी पीठ रोज भी कई बार मुझे दिखती थी पर आज मेरी नजर उनके ब्लाउज़ के कपड़े में से हल्की सी दिखती ब्रा की पट्टी पर जमी थी.
Reply
06-21-2018, 10:59 AM,
#5
RE: Hindi Chudai Kahani मैं और मेरी स्नेहल चाची
मैं बैठा बैठा उन कुछ सेकंडों में दिखे दृश्य को याद करता रहा. मन में एक मीठी सिहरन होने लगी, मन ही मन खुद से बोला कि बेटे विनय, तूने कभी सपने में भी सोचा था कि उमर में तेरी मां से भी बड़ी स्नेहल चाची के स्तन इतने तड़पा देने वाले होंगे.

वह एक बहुत निर्णायक क्षण था. उस क्षण के बाद चाची की ओर देखने का मेरा नजरिया ही बदल गया, सिर्फ़ चाची ही नहीं, बड़ी उमर की हर नारी की ओर देखने का दृष्टिकोण बदल गया. उमर में बड़ी नारियां भी कितनी सेक्सी हो सकती हैं, यह बात दिमाग में घर कर गयी. उस दिन बचे हुए समय में मैंने कोई गुस्ताखी नहीं की, उलटे बड़ी सावधानी से चाची से दूर रहा, वे एक कमरे में तो मैं दूसरे कमरे में, बल्कि शाम को मैं जो बाहर गया वह देर रात ही वापस आया. अब उनको देखते ही दिल में कैसा तो भी होता था. उनसे अब ठीक से पहले जैसी बातें भी मैं कर सकूंगा कि नहीं, यह भी मुझे विश्वास नहीं था, क्योंकि अब दिल साफ़ नहीं था, दिल में चाची के प्रति बहुत तेज यौन आकर्षण बैठ गया था.

उस रात मुझे हस्तमैथुन करना पड़ा, नींद ही नहीं आ रही थी, लंड साला सोने नहीं दे रहा था. और झड़ते वक्त चाची के मुलायम वक्षस्थल का वह दृश्य मेरी आंखों के सामने तैर रहा था.

दूसरे दिन से यह सब सावधानी जैसे गायब हो गयी, उसका मेरे लिये कोई मायना नहीं रहा, मैं जैसे चाची के पीछे बौरा गया. याने कोई गुस्ताखी कर बैठने का मन था यह बात नहीं थी, उतना साहस अब भी मुझमें नहीं था और न कभी पैदा होगा यह भी मैं जानता था. हां उनको देखने की धुन में अब मुझे और कुछ नहीं सूझता था. जैसा जमे, जितना जमे, उनकी और घर वालों की नजर बचाकर चाची को देखने की धुन मुझे सवार हो गयी. अब हर किसी मर्द को मालूम है कि घर आयी औरतों को देखने का भी एक तरीका होता है, और वह तरीका ज्यादातर जवान औरतों और लड़कियों के बारे में अपनाना पड़ता है, क्योंकि उमर में बड़ी औरतों की ओर सहसा ऐसी नजर नहीं जाती, उनके प्रति ज्यादा आकर्षण भी नहीं होता. हम रिश्ते की इतनी सारी प्रौढ़ स्त्रियों के संपर्क में होते हैं, कोई बारीक होती हैं, कोई मोटी सिठानी, कई फूले फूले बदन की होती हैं, अब चेहरा अगर बहुत सुन्दर ना हो तो हम उस बारे में सोचते भी नहीं, उनको आकर्षक स्त्री रूप में नहीं देखते, उनको हमेशा बुआ, मौसी, नानी, दादी इसी रूप में देखते हैं. बस इसलिये मेरा भी इतने दिन ध्यान चाची पर नहीं गया था.

पर अब मेरी नजरें बस चाची को ही ढूंढती थीं. और जितना देखूं, वो कम था. जल्द ही बात मुझे समझ में आ गयी कि ... याने ठेठ भाषा में कहा जाय तो ... चाची ’माल’ थीं. अब उनके उन मांसल गोरे गुदाज उरोजों की एक झलक देखने के बाद उनके रूप का हर छोटा से छोटा कतरा भी मेरी नजर में भर जाता था. पहली बार मैं उनकी हर चीज को बड़े गौर से देखने लगा था. स्नेहल चाची का कद एवरेज ही था, पांच फुट एक या दो इंच के आस पास होगा. याने नाटी नहीं थीं पर खाया पिया बदन होने की वजह से जरा नाटी लगती थीं. वजन पैंसठ और सत्तर किलो के बीच होगा, याने अच्छी खासी मांसल और भरे पूरे बदन की थीं. पर वैसे शरीर बेडौल नहीं था, कमर के मुकाबले छाती और कूल्हे ज्यादा चौड़े थे याने फ़िगर अब भी प्रमाणबद्ध था. रंग गेहुआं कह सकते हैं, वैसे उससे ज्यादा गोरा ही था. पर स्किन की क्वालिटी ... एकदम मस्त, चिकनी, इतना अच्छा काम्प्लेक्शन, वो भी इस उमर में बहुत कम स्त्रियों का होता है.

दिखने में चेहरे मोहरे से चाची एकदम सादी थीं. किसी भी तरह से उन्हें कोई सुंदर नहीं कह सकता था. हां ठीक ठाक रूप था. कुछ बाल सफ़ेद हो गये थे, पर अधिकतर काले थे. पर जैसे भी थे, उनके बाल बड़े सिल्की और मुलायम थे. वे हमेशा उन्हें जूड़े में बांधे रहतीं. होंठ गुलाब की कली वली की उपमा देने लायक भले ना हों पर मुझे अच्छे लगे, याने थोड़े मोटे और मांसल थे पर एकदम चुम्मा लेने लायक. और दांत ... उन दो टेढ़े दांतों की वजह से ही मेरे मन में ये सब तूफान उठना शुरू हुआ था और अब वे टेढ़े दांत ही मुझे एकदम सेक्सी लगने लगे थे. एकदम सफ़ेद अच्छे स्वस्थ दांत थे चाची के, और वे हंसतीं तो ऊपर का होंठ थोड़ा ऊपर सिकुड़ जाता और उनका ऊपर का गुलाबी मसूड़ा दिखने लगता. किस करते वक्त कैसा लगेगा, यही मेरे मन में बार बार आता.

चाची के चेहरे से ज्यादा उनके शरीर को देखने में मेरा सबसे ज्यादा इन्टरेस्ट था. अब शरीर ज्यादा दिखता नहीं था, आखिर चाची एक संभ्रांत महिला थीं, कोई शरीर प्रदर्शन करती नहीं घूमती थीं, घर में साड़ी पहनती थीं, साड़ी ब्लाउज़ पहनकर जितना शरीर दिख सकता है, उतना ही दिखता था. वे अधिकतर कॉटन की साड़ी ब्लाउज़ ही पहनती थीं, याने ब्लाउज़ वैसा नहीं होता था जैसा मैंने पहले लिखा है और जिसमें से मुझे कुछ साल पहले उनकी काली ब्रा की पट्टी दिख गयी थी. हां उनके एक दो ब्लाउज़ टाइट थे, उन कॉटन के ब्लाउज़ में से भी नीचे की ब्रा की पट्टी का उभार सा दिखता था, बस, पर मुझे इतना ही काफ़ी था, बस रंगीन कल्पना में डूब जाता कि चाची ब्रा कैसी पहनती होंगी. एक दिन पहने हुए एक सफ़ेद जरा झीने ब्लाउज़ में से यह भी दिखा कि पीठ पर ब्रा के पट्टी का आकार यू शेप का था, याने अच्छी खासी मॉडर्न ब्रा पहनती होंगी चाची, पुराने ढंग की महिलाओं जैसी बॉडी या शेपलेस चोली नहीं. ब्रा का स्ट्रैप जिस तरह से उनकी पीठ के मांसल भाग में गड़ा हुआ रहता था, वह भी मेरी नजर से नहीं छुप पाया.

वैसे घर के पीछे आंगन में सूखने डाले कपड़ों में मुझे मां के कपड़ों के साथ चाची के भी अंगवस्त्र दिखते थे पर मैं बस दूर से देखता था. पास जाकर देखने की हिम्मत नहीं हुई क्योंकि मां हमेशा ही घर में रहती थी और पकड़े जाने का डर था. फ़िर भी एक बार एकादशी के दिन जब मां और चाची दोपहर को दस मिनिट के लिये बाहर पास के मंदिर में गये थे, मैंने झट से आंगन में जाकर चाची की गीली ब्रा को हाथ लगाकर देख भी लिया था. अब गीला भीगी ब्रा में देखने जैसा कुछ होता नहीं, पर फ़िर भी उस सफ़ेद अच्छी क्वालिटी के कपड़े की ब्रा के कप और सफ़ेद इलास्टिक की स्ट्रैप देखकर मन में एक अनोखा उद्वेग सा हो आया था.
Reply
06-21-2018, 11:00 AM,
#6
RE: Hindi Chudai Kahani मैं और मेरी स्नेहल चाची
चाची के हमेशा साड़ी पहनने का एक फायदा था कि उनके ब्लाउज़ और साड़ी के बीच में की सीनरी हमेशा खुली होती थी और आसानी से दिखती थी. कमर के बाजू में मांस के हल्के से टायर से बन गये थे. सामने से उनका मुलायम गोरा पेट दिखता था. मांसल चिकनी पीठ थी. साड़ी के घेर से इतना पता चलता था कि कमर की नीचे का भाग अच्छा खासा चौड़ा था. इससे अंदाजा लगा सकते थे कि अच्छे चौड़े कूल्हे हैं और उतने ही बड़े तरबूज जैसे नितंब होंगे. बार बार मन में यही आता था कि क्या माल है.

इन दिनों कई बार मुझे उनके उन लुभावने उरोजों की झलक दिखी, आखिर एक घर में रहते हुए यह सब तो होगा ही. पूरे स्तन नहीं दिखे, वो तो सिर्फ़ उनकी नग्नावस्था में दिख हो सकते थे, पर जब वे कभी झुकती थीं, तो ब्लाउज़ के ऊपर से स्तनों के ऊपरी भाग की एक झलक मिल ही जाती थी; कभी आंचल ठीक करते वक्त दो सेकंड के लिये उनका पल्लू हटता था और सिर्फ़ ब्लाउज़ में ढकी उनकी छाती मेरे सामने आ जाती थी. जब जब ऐसा होता था, ब्लाउज़ में बने हुए उन दो उभारों को देखकर मेरे मन में भूचाल आ जाता था, लंड सिर उठाने लगता था, किसी तरह रोक कर रखता था और फ़िर मौका मिलते ही अकेले में हस्तमैथुन कर लेता था, उसके बिना दिल की आग नहीं शांत नहीं होती थी.

अब यह सब देखते वक्त मैं कितनी भी सावधानी बरतूं, एकाध बार चाची की समझ में आना ही था कि मैं उनको घूर रहा हूं. वैसे वे कुछ बोली नहीं, एकाध बार मुझे अपनी ओर तकता देख कर मुस्करा दीं. बड़ी मीठी आत्मीयता से भरी मुसकान थी. मुझे थोड़ी गिल्ट फ़ीलिंग भी हुई पर अब मैं इस सबके पार जा चुका था, चाची पर मर मिटा था. यह भी मन बना लिया था कि गोआ वाली नौकरी ही चुनूंगा और गोआ की ट्रेनिंग चाची के घर रहकर ही लूंगा. और कुछ हो न हो, चाची के साथ तो रहने का मौका मिलेगा. कंपनी को ईमेल से अपना कन्फ़र्मेशन भी भेज दिया था.

जब मैंने मां को और चाची को बताया तो दोनों बहुत खुश हुईं. मां की खुशी का कारण तो समझ में आता था कि उसके मन को आसरा मिल गया था कि बेटा अब पहली बार गोआ जा रहा है तो आराम से रहेगा. स्नेहल चाची शायद इसलिये खुश हुई होंगी कि ... मैंने उनकी बात मानी? ... मां से उनको लगाव था? ... हमारे परिवार से संबंध को वे बहुत महत्व देती थीं? ... या मैं उनको सच में एक अच्छे सच्चे आदर्श पुत्र जैसा लगता था जिसे वे बहुत चाहती थीं? ...... या और कुछ!!!

मुझे वे बोलीं "चलो, आखिर अब तो तुम आओगे गोआ और रहोगे हमारे यहां. नहीं तो अब तक बहाना बनाते रहते थे"

मैंने कहा "कहां चाची .... अब तक तो मौका ही नहीं आया?"

"ऐसे कैसे नहीं आया? दो साल पहले तुम्हारे कालेज के लड़के गोआ नहीं आये थे पिकनिक पर? तुम भी थे ना?"

पता नहीं चाची को कैसे पता चला. मैं झेंप कर रह गया. बोला "चाची, वो बस दो दिन थे हम लोग ..."

"घर आकर हेलो करने में बस आधा घंटा लगता है" स्नेहल चाची बोलीं. वे इस समय मां के साथ नीचे जमीन पर बैठकर मटर छील रही थीं. आंचल तो उन्होंने एकदम ठीक से अपने इर्द गिर्द लपेट रखा था, याने फ़िर से स्तनों का कोई दर्शन होने का प्रश्न ही नहीं था. हां एक पैर उन्होंने नीचे फ़र्श पर सुला रखा था और दूसरा घुटना मोड़ कर सीधा ऊपर कर लिया था. इससे उनकी साड़ी उनकी पिंडली के ऊपर सरक गयी थी. पहली बार मुझे उनका आधा पैर दिखा. याने घुटने के नीचे का भाग. एकदम गोरा चिकना था, मोटा मजबूत भी था, मस्त भरी हुई मांसल पिंडलियां थीं, जिनपर जरा से छोटे छोटे काले रेशमी बाल थे.

नजर झुका कर मैंने कहा "वो दोस्त साथ में थे ना चाची ..."

चाची बोलीं. "अरे ठीक है विनय बेटा, मैं तुझसे जवाब तलब थोड़े ही कर रही हूं. मैं बस इतना कह रही हूं कि अब तो तू आ रहा है और खुद अपने मन से आ रहा है, ये मुझे बहुत अच्छा लगा. नीलिमा भी बहुत खुश होगी"

मां ने पूछा "चाची, नीलिमा कैसी है? बेचारी बोर होती होगी ना, अरुण के बिना?"

"हां पर अब अमेरिका का वीसा होने ही वाला है. वैसे वो सर्विस करने लगी है, दिन में चार पांच घंटे जाना पड़ता है, उतना ही दिल बहला रहता है उसका"

चाची की गोरी पिंडली को एक बार और झट से नजर बचाकर मैंने देखा और वहां से खिसक लिया. रात तक किसी तरह मन मारा और फ़िर रात को मस्त मुठ्ठ मारी.
Reply
06-21-2018, 11:00 AM,
#7
RE: Hindi Chudai Kahani मैं और मेरी स्नेहल चाची
इस बात पर असल में मुझे अब थोड़ा टेंशन भी होने लगा था. चाची के साथ अकेले रहते हुए कोई उलटा सीधा काम न कर बैठूं इसका मुझे बहुत टेंशन था. सवाल सिर्फ़ मेरा नहीं था, हमारे परिवार के साथ उनके संबंधों का था. घर में पता चल गया कि मैं उनपर बुरी नजर रखता हूं तो सीधा फांसी पर लटका दिया जाऊंगा यह मुझे पता था. इसलिये कुछ दिन की दिलफेक चाची पूजा के बाद अब मैंने फ़िर से मन उनसे हटाने का प्रयत्न करना शुरू कर दिया था.

दूसरे ही दिन हमारा सारा कार्यक्रम अलट पलट सा हो गया, चाची अभी हफ़्ते भर रहने वाली थीं. मेरी ट्रेनिंग को भी तीन हफ़्ते थे, याने जैसा कंपनी ने पहले बताया था. पर दूसरे ही दिन उनका फोन आया कि अगले सोमवार को ही याने एक हफ़्ते बाद ही ट्रेनिंग शुरू हो रही है और मैं तुरंत वहां आकर रिपोर्ट करूं.

मुझे अब तुरंत जाना जरूरी था, ट्रेन का रिज़र्वेशन बाद का था, अब मिलने की उम्मीद भी नहीं थी. बस से ही जाना पड़ता. वहां गोआ वाले घर में नीलिमा भाभी अकेली थीं, मेरी उनकी पहचान भी नहीं थी, वे भी दिन में नौकरी पर निकल जाती थीं. ये सब कैसे संभाला जाये? अब चाची को कैसे कहें कि आप भी विनय के साथ जल्दी वापस जायेंगी क्या? और बस के टिकट भी एक दो दिन बाद के मिल रहे थे. एक हफ़्ते के बाद के टिकट फ़ुल थे.

पर चाची ने समस्या आसान कर दी. जब उनको पता चला तो बोलीं कि सीधे हम दोनों का कल रात का बस टिकट निकाल लिया जाये, अब मैं गोआ जा रहा ही हूं तो वे भी मेरे साथ ही जायेंगीं, उनको भी साथ हो जायेगा. मां ने कहा कि विनय चला जायेगा, आप आराम से बाद में ट्रेन से जाइये पर वे एक ना मानीं.

परसों मैं चाची के साथ गोआ जाऊंगा यह एहसास ही बड़ा मादक था. मादक भी और थोड़ा परेशान कर देने वाला भी. अब तक तो खूब मन के पुलाव पकाये थे कि ऐसा करूंगा, वैसा करूंगा, अगर चाची ऐसे करें तो मैं वैसा करूंगा आदि आदि. अब जब वो घड़ी आ गयी, तो पसीना छूटने लगा.

दो दिन तक मैंने अपने मन को खूब संभाला, किसी तरह चाची के प्रति मन में उमड़ने वाले सारे रंगीन खयाल उफ़नने के पहले ही दबा दिये. उनको जितना हो सकता था, उतना अवॉइड किया. चाची का भी अधिकतर समय पूना में दूसरे रिश्तेदारों के यहां मिलने जाने में ही बीता, जिनसे वे अगले हफ़्ते में मिलने वाली थीं. यहां तक कि दूसरे दिन मेरा और चाची का सामना ही नहीं हुआ. अगले दिन शाम को बस स्टैंड को जाते वक्त मुझे करीब करीब विश्वास हो गया कि अब मैं चाची के साथ बिलकुल वैसे पेश आ सकता हूं जैसे उनके एक रिश्ते के उमर में उनसे बहुत छोटे लड़के को आना चाहिये.

हम टैक्सी में साथ गये तो मैं आगे ड्राइवर के साथ बैठ गया. चाची पीछे बैठी थीं. मैं सोच रहा था कि अगर उनके साथ बैठूं तो फ़िर जरा विचलित हो सकता हूं. पर यह नहीं दिमाग में आया कि अब गोआ की बस में रात भर उनके साथ ही बैठकर जाना है. और हुआ यह कि आखरी मौके पर मेरी सारी तपस्या पर पानी फिर गया क्योंकि सामान नीचे लगेज में रखकर जब हम बस में चढ़ रहे थे, तब चाची आगे थीं. मैं उनके ठीक पीछे था. बस के स्टेप्स पर चाची की साड़ी थोड़ी ऊपर हुई और मुझे फ़िर से उनकी दोनों मांसल चिकनी पिंडलियां दिखीं. पिंडलियों के साथ साथ उनके गोरे पांव में दो इंच हील वाली स्मार्ट काली चप्पल दिखी, और चप्पल के सोल से उनका पांव उठा होने से उनके पांव के गुलाबी कोमल तलवे दिखे. मेरे मन में फ़िर एक लहर दौड़ गयी, क्या खूबसूरत पांव हैं चाची के! और तभी मेरा खयाल उनके कूल्हों पर गया. बस में चढ़ते वक्त उनकी साड़ी कूल्हों पर टाइट होने की वजह से उनमें उनके भारी भरकम नितंबों का आकार साफ़ नजर आ रहा था.

याने बस में बैठते बैठते मैं फ़िर उसी चाची जिंदाबाद के मूड में आ गया. अब कुछ कह भी नहीं सकता था, मन में चोर था इसलिये बस चुप बैठा रहा और एक किताब पढ़ने लगा. चाची को शायद लगा होगा कि हमेशा उनसे दिल खोलकर गप्पें मारने वाला विनय ऐसा चुप चुप क्यों है, पर वे कुछ बोली नहीं.
Reply
06-21-2018, 11:00 AM,
#8
RE: Hindi Chudai Kahani मैं और मेरी स्नेहल चाची
रात के करीब दस बजे थे. बस छूटकर काफ़ी समय हो गया था. बीच में बस एक होटल पर खाने पीने के लिये रुकी थी. वहां से छूटने के बाद सब सोने की तैयारी करने लगे थे. बस के लाइट बंद कर दिये गये थे और अधिकतर लोग सो भी गये थे. स्नेहल चाची बोलीं "अरे विनय बेटे, जरा वो शाल निकाल ले ना बैग में से, थोड़े ठंडक सी है"

मैंने ऊपर से बैग उतारा और शाल निकाल ली और उनको दी. उन्होंने उसे पूरा खोल कर अपने बदन पर लिया और मुझे भी ओढ़ा दी. मैं बोला "चाची ... रहने दीजिये ना ... आप ले लीजिये ... मुझे इतनी ठंड नहीं लग रही"

"अरे वाह ... सर्दी हो जायेगी तो? ... चुपचाप ओढ़ ले, तुझे चार पांच दिन में ऑफ़िस जॉइन करना है, अब सर्दी वर्दी की झंझट मत मोल ले" उन्होंने कहा. मैंने भी शाल ओढ़ ली. सीटों के बीच का आर्मरेस्ट चाची ने ऊपर कर दिया था और एक शाल के नीचे अब हम दोनों के कंधे करीब करीब आपस में चिपक गये थे. चाची ने आज कोई सेंट लगाया था, उसकी हल्की भीनी खुशबू मुझे आ रही थी. वे सेंट कभी कभार ही लगाती थीं, जैसे शादी के मौकों पर. मैंने सोचा आज बस से जाना है तो फ़्रेश रहने के लिये लगा लिया होगा.

अब उनके साथ कंधे से कंधा भिड़ा कर बैठने के बाद एक एक करके मेरे सारे सुविचार ध्वस्त हो गये, इतना सोचा था कि अब चाची के बारे में उलटा सीधा नहीं सोचूंगा, मन पर काबू रखूंगा आदि आदि. पर अब बार बार दिमाग में कौंधते वही सीन जो मुझे विचलित कर देते थे, उनकी पिंडलियां, उनके पांव और तलवे, झुकने पर दिखे उनके स्तन, उनकी पीठ के ब्लाउज़ में से दिखती ब्रा की पट्टी ....! जो नहीं होने देना था वही हुआ, धीरे धीरे मेरा बदमाश लंड सिर उठाने लगा. मैं डेस्परेटली उसे बिठाने के लिये इधर उधर की सोचने लगा, कहीं चाची के सामने पर्दा फाश हो गया तो अनर्थ हो जायेगा.

शाल ओढ़ने के करीब दस मिनिट बाद अचानक मुझे महसूस हुआ कि चाची का हाथ मेरी जांघ पर आधा आ गया था, आधा नीचे सीट पर था. मैंने बिचक कर सिर घुमा कर उनकी ओर देखा वो वे आंखें बंद करके शांत बैठी हुई थीं. मैं जरा सीधा होकर बैठ गया. लगा कि आधी नींद में उनका हाथ सरक गया होगा. एक मिनिट बाद चाची ने हाथ हटाकर सीट पर रख दिया पर अब भी वो मेरी जांघ से सटा हुआ था. दो मिनिट बाद उन्होंने फिर हाथ उठाया और मेरी जांघ पर रख दिया. मैं चुप बैठा रहा, लगा अनजाने में स्नेह से रख दिया होगा, मुझे दिलासा देने के लिये.

पांच मिनिट बाद बस एक पॉटहोल पर से गयी और जरा धक्का सा लगा. उस धक्के से चाची का हाथ ऊपर होकर फ़िर नीचे हुआ और इस बार सीधे मेरी ज़िप पर ही पड़ा. पर उन्होंने हटाया नहीं; मुझे लगा कि उन्हें नींद आ गयी थी इसलिये नहीं हटाया. पर अब हाथ का वजन सीधा मेरे लंड पर पड़ रहा था. बस के चलने के साथ हाथ थोड़ा ऊपर नीचे होकर मेरे लंड पर दब रहा था. एक पल मैंने सोचा कि हाथ उठाकर बाजू में कर दूं, फ़िर लगा कि ऐसा किया तो वे न जाने क्या समझें कि जरा सा हाथ लग गया तो ये लड़का ऐसे बिचकता है ... बुरा न मान जायें.

मैंने हाथ वैसे ही रहने दिया. उसका वजन और स्पर्ष मुझे बड़ा मादक लग रहा था. अब टेन्शन यह था कि मेरे लंड ने अपना कमाल दिखाना शुरू कर दिया तो चाची को जरूर पता चल जायेगा और फ़िर ... सब स्वाहा! क्या करूं समझ में नहीं आ रहा था. किसी तरह अपने होंठ दांत तले दबाकर भजन वजन याद करता हुआ मैं अपना दिमाग उस मीठे स्पर्ष से हटाने की कोशिश करने लगा.

कुछ देर के बाद चाची ने एक दो बार मेरी पैंट को ऊपर से दबाया और फ़िर उसपर हाथ फिराने लगीं. अब शक की गुंजाइश ही नहीं थी, चाची ये सब जान बूझकर पूरे होश में कर रही थीं, सीधे कहा जाये तो मुझे ’ग्रोप’ कर रही थीं.
Reply
06-21-2018, 11:00 AM,
#9
RE: Hindi Chudai Kahani मैं और मेरी स्नेहल चाची
मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं. चाची के इस करम से एक क्षण को जैसे मुझे लकवा मार गया था, और मेरा सिर गरगराने लगा था .... कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि चाची के मन में ऐसा कुछ होगा. कितना छोटा था मैं उनसे! याने उनके बेटे से भी छोटा था. एक बार लगा कि यह ठीक नहीं है, उनका हाथ अलग कर दूं पर ऐसा करना उनकी इन्सल्ट करना होता. और मैं यह करना भी नहीं चाहता था, उनका हाथ मुझे जो सुख दे रहा था, उस सुख को मैं आखिर क्यों छोड़ देता? फ़िर जब मैंने याद किया कि पिछले हफ़्ते मैं उनके बारे में कैसी कैसी कल्पनायें करता था, खास कर हस्तमैथुन करते समय, तो मेरा लंड जैसे लगाम से छूट गया, फटाफट उसने अपना सिर उठाना शुरू कर दिया. चाची को भी मेरे लंड के खड़े होने का एहसास हो गया होगा क्योंकि उनके हाथ का दबाव बढ़ गया और वे और जोर से उसे पैंट के ऊपर से ही घिसने लगीं.

आखिर मैंने लंड में होती उस स्वर्गिक मीठे गुदगुदी के आगे आत्मसमर्पण कर दिया. आंखें बंद करके बैठ गया और जो हो रहा था, उसका मजा लूटने लगा. वो कहते हैं ना कि ’नेवर लुक अ गिफ़्ट हॉर्स इन द माउथ’. अब अगर चाची ने ही पहल की थी तो मुझे कोई पागल कुत्ते ने नहीं काटा था, कि इस सुख से खुद ही वंचित हो जाऊं.

जल्द ही मेरा तन के खड़ा हो गया. मेरी टाइट पैंट के कपड़े को भी तानकर तंबू बनाने लगा. चाची अब उस तंबू को हथेली से पकड़कर मेरे लंड को दबाने लगीं. ऐसा लगने लगा कि झड़ ना जाऊं. मुझसे न रहा गया, मैंने चाची का हाथ पकड़कर उनका ये मीठा अत्याचार रोकने की कोशिश की तो उन्होंने मेरे हाथ पर जोर से चूंटी काट ली. तिलमिला कर मैंने उनकी ओर देखा तो आंखें बंद किये किये ही धीमे स्वर में बोलीं "ऐसा चुलबुल क्यों कर रहा है रे मूरख! ठीक से बैठा रह चुप चाप. लोग सो रहे हैं"

मैं चुप हो गया. चाची ने अब मुझे सताने का गियर बदला, याने और हाई गीयर लगाया. शाल के नीचे ही धीरे से मेरी ज़िप खोली, उसमें हाथ डालकर मेरे अंडरवीयर के फ़ोल्ड में हाथ डाला और मेरे लंड को पकड़कर धीरे धीरे बड़ी सावधानी से बाहर निकाला. अब आप को अगर यह मालूम है कि कस के खड़ा लंड ऐसा अपनी ब्रीफ़ के फ़ोल्ड में से निकालने में कितनी परेशानी होती है, तो आप समझ सकते हैं कि चाची ने कितनी सफ़ाई से और सधे हाथों से ये किया होगा.

लंड को बाहर निकालकर वे पहले उसे मुठ्ठी में पकड़कर दो मिनिट बैठी रहीं, शायद मुझे संभलने का मौका दे रही थीं कि मैं एकदम से झड़ ना जाऊं. फ़िर उन्होंने पूरे लंड को सहलाया, दबाया, हिला कर देखा. वे बिलकुल ऐसा कर रही थीं जैसे किसी नयी चीज को खरीदने के पहले पड़ताल कर देखते हैं, या जैसे कोई गन्ना लेने के पहले उसे देखे कि कितना रस है उसमें! फ़िर उन्होंने मेरे नंगे सुपाड़े को एक उंगली से सहलाया, जैसे उसकी नंगी स्किन की कोमलता का अंदाज ले रही हों. फ़िर अपना हाथ खोलकर हथेली बनाकर मेरे शिश्नाग्र पर अपनी हथेली रगड़ने लगीं.

मुझे यह सहन होने का सवाल ही नहीं था. ऐसे खुले नंगे सुपाड़े पर कुछ भी रगड़ा जाये, तो मैं सहन नहीं कर पाता. मजा आता है पर नस नस तन जाती है. मैंने एक गहरी सांस ली और किसी तरह सहन करता रहा. पर फ़िर शरीर अकड़ सा गया, सांस थम सी गयी. लगातार कोई झड़ने का इंतजार करे और झड़ न पाये तो कैसा होता है. आखिर मेरी सहनशक्ति जवाब दे गयी. पर मैंने फिर से चाची का हाथ पकड़ने का प्रयत्न नहीं किया, बस उनकी ओर देखकर धीरे से मिन्नत की "चाची ... प्लीज़ ... कैसा तो भी होता है ... सहा नहीं जा रहा ..."

"ये पहले सोचना था ना ऐसे गंदे गंदे खयाल आने के पहले? मेरी ओर बुरी नजर से देखता है ना? पिछले कई दिनों से मैं देख रही हूं तेरे रंग ढंग! समझ ले उसकी सजा दे रही हूं. अब चुपचाप आंखें बंद कर, और बैठा रह. सोया है ऐसे दिखा. और खबरदार मुझसे फ़िर बोला या मेरा हाथ पकड़ा तो" दो पल के लिये अपना हाथ रोककर स्नेहल चाची मेरे कान के पास अपना मुंह लाकर धीरे से बोलीं. फ़िर शुरू हो गयीं. अपनी हथेली से वे मेरे सुपाड़े को इस तरह से रोल कर रही थीं जैसे कोई आटे की गोली को परात में रोल कर रहा हो. बीच में लड्डू जैसा पकड़तीं, दबातीं पुचकारतीं और फ़िर शुरू हो जातीं. इसी तरह काफ़ी देर सुपाड़े को सता कर फ़िर उन्होंने लंड का डंडा पकड़ लिया और ऊपर नीचे करने लगीं. उनका अंगूठा अब मेरे सुपाड़े के निचले मांसल भाग पर जमा था और उसे मसल रहा था.

मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करूं. तीव्र कामसुख में मैं गोते लगा रहा था. मजे ले लेकर मुठ्ठ मारना यह सिर्फ़ मर्दों को ही जमता है, लंड को कैसे पकड़ना, कैसे दबाना, कहां घिसना, यह अधिकतर स्त्रियों की समझ के बाहर है. चाची पहले थोड़ी देर मेरे लंड के ऊपर एक्सपेरिमेंट करती रहीं. मुझे अच्छा लगे या न लगे, इससे उनका कोई सरोकार नहीं था. मेरी परेशानी भी बढ़ गयी थी, और यह भी पल्ले नहीं पड़ रहा था कि कब इससे छुटकारा मिलेगा. पर जल्दी ही उन्होंने अचूक अंदाजा लगा लिया कि मुझे किसमें ज्यादा मजा आता है. उसके बाद तो उन्होंने मुझपर ऐसे ऐसे जुल्म किये कि क्या कहूं. मुझसे वे कैट एंड माउस का गेम खेलने लगीं. मुझे स्खलन की कगार पर लातीं और फ़िर हाथ हटा लेतीं, जब मेरा लंड थोड़ा शांत होकर अपना उछलना कूदना बंद करता, वे फ़िर शुरू हो जातीं.
Reply
06-21-2018, 11:00 AM,
#10
RE: Hindi Chudai Kahani मैं और मेरी स्नेहल चाची
दस मिनिट के इस तीव्र असहनीय सुख के बाद अब मैं ऐसी मानसिक स्थिति में आ गया था कि करीब करीब चाची का गुलाम हो गया था. मेरे लिये वे अब दुनिया की सबसे सेक्सी स्त्री बन गयी थीं, वे इस वक्त मुझे जो कहतीं मैं चुपचाप मान लेता. कब उनके उस मांसल खाये पिये नरम नरम बदन को बाहों में लेकर उनके जगह जगह चुंबन लेता हूं, ऐसा मुझे हो गया था. पर वह करना संभव नहीं था, बस में आखिर कोई कितना प्रेमालाप कर सकता है! और ऊपर से चाची ने मुझे सख्त हिदायत दी थी कि चुप बैठा रहूं, उनकी आज्ञा न मानने का मुझमें साहस नहीं था.

मेरी उस डेस्परेट अवस्था में कुछ न कुछ तो होना ही था. पागल न हो जाऊं इतने असीम सुख में डूब कर आखिर मैंने अपना हाथ उठाकर उनके स्तन को पकड़ने का प्रयत्न किया. अब नीचे रखा हाथ उलटा मोड़ कर ऊपर उनका स्तन पकड़ना मुझे नहीं जम रहा था. मैंने एक दो बार ट्राइ किया और फिर चाची ने अपने दूसरे हाथ से मेरा हाथ पकड़कर फिर नीचे कर दिया. दो मिनिट मैंने फ़िर से सहन किया और जब रहा नहीं गया तो उनकी जांघ पर हाथ रख दिया. वे कुछ नहीं बोलीं, उनका हाथ मेरे लंड को सताता रहा, हां उन्होंने अपने जांघें फैला दीं. याने अब तक वे अपनी जांघें आपस में जोड़ कर बैठी थीं.

अपनी टांगें फैलाना ये मेरे लिये उनकी एक हिंट थी. पर अब मैं पशोपेश में पड़ गया. याने उन्होंने सलवार वगैरह पहनी होती तो नाड़ी खोल कर हाथ अंदर डालने की कोशिश मैं कर सकता था. अब साड़ी होने की वजह से कैसे उनकी साड़ी और उसके नीचे के पेटीकोट में से हाथ अंदर डालता! कोशिश करता तो साड़ी खुलने का अंदेशा था. आखिर मैं साड़ी के ऊपर से ही उनकी जांघें दबाने लगा. सच में एकदम मोटी ताजी भरी हुई जांघें थीं. उनको दबा कर सहला कर आखिर मैंने अपना हाथ साड़ी के ऊपर से ही उनकी टांगों के बीच घुसा दिया. वे शायद इसी की राह देख रही थीं क्योंकि तुरंत उन्होंने अपनी टांगें फिर से समेट लीं और मेरा हाथ उनके बीच पकड़ लिया. मैंने हाथ और अंदर डाला और फ़िर चाची ने कस के मेरा हाथ अपनी योनि के ऊपर दबा कर जांघें आपस में घिसना शुरू कर दिया.

क्या समां था! स्नेहल चाची अब अपने हाथ से मेरा हस्तमैथुन करा रही थीं और खुद मेरे हाथ को अपनी टांगों के बीच लेकर रगड़ रगड़ कर स्वमैथुन कर रही थीं. मुझे ऐसा लगने लगा कि यह टॉर्चर रात भर चलेगा, मैं पागल हो जाऊंगा पर इस मीठी छुरी से मुझे छुटकारा नहीं मिलेगा, जब गोआ उतरूंगा तो सीधे पागलखाने में जाना पड़ेगा. शायद सच में यही मेरा पनिशमेंट था.

पर दस एक मिनिट में मुझे छुटकारा मिल ही गया. मेरा लंड अचानक उछलने लगा. चाची ने शायद रुमाल अपने दूसरे हाथ में तैयार रखा था क्योंकि तुरंत उन्होंने मेरे सुपाड़े को रुमाल में लपेटा, और दूसरे हाथ से मेरे लंड को हस्तमैथुन कराती रहीं. मैं एकदम स्खलित हो गया. दांतों तले होंठ दबाकर अपनी आवाज दबा ली, नहीं तो जरूर चिल्ला उठता. गजब की मिठास थी उस झड़ने में. मेरा लंड मच मचल कर वीर्य उगलता रहा और चाची उसे बड़ी सावधानी से रुमाल में इकठ्ठा करती रहीं.

मेरा लंड शांत होने पर चाची ने रुमाल से उसे पोछा और रुमाल बाजू में रख दिया. मेरा लंड अंदर पैंट में डाला और ज़िप बंद की. रुमाल को फ़ोल्ड करके उन्होंने अपनी पर्स में रख लिया. मैंने उनकी ओर देखा तो बस के नाइटलैंप के मंद प्रकाश में उनकी आंखों में मुझे एक बड़ी तृप्ति की भावना दिखी जैसे अपने मन की कर ली हो. मुझे अपनी ओर तकता देख कर जरा मुस्कराकर बोलीं "आज छोड़ दिया जल्दी तुझपर दया करके. चल अब सो जा. अब गोआ आने दे, फ़िर देखती हूं तुझओ. सब बदमाशी भूल जायेगा"

पर मेरा हाथ अब भी उनकी जांघों की गिरफ़्त में था. उसको अपनी क्रॉच में दबा कर वे लगातार जांघें आपस में घिस रही थीं. मैंने वैसे ही साड़ी पेटीकोट और पैंटी इन तीन तीन कपड़ों के ऊपर से जितना हाथ में आ रहा था, उनकी योनि का उतना भाग पकड़ा,और दबाने और घिसने लगा. पांच मिनिट के बाद चाची का बदन अचानक पथरा सा गया, वे दो मिनिट मेरे हाथ को कस के दबाये हुए एकदम स्थिर बैठी रहीं, फ़िर एक लंबी सांस छोड़कर उन्होंने मेरे हाथ को छोड़ा, अपनी साड़ी ठीक की और आंखें बंद कर लीं.

मेरे मन में विचारों का तूफ़ान सा उमड़ पड़ा था. बहुत देर तक मुझे नींद नहीं आयी. सुनहरे सपने आंखों के आगे तैर रहे थे. स्नेहल चाची - उस सादे रहन सहन और व्यक्तित्व के पीछे कितना कामुक और मस्तीभरा स्वभाव छुपा हुआ था! और अब तीन महने मैं उनके यहां रहने वाला था. वे मुझे क्या क्या करने देंगीं अपने साथ, इस शारीरिक सुख के स्वर्ग के किस किस कोने में ले जायेंगी यही मैं सोच रहा था. वैसे थोड़ा डर भी था मन में, उनकी वह स्ट्रिक्ट हेड मिस्ट्रेस वाली छवि मेरे दिमाग में से गयी नहीं थी, बल्कि और सुदृढ़ हो गयी थी. अब भी वे मुझे सबक सिखाने की धमकी दे रही थीं. उनसे कोई भी सबक सीखने को वैसे मैं तैयार था. फ़िर यह भी मेरे दिमाग में था कि वहां उस घर में मैं और वे अकेले नहीं रहने वाले थे. उनकी बहू, नीलिमा भाभी भी थी, और नौकर चाकर भी होंगे शायद. पर फ़िर मैंने इसपर ज्यादा सोचना बंद कर दिया. स्नेहल चाची ने इसका उपाय भी सोच रखा होगा.

यही सब बार बार मेरे दिमाग में घूम रहा था. चाची शायद जल्दी ही सो गयी थीं. एक बार लगा कि उनसे थोड़ा सा चिपक जाऊं, उनके मुलायम बदन को थोड़ा तो महसूस करूं, उन्हें नींद में पता भी नहीं चलेगा, पर फ़िर हिम्मत नहीं हुई. यही सब सोचते सोचते बहुत देर तक मैं बस इधर उधर सीट पर ही करवट बदलता रहा. शायद सुबह तीन बजे के करीब मेरी आंख लगी.
Reply


Possibly Related Threads...
Thread Author Replies Views Last Post
Star Porn Hindi Kahani रश्मि एक सेक्स मशीन sexstories 122 4,341 11 hours ago
Last Post: sexstories
Thumbs Up Desi Sex Kahani मुहब्बत और जंग में सब जायज़ है sexstories 28 2,401 11 hours ago
Last Post: sexstories
Thumbs Up Nangi Sex Kahani जुली को मिल गई मूली sexstories 138 8,458 12-09-2018, 01:55 PM
Last Post: sexstories
Star Indian Sex Story ब्रा वाली दुकान sexstories 92 12,928 12-09-2018, 01:08 PM
Last Post: sexstories
Pyaari Mummy Aur Munna Bhai desiaks 3 19,532 12-08-2018, 04:38 PM
Last Post: RIYA JAAN
Star Bollywood Sex Kahani करीना कपूर की पहली ट्रेन (रेल) यात्रा sexstories 61 24,424 12-08-2018, 04:36 PM
Last Post: RIYA JAAN
Thumbs Up vasna kahani आँचल की अय्याशियां sexstories 73 15,157 12-08-2018, 12:18 PM
Last Post: sexstories
Star Desi Chudai Kahani हरामी मौलवी sexstories 13 9,177 12-08-2018, 11:55 AM
Last Post: sexstories
Star Desi Sex Kahani पहली नज़र की प्यास sexstories 26 7,016 12-07-2018, 12:57 PM
Last Post: sexstories
Star Hindi Porn Story मीनू (एक लघु-कथा) sexstories 9 4,403 12-07-2018, 12:51 PM
Last Post: sexstories

Forum Jump:


Users browsing this thread: 2 Guest(s)
This forum uses MyBB addons.

Online porn video at mobile phone


sexbaba.netsexstoryBas karo beta stories sexbaba site:penzpromstroy.rupharns sex bhabi chuaitrailor se chudai sexbabadidi ne cream lagwayididi na MAA Ka Maja dilayawww sexbaba net Thread hindi sex kahani E0 A4 96 E0 A4 BE E0 A4 B2 E0 A4 BE E0 A4 95 E0 A5 87 E0 A4xxx dood pine wali photoxxx video beta ke mami ke yar se chupke se chudaiXxx sab sa bade chuchu sexey video hdbahu boob khaniyagaon.wali.sas.ne.janbujh.kar.bhoshda.dikhayapelli kani vare sex videossasu ma aah maja aa raha h aa chod aahagar gf se bat naho to kesa kag ta heसेकसि तबसुमparegnet.bchcha.honewala.xxxwwwsexbaba actressaiswarya rai nude sexbabaAshna Zaveri Sex Baba Fake Vj Sangeetha Sex Baba Fake sara ali khan nude photos in Sexbabaउसके होंठ चूसते चूसते उसकी पीठ और उसके मोटे गोल चूतड़ों को खूब सहलायाKatrina kaif sex baba new thread. ComBaba bodhay k chodne ki khani.xx fanne porn vedo 2018 com xx fanny vedo सिल बनद सेक्सी com 2018 comSanarika naked photo sexbaba.netsavita anti kagand imgeshttps://www.sexbaba.net/Thread-shriya-saran-nude-on-bed-showing-her-boobs-pussy-fakeNagina baji k sath sexBete ka Daaru ka nasha rajsharmastories saas ki chut or gand fadi 10ike lund se ki kahaniya.comफुद्दी लड़कियों की फुद्दियों की फोटोactresssexbabanudegopika sex baba sex galleryaaahhh sisak jawani kisonarika sex baba photoXXX गांड़ की मजेदार कहानियाँ हिन्दी मेँHindi chudai porn kahani meri khubsurat jawan pativrta maa mera lund chus rahi thi khub jor jor seमस्तराम नेट पेज 10dost ki maa kaabathroom me fayda uthaya story in hindiamma vere vaditho sexsexbaba imagesहीरोन का नगा बदन चूत भी shwet ke baba sex hd ningi photos xxxporn image saree masturbath sexbaba hdHindi.friendsday.sexstori.comGanday parivar ki sexy kahanianwww.sexbaba.net/Thread-Ausharia Rai-nude-showing-her-boobs-n-pussy?page=4sonarika bhadoria fakes sex baba HotehindisexMAI PYAR AUR APNE PYAR KA DIWANA SEX STORY PAGE 9pav roti jaisi fooli sexstoriesಆಂಟಿ ಮತ್ತು ಅವರ ಮಗಳುbehan Ne chote bhai se Jhoot bolkar chudwa kahaniमादरचोद चोद और तेज फाड़ डालkeerthi suresh ka boor prom photoकपड़े उतार कर ठुकवातो लड़कीchut m fssa lund kahnixxx sadak par akeli ladki ka rep ki kahaniyaRandiyou ka parevar sex storyes comभाई को मोठे चुका चुतर सदी के बाद बुर का भोसड़ा बनवायाsapna cidhri xxx poran hdsex ke liye lalchati auntyxxx bur me biyar dal diyaniveda thomas nude sex images 2018 sexbaba.netMugha.chapheker.ka.sex.nude.photoshwet ke baba sex hd ningi photos xxxghar k rsiile aam sex storyv6 anchor savitri nude fakes photosसाली की चुत किते ने मार लियाxxx sex images tmnna page50Godi me baith ke khelti sexy kahani