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Hindi Porn Story कहीं वो सब सपना तो नही
12-21-2018, 02:14 PM,
RE: Hindi Porn Story कहीं वो सब सपना तो नही
नही नही सन्नी,,,हम दोनो मे से कोई ऐसा नही चाहता,,,, कविता और मैं दोनो बचपन से
तुझे प्यार करती आई है और इस बात से हम दोनो को कोई परेशानी नही थी,,,अब इसमे हम
दोनो की क्या ग़लती थी कि हम दोनो एक ही लड़के से प्यार करती है,, लेकिन इस बात से हम 
दोनो को कभी परेशानी नही हुई,,,,,लेकिन अब तूने हम दोनो को परेशान कर दिया सन्नी

,,,क्यूँ अब क्या कर दिया मैने जो तुम दोनो परेशान हो गयी,,,,मैने बड़ी हैरत से पूछा


सीमा की वजह से सन्नी,,,,तेरा सीमा के करीब जाना हम दोनो को गंवारा नही था,,,


पहली बात मैं उसके करीब नही जा रहा था तुम दोनो पागल कान खोल कर सुन लो,,,और अगर
हल्का करीब जाके हँसी मज़ाक कर भी लिया तो क्या बुरा किया,,,कुछ ग़लत तो नही किया और
हँसी मज़ाक तो मैं किसी से भी कर लेता हूँ तो भला सीमा की बात पर तुम दोनो को
इतनी परेशानी क्यूँ होने लगी,,,,


तभी सोनिया और कविता दोनो चुप करके एक दूसरे की तरफ देखने लगी,,,सोनिया मेरे पास
खड़ी हुई थी जबकि कविता को मैने हाथ से पकड़ कर खुद के करीब रोका हुआ था


बोलो ना बोलती क्यूँ नही तुम दोनो,,,सीमा मे ऐसी क्या बात है,,मैने कयि बार देखा
है'जब भी मैं सीमा मामी से हँसी माजक करता तुम दोनो मुझे गुस्से से घूर्ने लग जाती
थी,,,,क्या बात है ऐसी सीमा मामी मे जो तुम दोनो इतनी परेशान हो गयी मेरे और सीमा मामी
को लेके,,,,,,


तभी कविता बोल पड़ी,,,,,क्यूकी वो तुम्हारी मामी नही है सन्नी,,,,वो तुम्हारी माँ है,,
सोनिया की माँ है,,,,तुम दोनो की असली माँ है,,,,कविता ने इतना बोला और फिर दोनो हल्के से
'रोने लगी,,,,,

लेकिन मैं तो रो भी नही सका,,,,मुझे तो साँप ही सूंघ गया था,,,एक दम से पूरा बदन
सुन्न हो गया था मेरा,,,,मेरे हाथ से कविता का हाथ भी छूट गया था,,मुझे कुछ समझ
नही आ रहा था ये सब क्या हो गया,,,,सीमा मेरी असली माँ है,,,तो सरिता,,,,मैं अभी 
सोच ही रहा था कि सोनिया मेरे करीब आ गयी और मेरे गले लग गयी,,,,,,


सन्नी मैं नही चाहती थी तुझे ये सब पता चले लकिन तुझे ये सब बताना ज़रूरी था 
क्यूकी इस से पहले तू कोई ग़लती कर देता अपनी ही माँ के साथ जिसके बारे मे सोच सोच कर 
तुझे सारी ज़िंदगी पछताना पड़ता,, मैं नही चाहती थी तू वो ग़लती करे,,,जो तूने सरिता
,,गीता भुआ और शोभा के साथ की है और अब भी करता आ रहा है,,,,

सोनिया ने इतना बोला तो मेरी गान्ड ही फॅट गयी,,,अभी एक झटका कम था कि सीमा मेरी असली
माँ है जो सोनिया ने दूसरा झटका भी लगा दिया मुझे,,,इसको कैसे पता सरिता गीता और
शोभा के बारे मे,,,,,

मैं कुछ बोल ही नही पाया और बस चुप चाप से खड़ा रहा जबकि सोनिया इतनी बात बोलके छत 
से नीचे भाग गयी,,,,,,,शायद वो भी अब मेरी नज़रो का सामना नही करना चाहती थी मुझे
ये सब बताने के बाद,,,,,मैं चुप चाप से खड़ा हुआ था तभी कविता मेरे पास आ गयी


कविता ने पास आके मुझे गले से लगा लिया,,,,ऐसे चुप मत रहो सन्नी,,,थोड़ा रो लो,,
मन हल्का हो जाएगा,,,,मैं जानती हूँ ये सब बहुत अजीब है हम सबके लिए,, लेकिन अब
सब ठीक हो जाएगा,,,,प्लज़्ज़्ज़ सन्नी रो लो,,,मेरी खातिर,,,मन हल्का कर लो अपना,,,


मैं अब तक तो सुन्न था बिल्कुल लेकिन कविता की बातें सुनके और उसके गले लग्के मेरे
आँसू थम नही सके और मैने फूट फूट कर रोना शुरू कर दिया,,,,


मैं काफ़ी देर तक कविता के गले लग्के रोता रहा,,,उसने भी मुझे चुप नही करवाया बस
मेरे सर पर हल्के हल्के हाथ फिराती रही,,,,जब दिल का दर्द थोड़ा कम हुआ और मेरे आँसू
थमने लगे तो कविता बोलने लगी,,,,,


तेरे और तेरे घर के बारे मे सोनिया सब कुछ जानती है,,,,घर मे जो सब नंगा नाच चल
रहा है उसके बारे मे सोनिया को सब कुछ पता है,,,,और उसने मुझे भी सब कुछ बता दिया
था,,,,घर की ड्यूप्लिकेट चाबी तुम्हारे पास ही नही सोनिया के पास भी है,,लेकिन वो उसका
इस्तेमाल ज़्यादा नही करती थी,,,क्यूकी जब 1-2 बार उसने उस चाबी का इस्तेमाल किया तो उसको
घर पर वो सब कुछ देखने को मिल गया जो वो देखना नही चाहती थी,,,इसलिए तो उसने मुझे
तुम्हारे कारेब आने को बोला ताकि तुम सरिता गीता और शोभा से दूर हो जाओ,,, लेकिन तेरा तो
हमेशा ध्यान ही उनकी तरफ रहता था,,,मैने बहुत कोशिश की तेरे करीब आने की लेकिन
मेरी भी कुछ परेशानी थी कि मैं तेरे ज़्यादा करीब नही आ सकी,,,सोनिया भी तेरे करीब 
आके तुझे उन लोगो से दूर करना चाहती थी लेकिन वो तेरी बेहन थी और इसी रिश्ते ने उसको
बाँध कर रखा हुआ था,,,,,,

सोनिया ने पहले मुझे कुछ नही बताया था लेकिन जब मेरे घर की प्रॉब्लम्स के बारे मे मैने
सोनिया को बता दिया तो सोनिया ने भी मुझे तुम्हारे घर की हर बात बता दी,,,मैने कभी
सोनिया से कुछ नही छुपाया और ना ही उसने मेरे से कुछ छुपाया,,,,


बाकी सब तो सोनिया को घर से पता चल गया था लेकिन सीमा वाली बात उसको तेरी चाची जी
ने बताई थी,,,क्यूकी अब उनके लिए इस राज को अपने दिल मे दबा कर रखा मुश्किल हो
गया था,,इसलिए उन्होने सोनिया को सब बता दिया,,,,,,
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12-21-2018, 02:14 PM,
RE: Hindi Porn Story कहीं वो सब सपना तो नही
अब सोनिया की लाइफ मे ऐसी कोई बात नही जो मैं नही जानती और मेरी लाइफ मे एसी कोई बात 
नही जो सोनिया नही जानती,,,,,,कामिनी भाभी वाली और सूरज भाई वाली बात भी जानती है वो
लेकिन उसको कोई गुस्सा नही है,,,,,वो कामिनी भाभी और सूरज भाई की हालत को पहले से 
जानती थी,,,,,उसको तेरे पर भी गुस्सा नही क्यूकी तूने जो किया कामिनी भाभी की खुशी के
लिए किया था,,,कामिनी भाभी और सूरज से तुझे दूर करने के लिए सोनिया ने मुझे तेरे 
करीब आने को बोला और मैने तेरे करीब आके कामिनी भाभी को तेरे से दूर कर दिया,,,


अब अगर तेरे दिल मे कोई सवाल है तो तू मेरे से पूछ सकता है सन्नी,,मैं कोई झूठ
नही बोलूँगी तेरे से,,,,,पूछ क्या पूछना है तूने,,,,,


मुझे पूछना तो बहुत कुछ है कविता लेकिन तेरे से नही किसी और से,,,,,,इतना बोलकर 
मैं आँखों से आँसू पोन्छता हुआ छत से नीचे की तरफ आने लगा,,,और कविता भी मेरे
पीछे पीछे नीचे की तरफ आ गयी,,,

नीचे आके कविता चली गयी सोनिया के पास और मैं चला गया केवल और सीमा के रूम की
तरफ,,,, 


मैं जैसे ही केवल के रूम मे गया तो देखा रूम मे बस सीमा ही थी,,मेरी माँ,,उसको देख
कर मेरी आँखों मे फिर से आँसू बहने शुरू हो गये,,,,

उसने मेरी तरफ देखा और मेरे करीब आ गयी,,,,,,क्या हुआ सन्नी इतना रो क्यूँ रहे हो,,क्या
परेशानी है बताओ मुझे सन्नी,,,,,

मैं कुछ नही बोला बस उनके गले लग्के रोने लगा,,,,मुझे मेरे आँसू पर कोई कंट्रोल
नही हो रहा था मैं फूट फूट कर रोता जा रहा था,,,

सीमा ने मेरे सर पर हाथ रखा और मेरे सर को बड़े प्यार से सहलाने लगी,,,,बोल ना क्या हुआ
सन्नी बेटा,,,,बता ना अपनी मामी को,,,,क्या परेशानी हो गयी तुझे.,,,,बता ना सन्नी,,,बता
अपनी मामी को,,,,


तभी मैं सीमा से थोड़ा दूर हट गया और रोती हुई आवाज़ मे बोला,,,,,,मामी नही माँ,,,मामी
नही माँ,,,, मामी नही माँ,,,,,मैं बार बार ऐसे बोलता जा रहा था और रोता जा रहा था
तभी सीमा ने मुझे अपने गले लगा लिया और रोना शुरू कर दिया,,,,

तो उस पागल सोनिया ने तुझे सब बता दिया,,,मैने मना भी किया था उसको,,,वो इतना बोलकर
रोने लगी थी और मैं भी,,,,



आपने मुझे बताया क्यूँ नही माँ,,,और इतने साल से आप मुझे एक बार भी मिलने क्यूँ नही आई माँ
मैने पहली बार उसको माँ बोला तो वो ज़्यादा ही रोने लगी,,,,,


हम दोनो एक दूसरे के गले लग्के रो रहे थे तभी पीछे से आवाज़ आई,,,,,,,

क्या करते तुझे बता कर,,और क्यूँ मिलने आते तुझे,,,,तेरा और हमारा रिश्ता ही क्या है,,,ये
बात बोल रहा था मेरे पीछे खड़ा हुआ केवल,,,,,वो थोड़ा गुस्से मे था


ऐसे मत बोलो प्लज़्ज़्ज़्ज़,, ये मेरी माँ है और आप मेरे पापा हो,,,तो भला आप लोगो ने,,मैं
अभी बोल ही रहा था कि केवल गुस्से मे बोला,,,,मैं तेरा बाप नही हूँ,,अगर मैं तेरा
बाप होता तो तुझे सरिता और अशोक के पास नही जाने देता,,,,,,


मैं उसकी बात से थोड़ा परेशान हो गया,,,,,सीमा मेरी माँ है तो उसका पति केवल मेरा 
बाप नही तो और कॉन है मेरा बाप,,,,


सीमा ने मेरी आँखों की परेशानी पढ़ ली थी,,,,,मैं जानती हूँ सन्नी तुम क्यूँ परेशान हो
आज मैं तुम्हारी सारी परेशानी दूर कर दूँगी,,,सब कुछ बता दूँगी तुमको,,,,

तभी केवल गुस्से मे,,,,,,,, नही सीमा इसको कुछ बताने की ज़रूरत नही है,,,बाहर 
करो इसको इस रूम से,,,,जिस दर्द को तुम भूल चुकी हो उस दर्द को वापिस मत पलटने दो
अपनी ज़िंदगी मे,,,,,कुछ मत बोलो तुम सीमा,,,,,,


तभी सीमा बोल पड़ी,,,,,,नही केवल आज नही,,,,आज तुमको कुछ नही बोलना,,,आज मैं 
अपने बच्चे के गले लग कर अच्छी तरह से मिलूंगी,,,,,तुमको मेरे और मेरे बेटे के बीच बोलने
का कोई हक़ नही है,,,,,,अब थक गयी हूँ मैं सबसे सच छुपा छुपा कर,,,,पहले
तुमसे छुपाया फिर अपने बच्चों से,,,,लेकिन अब नही,,,,

तभी सीमा ने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे बेड पर बिठा लिया और केवल गुस्से मे दूर ही 
खड़ा रहा,,,फिर सीमा ने बोलना शुरू किया,,,,,


बेटा जब मेरी केवल से शादी हुई थी शहर मे तो हम लोगो ने केवल के माँ बाप को अपनी
शादी पर नही बुलाया था क्यूकी सब कुछ बड़ी जल्दी जल्दी मे हो गया था,,,,लेकिन शादी के
4-5 दिन बाद हम लोग गाँव आ गये थे,,,, केवल के माँ-बाप को मिलने,,,,,लेकिन तभी फिर
से शहर से केवल को बुलावा आ गया ऑफीस की तरफ से और वो मुझे गाँव मे छोड़कर वापिस 
शहर चला आया,,,इनको ऑफीस मे कुछ ज़रूरी काम आन पड़ा था,,,मैं वहीं गाँव मे रुक
गयी क्यूकी केवल ने काम ख़तम करके वापिस गाँव आ जाना था,,,,मैं बड़ी खुश थी केवल
के माँ बाप को मिलकर,,,, वो लोग भी खुश थे,,,,,लेकिन केवल का बाप मुझे बड़ी गंदी
नज़र से देखता था,,,,ये बात मेरी सास को भी पता थी लेकिन वो कुछ कर नही पा रही
थी बेचारी,,,,,

केवल का बाप किसी ना किसी बहाने मेरे करीब आने की कोशिश करता था,,,मैं जितना दूर 
होती वो उतना करीब आने का बहाना तलाश करता,,,,फिर एक दिन शराब के नशे मे उसने मेरे
साथ,,,इतना बोलकर सीमा ने रोना शुरू कर दिया,,,,,,


मेरी सास भी कुछ नही कर पाई,,,,मैं बस रोती गयी और मेरी सास मुझे दिलासा देती गयी
और बोलती गयी कि केवल को कुछ मत बताना,,,, मैं खुद भी केवल को कुछ नही बताना चाहती
थी,,,,फिर केवल भी वापिस आ गया और हम लोग 2 दिन बाद शहर वापिस चले गये,,क्यूकी
मैने केवल को बोला कि मेरा दिल नही लगता यहाँ,,,,केवल मुझे वापिस शहर ले गया,,,

शहर जाके भी मैने केवल को कुछ नही बताया,,,,फिर टाइम ऐसे ही बीत-ता गया और मुझे
2 बचे हुए,,,,,,तुम और सोनिया,,,,,मुझे लगता था तुम मेरी और केवल की संतान हो लेकिन
मैं ग़लत थी,,,,,,,फिर कुछ साल बाद मैं दोबारा प्रेगञेन्ट हो गयी,,,, तब मुझसे रहा
नही गया और मैने केवल को सब सच बता दिया,,,,,

केवल ने किसी तरह से डीयेने टेस्ट करवाया तो पता चला कि तुम मेरी और केवल की नही बल्कि
मेरी और केवल के बाप की संतान हो,,,,केवल को बड़ा गुस्सा आया और वो तुम दोनो को अपने
बाप के पास गाँव छोड़ आया,,,,,मैं ऐसा नही चाहती थी बेटा,,,,,तुम जैसे भी थे
मेरे बच्चे थे,,,,मैं तुम दोनो को खुद से दूर नही करना चाहती थी,,लेकिन मैं अपने
पति के हाथों मजबूर हो गयी थी,,,,

सीमा की बात सुनके मैने केवल की तरफ देखा तो वो बोल पड़ा,,,,,तो क्या करता मैं भी
कैसे रख लेता तुम दोनो बच्चों को अपने पास,,,,जब तक मुझे नही पता था तब तक सब
ठीक रहा लेकिन जब मुझे पता चला कि मेरे बाप ने मेरी बीवी का रेप किया और तुम दोनो
उसी रेप से पैदा हुए हो तो मुझसे रहा नही गया,,,,जब भी तुम दोनो को देखता तो मुझे
मेरा बाप मेरी बीवी का रेप करता हुआ नज़र आता हर जगह,,,,मैं पागल होने लगा 
था,,,गुस्से से दिमाग़ खराब होने लगा था मेरा,,,,,

मुझे माफ़ करदो सन्नी बेटा,,,, मेरी तुमसे कोई दुश्मनी नही है,,,और ना ही कोई बैर है 
हम दोनो मे,,, लेकिन अगर तुमको अपने पास रखता तो सीमा को हर दिन तुम दोनो को देखकर
उसी रात को याद करना पड़ता उसी दर्द से गुज़रना पड़ता जिस दर्द से ये उभर चुकी थी
और मुझे भी उस दर्द मे इसका हिस्सेदार बन-ना पड़ता,,,,मुझे माफ़ करदो बेटा,,,,लेकिन मैं
तुम दोनो को अपने पास नही रख सकता था,,,और ना अब रख सकता हूँ,,,,,



तभी पीछे से सरिता और सोनिया अंदर आ गये,,,,,,,,तुझे कहा भी किसने है इन दोनो को
अपने पास रखने को,,,,ये मेरे बच्चे है मेरे पास रहेंगे,,,इतना बोलते हुए सरिता रोती
हुई मेरे पास आ गयी और मुझे बेड से उठाकर अपने गले लगा लिया,,,,


मैं जानती हूँ केवल कि तुम दोनो की मजबूरी थी कि तुम इन दोनो बच्चों को अपने पास नही
रख सके लेकिन जो कुछ भी हुआ उसमे इन दोनो का क्या क़सूुर,,,,क़सूुर तो उस घटिया इंसान
का है जिसको अभी तक अपने किए पर ज़रा भी शरम नही है,,,,

और अब मेरी मजबूरी है कि मैं इन दोनो को तुम्हारे पास नही रहने दे सकती क्यूकी ये दोनो
बच्चे मेरी जान है,,,,मैने कभी इन बच्चों मे कोई फ़र्क नही समझा,,जैसे मेरे लिए
विशाल और शोभा है उसी तरह मेरे लिए ये सन्नी और सोनिया है,,,,मैने इनको अपने सगे 
बच्चों जितना प्यार किया है हमेशा,,,,यकीन नही तो पूछ लो इन दोनो से,,,माँ रोती जा 
रही थी और मुझे और सोनिया को माथे पर चूमती जा रही थी,,,,


तभी सोनिया बोल पड़ी,,,,माँ क्यूँ हमे शर्मिंदा कर रही हो,,,अपने तो कभी ज़िक्र भी नही
किया हम लोगो के सामने कि हम आपकी संतान नही है और ना ही आपने कभी हम दोनो को ये
अहसास होने दिया कि हम आपकी नही किसी और की संतान है,,,,आपने तो हमे हमारी माँ
से भी ज़्यादा प्यार किया है,,,,शायद हमारी असली माँ भी हमको इतना प्यार नही कर पाती माँ
जितना प्यार आपसे मिला है मुझे और सन्नी को,,और ये मत सोचना कि हमे पता लग गया कि आप
हमारी असली माँ नही तो हम आपको वो इज़्ज़त और सम्मान नही देंगे जो एक माँ को देना चाहिए
बल्कि हम लोगो की नज़र मे अब आपकी इज़्ज़त और भी ज़्यादा हो गयी है,,,हम तो आपका ये क़र्ज़ 
कभी नही चुका सकते माँ,,,,


सोनिया ने इतना बोला और माँ के गले लग गयी,,,सरिता भी उसकी बात सुनके रोने लगी,,
Reply
12-21-2018, 02:15 PM,
RE: Hindi Porn Story कहीं वो सब सपना तो नही
तभी सीमा अपने बेड से उठी और हम लोगो के पास आ गयी,,,,मैं जानती हूँ सरिता दीदी
आपने मेरे बच्चों को कभी पराया नही समझा,,,,कभी इनको ये एहसास तक नही होने दिया कि
ये लोग आपकी असली संतान नही है,,,बल्कि आप ने तो इनको ऐसे प्यार किया जैसे इन लोगो ने 
आपकी कोख से ही जनम लिया हो कभी आप इनकी सौतेली माँ नही बनी,,,मुझे इस बात की बहुत
खुशी है और मैं चाह कर भी आपके इस अहसान का बदला नही चुका सकती,,,,

मैं तो अगर सारी ज़िंदगी आपकी गुलामी भी करूँ तो ये अहसान नही चुका सकती कि आपने मेरे
बच्चों को अपना बच्चा समझकर प्यार किया,,,इतना बोलकर सीमा ने एक बार प्यार से मेरे और
सोनिया के सर पर हाथ रखा और अपने पति केवल के पास जाके उसके गले लग गयी,,,


वो केवल के गले लग्के रो रही थी और हम लोगो की तरफ देख रही थी तभी मैं और सोनिया
एक बार सीमा से मिलने के लिए आगे बढ़े ही थे कि उसने अपने सर को केवल के शोल्डर से लगा
लिया और फूट फूट कर रोने लगी,,,,उसको रोता देख मैं और सोनिया भी रोने लगे,,हम लोग
जानते थे कि सीमा मजबूर है केवल की वजह से,,,,लेकिन ये कैसी मजबूरी जो एक माँ
अपने बच्चों से नही मिल सकती थी,,हम लोग कब्से अपनी माँ से दूर रह रहे थे लेकिन
अब माँ पास थी तो दूर रहके बेचैनी हो रही थी,, लेकिन वो माँ अपने पति के हाथों 
मजबूर थी,,,इसलिए हम वापिस सरिता के गले लगकर रोने लगे,,,,सरिता ठीक कह रही थी
उसने कभी मुझे और सोनिया को ये अहसास नही होने दिया कि हम उसकी असली संतान नही है
उसने कभी जिकर भी नही किया हम लोगो के सामने कि हम उसकी सौतेली संतान है,,,लेकिन
फिर भी हम दोनो की आँखों मे अपनी असली माँ से मिलने की खुशी और ना मिल पाने का एक 
गम और मजबूरी थी जिस को सरिता बखूबी समझ रही थी,,इसलिए वो मुझे और सोनिया को
लेके उस रूम से निकल आई,,,,और सीमा अभी भी केवल के सीने से लग्के रो रही थी वो हम
लोग को बाहर जाते भी नही देख रही थी,,,,

हम लोग वहाँ से बाहर आ गये थे,,,एक रूम के बाहर गीता शोभा और अशोक खड़े हुए थे
जबकि एक रूम के बाहर कविता खड़ी हुई थी,,,,वो लोग हम लोगो की तरफ ही देख रहे 
थे,,,,फिर हम लोग मेरे रूम मे आ गये,,,,हम किसी से कोई बात नही करना चाहते थे

मेरे रूम मे आके माँ बेड पर लेट गयी और एक तरफ मुझे लेटने को बोला और एक तरफ सोनिया
को,,,, हम दोनो माँ की एक-एक तरफ बगल मे जाके लेट गये,,,,सरिता रोती जा रही थी और
सोनिया भी,,मेरी आँखों से भी आँसू थमने का नाम नही ले रहे थे,,,एक तरफ हम अपनी
माँ से बिछड़ कर आए थे और एक तरफ अपनी माँ के गले लगे हुए थे,,,पता नही चल 
रहा था किस माँ का प्यार ज़्यादा है और किस का कम,,,माँ तो माँ होती है,,,भले ही मैने
और सोनिया ने सरिता की कोख से जनम नही लिया था भले ही मैने और सोनिया ने सरिता का
दूध नही पिया था फिर भी उसके प्यार मे,,, उसके लाड और दुलार मे कोई कमी नही थी


,,आज पता चल रहा था मुझे माँ के असली प्यार का,,,उसके आगोश मे आके मुझे कितनी राहत
मिल रही थी,,,,हम दोनो माँ के आगोश मे आके बड़ी प्यारी नींद सो गये थे और माँ भी हम 
दोनो के सर पर हाथ फिराती हुई हम दोनो के माथे को चूमती जा रही थी,,हम दोनो को
चुप करवा रही थी लेकिन खुद रोती जा रही थी,,माँ के आगोश मे हम दोनो बड़ी गहरी नींद
सो गये थे,,,,,,


सुबह जब उठा तो देखा बेड पर मैं अकेला ही था,,,उठकर बाहर गया तो देखा कि सभी
गाड़ियाँ हवेली के अंदर थी और सब लोग गाड़ियों मे समान रख रहे थे,,,मैं भी चलके
बाथरूम मे घुस गया और फ्रेश होके आँगन मे आ गया,,

यहाँ डेड,, भुआ और सूरज वाली कार तो थी लेकिन केवल की कार नही थी,,,,,तभी सोनिया 
मेरे पास आ गयी,,,,,,

वो लोग सुबह जल्दी ही चले गये सन्नी भाई,,,,सोनिया ने इतना बोला और मेरे गले लग गयी,,

तभी गीता भुआ भी हम लोगो के पास आ गयी,,,,,सन्नी बेटा जल्दी नाश्ता कर्लो फिर हम
लोगो को घर के लिए निकलना भी है,,,,सबने नाश्ता कर लिया है एक तुम ही रहते हो बस


भुआ मुझे भूख नही है,,,,मैं तैयार हूँ चलो चलते है यहाँ से,,वैसे भी दम 
घुट्टने लगा है मेरा अब यहाँ,,,,,

लेकिन बेटा तूने कुछ खाया पिया नही,, इतनी दूर तक जाना है कैसे होगा,,,कुछ तो 
खा ले मेरे बेटा,,,,,


भुआ प्लज़्ज़्ज़ मत बोलो खाने को,,,,मेरा दिल नही कर रहा,,,,,भुआ ने मेरी आँखों मे देखा
और मेरी हालत समझ गयी और वहाँ से चली गयी,,,,,,


फिर हम लोग रेखा और मनोहर से मिलके वहाँ से चल पड़े,,,,

डॅड अपनी कार मे माँ के साथ,,,भुआ अपनी कार मे शोभा के साथ और मैं सूरज की कार मे
कविता और सोनिया के साथ,,,,,

हम लोग कोई बात नही कर रहे थे,,,हर कोई हल्की नम आँखों से गाँव की सड़को की तरफ
देख रहा था बस,,,,,,


फिर हम लोग रेखा के पुराने घर पर रुके,,,,,डॅड ने कार रेखा के घर से थोड़ी आगे रोकी
थी क्यूकी वो मामा से नही मिलना चाहते थे,,,,,जबकि माँ कार से उतर कर वहाँ आ गयी 
थी,,,,फिर मैं भी कार से उतर गया लेकिन कविता और सोनिया नही उतरी कार से,,,

हम लोग चलके रेखा के घर के दरवाजे पर चले गये,,,शोभा और गीता भी आ गयी थी,,

हम लोगो ने दरवाजे पर नॉक किया तो सुरेंदर ने आके दरवाजा खोला और हम लोग घर के
अंदर चले गये,,,,


हम लोगो को देख कर सुरेंदर रोने लगा और रोता हुआ माँ के गले लग गया,,,

मुझे माफ़ करदो सरिता,,, मुझसे बहुत बड़ी ग़लती हो गयी,,,,,,

अरे तू रो क्यूँ रहा है,,,मैने तो कबका तुझे माफ़ कर दिया,,और हम सब ने भी,,,माँ ने
भुआ और शोभा की तरफ इशारा करते हुए बोला,,,,,

चल अब रोना बंद कर और चल घर चलते है,,,,तेरा समान भी कार मे रखा हुआ है,,
तभी माँ ने देखा विशाल नज़र नही आ रहा था,,,,,

ये विशाल कहाँ है सुरेंदर,,,,,

माँ की बात से सुरेंदर ने नज़रे झुका ली,,,,,वो तो चला गया सरिता,,,,बाहर देश,,मैने
उस से माफी भी माँग ली थी,,,उसको रोकने की भी बड़ी कोशिश की लेकिन वो नही रुका,उसने
मुझे माफ़ तो कर दिया था लेकिन फिर भी वो नही रुका,,,,बोल रहा था कि अब इस सब से
दूर जाना चाहता है वो,,,,मैने बड़ी कोशिश की उसको रोकने की सरिता,,,सुरेंदर रोता
जा रहा था और बोलता जा रहा था,,,,मैने बड़ी कोशिश की उसको रोकने की सरिता,,, वो नही
रुका,,,,मुझे माफ़ करदो सरिता मुझे माफ़ करदो,,,,


अरे रोना बंद कर अब मैने बोला ना हम लोगो ने तुझे माफ़ कर दिया है चल अब घर 
चलते है,,,,,

नही मुझे घर नही जाना सरिता,,,,मुझे घर नही जाना,,,,जब तक कि अशोक मुझे माफ़
नही कर देता,,,,,,


अशोक ने भी तुझे माफ़ कर दिया है सुरेंदर,,, चल अब घर चल,,,

नही सरिता,,,अशोक ने मुझे माफ़ नही किया मैं जानता हूँ,,,अगर उसने माफ़ कर दिया 
होता तो अभी वो घर के बाहर नही खड़ा होता,,,,यहाँ अंदर आके मेरे से बात करता,,
मैं जानता हूँ वो जल्दी मुझे माफ़ नही करेगा,,,और कॉन भला मेरी इतनी बड़ी ग़लती के लिए
मुझे माफ़ कर सकता है,,,,मैने अशोक को उसके परिवार को आप लोगो को बहुत बड़ा धोखा
दिया है,,,,जो कुछ भी मेरे परिवार के साथ हुआ उसकी सज़ा मैने आप लोगो को दी आपके 
परिवार को दी,,,अशोक मुझे कभी माफ़ नही करेगा इस सब के लिए,,,,


नही नही सुरेंदर,, तूने जो किया मैं समझ सकती हूँ,,, तेरे साथ जो हुआ अच्छा नही हुआ
और तूने जो किया वो भी अच्छा नही किया,,,,लेकिन तू मजबूर था,,तू बदले की आग मे पागल
था तुझे कुछ समझ नही आ रहा था तू क्या कर रहा है,,लेकिन अब तूने अपनी ग़लती मान
ली है तो तू सज़ा का हक़दार नही है,,तू माफी का हक़दार है,.,,,हम सबने तुझे माफ़
कर दिया,,,चल अब ज़िद्द मत कर जल्दी घर चल,,,


नही सरिता प्ल्ज़्ज़ तुम ज़िद मत करो,,,आप लोगो ने मुझे माफ़ कर दिया लेकिन अशोक ने नही
किया,,जिस दिन अशोक मुझे माफ़ कर देगा उस दिन मैं वापिस आ जाउन्गा,,,अभी नही प्ल्ज़्ज़
सरिता,,, मुझे यहीं रहने दो कुछ दिन जब तक कि अशोक का गुस्सा ठंडा नही होता,,जब
सब कुछ ठीक हो जाएगा मैं वापिस घर आ जाउन्गा,,,,,लेकिन अभी नही,,,,


लेकिन तू यहाँ कैसे रह सकता है,,माँ ने पूछा,,,

मैं रह लूँगा सरिता,,,,यहाँ नही रहूँगा रेखा के घर चला जाउन्गा,,,वहीं कुछ काम 
भी कर लूँगा और टाइम भी बिता लूँगा,,,, और वैसे भी अशोक को भी थोड़ा टाइम चाहिए 
मुझे माफ़ करने के लिए और मुझे थोड़ा टाइम चाहिए अशोक के सामने दोबारा जाने के लिए और
कुछ हिम्मत बताने के लिए,,,,


लेकिन सुरेंदर तूमम,,,,,



माँ बोलने ही लगी थी कि मामा ने उसको चुप करवा दिया,,,फिर माँ गीता और शोभा चुप करके
वहाँ से बाहर की तरफ जाने लगे तभी मेरी नज़र पड़ी उस तस्वीर पर जो मैने पहले
भी देखी थी जब रेखा मुझे इस घर मे लेके आई थी मोटर ठीक करवाने के बहाने वो
तस्वीर मुझे कुछ जानी पहचानी लग रही थी,,मैं 3 लोगो को तो पहचान पा रहा था
लेकिन 2 लोगो को नही,,,,
Reply
12-21-2018, 02:15 PM,
RE: Hindi Porn Story कहीं वो सब सपना तो नही
मामा हम लोगो के साथ नही चला,,लेकिन हम लोग वहाँ से चल पड़े,,,,पूरे रास्ते मैने
कोई बात नही की और ना ही कविता और सोनिया ने,,,,,बस सबकी आँखों मे हल्की हल्की नमी
थी और दिल मे उदासी थी,,,,किसी को प्यार की तकरार पर उदासी,,,, किसी को अपने रिश्ते
की पहचान की उदासी,,किसी को माँ से मिलने की उदासी और किसी को माँ से बिछड़ने की उदासी




लेकिन आज एक बात और समझ मे आ गयी थी कि मेरा बाप माँ के चाचा से मेरा मतलब
केवल के बाप से इतनी नफ़रत क्यूँ करता था,,,,क्यूकी उसको केवल के बाप की घटिया हरकतों
के बारे मे पता चल गया था,,, 




हम लोग गये थे शादी के महॉल मे एंजाय करने के लिए लेकिन वापिस आए थे रोते हुए दिल
मे उदासी लेके,,,,,,

aaj itna hi
Reply
12-21-2018, 02:15 PM,
RE: Hindi Porn Story कहीं वो सब सपना तो नही
घर आते आते शाम हो गयी थी,,,,और जैसे ही हम लोग घर पहुँचे तो हमने देखा कि घर
के सामने पोलीस की गाड़ियाँ खड़ी हुई थी,,,कुछ प्रेस रिपोर्टर भी थे वहाँ पर और
कुछ आस पास के लोग भी थे,,,,,

मैने अपनी कार रोकी और मैं भाग कर घर की तरफ गया,,मेरे पीछे पीछे बाकी लोग भी
आ गये,,,,तभी मैने देखा कि घर के अंदर खून ही खूब बिखरा हुआ था ज़मीन पर

माँ और बाकी सब लोग ये देख कर डर गये,,,,,

मैने अंदर जाने की कोशिश की तो एक पोलीस वाले ने मुझे रोक दिया और अंदर नही जाने 
दिया,,,,,तभी मेरी नज़र पड़ी ख़ान भाई पर,,,,मैने उनको आवाज़ लगा दी तो उन्होने उस 
पोलीस वाले को मुझे अंदर भेजने को बोला,,,,मैं भाग कर अंदर चला गया,,,,


ख़ान भाई ये सब क्या हुआ,,,कैसे हुआ,,,और ये खून किसका है,,,,मैं बहुत परेशान था

तभी ख़ान भाई बोले,,,मुझे माफ़ कर्दे सन्नी,,,,मैने तेरे घर की हिफ़ाज़त का वादा किया
था लेकिन मैं वो वादा निभा नही सका,,,,


क्या मतलब ख़ान भाई,,,,,क्या हुआ मेरे घर मे,,,,कुछ तो बताओ,,,,

तभी ख़ान भाई ने मुझे उनके साथ अंदर चलने को बोला,,,,मैं घर के अंदर गया तो
अंदर का नजारा देख कर दंग रह गया,, घर का सारा समान उथल-पुथल पड़ा हुआ था, सारे
घर मे समान बिखरा हुआ था,,किचन मे बर्तन बिखरे पड़े थे,,,,हर रूम मे यही हाल
था,,,मैं भाग कर उपर गया और ख़ान भाई भी मेरे पीछे पीछे आ गये,,,,उपर के रूम्स
मे भी यही हाल था,,,,

ये सब कैसे हुआ और किसने किया,,,,मैने ये सवाल किया ही था ख़ान भाई से तभी ख़ान भाई
बोल पड़े,,,,,,मुझे माफ़ कर्दे सन्नी मैं अमित और उसके बाप के लोगो से तेरे घर की और
यहाँ के समान की हिफ़ाज़त नही कर सका,,,,,


मुझे बहुत गुस्सा आ रहा था अमित और उसके बाप पर,,,,और जो कुछ भी इन दिनो मेरे साथ
हो रहा था उस सब से भी मेरे दिल मे एक जनून था एक आग लगी हुई थी,,,,अगर अभी 
अमित या उसका बाप मेरे सामने होते तो मैं पलक झपकने से पहले उन लोगो को गोली मार
देता,,


तभी मेरा ध्यान गया मेरी अलमारी पर जो ज़मीन पर गिरी हुई थी,,,उसके दरवाजे तोड़ दिए
गये थे और उसमे से सारे कपड़े और किताबें ज़मीन पर बिखरे हुए थे,,,,लेकिन मुझे कपड़ो
की या किताबों की टेन्षन नही थी मुझे तो टेन्षन थी अपने लॅपटॉप की जो मैं गाँव नही
लेके गया था साथ,,, घर पर ही भूल गया था,,,उसी मे सारे सबूत थे अमित के खिलाफ


ख़ान भाई मेरी परेशानी समझ गये,,,,,,सन्नी ज़्यादा पारेशान मत हो,,,तेरा लॅपटॉप सुरक्षित
है करण के पास,,,,,,

ख़ान भाई ने इतना बोला तो मैं खुश हो गया लेकिन थोडा हैरान भी,,,,,लॅपटॉप करण के
पास कैसे गया,,,,

ख़ान भाई लॅपटॉप करण के पास लेकिन कैसे,,,,मैने ख़ान भाई से पूछ ही लिया


जिस दिन तू यहाँ से गया था मैं शाम को तेरे घर आया थे देखने के लिए कि सब कुछ 
ठीक तो है,,,,जब मैं तेरे घर के बाहर था तो करण भी आ गया था तुझे मिलने,,,
शायद तूने करण को बताया नही होगा कि तू गाँव जा रहा है,,,,

मैं करण के साथ तेरे घर मे आ गया और देखने लगा कि कुछ गड़बड़ तो नही है,,,और जब
हम लोग पूरा घर देखते हुए तेरे कमरे मे पहुँचे तो करण को तेरा कॉलेज बॅग दिख गया
और उसमे तेरा लॅपटॉप भी था,,,,सो करण उसको अपने साथ ले गया,,,,

लेकिन आपके पास तो घर की चाबी नही थी,,आप अंदर कैसे आए,,,,

तभी ख़ान भाई हँसने लगे,,,,सन्नी भूल मत मैं पोलीस वाला हूँ,,,,

ख़ान भाई थोड़ा हँसे तो कुछ पल के लिए मेरी टेन्षन थोड़ी कम हो गयी,,,लेकिन तभी ख़ान
'भाई ने कुछ बोला और मेरी टेन्षन फिर से बढ़ गयी,,,,

लॅपटॉप तो सुरक्षित हो गया है सन्नी लेकिन अभी हम लोग सुरक्षित नही,,,,तेरे घर मे 2-2
पोलीस वालो का खून हुआ है कल रात को,,,ये वहीं पोलीस वाले है जिनको मैने तेरे घर
की निगरानी के लिए यहाँ रखा हुआ था,,,,,कल रात तेरे घर मे कुछ लोग घुस आए थे और
उन्होने पोलीस वालो का क़त्ल कर दिया और तेरे घर की भी ऐसी हालत करदी,,,,,अब तेरे 
घर मे पोलीस वाले क्या कर रहे थे ये बात मैं मीडीया से और अपने डिपार्टमेंट से तो 
छुपा सकता हूँ लेकिन अमित और उसके बाप से नही,,पहले तो उनको शक़ था लेकिन अब उनको
यकीन हो गया होगा कि तुम पोलीस से मिल गये हो,,,लेकिन अगर उनको शक ना भी हुआ हो तो 
भी तुम लोगो का यहाँ रहना ठीक नही है,,,,तुम लोगो को कहीं और रहना होगा,,,,,


वो सब तो ठीक है लेकिन मैं अपने घर वालो को क्या कहूँगा,,,और हम लोग रहेंगे कहाँ
अब,,,,,अभी तो गाँव से वापिस आये है और दोबारा गाँव वापिस नही जा सकते,,,,


रहने की टेन्षन तुम मत लो सन्नी,,,,गंगा नगर मे मेरा एक घर है,,,जिसके बारे मे मेरे
अलावा कोई नही जानता,,,,यहाँ से कोई 2 अवर की ड्राइव है,,तुम चाहो तो वहाँ रह सकते हो
जब तक पंगा सॉल्व नही हो जाता,,,,

वो तो ठीक है ख़ान भाई लेकिन अब घर वालो को क्या बोलूं मैं,,,,कुछ समझ नही आ रहा

जो सच है सन्नी वो बता दो अपने घर वालो को,,,कुछ मत छुपाना उनसे,,,आख़िर घर वालो
के अलावा कोई और इतना करीब नही होता,,,,,

ख़ान भाई सही बोल रहे थे,,, उनको बताना ही होगा सब कुछ तभी वो लोग ख़ान भाई के 
घर रहने को मानेगे,,,,,,


मैं ख़ान भाई के साथ घर से बाहर निकल आया,,,,, माँ ने ख़ान भाई को मेरे साथ देखा
तो पहचान लिया,,,क्यूकी वो पहला भी मेरे घर आ चुके थे,,,,,


हम लोग जब घर वालो के पास गये तो सब लोग बहुत परेशान थे,,,,,सबका रंग उड़ा हुआ 
था,,,,,फिर मैने सबको सच बता दिया,,,,अमित के बारे मे,,,,अमित के बाप के बारे मे
फिर उन सीडीज़ के बारे मे,,,,,


डॅड बहुत परेशान थे,,,,,,,वो थोड़ा गुस्से मे बोले,,,,,,तुझे इस सब पंगे मे पड़ने की
क्या ज़रूरत थी,,,,देख तेरी वजह से क्या हो गया,,,अब हम लोगो को भी ख़तरा है,तेरी
बेहन को तेरी माँ को तेरी भुआ को,,,सबको ख़तरा है,,,,तूने ऐसा क्यूँ किया सन्नी,,क्या
ज़रूरत थी बता ज़रा,,,,,


डॅड किसी ना किसी को तो ये कदम उठाना ही था,,,,और जब करण की बेहन शिखा के साथ
भी उन लोगो ने ऐसी घटिया हरकत की तो मेरे से रहा नही गया,,,,और उन्ही लोगो की वजह
से कॉलेज की 2 लड़कियों ने ख़ुदकुशी भी की थी,,,,,एक तो ख़ान भाई की बेहन थी,,जो
जंग मैने शुरू की है उसमे ख़ान भाई भी मेरे साथ है,,,,और भला मैं ये जंग क्यूँ 
नही लड़ता,,,क्या मैं ऐसे ही बुत बना तमाशा देखता रहता और इंतजार करता किसी और
लड़की के बेबस होके ख़ुदकुशी करने का,,,,अगर उन लड़कियों की जगह शोभा दीदी या सोनिया
होती तो क्या तब भी आप मेरे से इस सब से दूर रहने को बोलते,,,,,


प्ल्ज़्ज़ डॅड आप लोग चले जाओ यहाँ से,,,,बड़ी मुश्किल से मुझे इतना प्यार करने वाला ये
परिवार मिला है मैं किसी भी कीमत पर अपने परिवार को हर्ट नही होने दे सकता,,
प्लज़्ज़्ज़ डॅड मान जाइए मेरी बात,,,,,


मेरी बात सुनके डॅड चुप हो गये,,,,लेकिन वो थोड़े परेशान भी थे,.,,,,लेकिन बेटा अगर
तुझे कुछ हो गया तो,,,,तू जानता है कि वो लोग बहुत ख़तरनाक है,,,जब उन लोगो ने 2-2
पोलीस वालो को मार दिया तो हम क्या चीज़ है,,,तुम क्या चीज़ हो उन लोगो के सामने,,,


डॅड मैं अपनी हिफ़ाज़त कर सकता हूँ और आप लोगो की भी,,,,लेकिन फिर भी मैं कोई ज़्यादा
जोखम नही लेना चाहता,,, इसलिए प्ल्ज़्ज़ आप लोग गंगा नगर चले जाए,,,,जहाँ ख़ान भाई
का घर है,,,आप लोगो को कुछ दिन वहीं रहना होगा जब तक मैं सब कुछ ठीक नही
कर देता


सब लोग मेरी बात मान गये लेकिन तभी सोनिया बोल पड़ी,,,,,मुझे नही जाना कहीं,,,2-3 दिन 
मे कॉलेज शुरू होने वाला है,,,,मुझे नही जाना इतनी दूर,,,मैं कविता के साथ रह 
लूँगी,,,

लेकिन बेटी तुम समझ क्यूँ नही रही सन्नी क्या कह रहा है,,,यहाँ रहना ख़तरे से खाली
नही,,,तुम भी चलो हम लोगो के साथ प्ल्ज़्ज़ ज़िद्द नही करो,,,,,


नही माँ मुझे नही जाना,,,,आप लोग जाओ,,,मैं अपनी रक्षा कर सकती हूँ,,,

माँ सोनिया को बहुत समझा रही थी लेकिन वो जाने को तैयार ही नही हो रही थी,,,,

माँ आप लोग जाओ,,मैं सोनिया को संभाल लूँगा,,,आज से ये मेरी ज़िम्मेदारी है,,,मैने 
इतनी बात बोली तो माँ और डॅड मेरी बात समझ गये,,,,


तभी मैने उन लोगो को ख़ान भाई के साथ जाने को बोला और वो लोग चले गये ख़ान भाई के
साथ लेकिन सोनिया नही गयी,,,,वो कविता के साथ जाना चाहती थी,,,,,
Reply
12-21-2018, 02:15 PM,
RE: Hindi Porn Story कहीं वो सब सपना तो नही
ख़ान भाई और घर वालो के जाने के बाद सोनिया मेरे पास आई,,,,,इतना सब कुछ हो गया तूने 
मुझे बताया क्यूँ नही सन्नी,,,

मैं बताना चाहता था लेकिन मैं तुझे और बाकी लोगो को ख़तरे मे नही डालना चाहता था


इसमे ख़तरे वाली क्या बात,,तू इतना अच्छा काम कर रहा है उन लोगो को सज़ा दिलवा रहा है
जो इतना घटिया काम करते है,,,,,घर वालो को ना सही कम से कम मुझे तो बता सकता
था ना,,,,मैं तेरी हेल्प कर सकती शायद इसमे,,,,वैसे अब भी देर नही हुई,,,अगर मैं 
किसी भी तरह तेरी हल्प कर सकती हूँ तो मुझे बता सन्नी,,,,मैं भी तेरा साथ देना
चाहती हूँ इस सब काम मे,,,,

नही सोनिया मैं तुझे अपने साथ शामिल नही कर सकता,,,,वैसे भी मैं तुझे हर्ट नही
होने दे सकता,,,,लेकिन फिर भी अगर तू मेरी हेल्प करना चाहती है तो प्ल्ज़्ज़ कविता के 
घर से बाहर नही निकलना,,, कॉलेज भी नही जाना,,और जब जाना हुआ तो मुझे कॉल 
करके जाना,,,जब तक मैं साथ नही हूँ तुम दोनो के तुम दोनो घर से बाहर कदम भी नही
रखना,,,,,


लेकिन सन्नी,,,मुझे भी तेरी हेल्प,,,,,अभी सोनिया फिर से बोलने लगी तो मैने उसको चुप
करवा दिया,,,,,,,बस अब मुझे इसके बारे मे कोई बात नही करनी,,,तुम चलो कविता के
घर मैं भी चलता हूँ तुम लोगो के साथ,,,,,


सोनिया कुछ नही बोली और कविता के साथ जाके कार मे बैठ गयी,,,फिर हम लोग वहाँ से
चल पड़े,,,कविता और सोनिया आगे सूरज भाई की कार मे और मैं भुआ की कार मे पीछे पीछे


कविता के घर पहुच कर हम लोग बहुत थक चुके थे,,एक तो गाँव से इतनी दूर तक ड्राइव
किया था और अब घर आके वो सब देखने को मिल गया जिसके बारे मे सोचा भी नही था,,,

कविता के घर पहुचे तो सूरज भाई और कामिनी भाभी भी बहुत परेशान थे क्यूकी न्यूज़
पर भी वो सब दिखा रहे थे जो आज मेरे घर पर हुआ था,,,,,

वो लोग भी मेरे से इस बारे मे बात करना चाहते थे लेकिन मैं कुछ नही बोला और खाना
ख़ाके सूरज के बाप के रूम मे जो अभी खाली था,, वहाँ जाके सो गया,,,,लेकिन नींद 
कहाँ थी आँखों मे,,,,मेरे घर मे 2-2 पोलीस वालो का खून हुआ था,,,,मेरा पूरा परिवार
ख़तरे मे था,,,ऐसी हालत मे मुझे भला नींद कैसे आ सकती थी


बेड पर लेट कर सोचने लगा कि अब क्या करना चाहिए,,,,कैसे अपने प्लान को अंजाम दिया
जाए,,,, क्यूकी जो प्लान पहले बना था अब उस प्लान पर काम नही कर सकते थे क्यूकी अब
शायद अमित और उसके बाप को मेरे पर शक़ हो गया था,,,,जब तक ये पक्का नही होता कि उन
लोगो को मेरे पर शक़ है या नही आगे कुछ भी करना मुमकिन नही था,,,यही सब सोच रहा
था कि दिमाग़ भारी हो गया,,,,तभी करण का फोन आ गया,,,,,


करण,,,,,,,,,,,हेलो सन्नी भाई आ गया तू,,,अभी पता चला ख़ान भाई से की तू गाँव से
वापिस आ गया है,,,,मुझे बताया क्यूँ नही जाते टाइम,,,,

सनी,,,,,,,अबे क्या बताता,,,, तू तो बात ही नही कर रहा था मेरे से,,,,कितना ट्राइ किया
तेरा फोन भी ऑफ था,,,,

करण,,,,सौरी भाई थोड़ा परेशान था मैं बस,,,,लेकिन वो सब छोड़ बता घर वाले कैसे
है,,सब ठीक है ना,,,,और तू कहाँ है,,,,

सन्नी,,,,,, सब ठीक है करण,,,घर वाले भी और मैं भी,,,,घर वाले तो गये ख़ान भाई 
के साथ और मैं कविता के घर पर हूँ,,,,तू बता कैसा है,,,,सब ठीक तो है ना तेरी
तरफ,,,,वहाँ तो कोई पंगा नही हुआ ना,,,,

करण,,,,,,नही भाई हम सब ठीक है कोई पंगा नही हुआ,,,,बस फिर भी थोड़ा परेशान 
हूँ मैं,,,,

सन्नी,,,,,,क्या परेशानी है बता मुझे,,,,,,,

करण,,,,,,,,,,,,नही भाई अभी नही बता सकते तुम कल घर आना फिर बताउन्गा,,,,इतना
बोलकर उसने फोन काट दिया,,,,

साला इतनी मुश्किल से नींद आने लगी थी इसने फिर टेन्षन मे डाल दिया मुझे,,,खैर बड़ी
मुश्किल से आँख लगी थी,,इतना थक जो गया था और जब सुबह उठा तो 10 बज रहे थे,,


सुबह भी सूरज भाई और कामिनी भाभी की बातों से बचना था इसलिए कविता को बोलकर 
नाश्ता अपने रूम मे ही मंगवा लिया और नाश्ता करके जल्दी से वहाँ से चला गया,,,

अभी घर से निकला ही था की ख़ान भाई का फोन आ गया,,,,ख़ान भाई चाहते थे कि हम
लोगो को अब सुमित को बाहर ले आना चाहिए,, लेकिन मैने ख़ान भाई को मना कर दिया क्यूकी
पहले मुझे इस बात का पूरा विश्वास होना चाहिए था कि अमित और उसका बाप मेरे पर शक़
नही कर रहे,,,, क्यूकी अगर वो मेरे पर शक़ कर रहे थे तो प्लान चेंज करना पड़ सकता
था,,,,इसलिए मैने ख़ान भाई को 2-4 दिन रुकने को बोला,,,,

फिर मैं चल पड़ा करण के घर की तरफ,,,,,


करण के घर पहुँचा तो थोड़ा डर गया,,,,वहाँ एक लाल बत्ती वाली कार खड़ी हुई थी और
साथ मे कुछ लोग गन्स लेके खड़े हुए थे,,,,,मैं डर गया कहीं अमित का बाप तो नही आ
गया करण के घर,,,,,लेकिन जैसे ही घर के अंदर गया देखा कि सब लोग समान पॅक कर 
रहे थे,,,,तभी करण की नज़र पड़ी मेरे पर और वो भाग कर मेरे गले लग गया,,,,


भगवान का लाख लाख शूकर है तू ठीक है सन्नी भाई,,,,

अबे मैं तो ठीक हूँ लेकिन तुम लोग समान क्यूँ पॅक कर रहे हो,,,,मैने ये बात पूछी
थी करण से लेकिन जवाब कहीं और से मिला मुझे,,,,


ये लोग करण के पापा के पास जा रहे है,,,,,इतनी बात बोली थी रितिका के बाप ने जो मेरे
पीछे की तरफ सोफे पर बैठा हुआ था,,,,,

अमित और उसका बाप बहुत ख़तरनाक लोग है सन्नी बेटा,,,,मैं नही चाहता कि मेरी बेटी,,
दामाद या उसके ससुराल वालो को कोई नुकसान हो इसलिए मैं इन लोगो को करण के पापा के
पास भेज रहा हूँ जब तक ये पंगा सॉल्व नही हो जाता,,,,


सन्नी भाई मैं तुझे अकेला छोड़ कर नही जाना चाहता भाई,,,,ये जंग हम लोगो ने मिलकर
शुरू की है मैं तुझे ऐसे अकेले बीच मे छोड़कर नही भाग सकता,,,,कारण थोड़ा
उदास होके बोला,,,,


अबे तुझे किसने कहा मैं अकेला हूँ,,,,मेरे साथ ख़ान भाई है,,,,और जिसके साथ एक
पठान है एक मुसलमान है उसको किसी और की भला क्या ज़रूरत,,,,और वैसे भी तेरी अब
शादी हो गयी है तेरा पहला काम अपनी पत्नी की सुरक्षा करना है,,,और वैसे भी मैं 
अपने घर वालो को सुरक्षित जगह भेज चुका हूँ और तेरे घाल वाले मेरे लिए पराए थोड़ी
है,,,,ये भी तो मेरी फॅमिली है,,,,मैं तो खुद चाहता हूँ कि तुम लोग कहीं दूर चले
जाओ,,,,ये तो अच्छा हुआ कि रितिका के पापा ने मेरी टेन्षन दूर करदी तुम लोगो को यहाँ से
भेजने की,,,,तो कब जाना है,,,


तभी शिखा मेरे पास आके रोने लगी,,,,,सन्नी तूने सब मेरी वजह से किया और अब मैं ही
तुझे छोड़कर भाग रही हूँ यहाँ से,,,,मुझे नही जाना इन लोगो के साथ मुझे यहीं
रहना है,,,,,इतना बोलकर वो रोती हुई मेरे गले लग गयी,,,

चुप कर पगली कहीं की,,,,तू भी मेरे लिए शोभा और सोनिया जैसी है,,,जब उन लोगो को 
मैने यहाँ से दूर भेज दिया तो तुझे कैसे यहाँ रहने दे सकता हूँ,,,चल अब चुप
कर,,,, और वैसे भी तुम लोग कॉन्सा हमेशा के लिए जा रहे हो,,,मैं जल्दी ही सब कुछ
ठीक कर दूँगा और फिर तुम लोगो को वापिस बुला लूँगा,,,मेरा भी दिल नही लगना तुम लोगो
के बिना,,,,,


अच्छा अब बता करण जाना कब है,,,,कितने बजे की फ्लाइट है और कब है,,,,


कल सुबह की फ्लाइट है सन्नी भाई,,,,6 बजे की,,,,

फिर तो अभी निकलना होगा,,,पॅकिंग हो गयी क्या,,,,

तभी अलका आंटी बोली,,,,हाँ सन्नी बेटा सारी पॅकिंग हो गयी,,,,

तो चलो चलते है,,,,अभी निकले तो रात 8-9 बजे तक देल्ही पहुँच जाएँगे,,और 11 बजे
तक ऐर्पोट,,,,वैसे भी ऐर्पोट रोड पर बहुत ज़ाम होता है,,,,,तो चलो अब देर किस बात
की,,,,,,


फिर हम लोग वहाँ से चल पड़े,,,,करण अपनी कार मे रितिका के साथ और मैं अपनी कार मे
शिखा और अलका आंटी के साथ,,,,,वैसे तो एक ही कार मे चले जाना था लेकिन समान बहुत 
था इसलिए 2 कार मे गये हम लोग,,,,

रितिका का बाप साथ नही गया,, क्यूकी उसको डर था वो साथ गया तो कहीं कोई देख ना ले 
किसी को पता नही चल जाए कि रितिका और करण देश छोड़कर जा रहे है
Reply
12-21-2018, 02:15 PM,
RE: Hindi Porn Story कहीं वो सब सपना तो नही
रास्ता करीब 8-9 अवर्स का था,,,इसी दौरान अलका और शिखा डर को ख़तम करने के लिए 
थोड़ी मस्ती करना चाहती थी,,वैसे भी आज आखरी बार मस्ती करनी थी मेरे साथ फिर 
तो इन लोगो ने चले जाना था,,,,,लेकिन अलका और शिखा मे से किसी को भी ठीक से कार
चलानी नही आती थी इसलिए मैं उनकी चुदाई नही कर सका लेकिन 8-9 अवर्स की ड्राइव मे
उन लोगो ने 4 बार मेरा लंड चूसा था,,,,मैं भी सारी टेन्षन भूल कर कुछ एंजाय करना
चाहता था वैसे भी इतने दिन से लंड से पानी नही निकला था लंड भरा हुआ था पूरा का
पूरा और जब लंड से 4 बार पानी निकल गया तो दिमाग़ और जिस्म थोड़े हल्के हो गये,,,,


हम लोग 10 बजे के करीब ऐर्पोट पहुँच गये,,


तभी करण बोला ऑश शिट,,,,,गड़बड़ हो गयी सन्नी भाई,,,,,


क्या गड़बड़ हो गयी करण भाई,,,,,,


भाई रितिका के डॅड ने बोला था टिकेट सुबह 6 बजे के है लेकिन टिकेट तो कल शाम 6 बजे
के है,,हम लोग ग़लती से बहुत जल्दी आ गये है,,,,,

तो अब क्या करना है कारण भाई,,,,,

करना क्या है,,,होटल चलते है और कल 1-2 बजे आ जाएँगे ऐर्पोट और अब कॉन्सा दूर जाना
है ये ऐर्पोट के पास ही बहुत अच्छे अच्छे होटेल है,,,,


करण ठीक कह रहा था कल शाम 6 बजे की फ्लाइट है तो हम लोग इतना टाइम ऐर्पोट पर
तो नही बिता सकते थे,,,,,,इसलिए हम लोग होटेल मे चले गये,,,,


करण ने 2 रूम बुक करवाए,,,,अलका,, शिखा और रितिका तो अपने रूम्स मे चली गयी लेकिन
करण मुझे लेके होटेल बार मे चला गया,,,,

अबे यहाँ क्यूँ लेके आया है करण,,तुझे पता है मैं ड्रिंक नही करता,,,,,,


सन्नी भाई तू नही करता लेकिन मैं करने लगा हूँ हल्की हल्की ड्रिंक और आज तो वैसे
भी मूड बड़ा ऑफ है मेरा आज मत रोक मुझे प्लज़्ज़्ज़,,एक तो तेरे से दूर जाने का गम है
मुझे और उपर से इस बात का गुस्सा भी है कि मैं तुझे अकेले छोड़कर भाग रहा हूँ
यहाँ से,,,तू मेरा दोस्त कम भाई ज़्यादा है और तूने शिखा दीदी की वजह से ये पंगा शुरू
किया था और अब तू अकेला रह जाएगा मेरे बिना,,,,मुझे बहुत गुस्सा आ रहा है इस बात
पर सन्नी भाई,,,,


मैने तुझे पहले भी बोला था करण कि मैं अकेला नही हूँ ख़ान भाई मेरे साथ है और
रही बात तेरी तुझे मेरे से ज़्यादा अपनी बीवी का साथ देना है,,,भूल मत अब तेरी शादी
हो चुकी है,,,,


फिर हम लोग करीब 2 अवर्स वहीं बार मे बैठे रहे और बातें करते रहे,,,,फिर हम 
लोग भी रूम की तरफ चल पड़े,,,,

काफ़ी देर बार मे बैठने के बाद हम लोग उठकर अपने रूम की तरफ चले गये,,,


रूम तक पहुँचे तभी करण बोला,,,,ओके भाई तुम जाओ अंदर और मैं चला माँ और शिखा 
के पास,,,,,


अबे तू माँ और शिखा के पास क्यूँ जा रहा है,,, उन लोगो को सोने दे तू मेरे साथ सोजा इस
रूम मे,,,,

अरे सन्नी भाई आज माँ और शिखा के साथ मस्ती का फुल मूड है अपना,,,आज सारी रात माँ
और शिखा की चुदाई करूँगा मैं,,,,वैसे भी रितिका के होते मैं माँ और शिखा की चुदाई
नही कर सका काफ़ी टाइम से,,,,

अबे तो आज कॉन्सा कर पाएगा तू माँ और शिखा की चुदाई,,लगता है तुझे शराब चाढ़ गयी
'है और तू भूल गया है कि आज भी रितिका अलका आंटी और शिखा के साथ है उस रूम मे
मैने इतना बोला और उसकी हालत पर हँसने लगा,,,,,

तभी वो भी मेरी बात पर हँसने लगा और बोला,,,,नही भाई इतनी भी नही पी मैने,,आज
रितिका माँ और शिखा के पास नही है,,,क्यूकी आज वो इस रूम मे है,और तेरा इंतजार कर'
रही है,,,,,,,

मैं उसकी बात से थोड़ा चोंक गया,,,,रितिका यहाँ इस रूम मे,,, क्यूँ,,, और मेरा इंतजार 
क्यूँ कर रही है वो,,,,


सन्नी भाई आज मेरा दिल कर रहा था तुझे तोहफा देने को तो मैने तुझे तोहफा दे दिया,वो
भी रितिका के रूप मे,,,,

अबे तू होश मे तो है,,क्या बोल रहा है,,,


हां भाई मैं पूरी तरह होश मे हूँ,,,,तूने मेरी बेहन की इज़्ज़त खराब होने से बचा
ली इसलिए मेरी तरफ से रितिका तेरे लिए एक रात का तोहफा है,,,,और वैसे भी वो खुद एक
बार तेरे साथ हमबिस्तर होना चाहती है,,,,वो तो कब्से ट्राइ कर रही थी तेरे पर,,,उसने
मुझे बताया भी था,, वो समझती थी वो खूबसूरत है और बड़ी आसानी से तुझे राज़ी करलेगी
अपने साथ सोने के लिए लेकिन मैने उसको बता दिया था कि तू मुझे कभी धोखा नही दे
सकता,,,और तूने कभी धोखा दिया भी नही सन्नी भाई,,,मुझे इस बात की खुशी है,,,,


तेरे कहने पर रितिका ने मेरे से शादी की,,,,,तूने उसकी शादी मेरे से करवा कर उसको और
मुझे ज़िंदगी का सबसे बड़ा तोहफा दिया था फिर तेरे कहने पर रितिका ने अपनी लाइफ का पहला
सेक्स मेरे साथ किया और अपनी चूत की सील मेरे से खुलवा कर मुझे ज़िंदगी का सबसे बड़ा
तोहफा दिया जबकि वो पहला सेक्स तेरे साथ करना चाहती थी,,,,तुझसे चूत की सील खुलवाना
चाहती थी,,,,लेकिन तूने उसकी बात नही मानी और उसने मेरे साथ पहला सेक्स कर लिया,,,,


अब मैने उसकी चूत की सील तो खोल दी है लेकिन गान्ड को छुआ तक नही,,,अब वो अपनी
गान्ड मे पहला लंड तेरा लेना चाहती है,,,,,बस एक रात ही सही वो तेरे साथ हमबिस्तर 
होना चाहती है,,,,

उसी के कहने पर मैने टिकेट को कल सुबह की जगह कल शाम के टाइम की करवा लिया था


जा भाई ऐश कर आज रात रितिका के साथ और मैं चला माँ और शिखा के पास,,,,जा भाई
अंदर जा,,,,,मैं अंदर जाते हुए थोड़ा डर रहा था लेकिन करण ने मुझे धक्का दे दिया
अंदर और खुद वहाँ से चला गया,,,,


ये बात नही कि मैं रितिका के साथ सेक्स नही करना चाहता था,, मैं तो कब्से मरा जा 
रहा था उसको चोदने के लिए लेकिन मैं करण को धोखा नही देना चाहता था लेकिन आज
तो करण ने खुद रितिका मेरे सामने पेश की थी,, ऐसा मौका मैं हाथ से कैसे जाने दे 
सकता था,,,,कितने दिन से चुदाई नही की थी किसी की और आज तो सील पॅक गान्ड मिलने 
वाली थी वो भी रितिका की,,,,और वैसे भी रास्ते भर अलका और शिखा ने मेरा लंड चूस 
चूस कर मुझे पागल कर दिया था,,,,लेकिन लंड चूसने से निकलने वाली पानी और चूत
की चुदाई के बाद निकलने वाले पानी मे बहुत फ़र्क था,,,मैं चूत की चुदाई करके पानी 
निकालना चाहता था,,,,और आज तो मुझे चूत के साथ साथ इतनी खूबसूरत लड़की की सील
पॅक गान्ड मिल रही थी,,,,यही बात सोच सोच कर लंड ने ओकात मे आना शुरू कर दिया 
था,,,




करण चला गया अपने रूम की तरफ और मैं आ गया अपने रूम मे,,, मैने रूम का दरवाजा
बंद किया और अंदर चला गया,,,रूम मे हल्की लाइट जल रही थी,,,,मैने थोड़ा आगे जाके 
देखा तो दंग रह गया,,,,अंदर बेड सुहागरात की सेज की तरह सज़ा हुआ था,और रितका 
बेड पर दुल्हन की ड्रेस मे घूँघट ओढ़ कर बैठी हुई थी,,बेड पर वाइट कलर की बेड
शीट बिछि हुई थी और उसपे गुलाब की पत्तियाँ पूरे बेड पर बिखरी हुई थी और रितिका रेड
कलर के दुल्हन के लीबाज़ मे बैठी थी,,उसने घुटनो को मोड़ कर अपना सर घुटनों के 
बीच अपने हाथों पर रखा हुआ था,,,मैं उसके करीब जाने ही लगा तभी डोर बेल बजी
और मेरा ध्यान रितिका से हट गया और मैं डोर की तरफ गया तो देखा एक बंदा हाथ मे दूध
का ग्लास लेके खड़ा हुआ था,,,,

सर ये गरम दूध औरडर किया था मेडम ने,,,,मैने उसके हाथ से दूध का ग्लास पकड़ा तो
दरवाजा खुला होने की वजह से उस आदमी का ध्यान भी अंदर की तरफ गया तो सुहागरात का
बेड और उसपे बैठी हुई दुल्हन को देख कर वो बंदा खुश हो गया,,,


मैने दूध का ग्लास पकड़ा और अंदर जाने लगा तभी वो बंदा बोला,,,,

साहिब केसर वाला दूध है,,,,

मैने कुछ नही बोला और फिर से पलट कर अंदर जाने लगा तो बंदा फिर बोला,,

साहिब बादाम भी है दूध मे,,,,

मैने फिर कोई बात नही बोली और वापिस रूम मे जाने लगा तो बंदा फिर बोल पड़ा,,,

साहिब दूध गर्म है जल्दी पी लेना कहीं ठंडा नही हो जाए,,,,

मुझे मन ही मन बड़ा गुस्सा आया साले पर,,,साले तुझे दूध की पड़ी है और अंदर से गरम
होके उबल उबल कर मेरा क्या हाल हो रहा है तुझे क्या पता,,,,तभी मैने उसको पॉकेट से
निकाल कर कुछ पैसे दिए तो वो हंसता हुआ वहाँ से जाने लगा तो बोला,,,,,साहब पता होता
तो थोड़ी शिलाजीत भी लेके आता साथ मे,,,,,

मैने कोई जवाब नही दिया और जल्दी से अंदर आके दरवाजा बंद कर लिया,,,मैने दूध का 
ग्लास जाके टेबल पर रखा और बेड पर जाके रितिका के पास बैठ गया,,,,वो अभी भी सर को
झुका कर बैठी हुई थी,,,,,


मैं पास बैठा हुआ सोचने लगा कि सला इसने तो सब इंतेज़ाम किया हुआ है सुहागरात का
बेड भी सज़ा लिया,,दुल्हन का लीबाज़ भी पहन लिया और अब गरम दूध भी आ गया,,सही
बोला था इसने मुझे एक बार कि ये कैसे भी अपनी ज़िद्द पूरी करके ही दम लेती है,,और आज
इसने ये साबित भी कर दिया,,,,

अब अगर ये तैयार है,,, करण तैयार है तो मुझे क्या प्राब्लम है,,,इतना सोचते हुए मैं 
आगे बढ़ा और रितिका के हाथ पर अपना हाथ रख दिया,,,,उसने जल्दी से अपने हाथ को पीछे
कर लिया,,,फिर मैने उसके घूँघट को पकड़ा और हल्के से उपर उठा दिया,,,उसने अपने सर
को घुटनों मे दबाया हुआ था,,,, मैने दोनो हाथों से उसके सर को दोनो तरफ से पकड़ा और
उपर उठा दिया,,,,,

उसके चहरे पर हल्की स्माइल थी लेकिन शरम से आँखें बंद थी उसकी,,उसने हल्का मेक-अप
किया हुआ था,,,,गुलाब जैसे गुलाबी होंठों पर हल्के गुलाबी रंग की लिपस्टिक और आँखों मे
हल्का काजल जो आँखों से हल्का बाहर की तरफ निकला हुआ था,,,वो दुल्हन के लीबाज़ मे 
बहुत ही खूबसूरत लग रही थी,,,,

मैने उसको देखा तो बस देखता ही रह गया और दिल ही दिल
मे सोचने लगा कि हाइ अल्लाह कोई इतना भी खूबसूरत हो सकता है क्या,,ऐसा लगता था जैसे
खुदा ने उसको फ्री टाइम मे बड़ी ही नज़ाकत से बनाया था कोई जल्दी नही थी खुदा को,,उसने
हर एक अंग को बड़ी शिद्दत से तैयार किया था,,ख़ास कर उसके चहरे को,,, इतनी भोली भाली 
लग रही थी वो कि मेरे होश ही उड़ गये थे उसको देख कर,,,,,


मैं उसकी तरफ बड़े प्यार से नज़रे टिका कर देख रहा था तभी कुछ देर बाद उसने अपनी
आँखें खोली और जब मुझे अपनी तरफ देखते हुए पाया तो जल्दी से आँखें बंद करली उसकी
इसी अदा ने मुझे आगे बढ़ने के लिया जोश पैदा कर दिया,,,मैने आगे बढ़ कर उसके लिप्स पर
हल्की किस करदी फिर एक के बाद एक 15-20 किस करदी उसके लिप्स पर,,,,फिर पीछे होके उसकी
तरफ देखने लगा,,,,,तभी उसने फिर से आँखें खोली और टेबल पर पड़े हुए दूध के 
ग्लास की तरफ इशारा किया,,,,

मैं उसकी बात समझ गया और आगे बढ़ कर दूध का ग्लास उठा लिया,,,दूध अब तक थोड़ा 
ठंडा हो गया था,,,,मैने दूध का ग्लास उठाया और उसकी तरफ देखते हुए थोड़ा दूध 
पी लिया,,,फिर ग्लास की उसकी तरफ कर दिया,,,,उसने शरमा कर ना मे सर हिला कर मुझे
दूध पीने से मना कर दिया लेकिन मैं नही माना,,मैने दूध के ग्लास को उसके होंठों
के पास किया तो उसने अपने होंठों को थोड़ा खोल कर ग्लास को मुँह से लगाया और हल्का दूध
पी लिया,,,,फिर मैने ग्लास अपने होंठों से लगाया और थोड़ा दूध पीके ग्लास वापिस उसके
होंठों की तरफ कर दिया,,,,,इस बार उसने मना नही किया बस शर्मा कर मेरी तरफ देखते 
हुए थोड़ा सा दूध पी लिया तभी थोड़ा सा दूध उसके लिप्स से बहता हुआ उसकी चिन की 
तरफ बढ़ने लगा,,,,उसने हाथ उठा कर अपनी चिन से दूध सॉफ करने की कोशिश की लेकिन
मैने उसका हाथ पकड़ लिया और आगे बढ़ के अपनी ज़ुबान से उसके लिप्स से बहने वाले दूध को
चाट गया,,,,मेरी इस हरकत से वो थोड़ा थरथरा गयी और बहक गयी,,,,

मैं फिर से ग्लास को मुँह से लगाया और थोड़ा दूध पीके ग्लास को वापिस उसके करीब किया और
उसने दूध पीने के लिए अपने लिप्स को खोला तो मैने जानभूज कर दूध का ग्लास कुछ 
ज़्यादा ही उपर उठा दिया जिस से थोड़ा सा दूध उसके लिप्स पर गिर गया और वहाँ से बहता 
हुआ उसकी चिन पर आ गया और वहाँ से बहता हुआ उसकी गर्दन से होता हुआ उसके बूब्स की लाइन
की तरफ बहने लगा,,,,,मैने आगे बढ़ के फिर से उसकी चिन और गर्दन से दूध चाटने की 
कोशिश की तो इस बार वो मेरी हरकत को पहले ही भाँप गयी और शरमा कर चेहरा दूसरी 
तरफ कर लिया और अपने दोनो हाथों को क्रॉस करके अपने बूब्स को कवर करते हुए अपने दोनो
हाथों को अपने शोल्डर पर रख दिया जिस से उसकी गर्दन और बूब्स मेरे से कवर हो गये,,
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12-21-2018, 02:16 PM,
RE: Hindi Porn Story कहीं वो सब सपना तो नही
मैने उसने हाथों को उसके बूब्स से हटाने की कोशिश की लेकिन वो थोड़ा ज़ोर लगाने लगी और
इसी ज़ोर आज़माइश मे मेरे हाथ से दूध का ग्लास छूट कर बेड पर गिर गया लेकिन अब मुझे
उस दूध की फ़िक्र नही थी मुझे तो उस दूध की फ़िक्र थी जो उसके लिप्स से बहता हुआ उसके
बूस्ब् की लाइन मे चला गया था,,,,उस एक कतरा दूध के लिए मैं 1000 लीटर दूध जाया
करने को तैयार था,,,,

मैने फिर से उसके हाथों को पकड़ा और थोड़ा ज़ोर लगाया तो उसके हाथ उसके बूब्स से हट गये
वैसे भी मेरे ज़ोर के आगे उसका क्या ज़ोर चलना था,,,उसके हाथ उसकी गर्दन और बूब्स से हट
गये तो मैने आगे बढ़ के उसकी गर्दन से दूध चाटने की कोशिश की तो उसने अपने जिस्म को बेड
पर पीछे की तरफ झुका दिया और बेड पर लेट गयी,,मैने उसके हाथों को अपने हाथों मे
पकड़ा हुआ था,,जैसे जैसे वो बेड पर पीछे की तरफ गिरती गयी वैसे वैसे मैं उसके उपर
गिरता गया,,,,


वो बेड पर पीठ के बल लेट चुकी थी और मैं उसके उपर लेट चुका था,,,उसके दोनो हाथ
मेरे हाथों मे पकड़े हुए बेड की दोनो तरफ खुल कर बिच्छ चुके थे,,,मेरा ध्यान उसकी
गर्दन और बूब्स की लाइन पर टिका हुआ था,,,,अब तक दूध तो हल्का सूख चुका था लेकिन
उसकी गर्दन दूध की वजह से गीली हो चुकी थी और उसकी गोरी गर्दन और बूब्स का उपर
का हिस्सा हल्की रोशनी मे भी चाँद की तरह चमक रहा था,,,,मैने कोई देर किए बिना
अपने सर को नीचे की तरफ झुका दिया और अपनी ज़ुबान को उसके बूब्स की लाइन पर टिका दिया
और उसकी बूब्स की लाइन को चाट-ता हुआ उपर की तरफ बढ़ने लगा,,मेरी इस हरकत से उसकी हालत
खराब हो गयी थी,,उसका बदन अकड़ने लगा था,, मैं बूब्स की लाइन को चाट-ता हुआ उपर की
तरफ बढ़ रहा था और उसकी गर्दन अकड़ती जा रही थी इस वजह से उसकी चिन थोड़ी उपर 
उठ गयी थी,, जब तक मैं बूब्स की लाइन से गर्दन को चाट-ता हुआ उसकी चिन तक पहुँचा
उसकी चिन उपर की तरफ उठ चुकी थी,,,उसकी गर्दन अकड़ चुकी थी,,,मैने पल भर की 
देर नही की और उसकी चिन को चाट-ते हुए अपने मुँह मे भर लिया और हल्के से चूसने लगा,



वो तोड़ा झटपटा रही थी,,कसमसा रही थी,,अपने हाथों को मेरे हाथों से छुड़वाने की
कोशिश कर रही थी,, उसकी लगा था मैं ऐसा करने से उस को छोड़ दूँगा लेकिन वो पगली
नही जानती थी कि उसकी यहीं हरकते मुझे और ज़्यादा गर्म कर रही थी,,,



मैने उसके हाथों को थोड़ा कस्के पकड़ा हुआ था और उसकी चिन को मुँह मे भरके चूस और
चाट रहा था,,,फिर वापिस उसकी गर्दन को चाटने लगा और कभी बूब्स के उपर की तरफ
उसकी छाती पर ज़ुबान फिराते हुए साथ साथ हल्की-हल्की किस करने लगा,,वो बस लेटी हुई
झटपटा रही थी लेकिन अब हल्की हल्की आहें भरना शुरू कर दिया था उसने,,,कुछ देर
गर्दन और बूब्स के उपर के हिस्से को चाटने के बाद मैने अपने सर को उपर उठा दिया और उसकी
तरफ देखने लगा,,,,,


मैं कुछ पल ऐसे ही रुका रहा,, तभी उसने अपने चेहरे को सीधा किया और हैरात से मेरी
तरफ देखने लगी,,,वो सोच रही थी कि मैं रुक क्यूँ गया,,,लेकिन जैसे ही उसने चेहरे मेरी
तरफ किया मैं उसके होंठों की तरफ बढ़ने लगा,,, उसने जल्दी ही अपने फेस को टर्न कर 
लिया,,,, मैने भी कोई जल्दबाज़ी नही की और अपना चहरे उपर उठा लिया और उसकी तरफ देखने 
लगा,,,,,,कुछ पल बाद उसने फिर अपने चहरे को सीधा किया और मेरी तरफ देखने लगी,,,


मैं भी उसकी तरफ देखता रहा,,वो कुछ बेचैन थी,, आँखों ही आँखों मे मेरे से पूछ
रही थी कि मैं रुका क्यूँ हूँ,,क्यूँ उसको तडपा रहा हूँ,,,मैं भी आँखों ही आँखों मे 
उसको जवाब दिया कि जो कुछ हो रहा है हम दोनो की मर्ज़ी से हो रहा है,,और अगर अपनी मर्ज़ी 
से वो मेरा साथ देगी तभी मैं कुछ करूँगा,,,,वो मेरी बात समझ गयी और अपने सर को ना
मे हिलाने लगी और मुझे बताने लगी को वो मेरा साथ नही देगी,,,,उसको शरम आ रही है

लेकिन मैं भी कमीना था,,,मैं कुछ नही कर रहा था बस उसकी तरफ देखते जा रहा था
,,तभी कुछ पल बाद उसने शरमा कर अपने सर को हां मे हिला दिया और मुस्कुरा कर अपनी
आँखें बंद करदी और मुझे ये बता दिया कि वो मेरा साथ तो देगी लेकिन उसको शरम आ रही
है,,,,,मुझे यही अदा तो अच्छी लगती है लड़कियों की,,,उनकी रज़ामंदी होनी चाहिए लेकिन
अगर रज़ामंदी के साथ साथ हल्की हल्की शरम भी हो तो क्या कहने,,,,



उसने शरमा कर अपने सर को हां मे हिला दिया और मुस्कुरा कर अपनी आँखें बंद करदी उसकी
इस हरकत से मैं थोड़ा खुश हो गया और उसके होंठों की तरफ बढ़ने लगा,,,कुछ ही पल मे
मेरे होंठ उसके होंठों को टच कर गये,,,उसके कोमल कोमल होंठों का गर्म गर्म एहसास
अपने होंठों पर पाके मेरे जिस्म को एक हल्का सा झटका लगा जो लंड मे हल्का हल्का तनाव
पैदा करने लगा,,,,लंड हल्का हार्ड हो चुका था,,,,जैसे ही मेरे लिप्स उसके लिप्स पर लगे
मैने लंड को भी उसकी चूत पर रगड़ दिया,,,


उसने अपनी रज़ामंदी दिखा दी थी इसलिए जैसे ही मेरे होंठ उसके होंठों को टच किए
उसने अपने होंठों को हल्का सा खोल दिया और मैने उसके होंठों को अपने होंठों मे जकड
लिया और चूसना शुरू कर दिया,,,,वो थोड़ा झिझक रही थी लेकिन हल्का हल्का रेस्पॉन्स
ज़रूर दे रही थी,,,मेरी ज़ुबान उसके मुँह मे थी तो कुछ पल बाद उसने भी अपनी ज़ुबान को
मेरे मुँह मे डाल दिया,,,लेकिन सिर्फ़ कुछ पल के लिए ही,,मैं समझ गया था वो थोड़ी परेशान
है इसलिए मैने उसको ज़्यादा तंग नही किया और हल्के हल्के उसके होंठों को चूस्ता गया,वो 
जितना भी रेस्पॉन्स दे रही थी मेरे लिए काफ़ी था,,,

कुछ देर उसके होंठों का रसपान करने के बाद मैं उसके उपर से उठ गया जबकि वो ऐसे ही
लेटी हुई गर्म गर्म उखड़ती हुई साँसे ले रही थी,,उसका पूरा बदन हल्के हल्के काँप रहा
था,,,मैने उठकर अपनी टी-शर्ट निकाल दी,, नीचे बनियान नही थी इसलिए मेरा उपर का 
हिस्सा टी-शर्ट निकलते ही नंगा हो गया,,,,,मैने उसके हाथों को पकड़ा और उसको वापिस बेड
पर बिठा दिया,,,,उसने मेरे जिस्म पर एक नज़र डाली और आँखें बंद करली,,,मैने आगे बढ़ कर
उसके शोल्डर पर से उसकी चुनरी पकड़ी और बड़े प्यार और नज़ाकत से उसकी चुनरी को उसके जिस्म
से अलग करके बेड पर साइड मे रख दिया,,,,उसकी आँखें अभी भी बंद थी,,मैने आगे बढ़ कर
फिर से उसके लिप्स पर हल्की किस की और उसकी कमीज़ को हाथ पे पकड़ लिया और उतरने लगा 
उसने थोड़ी जद्दोजहद की लेकिन जल्दी ही हार मान गयी और अपनी रज़ामंदी दिखाते हुए अपने
हाथ हवा मे थोड़ी उपर उठा लिए,,,,मैने उसकी कमीज़ को भी उतार कर बेड पर रख दिया 
लेकिन जैसे ही मैं उसकी ब्रा की तरफ बढ़ा उसने अपने हाथों से अपनी ब्रा को पकड़ लिया 



लेकिन मैं नही माना और अपने हाथ पीछे उसकी पीठ पर ले गया और उसकी ब्रा के हुक्स को खोल
दिया और फिर उसकी ब्रा को उसके जिस्म से अलग करने लगा तो उसने अपनी ब्रा को थोड़ी कस कर 
अपने हाथों मे पकड़े रखा,,,,मैने भी कोई ज़ोर ज़बरदस्ती नही की और उसके होठों पर किस
करने लगा,, मुझे लगा शायद वो किस करने के बाद अपने हाथो से ब्रा को अलग कर लेगी 


लेकिन उसने ऐसा नही किया,,,मैने उसको किस करते हुए उसको वापिस बेड पर लेटा दिया और उसके
पेट और कमर पर हाथ घुमाने लगा,,,मैं उसके बूब्स को भी अपने हाथों मे महसूष करना
चाहता था लेकिन उसने अपने हाथों से अपनी ब्रा को पकड़ा हुआ था और अपने बूब्स को भी कवर
किया हुआ था,,,
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12-21-2018, 02:16 PM,
RE: Hindi Porn Story कहीं वो सब सपना तो नही
खैर मैं उसको किस करता गया और अपने हाथों से उसके पेट और कमर को सहलाता गया,,कुछ 
देर बाद मैं उसके होंठों से दूर हुआ और उसके पेट पर अपने होंठ रख दिए उसके बूब्स
से थोड़ा नीचे और किस करते हुए उसके कमर से होता हुआ नीचे उसकी चूत की तरफ बढ़ने 
लगा, मेरे दोनो हाथ उसकी कमर के दोनो तरफ से उसकी कमर को हल्के हल्के दबा दबा कर
सहला रहे थे,,,मैं किस करता हुआ उसके पेट से नीचे की तरफ आ रहा था फिर जब
मैं उसकी चूत के पास उसकी सलवार तक पहुचा उसकी साँसे और भी ज़्यादा तेज हो गयी,मैने
अपने हाथों को उसकी सलवार के पास किया और उसकी सलवार के नाडे को पकड़ लिया,,मेरे ऐसा
करते ही उसने जल्दी से अपने बूब्स और ब्रा से अपने हाथ हटा लिए और मेरे हाथ को पकड़
लिया और सलवार के नाडे को मेरे हाथों से छुड़वाने लगी,,मैने कोई जल्दबाजी नही की और
उसके सलवार के नाडे को छोड़ दिया लेकिन ऐसा करते ही मैने अपने हाथ उसकी ब्रा की तरफ 
बढ़ा दिए जो अभी तक बूब्स पर टिकी हुई थी,, उसने भी जल्दी से अपने हाथ वापिस ब्रा पर
रखे और ब्रा को पकड़ लिया,,,वो बहुत तेज बनने की कोशिश कर रही थी लेकिन मैं भी कम
नही था,,,मैने फिर से अपने हाथ उसकी सलवार के पास किए और उसकी सलवार के नाडे को
पकड़ने ही वाला था कि उसने मेरे हाथ पकड़ लिए,,,

उसने मेरे हाथों को अपने हाथों मे पकड़ा हुआ था और मेरे हाथ उसकी ब्रा की तरफ बढ़ने 
लगे लेकिन वो थोड़ा ज़ोर लगा रही थी और मेरे हाथों को अपने बूब्स और ब्रा से दूर कर रही
थी इसलिए मैं अपने हाथों को उसकी सलवार की तरफ ले गया,,,,वो समझ गयी कि एक तरफ तो
मैं जाके रहूँगा इसलिए उसने मेरे हाथों को अपने बूब्स की तरफ बढ़ा दिया और जब मेरे हाथ
उसके बूब्स तक पहुँच गये उसने अपने हाथों को बेड पर रख लिया,,,,,मैने भी एक ही पल 
मे अपने हाथों से उसकी ब्रा को पकड़ा और उसके हाथों से निकालते हुए ब्रा को उसके जिस्म से
अलग कर दिया और साइड मे रख दिया,,,,वो मेरी तरफ देख रही थी और मैं उसके नंगे हो
चुके छोटे छोटे बूब्स की तरफ,,,,,,,,,,

उसके बूब्स इतने भी छोटे नही थे लेकिन मुझे बड़े बड़े बूब्स की आदत हो गयी थी
जैसे रेखा के बूब्स,,,,माँ के बूब्स,,,अलका आंटी के बूब्स,,,यहाँ तक कि शिखा और शोभा
दीदी के बूब्स भी रितिका के बूब्स से बहुत बड़े थे,,,,इसलिए मैं इसके बूब्स को छोटा 
समझता था,,,,

वो मेरी तरफ देख रही थी और मैं उसके नंगे हो चुके बूब्स की तरफ देख रहा था,,
तभी वो शरमा गयी थोड़ा घबरा गयी और अपने हाथों से अपने बूब्स को कवर करने लगी 
लेकिन मैने ना मे सर हिला कर उसको ऐसा करने से मना कर दिया,, उसने भी वापिस अपने
हाथों को बेड पर रख दिया,,,,मैं कुछ देर उसके बूब्स को देखता रहा फिर नीचे होके
उसके एक बूब को मुँह मे भर लिया,,,मेरे ऐसा करते ही उसके मुँह से एक हल्की अहह
निकल गयी,,,,मैने उसके बूब को मुँह मे भर लिया और चूसने लगा और साथ ही उसके दूसरे
बूब को अपने हाथ मे पकड़ कर हल्के हल्के मसल्ने लगा,,उसके बूब्स ज़्यादा बड़े नही थे
लेकिन काफ़ी मस्त थे,, मस्ती मे उसके बूब्स की हल्के ब्राउन कलर की डुंड़िया काफ़ी हार्ड हो
चुकी थी मैं उसके बूब्स को चूस्ता हुआ उसकी डुंदीयों पर ज़ुबान फिराने लगा और साथ ही
साथ उसकी डुंदीयों को हल्के हल्के काटने लगा,,,कभी मैं उसके एक बूब को चूस्ता काट-ता 
चाट-ता और कभी दूसरे को,,,,कुछ देर उसके बूब्स को चूसने काटने और मसल्ने के बाद मैं
अपना एक हाथ बूब से उठा कर नीचे चूत की तरफ ले गया,,,,पहले तो वो मुझे मना कर
रही थी चूत तक जाने से लेकिन अब बूब्स चूसने की मस्ती मे वो काफ़ी हद तक गर्म हो
चुकी थी और अब मुझे नही रोक रही थी,,,,


मेरा हाथ उसकी सलवार तक गया और मैने कोई देर किए बिना उसकी सलवार के नाडे को खोल
दिया,,,नाडा खुलते ही मेरा एक हाथ उसकी सलवार के अंदर चला गया और मैने उसकी पेंटी के
उपर से उसकी चूत को अपने हाथ पर महसूस करना शुरू कर दिया,,,,उसकी पेंटी चूत से
निकले पानी से पूरी तरह गीली हो गयी थी,, मैने उसकी चूत को पेंटी के उपर से अपनी एक
उंगली से सहलाना शुरू कर दिया,, उसकी पेंटी चूत के पानी से गीली हो गयी थी इसलिए मेरी
उंगली उसकी पेंटी पर चूत के उपर फिसलती जा रही थी वो भी उसकी चूत की लाइन के
बीच मे,,,,उसकी साँसे तेज हो गयी थी,,जिसम काँपने लगा था,, तभी उसके हाथ मेरे सर 
पर आ गये और मेरे सर को बड़े प्यार से सहलाने लगे,,,मैं समझ गया कि अब ये पूरी तरह
से मेरे क़ाबू मे आ चुकी है,,,,वो दोनो हाथों से मेरे बालों मे उंगलियाँ घुमा रही थी
और मेरे सर को हल्के हल्के अपने बूब्स पर दबा रही थी,,,,



अब मैने अपनी एक उंगली को उसकी पेंटी की एक तरफ से उसकी पेंटी मे घुसा दिया और उसकी
चूत तक पहुँचा दिया कुछ ही पल मे मेरी उंगली पूरी तरह गीली हो गयी थी और उसकी
चूत तक पहुँच गयी थी,, मैने कोई देर किए बिना उंगली को एक बार उसकी चूत मे पूरा
अंदर तक घुसा दिया,,,,,ऐसा करते वो हल्की उछल गयी,,, मैने उंगली को चूत से निकाला
और अपने मुँह के करीब कर लिया फिर उंगली को नाक से लगा कर सूंघने लगा,, एक अजीब ही
नमकीन और खट्टी खट्टी मदहोश करने वाली खुश्बू आ रही थी उसकी चूत के पानी से जो
मुझे पूरी तरह गर्म करने के लिए काफ़ी थी,,,जब मैं उसकी चूत के पानी से सराबोर हो
चुकी अपनी उंगली को सूंघ रहा था वो मुझे बड़ी गौर से देख रही थी उसके देखते ही
देखते मैने उंगली को मुँह मे भर लिया और उसकी चूत के पानी को चाटने लगा,,,उसकी चूत
का स्वाद भी हल्का हल्का खट्टा था,,,,एक दम नुंबू के आचार जैसा,,,उसने मेरे ऐसा करते 
मुझे हँसके देखा और मेरे सर को सहलाने लगी,,,,,


अब मेरे से रहा नही गया और मैं जल्दी से उठा और उसकी टाँगों के पास जाके एक ही पल मे 
उसकी सलवार को पकड़ा और उसकी टाँगों से अलग कर दिया,,, वो मेरी इस हरकत से थोड़ी हैरान
होके मुझे देखने लगी इस से पहले वो कुछ कहती या कुछ करती मैने उसकी पेंटी को भी
पकड़ा और नीचे उतार कर उसकी टाँगों से अलग करके साइड मे रख दिया,,,मैने ये सब इतनी
जल्दी मे किया कि वो थोड़ी डर गयी,,,,,वो अब मेरे सामने एक दम नंगी थी,,,मैं उसकी चूत
को बड़े प्यार से देख रहा था,,उसने चूत की तरफ घूरते हुए मुझे देखा तो अपनी टाँगों
को आपस मे जोड़कर चूत को मेरे से छुपा लिया,,,,,उसको लगा शायद ऐसा करने से मैं रुक 
जाउन्गा,,,लेकिन मैं तो पूरी तरह पागल हो गया था उसकी चूत की खुश्बू से और उसकी चूत
से निकलने वाले पानी के स्वाद से,,,,,


मैं उठा और बेड से नीचे जाके घुटनो के बल उसकी टाँगों के बीच मे ज़मीन पर बैठ 
गया और अपने दोनो हाथों से उसकी टाँगों को पकड़ा और दोनो तरफ खोलते हुए उसको अपने करीब
खींच लिया,,,ये सब इतनी तेज़ी मे किया मैने कि वो थोड़ा डर गयी और सर उठा कर मुझे 
देखने लगी,,मैने भी एक पल उसकी तरफ देखा और फिर ध्यान किया उसकी चूत की तरफ,,
उसकी चूत एक दम गुलाबी रंग की थी उसपे रेशम जैसे हल्के हल्के ब्राउन कलर के बाल
थे, उसकी चूत के लिप्स ज़्यादा बड़े नही हुए थे अभी क्यूकी करण से उसकी शादी हुए अभी
कुछ ही दिन हुए थे और जब उसकी शादी हुई थी उसकी चूत सील पॅक थी,, करण का लंड
भी लंबा ज़रूर था लेकिन बहुत पलटा था,,इसलिए रितिका की चूत ज़्यादा खुली नही थी
अभी तक,,,मैं कुछ पल उसकी चूत को घूरता रहा फिर दोनो हाथों से उसकी चूत के
छोटे छोटे होंठों को पकड़ा और उसकी चूत को खोल कर अंदर के गहरे गुलाबी हिस्से को देखा
,,मेरी हालत बहुत खराब हो गयी थी मेरे से अब रुका नही जा रहा था मैने उसकी चूत को
खोला और जल्दी से अपने मुँह मे भर लिया और चूसना शुरू कर दिया,,वो एक दम से पीछे हटने
लगी तो मैने उसको दोनो हाथों से उसकी गान्ड से पकड़ा और उसकी चूत को अपने मुँह पर दबा
लिया और चूत के दोनो होंठों को मुँह मे भरके चूसने लगा,,,,मैं उसकी चूत पर ऐसे किस
करने लगा जैसे कुछ देर पहले उसके होंठों पर कर रहा था,,,,


वो मचलती जा रही थी और खुद को मेरे से दूर करने की कोशिश कर रही थी बेड पर इधर
उधर पलट रही थी लेकिन मैने उसको उसकी गान्ड के करीब से कस कर पकड़ा हुआ था और उसकी
चूत को चाट-ता जा रहा था,,,,कुछ ही देर मे उसकी सिसकियाँ शुरू हो गयी,,,,अहह
आहह हहययययययईई ऊऊऊओह मैं समझ गया कि अब ये कहीं नही जाने
वाली इसलिए मैने उसकी गान्ड से अपनी पकड़ थोड़ी कमजोर की और अपने हाथ वापिस उसकी चूत
पर ले आया और फिर उसकी चूत के दोनो होंठों को साइड मे करके उसकी चूत को खोल दिया और
अंदर के गहरे गुलाबी हिस्से पर अपनी ज़ुबान घुमाने लगा,,,,वो बस सिसकियाँ लेती जा रही 
थी और तेज़ी से हाँफ रही थी,,,,
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12-21-2018, 02:16 PM,
RE: Hindi Porn Story कहीं वो सब सपना तो नही
मैं उसकी चूत को करीब 10-15 मिंट से चाट और चूस रहा था तभी उसके बदन ने तेज़ी
से झटके मारने शुरू कर दिए मैं समझ गया कि ये झड़ने वाली हो गयी है इसलिए मैं 
थोड़ा पीछे हट गया और उसकी चूत के उपर वाले हिस्से पर तेज़ी से उंगली के साथ मसल्ने
लगा तभी वो ज़ोर ज़ोर से सिसकियाँ लेती हुई पानी बहाने लगी लेकिन वो सिर्फ़ पानी ही नही
था वो इतनी मस्त हो गयी थी कि उसका पेशाब निकल गया था,,,आज पहली बार ऐसा हुआ था
कि मैने किसी का पेशाब निकाल दिया था चूत को चाट चाट कर,,,उसके पेशाब की बौछार
मेरी छाती पर होने लगी कुछ छींटे मेरे मुँह पर भी पड़े लेकिन ज़्यादा पेशाब मेरी
छाती पर गिरा,,,,,,जब उसका पेशाब ख़तम हुआ तो मैं उठकर बेड पर बैठ गया और बेड
से अपनी टी-शर्ट उठाकर अपनी छाती पर लगे हुए उसके पेशाब को सॉफ करने लगा,,,वो बस
तेज़ी से साँसे लेती हुई मेरी तरफ देख रही थी,,,,,


मैं खड़ा हो गया और उसकी तरफ देखते हुए अपनी पेंट उतारने लगा,,,मेरी पेंट उतर गयी और
मैं नंगा हो गया क्यूकी अब मेरी आदत नही रही थी अंडरवेार डालने की पेंट के नीचे,,जब
पेंट उतर गयी और मैं नंगा हो गया तो मेरा बड़ा मूसल पूरी ओकात मे आ चुका था,, जब
उसकी नज़र मेरे मूसल पर पड़ी वो थोड़ा हैरान होके एक टक मेरे मूसल की तरफ देखने
लगी,,, लेकिन तभी वो और भी ज़्यादा हैरान हो गयी क्यूकी मैने अपने मूसल पर थोड़ा थूक
लगा लिया था और उसकी चूत की तरफ़ बढ़ने लगा था,,,वो अभी झड कर हटी थी और मैं 
फिर से उसकी चूत की तरफ जा रहा था इसलिए वो डरी हुई थी,,,,,मैने लंड पर थूक
लगाया और बेड पर टाँगे खोल कर बैठ गया,,,,इस से पहले वो कुछ बोलती या करती मैने
उसको कमर से पकड़ा और अपनी टाँगों के बीच मे खींच लिया,,वो मुझे रोकना चाहती थी
लेकिन अब बहुत देर हो गयी थी,, मैने उसको अपने करीब किया और लंड को पकड़ कर उसकी 
चूत पर रखा और फिर उसकी कमर से पकड़कर एक ही झटके मे आधा लंड उसकी चूत
मे उतार दिया,,,,


मैं ये सब प्यार से करना चाहता था लेकिन काफ़ी दिन से चूत नही मारी थी और अब रितिका
जैसी हॉट लड़की थी सामने तो मैं खुद पर क़ाबू नही कर सका,,,,लंड पर थूक लगा था
और चूत अपने ही पानी से गीली और चिकनी हो चुकी थी जैसे ही लंड रख कर मैने धक्का
दिया लंड पहली बार मे आधा अंदर घुस गया और उसके मुँह से एक चीख निकल गयी,, शायद 
उसको दर्द हुआ था और उसको एहसास था पहले से कि इतना बड़ा मूसल उसकी चूत मे जाएगा तो 
उसको दर्द होगा इसलिए चीखने से पहले ही उसने अपने मुँह पर हाथ रख लिए थे जिस से 
उसकी चीख रूम तक ही सीमित रही थी,,,,,मैने उसकी चीख पर ज़्यादा ध्यान नही दिया और
फिर से एक झटका मारा तो लंड थोड़ा और अंदर खिसक गया और इस बार चीख पहले से थोड़ी
तेज थी और उसको पता था मैं दूसरा झटका मारने वाला हूँ इसलिए उसने मुँह से हाथ हटा
कर मुझे रोकने की कोशिश की तो चीख इस बार पूरे रूम मे गूँज गयी थी,,,,इस बार
उसकी चीख से मेरा ध्यान उसके चेहरे की तरफ गया तो मैं थोड़ा परेशान हो गया उसके फेस
पर हल्का डर था और उदासी के साथ परेशानी भी थी,,उसकी आँखों मे हल्का पानी था,उसकी 
तरफ देख कर मुझे अपनी ग़लती का एहसास हुआ और मैं ऐसे ही रुक गया,,,


हालाकी रितिका करण से चुद चुकी थी लेकिन मेरे मूसल के लिए अभी भी उसकी चूत किसी
सील पॅक चूत से कम नही थी,, उसकी टाइट चूत मे मेरा लंड पूरा कॅसा हुआ था ऐसे
लग रहा था मैने दोनो हाथों मे अपने लंड को मजबूती से पकड़ा हुआ है,,,


मुझे मेरी ग़लती का एहसास हुआ तो मैं रुक गया था,,मैने उसके चेहरे की तरफ देखा तो 
मेरे रुकने से उसकी परेशानी थोड़ी कम हो गयी थी,,,उसके माथे पर पसीना था उसने अपने
हाथों से पसीना सॉफ किया और मेरी तरफ गुस्से से देखा,,,मैने हँसके उसकी कमर से अपने
हाथ उठा लिए और अपने कान पकड़ लिए और उसको सौरी बोला,,,उसको कुछ राहत महसूस हुई
और मेरी सौरी और कान पकड़ने की वजह से वो थोड़ा मुस्कुराइ,,,,मैने हाथ उसके बूब्स पर
रखे और हल्के हल्के उसके बूब्स को मसल्ने लगा ताकि उसका ध्यान चूत के दर्द से हट जाए
और ऐसा ही हुआ,,,,मैं करीन 1-2 मिनिट ऐसे ही रुका रहा और उसके बूब्स मसलता रहा,,
फिर मैने एक हाथ को उसकी चूत पर रखा और उसकी चूत के उपरी हिस्से को सहलाने लगा
जब उसकी सिसकियाँ शुरू हुई तो मैने अपनी कमर को हल्के हल्के आगे पीछे करना शुरू कर
दिया,,,मेरा एक हाथ उसके बूब पर और एक हाथ उसकी चूत के उपर था और मैं हल्के हल्के 
अपनी कमर को आगे पीछे करके जितना भी लंड अभी तक उसकी चूत मे गया था उसी से उसको
चोदने लगा था,,,,,




करीब 3-4 मिनिट तक एक ही स्पीड पर चोदने के बाद जब उसकी सिसकियाँ थोड़ी तेज हुई और
मेरा लंड भी पूरा उसकी चूत मे चला गया तो मैने अपनी स्पीड थोड़ी तेज करदी,,,,


आहह सुउुउउन्न्नययययययी ऊउरर्ररर तीएजज़्ज़्ज काआर्रूऊऊ आहह भ्हुत्त्त माजा
एयेए राहहा हाइी सुउन्नययी,,, हईए भ्हउुूथत् माज्जा आ र्रहहा हाइी,,आअहह और्र तीज
सुउन्नयययी आआहह और्र तीएजज़्ज़्ज हहयइईई

मज़ा आ रहा है ना भाभी,,,,मैने बड़े प्यार से पूछा,,,,,,

हां सनियी भुउउत्त्त माज्जा आ र्रहहा पीहल्ली तू तुउन्नी जान नीककाल दी थ्हीइ
लीक्किन्न आब्ब्ब भ्हुत्त् माज्जाअ आ र्रहहाअ हहाइईइ,, टीर्रा मूसाआल्ल क्कररान्ण की
लुउन्ड्ड़ सी भ्हुत्त्त मूटता हाइईइ सुउन्नयययी मार्र डाअल्ला तहा पीहल्ली टुउन्नईए 


मैने फिर पूछा,,,,, मज़ा आ रहा है ना भाभी,,,,,

हाआन्न सयनायीयी बूल्लाअ नाआ भ्हुत्त्त्त ंमाज़्जाअ एयेए र्रहहाअ हहाइईइ,,,


तो सन्नी मत बोलो ना मुझे,,,,देवर बोलो,,,,,फिर देखना और मज़ा आएगा,,,,,


हान्ं दीएव्वार्र्र ज्जििीइ आईसीए हहिईिइ छूद्दूओ आपपनन्िईिइ बाब्ब्भहिी कूऊव बभ्हुउट
माज्जाअ आ र्राहहाअ हाइईइ द्डीववाररर ज्जिि हयइईई म्माररररर गयइी इट्त्न्नाआअ
ंमाज़्जा द्ड़ीग्गाअ तुऊउ आग्गार्रर प्पीहल्ली पपाटता हूत्तताअ टूऊ त्तीररी ससी आपनीी
छूटतत कििई सीआल्ल ख़्हुउल्लववाननी कीईइ ज़ििदड्ड कब्भीी न्ना कारतीी आक्च्छा हहूउआ
सीआलल्ल्ल काररंण नी ख़्हूल्लीी आग्गार्र तूऊ खहोलता तू मार हिी डाल्लटता मुउज़्झहहे


ज़िद तो फिर भी की आपने भाभी मेरे साथ एक रात के लिए हमबिस्तर होने की और वो ज़िद आज
अपने पूरी भी करली,,,,देख लिया बहुत ज़िद्दी हो आप,,,अब एक ज़िद मेरी भी है,,जब तक
मैं थक नही जाता या अपनी मर्ज़ी से रुकता नही मुझे रुकने को मत बोलना भाभी,,,,


हईीई दीव्वार्र ज्जिि आप्प्प्प टूऊ जान नीककाल द्दूवगगी मीरीईइ पल्लज़्ज़्ज़्ज़ ज़ििदड ना
कारंना,,,,, रुउक्क जांाअ म्मीररी क़हन्नी पीरर,,प्लज़्ज़्ज़्ज़ देवार्र जीिीइ,,,

अरे भाभी डरो नही मैं इतना भी ज़ालिम नही,,,,,,इतना बोलकर मैने भाभी को कमर से
पकड़ा और तेज़ी से भाभी को चोदने लगा,,,जितनी तेज मेरी स्पीड थी उतनी तेज भाभी की आवाज़
थी उतनी तेज भाभी की सिसकियाँ थी जो पूरे कमरे मे गूँज रही थी और साथ साथ गूँज
रही थी रूम मे पकच पकचह की आवाज़ जो मेरी स्पीड के साथ तेज होती जा रही थी,भाभी
की चूत पेशाब की वजह से गीली थी और अब चूत ने मस्ती मे हल्का पानी बहाना भी शुरू
कर दिया था इसीलिए गीली चूत पर लंड की टक्कर से पाआककचह पकचह की आवाज़ काफ़ी
तेज हो चुकी थी,,,,,


मैं रितिका की कमर को पकड़ कर तेज़ी से उसकी चुदाई कर रहा था और वो बस लेटी हुई तेज़ी
से सिसकियाँ ले रही थी,,,,,,कुछ देर बाद मैने लंड को चूत से निकाला और खुद बेड पर
लेट गया और रितिका को अपने उपर आने को एशारा किया,,,वो थोड़ी डरी सहमी हुई मेरे उपर 
आ गयी,,,मैं समझ गया था ये अभी नयी नयी खिलाड़ी है इसलिए मैने उसका साथ देने के लिए
उसकी कमर से पकड़ा और खुद के उपर करके उसकी चूत को लंड के करीब किया और लंड को
चूत पर रखकर उसकी कमर को लंड पर दबा दिया जिस से लंड चूत मे घुस गया फिर
उसकी क्मर को पकड़ कर उपर नीचे करके उसको अपने लंड की सवारी करवाने लगा,, लेकिन उसको
इस सब मे थोड़ी मुश्किल हो रही थी इसलिए मैने उसकी कमर को रोक दिया और उसकी हल्का उपर
उठा दिया और खुद नीचे से उसकी चूत की चुदाई करने लगा,,,,वो मेरी हरकत से थोड़ी खुश
हो गयी और शरमा भी गयी क्यूकी वो समझ गयी थी कि मैं जान गया हूँ वो अभी नयी खिलाड़ी
है,,,इसके बदले मे उसने अपने सर को नीचे किया और मेरे लिप्स पर किस करने लगी,,,काफ़ी 
देर मैं ऐसे ही उसके लिप्स को किस करता हुआ उसकी चुदाई कर रहा था फिर मैं उसको ऐसे
ही गोद मे उठाकर बेड पर खड़ा हो गया,,,,उसका वजन ज़्यादा नही था वो बहुत दुबली पतली
थी इसलिए मुझे कोई परेशानी नही हुई उसको गोद मे उठाने मे,,,
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