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kamukta kahani अय्याशी का अंजाम
06-27-2018, 10:49 AM,
#1
kamukta kahani अय्याशी का अंजाम
दोस्तो ये कहानी कॉपी पेस्ट है पर आपको पसंद आएगी


काली अंधेरी रात में बारिश जोरों से हो रही थी और एक कार स्पीड से सड़क पर दौड़ रही थी, यह करीब रात के 10 बजे की बात होगी।
जय- अरे यार धीरे चला.. मरवाएगा क्या.. देख सड़क पर पानी ही पानी फैला है.. कोई सामने आ गया तो ब्रेक भी नहीं लगेगा।
दोस्तो, यह है जय खन्ना.. उम्र 20 साल रंग गोरा.. कद 5’9″.. स्लिम बॉडी और बेहद अमीर रणविजय खन्ना जो दिल्ली के बड़े प्रॉपर्टी डीलर हैं.. उनका बेटा है। पैसों के बल पर इसमें थोड़ा बिगाड़ आ गया है.. या देसी भाषा में कहो.. तो पक्का चोदू हो गया है ये.. बस लड़की देखी नहीं कि नियत खराब..

विजय- अबे डर गया तू.. साले फट्टू.. कुछ नहीं होगा.. गाड़ी मैं चला रहा हूँ.. विजय दि रॉकस्टार.. तू बस देख..
यह है विजय खन्ना.. कहने को तो यह जय का चचेरा भाई है.. मगर दोनों रहते एकदम दोस्त की तरह हैं। वैसे तो विजय ठीक है.. मगर जय ने इसको भी अपने रंग में ढाल लिया है। कभी-कभी ये भी जय के साथ रंगरेलियाँ मना लेता है। वैसे विजय के पापा के देहांत के बाद रणविजय खन्ना ने ही इसको संभाला है। अब ये दोनों साथ ही रहते हैं। बाकी के बारे में बाद में बता दूँगी। इसकी भी उम्र लगभग 20 साल की ही है और बाकी सब भी जय जैसा ही है।
चलिए आगे चलते हैं..
जय- अरे मेरे भाई.. डर मरने का नहीं लग रहा.. अगर एक्सीडेंट के बाद हम बच भी गए.. तो लूले लंगड़े हो जाएँगे.. अभी तो हमने ठीक से अय्याशी भी नहीं की है..
विजय- अबे कुछ नहीं होगा.. हमारे पास इतने पैसे हैं कि लूले हो भी गए तो भी अय्याशी में फ़र्क नहीं आने वाला।
जय- अरे रुक-रुक.. वो देख.. उधर क्या तमाशा हो रहा है?
सड़क से कुछ दूर बिजली की गड़गड़ाहट के साथ जय को कुछ अजीब सा दिखा तो उसने विजय को रुकने को कहा।
विजय ने गाड़ी को धीरे किया और रोका.. तब तक वो कुछ आगे निकल आए थे।
जय के कहने पर विजय ने गाड़ी वापस पीछे ली।
जय- बस बस.. यहीं रोक यार.. वहाँ कुछ लोग जमा हैं और शायद कोई लड़की भी है.. मुझे हल्का सा कुछ दिखा है।
विजय- भाई.. तू पक्का लड़कीबाज है.. अंधेरे में भी लड़की ताड़ ली.. चल देखते हैं क्या मामला है।
दोनों ने रेन कोट पहने हुए थे.. तो आराम से गाड़ी से बाहर निकल गए और उन लोगों के पास पहुँच गए।
जब वो पास को गए.. तो वहाँ कुछ आदमी और एक लड़की खड़ी थी और पास में एक औरत नीचे लेती हुई कराह रही थी.. जिसके सर से खून निकल रहा था।
जय- अरे क्या हुआ भाई.. ऐसी तूफानी रात में यहाँ क्यों खड़े हो? और इस औरत को क्या हुआ है?
गाँव वाला- बाबूजी ये बेचारी जा रही थी.. कि पेड़ की डाल टूट कर इसके सर पर गिर गई.. ज़ख्मी हो गई है बेचारी.. इसको अस्पताल तक पहुँचा दो.. बड़ी मेहरबानी होगी आपकी..
विजय- अरे ये तो बहुत ज़ख्मी है.. तो अब तक तुम क्या कर रहे हो.. इसको लेकर क्यों नहीं गए और इतनी रात को यहाँ खड़े-खड़े क्या कर रहे हो?
गाँव वाला- अरे बाबूजी अभी-अभी ही तो ये सब हुआ है.. हम सब पास के गाँव से आ रहे थे.. तो देखते ही देखते बस ये सब हो गया।
जय- पैदल ही आ रहे थे क्या.. और तुम्हारा गाँव कहाँ है?
रानी- बाबूजी.. बस 2 कोस पर ही हमारा गाँव है.. ले चलो ना.. आपका बड़ा अहसान होगा.. ये मेरी माई है.. भगवान आपका भला करेगा..
इतनी देर से वो लड़की पेड़ की आड़ में खड़ी थी.. तो दोनों का ध्यान उस पर नहीं गया था.. मगर जब वो सामने आई.. तो जय तो बस उसको देखता ही रह गया।
वो करीब 18 साल की एक बड़ी ही खूबसूरत सी लड़की थी.. बड़ी-बड़ी सी कजरारी आँखें और लंबे बाल.. बारिश में भीगे हुए उसके कुर्ते से उसके 30″ के मम्मे साफ-साफ झलक रहे थे। अन्दर शायद उसने काली ब्रा पहनी हुई थी जिसकी पट्टी साफ़ नज़र आ रही थी।
पतली सी कमर के साथ 30″ की मादक और उठी हुई गाण्ड.. जो भीगने के कारण और भी ज़्यादा मस्त लग रही थी।
जय- ओह.. चलो देर क्यों करते हो.. इसको गाड़ी तक ले आओ..
जय और विजय की नजरें आपस में मिलीं और एक इशारे में दोनों ने बात की।
उस औरत को पीछे की सीट पर लेटा दिया.. उसी के साथ में रानी भी बैठ गई।
विजय- देखो भाइयो.. यहाँ बस और किसी के बैठने की जगह नहीं है.. तुम सब पैदल ही आ जाओ.. हम इसको लेकर जाते हैं.. ठीक है ना..
सबने ‘हाँ’ कह दी तो विजय ने गाड़ी आगे बढ़ा दी।
विजय- तेरा नाम क्या है?
रानी- मेरा नाम रानी है बाबूजी..
जय- अरे वाह.. तेरा नाम तो बड़ा प्यारा है.. रानी.. वैसे कितनी साल की हो गई हो? स्कूल वगैरह जाती है या नहीं?
रानी- जी.. मैं 18 साल की हो गई हूँ स्कूल कहाँ जाऊँगी बाबूजी.. बस पहले पहल दो जमात तक गई.. उसके बाद बापू चल बसे.. तो माई अकेली रह गई। अब घर में खाने के लिए मुझे भी माई के साथ काम पर जाना पड़ा।
विजय- अरे.. अरे.. सुनकर बड़ा दुःख हुआ वैसे तू काम क्या करती है?
रानी- जी बाबूजी.. घर का सारा काम जानती हूँ.. खाना बनाना झाड़ू-फटका.. सफाई.. सब कुछ..
जय- अच्छा कितने पैसे कमा लेती है दिन भर में?
रानी- दिन के कहाँ बाबूजी.. किसी घर से 400 तो किसी से 500 महीने के मिल जाते हैं।
विजय- इतना काम.. अरे साले छोड़ हैं सब.. इससे अच्छा तो शहर में मिलता है.. महीने के 3000 तक मिल जाते हैं रहना-खाना.. कपड़े.. वो सब अलग से..
रानी- सच्ची में इतना मिलता है? हमें भी कहीं लगवा दो ना बाबूजी..
विजय- भाई अभी ये 18 की है.. अब आप ही संभालो.. आपकी तो निकल पड़ी..
विजय ने ये बात धीरे से अंग्रेजी में कही थी।
जय- अरे लगवा तो दूँ.. मगर शहर में एक ही घर में काम करना होगा.. वहीं रहना होगा.. हाँ.. महीने के महीने पगार घर भेज देना और दूसरी बात सेठ लोगों के हाथ पाँव भी रात को दबाने होंगे.. तू ये सब कर लेगी?
रानी- अरे बाबूजी.. मैं शहर में रह लूँगी.. और हाथ-पाँव तो क्या.. मैं पूरे बदन की ऐसी मालिश करना जानती हूँ कि सेठ खुश हो जाएगा.. बस आपकी बड़ी दया होगी.. मुझे काम पर लगवा ही दो..
विजय- ले भाई जय.. इसको तो मालिश भी आती है.. अब तो इसको ‘काम’ पर लगाना ही पड़ेगा..
दोस्तो, ये बस बातें करते रहे और गाड़ी चलती रही.. थोड़ी दूर जाने के बाद सड़क से दाहिनी तरफ़ रानी ने बताया कि वो सामने उसका गाँव है।
तो बस विजय ने गाड़ी उसी तरफ़ बढ़ा दी और वहाँ जाकर गाँव के अस्पताल में उसकी माँ को ले गए.. जहाँ डॉक्टर ने अपना काम शुरू कर दिया और रानी इन दोनों के साथ बाहर बैठी रही..
यहाँ बल्ब की रोशनी में रानी के जिस्म की चमक दुगुनी हो गई थी.. जिसे देख कर जय का लंड पैन्ट में अकड़ने लगा था।
क्यों दोस्तों क्या हुआ.. शुरूआत में ही मज़ा लेना चाहते हो क्या.. अरे यह पिंकी सेन की कहानी है.. इतनी आसानी से कुछ नहीं होगा.. और दूसरी बात.. मेरी कहानी में बस यही 3 किरदार.. नहीं.. नहीं.. अभी तो शुरूआत है.. बहुत सारे किरदार आएँगे और जाएँगे.. अबकी बार आपको चक्कर ना आ जाए तो कहना..
दोस्तो, यहाँ के सीन को अभी रोकती हूँ और दूसरे सीन की शुरूआत करती हूँ.. ताकि और भी किरदार आपके सामने आ जाएं.. तो चलिए आज ही की रात इसी वक़्त पर सीधे आपको दिल्ली ले चलती हूँ।
कमरे में दो लड़कियाँ बैठी हुई आपस में बात कर रही थीं और दरवाजे के बाहर के होल पर कोई नजरें गड़ाए उनको देख रहा था।
चलो अब ‘ये लड़कियाँ कौन हैं…’ पहले इनके बारे में जान लेते हैं।
इसमें से एक का नाम है काजल और दूसरी का रश्मि.. अब इनकी आगे की जानकारी भी ले लीजिए..
काजल इसकी उम्र है 21 साल.. रंग गेहुँआ.. कद ठीक-ठाक.. चूचे 34″ के एकदम उठे हुए.. बलखाती कमर 30″ की और एकदम गोल गाण्ड.. बाहर को निकली हुई थी 34″ की..
यह कौन है.. किसकी बेटी है.. यह बाद में बता दूँगी। अभी बस इतना काफ़ी है।
और दूसरी रश्मि की उम्र है 18 साल.. रंग दूध जैसा सफेद.. बला की खूबसूरत.. इसको देख कर कई लड़कों की पैन्ट में तंबू बन जाता है क्योंकि इसका फिगर ही ऐसा है 32″ के नुकीले मम्मों को देखें जरा.. ऐसे नोकदार.. जिसे देसी भाषा में खड़ी चूची भी कहते हैं। एकदम हिरनी जैसी पतली कमर और एटम बम्ब जैसी 32″ की मुलायम मतवाली गाण्ड.. जब यह चलती है.. तो रास्ते में लोग बस यही कहते हैं हाय.. कभी ये पलड़ा ऊपर.. तो कभी वो पलड़ा ऊपर.. आप मेरे कहने का मतलब समझ गए ना.. चलो अब आगे तमाशा देखते हैं।
काजल- अरे यार.. तू भी क्या नखरे कर रही है.. चल आजा आज तुझे भी मज़ा देती हूँ।
रश्मि- नहीं यार काजल.. मुझे ये सब अच्छा नहीं लगता..
काजल- अरे क्या यार.. तू कब तक अपनी जवानी का बोझ लिए घूमेगी.. कितनी खूबसूरत है तू.. तेरे पर लड़के मरते हैं किसी को तो अपनी जवानी का मज़ा दे..
रश्मि- नहीं काजल.. तुम ही करो ये सब.. मुझे ऐसे ही रहने दो..
काजल और रानी साथ एक कमरे में रहती हैं और रोज ‘लेस्बीयन’ करती हैं।
उधर रश्मि अपनी फ्रेण्ड टीना के साथ दूसरे कमरे में रहती थी.. मगर अब कॉलेज की छुट्टियाँ चालू हो गई हैं। रानी और टीना किसी के यहाँ चले गए हैं.. तो काजल और रश्मि को एक ही कमरे में शिफ्ट होना पड़ा.. जैसे-जैसे लड़कियों के घर वाले उनको लेकर जाते रहेंगे.. यहाँ ऐसे ही सबको कमरे बदलना पड़ेगा।
आज काजल के मन में है कि वो रश्मि के साथ मज़ा करे- तू ऐसे नहीं मानेगी.. चल तुझे कुछ दिखाती हूँ.. शायद तेरा मन कुछ करने को करे..
काजल ने अपनी नाईटी निकाल दी और अन्दर उसने कुछ नहीं पहना था।
रश्मि- छी: काजल.. तुमको ज़रा भी शर्म नहीं आ रही.. ऐसे नंगी हो गई हो..
काजल- अरे बस कर यार.. तू जानती है हम दोनों लड़की हैं अब तेरे पास ऐसा क्या खास है.. जो मेरे पास नहीं है..
रश्मि- अच्छा मेरी माँ.. ग़लती हो गई.. हो जा नंगी.. पर अब बस मुझे कुछ भी मत कहना।
काजल- मेरी जान.. तू नंगी हो या ना हो मगर मुझे शांत तो कर दे प्लीज़..
रश्मि- वो कैसे करूँ.. मुझे कुछ भी नहीं आता..
काजल- अरे यार तू तो जानती है.. राजेश यहाँ होता तो कब की उसके पास जाकर अपनी प्यास बुझा लेती.. अब वो यहाँ है नहीं.. और रानी भी चली गई.. प्लीज़ थोड़ी देर मेरे साथ मस्ती कर ना यार प्लीज़..
दोस्तो, काजल एक बिगड़ी हुई लड़की है.. जो चुदाई के खेल में पक्की खिलाड़ी है, वो अपने प्रेमी राजेश से कई बार चुद चुकी थी.. मगर रश्मि बेचारी इन सबसे दूर रहती है।
काजल ने उसको बहुत मनाया.. मगर वो नहीं मानी..
काजल- तू किसी काम की नहीं है.. अब मुझे ही कुछ करना होगा।
काजल थोड़ी गुस्सा हो गई थी और उसने नाईटी पहनी और दरवाजे की तरफ़ जाने लगी।
रश्मि- अरे सॉरी यार.. मुझे ये सब पसन्द नहीं है.. पर तुम कहाँ जा रही हो?
काजल- अरे इस हॉस्टल में 600 लड़कियाँ हैं कोई तो होगी जो मेरे जैसी होगी.. तू बस आराम से सो जा.. मैं तो अपनी चूत की आग मिटा कर ही आऊँगी।
काजल को दरवाजे की ओर आता देख कर वो शख्स जो कब से सब देख रहा था.. वो जल्दी से पीछे को हट गया और कॉरीडोर में दाहिनी तरफ को भाग गया।
काजल कमरे से बाहर निकली और थोड़ा सोच कर वो भी दाहिनी तरफ चलने लगी। तभी कॉरीडोर की लाइट चली गई और वहाँ एकदम अंधेरा हो गया।
काजल- ओह.. शिट.. ये लाइट को भी अभी जाना था..
वो अंधेरे में धीरे-धीरे आगे बढ़ रही थी.. उसको कुछ दिखाई नहीं दे रहा था।
कुछ देर बाद किसी ने काजल के मुँह पर हाथ रख दिया और उसकी कमर को मजबूती से पकड़ लिया, इस अचानक हुए हमले से काजल की तो जान ही निकल गई।
साया- मुझे पता है.. तुम्हें क्या चाहिए.. और मैं वो तुम्हें दे सकता हूँ.. अगर चिल्लाओ नहीं.. तो मैं मुँह से हाथ हटा देता हूँ.. पर अगर चिल्लाईं तो ठीक नहीं होगा।
काजल ने ‘हाँ’ में सर हिलाया तो उस साये ने अपना हाथ हटाया।
काजल- कौन हो तुम और यहाँ क्या कर रहे हो?
साया- मैं कौन हूँ.. यह जानना जरूरी नहीं.. मेरे पास वो आइटम है.. जिसकी आपको बहुत जरूरत है।
काजल- क्या आइटम है.. मैं कुछ समझी नहीं.. मुझे किस चीज की जरूरत है?
उस साये ने पैन्ट की ज़िप खोली.. उसका लौड़ा तना हुआ था.. जो झट से बाहर आ गया, उसने काजल का हाथ पकड़ा और अपने लंड पर रख दिया।
काजल ने जब लौड़े को पकड़ा.. तो उसके जिस्म में करंट सा दौड़ गया.. उसने जल्दी से हाथ हटा लिया- यह क्या बदतमीज़ी है.. कौन हो तुम?
साया- मिस काजल.. आपको अभी इसी की जरूरत है.. अब ये नाटक बन्द करो और हाँ कह दो..
काजल- मुझे कुछ नहीं चाहिए.. जाओ यहाँ से.. नहीं तो मैं शोर मचा दूँगी।
साया- ओके ओके.. जाता हूँ.. मगर दोबारा सोच लो.. ऐसा तगड़ा लौड़ा दोबारा नहीं मिलेगा.. तुम्हारी तड़प को मैं ही मिटा सकता हूँ.. अगर नहीं लेना है.. तो मैं जाता हूँ.. बाय.. जान.. तुम अकेली घूमो.. कोई नहीं मिलेगी तुम्हें.. सब सो गई हैं हा हा हा हा।
काजल समझ गई कि ये जरूर यहाँ का चौकीदार प्रमोद होगा.. क्योंकि वही इस समय यहाँ घूमता रहता है।
काजल- प्रमोद, मुझे पता है.. यह तुम ही हो.. बोलो.. नहीं तो मैं सुबह मैडम को बता दूँगी.. 
साया- हा हा हा.. अरे जान क्यों उस गरीब को मरवा रही हो.. मैं कोई प्रमोद नहीं हूँ.. तुमको अगर चुदना है.. तो हाँ बोलो.. नहीं तो मैं कहीं और जाता हूँ।
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06-27-2018, 10:49 AM,
#2
RE: kamukta kahani अय्याशी का अंजाम
उसके बात करने के ढंग से काजल को भी यही लगा कि यह प्रमोद नहीं हो सकता क्योंकि वो तो अलग ही अंदाज में बात करता है और इसकी आवाज़ भी उससे नहीं मिलती।
काजल- रूको तो.. तुम हो कौन?
साया- मेरी जान.. मैं तुम्हें अपने बारे में नहीं बता सकता.. मगर हाँ.. अगर तुम हाँ कह दो.. तो ऐसा मज़ा दूँगा.. कि सारी जिंदगी मेरे लौड़े को याद रखोगी।
उसकी बातों से काजल की चूत की आग भी अब तेज हो गई थी- अच्छा ये बात है.. तो ज़रा अपने लौड़े का कमाल भी दिखा दो.. कैसा मज़ा देता है ये..
साया- चलो मेरे साथ.. यहाँ ज़्यादा देर खड़े रहना ठीक नहीं..
उस साये ने काजल का हाथ पकड़ा और कॉरीडोर के अंत में एक खाली कमरा पड़ा था.. जहाँ अक्सर एग्जाम के समय लड़कियाँ पढ़ाई करती थीं.. वो काजल को उस कमरे में ले गया।
अन्दर जाते ही साये ने काजल के होंठों पर अपने होंठ रख दिए और उनको चूसने लगा।
काजल तो पहले ही वासना की आग में जल रही थी.. अब वो भी उसका साथ देने लगी और उसकी कमर पर हाथ घुमाने लगी।
कुछ देर बाद दोनों अलग हुए।
काजल- उफ़फ्फ़ कौन हो तुम.. आह्ह.. मेरी चूत में आग लगी है.. आह्ह.. अब बर्दास्त नहीं होता.. जल्दी से घुसा दो अपना लौड़ा.. उफ्फ..
साया- इतनी भी क्या जल्दी है जान.. पहले अपने कपड़े तो निकाल ले..
काजल तो जैसे उसके हुकुम की गुलाम हो उठी थी.. उसने झट से अपने कपड़े निकाल दिए और तब तक उस साये ने भी कपड़े निकाल दिए थे।
कमरे में बहुत ही अंधेरा था.. बड़ी मुश्किल से दोनों एक-दूसरे को देख पा रहे थे।
साये ने काजल के कन्धों को पकड़ कर उसको नीचे बैठा दिया और अपना 8″ का लौड़ा उसके मुँह के पास कर दिया।
काजल ने लौड़े को हाथ से पकड़ कर उसकी लंबाई और मोटाई का अहसास किया.. तो वो ख़ुशी से फूली ना समाई।
काजल- वाउ.. क्या मस्त लंड है तेरा तो.. और काफ़ी बड़ा भी है..
साया- ले.. चूस मेरी जान.. तेरे आशिक से तो अच्छा ही है.. मज़ा कर।
काजल ने सुपारे को मुँह में लिया और बस मज़े से चूसने लगी।
साया- आह्ह.. चूस.. मेरी काजल रानी.. तू बड़ी कमाल की हसीना है.. आह्ह.. चूस..
कुछ देर चूसने के बाद काजल खड़ी हो गई और उस साये का हाथ पकड़ कर एक दीवार के पास ले गई- बस साले.. अब बर्दास्त नहीं होता घुसा दो अपना लंड.. मेरी दहकती चूत में.. कर दो मुझे ठंडा..
साये ने काजल को दीवार के सहारे घोड़ी बनाया और लौड़े को चूत पर सैट करके जोरदार झटका मारा.. ‘घुप्प’ से लौड़ा चूत में आधा घुस गया।
काजल- आह.. आईई.. मर गई रे.. आह्ह.. क्या बेहतरीन लंड है तेरा.. आह्ह.. पूरा घुसा आह्ह.. मज़ा आ गया आह्ह..
उस साये ने लौड़े को पीछे किया और अबकी बार ज़ोर से झटका मारा.. पूरा लौड़ा चूत में समा गया।
काजल पहले भी अपने ब्वॉयफ्रेण्ड से चुदवा चुकी थी.. मगर आज ऐसे तगड़े लौड़े की चुदाई उसको अलग ही मज़ा दे रही थी। वो गाण्ड को पीछे धकेल कर चुद रही थी।
साया- आह ले.. मेरी काजल.. आह्ह.. आज तेरी चूत को आह्ह.. असली लौड़े का स्वाद देता हूँ.. आह्ह.. अब तक तो तू बस उस मंजनू से ही चुद रही थी आह्ह.. अब आज के बाद तुझे मेरे लौड़े की आदत आ हो जाएगी.. आह्ह.. ले.. हरामिन..
काजल- आह्ह.. आह.. फास्ट फास्ट.. मेरे अनजान हरामी आशिक.. आह्ह.. मज़ा आ गया.. आह्ह.. और ज़ोर से करो.. आह्ह.. मैं झड़ने ही वाली हूँ आह्ह..
साया- आह उहह.. ले ले आ उहह मेरी जान.. मेरा भी पानी निकलने ही वाला है.. आह्ह.. कहाँ निकालूँ.. बाहर छोड़ दूँ या अन्दर लेगी.. आह्ह..
काजल- उईई.. उईई.. उफ़फ्फ़ अन्दर ही आह्ह.. निकाल दो आह्ह.. मैं गोली ले लूँगी आह्ह.. उह.. मैं गई आह्ह..
काजल की चूत ने पानी छोड़ दिया और उसके साथ ही उस साये ने भी अपना वीर्य काजल के पानी से मिला दिया।
अब चुदाई का तूफ़ान थम गया था और दोनों वहीं नीचे बैठ गए।
काजल- उफ्फ.. क्या बड़ा लंड है तेरा.. मज़ा आ गया.. अब तो बता दे.. तू है कौन.. और तुझे कैसे पता है कि मैं इतनी प्यासी हूँ.. जो मुझे चोदने चला आया। 
साया- नहीं काजल डार्लिंग.. कुछ बातें छुपी रहें.. यही बेहतर होता है। अब मैं जाता हूँ.. तुम भी जाओ.. नहीं तो किसी को पता लग जाएगा..
इतना कहकर वो खड़ा हुआ और अपने कपड़े पहनने लगा।
काजल- अरे अब तो तुमने मुझे चोद कर अपना बना लिया.. तो ये छुपा-छुपी किस लिए.. बता न.. कौन हो.. और कभी मुझे तुम्हारी जरूरत होगी तो?
साया- काजल डार्लिंग.. मैंने कहा ना.. यह राज़ की बात है और जब तुम्हें जरूरत होगी.. मैं खुद आ जाऊँगा.. तुम बस अपने कमरे के बाहर सफेद कपड़ा या कोई पेपर लगा देना.. ओके बाय जान..
काजल- ओके.. छुट्टियों के बाद मिलती हूँ.. क्योंकि कल शायद मैं चली जाऊँगी।
क्यों दोस्तो, अब यहीं रहोगे क्या.. अभी तो ऐसे बहुत सीन आने है.. तो चलो गाँव में चलते हैं वहाँ रानी का क्या हो रहा है।
रानी की माँ के मलहम-पट्टी होने के बाद दोनों ने उनको घर छोड़ा.. जहाँ रानी की माँ सरिता ने उनको बहुत धन्यवाद दिया।
विजय- अरे इसमें शुक्रिया की क्या बात है.. यह तो हमारा फर्ज़ था।
रानी- माँ.. ये बाबूजी बता रहे थे कि शहर में काम के बहुत पैसे मिलते हैं।
विजय और जय ने रानी की माँ को भी अपनी बातों में ले लिया।
सरिता- बेटा तुम्हारा भला होगा.. रानी को भी कहीं लगवा दो ना..
जय- देखिए.. अभी तो हम यहाँ से कुछ दूर अपने फार्म हाउस पर जा रहे हैं कुछ दिन वहाँ रहेंगे.. उसके बाद वापस दिल्ली जाएँगे.. तब कहीं लगवा दूँगा।
विजय- हाँ आंटी ये सही रहेगा.. अच्छा तो हम चलते हैं।
विजय जब खड़ा हुआ तो जय ने उसे आँख से इशारा किया कि रानी का क्या करें?
विजय- आंटी हम कुछ दिन फार्म हाउस पर रहेंगे.. वहाँ के काम के लिए आप किसी को हमारे साथ भेज दो.. हम अच्छे पैसे दे देंगे।
सरिता- अरे बेटा कोई और क्यों.. रानी को ले जाओ.. जो ठीक लगे.. सो इसको दे देना।
जय- अरे हाँ.. ये सही है ना.. कुछ दिनों की तो बात है.. वहाँ इसका काम भी देख लेंगे.. चलो रानी कपड़े बदल लो.. तुम पूरी भीगी हुई हो।
रानी- जी बाबूजी.. अभी आई.. आप बैठो.. आपके लिए कुछ चाय-पानी लाऊँ?
विजय- अरे नहीं नहीं.. बस तुम जल्दी करो.. देर हो रही है..।
रानी बड़ी खुश थी कि बड़े लोगों के यहाँ उसको काम मिल गया। वो दूसरे कमरे में कपड़े बदलने चली गई और कुछ ही देर में दूसरे कपड़े पहन कर एक पोटली लिए आ गई।
विजय- अरे इसमें क्या है?
रानी- वो बाबूजी अब वहाँ कितने दिन रहूंगी.. तो कुछ कपड़े लिए हैं।
जय- अच्छा किया.. ये लो आंटी ये 500 रुपये अपने पास रखो.. दवा बराबर लेती रहना और बाकी के पैसे रानी को दे देंगे।
सरिता तो 500 रुपये देख कर खुश हो गई।
सरिता- अरे बेटा.. तुमने तो कहा कुछ दिन वहाँ रहोगे.. तो इतने पैसे क्यों दिए और बाद में और भी दोगे?
विजय- अरे रख लो.. आंटी ये तो पेशगी है.. आगे ऐसे और नोट रानी को मिलेंगे.. हम खून चूसने वाले नहीं हैं काम का हक़ बराबर देते हैं।
इतना कहकर वो बाहर निकल गए.. रानी भी उनके पीछे चलने लगी.. तो सरिता ने उसका हाथ पकड़ लिया।
उन दोनों के बाहर जाने के बाद सरिता ने रानी से कहा- बहुत भले लोग हैं इनको किसी भी तरह की तकलीफ़ ना होने देना.. सब काम अच्छे से करना.. तेरे भाग खुल गए हैं बेटी.. जो ऐसे भले लोगों के यहाँ काम पर जा रही है.. तू बस इनको खुश रखना..
जय दरवाजे के पास ही खड़ा था.. उसको ये बात सुनाई दे गई तो उसके होंठों पर एक मुस्कान आ गई।
विजय और जय गाड़ी में बैठ गए उनके पीछे रानी भी आ गई और पीछे बैठ गई। कार फिर से अपनी मंज़िल की और बढ़ने लगी।
जय- क्यों रानी क्या कहा माँ ने तुझे?
रानी- कुछ नहीं बाबूजी बस काम समझा रही थीं कि दिल लगा कर सब काम करना.. आपको किसी तरह की तकलीफ़ ना हो.. आपको खुश रखूँ.. यही सब..
विजय- अरे वाह.. तेरी माँ तो बड़ी समझदार हैं तेरे को बड़े अच्छे ढंग से समझाया और हमको क्या तकलीफ़ होगी.. तू बस जय को खुश रखना.. तो समझ तेरी नौकरी पक्की हो जाएगी।
रानी- हाँ बाबूजी कोशिश करूँगी।
वो तीनों बातें करते रहे और कुछ देर बाद गाड़ी एक बड़े से फार्म हाउस के अन्दर चली गई। गाड़ी से उतर कर वो अन्दर गए तो इतने बड़े घर को देख कर रानी की आँखें चकरा गईं।
रानी- अरे बापरे बाबूजी इतना बड़ा घर?
विजय- अरे डरती क्यों है.. तुझे बस हमारी सेवा करनी है.. बाकी काम के लिए तो यहाँ बहुत नौकर हैं।
उस फार्म में कुल 6 आदमी थे.. जो वहाँ की साफ-सफ़ाई खाने का बंदोबस्त आदि करते थे। वो सब इनके खास नौकर थे अक्सर जय वहाँ लड़कियों के साथ आता और रंगरेलियाँ मनाता था.. जिसकी उनको आदत थी।
जय- चल रानी तू विजय के साथ अन्दर जा.. मैं अभी आता हूँ।
विजय उसको अन्दर ले गया और एक कमरा उसको दिखा दिया कि आज से वो यहाँ रहेगी और उसको ये भी समझा दिया कि यहाँ के बाकी लोगों से वो ज़्यादा बात ना करे।
उधर जय ने सबको समझा दिया कि क्या करना है।
जय के जाने के बाद नौकर आपस में बात करने लगे कि बेचारी कहाँ इस वहशी के जाल में फँस गई.. अब ये इसको कच्चा खा जाएगा।
जय सीधा विजय के पास गया और बिस्तर पर बैठ गया।
विजय- क्यों भाई अब आगे का क्या प्लान है?
जय- प्लान क्या था.. चल बाहर निकाल.. इस ठंडे मौसम में ठंडी बहार और उसके बाद हॉट-गर्ल का मज़ा लेंगे।
विजय- क्या बात है भाई.. इतनी जल्दी.. अरे अभी नई-नई है.. पहले आराम से उसको सिख़ाओ.. नहीं तो बड़ी गड़बड़ हो जाएगी।
जय- अरे यार आज जबसे उसको देखा है.. साला लौड़ा बैठने का नाम ही नहीं ले रहा है।
विजय- अरे मेरे यार वो कोई कॉलगर्ल नहीं.. जो तुरंत चुदने को रेडी हो जाएगी.. वो एक गाँव की सीधी-साधी लड़की है.. उसको धीरे-धीरे प्यार से पटाना होगा।
जय- विजय माय ब्रदर.. तुम मुझे नहीं जानते.. वो जितनी सीधी है.. मैं उतना ही टेढ़ा हूँ। अब तुम जल्दी से बीयर खोलो.. मेरा कब से गला सूख रहा है।
दोनों काफ़ी देर तक बियर का मज़ा लेते रहे.. उसके बाद जय उठा और बैग से एक शॉर्ट्स निकाल कर बाथरूम में चला गया.. जहाँ उसने सारे कपड़े निकाल दिए। यहाँ तक की अंडरवियर भी निकाल दी.. बस एक शॉर्ट्स पहन कर बाहर आ गया।

विजय- अरे भाई ये सलमान बनकर कहाँ जा रहे हो?
जय- तू यहाँ बैठ कर बियर का मज़ा ले.. मैं रानी से थोड़ी मालिश करवा के आता हूँ।
विजय- अपनी मालिश ही करवाना.. कहीं उसकी मालिश ना कर देना हा हा हा..
जय- अब ये तो आकर ही बताऊँगा.. चल तू बियर पी.. मैं चला..
जय वहाँ से निकल कर सीधा रानी के कमरे में पहुँच गया.. वो बिस्तर पर बस लेटी हुई सोच रही थी कि ऐसे आलीशान कमरे मैं वो कभी सोएगी.. ऐसा उसने सपने में भी नहीं सोचा था।
जय- अरे रानी.. दरवाजा लॉक क्यों नहीं किया.. ऐसे ही सो रही है..
रानी- नहीं बाबूजी.. वो मैं अभी सोई नहीं.. बस ऐसे ही लेटी हुई थी.. सोचा सोने के पहले बंद कर दूँगी।
जय- अच्छा किया.. तू सोई नहीं.. बारिस से मेरे पूरे बदन में दर्द हो गया है.. क्या तू ज़रा मेरी मालिश कर देगी?
रानी- अरे बाबूजी इसी लिए तो आपके साथ आई हूँ.. इसमें पूछने की क्या बात है.. आप यहाँ लेट जाओ.. मुझे थोड़ा सरसों का तेल चाहिए.. कहाँ मिलेगा?
जय- अरे तेल को जाने दे.. ऐसे ही दबा दे.. कल तेल भी मंगवा दूँगा..
जय पेट के बल लेट गया और रानी उसके कंधे-कमर आदि को दबाने लगी।
रानी के छोटे-छोटे और मुलायम हाथों के स्पर्श से जय के जिस्म में वासना की लहर दौड़ने लगी.. उसका लौड़ा तन गया.. तो कुछ देर बाद जय सीधा लेट गया और रानी को पैर दबाने को कहा। अब जय सीधा लेटा हुआ था और शॉर्ट्स में उसका लौड़ा तंबू बनाए हुए साफ दिख रहा था। मगर या तो रानी ये सब जानती नहीं थी.. या फिर उसने देख कर अनदेखा कर दिया।
रानी- क्यों बाबूजी.. कुछ आराम मिला आपको?
जय- आह्ह.. आराम कहाँ मिला.. दर्द अब ज़्यादा हो गया है.. लगता है जिस्म का सारा खून पैरों में आकर रुक गया है.. आह्ह.. थोड़ा ऊपर दबाओ.. यहाँ बहुत दर्द हो रहा है।
रानी- अभी लो बाबूजी.. सारा दर्द निकाल दूँगी.. आप बस बताते जाओ.. कहाँ दर्द है?
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06-27-2018, 10:50 AM,
#3
RE: kamukta kahani अय्याशी का अंजाम
जय ने जाँघों में दर्द बता कर रानी को वहाँ दबाने को कहा और वो नादान बड़े प्यार से वहाँ दबाने लगी। अब उसका ध्यान जय के खड़े लंड पर बार-बार जा रहा था.. मगर वो चुपचाप बस अपने काम में लगी हुई थी।
जय- रानी मैंने तेरी माँ को जो 500 रुपये दिए.. वो बस पेशगी थी.. तू रोज मेरी मालिश करेगी.. तो दिन के काम के रोज 100 और रात की मालिश के 200 तुझे और दूँगा।
जय की बात सुनकर रानी की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा। इतने पैसे उसने कभी सपने में नहीं सोचे थे.. जो जय उसको देने की बात कर रहा था।
हैलो दोस्तो.. क्या हुआ कहानी में बड़े खोए हुए हो.. मुझे याद ही नहीं करते.. कि मैं कहाँ हूँ। 
अब रानी को क्या पता था कि जय 200 रुपये में उसकी इज़्ज़त का सौदा कर रहा है। बेचारी उसकी बातों में आ गई.. आगे का हाल आप खुद ही देख लीजिए।
रानी- नहीं नहीं बाबूजी.. जो माँ को दिए.. वही बहुत हैं आप कुछ दिन ही तो यहाँ रहोगे।
जय- नहीं रानी.. ये तेरा हक़ है.. तू बस अच्छे से मालिश करना और जैसा मैं कहूँ.. वैसा करती रहना.. फिर देख मैं तुझे हमेशा के लिए अपने पास काम पर रख लूँगा। तू दिन के 500 रुपये तक कमा लेगी। चल अब थोड़ा ऊपर दबा.. वहाँ दर्द ज़्यादा हो रहा है।
रानी ख़ुशी-ख़ुशी उसकी जाँघें दबाने लगी.. अब उसके हाथ लंड से कुछ इंच की दूरी पर थे.. और लंड अपने पूरे शवाब पर खड़ा हुआ रानी की चढ़ती जवानी को सलामी दे रहा था।
जय- उफ्फ.. रानी थोड़ा और ऊपर दबा ना.. आह्ह.. वहाँ ज़्यादा दर्द है..
अब रानी की समझ के बाहर था कि इसके ऊपर कहाँ दबाऊँ.. क्योंकि जाँघ के बाद तो लौड़ा था और उसके बाद पेट..
रानी- बाबूजी आप हाथ से बताओ ना.. मुझे समझ नहीं आ रहा.. कहाँ दर्द है?
जय ने रानी का हाथ पकड़ा और लौड़े पर रख दिया- उफ्फ.. यहाँ ज़्यादा दर्द है.. यहाँ दबा.. आराम से सहला..
गर्म लौड़े पर हाथ रखते ही रानी के जिस्म में एक करंट सा दौड़ गया.. उसने झट से हाथ हटा लिया।
रानी- यह क्या कर रहे हो बाबूजी.. यहाँ कोई दबाता है क्या?
जय- अरे इसमें क्या है रानी.. जब दर्द यहाँ है.. तो यहीं बताऊँगा ना.. अब देख तू मना करेगी.. तो मैं नाराज़ हो जाऊँगा और अभी तो बस शुरूआत है.. बाद में तो बिना कपड़ों के भी तुझे इसकी मालिश करनी होगी।
रानी- छी: छी: कैसी बात करते हो आप बाबूजी.. ऐसा कभी होता है क्या..? मुझे तो शर्म आ रही है..
जय- अरे पगली शहर में लड़की और लड़का बिना कपड़ों के होते हैं और मालिश भी ऐसे ही होती है.. तू यहाँ आ.. मैं तुझे दिखाता हूँ।
जय बैठ गया और अपने मोबाइल में एक वीडियो चालू करके रानी को फ़ोन दे दिया।
उस वीडियो में एक लड़की एकदम नंगी खड़ी एक आदमी की मालिश कर रही थी जो एकदम नंगा था। पहले तो रानी को अजीब सा लगा.. मगर उस वीडियो को देखने के लिए जय ने ज़ोर दिया तो बेचारी गौर से देखने लगी।
धीरे-धीरे वो लड़की उसके लौड़े को सहलाने लगी और मुँह से चूसने लगी। पूरा लौड़ा मुँह में लेकर मज़े लेने लगी और जब तक उसका पानी ना निकल गया वो लौड़े को चूसती रही।
ये सब देख कर रानी के जिस्म में कुछ अजीब सा होने लगा। उसकी चूत अपने आप रिसने लगी.. अब उसको भले ही इस सबका पता ना हो.. मगर ये निगोड़ी जवानी जो है न.. सब समझ जाती है और चूत और लंड तो बहुत जल्दी ये सब समझ जाते हैं।
वीडियो ख़त्म होने के बाद रानी पता नहीं किस दुनिया में खो गई थी। जब जय ने उसको हाथ लगाया.. तो वो नींद से जागी..
जय- अरे क्या हुआ.. कहाँ खो गई..?
रानी- वो वो.. बाबूजी.. ये सब मैंने पहले कभी नहीं देखा.. मुझे नहीं पता था कि मालिश ऐसे भी होती है।
जय- अब तो मेरी बात का विश्वास हो गया ना.. ले चल.. अब ये मैं बाहर निकाल देता हूँ। अब जल्दी से उस लड़की की तरह मालिश कर दे।
जय ने एक झटके से अपना निक्कर निकाल दिया.. उसका 7″ का लौड़ा कुतुबमीनार की तरह खड़ा हो गया।
रानी एकदम से ये देख कर शर्मा गई और उसने अपना मुँह घुमा लिया।
अरे दोस्तो.. फिर आप तो यहीं अटक गए.. अभी तो बहुत किरदार बाकी हैं इतनी जल्दी रानी का मज़ा लेना चाहते हो क्या..? चलो एक खास जगह ले चलती हूँ.. जहाँ आपके टेस्ट के हिसाब से ही कुछ खास होने वाला है।
रात के करीब 10.30 बज रहे होंगे दिल्ली के घर में दो लड़के और एक लड़की बैठे बियर पी रहे थे। अब ये कौन हैं इनके बारे मैं ज़्यादा नहीं बताऊँगी.. बस आप इनके नाम जान लीजिए।
आनंद.. इसकी उम्र 25 साल है.. दूसरा सुंदर, यह करीब 22 साल का है.. और लड़की कोमल.. इसकी उम्र 21 साल है।
चलो अब सीन देख लेते हैं।
आनंद- अरे ला ना.. साले सारी बोतल अकेला पिएगा क्या?
सुंदर- अबे साले.. अब बियर ही पीता रहेगा या कोमल के मम्मों का रस भी पिएगा.. देख कैसे साली के निप्पल तने हुए हैं।
कोमल- अबे चुप वे भड़वे साले हरामी.. तेरे पास बियर लाने के पैसे नहीं थे.. तो मुझे बोल देता.. मैं दे देती.. सारा मूड खराब कर दिया तूने..
आनंद- साला 2 बोतल ही लाया झन्डू कहीं का.. ले पी.. मर साले..
सुंदर- अरे मेरे को क्या पता था.. तुम इतनी बड़ी बेवड़ी हो.. नहीं तो और ले आता.. चल अब बियर ख़त्म हो गई.. अब तेरे चूचे ही चूस कर मज़ा ले लेंगे।
आनंद- हाँ मेरी जान.. तेरी बहुत तारीफ सुनी है कि तू अँग्रेज़ी मेम की तरह लौड़ा चूसती है.. और खूब मज़ा देती है..।
कोमल- अबे लुच्चों.. मैं पैसे के लिए कुछ भी कर सकती हूँ.. चल अब टाइम खोटी मत कर.. निकालो कपड़े और दिखाओ अपने लौड़े.. कैसे हैं?
दोस्तो, कोमल की बातों से आप समझ ही गए होंगे कि यह एक कॉल गर्ल है और ये दोनों दिल्ली के छटे हुए बदमाश हैं।
अब आगे मजा देखो..
दोनों ने अपने कपड़े निकाल दिए.. इनके लौड़े तने हुए थे.. जो करीब 6″ के आस-पास के थे.. जिसे देख कर कोमल को हँसी आ गई और वो ज़ोर से हँसने लगी।
वो दोनों कोमल की ओर देखने लगे।
कोमल- सालों.. ये लौड़े लेकर मेरे पास आए हो क्या.. मैंने बहुत लंबे-लंबे लौड़े चूस कर फेंक दिए.. समझे?
आनंद- अबे चुप साली रंडी.. नाटक मत कर.. चल निकाल कपड़े.. आज तेरे को बताते हैं कि लौड़े की लंबाई से कुछ नहीं होता.. उसमें पॉवर भी होना चाहिए।
कोमल ने अपने कपड़े अदा के साथ निकाल दिए.. वो एक खूबसूर्त जिस्म की मलिका थी। उसकी गोल चूचियां जो 34″ की थीं.. पतली लचकदार कमर और बाहर को निकली हुई 36″ की गाण्ड.. किसी को भी पागल बना सकती थी।
आनंद- अरे वाह रानी.. तेरा जिस्म तो बड़ा मस्त है.. आज तो तेरी चुदाई करने में मज़ा आ जाएगा।
सुंदर- साली की गाण्ड देख कर मेरा तो लौड़ा झटके खाने लगा है यार..
कोमल- अबे सालों अब बातें ही करोगे क्या.. आ जाओ.. टूट पड़ो कोमल रानी की तिजोरी खुली हुई है.. लूट लो पूरा खजाना..
दोनों भूखे कुत्तों की तरह कोमल की तरफ़ बढ़े और उसको बिस्तर पर सीधा लिटा दिया और आनंद उसके होंठों और मम्मों को चूसने लगा और सुंदर उसकी चूत को चाटने में लग गया।
कोमल- आह्ह.. चूसो.. मेरे आशिकों.. आह्ह.. मज़ा आ गया उफ्फ.. आज कई दिनों बाद दो लंड एक साथ मिलेंगे.. आह्ह.. आज तो मेरी चूत को मज़ा आ जाएगा।
कुछ देर कोमल को चूसने के बाद दोनों सीधे लेट गए और कोमल को लौड़े चूसने के लिए कहा।
कोमल बड़े प्यार से दोनों के लंड बारी-बारी से चूसने लगी।
आनंद- आह्ह.. चूस मेरी जान.. आह्ह.. मज़ा आ रहा है.. जैसा सुना था.. उससे भी ज़्यादा मज़ा दे रही है तू.. आह्ह..
सुंदर- उफ्फ.. आह्ह.. मेरी तो आँखें मज़े में खुल ही नहीं रहीं हैं यार.. आह्ह.. उफ्फ.. बड़ा मज़ा आ रहा है।
कोमल बड़े प्यार से बारी-बारी से दोनों के लंड चूसती रही और जब दोनों के बर्दास्त के बाहर हो गया तो आनंद ने कोमल को अपने लौड़े पर बैठने को कहा और सुंदर पीछे से गाण्ड मारने को तैयार हो गया।
कोमल अब लौड़े पर बैठ गई और आनंद के ऊपर लेट गई.. पीछे से सुंदर ने लौड़ा गाण्ड में पेल दिया।
कोमल- आह्ह.. आह्ह.. अब शुरू हो जाओ दोनों और अपना कमाल दिखाओ आह्ह..

दोनों स्पीड से लौड़े को अन्दर-बाहर करने लगे.. कोमल दोनों तरफ़ से चुद रही थी और कमरे में बस सिसकारियाँ और ‘आहहें’ और ‘कराहें’ गूंजने लगीं।
करीब 15 मिनट तक ये चुदाई चलती रही। आख़िर सुंदर के लौड़े ने गाण्ड में लावा उगल दिया और वो एक तरफ लेट गया।
हाँ आनंद अब भी धकापेल लगा हुआ था।
कोमल- आह आह.. इसस्स.. एक तो गया.. आह्ह.. अब तेरी बारी है हीरो.. आह्ह.. जल्दी कर.. उफ़फ्फ़ आह्ह..
आनंद ने जल्दी से पोज़ चेंज किया और अब वो ऊपर आ गया और स्पीड से कोमल को चोदने लगा। करीब 5 मिनट बाद उसकी नसें फूलने लगीं और उसने झटके से लौड़ा बाहर निकाल लिया। उसका सारा माल कोमल के पेट पर गिर गया।
वो हाँफता हुआ कोमल के पास लेट गया।
सुंदर- अरे वाह.. कोमल तेरी गाण्ड तो सच में तेरे नाम की तरह कोमल थी.. मज़ा आ गया। अब तेरी चूत की सवारी करूँगा.. तो पता लगेगा कि वो कैसी है।
कोमल- अरे चोद लेना राजा.. आज की रात मैंने तुम दोनों के नाम कर दी.. जैसे चाहो मेरी चूत और गाण्ड का मज़ा लेते रहना।
आनंद- कोमल तू बड़ी बिंदास है यार.. खूब मज़ा देती है।
आनंद की बात का कोमल कुछ जवाब देती.. इसके पहले आनंद का फ़ोन बजने लगा और स्क्रीन पर नम्बर देख कर आनंद थोड़ा घबरा गया।
आनंद- ओए.. चुप चुप.. कोई कुछ मत बोलना.. मेरे बॉस का फ़ोन है।
आनंद- हैलो बॉस कैसे हो आप?
बॉस- कहाँ हो तुम दोनों?
आनंद- ज..ज़ि..जी यहीं हैं घर पे..
बॉस- सालों दारू पीकर पड़े हो.. मैंने तुमको पैसे किस लिए दिए थे?
आनंद- नहीं नहीं बॉस.. आपका काम कर दिया हमने.. उसको ले आए..
बॉस- गुड.. अच्छा सुनो.. मैं नहीं आ पाऊँगा.. मैंने जो बताया था.. उसको समझा देना और कोई गड़बड़ नहीं होनी चाहिए.. समझे?
आनंद- ना ना बॉस.. आपका काम जल्दी हो जाएगा.. उस साली रंडी को आपके सामने नंगा खड़ा करने की ज़िम्मेदारी हमारी है.. बस कुछ दिन सब्र करो आप.. बस ये गेम फिट बैठ जाए.. तो वो रंडी आपकी होगी और इसको भी मैं समझा दूँगा.. आप बेफिकर रहो।
बॉस- ठीक है.. ठीक है.. अब गौर से सुन.. वो कुत्ता फार्म पर है.. कल दोनों वहाँ पहुँच जाना.. समझे? बाकी की बात तुमको बताने की जरूरत है क्या?
आनंद- नहीं नहीं बॉस.. मुझे पता है क्या करना है.. आप समझो बस हम वहाँ पहुँच गए।
क्यों दोस्तो, मज़ा आ रहा है ना.. ये क्या हो रहा है और ये कौन लोग हैं. किस के पीछे हैं? इन सब बातों का पता तो आगे चल ही जाएगा। अभी रानी के पास चलो.. वहाँ देखते हैं क्या हुआ?
हाँ तो जब रानी ने अपना मुँह घुमाया.. तो जय थोड़ा गुस्सा हो गया।
जय- अरे रानी.. ऐसे करोगी तो कैसे काम कर पाओगी.. जाने दे तेरे से नहीं होगा.. कल तेरे को वापस घर भेज दूँगा।
रानी- नहीं नहीं बाबूजी.. मैं सब करूँगी.. मुझे पैसे कमाने हैं।
जय- अच्छा तो आ.. इसको पकड़ कर देख.. इसकी मालिश कर.. मज़ा आएगा।
रानी उसके पास आ गई और लौड़े को गौर से देखने लगी।
रानी- बाबूजी आप चिंता ना करो.. मैंने पहले कभी ऐसी मालिश नहीं की है.. मगर में धीरे-धीरे सीख जाऊँगी।
जय- मैं जानता हूँ रानी.. अब देर मत करो.. आओ शुरू करो..
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06-27-2018, 10:50 AM,
#4
RE: kamukta kahani अय्याशी का अंजाम
रानी लौड़े को सहलाने लगती है और उसके नर्म हाथों के स्पर्श से जय को मज़ा आने लगता है। वो अपनी आँखें बन्द कर लेता है।
शुरू में तो रानी को अजीब लग रहा था मगर बाद में लौड़े का अहसास उसे अच्छा लगने लगा और वो बड़े मज़े से लौड़े को सहलाने लगी।
जय बीच-बीच में उसको आइडिया दे रहा था कि ऐसे करो और वो बस करती जा रही थी और जय मज़ा ले रहा था।
अब रानी अच्छी तरह से जय के लौड़े को सहला रही थी।
जय- आह आह.. रानी ऐसे सूखा सूखा.. मज़ा नहीं आ रहा.. अब मुँह से भी मालिश करो न.. आह्ह.. तुमने अगर अच्छे से किया.. तो तेरी नौकरी पक्की..
दोस्तो, रानी लंड और चूत के बारे में ज़्यादा नहीं जानती थी.. मगर ये खेल ऐसा है कि कुछ ना जानते हुए भी हमारा जिस्म पिघलने लगता है।
यही रानी के साथ हो रहा था.. उसकी चूत एकदम गीली हो गई थी और उसकी आँखों में मस्ती छा गई थी। अब उसको खुद लग रहा था कि लौड़े को मुँह में लेकर चूसे.. बस जय ने कहा और उसने झट अपनी जीभ लौड़े पर रख दी और लण्ड की टोपी को चाटने लगी।
जय- उफ़फ्फ़ आह्ह.. ऐसे ही.. आह्ह.. अब सारा दर्द निकल जाएगा.. आह्ह.. मुँह में लेकर चूस.. आह्ह.. पूरा लौड़ा अन्दर लेना है.. आह्ह..

अब रानी बड़े मज़े से लौड़े को जड़ तक लेने की कोशिश कर रही थी.. मगर उसके छोटे से मुँह में लौड़ा पूरा लेना मुश्किल था.. वो बस सुपारे को ही चूस पा रही थी.. जैसे कोई गन्ने को चूस रही हो।
जय ने रानी के सर को पकड़ लिया और लौड़े को ज़ोर-ज़ोर से झटके देने लगा। उसकी नसें फूलने लगी थीं। लौड़ा कभी भी लावा उगल सकता था।
रानी की साँसें रुकने लगीं.. जय अब स्पीड से उसके मुँह को चोद रहा था और कुछ ही देर में जय के लंड ने वीर्य की धार मारी.. जो रानी के हलक में उतर गई।
ना चाहते हुए भी उसको सारा पानी पीना पड़ा। जब जय ने हाथ हटाया तो रानी अलग हुई और लंबी साँसें लेने लगी।
रानी- हाय उहह.. ये आपने क्या किया बाबूजी.. मेरे मुँह में मूत दिया छी:..
जय- अरे पगली ये मूत नहीं.. वीर्य है इसको पीने से लड़की और खूबसूरत होती है.. देख ये तो दूध जैसा है..
जय के लौड़े से कुछ बूंदें और निकाली.. जो एकदम गाढ़ी सफेद थीं.. जिसको रानी गौर से देखने लगी।
रानी- हाँ बाबूजी.. ये तो सफेद है।
जय- अरे जल्दी आ.. इसको जीभ से चाट ले.. नहीं तो नीचे गिर जाएगी।
जय के कहने की देर थी.. रानी जल्दी से झुकी और बाकी बूंदों को भी चाट कर साफ करने लगी। उसको यह स्वाद अच्छा लग रहा था और इस खेल के दौरान उसकी चूत एकदम पानी-पानी हो गई थी.. जिसका अहसास रानी के साथ-साथ जय को भी हो गया था। अब उसकी नज़र रानी की कच्ची चूत पर टिक गई थी।
अरे नहीं नहीं.. अभी नहीं.. सारा मज़ा एक साथ ले लोगे.. तो कहानी में मज़ा नहीं रहेगा। अभी तो जय ठंडा हुआ है.. इतनी जल्दी थोड़ी वो कुछ करेगा।
चलो वापस कोमल के पास चलते हैं.. देखते हैं कि वहाँ क्या खिचड़ी पक रही है।
कोमल- अरे राजा किसका फ़ोन था.. तू ऐसे क्यों डर गया?
सुंदर- अरे साली.. तेरे को नहीं पता क्या.. बॉस का फ़ोन था। उन्हीं ने तो तेरे को लाने को कहा है और तेरे को जो पैसे हमने दिए हैं. वो उन्हीं ने हमें दिए थे।
कोमल- तेरे बॉस ने मेरे को लाने के पैसे तुमको दिए.. और सालों तुमने उनके पहले मेरे को चोद कर मज़ा ले लिया.. सालों अब मैं उसके पास नहीं चुदवाऊँगी.. उसके साथ चुदाई के एक्सट्रा पैसे लगेंगे.. सोच लेना हाँ..
सुंदर- अबे चुप साली.. बॉस तेरे को नहीं चोदेंगे.. उनको तो तेरे से दूसरा काम है।
कोमल- क्यों तेरा बॉस नामर्द है क्या..? जो पैसे खर्चा करके बस मेरी चुदाई होते देखेगा हा हा हा हा..
आनंद- अरे साली छिनाल.. पूरी बात तो सुन ले पहले.. अपनी ही बोले जा रही है तू हरामजादी।
कोमल- ओ साला.. भड़वा.. गाली नहीं दे मेरे को.. हाँ नहीं तो.. गाली मेरे को भी आती है.. समझा क्या?
आनंद- अच्छा मेरी जान प्लीज़ चुप हो जा और आराम से तू मेरी बात सुन।
कोमल- ठीक है रे.. सुना साला.. मैं अब कुछ नहीं बोलेगी।
आनंद- देख रानी.. तू एक कॉलेज गर्ल है और दिखती भी मस्त है। मज़े की बात ये कि तू चुदक्कड़ होते हुए भी शक्ल से बड़ी शरीफ दिखती है.. तो हमारे बॉस को तेरे से कुछ काम है.. इसलिए वो तेरे से मिलना चाहते थे। अब तू साली खाली बात के लिए तो यहाँ आती नहीं.. और हमको पता था बॉस खाली बात ही करेगा.. तो बस हमने सोचा बॉस खाली बात करेंगे.. तो क्यों ना हम तेरी चुदाई करके पैसे वसूल कर लें।
कोमल- कौन है रे तेरा बॉस.. वो कब आएगा..
आनंद- बॉस कहीं बिज़ी हैं. वे नहीं आएँगे.. मेरे को वो बात पता है.. तो मैं भी तेरे को समझा सकता हूँ।
सुंदर- यार जब मैंने बॉस को कहा था ये बात हम कोमल को बता देंगे.. तब तो वो गुस्सा हो गए थे। बोले.. नहीं मैं ही अच्छी तरह से बताऊँगा.. अब क्या हुआ..
आनंद- अरे यार अब ये बॉस का फंडा वही जाने.. कहीं फँस गए होंगे किसी काम में.. अब कोमल को हमें सब समझाना होगा और वैसे भी बॉस फार्म पर तो आएँगे ही.. बाकी का काम वहाँ हो जाएगा।
कोमल- अबे सालों क्या समझाना है.. कुछ मेरे को भी तो बताओ?
आनंद- ठीक है मेरी जान.. गौर से सुन.. अब दिल्ली से कुछ दूर एक फार्म-हाउस है। हर 2 या 3 महीने में वहाँ एक बड़ी पार्टी होती है.. जहाँ फुल शराब और मस्ती होती है। साथ ही एक खास किस्म का गेम भी खेला जाता है।
कोमल- किस तरह का गेम?
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06-27-2018, 10:50 AM,
#5
RE: kamukta kahani अय्याशी का अंजाम
आनंद- अबे सुन तो साली.. बीच में बोलती है तू.. वो गेम कोई पैसों का नहीं होता है। वहाँ सब अपनी गर्लफ्रेण्ड को लेकर जाते हैं और हम गर्ल फ्रेण्ड के साथ टीम बना कर तीन पत्ती का गेम खेलते हैं और जो हरता है.. हर बाजी के साथ उसकी गर्लफ्रेण्ड को एक कपड़ा उतारना होता है। ऐसे धीरे-धीरे सबके कपड़े उतरते हैं और जिस लड़की के कपड़े सबसे पहले पूरे उतर जाते हैं उसकी टीम हार जाती है। फिर उस रात सभी जीतने वाले उसके साथ सुहागरात मनाते हैं।
कोमल- ओ माय गॉड.. ये तो बहुत ख़तरनाक गेम है.. एक लड़की के साथ सभी चुदाई करते हैं? उसकी जान नहीं निकल जाती.. वैसे वहाँ कितने लड़के होते हैं.?
आनंद- अरे कुछ नहीं होता.. ज़्यादा नहीं बस हर बार 6 लड़के होते हैं। जिसमें हारने वाला तो चोदता नहीं है.. तो बस रात भर 5 ही लौंडे लड़की की चुदाई का मज़ा लेते हैं। फिर दूसरे दिन सुबह वो लड़का गेम से निकल जाता है और बाकी के लोग गेम खेलते हैं। बड़ा मज़ा आता है यार..
कोमल- ओह.. ये बात है.. वैसे हर बार सभी लोग वही होते हैं या अलग-अलग होते हैं?
आनंद- नहीं.. बस तीन लड़के वही होते हैं और 3 को हर बार अलग चुना जाता है।
कोमल- ऐसा क्यों.. वो 3 कौन हैं और दूसरों को कैसे चुनते हैं?
आनंद- मेरी जान तूने रणविजय खन्ना का नाम तो सुना होगा? उसका बेटा जय ये पार्टी देता है.. तो वो तो होगा ही वहाँ और उसका भाई विजय और एक खास दोस्त रंगीला भी साथ होता है। बाकी लड़कों को पार्टी के कुछ दिन पहले यहाँ के क्लब में जमा करके मीटिंग होती है और एक खेल के जरिए वो बाकी के तीन लड़कों को चुनता है।
कोमल- हाँ खन्ना का नाम सुना है.. वो तो बहुत पैसे वाला है और वहाँ कैसी मीटिंग होती है.. और कैसे चुनते हैं?
आनंद- इतना सब तू मत पूछ.. और वहाँ का नहीं पता.. मैं खुद वहाँ पहली बार जा रहा हूँ..
कोमल- अच्छा यह तो बता.. कोई लड़की इस खेल के लिए कैसे राज़ी होती है?
आनंद- अरे मेरी जान.. पैसा चीज ही ऐसी होती है… कि इंसान ना चाहते हुए भी वो सब काम कर लेता है.. जो उसको ठीक ना लगे.. समझी, वहाँ पर हर बार 1 लाख का इनाम होता है।
कोमल- ओ माय गॉड.. 1 लाख.. मगर फिर भी कोई लड़की अपने ब्वॉय-फ्रेण्ड के सामने सब कैसे करती होगी?
आनंद- अरे आजकल लड़की को पटा कर लड़का पहले चोद कर उस लड़की को लौड़े की आदी बनाता है.. और पैसे का लालच देकर उसको बड़े-बड़े सपने दिखाता है। बस इस तरह वो लड़की को मना लेता है और वैसे भी गेम शुरू होने के पहले वहाँ लड़की को इतना नशा करवा देते हैं कि उनको अच्छे-बुरे का पता ही नहीं होता यार.. और एक बात और भी समझ ले कि अधिकतर वे ही लड़कियाँ चूत चुदवाने को राजी होती हैं जिन्हें चुदने की ज्यादा भूख होती है, आजकल तो इसे मस्ती के नाम पर खुला खेल माना जाता है।
कोमल- चल सब समझ गई.. मगर पैसे कौन देता है?
आनंद- अरे जय और कौन यार..?
कोमल- अरे उसको क्या फायदा.. और वो भी तो हारता होगा.. तो पैसे भी जाते है और गर्ल-फ्रेण्ड भी?
आनंद- मेरी जान.. वो एक ठरकी लड़का है.. उसको ऐसे गेम में मज़ा आता है.. नई-नई लड़कियों को चोदना उसका शौक है। वैसे वो चाहे तो ऐसे भी रोज नई लड़की उसके पास हो.. मगर उसको ऐसे खेल का शौक है बस.. पैसा देने के बहाने सबको बुलाता है और उसको एकाध लाख से क्या फ़र्क पड़ता है.. इतने पैसे तो वे लोग रोज ही उड़ा देते हैं। हाँ.. दोनों भाई इस खेल के माहिर खिलाड़ी हैं. उनको आसानी से हराना मुश्किल है। सालों का नसीब भी बहुत साथ देता है।
कोमल- अच्छा.. ये बात है.. तो अब तुम्हारा बॉस मेरे को गर्लफ्रेण्ड बना कर लेकर जाएगा.. यही ना?
सुंदर- तू साली बहुत समझदार है.. जल्दी समझ गई.. हा हा हा हा..
कोमल- चल हट.. साला कुत्ता.. गर्ल-फ्रेण्ड के बहाने हम जैसी लड़कियों को ले जाते हैं वहाँ.. साले झूटे कहीं के..
आनंद- अरे तू गलत समझ रही है.. ऐसा कुछ नहीं है.. ज़्यादातर असली गर्लफ्रेण्ड ही होती हैं। इस बार बॉस का प्लान कुछ अलग है एक लड़की है रश्मि.. उसे उसको चोदना है.. तो वो एक नया गेम बना रहे हैं. जिसमें सिर्फ़ तू हमारी मदद कर सकती है।
कोमल- कैसा नया गेम रे.. ज़रा ठीक से बता मेरे को?
आनंद ने जब बोलना शुरू किया तो कोमल की आँखें फटी की फटी रह गईं.. क्योंकि आनंद ने बात ही ऐसी कहीं थी।
दोस्तो, मैंने इन दोनों की ये लंबी बात आपके लिए करवाई है.. ताकि आपको कहानी समझने में आसानी हो।
अब आखिरी में क्या बात हुई थी.. वो तो फार्म पर पता लगेगी.. तो आप यहाँ क्या कर रहे हो.. चलो वापस वहीं चलते हैं। 
अरे रूको रूको.. पहले काजल के पास चलो.. वहाँ हम लोग कब से नहीं गए।
काजल ने अपने कपड़े पहने और चुपके से वापस अपने कमरे की तरफ जाने लगी। तभी उसको ऐसा लगा कि वहाँ से कोई गया है.. वो उसके पीछे चुपके से चल दी। आगे जाकर उसको साफ-साफ दिखाई दिया कि वो प्रमोद ही है.. उसने उस समय कुछ कहना ठीक नहीं समझा और वहाँ से अपने कमरे में आ गई।
तब तक रश्मि भी सो गई थी और काजल सोचने लगी कि उसने प्रमोद के साथ चुदाई की या किसी और के साथ? बस इसी उलझन में वो काफ़ी देर जागती रही और कब उसको नींद आ गई.. पता भी नहीं चला।
दोस्तो, यहाँ का हो गया.. अब रानी के पास चलते हैं मगर आपसे एक बात कहूँगी कि कहानी को अच्छी तरह से ध्यान लगा कर पढ़िएगा.. हर बात जो पॉइंट की है.. उसे नोटिस करना.. क्योंकि आगे सब कड़िया एक साथ जुड़ेंगी और कहानी का रोमांच भी बढ़ेगा.. ओके।
अब देखिए.. रानी के साथ आगे क्या हुआ..
जय के लौड़े को चाटने के बाद रानी को बड़ा अजीब लग रहा था.. उसकी चूत बहुत पानी छोड़ रही थी और जय इस बात को अच्छी तरह जानता था.. तो बस उसने रानी का हाथ पकड़ा और उसको बिस्तर पर बैठा दिया।
जय- तूने बहुत अच्छी तरह मालिश की है.. अब देख एक तरीका मैं बताता हूँ.. अगली बार वैसे करना.. ठीक है..
रानी- ठीक है.. आप बता दो बाबूजी कैसे करना है.. मैं सब सीख जाऊँगी।
जय ने उसको बिस्तर पर लिटा दिया और उसकी जाँघों पर अपने हाथ रख दिए.. जिससे रानी सिहर गई।
रानी- इसस्सस्स.. आह.. ये आप क्या कर रहे हो बाबूजी?
जय- अरे डर मत.. तुझे सिखा रहा हूँ.. अगली बार ऐसे करना..
इतना कहकर जय बड़े सेक्सी अंदाज में रानी की जाँघों को सहलाने लगा।
रानी के जिस्म में तो बिजली दौड़ने लगी थी।
रानी- ककककक.. ठ..ठ..ठीक है.. मैं समझ गई.. आह्ह.. अब बस करो न..
जय- अरे चुप.. अभी कहाँ.. आराम से सीख.. अब बिल्कुल भी बोलना मत..
जय थोड़ा गुस्से में बोला.. तो रानी डर गई और उसने चुप्पी साध ली।
अब जय धीरे-धीरे उसकी जाँघों को सहला रहा था.. कभी-कभी उसकी उंगली चूत को भी टच करती जा रही थी.. बस यही वो पल था.. जब रानी जैसी भोली-भाली लड़की वासना के भंवर में फँसती चली गई। 
अब रानी को बड़ा मज़ा आ रहा था.. उसकी चूत फड़फड़ा रही थी और उसने अपनी आँखें बन्द कर ली थीं।
जय ने जब ये देखा कि रानी मज़े ले रही है.. तो उसने अपना हाथ सीधे उसकी फूली हुई चूत पर रख दिया और धीरे से चूत को रगड़ने लगा।
रानी- इसस्सस्स.. आह.. बाबूजी आह्ह.. नहीं.. मुझे कुछ हो रहा है.. आह्ह.. मेरे बदन का खून.. उफ्फ.. लगता है सारा वहीं जमा हो गया.. आह्ह.. नहीं इससस्स.. उफ़फ्फ़..
दोस्तो.. रानी पहले से ही बहुत गर्म थी और जब जय ने चूत पर हाथ रखा और हल्की मालिश की.. बस बेचारी अपना संतुलन खो बैठी..। उसकी कच्ची चूत अपना पहला कामरस छोड़ने लगी। उस वक़्त रानी का बदन अकड़ गया.. उसने जय के हाथ को अपने हाथ से दबा लिया और अजीब सी आवाजें निकालने लगी और झड़ने लगी।
रानी- इसस्स्सस्स.. आह.. उऊहह.. उउओह.. बब्ब..बाबूजी आह्ह.. मुझे क्या हो रहा है.. आआह्ह.. सस्सस्स..
जब रानी की चूत शांत हुई.. तब उसके दिमाग़ की बत्ती जली.. वो झट से बैठ गई और सवालिया नजरों से जय को देखने लगी कि ये क्या हुआह्ह..
जय- अरे घबरा मत.. तेरा भी कामरस निकल गया.. जैसे मेरा निकाला था.. अब तू ठीक है और सच बता.. तुझे मज़ा आया कि नहीं..
रानी- बाबूजी.. ये सब मेरी समझ के बाहर है.. आप मेहरबानी करके अभी यहाँ से चले जाओ.. मुझे अभी बाथरूम जाना है।
जय- अरे तू यहाँ मेरी सेवा करने आई है या मुझ पर हुकुम चलाने आई है.. हाँ तेरी माँ ने यही सिखाया क्या तेरे को?
रानी- अरे नहीं नहीं.. बाबूजी.. आप गलत समझ रहे हो.. मैं तो बस ये कह रही थी.. कि मुझे जोरों से पेशाब आ रही है।
जय- तो जाओ.. मैं यहीं बैठा हूँ.. आकर मेरा सर दबाना ओके..
रानी ने ‘हाँ’ में सर हिलाया और बाथरूम में चली गई। वहाँ जाकर उसके चेहरे पर एक हल्की मुस्कान थी.. शायद अभी जो हुआ.. वो उसको सब अच्छा लगा था।
जय अभी भी नंगा ही था और अपने लौड़े को सहलाता हुआ बोल रहा था- बेटा आज कई दिनों बाद तुझे कच्ची चूत का मज़ा मिलेगा..
कुछ देर बाद रानी वापस बाहर आ गई तो जय लौड़े को सहला रहा था.. जिसे देख कर रानी थोड़ा मुस्कुरा दी।
जय- अरे आओ रानी.. देखो तुमने अभी इसका दर्द निकाला था.. मगर इसमें दोबारा दर्द होने लगा।
रानी- कोई बात नहीं बाबूजी.. मैं फिर से इसका दर्द निकाल दूँगी।
जय- ये हुई ना बात.. आओ यहाँ आओ.. पहले मेरे पास बैठो.. मुझे तुमसे कुछ बात करनी है।
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06-27-2018, 10:50 AM,
#6
RE: kamukta kahani अय्याशी का अंजाम
रानी धीरे-धीरे चलकर आई और बिस्तर पर जय के पास बैठ गई.. मगर उसकी नज़र लौड़े पर थी। ना जाने क्यों.. उसको ऐसा लग रहा था.. जैसे जल्दी से पहले की तरह वो उसको मुँह में लेकर चूसे और उसका रस पी जाए।
उसकी नज़र को जय ने ताड़ लिया और उसको अपने से चिपका कर उसके कंधे पर हाथ रख दिए।
जय- देख रानी.. अब तू मेरे साथ रहेगी.. तो खूब मज़े करेगी.. बस तू मेरी हर बात मानती रहना.. तुझे पैसे तो मैं दूँगा ही.. साथ ही साथ मज़ा भी दूँगा.. जैसे अभी दिया.. तेरा रस निकाल कर दिया था.. तू सही बता मज़ा आया ना?
रानी थोड़ा शर्मा रही थी.. मगर उसने ‘हाँ’ में सर हिला दिया।
जय- गुड.. अब सुन.. तुझे ज़्यादा मज़ा लेना है.. तो उस वीडियो की तरह अपने कपड़े निकाल दे.. फिर देख कितना मज़ा आता है।
रानी- ना बाबूजी.. मुझे शर्म आती है।
जय- अरे पगली.. शर्म कैसी.. देख मैं भी तो नंगा हूँ और मैं बस तुझे सिखा रहा हूँ.. तू डर मत..
रानी- बाबूजी मैं जानती हूँ.. जब लड़की नंगी हो जाती है.. तो लड़का उसके साथ क्या करता है.. मगर मुझे ऐसा-वैसा कुछ नहीं करना।
दोस्तो, रानी गाँव की थी.. सेक्स के बारे में शायद ज़्यादा ना जानती हो.. मगर कुछ ना जानती हो.. ऐसा होना मुमकिन नहीं..
अब देखो इशारे में उसने जय को बता दिया कि वो सेक्स नहीं करेगी।
जय- अरे तू क्या बोल रही है.. क्या ऐसा-वैसा तूने किसी के साथ पहले किया है क्या.. या किसी को देखा है..? बता मुझे.. तुझे किसने बताया ये सब?
रानी- ना ना.. मैंने कुछ नहीं किया.. वो बस एक बार हमारे पड़ोस में भाईजी को देखा था.. तब से पता है कि ये क्या होता है।
जय- अरे क्या देखा था.. ज़रा ठीक से बता मुझे?
रानी- वो बाबूजी.. एक बार रात को मुझे जोरों से पेशाब लगी.. तो मैं घर के पीछे करने गई और जब मैं वापस आ रही थी.. तो हमारे पास में भैया जी का कमरा है.. वहाँ से कुछ आवाज़ आ रही थीं। मैंने सोचा इतनी रात को भाभी जी जाग रही हैं. सब ठीक तो है ना.. बस यही देखने चली गई और जब मैं नज़दीक गई.. तब देख कर हैरान हो गई।
जय- क्यों ऐसा क्या देख लिया तूने?
रानी- व..व..वो दोनों.. नंगे थे.. और भैयाज़ी अपना ‘वो’ भाभी के नीचे घुसा रहे थे।
इतना बोलकर रानी ने अपना चेहरा घुमा लिया.. जो शर्म से लाल हो गया था।
जय- अरे ठीक से बता ना.. क्या घुसा रहे थे.. और कहाँ घुसा रहे थे.. प्लीज़ यार बता ना?
रानी- मुझे नहीं पता.. मैं बस देखी और वहाँ से भाग गई।
जय- बस इतना ही.. तो तेरे को इतना सा देख कर पता चल गया.. हाँ..
रानी- नहीं बाबूजी.. मैंने ये बात सुबह मेरी सहेली को बताई.. जिसकी कुछ दिन पहले शादी हुई है.. तब उसने मुझे बताया कि ये सब पति और पत्नी के बीच चलता है.. और फिर उसने मुझे सब बताया।
जय- ओये होये.. मेरी रानी.. मैं तो तुझे भोली समझा था.. तू तो सब जानती है.. चल अच्छा है ना.. मुझे तुमको ज़्यादा समझाना नहीं पड़ेगा। अब चल देर मत कर.. निकाल अपने कपड़े मुझे तेरा जिस्म देखना है।
रानी- नहीं नहीं बाबूजी.. मैंने कहा ना.. मुझे वो नहीं करना.. आप उसके अलावा जो सेवा कहो.. मैं कर दूँगी। मगर वो काम नहीं..
जय- अरे क्या.. तू ये और वो.. कह रही है.. साफ बोल कि चुदाई नहीं करूँगी.. तो मेरे को कौन सा तुझे चोदना है.. बस मेरी मालिश करवाने लाया हूँ। अब तुझे पैसे नहीं कमाने क्या.. जिंदगी भर ऐसे ही रहोगी क्या?
रानी- सच बाबूजी.. आप मेरे साथ वो नहीं करोगे ना.. तब तो आप जो कहो मैं कर दूँगी।
जय- अरे वाह.. मेरी जान यह हुई ना बात.. चल अब जल्दी से कपड़े निकाल.. मैं बस तेरे जिस्म को देखूँगा। उसके बाद तू मेरे लौड़े को चूस कर इसका दर्द मिटा देना।
रानी- बाबूजी पहले आप आँखें बन्द करो ना.. मुझे शर्म आ रही है।
जय ने उसकी बात मान ली और आँखें बन्द कर लीं और रानी ने अपने कपड़े निकाल दिए। पहले उसने सोचा ब्रा रहने दें.. मगर ना जाने क्या सोच कर उसने वो भी निकाल दी। अब वो एक कोने में खड़ी अपनी टाँगों को भींच कर चूत को छुपाने लगी थी और हाथों से अपने चूचे छुपा रही थी।
जय- अरे क्या हुआ जान.. अब आँख खोल लूँ क्या.. बोलो ना?
रानी- हाँ बाबूजी.. खोल लो..
जब जय ने आँखें खोलीं.. तो उसके सामने एक कच्ची कन्या.. अपनी जवानी का खजाना छुपाए हुए खड़ी थी.. जिसे देख कर उसका लौड़ा फुंफकारने लगा।
वो बस देखता ही रह गया। 
जय- अरे ये क्या है.. तुमने तो सब कुछ छुपा रखा है यार.. ऐसे कैसे चलेगा.. अब यहाँ आओ और सुनो हाथ ऊपर करके धीरे-धीरे आना, तुम्हें तेरी माँ की कसम है।
रानी- हाय बाबूजी.. आपने माई की कसम क्यों दे दी.. मैं अब क्या करूँ.. मुझे बहुत शर्म आ रही है और माई की कसम भी नहीं तोड़ सकती!
जय- ठीक है.. अब ज़्यादा सोचो मत.. बस मैंने जैसे बताया.. वैसे आओ आराम-आराम से..
रानी ने दोनों हाथ ऊपर कर लिए। अब उसके 30″ के मम्मे आज़ाद थे.. जो एकदम गोल-गोल और उन पर हल्के गुलाबी रंग की बटन.. यानि कि उसके छोटे से निप्पल.. सफेद संगमरमरी जिस्म पर वो गुलाबी निप्पल कुदरत की अनोखी कारीगिरी की मिसाल दे रहे थे।
रानी धीरे से आगे बढ़ रही थी और जय भी बड़े आराम से ऊपर से नीचे अपनी नज़र दौड़ा रहा था। अब उसकी नज़र रानी के पेट से होती हुई उसकी जाँघों के बीच एक लकीर पर गई.. यानि उसकी चूत की फाँक पर गई.. जो ऐसे चिपकी हुई थी.. जैसे फेविकोल से चिपकी हुई हो और चूत के आस-पास हल्के भूरे रंग के रोंए उसकी खूबसूरती को और बढ़ा रहे थे। उसकी मादक चाल से जय का लौड़ा झटके खाने लगा।
जय की नज़र से जब रानी की नज़र मिली.. तो वो शर्मा गई और तेज़ी से भाग कर जय के पास आ गई।
जय ने उसे अपने आगोश में ले लिया और उसके नर्म पतले होंठों पर अपने होंठ रख दिए। वो बस रानी के होंठों को चूसने लग गया। उसके मस्त चूचों को मसलने लगा।
इस अचानक हमले से रानी थोड़ी घबरा गई और उसने जय को धकेल कर एक तरफ़ कर दिया और खुद जल्दी से खड़ी हो गई।
जय- अरे क्या हुआ रानी.. खड़ी क्यों हो गई तुम?
रानी- नहीं बाबूजी.. ये गलत है.. मुझे ये सब नहीं करना..
जय- अरे मुझ पर भरोसा रख.. मैं बस तुम्हें प्यार करूँगा और कुछ नहीं.. तुझे वो मज़ा दूँगा.. उसके बाद तू मुझे मज़ा देना बस..
रानी नादान थी और इस उम्र में किसी को भी बहला लेना आसान होता है। खास कर जय जैसे ठरकी पैसे वाले लड़के के लिए रानी जैसी लड़की को पटाना कोई बड़ी बात नहीं थी।
रानी खुश हो गई और बिस्तर पर बैठ गई। उसकी आँखों में एक अजीब सी बेचैनी थी। वो बस जय के लौड़े को निहार रही थी। अब उसका इरादा क्या था.. ये तो वही बेहतर जानती थी।
जय- देख रानी.. मैं तुझे एक अलग किस्म की मालिश करना सिखाता हूँ.. जो हाथों और होंठ से होगी। तो सीधी लेट जा.. मैं तेरे जिस्म को मालिश करता हूँ। उसके बाद तू मेरे को वैसे ही करना.. ठीक है..!
रानी ने ‘हाँ’ में सर हिला दिया। बस अब क्या था.. जय उस कच्ची कन्या पर टूट पड़ा। उसके नर्म होंठों को चूसने लगा। उसके छोटे-छोटे अनारों को दबाने लगा। कभी वो उसके छोटे से एक निप्पल को चूसता.. तो कभी हल्का सा काट लेता।
रानी- आह.. इससस्स.. बाबूजी.. आह्ह.. दुःखता है.. आह्ह.. कककक.. नहीं.. उफ़फ्फ़.. आह्ह..
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06-27-2018, 10:50 AM,
#7
RE: kamukta kahani अय्याशी का अंजाम
जय तो वासना में बह गया था। उसको तो बस उस कच्ची चूचियों में जैसे अमृत मिल रहा हो। वो लगातार उनको चूसे जा रहा था और उसका लौड़ा लोहे की रॉड की तरह कड़क हो गया था। मगर जय जल्दबाजी नहीं करना चाहता था। वो रानी को इतना तड़पाना चाहता था कि वो खुद कहे कि आओ मेरी चूत में लौड़ा घुसा दो.. तभी उसके बाद वो उसकी नादान जवानी के मज़े लूटेगा।
जय अब चूचों से नीचे उसके गोरे पेट पर अपनी जीभ घुमा रहा था और रानी किसी साँप की तरह अपनी कमर को इधर-उधर कर रही थी।
उसको मज़ा तो बहुत आ रहा था। मगर थोड़ा सा डर भी लग रहा था कि कहीं जय उसकी चुदाई ना कर दे। मगर बेचारी वो कहाँ जानती थी कि इस सबके बाद चुदाई ही होगी।
जय के होंठ अब रानी की चंचल चूत पर आ गए थे.. जिसकी खुशबू उसको पागल बना रही थी। वो बस चूत को किस करने लगा।
रानी- ककककक आह.. बाबूजी आह्ह.. मेरे बदन में आ..आग सी लग रही है.. आह्ह.. न्णकन्न्..नहीं आह्ह.. यहाँ नहीं.. उफ़फ्फ़..
जय- इसस्सश.. सस्स्सह.. चुपचाप मज़ा लो मेरी जान.. अभी देख तेरा कामरस आएगा उफ्फ.. क्या गर्म चूत है तेरी.. मज़ा आएगा चाटने में..
जय चूत की फाँक को उंगली से खोलने लगा। वाह..अन्दर से क्या गुलाबी नजारा सामने था.. वो बस उसको चाटने लगा और रानी तड़प उठी।

जय चूत के दाने पर अपनी जीभ घुमा रहा था और रानी सिसक रही थी। उसका तो बुरा हाल हो गया था.. किसी भी पल उसकी चूत बह सकती थी। उसने अपनी कमर को हवा में उठा लिया.. तो जय ने उसकी गाण्ड के नीचे हाथ लगा दिया और कुत्ते की तरह स्पीड से उसकी चूत को चाटने लगा।
रानी- आआ आआ बा..बू..जी.. आह्ह.. इसस्स.. मुझे कुछ हो रहा है ओह.. हट जाओ वहाँ से.. आह्ह.. ससस्स उफ़फ्फ़ मेरा आह्ह.. निकलने ही वाला है।
जय ने आँखों से इशारा किया कि आने दो.. और दोबारा वो चूत को रसमलाई की तरह चाटने लगा। कुछ ही देर में रानी झड़ गई। अब वो शांत हो गई थी.. मगर उसकी साँसें तेज-तेज चल रही थीं। 
इधर जय के लौड़े में दर्द होने लगा था क्योंकि वो बहुत टाइट हो गया था और वीर्य की कुछ बूँदें उसके सुपारे पर झलक रही थी। अब बस उसको किसी भी तरह चूत में जाना था.. मगर ये सफ़र इतना आसान नहीं था। एक कच्ची चूत को फाड़कर लौड़े को चूत की गहराई में उतारना इतना आसान नहीं होगा.. ये बात जय जानता था।
वो ऐसे अनमोल नगीने को जल्दी से तोड़ना नहीं चाहता था।
जय- क्यों मेरी जान.. मज़ा आया ना.. अब तू तो ठंडी हो गई। देख मेरे लौड़े का हाल बुरा हो गया.. चल जल्दी से इसको चूस कर ठंडा कर.. मेरी जान निकली जा रही है।
रानी की आँखें एकदम लाल हो गई थीं जैसे उसने 4 बोतल चढ़ा ली हों और उसका जिस्म इतना हल्का हो गया था कि आपको क्या बताऊँ.. वो तो बस हवा में उड़ रही थी।
जय- रानी.. अरी ओ रानी.. कहाँ खो गई.. उठ ना यार.. जल्दी से आ जा..
जय उसके पास सीधा लेट गया था उसकी आवाज़ के साथ रानी उसके पैरों के पास बैठ गई और लौड़े को हाथ में लेकर सहलाने लगी। कुछ देर बाद उसको अपने मुँह में भर कर चूसने लगी।
जय ने अपनी आँखें बन्द कर लीं और बस मज़ा लेने लगा।
रानी अब लौड़े को बड़े प्यार से चूस रही थी.. पहली बार तो उसको कुछ अजीब लगा था.. मगर इस बार वो बड़े अच्छे तरीके से चूस रही थी।
कुछ देर तक ये चुसाई चलती रही, अब जय के लौड़े की सहन-शक्ति ख़त्म हो गई थी.. वो झड़ने को तैयार था, इस अहसास से जय ने रानी के सर को पकड़ लिया।
जय- आआ.. आह.. ज़ोर से चूस आह्ह.. मेरी जान.. आह्ह.. बस थोड़ी देर और आह्ह.. मेरा पानी बस निकलने ही वाला है।
दोस्तो, जय का पानी निकालता.. इसके पहले कमरे का दरवाजा ज़ोर से खुला.. जैसे कोई बड़े गुस्से में खोला गया हो।


जय और रानी तो ऐसे मोड़ पर थे कि उनको यह अहसास भी नहीं हुआ कि कौन आया है, बस रानी स्पीड में लौड़ा चूस रही थी और जय उसके मुँह को चोद रहा था।
कुछ पल बाद लौड़े से पिचकारी निकली.. जो सीधी रानी के हलक में उतरती चली गई। इस बार रानी ने जल्दी से पूरा पानी गटक लिया और लौड़े पर से आख़िरी बूँद तक चाट कर साफ की।
उफ़फ्फ़ दोस्तो.. यहाँ का माहौल तो बहुत गर्म हो गया और यह बीच में कौन आ गया। मगर देखो मैंने सीन को रोका नहीं और जय को ठंडा करवा दिया ना..
अब बारी आपकी है.. ना ना.. गलत मत समझो.. यह कौन आया ये अभी नहीं बताऊँगी। वैसे भी इस बार शुरू में ही मैंने कहा था कि यह कहानी बहुत घूमी हुई है.. तो थोड़ा घूम कर आते हैं।
चलो यहाँ से कहीं और चलते हैं।
दोस्तो, आप सोच रहे होंगे कि कितने पार्ट हो गए.. मगर यह रात ख़त्म नहीं हो रही.. तो दोस्तो, कहानी में कुछ रहस्य है और इसके लिए रात से बेहतर क्या होगा.. तो चलो एक नई जगह ले चलती हूँ।
रात के 11 बजे हाइवे पर एक बाइक बड़ी तेज़ी से जा रही थी.. उस पर जो शख्स बैठा था.. उसका नाम है साजन.. उसकी उम्र लगभग 22 साल है। बाकी का इंट्रो बाद में.. तो चलिए.. आगे देखते हैं।
वो बाइक एक घर के पास जाकर रुकी और साजन बाइक से उतरा और सीधा उस घर में चला गया। वहाँ कुछ अंधेरा था.. साजन ने लाइट चालू की.. तो उसके सामने एक आदमी काले सूट में खड़ा था। जिसने चेहरे पर नकाब लगाया हुआ था और उसके हाथ में एक पैकेट था.. जिसे देख कर साजन के चेहरे पर मुस्कान आ गई।
दोस्तो, यह कौन है.. इसके बारे में अभी नहीं बता सकती.. बस कुछ सस्पेंस है।
साजन- वाह.. भाई.. आप तो ज़ुबान का एकदम पक्का निकला.. मेरे से पहले ही आप इधर आ गया.. क्या बात है?
भाई- मेरा यही फंडा है.. कि अगर तुम वक़्त के साथ चलोगे तो वक़्त तुम्हारा साथ देगा.. नहीं तो वो आगे निकल जाएगा और तुम पीछे रह जाओगे.. समझे?
साजन- मान गया भाई.. ये साजन आपको सलाम करता है।
भाई- ठीक है ठीक है.. वो दोनों कहाँ हैं और कुछ इंतजाम किया या नहीं तुमने?
साजन- लड़की मिल गई भाई.. वो दोनों के साथ है.. मैं खुद जाकर उसको समझाने वाला था.. मगर आपने यहाँ बुला लिया तो अब वो लोग उसको समझा देंगे।
भाई- गुड.. लेकिन वो लड़की एकदम हॉट लगनी चाहिए.. नहीं तो मेरा काम अधूरा रह जाएगा।
साजन- अरे भाई.. वो ऐसी-वैसी नहीं है.. एक कॉलेज गर्ल.. कॉल-गर्ल है यानि पैसों के लिए कुछ खास लोगों से ही चुदवाती है और एक्टिंग भी अच्छी करती है.. आप टेन्शन मत लो..
भाई- देख कल वहाँ इस बार के गेम के लिए सिर्फ़ लड़के जमा होंगे.. मैंने तुमको बड़ी मुश्किल से फिट किया है। तुम वहाँ उसको साथ लेकर जाना.. प्लान याद है ना.. कैसे ले जाना है?
साजन- हाँ भाई.. अच्छी तरह याद है..
भाई- बस कुछ भी हो.. तुम तीनों को जीतना ही चाहिए.. फिर उस साली को दिखा देंगे कि हम क्या चीज़ हैं.. समझे! बहुत बोलती थी कि तुम जैसे नामर्द से लड़की होना अच्छा है, अब साली रोएगी जब उसको अपनी मर्दानगी दिखाएँगे..
साजन- हाँ भाई.. यह बात तो मैं भूले नहीं भूल सकता.. उसने आपकी बहुत बेइज़्ज़ती की.. मगर भाई आप कौन हो और उससे आपकी क्या दुश्मनी है.. क्या उसको आप प्यार करते थे?
भाई- मैंने बताया था ना.. उसने मुझे नामर्द कहा था.. बस मैं उससे इसी बात का बदला लूँगा।
साजन- इतनी सी बात के लिए इतना बड़ा गेम.. ना ना भाई.. आप कुछ छुपा रहे हो.. बात कुछ और ही है।
भाई- हाँ साजन.. बात इससे भी बड़ी है.. सब बता दूँगा साजन.. सब्र करो.. बस सही वक़्त आने दो।
क्यों दोस्तो, कुछ समझ आया यहाँ भी किसी का जिक्र हो रहा है। अब यह कौन लड़की है और उसने ऐसा क्या किया था जो सभी उसके पीछे पड़े हैं और वो कहाँ है ये फार्म.. जहाँ पर ये गेम खेलने वाले हैं। अब उस लड़की का इस गेम से क्या सबन्ध है?
यह सब जानना चाहते हो.. तो चलो इनकी आगे की बात सुनो सब समझ जाओगे।
साजन- भाई आप टेन्शन ना लो.. उस साली को अच्छा सबक़ सिखा देंगे और उसके साथ उस हरामजादे को भी सब समझ आ जाएगा हा हा हा हा!
भाई- ठीक है ठीक है.. ये ले पैसे.. और मज़े करो.. कल वहाँ समय से पहुँच जाना..
साजन- थैंक्स भाई.. वैसे एक बात पूछनी थी.. आप ये चेहरा छुपा कर क्यों रखते हो.. मैं तो आपका ही आदमी हूँ.. मुझे तो आप चेहरा दिखा ही सकते हो ना?
भाई- वक़्त आने दो.. चेहरा भी दिखा दूँगा और नाम भी बता दूँगा। अब ज़्यादा सवाल मत कर.. मैंने तुझे एक खास काम के लिए यहाँ बुलाया है.. वो सुन..
साजन- जी बोलो भाई.. अपुन हर समय रेडी है आपके लिए..
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06-27-2018, 10:51 AM,
#8
RE: kamukta kahani अय्याशी का अंजाम
भाई- तू अभी बुलबुल गेस्ट हाउस जा.. और शनिवार के लिए उसको बुक करवा दे.. उसके बाद सलीम गंजा के पास जाना और उसको कहना कि बुलबुल गेस्ट हाउस में पार्टी है.. अपना जादू दिखा.. ‘हँसों’ को जमा कर समझा।
साजन- समझ गया भाई क्या कोड में बोला आप.. ‘हँसों’ को हा हा हा.. मज़ा आ गया। अब तो पक्का धमाल होगा भाई.. कई दिनों से ऐसी पार्टी में नहीं गया.. अब तो मज़ा आ जाएगा।
इतना कहकर साजन वहाँ से निकल गया और अपने काम को अंजाम देने के लिए दोबारा बाइक पर चल पड़ा।
बस दोस्तो, अब इसके साथ जाकर क्या करोगे.. आगे पता लग ही जाएगा कि कैसी पार्टी होनी है और क्यों होनी है..?
हम जय के पास चलते हैं वहाँ कौन बीच में आ गया था.. देखते हैं।
अरे रूको.. पहले कोमल का हाल और बताए देती हूँ.. उस बात के बाद दोनों ने दोबारा कोमल को चोदना चाहा.. मगर वो नहीं मानी और सुबह की तैयारी का बोल कर वहाँ से निकल गई।
चलो अब जय के फार्म पर चलते हैं।
रानी ने जब लौड़े को चाट कर साफ किया और जय के बराबर में लेटी.. तो दरवाजे पर विजय खड़ा हुआ था.. जिसे देख कर रानी घबरा गई और जल्दी से उकड़ू बैठ कर अपना बदन छुपाने लगी।
जय- आओ आओ.. विजय.. कहाँ थे अब तक.. कसम से ये रानी तो कमाल की है यार.. खूब मज़ा देती है..
विजय- हाँ देख रहा हूँ.. वैसे कमाल तो आपने किया है.. इतनी जल्दी इसको मनाया कैसे?
जय- अरे इसमें मनाना क्या था.. ये यहाँ आई ही मालिश के लिए है.. बस इसको शहर में कैसे मालिश होती है यही सब समझाया.. और ये सब सीख भी गई.. आओ तुम भी मालिश करवा लो।
रानी एकदम सहमी हुई कोने में बैठ गई थी.. जिसे देख कर जय ने कहा- अरे रानी ऐसे डर क्यों रही है.. ये मेरा भाई है.. तुमको इसकी भी ऐसे ही मालिश करनी होगी।
रानी- बाबूजी मुझे सच में बहुत अजीब लग रहा है.. आपका शहर तो बड़ा अजीब है। आपका भाई सामने खड़ा और आप नंगे आराम से बैठे हैं.. मुझसे तो ऐसे नहीं होगा।
विजय- रहने दे.. नहीं करवानी मुझे मालिश.. भाई जल्दी कमरे में आओ.. तुमसे कुछ बात करनी है।
इतना कहकर विजय वापस चला गया।
जय- अरे पगली.. ऐसा क्यों बोली.. वो भाई है मेरा.. और कई बार तो हम साथ में मालिश करवाते हैं। अब सुन अभी तू सो जा.. कल से इस सबकी आदत डाल लेना.. समझी.. वरना नौकरी पक्की नहीं होगी।
रानी कुछ ना बोली और बस जय को देखती रही.. जब तक वो कपड़े पहन कर चला ना गया, वो ऐसे ही बैठी रही.. उसके बाद कहीं उसकी जान में जान आई।
कमरे में जाकर विजय बिस्तर पर बैठ गया और उसके पीछे जय भी आ गया।
विजय- वाउ यार.. तुमने तो कमाल कर दिया.. एक ही दिन में उस लड़की को इतना खोल दिया.. मान गया भाई तुमको..
जय- तूने अभी मेरा कमाल देखा कहाँ है.. साली को दो बार अमृत पिला चुका हूँ। अब तीसरी बार उसकी जवानी का मज़ा लेता.. तो तू आ गया।
विजय- नहीं यार.. आज के लिए इतना काफ़ी है.. और वैसे भी मुझे तुमसे एक जरूरी बात करनी थी।
जय- कैसी जरूरी बात.. क्या हुआह्ह?
विजय- कुछ देर पहले रंगीला का फ़ोन आया था.. वो साला साजन है ना.. उसके दिमाग़ में कुछ चल रहा है। हमें ध्यान से रहने को कहा है।
जय- वो तो कल यहाँ आ रहा है ना.. उसके दिमाग़ में क्या चल रहा है? साला जानता नहीं क्या हमें?
विजय- भाई शनिवार के लिए उसने बुलबुल गेस्ट हाउस को बुक किया है.. वहाँ ‘हँसों’ को जमा करने वाला है साला।
दोस्तो, अगर आप समझ ना पा रहे हो तो बता देती हूँ.. यह बुलबुल गेस्ट हाउस एक ऐसी जगह है.. जहाँ अमीर घर के लड़के और लड़कियाँ जमा किए जाते हैं और उन्हीं को ‘हंस’ कहा जा रहा है और पार्टी के नाम पर वहाँ नशे का कारोबार होता है। 
आप समझ गए होंगे यह आज की नस्ल को बिगाड़ने का नया तरीका है.. तो प्लीज़ आप ऐसी किसी जगह जाने से अपने आप को बचाएँ।
जय- अच्छा उस साले फटीचर के पास इतने पैसे कहाँ से आए.. जो वो इतना उछल रहा है?
विजय- ये तो मुझे पता नहीं.. रंगीला कल आएगा तो बाकी की बात बता देगा.. मगर उसने खास तौर पर कहा है कि कल सबके सामने ज़्यादा बात नहीं हो पाएगी। तो आपको बता दूँ कि किसी भी तरह उस साजन की बातों में मत आना.. वो जरूर कुछ प्लान कर रहा है।
जय- अबे मैं कोई बच्चा हूँ क्या.. जो उसकी बातों में आ जाऊँगा? ये सब जाने दे.. ला बियर पिला.. साली ने सारी बियर लौड़े से चूस कर निकाल दी है।
विजय ने जय को बियर दी और खुद भी बोतल लेकर बैठ गया।
चलो दोस्तो.. अरे नहीं नहीं.. कहीं और नहीं ले जा रही हूँ.. मैं तो यह कहने आई हूँ कि अब रात बहुत हो गई.. तो सो जाओ.. कल सुबह ही मिलेंगे।
हाँ जाते-जाते इतना बता देती हूँ कि रानी दो बार झड़ कर एकदम सुकून महसूस कर रही थी। उसने कपड़े पहने और सबसे पहले उसको ही नींद आई।
ओके.. तो चलो सुबह ही मिलेंगे.. जहाँ से नये ट्विस्ट की शुरूआत होगी और कहानी को एक मोड़ मिलेगा।
सुबह के सात बजे गर्ल्स हॉस्टल में काफ़ी हलचल थी, छुट्टियों के चलते ज़्यादातर लड़कियों के रिश्तेदारर उनको ले आ गए थे और जो कुछ बाकी थीं.. वो भी धीरे-धीरे जा रही थीं।
काजल अपने कमरे में बैठी बाल बना रही थी.. तभी रश्मि वहाँ आ गई।
रश्मि- हाय काजल.. कैसी हो.. रात को कहाँ चली गई थीं तुम? और वापस कब आईं.. मुझे तो पता ही नहीं चला?
काजल- हाय.. मैं ठीक हूँ.. तू सुना क्या हाल है तेरा.. और तूने तो मुझे मना कर दिया था.. मगर गॉड ने एक ऐसा तगड़ा लौड़ा भेजा.. कि बस मज़ा आ गया.. बस तो मैं चुद कर ही वापस आ गई थी। तो तू बेसुध होकर घोड़े बेच कर सो रही थी, तेरी नाईटी भी खुली हुई थी।
रश्मि- ओ माय गॉड.. क्या बोल रही हो? कौन मिल गया? यहाँ तो सिर्फ़ लड़कियाँ ही हैं.. मैं तो ऐसे ही सोती हूँ.. सोने के बाद मुझे कुछ पता नहीं चलता.. कि क्या हो रहा है! नाईटी का क्या है.. खुल गई होगी..
काजल- पता नहीं कौन था.. मगर था बहुत प्यारा.. और तू ऐसे ना सोया कर.. नहीं सोते में कोई तेरी चुदाई कर जाएगा.. हा हा हा हा..
रश्मि- मेरी तो समझ के बाहर है.. तुम कुछ भी मत बोलो और किसकी मजाल है.. जो मुझे छेड़े.. मेरे पापा को जानती नहीं क्या तुम?
काजल- हाँ हाँ.. जानती हूँ तेरे पापा को.. और तेरे भाई को भी.. बड़े गुस्से वाले हैं। यार.. ये सब जाने दे.. तू मेरी बात सुन..
काजल ने उसको कहा कि वो सच बोल रही है.. उसके बाद रात की पूरी बात बताई.. जिसे सुनकर रश्मि के होश उड़ गए।
रश्मि- हे भगवान.. तुम कैसी हो यार.. किसी के भी साथ छी: छी:..
काजल- ओ सती सावित्री.. बस कर हाँ.. मुझे ऐसे जलील मत कर.. तूने तो मना कर दिया था और वो कोई ऐरा-गैरा नहीं था.. कोई खास ही था.. समझी.. और तू जो ये ‘छी: छी:’ कर रही है ना.. देख लेना.. एक दिन तू ऐसी बन जाएगी कि लोग तुम पर थूकेंगे.. जो लड़की ज़्यादा शरीफ़ बनती है ना.. उनको कभी ना कभी ऐसा लड़का मिलता है.. जो उसको कहीं का नहीं छोड़ता.. समझी.. ये जवानी बड़ी जालिम होती है.. तू कब तक इसे संभाल कर रखेगी.. एक ना एक दिन कोई आएगा और तेरे मज़े लूट लेगा और तू उस दिन मुझे याद करेगी कि कोई थी काजल..
रश्मि- नहीं ऐसा कुछ नहीं होगा.. और मैंने कब कहा कि मैं कभी किसी को अपना नहीं बनाऊँगी.. हाँ.. मैं अपना जिस्म दूँगी.. मगर सिर्फ़ अपने पति को.. वो भी शादी के बाद.. समझी..
काजल- शादी… हा हा हा हा.. अरे मेरी जान.. अभी शादी को बहुत समय है.. तब तक कोई मंजनू आएगा और तुझे ‘लैला-लैला’ बोलकर अपना लोला दे जाएगा हा हा हा हा..
उसकी बात सुनकर रश्मि भी हँसने लगी। 
काजल ने रश्मि को कहा- तुम्हें लेने कोई आएगा क्या?
रश्मि- अरे नहीं यार.. मैं कौन से दूसरे शहर की हूँ.. यहीं की तो हूँ.. खुद ही चली जाऊँगी।
काजल- यार तू इसी शहर की होकर हॉस्टल में क्यों रहती है?
रश्मि- बस ऐसे ही यार.. घर पर पढ़ाई ठीक से नहीं होती।
रश्मि ने काजल को टालते हुए ये बात कही.. उसके माथे पर शिकन भी आ गई थी.. उस समय उसके बाद दोनों बस नॉर्मली यहाँ-वहाँ की बातें करने लगी।
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06-27-2018, 10:51 AM,
#9
RE: kamukta kahani अय्याशी का अंजाम
उधर बाहर गेट के पास प्रमोद यहाँ का चौकीदार और हरिया जो साफ-सफ़ाई करता है.. दोनों बातें कर रहे थे।
दोस्तो, हॉस्टल के कैम्पस में एक कमरा बना हुआ है.. जहाँ ये दोनों साथ में रहते हैं। प्रमोद रात को एक राउंड लगा कर कमरे में आ जाता है.. मगर वो बीती रात को काफ़ी लेट आया था।
हरिया- अरे प्रमोद भाई.. रात को बड़े देर से आए तुम.. भाई कहाँ रह गए थे?
प्रमोद- अरे का बताएं भाई.. जब से यहाँ आया हूँ.. साली नींद ही नहीं आती है.. कैसी सुन्दर-सुन्दर लड़कियाँ है यहाँ पर.. देख कर बहुत मज़ा आता है।
हरिया- ओये.. चुप कर ओ पगले.. कोई सुन लेगा और ये रात को तू ऐसे गैलरी में मत घूमा कर.. किसी दिन पकड़ा गया ना.. तो नौकरी तो जाएगी साथ में पिटाई भी खूब होगी..
प्रमोद- अबे हट.. कौन ससुरा हमको पकड़ेगा.. और साला मैं कौन सा किसी के साथ ज़बरदस्ती करता हूँ.. बस देख कर मज़ा ही तो लेता हूँ.. तू जानता नहीं है.. यहाँ की लड़कियों की बुर बहुत फड़फ़ड़ाती है.. साली आपस में रगड़वा कर मज़ा लेती हैं.. एक से बढ़कर एक हैं।
हरिया- हाँ मैं सब जानता हूँ.. मगर ये सब बड़े घर की छोकरियाँ हैं.. अपना कुछ नहीं हो सकता यहाँ..
प्रमोद- तेरा तो पता नहीं.. पर मेरा बहुत कुछ होगा.. तू नहीं जानता मैंने रात कितना मज़ा किया है यार..
हरिया- ओह्ह.. क्या बात करता है? किसी को पटा लिया क्या.. भाई बता ना.. कौन है वो लड़की..? और क्या किया रात को?
प्रमोद- अभी नहीं.. फिर कभी बताऊँगा अभी मुझे ऑफिस में जाना है.. ठीक है चलता हूँ।
ओके फ्रेंड्स.. यहाँ कुछ खास नहीं हुआ.. वैसे आपको कुछ सोच में जरूर डाल दिया मैंने.. कि रात को काजल के साथ कोई और था या ये प्रमोद था.. चलो इसका भी पता लग जाएगा। अभी आगे देखते हैं कि फार्म पर क्या हुआ?
दोनों भाई रात को देर तक पीते रहे थे.. तो अब तक सो रहे थे।
इधर रानी जल्दी उठ गई और नहा कर बाकी नौकरों के पास रसोई में पहुँच गई.. उसको जोरों की भूख लगी थी।
वहाँ किसी ने उससे ज़्यादा बात नहीं की और उसको नाश्ता दे दिया। वैसे रानी को भी उनसें बात नहीं करनी थी.. क्योंकि जय ने मना किया था।
वो अपने कमरे में आ गई और सोचने लगी कि रात जो हुआ.. वो सही था या नहीं..? बस इसी सोच में वो वहीं बैठी रही.. कुछ देर बाद उसको कुछ समझ आया तो वो जय के कमरे की तरफ़ गई।
जब वो अन्दर गई.. दोनों भाई आराम से एक बिस्तर पर सोए हुए थे। रानी उनके पास गई और धीरे से जय को उठाया।
रानी- बाबूजी.. उठो देखो.. कितनी देर हो गई है.. मैं क्या काम करूँ.. मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा.. उठो ना..
जय की आँख खुली तो उसने रानी को पकड़ कर बिस्तर पर खींच लिया।
जय- अरे जानेमन.. मैं तुम्हें यहाँ काम करने के लिए नहीं लाया हूँ। तुम बस हमारी सेवा करो और सुबह का वक़्त सेवा करने के लिए सबसे अच्छा होता है.. चल आ जा..
रानी- क्या बाबूजी.. आप भी ना.. चलो उठो.. मुँह-हाथ धो लो.. कुछ खाना खालो उसके बाद जितनी सेवा करवानी है.. करवा लेना..
उन दोनों की बात सुनकर विजय भी उठ गया था और रानी को देख कर मुस्कुराने लगा।
विजय- रानी सारी सेवा जय की करेगी तो मेरा क्या होगा?
रानी थोड़ा शर्माते हुए बोली।
रानी- ऐसी बात नहीं है बाबूजी.. मैं तो आप लोगों की दासी हूँ.. आप जब कहो सेवा में हाजिर हूँ।
विजय- अच्छा अच्छा.. ठीक है.. जा रसोई में जाकर बोल दे.. हम 10 मिनट में आते हैं.. हमारा नाश्ता रेडी कर दे.. ठीक है..
रानी वहाँ से चली गई तो जय ने विजय को देखा और उसको मजाक से एक मुक्का मारा। 
जय- क्या बात है मेरे विजय दि ग्रेट कच्ची कली को भोगने का मन बना लिया क्या तूने.. हा हा हा..
विजय- अब क्या बताऊँ भाई.. कल जब इसको नंगी देखा तो मेरी तो आँख चकरा गई.. साली क्या क़यामत है.. वैसे मानना पड़ेगा.. आपको एक ही रात में लौड़ा चुसवा दिया अपने इसको..
जय- अरे एकदम टाइट माल है यार.. इसका मुँह भी चूत का मज़ा देता है। अब बस बर्दाश्त नहीं होता.. नाश्ते के बाद साली को चोद ही दूँगा..
विजय- अरे ये क्या यार.. सब कुछ तुम ही कर लोगे.. तो मेरा क्या होगा..? इस नाज़ुक तितली का थोड़ा मज़ा मुझे भी लेने दो.. उसके बाद दोनों साथ मिलकर चोदेंगे साली को..
जय- हाँ तू ठीक कहता है.. साली को आगे और पीछे दोनों तरफ़ से बजा कर मज़ा लेंगे.. चल जल्दी तैयार हो ज़ा..
विजय- भाई पर यह बहुत दुबली है.. क्या दोनों का लौड़ा से लेगी.. साली कहीं मर-मरा ना जाए..
जय- अरे ऐसे कैसे मर जाएगी.. आज तक कभी सुन है कि कोई जवान चूत चुदने से मरी है.. हा हा हा हा..
विजय- जो करना है जल्दी कर लेना.. बाद में यहाँ रंगीला और बाकी सब आ जाएँगे।
जय- अरे वो अभी कहाँ आने वाले हैं.. अभी बहुत समय है उनके आने में.. तब तक तो रानी की मस्त चुदाई कर लेंगे हम.. अब सुन पहले तू रानी से मालिश करवा ले और हाँ उसको नंगा कर देना। उसके बाद में आऊँगा और बस साली को फँसा लेंगे अपने लण्डजाल में.. समझ गया ना..
विजय ने ‘हाँ’ में सर हिलाया और अब दोनों फ्रेश होने की तैयारी में लग गए। करीब एक घंटा बाद दोनों ने नाश्ता करके अपने प्लान को अंजाम देने की मुहिम शुरू की।
विजय- उफ्फ.. भाई रात को बरसात ने पूरे जिस्म को तोड़ दिया है बदन बहुत दर्द कर रहा है..
जय- अरे ये रानी को किस लिए साथ लाए हैं.. इसके हाथ में जादू है.. तेरा सारा दर्द निकाल देगी.. जा इसको अन्दर ले जा..
रानी- हाँ बाबूजी.. चलो अभी दबा के आपका दर्द निकाल देती हूँ।
विजय और रानी कमरे में चले गए तो विजय ने कपड़े निकाल दिए.. बस अंडरवियर में आ गया। जिसे देख कर रानी शर्मा गई।
विजय- अरे क्या हुआ रानी.. ऐसे दूर क्यों खड़ी हो.. कपड़े निकाल कर ही सही मालिश होती है।
रानी- बाबूजी आप लेट जाओ.. मैं अभी कर देती हूँ.. बताओ कहाँ दर्द है?
विजय- अरे तू पास तो आ.. ऐसे वहाँ खड़ी होकर दबाएगी क्या.. रात को तो बिना कपड़ों के जय को बड़ा मज़ा दे रही थी.. अब क्या हो गया?
रानी- नहीं नहीं बाबूजी.. ऐसी बात नहीं है.. आप रात की बात ना करो.. मुझे शर्म आती है।
विजय- अरे इसमें शर्म कैसी.. यहाँ आ.. जो मज़ा जय ने दिया.. वो मैं भी दूँगा और सच कहता हूँ.. उससे ज़्यादा दूँगा.. तू मेरे पास तो आ।
रानी का चेहरा शर्म से लाल हो गया था.. वो धीरे से विजय के पास जाकर बैठ गई।
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06-27-2018, 10:51 AM,
#10
RE: kamukta kahani अय्याशी का अंजाम
विजय ने रानी के मम्मों को सहलाते हुए उससे पूछा- सच बता रानी.. जय के पहले कभी किसी ने तेरे इन अनारों को छुआ है क्या?
रानी एकदम शर्मा कर ‘ना’ में सर हिलाती है.. तब विजय खुश होकर रानी के होंठों को अपने होंठों से चूसने लगता है और उसके जिस्म पर हाथ फेरने लगता है।
रानी थोड़ा विरोध करती है.. मगर विजय की मजबूत बाहें उसको जकड़े रहती हैं और कुछ देर बाद उसको भी मज़ा आने लगता है।
विजय ने रानी को बिस्तर पर लेटा दिया अब वो उसके मम्मों को कपड़े के ऊपर से चूसने लगा था। रानी तो बस जन्नत की सैर पर निकल गई थी।
रानी- इसस्स.. बाबूजी.. आप दोनों भाई आह.. आह.. एक जैसे हो.. आह्ह.. मुझे काम के बहाने यहाँ ले आए.. इससस्स.. आह्ह.. दुःखता है.. ओह.. और कुछ और ही कर रहे हो मेरे साथ..
विजय- गलत बोल रही है तू.. हम एक जैसे नहीं हैं.. बहुत फ़र्क है.. घबरा मत धीरे-धीरे सब फ़र्क नज़र आ जाएगा तुझे और काम का क्या है.. वो तो सारी उम्र पड़ी है.. मेरी जान.. कभी भी कर लेना.. अभी तो जिंदगी के मज़े ले ले..
विजय अब बेताब था रानी के जिस्म से खेलने के लिए.. उसने रानी के कपड़े निकालने शुरू कर दिए। वैसे रानी झूटा नाटक कर रही थी मगर विजय को कपड़े निकालने में मदद भी कर रही थी।
रानी के चमकते जिस्म को देख कर विजय का लंड चड्डी फाड़कर बाहर आने को बेताब हो रहा था.. मगर विजय ने उसको आज़ाद नहीं किया और रानी के छोटे-छोटे मम्मों को सहलाने लगा।
विजय- वाह.. रे.. मेरी रानी तू तो एकदम कुदरत का तराशा हुआ नगीना है.. तुझे तो बस देखते रहने का मन करता है।
रानी- बाबूजी कल रात से आप दोनों भाई मुझे नंगा करने में लगे हुए हो.. मेरी हालत खराब हो गई है.. पता नहीं क्यों मुझे कुछ होने लगता है।
विजय- तू मेरी बात मान ले जान.. तेरी सारी बेचैनी दूर कर दूँगा..
रानी- बाबूजी मैं नंगी तो आपके सामने पड़ी हूँ.. अब इससे ज़्यादा और क्या मनवाना चाहते हो?
उसकी बात सुनकर विजय खुश हो गया और रानी पर टूट पड़ा। उसके निप्पल चूसने लगा और एक हाथ से उसकी चूत को रगड़ने लगा।
रानी जल बिन मछली की तरह तड़पने लगी और विजय की पीठ पर हाथ घुमाने लगी।
रानी- ओससस्स.. आह.. बाबूजी आह्ह.. मेरे नीचे कुछ हो रहा है.. रात को जय बाबू ने जैसे किया था.. आह्ह.. वैसे आप भी करो ना..
विजय समझ जाता है कि इसकी चूत में खुजली शुरू हो गई है। वो झट से बैठ जाता है और अपना अंडरवियर उतार कर लौड़े को आज़ाद कर देता है।
उसके 9″ लंबे और 3″ मोटे लंड को देख कर रानी सिहर जाती है।
रानी- हाय राम बाबूजी.. ये कितना बड़ा है!!
विजय- मैंने कहा था ना.. हम दोनों में बहुत फ़र्क है.. अभी तो लौड़ा देखा है आगे और भी बहुत से फ़र्क नज़र आएँगे.. चल आज तुझे 69 सिखाता हूँ।
रानी- वो क्या होता है बाबूजी?
विजय- तू मेरा लौड़ा चूसेगी और उसी समय में तेरी चूत को चाटूँगा।
रानी- हाय बाबूजी.. ऐसे तो बड़ा मज़ा आएगा.. बताओ मैं क्या करूँ..?
विजय- अरे करना क्या है.. बस मेरे ऊपर आजा.. अपनी चूत मेरे मुँह पर रख और ले ले मेरा लौड़ा अपने मुँह में.. फिर देख क्या मज़ा आता है..
रानी ने वैसा ही किया.. अब विजय बड़े प्यार से उसकी कुँवारी चूत को चाट रहा था और रानी प्यार से उसके बम्बू को चूस रही थी।
यह सिलसिला कुछ देर तक यूँ ही चलता रहा.. तभी अन्दर जय भी आ गया.. उसके हाथ में बियर की बोतल थी और उसने सिर्फ़ लोवर पहना हुआ था।
वो दोनों मस्ती में चूसने में लगे हुए थे जय ने बियर की बोतल को साइड में रखा और अपना लोवर निकाल दिया।
अब उसका लौड़ा आज़ाद हो गया था और उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान थी।
जय- वाह.. बहुत अच्छे ऐसे मालिश हो रही है हाँ..
जय की आवाज़ सुनकर विजय पर तो कोई फ़र्क नहीं पड़ा.. लेकिन रानी बहुत घबरा गई और जल्दी से बिस्तर पर पड़ी चादर अपने ऊपर डाल लेती है.. जिसे देख कर दोनों भाई हँसने लगते है।
जय- अरे क्या यार रानी.. रात को तो बड़ा खुलकर मज़ा ले रही थी.. अब ऐसा क्या है तेरे पास.. जो मुझसे छुपा रही है?
रानी- बाबूजी आप दोनों एक साथ होते हो.. तो मुझे शर्म लगती है।
विजय- अरे यार जो मज़ा साथ मिलकर करने का है.. वो अकेले में कहाँ.. चल आज तुझे जन्नत की सैरर कराते हैं.. हटा दे कपड़ा और देख दोनों भाई कैसे तुझे मज़ा देते हैं।
विजय की बात रानी को समझ आती है या नहीं.. यह तो पता नहीं.. मगर उसकी चूत में बड़ी खुजली हो रही थी और वो चाहती थी कि कैसे भी उसको मिटाया जाए.. तो बस वो उनकी बात मानकर चादर हटा देती है।
जय- वाह.. ये हुई ना बात.. जानेमन तू बहुत कमाल की है.. अब तू हमारा कमाल देख..
दोनों अब रानी के आजू-बाजू लेट गए और उसकी एक-एक चूची को चूसने लगे.. जिससे रानी की उत्तेजना बढ़ने लगी.. वो सिसकारियाँ लेने लगी।
रानी- आह्ह.. बाबूजी.. उफ़फ्फ़ काटो मत.. आह्ह.. दर्द होता है सस्स आह्ह..
दोनों बस अपने काम में लगे हुए थे धीरे-धीरे जय उसके पेट से होता हुआ उसकी चूत तक पहुँच गया।
विजय- उफ्फ.. क्या रस है भाई.. इसके मम्मों में मज़ा आ रहा है.. वैसे इसका मुहूरत कौन करेगा.. ये अभी सोचा कि नहीं आपने?
जय- सोचना क्या था.. तेरा ट्रक बाद में चलाना.. बड़ा है.. पहले मैं अपनी कार चलाऊँगा।
‘वाह मतलब भाई आप इसको नेशनल हाईवे बनाने के मूड में हो.. हा हा हा..’
‘और क्या.. देखना.. कितने वाहन इस नेशनल हाईवे पर दौड़ेंगे.. हा हा हा हा..’
रानी तो मस्ती में खोई हुई थी.. इन दोनों की बात उसके दिमाग़ के बाहर थी वो तो बस अपनी धुन में थी।
जय- रानी रानी.. कभी चाँद पर गई हो क्या?
रानी- आह.. इससस्स.. क्या बात करते हो.. बाबूजी.. उहह.. आह.. हम गरीब शहर ना जा सके.. चाँद पर कहाँ से जाएँगे..
जय- मेरी जान.. आज तुझे चाँद क्या सारे ब्रम्हाण्ड की सैर करवा दूँगा.. बस तू जरा हिम्मत रखना।
इतना कहकर जय ने रानी के पैरों को मोड़ दिया और उसके बीच खुद बैठ गया और अपने लौड़े को चूत पर रगड़ने लगा।
रानी- याइ.. यह.. आप क्या कर रहे हो बाबूजी.. नहीं नहीं.. भगवान के लिए ऐसा मत करो.. मैंने मना किया था ना.. मैं ये नहीं करूँगी.. बस ऊपर से जो करना है..कर लीजिए..
जय- अरे क्या ये.. ये.. लगा रखा है बोल.. चुदाई नहीं करवानी और मैं कौन सा तेरी चुदाई कर रहा हूँ.. बस लौड़ा चूत पर रगड़ कर तुझे मज़ा दे रहा हूँ.. बता मज़ा आ रहा है ना?
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