Porn Hindi Kahani दिल दोस्ती और दारू
12-15-2018, 12:36 AM,
RE: Porn Hindi Kahani दिल दोस्ती और दारू
दूसरे दिन कॉलेज जाने से कुच्छ देर पहले हॉस्टिल के पब्लिक बाथरूम मे मैं और सौरभ नहा रहे थे कि मुझे कुच्छ ज़रूरी काम याद आया, मैने सौरभ को आवाज़ दी...

"क्या हुआ..."

"अबे, वो नवीन के बाइक वाले केस का मैने सेटल्मेंट कर दिया है,तुम लोगो को अब कुच्छ नही करना...बस ढाई-ढाई हज़ार देने है..."

"बोसे ड्के साबुन फेक उपर से, कब से लेकर बैठा है..."

"ये ले..."मैने साबुन उपर से उसकी तरफ फेक दी और बोला"बेटा, लंड-वंड मे साबुन मत लगा लेना...वरना गान्ड लाल कर दूँगा..."

"ये बता पैसे कब देना है, मेरे अकाउंट मे तो अभी फिलहाल चवन्नि तक नही है..."

"तो बेटा, अंकल जी को फोन करो और बोलो कि किताबे ख़रीदनी है...."

"देखता हूँ, शायद बात बन जाए..."
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इसके बाद हम दोनो चुप-चाप शवर चालू करके नहाते रहे और जब मुझे साबुन की ज़रूरत हुई तो मैं चिल्लाया और सौरभ ने साबुन मेरी तरफ फेका.....

"अबे एक बात बता, ये साबुन मे जो तेरे बाल है, वो सर के ही है ना या झाट के बाल है..."

"गान्ड मरा तू, मैं तो चला अब..."

"अबे रुक...एक बात बता ये कल्लू की बहन तुझे कैसी लगती है..."

"ठीक ही है, चोदेगा क्या उसको..."

"सोच रहा हूँ सेट कर लूँ...और मस्त बजाऊ..."

"फिर मेरे को भी चोदने के लिए देना ना...."

"अबे प्रसाद है क्या,जो सबमे बाँट दूँगा...."

"जब तू आराधना के पीछे पड़ेगा तो एश को छोड़ देगा...."

"चूतिया है क्या...एश से मैं दिल से प्यार करूँगा और आराधना के साथ लंड से प्यार करूँगा...वैसी उसके दूध मस्त है, एक बार दबाने को मिल जाए तो साला पूरा दूध ही निकाल लूँ...वैसे वो मुझे लाइन बहुत देती है, जब देखो सर-सर करते हुए सर खाने आ जाती है..."

मैने अपनी बात ख़त्म की और सौरभ के कॉमेंट्स का इंतज़ार करने लगा कि वो अब कुच्छ बोलेगा, अब कुच्छ बोलेगा...लेकिन जब वो कुच्छ नही बोला तो मेरा माथा ठनका और मैने बाथरूम की नल मे पैर रखकर उपर से उसकी तरफ देखा....

"बोसे ड्के, मूठ मार रहा है तू, लवडे कितना अश्लील लौंडा है बे तू...ठर्की साले..."

"चुप रह बे भोसदचोड़, लास्ट स्टेज है.....आहह...याअहह मज़ा आ गया, ला बे साबुन फेक इधर कल के बदले आज ही नहा लेता हूँ...कौन लवडा हर रोज ठंडी मे नहाए..."

"लंड मेरा, साबुन देगा...अब ऐसे ही नहा..."

"भर ले अपना साबुन और जितना तू लड़कियो के बूब्स के बारे मे सोचता है ना, उतना यदि बुक्स के बारे मे सोचता तो हर साल आन्यूयल फंक्षन पर 15 हज़ार पता..."

"बात तो तेरी सही है बालक, लेकिन आइ लव बूब्स मोर दॅन बुक्स "
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एक दम बढ़िया से तैयार होकर हम लोग कॉलेज पहुँचे.अरुण, सौरभ तो क्लास मे चले गये और मैं बॅग रखकर ऑडिटोरियम की तरफ बढ़ा...

अब जब मेरी पार्ट्नर एश थी और आज कल उससे मेरी बढ़िया बनती भी थी तो इसमे अब कोई शक़ नही कि मैं सबसे पहले उसी के पास जाउन्गा, एक दो बार छत्रू का दिया हुआ मन्नुअल पढ़ुंगा...एश से दो चार मज़ाक करूँगा और फिर एक घंटे तक स्टेज मे कभी वो बोलेगी और कभी मैं बोलूँगा...कभी वो मुझसे छेडखानी करेगी(ऐज आ पार्ट ऑफ और फन्षन) और कभी मैं उसकी लूँगा (दिल से ).... कल हमारे बीच क्या था और कल हमारे बीच क्या होगा,उन सबकी परवाह किए बिना मैं एक दम बिंदास होकर एश के साथ पूरा एक घंटा बिताता था...इस उम्मीद मे कि कल जब वो पीछे मूड कर अपने बीते दिनो को याद करेगी तो कही ना कही, किसी ना किसी वजह से याद तो ज़रूर करेगी और जब वो मुझे याद करेगी तो ये ज़रूर सोचेगी कि......मालूम नही क्या सोचेगी, लेकिन कुच्छ ज़रूर सोचेगी इतना मालूम है 
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"गुड मॉर्निंग, बैठिए..."मेरे एश के पास जाते ही एश ने बड़े आदर के साथ कहा...

"ये इतना रेस्पेक्ट क्यूँ दे रही है, कही ये मुझे मन ही मन अपना हज़्बेंड तो नही मान रही "मन ही मन मे इमॅजिनेशन ठोकते हुए मैने एश से कहा"क्या बात है, आज इतना रेस्पेक्ट दे रही है..."

"रेस्पेक्ट तो आज छत्रपाल सर देंगे...वो भी बड़े रेस्पेक्ट से..."

"ये सुन...ये छत्रु पटृू का डर किसी और को दिखाया कर..."आगे वाली सीट पर दोनो पैर रख कर मैने कहा"एक अंदर की बात बताता हूँ, ये जो चवन्नि छाप छत्रु है ना, ये कॉलेज के बाद मुझसे ही आंकरिंग के टिप्स लेता है और यहाँ आकर सबको बताता है...और तो और ये मेरा बहुत बड़ा फॅन भी है, यदि यकीन ना हो तो उसका मोबाइल देखना कभी...मेरी फोटो लगा कर रखा हुआ है. "

"सच..."एश हँसते हुए बोली...

"मैं कभी झूठ भी बोलता हूँ क्या, अब जब बात शुरू हो ही गयी है तो अंदर की एक और बात बताता हूँ...यहाँ छत्रपाल को सब सर कहते है, लेकिन बाहर छत्रपाल मुझे सर कहता है...तुझे यकीन ना हो तो मेरे क्लास वालो से पुछ लेना..."

इसी के साथ मैने जो फेकाई चालू की, वो बढ़ते समय के साथ बढ़ती ही गयी और एश हँसते ही जा रही थी...

"अरे इतना ही नही, लास्ट एअर के आन्यूयल फंक्षन के टाइम तो इस छत्रु ने मुझे रात के 2 बजे कॉल किया और बोला कि 'अरमान सर, मुझे एक स्पीच तैयार करनी है..आप थोड़ी मदद कर दो ना' .लेकिन मैने सॉफ मना कर दिया और इसने दूसरे दिन भी रात के 2 बजे कॉल किया और बोला कि 'अरमान सर...आपसे ज़्यादा होशियार,टॅलेंटेड और स्मार्ट बंदा तो पूरे कॉलेज मे क्या,पूरे इंडिया मे नही है...मैं तो कहता हूँ कि पूरे यूनिवर्स मे नही है...प्लीज़ मेरी हेल्प कीजिए...' उसके बाद जानती है, क्या हुआ..."

"क्या हुआ.."एक पल के लिए अपनी हँसी रोक कर एश बोली और फिर हँसने लगी...

"उसके बाद मैने सोचा कि इसकी हेल्प कर ही देनी चाहिए,बेचारा कितना परेशान है और उसके बाद मैने ऐसी स्पीच तैयार की..कि लोग आज तक उसकी तारीफ करते है...लेकिन किसी को मालूम नही कि उस स्पीच मे केवल आवाज़ छत्रपाल की थी, कलम,स्याही,प्रतिभा मेरी थी..."बोलते हुए मैं रुका और एश को हँसते हुए देखने लगा....

"आइ लव यू, एश..."जोश ही जोश मे होश खोते हुए मैने कहा

मेरे आइ लव यू बोलने के साथ ही दो जबर्जस्त धमाके हुए...पहला ये कि एक ओर जहाँ मेरा चपड-चपड करता हुआ मुँह बंद हुआ, वही एश का हँसता खिलखिलाता हुआ चेहरा ऐसे लाल हुआ, जैसे उसे किसी ने एक झापड़ रसीद दिया हो...इन गोरी लड़कियो की यही प्राब्लम है, ज़रा सी फीलिंग दिया नही कि चेहरा लाल कर लेती है...

एश का लाल चेहरा देखकर ख़याल आया कि यहाँ से भाग लूँ, लेकिन फिर मैने सोचा कि उससे क्या होगा क्यूंकी कल तो मिलना ही पड़ेगा...

इसके बाद मेरे सामने दो रास्ते और आए, पहला ये कि मैं एश को ये बोल दूं कि 'ये तो ऐसे ही मज़ाक-मज़ाक मे, जोश-जोश मे बोल गया...मेरे सभी शब्द काल्पनिक है और इन शब्दो का हक़ीक़त और वास्तविकता से कोई लेना-देना नही है ' लेकिन ये कोई गाली नही थी, जो ऐसे ही मुँह से निकल जाए...मैने एश को आइ लव यू बोला था और यदि उसने अपना ज़रा सा भी ब्रेन यूज़ किया और फ्लॅशबॅक मे जाकर उसके प्रति मेरी हरकतों को उसने रिमाइंड किया तो फिर वो जान जाती कि मेरे दिल मे कहीं ना कहीं, किसी ना किसी कोने उसके लिए वैसा कुच्छ है, जैसा कुच्छ मैने अभी कहा है...

दूसरा रास्ता मेरे पास जो था वो ये कि मैं तुरंत एश से हँसते हुए कहूँ कि' जस्ट जोकिंग रे...दिल पे मत ले'
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12-15-2018, 12:36 AM,
RE: Porn Hindi Kahani दिल दोस्ती और दारू
मेरे पास दो रास्ते थे और मैने दूसरे रास्ते को अपनाने का सोचा लेकिन फिर 5 सेकेंड बाद मैने सोचा कि क्यूँ ना दोनो ही रास्तो को कंबाइन कर दिया जाए...क्यूंकी बहाना भी मारो तो कुच्छ लेवेल का बहाना मारो...ये आड झूठ बहाना मारने से क्या फ़ायदा.....इसलिए मैने कहा...
"शकल ऐसी क्यूँ बना रखी है, घरवालो ने ऑटो किराए के पैसे नही दिए क्या और अभी जो मैने लास्ट लाइन बोली, वो तो ऐसिच धोखे से निकल गया...सीरीयस मत हो..."


जवाब मे एश साइलेंट होकर अपना लाल चेहरा ना मे हिलाते रही और होंठ को दाँत से चबाने लगी....एश का रंग-रूप, हाल-चाल देखकर मुझे ऐसा लगा जैसे कि बात बनी नही...इसलिए मैने अपने दूसरे प्लान को भी आक्टीवेट किया और बोला...
"जस्ट जोकिंग रे...आक्च्युयली मैं आराधना को 'आइ लव यू' बोलना चाहता था..तू तो जानती ही होगी उसे, फर्स्ट एअर मे पढ़ती है...उसिच से अपुन फटट ले प्यार करता है और दो दिन से लगातार उसे आइ लव यू बोलने की प्रॅक्टीस कर रेला हूँ...और अभी कुच्छ देर पहले अचानक मेरे मुँह से वो लाइन निकल गयी,जिसकी प्रॅक्टीस मैं पिछले दो दिन से कर रहा हूँ....तुझे यकीन नही होगा, पर आराधना को आइ लव यू बोलने के चक्कर मे मैं हॉस्टिल के आधे लड़को को आइ लव यू बोल चुका हूँ...मतलब कि मुझसे जो भी थोड़ी देर बात करता है, मेरे मुँह से उसके लिए आइ लव यू, निकल जाता है..."

"तो ये बात है, एक पल के लिए तो मेरी साँस ही रुक गयी थी..."बोलते हुए एश ऐसे लंबी-लंबी साँसे भरने लगी, जैसे मैं सिगरेट के काश लेते वक़्त भरता हूँ....
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"हां, यही बात है... "(अच्छा हुआ मान गयी...), इसके बाद मैने सोचा कि जब तीर कमान से निकल ही चुका है तो क्यूँ ना थोड़ा-बहुत ज़ख़्म भी दे दिया जाए..

"वैसे तुझे क्या लगा था कि मैने तुझे आइ लव यू,कहा है...चल हट, तुझमे ऐसा है ही क्या, जो मैं तुझे आइ लव यू, कहूँगा...तुझे आंकरिंग मे झेल रहा हूँ,वही बहुत है...वैसे आइ लव यू एश...दिल से..."बोलते हुए मैने जीभ फिसलने की आक्टिंग की और फिर कहा"देखा तूने, मैं फिर से तुझे आइ लव यू कह दिया...जबकि मैं तुझे आइ लव यू नही कहना चाहता, लेकिन फिर भी आइ लव कह दे रहा है...आइ रियली लव यू, आइ रियली लाइक योउ फ्रॉम माइ इनसाइड आंड आउटसाइड ऑफ दा हार्ट....माँ कसम, आइ लव यू..."

जीभ फिसलने का बहाना करके मुझसे जितनी बार हो सका मैने उतनी बार एश को आइ लव यू, कहा...और उसे मालूम तक नही चला कि मेरी जीभ नही फिसल रही,वो तो मैं अपने दिल की भडास निकाल रहा हूँ...जो चार साल से अंदर दबी हुई थी...फला कितना जोरदार आक्टिंग करता हूँ मैं, मुझे तो ऑस्कर मिलना चाहिए .
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मैं अपनी चालाकी और होशियारी पर अंदर ही अंदर खुद को शाबाशी दे ही रहा था कि एश वहाँ से उठी और सामने की रो पर बैठे हुए बाकी स्टूडेंट्स के पास पहुच गयी...वहाँ जाकर एश ने आराधना के कान मे कुच्छ कहा, जिसके बाद आराधना पीछे पलटी और मुझे देखते हुए उसने आँख मारी... 

"बीसी, इसे क्या हुआ... "आराधना का वो आँख मारना मुझे ऐसे लगा, जैसे किसी ने मेरे हाथ मे बिजली के तार थमा दिए हो....
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"आराधना से तूने क्या कहा...जो वो ऐसी अमानवीय, असंवंधानिक हरकत कर रही है..."एश जब मेरे पास वापस आई तो मैने झटके से पुछा...

"तुम्हे तो मुझे थॅंक्स कहना चाहिए...मैने तुम्हारा काम कर दिया..."

"कैसा काम, कौनसा काम, किस तरह का काम..."

"मैने आराधना से जाकर कहा कि, तुम उससे बहुत प्यार करते हो...लेकिन कहने मे शर्मा रहे हो..."

"लग गये ल..."सामने खाली स्टेज की तरफ देखते हुए मैं बड़बड़ाया...
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कुच्छ देर पहले जहाँ मैं अपनी होशियारी पर गुमान कर रहा था वही अब मेरे आँखो के सामने अंधेरा छा रहा था...
"पहली बार किसी ने प्यार से ठोका है...बेटा अरमान, तू तो चुद अब..."दिल ही दिल मे एश को कोसते हुए मैने उससे कहा"मैं ज़रूर सपना देख रहा हूँ...है ना..."

"नो, इट्स ट्रू..शी आक्सेप्टेड युवर प्रपोज़ल..."

"रियली...मेरी तो खुशी का ठिकाना ही नही है,.."(गान्ड मराए प्रपोज़ल...)

"कमाल करते हो अरमान, मैने तुम्हारा इतना बड़ा काम किया और तुमने मुझे एक थॅंक्स तक नही कहा..."

"थॅंक यू, थॅंक यू वेरी मच...मैं इतना ज़्यादा खुश हूँ कि तुम्हे बता नही सकता, दिल कर रहा है कि जाकर छत्रपाल को एक थप्पड़ मार दूं या फिर अपने हॉस्टिल की छत से खुशी के मारे नीचे कूद हो जाउ..., आइ लव यू एश, रियली लव यू...आल्बर्ट आइनस्टाइन और न्यूटन बाबा की कसम, आइ लव यू... "

"फिर से तुम्हारी ज़ुबान फिसल गयी, इसपर लगाम लगाओ...वरना दूसरी लड़कियो को कहा तो कही सॅंडल ना पड़ जाए...मेरी बात अलग है, मैं एक मेच्यूर लड़की हूँ "

"खाख मेरा मेच्यूर है...ज़हर पिला के बोलती है की मुझे थॅंक्स कहो..."एश की तरफ देखकर मैं बड़बड़ाया...

शुरू मे तो मुझे ये लगा कि एश ने मुझे ये किस मुसीबत मे फेक दिया है, लेकिन आंकरिंग की प्रॅक्टीस करने के दौरान जब मैने आराधना को देखा तो मेरा 1400 ग्राम का दिमाग़ कुच्छ घूमा और मेरी एक्स-रे टाइप नज़र आराधना के सीने से होती हुए उसके टाँगो के बीच मे से जब गुज़री तो मेरा अंग-अंग फड़कने लगा....

प्रॅक्टीस के बाद मैने एश को दिल से शुक्रिया कहा और आराधना मुझे पकड़े, उससे पहले ही लगभग भागते हुए वहाँ से अपनी क्लास की तरफ हो लिया....पता नही मेरे अंदर अचानक से इतनी खुशी क्यूँ घर कर गयी थी कि कुच्छ देर तक तेज़ चलने के बाद मैं दौड़ने लगा और मेकॅनिकल, 4थ एअर की क्लास के गेट के पास ड्रिफ्ट मारकर फिसलते हुए डाइरेक्ट क्लास के अंदर आ गया....दूसरी क्लास शुरू हो चुकी थी और आइआइटी,रूरकी से हमारे फ्ड होल्डर, श्री जे.के. अग्रवाल जी रोबाटिक्स की क्लास ले रहे थे...बोले तो मेकॅनिकल डिपार्टमेंट के होड़ की क्लास चल रही थी...

"मे आइ कम इन, सर..."क्लास के अंदर आकर मैने पुछा, क्यूंकी दौड़ते हुए ड्रिफ्ट मारने के कारण मैं 2 फुट क्लास के अंदर दाखिल हो चुका था....

"अभी क्यूँ पर्मिशन माँगी, अपनी सीट पर बैठकर, 'मे आइ कम इन, सर' बोलते..."

"सॉरी सर..."दो कदम पीछे हटकर मैने कहा"मे आइ कम इन सर.."

"आ जाओ..."

"थॅंक यू सर.."बोलते हुए मैं अंदर आया और जाकर सबसे पीछे वाली सीट पर बैठ गया....
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वैसे तो क्लास किसी भी टीचर की हो, मैं बात करता ही था,लेकिन होद सर को मैं थोड़ा रेस्पेक्ट देता था, इसलिए उनकी क्लास मे मैं चुप रहता था, लेकिन इसका मतलब ये नही कि मैं बात नही करता था...होद सर की क्लास मे हम लोग रिटन फॉर्मॅट मे डिस्कशन करते थे....

"इतना खुश क्यूँ है बे गान्डुल, किसी ने चूसा दिया क्या..."अरुण अपनी कॉपी पर ये लिखकर सामने होद सर की तरफ देखने लगा...

"मैने एक माल पटा ली है..."मैने रिप्लाइ किया...

"क्या बात करता है,..चोदु मत बना, सच बता..."

"अरे लवडा सच मे तेरे भाई ने लौंडिया सेट कर ली...बड़ी दुधारू लड़की है..."

"कौन है..? "

"आराधना...अपने कालिए की दूर की बहन..."

"ओये बीसी,...मैं भी चोदुन्गा..."

"पहले मैं तो चोद लूं... "

"ओके, अब सामने देख, नही तो होद चोदेगा..."
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इसके बाद रोबाटिक्स की पूरी क्लास मे हमारे बीच कुच्छ ऐसी ही छोटी-मोटी..इधर-उधर की बाते रिटन फॉर्मॅट मे हुई और जब श्री जे.के. अग्रवाल जी क्लास से गये तो अरुण बोला....

"क्यूँ बे, सात सेमेस्टर तक तो एश का बड़ा सच्चा आशिक़ बना फिरता था, अब कहाँ गयी तेरी आशिक़ी..."

"ये आराधना तो ल वाली है...दबाओ, डालो और धक्के मारो...बस"

"लेकिन मुझे ऐसा क्यूँ लग रहा है, तूने लड़की बदल ली है तो कही तुझे आराधना से प्यार ना हो जाए...मैने बहुत से लौंदो को देखा है, जो पहले तो सिर्फ़ चूत के लिए लड़की पटाते है लेकिन फिर चूत मारते-मारते चूतिया बनकर उसी लड़की के आगे-पीछे घूमते है..."

"अबे बक्चोद होते है, वो लौंदे..."

"देख के बीड़ू, कही आराधना से प्यार ना हो जाए..."

"यू कॅन चेंज दा गर्ल...नोट लव. टेन्षन ना ले, कुच्छ नही होगा..."बोलते हुए मैने सामने वाले लड़के को मज़ाक ही मज़ाक मे एक झापड़ मारा और फिर खुद की तारीफ करते हुए बोला"फला, क्या डाइलॉग मारा है..'यू कॅन चेंज दा गर्ल..नोट लव'...ताली बजा बे"
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नेक्स्ट क्लास छत्रपाल की थी और छत्रपाल एक दम करेक्ट टाइम पर क्लास मे पहुचा...क्लास मे आते ही उसने 'बिज़्नेस एतिक्स, एकॉनमी, एन्वाइरन्मेंट' जैसे बोरिंग टॉपिक पर अपना बोरिंग भाषण शुरू कर दिया और इधर हमारी बात-चीत भी जारी थी...
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"एनएसयूआइ का फॉर्म भरेगा, प्रेसीडेंट के लिए..."अरुण की जगह अभी-अभी शिफ्ट हुए सुलभ ने पुछा...

"बकवास कामो के लिए, आइ हॅव नो टाइम...दूसरा दुकान ढुंढ़ो बाबूजी..."

"सच बोल बे, जैसे फिर किसी दूसरे को मैं ढूंढूं..."

"बोला ना...बकवास कामो के लिए मेरे पास टाइम नही है और वैसे भी आइ हेट खांग्रेस्स.."

"आइ हेट खांग्रेस्स, सच मे...फिर फर्स्ट एअर मे क्यूँ लड़ा था..."

"उस समय अपने को ज़रूरत थी..इसीलिए, अब नही है इसलिए नही लड़ रहा..."

"कितना सेल्फिश है बे तू ..."

"चुप कर बे, एक पप्पू कम है क्या, जो मैं दूसरा बनू और इंग्लीश मे एक सेंटेन्स है 'नो आर्ग्युमेंट, प्लीज़'..."

"लड़ लेना बे...मस्त दारू की पार्टी मिलेगी..."

"जो मेरी पहली बात ना माने उसके लिए इंग्लीश मे एक दूसरा सेंटेन्स भी है' गो टू हेल '..."

"गान्ड मारा..."

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लंच हुआ और मेरी पूरी मंडली हर दिन की तरह कॅंटीन के लिए रवाना हुई...मेरे दोस्तो को आराधना और मेरी सेट्टिंग की जानकारी हो चुकी थी और वो सब हल्के-फुल्के जोक्स, कॉमेंट्स मुझपर पेले पड़े थे, जैसे की मैं आराधना का दूध दबाउंगा तो वो क्या बोलेगी, जब मैं उसकी चूत मे उंगली करूँगा तो वो कैसे कसमसाएगी, रिक्ट कैसे करेगी वगेरह-वगेरह......इस बीच सौरभ मेरे बगल मे खड़ा था और उसे पता नही क्यूँ, पर मेरी परवाह हो रही थी कि आराधना मेरी ज़िंदगी मे एक तूफान लेकर आएगी, शायद उसने उस तूफान को बहुत पहले भाँप लिया था, जिसकी भनक तक मुझे उस वक़्त नही थी...

"आराधना, कुच्छ सही नही लग रही बे..."मुझे, मेरे दोस्तो से थोड़ा आगे लेजा कर सौरभ ने मेरे कान मे कहा...

"क्यूँ, क्या हुआ..."

"माना कि हर कुत्ते का दिन आता है और उसे लड़की चोदने को मिल जाती है...लेकिन तेरा दिन अभी नही आया है..."

"तू मेरे साथ एमबीए-एमबीए खेल रहा है क्या..जो बात को यूँ घमा फिरा कर बोल रहा है, सीधे-सीधे बोल ना..."

"सीधे-सीधे मैं ये बोलना चाहता हूँ कि, जो लड़की बड़ी आसानी से राज़ी हो जाती है, वो कभी आसानी से पीछा नही छोड़ती..."

"तू फालतू मे टेन्षन ले रहा है, मेरे पास बॅक अप प्लान है..."

"और क्या है वो तेरा बॅक अप प्लान..."

"तू लवडा, पहले थोड़ा दूर चल..आने-जाने वाले लोग फालतू मे मुझे गे समझ रहे है..."सौरभ को धक्का देते हुए मैने कहा"और अभी फिलहाल मेरे पास कोई बॅक अप प्लान नही है लेकिन बाद मे बना लूँगा..."

"सोच ले कोई भी इंसान, दो नाव मे पैर रखेगा तो डूबेगा ही..."

"बेटा मैं, जॅक स्पेरो हूँ और अकॉरडिंग तो जॅक स्पेरो ज़िंदगी सिर्फ़ एक समझौता है...जिससे अभी हाल-फिलहाल मे काम बने, वो समझौता करो, बाकी कल की कल देख लेंगे..."

"सोच ले...मेरा पर्सनली एक्सपीरियेन्स है, ज़िंदगी झंड हो जाती है, ऐसी लड़कियो के कारण..."

"ज़िंदगी कभी हर सिरे से खुशहाल नही रहेगी मेरे दोस्त और जितनी जल्दी हो सके हमे इसकी आदत डाल लेनी चाहिए..."
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कॅंटीन मे पहूचकर फाइनली सौरभ का मुँह बंद हुआ और मैने चैन की साँस ली क्यूंकी मेरे आधा डज़न डाइलॉग्स जो मैने फ्यूचर के लिए बचा रखे थे, वो सौरभ को समझाने मे वेस्ट हो चुके थे...

कॅंटीन मे अपना पेट भरते हुए मुझे आराधना अपनी सहेलियो के साथ दिखी और ऑडिटोरियम मे जो मैने सोचा था, उसे करने के लिए मैने अपने दोस्तो को बाइ कहकर सीधे आराधना के पास पहुचा...

"चल उठ.."

"क्या हुआ सर..."शरमाते हुए आराधना बोली...

"तुझसे प्यार करने का मूड हो रहा है, अब चल..."

मेरे इतना कहते ही आराधना झट से खड़ी हुई और अपने सहेलियो को वो डाइरेक्ट क्लास मे मिलेगी बोलकर मेरे साथ बाहर आई....

"तू भी अपुन पे फ्लॅट थी क्या, जो ऑडिटोरियम मे तुरंत पीछे पलटकर आँख मार दी..."कॅंटीन के बाहर आराधना को रोक-कर मैने कहा...

"मैने ठीक किया ना..."

शुरू मे सोचा की आराधना से बोलू कि'क्या घंटा ठीक गया, गान्ड फट के हाथ मे आ गयी थी मेरी, उस वक़्त' ....लेकिन फिर सोचा की वो लड़की है और साथ मे मेरी आइटम भी, इसलिए मैने उसी बात को थोड़ा घुमा-फिराकर कहा...

"क्या खाख ठीक है, शरम नाम की कोई चीज़ है कि नही तेरे अंदर...ऐसे भी कोई आँख मारता है क्या, जानती है तेरा क्या इंप्रेशन पड़ा मुझपर...मुझे देख, मैं कितना शरीफ हूँ, मैने खुद तुझसे अपने बे-पनाह प्यार का इज़हार ना करके एश के द्वारा अपने प्यार का इज़हार किया और एक तू है, जो सीधे आव ना देखा ताव और आँख लपका दी...ये तो किसी भी तरह, किसी भी आंगल से आक्सेप्टबल नही है, माना कि तू भी मुझे लव करती है लेकिन ऐसा भी क्या है जो सीधे पलटकर आँख ही मार दे.तुझे पता नही मुझे हार्ट अटॅक ही आ गया था, यदि मैं मर जाता तो ...कौन ज़िम्मेदारी लेता उसकी, ये आज कल की लड़कियो का तो चाल-चलन ही मुझे समझ नही आता, जब देखो मुँह फाडे बैठी रहती है कि, अरमान बस एक इशारा कर दे...माना कि मैं बहुत हॅंडसम हूँ लेकिन ऐसा भी क्या है कि बस मौका मिला नही की मुझपर टूट पड़ी...मुझे देख कितने शरीफी से रहता हूँ,बाक़ायदा तुम लड़कियो की भरपूर इज़्ज़त करता हूँ, तू ऐसा नही कर सकती क्या...यदि नही कर सकती तो अभी बोल दे, बाद का लफडा नही माँगता अपुन को..."

"सॉरी..."बोलते हुए आराधना लगभग रोने को हो गयी...

"तेरी तो...अब ये क्या है,...कुच्छ बोला नही कि रोना चालू, ऐसे करेगी तो कैसे चलेगा...लड़की है ना तू ...तो रानी लक्ष्मी बाई बनकर यूँ रोने के बजाय मुझे सीधे एक थप्पड़ भी तो मार सकती है ना...ऐसे रोते रहेगी ये सोचकर कि मैं तुझे शांत कराउंगा तो ये तेरी ग़लत फ़हमी है. मैं बिल्कुल भी उस टाइप का लड़का नही हूँ, जिस टाइप का तू समझ रही है...मेरी गर्ल फ्रेंड बनी है मतलब कुच्छ रूल्स, कुच्छ रेग्युलेशन, कुच्छ नियम, कुच्छ क़ायदे-क़ानून से रहना सीख...शाम तक तेरे पास मेरी गर्लफ्रेंड बनने के जो 'टर्म्ज़ आंड कंडीशन्स' है वो मैं पहुचा दूँगा, उसे अच्छे से पढ़ लेना और वैसा ही करना...वरना मैं अपने लिए कोई दूसरा बाय्फ्रेंड ढूंड लेना...अब रोना बंद कर और हँसते हुए मुझसे चिपक कर चल, एक दोस्त से मिलवाना है...तुझे..."
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12-15-2018, 12:37 AM,
RE: Porn Hindi Kahani दिल दोस्ती और दारू
आराधना को चुप करा कर मैने कॉलेज की सीढ़िया चढ़ि और सीधे सीएस ब्रांच की क्लास की तरफ पहुचा...जहाँ कल्लू मुझे बाहर ही मिल गया...
"आबे ओये कालिए, इधर आ...किसी से मिलवाना है तुझे "

जहाँ कंप्यूटर साइन्स की क्लास लगती थी, वहाँ जाकर मैने आराधना के दूर के भाई कल्लू को आवाज़ दी...दर-असल यही वो सीन था, जो मैने आंकरिंग की प्रॅक्टीस करते वक़्त सोचा था और साथ मे ये कल्लू को मेरा जवाब था, जब उसने कहा था कि मैं कभी लड़की नही पटा सकता....आराधना को लेकर कंघी चोर की तरफ जाते हुए मैं खुश इतना हो रहा था जैसे कि नासा मे मेरी जॉब लग गयी हो और थोड़े ही देर बाद एक स्पेस मिशन के लिए निकलना हो.

"आराधना, अब थोड़ी सी स्माइल ला अपने चेहरे पर, मैं तुझे अपने सबसे खास दोस्त से मिलवाने जा रहा हूँ, या फिर कहूँ कि यही वो लड़का है जिसने मुझे कुच्छ दिन पहले कहा था कि मैं तुझे सेट करूँ, वरना मैं तो किसी लड़की की तरफ देखता तक नही..."

अपनी आदत के अनुसार कल्लू ने तो पहले मेरी तरफ आने से मना कर दिया लेकिन बाद मे जब उसने आराधना को मेरे साथ देखा तो, जहाँ खड़ा था, वहाँ से झटका खाकर दो कदम पीछे हट गया और अपनी आँखे छोटी करके मुझे देखने लगा.....
"जानती है, ये है तो मेरा बेस्ट फ्रेंड लेकिन एक नंबर का चोर है, लोगो के कंघी, तेल,साबुन, टवल, अंडरवेर एट्सेटरा. एट्सेटरा. जैसी छोटी-छोटी चीज़े ये पलक झपकते पार कर देता है. और एक बार तो हद तब हो गयी जब हॉस्टिल मे एक लड़का अपनी अंडरवेर लेकर नहाने गया, तब हमारे ये कल्लू महाशय अपने प्लान के मुताबिक़ बाथरूम मे जा पहुँचे और उस लड़के की अंडरवेर उठा ली...उसके बाद इसकी जो धुलाई हुई, उसका निशान अभी तक इसके चेहरे पर है..."
"ये मेरा भाई है..."
"क्या..."चौकाने का नाटक करते हुए मैं आराधना से थोड़ी देर हट गया और आराधना को ऐसे देखने लगा, जैसे कि वो बिल्कुल न्यूड खड़ी हो और अपने चूत मे उंगली कर रही हो...
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"तेरा भाई..लेकिन तुम दोनो तो एक ही ब्रांड की पैदाइश नही लगते, मतलब कि तू कहाँ आपल मोबाइल और वो फला चाइना मोबाइल...."
"हम दोनो एक ही गाँव से है, इस तरह वो मेरा भाई ही हुआ ना..."

"लगा था, मुझे तुम दोनो को देखकर ही लगा था कि तुम दोनो यक़ीनन गाँव से होगे...खैर कोई बात नही, अब यहाँ तक आ ही गये है तो चल, मिल ले अपने भैया से...वरना वो मुझे हॉस्टिल मे मारेगा..."

"नो सर, मुझे बहुत डर लग रहा है, कहीं वो मेरे घर मे कॉल ना कर दे..."परेशानी वाली एक्सप्रेशन अपने फेस पर लाते हुए आराधना बोली...

"मेरे साथ रहने का यही तो फ़ायदा है कि कोई खबर घर तक नही पहुँचेगी...तू मुझसे चिपक कर चल,बाकी मैं देख लूँगा..."
"लेकिन सर, वो..."
"अरे तू टेन्षन कैकु लेती है, हॉस्टिल मे मैं उसका पैर पकड़ कर माफी माँग लूँगा कि, वो तेरे घर कॉल ना करे...अब चिपक"
"नही सर..."
"चिपक नही तो मैं खुद तेरे घर कॉल करूँगा..."
अब आराधना बुरी तरह फँस चुकी थी उसके लिए एक तरफ मेरे रूप मे कुआ था तो दूसरी तरफ कंघी चोर के रूप मे खाई थी...लेकिन मैने उसे कुए मे कूदने के लिए कहा, यानी की उसने उस वक़्त मेरी बात मानी और मुझसे सात कर खड़ी हो गयी. 

हमारे कल्लू भाई साहब की हालत इस वक़्त देखते ही बनती थी, बेचारे की हालत ऐसी थी, जैसे किसी ने उनकी लुल्ली काट ली हो और नंगी लड़की सामने रख कर बोला गया हो कि"दम है तो चोद के दिखा..."

मुझे और आराधना को साथ देखकर कालीचरण का पारा तेज़ी से उपर चढ़ा और उसने आते ही आराधना को खींचकर मुझसे अलग किया....

"प्रिय, तुम सामने वाली सीढ़ी से नीचे निकल जाओ...मैं बाद मे मिलूँगा..."
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आराधना के वहाँ से जाने तक मैं चुप रहा और जैसे ही वो नीचे गयी मैने घूम कर एक झापड़ कालीचरण के गाल मे दे मारा....कल्लू कंघी चोर, इस वक़्त खुन्नस मे था, इसलिए जवाबी हमला उसने भी मुझपर करना चाहा लेकिन मैने तब तक उसके गाल पर एक और तमाचा जड़ दिया...जिससे वो अबकी बार पूरी तरह हिल गया....

"रुक म्सी, अभी बताता हूँ तुझे..."बोलते हुए कल्लू अपनी क्लास की तरफ भागा

"रुक बीसी,...गली किसको देता है"कल्लू के पीछे जाते हुए मैने एक लात उसे मारी और वो अपनी क्लास की गेट से टकरा कर अंदर गिर गया और मुझे उल्टा सीधा बकने लगा....

कंप्यूटर साइन्स की क्लास मे इस वक़्त बहुत से लड़के और लड़किया, जो टिफिन लाते थे,वो लंच कर रहे थे और मेरे यूँ जोरदार एंट्री से उनका खाना रुक गया...

अब जब कल्लू अपने क्लास मे था और क्लास मे लड़किया भी थी तो वो मुझे अब गालियाँ नही दे रहा था, बस तरह-तरह की धमकी दे रहा था की "वो मुझे देख लेगा...अपने गाँव से गुंडे बुलवाकर मेरी हड्डी-हड्डी तुडवा देगा,..वगेरह-वगेरह..."

"तुझे पता है, मैं गाल और सर को ज़्यादा टारगेट क्यूँ करता हूँ..."नीचे गिरे हुए कल्लू को एक झापड़ मारकर मैं बोला"ताकि लोग देख सके तूने मार खाई है.बेटा औकात मे आजा, वरना फाड़ के रख दूँगा और एक बात बता बे तूने मुझे समझ क्या रखा है, जो मेरे सामने अपनी अकड़ दिखाते रहता है. अब दिखा अपनी अकड़...और क्या बोला तूने कि तू मेरी एक-एक हड्डी तुडवा देगा...अबे बाकलोल, अपने क्लास मे तो तू मेरा कुच्छ उखाड़ नही पाया, फिर बाहर क्या कर लेगा..."

बोलते हुए मैं अचानक रुक गया, क्यूंकी मुझे याद आया कि जिस क्लास मे मैं हूँ वो क्लास एश की है और तब से मैं कल्लू के सीने पर बैठकर लंबी-लंबी दिए जा रहा हूँ...मैं तुरंत खड़ा हुआ और पूरी क्लास की तरफ देखा...

"अच्छा हुआ, एश नही है...वरना खमखा इज़्ज़त डाउन हो जाती, वैसे भी पहले से इतनी डाउन है..."क्लास की लड़कियो की तरफ देख कर मैने सोचा और गॉगल जेब से निकालकर लगाते हुए कालिए से बोला"सुधर जा, वरना यहाँ तो कम धोया है वरना हॉस्टिल मे इतना धोउंगा कि काले से गोरा हो जाएगा...गुडबाइ.."इसी के साथ मैने कल्लू को एक फ्लाइयिंग किस दी और वहाँ से जाने लगा...लेकिन तभी मुझे याद आया कि दिव्या भी क्लास रूम मे है और एश को वो आजकल परेशान भी कर रही है...इसलिए मैं तुरंत पीछे पलटा और खड़े हो चुके कल्लू को वापस गिराकर कहा"कुच्छ तो रेस्पेक्ट कर बे मेरी, जब तक यहाँ से ना जाऊ खड़ा मत हो...मेरी इज़्ज़त करना सीख जा, वरना गौतम के माफ़िक़ तुझे भी कोमा मे भेज दूँगा..."
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सीएस की क्लास से बाहर निकलते वक़्त मैने दिव्या की तरफ तो नही देखा लेकिन इतना ज़रूर जान गया था कि मेरी लास्ट लाइन सुनकर उसकी अंदर ही अंदर जली होगी...
अब मेरा इरादा चुप-चाप एक अच्छे बच्चे की तरह वहाँ से निकल जाने का था लेकिन गेट पर एश मुझे खड़ी हुई दिखाई दी और उसके हाव-भाव देखकर मुझे अंदाज़ा हो गया कि उसने मेरी आख़िरी लाइन सुन ली है...लेकिन अभी अपुन फुल रोल मे था और गॉगल भी लगाए हुए था, इसलिए सीधे एश के सामने जाकर सीना तानकर खड़ा हो गया...
"मेडम जी, रास्ता देंगी क्या...मैं ग़लती से दूसरी क्लास मे आ गया हूँ..."
"व्हाई नोट..."बोलते हुए एश सामने से हट गयी...
"देखो तो कितना प्यार करती है मुझे, मेरी कोई बात नही टालती, लव यू टू, बेब्स..."एश को देखकर मैने खुद से कहा और सीएस की क्लास से बाहर आया...
एश की क्लास से मैं कुच्छ कदम ही दूर आया था कि मुझे अचानक कुच्छ याद आया और वापस पलट कर दौड़ते हुए मैने ठीक वैसा ही ड्रिफ्ट मारकर सीएस, फोर्त एअर की क्लास मे घुसा, जैसा ड्रिफ्ट मैने आज होद की क्लास मे मारा था...

कल्लू ज़मीन से उठकर अपनी जगह चुप-चाप बैठा हुआ था और एश भी एक जगह अकेले बैठी हुई थी...कल्लू को इस वक़्त उसके क्लास के लड़को ने घेर रखा था और मुझे बुरा-भला कहकर कल्लू को दिलासा दे रहे थे....मैने सीएस क्लास के गेट को एक हाथ से पकड़ा और कल्लू को आवाज़ दी...
"क्यूँ बे कालीचरण, क्या बोला था मैने कि जब तक मैं ना जाऊ, यही लेटे रहना खड़ा क्यूँ हो गया...चल सामने आकर वापस लेट जा..."

"ये क्या दादागिरी है..."कालिए के दोस्तो मे से एक ने मुझे देखकर कहा...

"यदि उससे इतना ही लगाव है तो तू आकर सामने लेट...नही तो उसे सामने भेज..."

मेरी बात सुनकर कालिए के सारे दोस्त पीछे हो गये और फिर से कालिया मार ना खाए, इस डर से वो अपनी जगह से उठा और सामने आकर ज़मीन पर लेट गया....

"थोड़ा तो रेस्पेक्ट देना सीख बे कंघी चोर...कितना प्यार से समझाया था कि जब तक मैं यहाँ से चला ना जाऊ, उठना मत...यही बात मैं तुझपर हाथ उठाकर भी तो समझा सकता था ना लेकिन मैने तुझपर हाथ उठाया क्या ? नही उठाया ना...अरे पगले, भाई है तू मेरा...आइ लव यू, रे..."बोलते हुए मैं सीएस के बाकी स्टूडेंट्स की तरफ नज़र घुमाई...

"तुम उठो वहाँ से..."एश को ना जाने क्या जोश चढ़ा जो वो अपनी जगह से उठकर मेरे मामले मे दाखिल हुई....उसने कालीचरण को उठाया और मुझे देखकर बोली"अरमान, दिस ईज़ टू बॅड...प्लीज़ डॉन'ट डू दिस..."

"एक घंटे मेरे साथ आंकरिंग करके तू क्या सोचती है कि तू मुझपर राज़ करेगी...अरे हम पर तो वो भी राज़ नही कर पाए, जो 21 साल से पाल रहे है और तू, सुन बे कालिए...यदि तूने एक कदम भी आगे बढ़ाया तो ये डेस्क दिख रहा है ना, सीधे उठाकर, सर मे दे मारूँगा...चल वापस लेट..."

"डिज़्गस्टिंग..."बोलते हुए एश, वहाँ से अपनी जगह वापस चली गयी और कालिया वापस ज़मीन पर लेट गया...
"वैसे मैं वापस एक लड़के से मिलने आया था, नाम है आवधेस गिलहारे...वो है क्या क्लास मे..."

"मैं हूँ..."एक लड़के ने अपना हाथ खड़ा किया 

"आजा पगले, तू तो भाई है मेरा...सुलभ ने बुलाया है"
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"तुम्हे लगता है कि, तुम यूँ ही हमारे क्लास मे गुंडा-गर्दि करके चले जाओगे और हम कुच्छ नही करेंगे...कल मेरे डॅड, तुमसे बात करेंगे..."इतनी देर से दिव्या जो अपने जज़्बात दबा कर बैठी थी, वो फाइनली खड़े होकर मुझे धमकाते हुए बोली....

"ओक बहन...लेकिन खड़े होकर बोलने की क्या ज़रूरत है, मैं कोई टीचर थोड़े ही हूँ,जो इतना रेस्पेक्ट दे रही है...माना कि तू मुझसे डरती है,लेकिन ऐसा भी क्या है...चल बैठ जा..."

"अरमान, तू तो अब गया काम से...थर्ड सेमेस्टर की धुलाई भूल गया लगता है... "

दिव्या की बात सुनकर मैं चुप रहा, जिससे उसकी हिम्मत और बढ़ी और वो ज़ाबर-पेली हँसते हुए बोली"डर गया क्या डरपोक...दम है तो अब बोल.."

"देखो मल्लू आंटी, आख़िरी बार आपके पिता-श्री ने धोखे से पकड़ा था यदि मेरी तरह मर्द होते तो फेस टू फेस फाइट करते, दम है तो भेज देना हॉस्टिल,आंड फॉर युवर काइंड इन्फर्मेशन, अपने झातेले बाप से कहना कि 2000 आदमी लेकर आए, क्यूंकी 500 तो हम हॉस्टिल मे रहते है और हम सबकी इतनी औकात तो है ही कि अपने-अपने सोर्स लगाकर 3-3 लड़के एक्सट्रा कहीं से बुला सके..."बड़े ही शालीन ढंग से मैं बोला,तब तक अवधेश भी मेरे पास आ चुका था...मैने आगे कहा"और आख़िरी लाइन तूने क्या कही कि मैं डर गया...हुह. तो एक अंदर की बात बताऊ,मैं वाकाई मे एक मिनिट पहले डर गया था लेकिन फिर ख़याल आया कि डरने मे कोई बुराई नही है .वैसे भी डार्क नाइट राइज़स मे बोला गया है कि डरना ज़रूरी है..., चल बे अवधेश, हमारे जापान जाने की प्लॅनिंग पर कुच्छ सोच-विचार करना है "

"दुनिया हसीनो का मेला...मेले मे ये दिल अकेला...बाजू हट बे लवडे.."मैं गाने का सुर ले ही रहा था कि सामने कॉलेज का कोई लौंडा आ गया और मुझे रुकना पड़ा.....

"तुझे फालतू के लफडे मे फँसना अच्छा लगता है क्या..."आवधेस ने मुझे सामने आए उस लड़के से दूर ले जाते हुए कहा...
"अबे तू डर कैकु रेला है...अपुन है ना..."
"चल ओके, अब ये बोल कि तुझे मुझसे क्या काम है..."
"सुना है, एश और दिव्या की लड़ाई हो गयी है...जितना पता है, सब बोल डाल..."
"पूरी बात तो अपने को नही मालूम, लेकिन इतना ज़रूर मालूम है कि, झगड़े की वजह तू था..."
"मैं..." दिव्या और एश के झगड़े की वजह मैं हूँ सुनकर मैं चौंका...

"और नही तो क्या, दिव्या का कहना था कि यदि अरमान,एश का आंकरिंग पार्ट्नर है तो फिर एश को छत्रपाल सर से बात करके पार्ट्नर चेंज करने को कहना चाहिए, या फिर आंकरिंग छोड़ देनी चाहिए...लेकिन एश का कहना था कि वो, उसकी बात क्यूँ माने...बस फिर क्या,दोनो एक जैसी ही घमंडी थी, आड़ गयी अपनी बात पर...नतीज़ा एक मजेदार एंटरटेनमेंट के रूप मे सबके सामने आया....तू उस दिन क्लास मे रहता तो बहुत मज़ा आता...."
"और तुझे ये सब कैसे पता चला..."
"मेरी गर्लफ्रेंड ने बताया..."
"साला...इसने भी माल पटा कर रखी है, इन लड़कियो को भला मैं क्यूँ पसंद नही आता, ये फली मुझे प्रपोज़ क्यूँ नही करती..."सोचते हुए मैने आवधेस से कहा"और तेरी वो गर्लफ्रेंड,जिसने तुझे इतना सब कुच्छ बताया, वो ज़रूर दिव्या के साइड होगी..."
"करेक्ट बोला, ये तुझे किसने बताया..."
"तुझे क्या लगता है, तेरे पास बस गर्ल फ्रेंड है...मैने हर ब्रांच के हर क्लास मे एक माल पटा रखी है, उन्ही मे से एक ने बताया..."
"तो अब मैं चलूं..."
"चल निकल...थॅंक्स.."
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आवधेस के जाने के बाद मैं कुच्छ देर वही खड़ा रहा और दिव्या-एश के झगड़े का जो कॉंप्लेक्स ईक्वेशन था, उसे सॉल्व करने लगा...ये झगड़ा स्टोरी मे एक नया ट्विस्ट था, क्यूंकी एश ने मेरे साथ आंकरिंग करने के लिए दिव्या से झगड़ा किया था, यानी कि....यानी कि..., हो ना हो, ये लड़की मुझपर फिदा ज़रूर है, उपर से जब मेरे सिक्स्त सेन्स ने इस पर मुन्हर लगा दी तो मैं और भी खुश हुआ...दिल किया की थर्ड फ्लोर से ही नीचे कूद जाऊ या फिर अपना शर्ट फाड़ डालु और अपना सर पीछे वाली दीवार पर दे मारू....
"कल एश से ये ज़रूर पुछुन्गा की उसकी, दिव्या से लड़ाई क्यूँ हुई थी, फिर देखता हूँ कि वो क्या वजह बताती है...एसस्स...एसस्स...कल्लू तेरी *** की चूत, तेरी *** का भोसड़ा..."
.
कॉलेज के बाद मैं हॉस्टिल के लिए जब रवाना हुआ तो मेरे दिमाग़ से ये बात निकल चुकी थी कि मैने आज कालिए को कॉलेज मे उसके क्लास वालो के सामने चोदा है और वैसे भी जब एश की तरफ से पॉजिटिव रेस्पोन्स आएगा तो उस चूतिए को कौन याद करेगा...लेकिन मुझे क्या पता था कि वो साला कालिया हॉस्टिल मे लड़को को इकट्ठा करके पंचायत कर रहा है....इसका पता तो मुझे हॉस्टिल जाने पर ही लगा,जब वॉर्डन ने मेरे हॉस्टिल मे घुसते ही मुझे अपने रूम मे बुलाया....
"तूने कल्लू को क्यूँ मारा..."जब मैं वॉर्डन के पीछे-पीछे उसके उसके रूम की तरफ जा रहा था तो उन्होने पुछा...
"वो कुच्छ ज़्यादा ही उड़ रहा था, बैठा दिया साले को...छोटी-मोटी बात है, आप टेन्षन मत लो..."

"टेन्षन क्यूँ ना लूँ, वो आज लंच के बाद ही कॉलेज से अपना बोरिया-बिस्तर लेकर हॉस्टिल आ गया और मुझसे बोला कि प्रिन्सिपल के पास तेरी कंप्लेंट करने जा रहा है..."
"उसकी तो...है कहाँ वो इस वक़्त..."
"मेरे रूम मे बैठा रो रहा है..."
"अभी चोदता हूँ म्सी को..."
कल्लू की हरकत जानकार मेरे बॉडी का टेंपरेचर तुरंत मेरे रिक्रिस्टलिज़ेशन टेंपरेचर को पार कर गया और मैं वॉर्डन के रूम की तरफ सरपट भागा...

"कहा है बीसी, कालिया..."वॉर्डन के रूम मे जाकर मैने वहाँ बैठे लौन्डो की तरफ देखा तो मुझे कालिया वही लड़को के बीच बैठा हुआ दिखाई दिया...सब के सब लौन्डे, पीसी मे कोई मूवी देख रहे थे...मैं सीधे कल्लू के पास गया और उसके थोबडे मे एक मुक्का मारा...

"क्यूँ बे, प्रिन्सिपल के पास जा रहा था ना, अब जा..."

"देखो सर, ये मुझे फिर मार रहा है..."रोते हुए कालिए ने वॉर्डन को आवाज़ लगाई...जिसके बाद वॉर्डन ने मुझे पकड़ कर पीछे किया...

"अपने दिमाग़ का इलाज़ करवा अरमान...मैं यहाँ पर हूँ ना, कुच्छ तो इज़्ज़त कर मेरी..."

"आपकी तो मैं गांद फाड़ इज़्ज़त करता हूँ सर, लेकिन ये कालिया अपने आप को समझता क्या है...इसे समझाओ कि जंगल मे रह रहा है तो शेर की हुक़ूमत स्वीकारणी पड़ेगी नही तो जान से जाएगा...."

"तू अभी यहाँ से बाहर जा,.."

"मैं क्यूँ जाऊ, इसे भेजो बाहर..."

"मैने कहा ना कि बाहर जा...जाता है या नही..."
अब वॉर्डन से संबंध बिगड़े उससे अच्छा तो यही था कि मैं वहाँ से बाहर ही चला जाऊ...इसलिए मैने गुस्से से फफकती अपनी आँखो से कालिए को एक बार घूर कर देखा और वहाँ से सीधे अपने रूम की तरफ बढ़ा....

"क्या हुआ बे, अरमान लंड..ऐसे गान्ड जैसी शक्ल क्यूँ बना रखी है..."मेरे रूम मे पहुचते ही अरुण ने कॉमेंट पास किया...

"तेरी गान्ड के नीचे जो आईना तूने दबा रखा है ना, उसे अलग कर दे...वरना यदि आईना टूटा तो तुझे तोड़ दूँगा..."

"तभी...तभी मैं सोचु कि साला मेरे पिछवाड़े मे चुभ क्या रहा है..."अपने नीचे से आईना हटाकर साइड मे रखते हुए अरुण ने कहा"वैसे तूने बताया नही कि तेरी इस गान्ड जैसी शक्ल का राज़ क्या है..."
"वो म्सी कालिया...मेरी कंप्लेंट प्रिन्सिपल से करने जा रहा था आज...वो तो वॉर्डन ने रोक लिया, वरना शहीद कर देता उसको आज..."
"ऐसा क्या...चल फिर ठोक के आते है म्सी को..."
"रहने दे, वॉर्डन रोक लेगा..."
"वॉर्डन की *** की चूत...उसको भी मारेंगे..."
"धीरे बोल बे चूतिए, कही वो सुन ना ले..."
"अरे सुन लेगा तो क्या उखाड़ लेगा... चोदते है"
"कुच्छ खास नही करेगा,बस तेरे घर फोन करेगा बस..."
"फिर तो रहने दे...तेरे रास्ते अलग और मेरे रास्ते अलग...मैं तो तुझे जानता तक नही...मैं तो तुझे पहली बार देख रहा हूँ...कौन हो भैया आप और खाना खाया या फिर मेरा आँड खाने का विचार है..."

अरुण को मैं जवाब देता उससे पहले ही मेरे जेब मे रखा मोबाइल वाइब्रट होने लगा...मैने मोबाइल निकाला और स्क्रीन पर नज़र डाली..कॉल बड़े भैया की थी...

वैसे तो मैने स्क्रीन पर नज़र डाली थी लेकिन अरुण को जवाब देने की उत्तेजना के कारण मैने विपिन भैया का नाम देख कर भी जैसे अनदेखा कर गया...

"क्यूँ रे फोन क्यूँ नही करता तू..."मेरे कॉल रिसीव करते ही विपिन भैया मुझपर टूट पड़े... 

लेकिन मैं इस वक़्त आवेग मे था, इसलिए जैसे मैं नॉर्मली लड़को से बात करता हूँ,वैसे ही विपिन भैया से भी बात की ...मैं बोला...
"नही करूँगा कॉल, क्या कर लेगा बे..."

"क्या कर लेगा बे...? तू अरमान ही बोल रहा है ना..."

"तेरी तो...बड़े भैया..."झटका खाते हुए मैं जैसे होश मे आया और फिर अपनी आवाज़ बदल कर बोला"नही, मैं अरमान नही...अरमान का दोस्त बोल रहा हूँ, आप कौन..."

"मैं उसका बड़ा भाई बोल रहा हूँ, अरमान कहाँ है..."

"इधर ही है, एक मिनिट रुकिये...बुलाता हूँ उसको..."मोबाइल कान से दूर करके मैने उसी बदली हुई आवाज़ मे अपना ही नामे दो-तीन बार पुकारा और साथ मे ये भी कहा कि"कितनी पढ़ाई करेगा अरमान...सुबह से तो पढ़ रहा है "
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"हेलो, भैया...राम राम, पाई लागू..."मोबाइल को अपने कान से सटाते हुए मैं बोला..
"क्या कर रहा था..."
"आआअहह, "जमहाई मारने की आक्टिंग करते हुए मैं बोला"पढ़ाई कर रहा था एक हफ्ते बाद क्लास टेस्ट है ना, इसलिए...आप सूनाओ, सब बढ़िया..."
"पहले तो ये बता कि तेरा मोबाइल किसके हाथ मे था और तू घर मे कॉल क्यूँ नही करता...."
"मोबाइल मेरा.... अरुण के हाथ मे था और कल ही तो घर मे कॉल किया था...मम्मी-पापा दोनो से एक घंटे तक बात की थी..."
"लेकिन मम्मी ने तो कहा कि अरमान कॉल ही नही कर..."
"अरे कहाँ लगे हो भैया,आप भी इन बातो मे...मम्मी तो ऐसे ही बस बोल देती है की अरमान कॉल नही करता..."
"मैं तीन दिन से घर मे हूँ और मुझे ही पढ़ा रहा है..."
"अब तो फसे बेटा अरमान..."मन मे सोचते हुए मैने कहा...अब मैने यहाँ से यू-टर्न लेते हुए टॉपिक ही बदला और बोला"विजयवाड़ा से वापस कब आए....छुट्टी मिली है क्या..."
"वैसा ही समझ..."
"अरे वाह, इसी खुशी मे दो-तीन हज़ार रुपये मेरे अकाउंट मे डलवा दो..."
"चुप कर बे..."
इसके बाद जो बात मुझे पता चली वो ये की विपिन भैया की शादी तय होने वाली है और नेक्स्ट वीक विपिन भैया लड़की देखने जा रहे है...यहाँ तक तो फिर भी सब ठीक था, लेकिन मामला तब बिगड़ा जब मुझे पता चला कि जिस लड़की को विपिन भैया देखने जा रहे है वो कोई और नही, बल्कि पांडे जी की लड़की है, जिसने बचपन से मेरा बेड़ा गर्ग कर रखा है....बचपन से लेकर अब तक उसके कारण मुझे घरवाले घसीटते रहे कि पढ़ बेटा पढ़...पांडे जी की बेटी के फालना सब्जेक्ट मे फालना नंबर है, पांडे जी की बेटी ने अवॉर्ड जीता, पांडे जी की बेटी ने ये किया, पांडे जी की बेटी ने वो किया....वगेरह-वगेरह...मतलब कि जिस पांडे जी और उनकी बेटी ने मुझे आज तक इतना परेशान किया, उन्हे अब ज़िंदगी भर झेलना पड़ेगा....मैने कुच्छ देर तक विपिन भैया से कोई बात नही की और आगे अनॅलिसिस करने लगा...विपिन भैया 26 साल के और वो पांडे जी की लौंडिया 22 साल की...अरमान बेटा, अब उसको लौंडिया नही भाभी बोलने की आदत डाल लो....

"क्या हुआ...चुप क्यूँ है..."

"कॅन्सल कर दो भैया...आप जैसे स्मार्ट, इंटेलिजेंट, हॅंडसम...लड़के के सामने पांडे जी की लड़की कही नही टिकती....और यदि आप मना करने मे शर्मा रहे हो तो मुझे कहो,मैं कॉल करके मना कर देता हूँ..."

"चुप कर और सनडे को सीधे घर पहुच जाना...."

"अब नही मान रहे तो आपकी मर्ज़ी, मेरा क्या...लेकिन फिर बाद मे मत कहना की मैने आगाह नही किया था वैसे भैया,कुच्छ रुपये उधारी दोगे क्या, अगले महीने की एक तारीख को ब्याज के साथ वापस कर दूँगा "

"एक बात बता अरमान, तू गाँधी को मानता है या शहीद भगत सिंग को...."उसी रात, दारू की बोतल के ढक्कन को दाँत से खोलते हुए अरुण ने पुछा....

"नमस्कार बड़े भाइयो..."पांडे जी अपने ने सर पर पट्टी के शगुन के साथ हमारे रूम मे प्रवेश किया...
राजश्री पांडे, उस रात ड्राइविंग कर रहा था, इसलिए हमे जहाँ छोटी-मोटी खरोचे आई थी,वही पांडे जी का हाल ये था कि वो अब भी लंगड़ा-लंगड़ा कर चलता था...पांडे जी के बाए हाथ मे प्लास्टर भी लग चुका था, यानी की पांडे को कयि हफ्ते तक अपने सिर्फ़ एक हाथ से काम चलाना था....

"म्सी, छु मत दारू की बोतल...जिस हाथ से गान्ड धोता है, उसी हाथ से इतनी पवित्र चीज़ को छुने का दुस-साहस कर रहा है तू ....हाथ हटा अपना..."राजश्री पांडे ने जब बोतल की तरफ हाथ बढ़ाया तो अरुण बोल पड़ा....दर-असल, अरुण चीखा...
"मैं तेरा सवाल नही समझा...एक बार फिर से दोहरा तो..."मैने कहा...
"अबे मैने तुझसे पुछा कि तू गाँधी को मानता है या शहीद भगत सिंग को...."
अरुण की इस लाइन से ही मैं समझ गया कि वो पक्के मे भगत सिंग का अनुसरण करने वाला मानव है, क्यूंकी उसने भगत सिंग का नाम पड़े आदर से लिया था और वही महात्मा गाँधी के लिए उसने सिर्फ़ 'गाँधी' वर्ड उसे किया था... क्यूँ हूँ मैं इतना स्मार्ट
Reply
12-15-2018, 12:37 AM,
RE: Porn Hindi Kahani दिल दोस्ती और दारू
अरुण भगत सिंग को मानता है, ये मुझे अभी पता चला था लेकिन सौरभ गाँधी जी का अनुयायी था,ये मुझे बहुत पहले से मालूम था और इस समय किसी एक का पक्षा लेना मतलब एक लंबी बहस को आमंत्रण देना था...यक़ीनन अंत मे जीत तो मेरी होती, लेकिन अब साला कौन अपनी एनर्जी खपाए...ये सोचकर मैने अरुण से थोड़ा समय माँगा और फिर थोड़े समय के बाद बोला....
"मैं....मैं....दोनो को मानता हूँ..."
"ऐसा थोड़े ही होता है...या तो आस्तिक बनो या नास्तिक...ये कौन सी बात हुई कि तू आस्तिक भी है और नास्तिक भी..."सौरभ ने उंगली की और जिस बहस को मैं दबाना चाहता था, उस बहस का ओपनिंग रिब्बन काटते हुए सौरभ ने मुझसे पुछा...

मैने फिर थोड़ा समय माँगा और अपने 1400 ग्राम के दिमाग़ को दूसो दिशाओ मे दौड़ने लगा और जब मेरे हाथ सौरभ के उस सवाल का एक लॉजिकल जवाब आया तो मैं बोला...
"हे, मूर्ख मानव...मैं गाँधी जी और भगत सिंग दोनो को मानता हूँ...इसे मैं एक-एक एग्ज़ॅंपल से समझता हूँ....मान लो कि मैं अपने टकले प्रिन्सिपल के कॅबिन मे हूँ और उसने मुझे किसी बात पर एक थप्पड़ मार दिया, तब मैं गाँधी जी के सिद्धांतो का पलान करते हुए अपना दूसरा गाल आगे कर दूँगा.....

लेकिन अब सिचुयेशन मे थोड़ा चेंजस लाओ और ये मान लो कि मेरे सामने गौतम खड़ा है और उसने मुझे एक थप्पड़ मारा है, तब मैं भगत सिंग के अनुसार उसकी माँ -बहन एक कर दूँगा...."

"वाआहह....क्या एग्ज़ॅंपल ठोका है..."मेरा हाथ पकड़ते हुए राजश्री पांडे बोला...

"हाथ हटा बे मदरजात...जिस हाथ से गान्ड धोता है, उसी हाथ से मुझे छु रहा है..."
.
अगले दिन मैं ऑडिटोरियम मे अकेले बैठा हुआ था, क्यूंकी एश ने सुबह-सुबह मेरे मोबाइल पर मेस्सेज भेज दिया था कि वो आज नही आने वाली...मैं एश को फोन करके ना आने का रीज़न ज़रूर पुछ्ता लेकिन मेरे मोबाइल मे बॅलेन्स नही था, इसलिए मैं एश को फोन नही कर पाया 

अब जबकि मुझे मालूम था की एश आज कॉलेज नही आने वाली है तो मैने सोचा कि क्यूँ ना आज आराधना के साथ बैठकर मेरे फ्यूचर प्लान पर काम किया जाए...इसलिए मैं आगे बैठा, लेकिन बाकी सबसे दूर और जब आराधना ऑडिटोरियम मे घुसी तो मैने उसे इशारे से अपने पास बुलाया....
"गुड मॉर्निंग अरमान..."

"अरमान बीसी दो दिन मे ही अरमान सर से अरमान पर आ गयी..."आराधना को देखते हुए मैने सोचा और फिर बोला"गुड मॉर्निंग माँ..."

"टू फन्नी, ना..."

"बैठिए, खड़ी क्यूँ है..."

"ओके..."अपना पिछवाड़ा सीट से टिककर आराधना ने मेरी तरफ देखते हुए कहा"अच्छा सुनो अरमान, तुम्हारे हॉस्टिल मे जो मेरा दूर का भाई रहता है ना...उसे कहना की आज शाम को कॉलेज के बाद मुझसे मिल ले. मेरे घर से कल मेरे पापा आए थे, इसलिए उसका भी कुच्छ समान है..."

"अबे ये तो हद ही हो गयी, मैं कुच्छ बोल नही रहा हूँ इसका मतलब ये थोड़ी ही हुआ कि तू मेरे कान मे अरमान-अरमान चिल्लाएगी...माना कि मुझे तुझसे बहुत ज़्यादा प्यार है लेकिन प्यार अपनी जगह और इज़्ज़त अपनी जगह...."
"सॉरी, अरमान भैया..."

"भैया...तेरी तो...भैया किसको बोला...भैया होगा तेरा पापा, तेरी मम्मी, तेरी बहन....तेरा भाई..."

"दिल पे क्यूँ ले रहे हो सर...वैसे ई फील सो एरॉटिक..."

"बीसी, इसे क्या हो गया है....ज़रूर किसी ने इसकी चूत मे उंगली की है कल रात, जो ऐसे अश्लील शब्दो का प्रयोग कर रही है..."आराधना का ऐसा रंग-रूप देखकर मेरा रंग-रूप उड़ गया, वैसे तो क़ायदे से मुझे उसी वक़्त आराधना का दूध दबा देना चाहिए था, लेकिन मैं एक शरीफ लड़का था,इसलिए मैने वैसा नही किया....मैं बोला

"कितनी अभद्र हरकते कर रही है तू आराधना...मैं एक लड़का होकर भी ऐसा नही कहता और तू...तू....कुच्छ तो शरम कर.."

"मज़ाक कर रही थी, आपने तो सीरियस्ली ही ले लिया...वैसे आपकी थोड़ी मदद चाहिए..."

"ऐसा भी कोई मज़ाक करता है क्या, मैं सच मे एरॉटिक फील करने लगा था...चल बोल क्या हेल्प चाहिए..."

"मुझे सबके सामने खड़े होकर बोलने मे हेसिटेशन होती है...मैने छत्रपाल सर के बताए हुए सारे टिप्स यूज़ किए लेकिन डर और हेसिटेशन जाने का नाम ही नही ले रहा..."

"मूर्ख है छत्रु...वैसे उसकी टिप्स क्या थी "

"उन्होने कहा कि स्टेज पर जाने के बाद ऐसा फील करो जैसे यहाँ तुम्हारे सामने कोई नही है...मैने ट्राइ किया लेकिन कुच्छ खास काम नही बना..."

"चूतिया है फला...कुच्छ भी बोलते रहता है...तू एक काम कर, अगली बार जब भी स्टेज पर जाए तो ये सोचना कि तेरे सामने भूत-प्रेत बैठे है .यदि तूने एक बार उन भूत-प्रेत के सामने बोल दिया तो फिर कभी भी, कही भी डर नही लगेगा..."बोलते हुए मैं पीछे मुड़ा तो ये देखकर दंग रह गया कि एश ठीक उसी जगह पर बैठी है, जहाँ अक्सर वो बैठा करती थी....

पहले-पहल तो मुझे लगा कि ये एश का मेरे मन द्वारा बनाया गया सिर्फ़ एक प्रतिबिंब है...क्यूंकी मैने फ़िल्मो मे अक्सर देखा है कि प्यार करने वालो को अक्सर ऐसे अपने प्रेमी/प्रेमिकाओ के प्रतिबिंब दिखाई देते है....

"ये एश हो ही नही सकती, उसने तो मुझे मेस्सेज करके कहा था कि वो आज नही आएगी...ये ज़रूर एश के लिए मेरा प्यार है "
लेकिन जब एश के उस प्रतिबिंब ने मेरी तरफ गुस्से से देखा तो मेरा माथा ठनका और मैने आराधना को शाम को मिलने का कहकर, एश के प्रतिबिंब की तरफ बढ़ा....

वहाँ पहूचकर मैने अपनी एक उंगली धीरे-धीरे एश की तरफ बढ़ाई और उसके हाथ को टच किया, जिसके बाद एश मुझे घूर कर देखने लगी...

"एक और बार कन्फर्म कर लेता हूँ....."बोलते हुए मैने एश के हाथ को छुआ, लेकिन एश गायब नही हुई, जैसा कि फ़िल्मो मे होता है...

"एक आख़िरी बार..."बोलते हुए मैने एश के गाल पर चिकोटी काट दी, क्यूंकी मुझे यकीन था कि ये पक्का एश ना होकर एश की छाया-प्रति है...लेकिन जब एश ने मेरा हाथ पकड़ कर सामने वाली चेयर पर दे मारा तो जैसे मेरा भ्रम टूटा और मैं अपना हाथ सहलाते हुए बोला...
"तू असली है..."
"क्या मतलब..."
"मतलब-वत्लब बाद मे समझाता हूँ, चल पहले खिसक उधर...मुझे भी बैठने दे..."
"अरे खिसक ना..."
"नही...तुम जाओ उस साइड..."
"चल...तू जा..."
"मैं क्यूँ जाउ...मैं पहले आई इसलिए ये जगह मेरी है..."
"यहाँ क्या 'पहले आओ, पहले पाओ' कॉंटेस्ट चल रहा है और ये तू मुझे इतनी देर से घूर क्यूँ रही है...क्या कर लेगी बोल..."
"नॉनसेन्स..."
"बिल्ली...मियाऊ..."
"अरमान ओवर हो रहा है..."
"मयाऊ..मयाऊ..."
"अरमान, दिस ईज़ टू मच..."
"मयाऊ...मयाऊ..मयाऊ...दिस ईज़ थ्री मच..."
हमारे बीच का ये वर्ल्ड वॉर फाइनली ख़त्म हुआ और एश साइड वाली चेयर पर जाकर बैठ गयी....
"पहले ही चली जाती,इतना ड्रामा करने की क्या ज़रूरत थी....मयाऊ.."
"अरमान, मैं बोल रही हूँ...ये कॅट की आवाज़ मत निकालो...नही तो "
"चल शांत हो जा...नही करता अब...और ये बता कि तूने मुझसे झूठ क्यूँ बोला कि तू आज कॉलेज नही आएगी, लेकिन फिर टपक पड़ी"
"हर बात तुम्हे बताना ज़रूरी है क्या..."
"हर बात नही लेकिन ये बात बताना ज़रूरी है..."
"वो मुझे एक फॉर्म भरना था, जिसकी लास्ट डेट आज ही है...."
"फॉर्म...कौन सा फॉर्म..."
"अब ये मैं नही बताने वाली तुमको...ओके.."
"ओके..."
.
गोल्डन ज्व्बिल का फंक्षन नज़दीक था और छत्रपाल हम सबकी तैयारी देखकर खुश भी था .इसलिए वो हमारी तरफ से थोड़ा बेफिकर हो गया था...इसीलिए अब छत्रु कभी-कभी लेट आता था या फिर कभी-कभी आता ही नही था....छत्रपाल की गैरमौज़ूदगी मे भी हम पेलम-पेल प्रॅक्टीस किया करते थे और अब तो लंच तक के सारे पीरियड्स हम ऑडिटोरियम मे प्रॅक्टीस करते हुए बिताते थे....

"अरमान..."एश अचानक से चीखी और उसके इस तरह चीखने से मैं थोड़ा भयभीत हुआ की अब ये मयाऊ क्या करने वाली है...
"चीखती क्यूँ है रे...सामने देख सब इधर ही देख रहे है..."

"मैं भूल गयी थी,लेकिन अब मुझे याद आ गया है..."

"क्या याद आ गया है..."
"यही कि तुम्हारे बर्तडे के दिन मैं पार्किंग मे आधे घंटे तक खड़ी रही, ताकि तुम्हे बर्तडे विश कर सकु...लेकिन तुम नही आए...व्हाई "

"ह्म.....?............. मुझे तो तूने बताया ही नही था कि तू पार्किंग मे मेरा इंतज़ार करेगी...वरना मैं दारू छोड़ कर आता..."बहाना मारते हुए मैने कहा...

"लेकिन मैने तो तुम्हे मेस्सेज किया था..."एसा बोली...अब उसकी सूरत थोड़ा अचंभित टाइप की हो चली थी...
"मेस्सेज...मैं मेस्सेज नही पढ़ता, मेरे पास टाइम नही रहता, बहुत बिज़ी पर्सन हूँ...."

"मतलब तुमने सच मे मेरा मेस्सेज नही पढ़ा,कितने बुरे हो तुम...."

"एक मिनिट...अभी दिखाता हूँ, "बोलते हुए मैने अपना दस हज़ार का मोबाइल जेब से निकाला और चेयर पर तन्कर थोड़ा पीछे हो गया, ताकि एश मेरी करामात ना जान पाए .इसके बाद मैने एश वाले मेस्सेज को 'अनरेड' कर दिया और पहले वाली पोज़िशन मे वापस आया..."एश, ये देखो तुम्हारा मेस्सेज मैने अभी तक नही पढ़ा है..."
"पर तुमने तो रिप्लाइ भी किया था शायद..."
"एक बात बता...तू आज शाम को क्या कर रही है..."
"कुच्छ नही, क्यूँ..."थोड़ा रोमॅंटिक होते हुए एश पुछि...
"तो फिर सीधे डॉक्टर के पास जाकर अपना इलाज़ करवा...बहुत ज़रूरत है तुझे...मयाऊ..."
"अरमान बात को ख़त्म करने का तुम्हारा तरीका बिल्कुल ग़लत है...तुम्हे दूसरो की फीलिंग्स, एमोशन्स का ज़रा सा भी ख़याल नही रहता....इंसान बनो, हैवान नही..."

मैं थोड़ी देर चुप रहा ताकि एश को कुच्छ जवाब दे सकूँ ....थोड़ी देर बाद मैं बोला...
"एक बात बता, दूसरो की एमोशन्स, फीलिंग्स का ख़याल करके क्या मैं उनका आचार डालूँगा और बुराई सबमे होती है,लेकिन इसका मतलब ये तो नही की सब बुरे है...और वैसे भी मुझमे सिर्फ़ एक ही बुराई है..दारू पीना और एक बात बताऊ, ये मुझे बहुत पसंद है....अब चल स्टेज पर, हमारी बारी आ गयी "
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एश चुप चाप उठी और मेरे बगल मे चलते हुए आगे बढ़ने लगी...
"तुमने पुछा था ना कि, वो फॉर्म कौन सा है,जिसके लिए मैं यहाँ आई थी..."
"हां..."
"तुम्हे तोड़ा अजीब लगेगा पर वो एक स्कॉलरशिप फॉर्म था, जिसके ज़रिए मेरी सारी फीस रिटर्न हो जाती है...क्यूंकी मैं सीएस की ब्रांच ओपनर थी..."

"सुनकर वाकाई मे अजीब लगा...तो भर दिया फॉर्म..."

"नही...वो प्रिन्सिपल ऑफीस के बाहर रहने वाले पीयान से मेरी कहा-सुनी हो गयी आते वक़्त....हैसियत एक चपरासी की है और अकड़ ऐसे रहा था, जैसे की वो खुद प्रिन्सिपल हो....मैने भी अच्छी तरह से उसकी इज़्ज़त को सबके सामने नीलाम किया...लेकिन फिर भी वो दो कौड़ी का पीयान नही सुधरा और जब मैने उसे फॉर्म सब्मिट करने के लिए कहा तो मुझसे माफी माँगने के लिए कहने लगा..फूल कही का..."

"एक बात बोलू...इज़्ज़त सबको चाहिए होती है, फिर चाहे वो लाल किले के बाहर हर रोज झाड़ू मारने वाला एक सरकारी नौकर हो या फिर उसी लाल किले पर झंडा फहरहाने वाला हमारा प्राइम मिनिस्टर हो...फिर चाहे वो इस कॉलेज का पीयान हो या प्रिन्सिपल, इज़्ज़त सबको चाहिए होती है....अगली बार जब जाओ तो थोड़े मुस्कुरा कर बात करना...काम हो जाएगा...."
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जब लंच हुआ तो हमारी आंकरिंग की क्लास भंग हुई और सब अपनी-अपनी मंज़िल की तरफ बढ़ने लगे.कोई क्लास की तरफ गया तो कोई कॅंटीन की तरफ...लेकिन मैं, एश के साथ ही चल रहा था....
"अरमान, परसो मेरा बर्तडे है..तुम आओगे..."

"परसो बर्तडे...मतलब पार्टी मतलब एश का घर...गौतम, गौतम का बाप, गौतम की बहन...एश, एश की माँ, एश का बाप, मेरी खून के प्यासे सिटी मे रहने वाले लड़के, गौतम के बाप के गुंडे...और मैं अकेला... "
"क्या हुआ..."
" मेरा वो दोस्त है ना अरुण...कल मैने गुस्से मे उसके दोनो हाथ-पैर तोड़ दिए, मतलब फ्रॅक्चर कर दिए .इसलिए वो हॉस्पिटल मे अड्मिट है और हर रोज कॉलेज के बाद मैं सीधे उसी के पास जाता हूँ...इसलिए मैं तुम्हारी बर्तडे पार्टी मे नही आ पाउन्गा..."

"ओके, नो प्राब्लम"मेरे इस प्रोफेशनल तरीके से बोले गये झूठ पर अरुण के लिए शोक प्रकट करते हुए एश बोली और मैं एक बार फिर पब्लिक को एडा बनाने मे कामयाब हुआ 

वैसे एश का मुझे बर्तडे पार्टी के लिए इन्वाइट करना, वो भी तब जब मेरे सारे दुश्मन वहाँ मौज़ूद हो...ये मुझे दोगलापन लगा लेकिन फिर सोचा हटाओ यार...कौन सा फला कश्मीर मुद्दा है जो वो इतने ख़तरनाक षड्यंत्र बनाएगी...भावनाओ मे बह गयी होगी, मेरी एसा...अभी फिलहाल तो आंकरिंग मे कॉन्सेंट्रेट करते है... 

चॅप्टर-53:

उन दिनो मैं कयि उलझानो मे फँसा हुआ था जिसमे से एक विपिन भैया की शादी थी...बोले तो दिल और दिमाग़ लाख कोशिशो के बावजूद उस लड़की को भाभी मान ही नही रहा था, जिसने बचपन से मेरी ज़िंदगी को किताबों और पर्सेंटेज की तराजू मे तौल कर रख दिया था...यदि मैं कॉलेज मे भी पहले की तरह ब्राइट स्टूडेंट होता तो बात अलग होती, लेकिन सच तो ये था कि पिछले चार सालो मे मैने खुद को इस कदर बर्बाद किया था की एक बार बर्बाद लड़का भी किसी मामले मे मुझसे शरीफ दिखे....

यदि पहले की तरह आज भी मेरे मार्क्स पांडे जी की बिटिया से अधिक होते तो विपिन भैया की शादी के बाद मैं कम से कम अपना सीना तान कर तो चलता लेकिन हक़ीक़त और मेरे सिक्स्त सेन्स मुझे कुच्छ और ही भविष्य दिखा रहे थे...मेरे सिक्स्त सेन्स के अनुसार, जब बड़े भैया की शादी पांडे जी की बेटी से हो जाएगी तो घरवाले उसका एग्ज़ॅंपल दे-दे कर मेरी लेंगे मतलब घोर ताना....उपर से पांडे जी की बेटी खुद भी ताना मारेगी...क्यूंकी उसके लिए मेरे अंदर जो विरोधी भाव है, वैसा ही सेम टू सेम हाव-भाव उसके अंदर भी मेरे लिए होगा...क्यूंकी मेरी तरह उसकी भी लाइफ आज तक पर्सेंटेज के टारजू मे चढ़ चुकी थी और मेरा ऐसा मानना था कि उससे नफ़रत करने का जो जुनून मेरे अंदर है, वैसा जुनून उसके अंदर भी होगा...बोले तो ये एक तरह से महाभारत की शुरुआत होने वाली थी...
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"लाओ, अरमान भाई...मैं पेग बना देता हूँ, अब तो मेरे दोनो हाथ काम करने लगे है..."ज़मीन पर बैठे हुए राजश्री पांडे ने 'सिग्नेचर' की बोतल को पकड़ते हुए कहा....

"बोतल नीचे रख बे...तूने च्छू कैसे दी दारू की बोतल...अपवित्र कर दिया ना इस पवित्र चीज़ को छुकर...अब जा गंगा जल लेकर आ..."

"क्यूँ मेरी ले रहे हो अरमान भाई...अब तो मैने नवीन भाई के बाइक के 2500 भी दे दिए..."
"दर-असल बात वो नही है छोटे..."
"फिर क्या बात है..."
"आक्च्युयली बात ये है की नेपोलियन अंकल साइड दट ' इफ़ यू वॉंट आ थिंग डन वेल, डू इट युवरसेल्फ' .मतलब 'यदि आप चाहते है कि कोई काम अच्छे से हो तो उसे खुद से कीजिए,बजाय इसके की वो काम दूसरे करे...इसलिए पेग मैं ही बनाउन्गा, ताकि जोरदार असर करे..."
"अबे तू ये ग्यान छोड़ना बंद कर और ग्लास भर मेरा..."अपने खाली ग्लास को खाली देखकर अपनी पूरी भडास मुझपर खाली करते हुए अरुण ने कहा और उसके दो मिनिट बाद ही तीनो ग्लास रूम से लबालब हो गये....
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"ये बीसी, पांडे... अरमान के बर्तडे पार्टी के दिन साले ने गान्ड ही फाड़ के रख दी थी...चूतिए ने जाकर बाइक सीधे एस.पी. के गेट मे ठोक दी, वो शुक्र मनाओ कि मेरी शक्ल देख कर एस.पी. ने जाने दिया,वरना आतंकवादी घोसित करके तुम लोगो के गान्ड मे गोलिया भर देता....चलो बे पापा बोलो तुम दोनो मुझे इसी बात पे..."

"तू चुप कर बे लवडे..."अरुण के खाली ग्लास को भरते हुए मैने उससे कहा और जब अरुण की ग्लास फुल हो गयी तो पांडे जी के भी ग्लास की तन्हाई को दूर करते हुए मैने उससे पुछा...

"क्यूँ बे, तेरे हाथ मे प्लास्टर लगा था ये बात तेरे घरवालो को मालूम है क्या...."

"अब क्या बताऊ अरमान भाई...हॉस्पिटल का बिल इतना ज़्यादा था कि पापा जी को कॉल करना पड़ा और तो और दो दिन घर रहकर भी आया हूँ....क्या बतौ अरमान भाई..घर मे पापा ने इतना ख़याल रखा कि शुरू मे तो मैने सोच ही लिया था कि आज के बाद दारू को हाथ तक नही लगाउन्गा...लेकिन फिर जब कंट्रोल नही हुआ तो ये तय किया कि दारू पीने के बाद गाड़ी नही चलाउन्गा..."

"क्यूँ बे बहुत पापा जी के कसीदे बुन रहा है...मम्मी ने पक्का खूब धुनाई की होगी..."एक सिगरेट जला कर उसका धुआ पांडे के मुँह मे फेक्ते हुए अरुण बोला.

अरुण की इस खीचाई पर हम दोनो अपना गला फाड़ कर हँसे...वैसे तो इसमे ज़्यादा कोई हँसने वाली बात नही थी लेकिन फिर भी हम दोनो हँसे, गला फाड़ कर हँसे....

पांडे जी की हम लोग चाहे कितनी भी ले ली, चाहे तो हम मे से कोई उसे सबके सामने झापड़ भी मार दे, वो बुरा नही मानता था लेकिन अरुण के इस छोटे से मज़ाक ने जैसे राजश्री पांडे के दिल मे गहरा वार किया और वो हाथ मे रूम की ग्लास लिए गुस्से से अरुण की तरफ देखने लगा....

"आँख दिखाता है मदरजात...बोल ना, क्या मम्मी ने बहुत मारा..."अरुण ने फिर कहा...

"अरमान भाई...अरुण भाई को समझा लो और बोलो कि मेरी मरी हुई माँ के बारे मे कुच्छ ना कहे..."

"मरी हुई माँ..."मैं और अरुण एक साथ चौके...क्यूंकी हमे आज से पहले मालूम नही था की राजश्री पांडे की माँ नही है....
राजश्री पांडे की माँ नही है, उसके मुँह से ये सुनकर मैं चुप रहा और अरुण ने पांडे जी को सॉरी कहा...

"सॉरी यार, मालूम नही था...वरना बोलता क्या ये सब... और तेरी भी ग़लती, जो आज तक बताया नही...वैसे ये सब हुआ कैसे..."

"ये सब हुआ कैसे..."हाथ मे रूम से भारी ग्लास को नीचे रखते हुए राजश्री पांडे बोला"मेरी माँ को लोग पागल कहते थे,अरमान भाई...कहते थे कि वो हाफ-माइंड थी...लेकिन अरमान भाई..एक बात बताऊ, मुझे कभी ऐसा नही लगा,पता नही लोग किस बुनियाद पर मेरी माँ को पागल कहते थे.जो लोग मेरी माँ की दिमागी हालात का मज़ाक उड़ाते थे या तो उनकी बुनियाद झूठी थी या फिर मैं सब कुछ देखकर भी ना देखने का नाटक करता था...जैसे मेरी माँ कभी-कभी खाने मे शक्कर की जगह नमक मिला देती थी तो कभी नमक की जगह शक्कर...कभी-कभी वो हर घंटे मे मुझसे पूछती कि मैने खाना खा लिया है या नही...कभी-कभी वो सनडे के दिन भी हमारे लिए टिफिन बनाकर रख देती थी...ऐसी कयि आदते मेरी माँ की थी,जिसकी वजह से लोग उन्हे पागल कहते थे. उस वक़्त मैं 12थ मे था, जब ये हादसा हुआ...तब हर दिन की तरह उस दिन भी मैं स्कूल से घर पहुचा और हर दिन की तरह मैने अपनी माँ को आवाज़ दी, लेकिन वो कही नही दिखी...घर का दरवाजा भी खुला हुआ था, इसलिए वो कही दूर भी नही गयी होगी, ऐसा मैने अंदाज़ा लगाया....माँ आस-पास के घर मे किसी के यहाँ गयी होगी, मैने ऐसा सोचा और खुद खाना लेने रसोई मे पहुच गया, लेकिन उस दिन माँ ने खाना भी नही बनाया था, जबकि हर दिन मेरे आने से पहले ही खाना बन जाया करता था....अरमान भाई, उस दिन मालूम चला कि भूख और किस्मत की मार बड़ी ज़ोर से लगती है.
Reply
12-15-2018, 12:37 AM,
RE: Porn Hindi Kahani दिल दोस्ती और दारू
जब तक मुझे सहना था, मैने भूख को सहा...लेकिन जब भूख के मारे पेट दर्द देने लगा तो पानी पीने के लिए उठा, इस बीच माँ पर मुझे गुस्सा भी बहुत आ रहा था कि, ना जाने कहाँ चली गयी...
घर मे पानी भी नही था,इसलिए मैने बाल्टी उठाई और कुए की तरफ बढ़ा और जैसे ही कुए मे बाल्टी डालकर रस्सी नीचे की तभी मेरी नज़र कुए के पानी मे तैरती हुए मेरी माँ की..............."
इतना बोलने के बाद राजश्री पांडे वहाँ से उठकर चल दिया और हम दोनो कभी दरवाजे की तरफ देखते तो कभी खाली ग्लास की तरफ.....हम दोनो बहुत देर तक वैसे ही बैठे रहे,जिस हाल मे राजश्री पांडे हमे छोड़ कर गया था...इस बीच शराब के पूरे नशे के परखच्चे उड़ चुके थे...
"पांडे ने पूरा मज़ा खराब कर दिया बे आलंड, हज़ार रुपये निकाल..एक बोतल और लेकर आता हूँ..."
"चोदु समझा है क्या...आधा तू मिला और आधा मैं मिलाता हूँ..."
"अबे अभी देना...मेरे पास दस हज़ार का नोट है...चेंज कहा से लाऊ..."
"दस हज़ार का नोट "

"अबे मतलब...दस हज़ार का चेक है...कल बॅंक जाउन्गा तो ले लेना...और ये सौरभ कहाँ मरवा रहा है..."

"सौरभ को हटा तू भागकर दारू ला..."
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अरुण से हज़ार का नोट लेकर मैने वॉर्डन की बाइक ली और चल पड़ा वर्ल्ड कप लेने....हाइवे तक तो मैं नॉर्मल बाइक चला रहा था, लेकिन जैसे ही हाइवे पर पहुचा ना जाने मुझ पर कौन सा जुनून सवार हो गया...मेरे हाथ आक्सेलरेटर पर जो नीचे हुए, वो फिर कभी उपर नही हुआ और बाइक की स्पीड पहले 60 पहुचि, फिर 80....

"आज तो बीसी सेंचुरी मारेंगे... "मन मे सोचते हुए मैने फिर से आक्सेलरेटर पर ज़ोर दिया....

अभी 80 किमी अवर की स्पीड को मैं पार ही कर रहा था कि सामने स्कॉर्पियो दिखा, जिसकी डाइरेक्षन वही थी जो मेरी थी और सामने से एक ट्रक आ रहा था....मैने सोचा कि स्कॉर्पियो और ट्रक के बीच पेरबॉलिक कर्व बनाते हुए निकल जाउन्गा...इसलिए मैने आक्सेलरेटर और पेल दिया और झट से स्कॉर्पियो को क्रॉस करके उसके आगे आ गया, लेकिन मेरी हवा तब निकली जब सामने से एक लड़की स्कूटी पर थी जो मेरी तरह ही पेरबॉलिक कर्व बनाने का जुगाड़ जमा रही थी...इस तरह उसने ट्रक को क्रॉस किया और मैने स्कॉर्पियो को...लेकिन इसके बाद हम दोनो एक दूसरे के सामने आ गये...जिस तरह मेरी हवा निकली, वैसी हवा लड़की की भी निकली और उसने आँख बंद करके और आक्सेलरेटर दे दिया....


"बीसी, ठोकेगी क्या..."उस लड़की पर चिल्लाते हुए मैने अचानक ब्रेक मारा और उसके बाद जो दुर्गति हुई, वो मुझे ही मालूम है...अगला ब्रेक मारने के कारण मैं झटका खाकर दूर सड़क पर गिरा और वॉर्डन की बाइक पीछे पता नही कहा गोते लगाती रही....मेरी स्पीड बहुत ज़्यादा थी, इसलिए मैं सिर्फ़ रोड पर नही गिरा बल्कि 360 डिग्री के कयि राउंड भी मैने रोड पर लगाए और जब मैं रुका तब मुझे पता चला कि मैं पेला गया हूँ...

एक तो मैं पहले से ही डरा हुआ था उपर से वहाँ जमा हुई भीड़ ने मुझे और डरा दिया...मैं जैसे तैसे करके उठा तो देखा कि कही कोई निशान नही...इसलिए मैने हेकड़ी मारते हुए खुद से कहा"लवडा, मर्द आदमी हूँ...ये छोटे-मोटे ज़ख़्म तो असर ही नही करते..."

"अबे पागल है क्या, अच्छा हुआ ट्रक रोक दिया वरना साले चढ़ गया होता तुझपर...."जिस ट्रक के चक्कर मे मैं वो पेरबॉलिक कर्व बना रहा था, उस ट्रक का ड्राइवर उतर कर मुझपर चीखा और मैने देखा कि उसकी तो मुझसे भी ज़्यादा फटी पड़ी थी....

जहाँ पर मैं गिरते हुए, गोते लगाते हुए रुका था...वहाँ से ट्रक सिर्फ़ एक मीटर की दूरी पर था यानी कि यदि ट्रक वाले ने ट्रक ना रोका होता तो मेरा काम तमाम हो गया होता...

"कोई बात नही, मैं ठीक हूँ...लेकिन बड़ी ताज़्ज़ूब की बात है कि साला कहीं मामूली सा भी खरॉच नही है..."वहाँ जमा हुए लोगो से मैने कहा और बाइक उठाने चल पड़ा....

बाइक की तरफ चलते हुए मुझे इतना अहसास तो ज़रूर हुआ कि मैं थोड़ा लंगड़ा कर चल रहा हूँ और मेरा बाया हाथ बहुत ज़्यादा दर्द दे रहा है.....

"अच्छा हुआ, जो सही-सलामत हूँ...वरना आंकरिंग नही कर पाता,जो कि एक हफ्ते के बाद ही है..."बिके की तरफ बढ़ते हुए मैं बड़बड़ाया और नीचे अपने जॅकेट की तरफ पहली बार निगाह डाली....

"ये बीसी ब्लीडिंग कहाँ से हो रही है...उस लड़की की माँ का..."जॅकेट को लाल रंग मे सना हुआ देख मैं ज़ोर से चिल्लाया.....
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वो दिन मेरे कॉलेज लाइफ का एक काला दिन था या फिर उसे लाल दिन भी कह सकता हूँ क्यूंकी उस दिन मैं उपर से लेकर नीचे तक खून से लाल हो गया था...जिसका पता मुझे हॉस्टिल की तरफ बढ़ते हुए मालूम हुआ और काला दिन इसलिए क्यूंकी उस समय मेरे लिए जो सबसे इंपॉर्टेंट काम थे वो ऐसे अधूरे हुए जैसे कि एग्ज़ॅम मे लिखते-लिखते पेन की निब टूट जाना और दूसरा कोई ऑप्षन ना होना....

उन दीनो मेरे करियर से भी इंपॉर्टेंट,मेरे फ्यूचर से भी महत्वपुर्णा ऐसे दो काम थे, जो मेरे द्वारा बाइक से पेरबॉलिक कर्व बनाते हुए पूरे नही हुए...पहला काम ये था कि कैसे भी करके विपिन भैया का टाका पांडे जी की बिटिया से भिड़ने से रोकना था लेकिन उस आक्सिडेंट की वज़ह से मैं घर नही जा पाया...

दूसरा काम जो बिगड़ा वो पहले वाले से भी ज़रूरी था और वो था मेरी आंकरिंग मिस होना....ना जाने कितने अरमान सज़ा रख थे उस दिन के लिए, जब मैं एश के साथ गोल्डन जुबिली के फंक्षन का सुभारंभ करूँगा और पूरा महोत्सव तालिया की आवाज़ से गूंजने लगेगा...लेकिन वो अरमान धरा का धारा रह गया...बोले तो केएलपीडी-खड़े अरमानो पर धोखा....
.
अपनी लूटी-पिटी सूरत और वॉर्डन की तुकी-ठुकाई बाइक लेकर मैं हॉस्टिल की तरफ बढ़ा और रास्ते मे एक क्लिनिक पर रोक दिया...क्लिनिक मे अपना ट्रीटमेंट करा कर मैं वापस हॉस्टिल की तरफ बढ़ा....

"बीसी, जितने पैसे आते नही, उससे ज़्यादा तो खर्च हो जाते है...आजकल हाथ से पैसा ऐसे निकल रहा है, जैसे लंड से मूठ.... घोर कलयुग है रे बावा...खैर, शुक्रा है कि मेरे शक्ल को कुच्छ नही हुआ "
.
"माया मरी न मन मरा, मर-मर गए शरीर ।

आशा तृष्णा न मरी, कह गए दास कबीर ॥"

दूसरे दिन सुबह अपने बिस्तर पर लेटे हुए मैने कहा....
अरुण अभी कुच्छ देर पहले ही उठकर कॉलेज जाने की तैयारी कर रहा था कि मैने कबीर का एक दोहा कहा...
"ये क्या था बे..."
"अर्थात कबीर दास जी कहते हैं कि मनुष्य का मन और उसमे घुसी हुई माया का नाश नही होता और उसकी आशा, इच्छाये भी नष्ट नही होती.केवल दिखने वाला शरीर ही मरता है.इसी कारण वह दुख रूपी समुद्र मे सदा गोते खाया करता है...."कबीर जी के उस दोहे का भावार्थ अरुण को समझाते हुए मैने कहा....

"मुझे लगता है कल रात के आक्सिडेंट का सीधा असर तेरे दिमाग़ पर हुआ है, कही तू सतक तो नही गया..."

"हे मूर्ख मानव,मैं सटका नही हूँ, मुझे आत्म-ज्ञान की प्राप्ति कल रात हुई है. ये तुम सब जिस माँस,मदिरा का सेवन करते हो ना, वो सब पाप के मुख्य द्वार है.इसलिए हे बालक अब भी वक़्त है अपने आपकी उन दुर्गनो से रक्षा करो, वरना तुम्हारा काल निकट है..."

"ओये सुन बे लोडू...ज़्यादा बात करेगा ना तो तेरा दूसरा हाथ भी तोड़ दूँगा...फिर तुझे डबल आत्म-ज्ञान की प्राप्ति हो जाएगी..."अपना बॅग कंधे पर लटकाते हुए अरुण बोला"साला जब देखो तब पकाता रहता है..."

अरुण और सौरभ के कॉलेज जाने के बाद मैं रूम मे पड़ा-पड़ा बहुत देर तक तो सोचता रहा कि अब ऐसा क्या करूँ,जिससे टाइम पास हो...क्यूंकी मैं ना तो बहुत दूर तक चल सकता था और ना ही उठकर बैठ सकता था...मुझे तो अब कयि दिन बिस्तर पर एक ही पोज़िशन मे गुज़रने थे.

"एक काम करता हूँ, मूवीस देखता हूँ...लेकिन साला सब तो देख चुका हूँ...फिर एक काम करता हूँ, बीएफ देखता हूँ...लेकिन इससे तो लंड खड़ा हो जाएगा और मुझे एनर्जी स्टोर करनी है, इसलिए नो बीएफ, नो मूवी...."

"ओक बेबी, फिर सबसे पहले घर कॉल करके सनडे को ना आने का कोई सॉलिड बहाना चिपकाता हूँ विपिन भैया को..."बड़बड़ाते हुए मैने अपना मोबाइल निकाला और बड़े भैया का नंबर डाइयल किया...
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"हां अरमान बोल, कब आ रहा है..."कॉल उठाते ही बड़े भैया ने झट से पुछा...

"वो भैया,मैं आ नही पाउन्गा...सॉरी...वो क्या है ना कि इस सनडे को प्लेसमेंट के लिए एक कंपनी आ रही है...इसलिए मैं नही आ पाउन्गा. घर मे भी बता देना..."

"ओके...नो प्राब्लम..."

"क्यूँ हूँ मैं इतना होशियार...कहाँ से आते है ऐसे बहाने मेरे अंदर..., "सोचते हुए मैने खुद से कहा"ये तो कमाल हो गया...मुझे तो ज़्यादा मेहनत भी नही करनी पड़ी..."

"तेरी आवाज़ इतनी धीमी क्यूँ आ रही है..."जब मैं मन ही मन खुद की तारीफ किए जा रहा था तो बड़े भैया ने मुझे टोका...
"वो मैं क्लास मे हूँ..."

"क्लास मे...क्या तेरे टीचर्स चलती क्लास के बीच मे स्टूडेंट्स को कॉल करने की पर्मिशन दे देते है क्या...सच बता कहाँ है..."

"अरे भैया क्लास मे ही हूँ...वो टीचर 5 मिनिट के लिए कहीं बाहर गया है...आपको यकीन ना हो तो टीचर के आने के बाद उनसे बात करा दूँगा..."

"रहने दे..रहने दे.इसकी कोई ज़रूरत नही..."

"ओके, बाइ..."बोलते हुए मैने मोबाइल साइड मे रखा और फिर सोचने लगा कि अब क्या किया जाए....कि तभी मेरे मोबाइल की घंटी बजी. स्क्रीन पर नज़र डाली तो मालूम चला कि कॉल एश की थी...

"ज़रूर मेरे कॉल रिसीव करते ही ये मुझे पर टूट पड़ेगी की मैं कहाँ हूँ, क्या कर रहा हूँ...प्रॅक्टीस मे क्यूँ नही आया...मैं इतना लापरवाह क्यूँ हूँ....ब्लाह...ब्लाह"

पहले तो सोचा कि कॉल का कोई रेस्पोन्स ही ना दूं,लेकिन फिर कल डॉक्टर की कही हुई इन्स्ट्रक्षन याद आई कि अब मैं 10-15 दिन के लिए बुक हो चुका हूँ, तो मैने एश को ये बताने के लिए की मैं आंकरिंग से क्विट कर रहा हूँ, मैने कॉल उठा ही लिया...

"हेलो, जानू..कैसी हूँ..चलो एक क़िस्सी दो..."

"व्हाट...दिमाग़ तो सही है तुम्हारा अरमान...मैं एश बोल रही हूँ..."

"एश...ओह सॉरी...सॉरी. मुझे लगा आराधना बोल रही है. वो क्या है ना कि आजकल हर आवाज़ मे सिर्फ़ आराधना की आवाज़ सुनाई देती है....वरना यदि मुझे मालूम होता कि तुम लाइन पर हो..."

"अब बाकी बाते रहने दो और जल्दी से आंकरिंग के लिए पहुचो..."

"चल हट, आज मेरा मूड नही है...आज मैं और आराधना लोंग ड्राइव पर जाने वाले है...उस छत्रु को बोल देना कि आइ'म नोट इंट्रेस्टेड..कोई दूसरा बंदा ढूंड ले "

"हेलो...कहना क्या चाहते हो..."

"छत्रपाल उधर है क्या..."

"हां..."
"तो फिर उसके पास जा और बोल कि मिस्टर. प्रेसीडेंट लाइन पर है..."

इसके बाद थोड़ी देर तक खटर-पाटर की आवाज़ आती रही और फिर एश की आवाज़ सुनाई दी...
"सर, अरमान आपसे बात करना चाहता है..."
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जितना दुख मुझे कल ये जान कर हुआ था कि मैं अब गोल्डन जुबिली के फंक्षन मे आंकरिंग नही कर पाउन्गा, उतने ही पवर का हार्ट-अटॅक छत्रपाल को भी लगा, जब मैने अपनी कल रात की सारी आप-बीती छत्रु को सुनाई...शुरू मे तो वो हल्का सा मुझपर भड़का भी कि मैने उसके प्लान का पूरा स्ट्रक्चर ही बर्बाद कर दिया लेकिन फिर जब मैने उसे मेरे बॉडी के बिगड़े हुए स्ट्रक्चर के बारे मे विस्तार से बताया तो उसने मेरा हाल-चाल पुछ्कर...गेट वेल सून बोलकर एक टीचर की फॉरमॅलिटी निभाई और फोन रख दिया.....
Reply
12-15-2018, 12:38 AM,
RE: Porn Hindi Kahani दिल दोस्ती और दारू
शाम तक मेरे आक्सिडेंट की बात पूरे हॉस्टिल मे फैल चुकी थी और मुझसे मिलने बहुत लोग आए भी थे...बीसी लौन्डे मेरे रूम मे आकर मुझे ऐसे दया-दृष्टि से देखते जैसे कि मैं एड्स का मरीज़ हूँ और दो-चार दिन मे बस मरने ही वाला हूँ...

जितने डिप्रेशन मे मैं पहले नही था, उससे ज़्यादा डिप्रेशन मे मैं तब चला गया, जब कॉलेज के लौन्डे मुझसे मिलने आए और तरह-तरह के दुख प्रकट करने लगे...वैसे तो सब थे इंजिनियर, लेकिन मुझसे मिलते वक़्त बिहेवियर ऐसे करते जैसे लवडो ने एमबीबीएस किया हो...सब एक से एक मेडिसिन का नाम बताते और कभी-कभी तो कोई कहता कि कॉलेज के पीछे एक पौधा पाया जाता है,उसे पीसकर घाव मे लगाने से घाव ठीक हो जाता है....

अभी भी मेरे सामने ऐसे ही लड़को का एक ग्रूप बैठा हुआ था,जो तरह-तरह के सलाह मुझे दिए जा रहे थे...
"अरमान...दूध मे हल्दी डाल कर गरम करना और गरम-गरम ही पी जाना...इससे घाव जल्दी भरता है और दर्द भी कम होता है..."एक ने कहा...

"ओके..."(लवडे के बाल,..तेरे पापा जी हल्दी और दूध लाकर देंगे..भाग म्सी यहाँ से..)

"देख अरमान, एक बार मेरे साथ भी ऐसा आक्सिडेंट हुआ था...लेकिन मैने सरपगंधा की पत्तियो को पीसकर लगाया तो दो दिन मे यूँ चुटकी बजाते हुए ठीक हो गया .ट्राइ इट..."चुटकी बजाते हुए दूसरे ने कहा...

"ओके थॅंक्स..."(अबे घोनचू...अब मैं सर्पगंधा का पेड़ लेने जाउ...म्सी यदि इतना ही गान्ड मे गुदा है तो जाकर ले आना...)
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इसके बाद एक और लड़के ने कुच्छ बोलने के लिए अपना मुँह खोला ही था कि मैं चीखा...
"भाग जाओ कुत्तो..वरना एक-एक की गान्ड तोड़ दूँगा...बड़े आए डॉक्टर की औलाद बनकर... बोज़ ड्के .चूतिए साले..."
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वैसे तो मुझे अपना इलाज़ कैसे करवाना चाहिए,इसके बहुत सारे आइडियास मिल चुके थे..लेकिन फिर भी मैने सबके आइडियास को अपने रूम की खिड़की से नीचे फेक्ते हुए, वही किया...जो कि मुझे क्लिनिक वेल डॉक्टर ने कहा था और दस दिन के बेड रेस्ट के बाद मैं हल्का लंगड़ा कर चलने के काबिल हो गया था...जिस दिन गोल्डन जुबिली का फंक्षन था, उस दिन पूरा हॉस्टिल खाली था...हालाँकि मैं बोर ना हूँ, मेरा अकेले दम ना घुटे,इसलिए मेरे दोस्तो ने कयि सारी मूवीस लाकर मेरे लॅपटॉप मे डाल दी थी...लेकिन मैने उस दिन एक भी मूवी नही देखी और कॉलेज कॅंपस मे हो रहे गोल्डन जुबिली के प्रोग्राम का ऑडियो सुनते रहा और खुद को उस पल के बहुत कोस्ता रहा की क्यूँ मैं उस दिन हॉस्टिल से निकला...घुटन तो बहुत हुई उस दिन लेकिन सिवाय बिस्तर पर पड़े रहने के सिवा मैं कर भी क्या सकता था....

मेरे आक्सिडेंट वाले दिन के ठीक ग्यारहवे दिन मैं इस काबिल हुआ की मैं कॉलेज जा सकूँ और उत्सुकता तो इतनी थी कि पुछो मत...फिर वही कॅंटीन, फिर वही बोरिंग लेक्चर,

फिर किसी को नीचा दिखाना...फिर किसी पर अपने डाइलॉग चिपकाना.
फिर से किसी क्लास मे बक्चोदि करना और फिर रोल मे क्लास से बाहर जाना...
फिर से लड़कियो को देखना और उन्हे देखकर मन ही मन मे मूठ मारना 
बोले तो अपुन फुल एग्ज़ाइटेड था...पिछले दस दिन तक कॉलेज ना आने के कारण ऐसा लगा जैसे कॉलेज गये सादिया बीत गयी थी.वैसे तो दोस्त हॉस्टिल मे भी मिलते थे.अरुण और सौरभ तो रूम मे ही रहते थे...लेकिन कॉलेज की कॅंटीन और कॉलेज की बिल्डिंग की तो बात ही कुच्छ और थी...पत्थरो की वो इमारत का महत्व मुझे पहली बार समझ आया और ज़िंदगी मे पहली बार मुझे मेरे मोबाइल के सिवा किसी दूसरी निर्जीव चीज़ से इतना लगाव हो पाया....
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पहले जहाँ हमे हॉस्टिल से अपनी क्लास तक पहुचने मे मुश्किल से 5 मिनिट भी नही लगते थे,वही अब मेरी धीमी चाल और बार-बार लड़खड़ाने की वजह से 10 मिनिट तो कॉलेज के गेट तक पहुचने मे लग गये थे और जैसी मेरी स्पीड थी,उस हिसाब से तो मुझे अभी क्लास तक पहुच मे और भी दस मिनिट लगने वाले थे...

"एक काम करो बेटा, तुम लोग निकलो मैं थोड़ी देर बाद आता हूँ..."अचानक ही रुक-कर मैने कहा...
"क्यूँ बे, क्या हुआ..."

"बेटा सामने देखो, तुम्हारी भाभी एश आ रही है और यदि तुम जैसे बदतमीज़ लोग मेरे आस-पास भी रहे तो, वो सीधे निकल जाएगी...लेकिन यदि मैं अकेला रहा तो मुझसे बात तो ज़रूर करेगी...अब चलो, कट लो इधर से..वरना काट के रख दूँगा"

जैसा कि मेरे सिक्स्त सेन्स ने अंदाज़ा लगाया था, आगे का कार्यक्रम ठीक उसी तरह हुआ.यानी कि मेरे दोस्त मुझे छोड़ कर चले गये और मैं वही खड़ा होकर एश के पास आने का इंतज़ार कर रहा था...एश आई और मुझे देखकर उसने अपने आँखो मे प्रेशर बढ़ाया...यानी कि उसने अपनी आँखे छोटी की और मुझे ऐसे घूर्ने लगे, जैसे जंगल मे एक शिकारी अपने शिकार को देखता है,कमी थी तो बस एसा के झपट्टा मारने की...जो की उसने बिना ज़्यादा समय गँवाए ही किया.

"अरमान...यकीन नही हो रहा, मतलब मुझे कुच्छ समझ नही आ रहा कि क्या कहूँ...मतलब मैं तुम्हे तुम्हारी लापरवाही के कारण दो-चार बाते सुनाऊ या फिर तुम्हारे साथ जो हुआ, पिछले दिनो तुम जिस भी हालात मे थे, उसके लिए दुख प्रकट करू...मैं बहुत कन्फ्यूज़ हूँ और आज इतने दिनो बाद अचानक तुम्हे देखकर...मैं बता नही सकती कि मैं कैसा फील कर रही हूँ...मतलब मैं बहुत कुच्छ कहना चाहती हूँ,लेकिन कुच्छ सूझ ही नही रहा..."हँसते-मुस्कुराते...खिसियाते-गुर्राते, अंदर ही अंदर अपना सर पीटते हुए एश बोली और उसका ये रिक्षन मुझे इतना अच्छा लगा कि दिल किया कि अभिच 100 मीटर की रेस उसैन बोल्ट से लगा लून लेकिन फिर याद आया कि मैं तो ठीक तरह से चलने के भी काबिल नही हूँ,रेस क्या खाक लगाउन्गा...इसलिए नो शो-बाज़ी, ओन्ली डाइलॉग-बाज़ी....
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"अपनी आँखो पर प्रेशर डालना बंद करो, वरना आज दर्द देंगी और कल चश्मा लग जाएगा...उसके बाद सब तुम्हे बॅटरी, चश्मिश कहकर बुलाएँगे..."

"यकीन नही होता, तुम अब भी मज़ाक कर रहे हो...हे भगवान. मैने तो सोचा था कि तुम्हारा चेहरा उजड़ा-उजड़ा सा होगा...लेकिन नही, यहाँ तो नदी ही उल्टी दिशा मे बह रही है..."

"मुझे नही मालूम कि तुम्हे ये पता है कि नही. पर मेरे बारे मे एक कहावत बड़ी मशहूर है कि जब मैं पैदा हुआ तो मैं रोने के बजाय हंस रहा था और जानती हो उसके बाद क्या हुआ..."

"वन मिनिट, लेट मे गेस...ह्म...उसके बाद नर्सस डरकर भाग गयी होगी, राइट...."

"एग्ज़ॅक्ट्ली...क्या बात है, मेरे साथ रह-रह कर तेरा भी सिक्स्त सेन्स काम करने लगा...हुहम.."एश को हल्का सा धक्का देते हुए मैने कहा....
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मैने भले ही गोल्डन जुबिली के फंक्षन को मिस कर दिया था,लेकिन आंकरिंग के प्रॅक्टीस के वक़्त ऑडिटोरियम मे मेरे और एश के बीच अक्सर छोटी-मोटी अनबन हो जाती थी,जिसके बाद एक-दूसरे को धक्का देना हमारे लिए कामन सी बात हो गयी थी...(यहाँ नॉर्मल भी मैं लिख सकता था, लेकिन मैने कामन लिखा क्यूंकी अक्सर वो भी ऐसा करती थी...बे टेक्निकल, बीड़ू लोग )

"हाउ डेर यू टू पुश मी...वेट, बोलते हुए एश ने मुझे ज़ोर से धक्का दिया और मैं जाकर दीवार से जा टकराया...

"आराम से रिप्लाइ कर यार...देख नही रही अपाहिज हूँ...थोड़ी-बहुत तो इंसानियत दिखा,,,"

"ओह, सॉरी...आइ डिड्न'ट नो दट यू आर आ हॅंडिकॅप्ड नाउ, वरना मैं ऐसा करती क्या..."मेरे शोल्डर पर, जहाँ उसने धक्का दिया था, उसे सहलाते हुए एश बोली...

"या तो तू फुल इंग्लीश मे बोल या फुल हिन्दी मे वार्तालाप कर..."

" मुझे अपनी मदर टंग से प्यार है...इसलिए मैं दोनो लॅंग्वेज बोलूँगी...तुम्हे इससे क्या"

"अक्सर मात्रभाषा से प्यार वही जताते है, जीने इंग्लीश ढंग से नही आती...खैर, वो सब छोड़ और ये बता कि आराधना को कही देखा क्या..."

"आराधना...ह्म्म, नही...और तुम ये मुझसे आराधना के बारे मे अक्सर क्यूँ पुछते रहते हो.क्या मैं उसकी फ्रेंड हूँ ? या वो मेरी फ्रेंड है ? "

"जली... "आराधना के लिए एसा का एक्सप्लोषन रिक्षन देखकर मैने खुद से कहा....
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यदि लड़किया आसानी से पट जाए तो कोई बात नही, लेकिन यदि जब लड़कियो का दूर-दूर तक सेट करने का चान्स ना हो तो इसके बाद उन्हे पटाने के दो रास्ते ही बचते है...पहला है जेलस फील करना और दूसरा है जबर्जस्ति-जेलस फील करना....

एश...आराधना को लेकर कभी जेलासी नही होती थी, इसलिए मैने दूसरा रास्ता चुना, यानी की जबर्जस्ति एश के सामने आराधना का नाम लेना...वो भी तब जब हमारी कॉन्वर्सेशन अपने चरम सीमा मे हो.....कितना माइंडेड बंदा हूँ मैं 
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"इतना भड़क क्यूँ रेली है....और सुना क्या हाल चाल है.,,अपनी तो बॅंड बज चुकी है..."

"सब बढ़िया है...वैसे ये आक्सिडेंट हुआ कैसे..."

"यदि मैने इसे सच बताया तो मेरी बेज़्ज़ती होगी..."सोचते हुए मैने कहा"आक्च्युयली, उस दिन मैं बाइक पर स्टंट कर रहा था...पहले मैने अगला चक्का उठाया और फिर पिछला...लेकिन ये कारनामा मैं हज़ारो बार कर चुका हूँ,इसलिए मैने बाइक के दोनो चक्के उठाने की कोशिश की...और तभी बूम...बाइक हवा मे 200 किमी पर अवर की स्पीड से एक ट्रक से टकरा गयी...."

"रियली...ऐसा करने की कोई खास वजह.."

"वजह तो कोई ख़ास नही थी लेकिन नेपोलियन मामा ने कहा है कि अगर आप कोई महान काम नही कर सकते तो छोटे कामो को महान तरीके से करो...और उस दिन मैने वही किया, जिसका महान नतीज़ा तुम्हारे सामने है...कितना महान हूँ मैं "
"ओके, बाइ...क्लास के लिए देर हो रही है..."बोलते हुए एश वहाँ से चलती बनी और मैं अपने रास्ते हो लिया...
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10 मिनिट के लगभग मैने एश से बात की और 10 मिनिट मुझे लगभग क्लास तक जाने मे लगे....यानी की क्लास का एक तिहाई समय मैने क्लास के बाहर गुज़ारा था आंड अकॉरडिंग तो और प्रोफेसर'स रूल...मैं अब फर्स्ट क्लास अटेंड करू,इसके लिए मैं एलिजिबल नही था...लेकिन फिर मैने एक बहाना ढूँढ कर ट्राइ करना चाहा और क्लास के गेट पर खड़े होकर एक दम मरी हुई आवाज़ मे अंदर आने की पर्मिशन माँगी...फर्स्ट क्लास छत्रपाल की थी और हम दोनो के बीच जो कोल्ड वॉर चल रहा था उसके हिसाब से मैने पर्मिशन माँगते हुए ही ये अंदाज़ा लगा मारा था कि ये मेरी खीचाई तो ज़रूर करेगा...लेकिन उस छत्रपाल को क्या मालूम कि मैं इन दस दिनो मे बिस्तर पर पड़े-पड़े 500 से भी अधिक डाइलॉग इनवेंट कर चुका हूँ....

"कहाँ छिपे थे सर जी इतने दिन तक..जो आज आपने अपने दर्शन दिए..."

"कुच्छ नही सर, वो छोटा सा आक्सिडेंट हो गया था, वैसे भी सूरज, चाँद और अरमान को कोई ज़्यादा देर तक छिपा नही सकता..."

"इतना लेट कैसे हुए...आधा घंटा बीत चुका है..."

"अभी ज़ख़्म ठीक तरह से भरे नही, इसलिए हॉस्टिल से यहाँ तक आने मे 20 मिनिट लग गया..."

"क्यूँ तुम्हारे दोस्त साथ नही थे..."

"कौन दोस्त......ये, इनकी बात कर रहे हो आप..."अरुण और सौरभ की तरफ उंगली दिखाते हुए मैं बोला"इनसे मेरी लड़ाई हो गयी है...वो भी इसलिए क्यूंकी ये मुझे कह रहे थे कि मैं आंकरिंग मे ना जाउ, लेकिन मैं गया..."
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मेरे इतना बोलते ही छत्रु ने अरुण, सौरभ की तरफ देखा और वो दोनो मेरी तरफ ऐसे देखने लगे...जैसे बिस्तर पर एक लड़की नंगी पड़ी उनको चोदने के लिए इन्वाइट कर रही हो और मैने ऐन वक़्त पर उनके लंड काट दिए हो....फिलहाल तो उस वक़्त वो दोनो चुप ही रहे और मैं सामने वाली बेंच पर बैठा ताकि छत्रपाल को शक़ ना हो कि मैं उसे चोदु बना रहा हूँ.... 
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दस दिन के बेड रेस्ट के दौरान यूँ तो मुझे बहुत नुकसान झेलना पड़ा था, लेकिन एक फ़ायदा भी मुझे हुआ और वो था मेरे और आराधना के बीच फोन सेक्स....

हम दोनो के बीच इस फोन सेक्स की शुरुआत हाल-चल पुछने से हुई थी...लेकिन फिर बाद मे हम दोनो एक-दूसरे से खुलने लगे और मज़ाक-मज़ाक मे बात किस्सिंग तक पहुचि और फिर बाद मे चुदाई तक....बस तालश थी तो सही वक़्त और सही जगह की....आराधना को सोच-सोच कर मैं ना जाने कितनी बार ही अपना लंड खाली कर चुका था इसलिए मैं पूरे उफान मे था कि कब मैं ठीक हो जाउ और उसका ग़मे बजाऊ...फिलहाल तो अभी लंच का टाइम था इसलिए मैं अपनी शरीफ मंडली के साथ कॅंटीन की तरफ बढ़ा, इस आस मे की वहाँ एश तो ज़रूर मिलेगी और यदि एश ना मिली तो आराधना तो फिर मिलेगी ही मिलेगी

उस समय मेरे पास दो रास्ते थे लेकिन मंज़िल एक भी नही...ना जाने कैसे रास्ते थे,जो कही तक नही गये...बल्कि मुझे और भी पीछे धकेल दिया...पहला रास्ता आराधना के रूप मे था, जहाँ मैं एक हवसि की तरह जाना चाहता था और दूसरा रास्ता एश के रूप मे था, जहाँ मैं हमराह, हमसफ़र,हमनुमा,हीलियम,हाइड्रोजन....वॉटेवर यू कॅन कॉल की तरह जाना चाहता था...पर ग़लती मुझसे तब हुई जब मैने किसी एक को चुनने की बजाय दोनो को चुना...मेरे दोस्त हमेशा मुझे रोकते थे, वो कहते थे कि नारी,नरक का द्वार होती है...लेकिन मेरा जवाब होता कि यदि नारी नरक मे जाने से मिलने वाली हो तो फिर स्वर्ग मे भाजिया तलने कौन जाएगा....मेरे दोस्त हमेशा कहते कि दो कश्ती मे पैर रखकर कभी समुंदर पार नही किया जा सकता और तब मेरा जवाब होता कि यदि मुझे एक ही कश्ती मे पैर रखकर समुंदर पार करना होता तो फिर मैं दो कश्ती लाता ही क्यूँ....

मुझे समझाने के मेरे दोस्तो के कमजोर तर्क और मुझे ऐसा करने से रोकने के उनके कमजोर वितर्क ने मुझे इन दोनो रास्तो मे लात मार कर भेजा...जबकि मेरे दोस्तो को मेरे ये दोनो कदम ही पसंद नही थे....उपर से मुझमे कॉन्फिडेन्स इतना ज़्यादा था कि मैं उस समय यही सोचा करता था कि दुनिया की कोई भी सिचुयेशन..कैसी भी कंडीशन हो, मैं उसे झेल सकता हूँ और अपने 1400 ग्राम के ब्रेन का इस्तेमाल करके उसे अपने अनुरूप बदल भी सकता हूँ...यही वजह थी कि मेरा सिक्स्त सेन्स भी मुझे उस वक़्त धोखा दे रहा था,जब मैं अपनी बर्बादी की राह पर खुशी से ऐसे बढ़ रहा था जैसे वो बर्बादी ना होकर कामयाबी हो....
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कॅंटीन मे हम सब पहुँचे और हर रोज़ की तरह जिसे जो पेट मे भरना था, उसने ऑर्डर दे दिया...ऑर्डर तो मैने भी दिया था,लेकिन मेरी निगाह अपने लंच के साथ-साथ वहाँ कॅंटीन मे बैठी हुई लड़कियो पर भी थी...

"ना एश ना आराधना...पता नही ये दोनो कहाँ चली गयी...एश का तो फिर भी समझ आता है, लेकिन ये आराधना कहाँ मरवा रही है..."सोचते हुए मैने सुर और ताल को मिक्स करके एक धुन के साथ कहा"आराधना तू आजा...अपने एक-एक किलो के दोनो दूध दिखा जा...

चूत तेरी बहुत प्यारी, अपनी गान्ड तू अरुण को चटा जा..."

"आराधनाआआआ....."मेरे द्वारा अरुण अपनी तारीफ सुनकर खिसियाते हुए ज़ोर से चीखा....जिसके बाद पूरे कॅंटीन मे आराधना का नाम गूँज उठा....

"बक्चोद है क्या बे, ऐसे क्यूँ उसका नाम चिल्ला रहा है...."मैने फ़ौरन अरुण का मुँह बंद किया और उसे आँखे दिखाई...जिसके बाद सौरभ ने भी आराधना का नाम लिया और कॅंटीन मे एक बार फिर आराधना का नाम गूंजने लगा....

"चिल्लाओ बेटा चिल्लाओ...खुद का तो खड़ा होता नही, इसीलिए दूसरे की तरक्की देखी नही जाती..."

"रोज रात को मैं तेरी तरक्की देखता हूँ...जब तू एक हाथ से मोबाइल पकड़ कर उस आराधना लवडी से बात करते हुए बाथरूम मे मूठ मारते रहता है...क्या कमाल की तरक्की की है..."

"हाँ तो मैने कम से कम इतना तो किया है, तूने क्या उखाड़ लिया जो ऐसे बोल रहा है...."

"उधर देख, तेरी माल आ गयी...जा चिपक जा उससे..."आँखो से एक तरफ इशारा करते हुए अबकी बार सुलभ ने कहा....

"साला, क्या जमाना आ गया है...कैसे-कैसे लोग मुझे चमकाने लगे है....तुम लोगो को लाइन पर लाना ही होगा..."सुलभ को बोलते हुए मैने उस तरफ देखा,जिस तरफ सुलभ ने आँखो से इशारा किया था....

"ये तो एश है..., तुम सब यहाँ से निकलो और मेरा बिल भी भर देना,,,मेरे पास दस हज़ार का नोट है..."कहते हुए मैने अपने दोनो पैर को बड़े आराम से बाहर निकाला और ऐसे रोल मे चलने लगा, जैसे मुझे कुच्छ हुआ ही ना हो....हालाँकि इस तरह से नॉर्मल चलने पर मुझे गान्ड-फाड़ दर्द भी हो रहा था लेकिन वो सब दर्द एश को देखकर ही जहाँ से आया था, वही घुस भी जा रहा था....

"पहले तो सिर्फ़ सुना था, आज तो यकीन हो गया कि वाकाई प्यार मे ताक़त होती है...हाउ बोरिंग "
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"मयाऊ..."एश जिस टेबल पर बैठी,उसी के पास खड़े होकर मैने कहा.

"कितनी बार कहा है तुमसे..."गुस्से से एश ने उस जगह मुझे मारा,जहाँ मुझे सबसे अधिक और सबसे गहरा ज़ख़्म था....
दिल तो किया कि अभिच एसा को इस दर्द के ईक्वल दर्द दूं लेकिन फिर सोचा कि रहने दो, बाइ मिस्टेक हो गया है....इसलिए इस बार जाने दो.लेकिन जो दर्द उठा था उसे तो मुझे सहना ही था, वो भी बिना हलक से एक आवाज़ निकाले...इसलिए मैने दर्द का अंदर ही अंदर गला घोटते हुए अपनी एक आँख बंद की और बॉडी को टाइट किया....

"क्या हुआ,..एक आँख बंद क्यूँ कर ली बिल्ले..."

"रात भर पढ़ाई करके आया हूँ,इसलिए नींद आ रही है...."संभलकर एक चेयर पर बैठते हुए मैने उससे पुछा"दिव्या से अभी तक बात-चीत चालू नही हुई क्या...जो अब भी किसी बिल्ली की तरह अकेले इधर से उधर फुदक्ति रहती है..."

"उसका नाम मत लो, वो तो एक नंबर. की कमीनी है...मेरा बस चले तो उसके सारे बाल नोच लूँ..."

"कहाँ के बाल नोचेगी "बोलते हुए मेरी ज़ुबान स्लिप हो गयी लेकिन एश कुछ समझे उसके पहले ही एक तरफ इशारा करते हुए मैं हड़बड़ाहट मे बोला"उधर देख उसे जानती है क्या..."

"नही..."

"और उसे..."दूसरी तरफ इशारा करते मैने फिर कहा...

"नही..."

"तब तो उस मोटी को यक़ीनन जानती होगी..."

"बिल्कुल नही जानती... "

"ओके,नो प्राब्लम....हां तो तू क्या बोल रही थी...की तेरा दिल करता है कि.........."

"मेरा दिल करता है कि मैं उसके सर के सारे बाल नोच लूँ...वो एक नंबर. की कमीनी है...अब देखो ना अरमान, हम दोनो के बीच लड़ाई है उसे ये बात अपने घर मे बताने की क्या ज़रूरत थी...लेकिन नही, उसने सब कुच्छ अपने घरवालो को बता दिया..यहाँ तक कि गौतम को भी..."

"गौतम...."उसका नाम जब बीच मे एश ने लिया तो मेरा दिल किया कि मुझे जितनी गालियाँ आती है, सब उसे दे डालु...लेकिन मैं एक शरीफ स्टूडेंट था, इसलिए मैने ऐसे कुच्छ भी ना करके बड़े शांत ढंग से एश से पुछा..."गौतम...कहाँ है मेरा भाई आजकल..."(गौतम साले, तेरी *** की चूत, तेरी *** का भोसड़ा...मर जा म्सी,जहाँ कही भी हो...)

"ओक अरमान,अब मैं चलती हूँ...वरना यदि दिव्या ने तुम्हे मेरे साथ देख लिया तो घर मे फिर से बता देगी...."इतना बोलकर एश वहाँ से चलते बनी...

"फिर से केएलपीडी...."

एश के जाने के बाद मैं पीछे मुड़ा, ये सोचकर कि दोस्तो के साथ थोड़ी सी गान्ड-मस्ती हो जाए,लेकिन फले वो भी वहाँ से नदारद थे...मैं एसा के साथ इतना मगन था कि मेरे दोस्त मेरे पीछे से कब निकल गये,मुझे इसका अहसास तक नही हुआ....

लेकिन इसका कुच्छ खास फरक मुझपर नही पड़ा, क्यूंकी थोड़ी ही देर बाद एक-एक किलो के बॅटल अपने सीने मे रखने वाली आराधना ने कॅंटीन मे अपनी सहेलियो के साथ एंट्री मारी और आराधना को देखते ही मेरा पॅंट टाइट हो गया.....

"हेल्लूऊओ सीईइइर्ररर...."मुझे देखकर आँख मारते हुए आराधना बोली...

"हेल्ल्लूऊओ माअंम्म..."मैने भी बराबर आँख मारते हुए जवाब दिया...

अब जब दो ऑपोसिट सेक्स वाले हमन बीयिंग के बीच इस तरह का हाई,हेलो हो तो उम्मीदे कुच्छ ज़्यादा ही बढ़ जाती है...लेकिन मेरी उन उम्मीदों को चकनाचूर करते हुए आराधना की सहेलिया, आराधना के साथ उसी टेबल पर बैठ गयी,जहाँ मैं बैठा था...जबकि मेरा अंदाज़ा था कि आराधना मेरे साथ बैठेगी और उसकी बाकी गॅंग हम दोनो से कही दूर जाकर अपना आसन देखेंगी...लेकिन ऐसा कुच्छ भी नही हुआ और आराधना के साथ-साथ उसकी बाकी सहेलियो ने भी चेयर से अपनी गान्ड टिकाई...

मैने आराधना को इशारो ही इशारो मे बहुत कहा कि वो अपनी इन फुलझड़ियो को डोर भेज दे,लेकिन आराधना को तो कुच्छ अलग ही खुजली थी....वो हर बार बड़े प्यार से मुझे नकार देती और मंद-मंद मुस्कुराती....शुरू मे तो सब कुच्छ अंडर कंट्रोल रहा लेकिन जैसे-जैसे कॅंटीन मे लगी बड़ी सी घड़ी के बड़े से काँटे आगे बढ़े मुझे आराधना की सहेलियो को बर्दाश्त करना मुश्किल हो गया....फलियो ने मुझे इतना बोर किया...इतना पकाया कि उनके साथ बैठने से अच्छा मैं छत्रपाल की चूतिया क्लास एक दिन मे दो बार अटेंड कर लूँ,वो भी पूरे दिल से.......

"सर आपके पास ईज़ी लॅंग्वेज मे फिज़िक्स-2 के नोट्स है क्या....मुझे फिज़िक्स के फंड कुच्छ समझ नही आ रहे..."आराधना के लेफ्ट साइड मे बैठी एक दुबली-पतली सी लड़की ने पुछा....

"सेकेंड सेमिस्टर. के नोट्स और मेरे पास, मेरे पास तो 8थ सेमिस्टर के भी नोट्स नही है.. वैसे फिज़िक्स के रूल्स को चट कर जा बिल्कुल,ठीक उसी तरह जिस तरह तू इस चटनी को चाट रही है और एक बात का ध्यान रख 'आप फिज़िक्स के खिलाफ नही जा सकते', वरना कुर्रे, कुरकुरे की तरह तोड़-मरोड़ देगा..."

"सर, एड बहुत हार्ड लगता है...क्या आपका वो सब्जेक्ट क्लियर है..."अबकी बार आराधना के राइट साइड मे बैठी मोटी भैंस ने मुझसे पुछा....

"नही...ऐसे ही 8थ सेमिस्टर. मे पहुच गया... "अपनी रोलिंग आइ से उस मोटी भैंस पर कहर बरसाते हुए मैने आराधना से कहा "ओये आराधना, तेरे उस दूर के भाई ने लंच मे मिलने के लिए कहा था,,,जा मिल ले उससे..."
"क्यूँ..."
"अब ये मैं कैसे बताऊ..."
"ठीक है...तुम तीनो यही रहो, मैं अभी आती हूँ..."बोलकर आराधना वहाँ से उठी और कॅंटीन के बाहर चल दी....

आराधना के जाने के थोड़ी देर बाद मैं अपनी जगह से उठा ही था कि उस मोटी भैंस ने मुझे वापस बैठने के लिए कह दिया...
"बैठिए ना सर..."
"दर-असल मैं बहुत शर्मिला लड़का हूँ और मुझे लड़कियो के बीच बहुत शरम आती है..."बोलकर मैं वहाँ से लंगड़ाते हुए बाहर आया कि तभी आराधना मुझे कॅंटीन के बाहर खड़ी मिल गयी...

"मुझे पता था, ये आपका ही खुरापाति आइडिया था,मुझे मेरी सहेलियो से दूर करने का..."

"वो सब छोड़ और पहले ये बता कि मुँह मे लेगी क्या...."
मेरा इतना कहना ही था कि आराधना ने घूर कर मुझे ऐसे देखा जैसे मैने उसके मुँह मे लंड देने की बात कही हूँ...वैसे मेरा मतलब तो वही था 

"लगता है, तू पूरे वेजिटेरियन है...इसीलिए इतना घूर रही है...चल छोड़..."बोलते हुए मैं उसके बगल मे खड़ा हो गया...

"आक्सिडेंट कैसे हुआ था आपका सियररर..."

"ऐसे आवाज़ निकाल कर पुछेगि तो फिर से एक नया आक्सिडेंट हो जाएगा..."

"बताओ ना..."

"ह्म...एक मिनिट रुक,मुझे रिमाइंड करने दे...हां, याद आ गया...."आराधना के और पास खिसकते हुए मैं बोला"उस समय मैं बाइक पर था और मेरी बाइक स्पीड 80 किमी /अवर के यूनिफॉर्म वेलोसिटी से जा रही थी और आक्सिडेंट होने की प्रॉबबिलिटी ज़ीरो थी...उस वक़्त आगे एक स्कॉर्पियो और सामने एक ट्रक था और दोनो के बीच पेरबॉलिक कर्व बनाते हुए मैने बाइक की स्पीड को रेज़िस्ट किया और फिर धूम-धड़ाका...."

"सुनने मे तो बहुत मज़ा आ रहा है..."

मेरे दोस्तो और वॉर्डन के बाद आराधना इस दुनिया की ऐसी तीसरी शक्स थी, जिसे मैने मेरे आक्सिडेंट के बारे मे सच बताया था...क्यूंकी मुझे इनके सामने अपनी इज़्ज़त की कोई परवाह नही थी....

"तो अब कैसी है तबीयत..."मेरा हाथ पकड़ते हुए आराधना ने पुछा..

"एक दम चका चक..."आराधना की इस हरक़त को देखते हुए मैने कहा....

"तो फिर रूम चले..."

"रूम...चल हट.."आराधना का हाथ छोड़ते हुए मैने कहा"अभी भी मेरी रात बिस्तर पर बिना करवट बदले गुज़रती है और तू कह रही है कि मैं तेरी करवट बदल-बदल कर लूँ...अश्लील कही की"

"ओके...देन, अब क्या बात करे,..."

"आजा पढ़ाई की बात करते है...ये बता तूने राजस्टॉरीजडॉटकॉम पर हवेली पढ़ी है..."


"नही, ये क्या है..."

"चल छोड़ ये बता हवेली-2 पढ़ी है..."

"नही...ये है क्या.."

"ये भी छोड़ और अब ये बता डेड नेवेर लाइ पढ़ी है..."

"नही..."
"डूब मर फिर "मायूस होते हुए मैने कहा, कि तभी मुझे अवधेश गिलहारे कॅंटीन की तरफ जाता हुआ दिखाई दिया, जिसे मैने एश और दिव्या के उपर निगरानी रखने के लिए कहा था....

"अवधेश रुक तो यार..."

"अरमान..."मेरा नाम लेते हुए वो मेरी तरफ आकर बोला"कैसा है यार अब, सुलभ ने बताया था तेरे आक्सिडेंट के बारे मे...."

"आराधना तू यही रुक, मैं इससे बात करके आता हूँ..."

"कौन सी बात..."

"सस्शह, किसी को बताना मत मैं एक अंडरकवर एजेंट हूँ और ये मेरा असिस्टेंट है...आता हूँ ना, दो मिनिट रुक इधर ही..."बोलते हुए मैं अवधेश के साथ, जहाँ आराधना खड़ी थी,वहाँ से थोड़ी दूर आया....

"चल बता क्या खबर लाया है..."

"कुच्छ भी इंट्रेस्टिंग न्यूज़ नही है यार, तू फालतू मे उन दोनो फालतू लड़कियो के पीछे अपनी जान दे रहा है...मतलब दोनो अभी तक एक-दूसरे से बात नही करती..."

"मतलब लाइन स्ट्रेट है, कही कोई घमावदार जैसा चीज़ नही है..."

"मतलब..."हमसे थोड़ी दूर मे खड़ी आराधना को देखकर अवधेश ने पुछा...

"मतलब तू नही समझेगा...कुच्छ नया होगा तो बताना और उधर देखना बंद कर,मेरी माल है वो..."

"अबे मैं ग़लत नज़र से नही देख रहा हूँ उसे..."

"तो फिर क्या तू उसे उपर से नीचे तक ऐसे आँखे गढ़ा-गढ़ा कर बहन की नज़र से देख रहा है फले इन्सेस्ट लवर...."

"क्या यार, तू भी.....कुच्छ भी बोल देता है. अबे मैं उसे इसलिए ऐसे देख रहा था क्यूंकी मैं कुच्छ कन्फर्म कर रहा था..."

"और क्या मैं पुछ सकता हूँ कि तू क्या कन्फर्म कर रहा था..."

"यही कि ये वही लड़की है या नही,जिसका रास्ता कुच्छ दिन पहले यशवंत ने रोका था...तुझे नही मालूम क्या..."

"नही..."एश और दिव्या का पूरा मॅटर भूलकर मैने पुछा...

"भाई,बवाल होने वाला था उस दिन...वो अपना डिटॅनर है ना यशवंत, उस दिन कॉलेज के गेट के पास इसे और इसकी सहेलियो को रोक लिया था..."

"फिर क्या हुआ..."मॅटर के अंदर घुसते हुए मैने कहा...

"यशवंत और उसके दोस्तो को तो जानता ही है, बीसी...दिनभर कॉलेज के गेट के बाहर लड़कियो पर कॉमेंट ठोकते रहते है...उस दिन भी कुच्छ यही हुआ.कॉलेज के बाद मैं सिटी बस मे बैठा था कि ये लड़की, जिसे तू अपनी माल कह रहा है, वो वहाँ से गुज़री तो यशवंत ने अपनी आदत के माफ़िक़ कुच्छ उल्टा-सीधा बोल दिया, लेकिन उसके बाद तेरी इसी माल ने यशवंत को कुच्छ बुरा-भला कह दिया...फिर तो लवडा, सबकी गान्ड ही फट गयी...सबको लगने लगा था कि कुच्छ बवाल होगा, लेकिन मालूम नही यशवंत को अचानक क्या हुआ,जो वो एक दम से ठंडा पड़ गया...."

"और कुच्छ भी है बताने को या बस बात ख़त्म..."अवधेश के रुकने के बाद मैने पुछा....

"बस इतना ही मॅटर था..."

"चल ठीक है बाइ..."बोलते हुए मैं आराधना के पास पहुचा..."यश के साथ तेरा क्या लफडा हुआ था..."

"कौन यश..."मेरे द्वारा एक दम अचानक से ऐसे बोलने के कारण आराधना चौक गयी...

"अरे यार,वही...जिसने तुझे कुच्छ दिन पहले गेट के बाहर रोका था..."

"अच्छा...वो...वो, अरे लफडा कुच्छ नही है,बस वो मुझे धमका रहा था कि वो ये कर देगा, वो कर देगा....लेकिन जब मैने कहा कि अरमान ईज़ माइ बाय्फ्रेंड...जैसा कि तुमने कहा था कि यदि कोई परेशान करे तो ये कह देना...मैने कहा, उसके बाद तो उसने कुच्छ नही कहा...सिवाय कुच्छ अपशब्द तुम्हे कहने के अलावा..."

"थॅंक यू वेरी मच...अब आप यहाँ से अपनी क्लास के लिए प्रस्थान कीजिए...आपकी क्लास शुरू हो चुकी होगी..."

"ओक बाइ, शाम को मिलते है..."हवा मे बाइ का सिंबल बनाकर अपने हाथ हिलाते हुए आराधना वहाँ से चलती बनी और मैं जितना तेज़ चल सकता था, उतनी तेज़ी से अपने क्लासरूम की तरफ बढ़ा....

"ओये अरुण, सौरभ और बाकी होस्टेलेर्स...तुम लोगो को क्या ऐसा नही लगता कि हम लोग कुच्छ ज़्यादा ही शरीफी की ज़िंदगी जी रहे है....मतलब नो मार-धाड़,नो धूम-धड़ाका...."

"हां, मुझे तो ऐसा ही लगता है..."एक ने कहा....

अभी रिसेस का टाइम चल रहा था और क्लास के सारे लड़के-लड़किया मेरी आदत से वाकिफ़ थे, इसलिए मैं बिंदास बोल रहा था....

"तो चलो, आज लाइफ को कुच्छ इंट्रेस्टिंग बनाते है...."

"अबे सीधे-सीधे बोल किसको ठोकना है...ऐसी बाकलोली मत कर..."अपनी जगह पर बैठे-बैठे ही अरुण बोला...
"अबे पहले क्लास से निकलो तो सही..."
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12-15-2018, 12:38 AM,
RE: Porn Hindi Kahani दिल दोस्ती और दारू
क्लास मे टोटल 12 लड़के हॉस्टिल वाले थे .उन सबको लेकर मैं आगे बढ़ा कि तभी किसी ने पीछे से पुछा...
"मारने किसको जा रहे है...कहीं हम कम ना पड़ जाए,तू कहे तो सामने वाली क्लास से 10-12 को और साथ ले लूं..."
"ले ले...अपना क्या जाता है...लेकिन बेटा ख़याल राखियो, किसी को पेलना नही है,बस हूल देने जा रहे है...."
"कौन है वो बीकेएल..."
"यशवंत...वरुण का शिश्य..."
"लेकिन वो तो अब एनएसयूआइ का प्रेसीडेंट बन चुका है, बीसी कही उसने भी लड़के लाकर खड़े कर दिए तो..."
"दाई छोड़ देंगे उसकी भी और उसके लड़को के भी..."अरुण ने कहा....
.
कॉलेज से निकलकर हम लोग पैदल ही मेन गेट की तरफ चलने लगे कि मुझे कुच्छ याद आया....
"रूको बे, ऐसे पैदल जाने से इंप्रेशन खराब होगा, जाओ अपने क्लास के लौन्डो के बाइक की चाभी उधार माँग कर लाओ और जो मेच-8थ सें. मे जा रहा है,वो मेरे बॅग से मेरा गॉगल भी ले आना..."
.
मेरे इतना बोलते ही कुच्छ लड़के भागकर गये और 5 मिनिट मे ही बाइक की चाभीया और मेरा गॉगल लेकर आ गये...मैने अपना गॉगल लगाया और एक बाइक की चाभी अपने हाथ मे ली...
"तू चला लेगा बे,या मैं चलाऊ...कही उस दिन की तरह ठोक मत देना"अरुण ने मुझसे कहा...
"तू बैठ पीछे, चलने को तो मैं एरोप्लेन चला लूँ,फिर ये बाइक क्या चीज़ है...."
"यशवंत कॉलेज के मेन गेट के बाहर अभी है, पहले ये तो कन्फर्म कर ले...नही तो फालतू मे वहाँ जाकर चूस लेंगे..."
"गुड..."
मैने तुरंत अपना मोबाइल निकाला और मेन गेट के बाहर बने फोटोकॉपी के दुकान संभालने वाले लड़के को कॉल किया और उससे यशवंत के बारे मे पुछा....
"खुशख़बरी है बे...वो यश वही है,चलो चोदते है बीकेएल को..."
"चल्ल्ल्ल्लूऊ....."बाइक पर सवार होकर सब चिल्लाए....
.
पार्किंग से कॉलेज के गेट तक पहुचने मे हमे चाँद मिनिट्स ही लगे.जैसा की फोटोकॉपी वाले ने बताया था, वैईसिच ही वहाँ का सीन था...यानी की यशवंत एक चाय-समोसे के दुकान पर बैठा सिगरेट पी रहा था और उसके साथ 6-7 लड़के थे.....
"अरुण,शूटिंग की शुरुआत कर..."उस चाय-समोसे के दुकान के पास पहुच कर मैने कहा...
"मूवी -यशवंत की चुदाई, टेक नंबर-1...आक्षन...."
"अबे ओये चुस्वन्त, इधर आ बे बीसी..."अरुण के आक्षन बोलने के बाद मेरी मुँह से पहली लाइन यही निकली....
यशवंत वैसे तो था बड़ा तगड़ा और जिस हिसाब से उसकी रेप्युटेशन कॉलेज मे थी उसके अनुसार उसे मुझे बिल्कुल नज़र-अंदाज़ कर देना चाहिए था...लेकिन वो उस वक़्त थोड़ा कन्फ्यूज़ दिखा और थोड़ी देर तक चारो तरफ देखने के बाद चाय का ग्लास दुकान मे रखकर हमारी तरफ बढ़ा..... 

कॉलेज मे रेप्युटेशन बनाना बहुत आसान है लेकिन उसे बरकरार रखना उतना ही मुश्क़िल.इसके बहुत सारे एग्ज़ॅंपल मेरे पास है जैसे की वरुण, गौतम...दोनो की रेप्युटेशन शुरुआत मे एक दम फाडू थी लेकिन बाद मे जो हुआ, वो सब जानते है...वही दूसरी तरफ सीडार भाई का जो दर्ज़ा कॉलेज मे उनके रहते हुए था वो उनके जाने के बाद भी था...सीडार भाई, अब कहाँ होंगे, ये कोई नही जानता लेकिन हर साल हॉस्टिल मे आने वाला हर बंदा उनके बारे मे ज़रूर जानेगा और ऐसा तब तक चलता रहेगा, जब तक हमारा कॉलेज चलता रहेगा....और अगर मेरी बात की जाए तो, मेरी तो बात ही अलग है 
.
यशवंत के साथ उसके साथ के भी लड़के उसके पीछे-पीछे हमारे पास आ पहुँचे . बहुत देर तक हम मे से कोई कुच्छ नही बोला, सब अपने-अपने ऑपोसिशन को मौन व्रत धारण किए हुए निहारे जा रहे थे....

"अबे ओये, यहाँ एक-दूसरे को प्रपोज़ करने आए हो क्या जो कब से एक-दूसरे को देखे जा रहे हो...."सबका मौन व्रत तोड़ते हुए मैं चीखा....

"हां बोल, क्या हुआ....और नाम ज़रा इज़्ज़त से ले..."छुस्वन्त ने अकड़ कर कहा...
"इज़्ज़त लायक कुच्छ किया होता तो मैं तेरे चरण धोता लेकिन हक़ीक़त ये नही है...तो फिर तूने ये कैसे सोच लिया कि मैं तुझसे अच्छे से बात करूँगा बे चुस्वन्त...चुस्सू..चूसैल...चूतिए..."
"रुक लवडा..."अपना मोबाइल निकालकर यशवंत बोला"यदि जिगर है तो दस मिनिट यही रुक..."
"देख बे अखंड चूतिए...यहाँ मॅटर ये नही है कि मैं यहाँ कब तक रुकुंगा, बल्कि मॅटर ये है कि तू यहाँ कब तक रुकेगा...."कहते हुए मैं बाइक से उतरा और यशवंत के कान पर जोरदार झापड़ मारा, जिससे उसका मोबाइल नीचे गिरा और यशवंत सन्ना गया.....
"मारो बे, लवडो इन पप्पू को..."बोलते हुए मैने यशवंत का बाल पकड़ा और उसका सर उपर अपनी तरफ करते हुए कहा"अभी समझा रहा हूँ, सुधर जा...वरना अगली बार मारूँगा...कल से यदि किसी ने भी कंप्लेंट किया की तूने किसी भी लड़की पर कॉमेंट किया तो फिर ऐसा फोड़ूँगा की यहाँ बैठकर कॉमेंट करना तो दूर फ़ेसबुक मे भी कॉमेंट करने लायक नही रहेगा....अब चल जा.."

यशवंत को छोड़ कर मैं पीछे मुड़ा, लेकिन मालूम नही मेरा क्या मूड हुआ, जो मैं एक दम से पीछे पलटा और यशवंत के दूसरे कान को भी झन्ना दिया....

"साले अभी तक गया नही..."

मेरे इतना बोलते ही सौरभ एक डंडा लिए हुए आया और घुमा कर यशवंत के पीठ मे जड़ दिया.....
"अबे, मारना नही है...समझना है..."

"लाड मेरा समझना है...इस बीसी को तो फर्स्ट एअर से ताड़ रहा था मैं,..."बोलते हुए सौरभ ने एक बार फिर यशवंत को पेला.....
जब से मैने यशवंत को पहला झापड़ जड़ा था तब से वो बस खड़े होकर मुझे देखे जा रहा था...जब सौरभ ने उसको डंडे से ठोका तब भी वो वैसा ही खड़ा रहा...

"मदरलंड घूरता क्या है बे...मारेगा क्या, ले मार....बेटा जितने तेरे पास लड़के नही होंगे ना उससे अधिक तो मेरे पास बाइक है और हर बाइक मे मिनिमम तीन लड़के सवार रहते है...मॅग्ज़िमम तू कितने भी ले ले और इतना दुखी क्यूँ हो रहा है.तेरे आत्म-सम्मान को धक्का पहुचा क्या...अबे दिल पे मत ले, तेरे गुरु, वरुण तक को चोद कर बैठा हूँ ..."

"चलो बे..आज टाइम खराब है..."इतनी देर मे पहली बार यशवंत कुच्छ बोला और अपने दोस्तो के साथ वहाँ से जाने लगा...लेकिन थोड़ी दूर जाकर वो बोला"अरमान, तेरा गेम मैं बजाउन्गा...बस कुच्छ दिन रुक जा.."
"म्सी...ज़्यादा बोलेगा तो शहीद कर दूँगा यही..."अरुण चिल्लाया....

"अरमान तू अपने दिन गिनने शुरू कर दे..."

"मेरे जैसे ही एक महान व्यक्ति ने कहा था कि 'डॉन'ट काउंट दा डेज़, मेक दा डेज़ काउंट'....दिन तुम जैसे चुसाद गिना करते है, हम जैसे लोग तो हर दिन को यादगार बनाते है और जा, जितने पप्पू इकट्ठा कर सकता है कर ले, मेरा वादा है तुझसे,जिस दिन भी तू आएगा, पूरी तरह चुद के जाएगा....ऑल दा बेस्ट, चुषवंत"
.
यशवंत और उसके दोस्तो के वहाँ से जाने के बाद हम लोग वापस कॉलेज की तरफ बढ़े....लंच के बाद वाली क्लास आधा निकल चुकी थी, इसलिए पार्किंग मे बाइक खड़ी करके सब इधर-उधर चल दिए और मैं भी हॉस्टिल जाने के लिए अपने दोस्तो से विदा लेकर हॉस्टिल की तरफ चल दिया.....
"अरमान रुक..."पीछे से अरुण ने मुझे आवाज़ लगाई तो मैं रुका...
"क्या हुआ, लंड चुसेगा क्या..."
"मॅटर क्या था, यशवंत को मारने का..."
"कुच्छ खास नही, ऐसे ही मूड हुआ तो ठोक दिया..."
"बेटा बिना भूक के तो इंसान खाना भी नही ख़ाता, फिर तुझ जैसे सेल्फिश और फटतू बिना किसी मतलब के ऐसे ही किसी को नही मार सकता, वो भी ये जानते हुए कि सामने वाला बाद मे तेरी ले भी सकता है...इसलिए मुँह खोल और सच-सच बक की मॅटर क्या था..."
"मॅटर...वेल मॅटर ईज़ दा ऑब्जेक्ट्स दट टेक अप स्पेस आंड हॅव मास आर कॉल्ड मॅटर. एवेरितिंग अराउंड यू ईज़ मेड अप ऑफ मॅटर. चॉक्लेट केक ईज़ मेड अप ऑफ मॅटर. यू आर मेड ऑफ मॅटर. "

"ये ले मुक्का, दिस पंच ईज़ ऑल्सो मेड अप ऑफ मॅटर, नाउ टेल मी दा रियल मॅटर..."एक घुसा मेरे पेट मे जड़ कर अरुण बोला...
"कुच्छ नही बे...हूओ...वो आराधना को उल्टा -सीधा बोला था उसने....आहह, बोसे ड्के, थोड़ा धीरे मारा कर..."
"आराधना, मतलब लौंडिया...ये तो हॉस्टिल के नियमो के शख्त खिलाफ है...सीडार भाई ने कहा था कि लड़की के लफडे मे कोई किसी का साथ नही देगा..."
"देख अलुंड(अरुण ), मैं खुद भी सीडार की इज़्ज़त करता हूँ लेकिन वो रूल उनके जमाने का था और अब दूसरा जमाना है....वैसे भी तेरे सिवा किसको मालूम है कि मैने ये सब किसी लड़की के पीछे किया है..."आँख मारते हुए मैं बोला...
"अरमान,अपने लौन्डो से झूठ बोलना बुरी बात है..."
"नही रे अलुंड, झूठ बोलना बुरी बात नही है मतलब अच्छी तरह से झूठ ना बोलना बुरी बात है...अब तू ही देख, हॉस्टिल वाले इस वक़्त ये सोच रहे है कि मैने सज्जन पुरुष वाला काम किया है, यशवंत को मारकर....क्यूंकी यशवंत से कॉलेज की सारी लड़किया परेशान थी...इनफॅक्ट अब तो वो लड़किया मुझे अपना भगवान बना लेंगी....बेटा, अरुण...दुनिया मे महान बनने के सिर्फ़ दो रास्ते है, पहला या तो महानों वाला काम करो या फिर छोटा-मोटा काम करके उसे महान तरीके से सबके सामने पेश करो...अब निकलता हूँ, मेरी दारू की बोतल मेरा इंतज़ार कर रही होगी...."
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उस दिन पूरे हॉस्टिल मे सबसे 100-100 लेकर महोत्स्व का आयोजन किया गया था...हॉस्टिल मे पेल के दारू आई थी, जिसे जो ब्रांड जितनी भी चाहिए थी, उसे दे दिया गया और सब को देने के बाद हम भी गला तर करने के लिए बैठे.....
"अरमान भाई,एक बात पुच्छू"राजश्री पांडे ने अपनी फरमाइश पेश की...
"पुच्छ...पुच्छ, धरती से लेकर आसमान तक कुच्छ भी पुच्छ डाल...सबका जवाब देगा रे तेरा फ़ाज़ल..."
"आराधना को आपने कैसे सेट किया..."
"आराधना...."पहले तो मैं जोरो से हंसा, फिर अचानक सीरीयस हो गया और फिर कुछ देर तक सोचने के बाद बोला"इट'स आ लोंग स्टोरी ब्रो...सौ साल लग जाएँगे इसे बयान करने मे..."
"ठीक है कोई बात नही, अब मैं सोने जाता हूँ...बहुत चढ़ गयी है मुझे..."बोलकर पांडे जी लड़खड़ाते हुए उठे और दो कदम चलने के बाद धडाम से गिर पड़े...
"यहाँ ग्रॅविटी की वॅल्यू ज़्यादा कैसे है, जो मैं अपने आप गिर गया..."ज़मीन मे लेटे-लेटे पांडे जी बोले"अरमान भाई, कुच्छ ग्यान क़ी बाते बताओ, जिससे मुझे गिल्टी फील ना हो कि मैने इतनी ज़्यादा क्यूँ पी ली..."
"ग्यान की बाते...मैं बताता हूँ.."मेरे मुँह खोलने पहले अरुण बोल पड़ा"देख, कट..आइरन, आइरन..नही, आइरन कट आइरन, डाइमंड कट डाइमंड. अग्री..."
"अग्री..."
"ठीक इसी तरह दारू कट दारू, इसलिए यदि दारू का नशा हटाना है तो और पियो...बोले तो खूब पियो, खूब जीिइईयूऊऊऊ...."बोलते हुए अरुण भी लुढ़क गया....
राजश्री पांडे और अरुण के लुढ़कने के बाद मैने सौरभ को देखा, वो भी खर्राटे भर रहा था...
"आइ आम दा लास्ट मॅन ऑन दिस प्लॅनेट....साला ज़िंदगी बर्बाद कर दी मैने अपनी....लेकिन फिकर नोट, कल से दारू को हाथ तक नही लगाउन्गा....अबे उठो ना, मुझे बात करने का मन कर रहा है..."
मैने अरुण,सौरभ और राजश्री पांडे को बहुत उठाने की कोशिश की लेकिन वो तीनो उठे नही...थक हार कर मैं दीवार की टेक लेकर वापस बैठा और डाइरेक्ट बोतल को मुँह से लगा लिया...
"अमिताभ बच्चन कहता है कि दारू पीने से लिवर खराब होता है, लेकिन साला यहाँ तो लिवर ही खराब नही हो रहााआआ...जबकि...जबकि..जब....एश आइ लव यू, यार..पट जेया ना यार..छोड़ दे उस गौतम को,..साला बहुत बड़ा कमीना है, मुझसे प्यार कर फिर देख कि प्यार किस चीज़ का नाम है.साला मेरी तो किस्मत ही झंड है, मुझे प्यार भी उस लड़की से हुआ, जो दूसरे के प्यार मे जान देने की कोशिश कर चुकी है...आइ..लव यू, एश...लव यू...ल्ल्लूव्ववी यू..ल्लूव्वी...."इसी के साथ मेरा भी बँटा धार हो गया.....
Reply
12-15-2018, 12:39 AM,
RE: Porn Hindi Kahani दिल दोस्ती और दारू
वैसे तो मेरे साथ बहुत सारी दिक्कते जुड़ी हुई है लेकिन जैसे सपने मुझे आते है, उनकी तो बात ही अलग है...मैं ज़िंदगी मे सबसे ज़्यादा तीन बार डरा हूँ और तीनो बार मैं नींद मे था.यानी कि मेरे पास ऐसे तीन डरावने सपने है, जो मेरी अब तक फाड़ कर रख देते है....अधिकतर सपने मे देखे गये इन्सिडेंट होश मे आने के बाद याद नही रहते, लेकिन जिन तीन सपनो की बात मैं कर रहा हूँ, उनका हर एक पल जहाँ मे ऐसे बसा है जैसे वो आम सपना ना होकर (आ+ ब )²=आ²+ 2अब +ब² का फ़ॉर्मूला हो....बोले तो फुल याद है...

मेरे टॉप थ्री हॉरिबल ड्रीम मे थर्ड नंबर आता है 'ए डेड ड्रीम' का जिसके बारे मे आप सब जानते ही होगे...दूसरा नंबर आता है, उस सपने का जिसमे मैं रात को अचानक किसी जंगल मे होता हूँ और बस भागता रहता हूँ, फिर अचानक मुझे एक मंदिर दिखता है, जहाँ कुच्छ लोग आदमियो की बलि दे रहे थे....जब मैं भाग कर वहाँ पहुचता हूँ तो वो लोग मुझे देख लेते है और मुझे पकड़ कर रस्सी से बाँध देते है....उस वक़्त वहाँ उस मंदिर मे कुल चार लोग थे जिनके चेहरे मुझे आज तक याद है...उन चारो मे से एक, एक आदमी का गला हलाल करता है और मुझे कहता है कि "अगली बारी तेरी है, तैयार हो जा...."और उसके बाद फटाक से मेरी नींद खुल जाती है और ये सब सपना था, इसके लिए मैं उपरवाले का दिल ही दिल मे शुक्रिया अदा करता हूँ....थ्री हॉरिबल ड्रीम की इस लिस्ट मे फर्स्ट नंबर पर जो सपना है उसमे मैने खुद को मरते हुए देखा है और मैं बता नही सकता कि खुद को मरते हुए देखना कैसा लगता है...आइ थिंक आइ शुड स्टार्ट आ थ्रेड वित टाइटल'माइ हॉरिबल ड्रीम्स' 

वेल, मैं ये बकवास इसलिए कर रहा हूँ क्यूंकी उस रात जब मैं पेलम-पेल दारू पीकर...दीवार का सहारा लेकर सोया था तो मुझे सपने मे आतिन्द्र दिखा....ये मेरे साथ ऐसा पहली बार हो रहा था कि जब कोई ड्रीम जो मैं पहले देख चुका हूँ, वो दोबारा से मुझे दिखाई दे रहा था...मतलब कि जिस सपने को मैने 5 साल पहले देखा था, वो रिपीट हो रहा था....सीन वही था, मैं नींद से उठा तो शाम हो चुकी थी और हॉस्टिल मे शोर मचा हुआ था, पहले की तरह मैने इस बार भी खुद को कोसा कि मैं इतनी देर तक कैसे सोता रहा और फिर जिस तरफ हल्ला मच रहा था उस तरफ भागा, जहाँ बाथरूम मे आतिन्द्र की बॉडी लटकी हुई थी...उसके बाद मेरी नींद खुली और सीन अब भी बिल्कुल वैसा ही था, जैसे की 5 साल पहले था...मेरे होश मे आते ही मेरा घुटना दीवार पर ज़ोर से टकराया था. 

वैसे कहने को तो सब कुच्छ वैसा ही था और मेरी फट भी वैसी ही रही थी लेकिन इसमे एक बात जो नयी थी वो ये कि मुझे अबकी बार मालूम था कि ये एक सपना है और सिर्फ़ एक सपना....जैसा कि मेरे इस 'ए डेड ड्रीम' की एंडिंग 5 साल पहले हुई थी, वैसी अब भी हो रही थी, यानी की जिस हॉल मे मैं खाना खा रहा था वहाँ से सभी लड़के अचानक ही एका-एक गायब हो गये और मेरा वो मरहूम दोस्त ज़मीन मे बिखरे हुए अनाज के दानो को अपने हाथो से बटोर रहा था.....
"अरमान..."अपनी लाल आँखो से उसने मुझे देखा....

"तंग आ चुका हूँ इस म्सी से, बीसी जब देखो तब टपक पड़ता है...."मेरा ये बोलना मेरे सपने मे ये दूसरी नयी चीज़ थी, जो 5 साल पहले नही हुआ था....

"तू आतिन्द्र...मैं तेरी माँ चोद दूँगा, यदि दोबारा मुझे कभी दिखा तो...बीसी हर चीज़ की कोई लिमिट होती है .बेटा अभी हॉस्टिल के लौन्डो को बुलवाकर तेरी रूह का रेप कर दूँगा....और ये तू जो खाना बटोर रहा है उसे क्या अपने गान्ड मे भरेगा, चल निकल, लवडा मुझे डराने आया है...."हँसते हुए मैने सपने मे कहा और इधर दूसरी तरफ नींद मे हँसते हुए मेरी नींद खुली.....

"अब कभी नही आएगा बीसी सपने मे, फाइनली आइ वॉन..."हाथ उठाते मैने खुद को शाबाशी दी और उठ कर खड़ा हुआ....
अभी सिर्फ़ 6 बजे थे, इसलिए मैने जॅकेट ताना और एक सिगरेट जला कर हॉस्टिल के बाहर आ गया....हॉस्टिल के बाहर आकर मैं सड़क पर चलते हुए गर्ल्स हॉस्टिल की तरफ बढ़ा....

वैसे तो मेरी नींद 9 बजे के पहले कभी नही खुलती थी लेकिन आज जब मैं सुबह 6 बजे उठकर बाहर आया तो मुझे मेरे कॉलेज के बारे मे कुच्छ अलग ही चीज़े मालूम हुई, जैसे की हॉस्टिल की कुच्छ लड़किया, शॉर्ट्स पहनकर सुबह-सुबह दौड़ने जाती है....कुच्छ लड़किया अपने स्पोर्ट की प्रॅक्टीस भी करती है, जिनमे लड़के भी शामिल रहते है.....

"अब समझा साला कि ऐसे चूतिया लोग माल कैसे पटा लेते है...ये फले, सुबह-सुबह लड़कियो के हाथ मे अपना लंड थमा देते है जिसे लड़किया थाम भी लेती है....बीसी कल से मैं भी सुबह 6 बजे उठकर प्रॅक्टीस मे जाउन्गा...एक ना एक तो ज़रूर पटेगी..."
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हॉस्टिल के बाहर मैं तक़रीबन आधा घंटा तक टहलता रहा और फिर वापस हॉस्टिल आ गया...हॉस्टिल आकर मैने अरुण और सौरभ को भी अपना ये प्लान बताया, लेकिन उन्होने सॉफ मना कर दिया की वो 6 बजे नही उठेंगे,,..
"बेटा, यदि सुबह 6 बजे कटरीना कैफ़ अपना चूत भी दिखा रही हो ना तब भी मैं नही जाउन्गा....9 बजे उतना मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है,जिसे कोई नही छीन सकता "अरुण टूथपेस्ट उंगली से घिसते हुए बोला"और लवडे, आज कॉलेज से आते टाइम याद दिलाना ब्रश लेना है..."
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कॉलेज मे सब कुच्छ बाकी दिन की तरह नॉर्मल ही हुआ सिवाय मेरी और आराधना की बात-चीत के अलावा...मतलब मैने उससे पहली बार छूट कहा कि मैं उसके साथ सेक्स करना चाहता हूँ और उसने भी फुल जोश के साथ हां कहा और फिर टाइम फिक्स हो गया....टाइम लंच के बाद का था और वेन्यू अवधेश का रूम था, अवधेश एक फ्लॅट लेकर कॉलेज के ही कुच्छ लड़को के साथ रहता था...अवधेश ने मुझे लंच मे ही अपने फ्लॅट का अड्रेस, फ्लॅट की की के साथ दिया और कहा की कॉलेज ख़त्म होने के तक मैं अपना काम निपटा लूँ और ये बात मैं किसी को ना बताऊ, ख़ासकर के उसके फ्लॅट पार्ट्नर्स को......
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"तुझे एड्स वगेरह तो नही है ना..."अवधेश और उसके दोस्तो के फ्लॅट मे पहूचकर मैने आराधना से पुछा....
हम दोनो फ्लॅट के अंदर आए और मैने दरवाज़ा लॉक किया....
"तुम ये सब क्यूँ पुच्छ रहे हो..."
"क्यूंकी मैं कॉंडम नही लाया...."
"तो तुम्हे डर है कि यदि मेरे ज़रिए तुम्हे एड्स हुआ तो तुम मर जाओगे..."
"डर मुझे मरने का नही है जानेमन...डर मुझे एड्स होने के बाद की लाइफ का है...."अपना पॅंट उतारते हुए मैने कहा....
"मेरे कपड़े तुम उतारोगे या मैं खुद उतारू..."बिस्तर पर लेटे हुए आराधना बोली...
"उसकी फिकर तुम बिल्कुल मत करो, वो तो मैं उतार ही लूँगा, लेकिन पहले ये बता की मुँह मे लेगी क्या....बहुत मज़ा आएगा.....मुझे और शायद तुझे भी..."
"मैने पहले ही कहा है सियइररर..."बिस्तर पर उठकर बैठते हुए आराधना बोली...

वैसे तो मैं कोई दरियादिल इंसान नही हूँ लेकिन ये बोलते हुए आराधना ने जैसे अपना मुँह बनाया उसे देखकर मैने सोचा हटाओ यार, अगली बार कर लेंगे वैसे भी अभी तो आधा 8थ सेमेस्टर बाकी है.....

"ओके..."बोलकर मैं भी उसके बराबर बिस्तर मे बैठा और आराधना को देखने लगा....

वैसे तो मेरे पास लॉजिक, ट्रिक्स का पिटारा है .लेकिन गूगल महाराज की कृपा से मैं थोड़ा बहुत आइ रीडिंग भी कर लेता हूँ,जो कि अधिकतर सही नही होती, लेकिन कभी-कभी सच होती है....आराधना इस वक़्त मुझे देखकर काँप रही थी.मैने उसकी तरफ देखा वो थोड़ा सा घबराई हुई थी, जैसे की ये उसका फर्स्ट टाइम हो....
"इसके पहले किया है..."
"ना...म्म हां...एक बार..."
"ग्रेट..."थोड़ा, पीछे हट कर मैने पुछा"कहा, कब, किसके साथ..."
"वो...गाँव मे एक लड़के ने जबर्जस्ति की थी खेत मे...."काँपते हुए आराधना बोली...
"टू बॅड, उसके बाद क्या हुआ..."
"उसके बाद मैं सिर्फ़ बदनाम हुई और कुच्छ नही हुआ...."
"ऐसा क्या..."इसके बाद मैने आगे कुच्छ नही पुछा, क्यूंकी मैने अंदाज़ा लगा लिया था कि जिस लड़के ने आराधना के साथ जबर्जस्ति चुदाई मचाई थी, वो कोई बड़े बाप का लौंडा होगा और फिर या तो उन लोगो ने आराधना के बाप को धमकी दी होगी या फिर पैसे....फिलहाल मैं यहाँ आराधना का दिल बहलाने नही आया था इसलिए मैं इस टॉपिक मे और ना घुसते हुए, आराधना की तरफ घुमा....

"ओके, लेट'स स्टार्ट अरमान, चोद दे इसको अब..."मैने खुद से कहा और आराधना के होंठ की तरफ अपने होंठ स्लोली मोशन मे बढ़ाए...कि तभी आराधना ने अपना चेहरा उपर किया....
मैने आराधना को देखा और फिर वो सोच क्या रही है ये जानने के लिए मैने उसकी आँखो मे देखा....आराधना इस वक़्त किसी उलझन मे नही थी कि वो मुझे रोके या नही, बल्कि वो तो पूरी तरह तैयार थी और ना ही उसे किसी भी तरह की झिझक थी...लेकिन एक घबराहट उसकी आँखो को ढक कर बैठी हुई थी...और मेरा ये समझ पाना कि आराधना क्या सोच रही है, बहुत मुश्क़िल हो गया,इसलिए मैने थोड़े देर के लिए अपने दिमाग़ को आराम दिया और वापस आराधना के होंठो की तरफ बढ़ा...इस बार मैं सफल हुआ और कुच्छ देर की शांति के बाद आराधना के होंठ भी हरकत करने लगे,फिर मेरी तरह एक दम से तेज़ हो गये....
आराधना के होंठो को अपने होंठो से मसल्ते हुए ही मैने उसे बिस्तर पर नीचे लिटाया और मैं खुद उसके उपर आ गया...हम दोनो की ये लीप किस्सिंग का प्रोग्राम बीच-बीच मे रुकता और फिर थोड़ी देर तक एक-दूसरे को देखकर फिर शुरू हो जाता....
अब मैं आराधना के उपर पूरी तरह से समा गया और अपने हाथ से कभी उसकी छातियों को मसलता तो कभी उसकी चूत को...मैं जब भी आराधना की चूत को उसके जीन्स के उपर से सहलाता तो वो थोड़ा उच्छल जाती थी और अपने जाँघो को इधर-उधर करके अपनी चूत को छिपाने की कोशिश करती....लेकिन जब मैने उसके जीन्स के हुक को खोला तो वो शांत हो गयी. उसने किस का रिप्लाइ देना भी बंद कर दिया और फिर से अपनी अजीब नॅज़ारो से मुझे देखने लगी....
"व्हाट..."आराधना को इस तरह देखता हुआ पाकर मैने पुछा...
"कुच्छ नही..."
"मुझे मालूम था..."बोलकर मैने आराधना की जीन्स उसके घुटनो तक नीचे खिसका दी और उसकी पैंटी के अंदर हाथ डाल कर उसकी चूत सहलाने लगा....साथ मे वो वर्ल्ड फेमस काम भी किया जिसे लोग 'उंगली करना ' कहते है 
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आराधना की जीन्स घुटनो तक नीचे खिसका कर और पैंटी के अंदर हाथ डालकर उसकी चूत सहलाते हुए, उसकी चूत मे उंगली करते हुए मैने अपने दूसरे हाथ से उसके टॉप को उपर गर्दन तक चढ़ा दिया और ब्रा के उपर से ही उसके बूब्स पर मुँह फेरने लगा....
आराधना की चूत से पहले सिर्फ़ दीपिका मॅम की चूत मे मैने उंगली की थी और उस वक़्त मुझे अचानक उसकी याद आने लगी थी....आराधना भले ही, दीपिका की तरह हॉट माल ना हो लेकिन आराधना की चूत,दीपिका की चूत से काई गुना मस्त थी, ये मैने उंगली करते वक़्त ही जान लिया था....

आराधना के उपर से मैं एक बार फिर उठा और उसकी जीन्स जो कि घुटनो मे अटकी थी उसे पैरो के बीच से पूरा निकाला...यही काम मैने उसकी पैंटी के साथ भी किया, और आराधना को पीछे पलटा कर उसकी ब्रा भी उतार कर फेक दिया और आराधना के उपर अबकी बार नंगा चढ़ गया...अब हम दोनो ही बिना कपड़े के थी और आराधना को स्मूचिंग करते वक़्त मेरा लंड कभी उसकी चूत से टच होता तो कभी उसकी जाँघो से...कुच्छ देर तक ऐसा ही करते रहने के बाद आराधना ने अपने हाथ से अपनी चूत को फैलाया और मुझे इशारा किया....
"थॅंक यू..."कहते हुए मैने अपना लंड आराधना की चूत के मुंहाने के पास टीकाया .
सच बताऊ तो उस वक़्त मैं बहुत खुश था, पता नही क्यूँ पर मैं था....मुझे आराधना से प्यार नही था लेकिन फिर भी मैं खुश था...बहुत खुश था...

"डू यू रियली लव मी अरमान....सर.."जब मैं अपना लंड,आराधना की चूत मे पेलने वाला था, तभी उसने पुछा...
"यॅ, ओफ़कौर्स, आइ लव यू..."बोलते हुए मैने अपना लंड आराधना की चूत मे घुसा दिया और अपनी आँखे बंद कर ली...उसके बाद मेरी स्पीड बढ़ते समय के साथ बढ़ती गयी और जब मैने अपनी आँखे खोली तो देखा कि आराधना की भी आँखे बंद थी...वो अपने दोनो हाथो से मुझे कसकर पकड़े हुए थे और मैं लगातार अपना लंड उसके छूट के अंदर-बाहर करे जेया रहा था......हमारे इस पूरे खेल के दौरान आराधना ने अपनी आँखे बंद करके रखी हुई थी और उसने अपनी आँखे तभी खोली, जब ये खेल ख़त्म हुआ...और उसने एक बार फिर मुझसे पुछा...
"डू यू रियली लव मी,अरमान....सर.."
मुझे इस तरह के देखने के उसके अंदाज़ ने जैसे पहली बार मुझे ये अहसास कराया कि मैने अभी कुच्छ ग़लत किया, कुच्छ ऐसा जो कि मुझे नही करना चाहिए था.लेकिन फिर भी मैने किया.....यही सवाल जब आराधना ने मुझसे पहली बार पुछा था,तब भी बहुत देर नही हुई थी...यदि मैं खुद पर कंट्रोल करता और रुक जाता तो शायद वो कुच्छ नही होता, जो कि होने वाला था....
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"अपनी ब्रा,पैंटी पहन और चल...5 बजे के पहले हमे पहुचना है..."
"लेकिन अभी तो सिर्फ़ 3 बजे है..."अपनी पैंटी को अपने जाँघो के बीच फँसा कर आराधना बोली...
"तो क्या पूरे 4:59 मे ही इस रूम को छोड़ेगी....चल जल्दी, मुझे कुच्छ काम है..."
"ओके..चिल्लाते क्यूँ हो..."
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अवधेश के रूम से निकलकर मैने आराधना को हॉस्टिल के पास छोड़ा और कॉलेज पहूचकर बाइक और रूम की कीस उनके मालिको को ट्रान्स्फर करके, हॉस्टिल की तरफ बढ़ा....

इतने दिनो बाद अपनी प्यास शांत करके मैं जैसे खुश के मारे फूला नही समा रहा था...दिल कर रहा था कि नाचते हुए हॉस्टिल जाउ, पूरे रास्ते भर पटाखे फोड़ू...लेकिन फिलहाल मैने ऐसा कुच्छ नही किया क्यूंकी इस वक़्त मैं कॉलेज मे था, जहाँ मेरी बहुत इज़्ज़त थी....
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"मुझको हिलाने दे,दो बूँद टपकाने दे...
अपनी चूत मे मुझे लॉडा घुसाने दे...
यो..
चुद रही है ना तू, चोद रहा हूँ मैं....
चुद रही है ना तू...तू..तू..."एश को सामने देखकर मैं रुका....
एश को सामने देखकर एक पल मे तो मुझे जैसे हार्ट अटॅक ही आ गया कि ये मैने क्या कह दिया, लेकिन फिर याद आया कि मैं तो गुनगुना रहा था, उसे कहाँ से सुनाई देगा...एसस्स...चल बेटा, अरमान...रोल मे आजा...

"तूमम्म...शायद मेरी दिए हार्ड फन होगी, जो कि मेरा ऑटओग्रॅफ लेने के लिए कल से इस रास्ते पर खड़ी होगी...पता नही लोग मेरा एक ऑटओग्रॅफ पाने के लिए ना जाने क्या-क्या करते है...लाओ, पेन...कॉपी दो..."
"हो गयी नौटंकी...अब चले, छत्रपाल सर ने बुलाया है..."
"वाइ ? आइ'म नोट इंट्रेस्टेड..."
"लुक..."
"लुकिंग..."
"सीधे से चलते हो या मैं जाकर छत्रपाल सर को बोल दूं कि अरमान को फेरवेल पार्टी की आंकरिंग करने मे कोई इंटेरेस्ट नही है..."
"एक मिनिट...पता नही मेरे कान क्यूँ बज रहे है...मुझे अभी आंकरिंग वर्ड सुनाई दिया...वो क्या है ना कि गोल्डन जुबिली के फंक्षन मे आंकरिंग ना कर पाने का सदमा जो मुझे लगा था, उसका असर अभी तक है...खैर तुम बोलो, क्या बोल रही थी..."
"हे भगवान....अब इसे कैसे समझाऊ..."

"क्यूँ खाली-फोकट मे भगवान का गला दबा रही हो...ये लो मेरा नंबर 7415****** . और जब भी कोई प्राब्लम हो,मुझे कॉल कर लेना...अभी मैं चलता हूँ, क्यूंकी आधे घंटे बाद मेरी अमेरिका के लिए फ्लाइट है...."एश के दिमाग़ का भरता बनाकर मैं आगे बढ़ा, लेकिन फिर सोचा कि एक पंच और मारा जाए, इसलिए मैं पीछे पलटकर तेज़ आवाज़ मे बोला"डॉन'ट वरी, मैं कल ऑटओग्रॅफ दे दूँगा....इसलिए अब यहाँ खड़ी मत रहो,घर जाओ,तुम्हारे मम्मी-डॅडी परेशान हो रहे होंगे..."
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एश को पूरी तरह धराशायी करके गाना मैने जहाँ छोड़ा था, उसे वही से स्टार्ट किया...
"चुद रही है ना तू, चोद रहा हूँ मैं...."

"ले बताना बे, तूने कल आराधना को चोदा क्या...."भारी उत्सुकता के साथ अरुण ने तीसरी बार पुछा और मैने उसी उत्सुकता के साथ तीसरी बार भी अरुण को टाल दिया.
"ले बताना बे, गान्ड मरा क्या....मुझे भी दिलाना..."
"तू बोसे ड्के, खाना खाने देगा मुझे...."
"इतना झल्लाता क्यूँ है, नही बताना तो मत बता..."
"जब तीन बार मना कर दिया तो समझ जाना चाहिए ना कि मैं नही बताना चाहता, अब क्या लवडा मैं तेरे सामने अपने लंड की कथा बांचू...बाकलोल..."
"तू गान्ड मरा और तू..."डाइनिंग टेबल मे दूर बैठे एक लड़के पर बरसते हुए अरुण चिल्लाया"तू लवडे रोटी पास करेगा या सारी गान्ड मे भरेगा...."
"तो आकर ले जा ना, तेवर किसको दिखाता है..."
"चुप चाप, रोटी लेकर इधर आ,वरना जो हाल तेरे रूम पार्ट्नर कलिए का है,वही हाल तेरा भी करूँगा....."
अरुण के इन अल्फाज़ो ने उस लड़के पर जबर्जस्त असर किया और उस लड़के ने ठीक वैसा ही किया जैसा कि अरुण ने करने को कहा था.....
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12-15-2018, 12:39 AM,
RE: Porn Hindi Kahani दिल दोस्ती और दारू
"अरमान भाई, मैं हॉस्टिल छोड़ रहा हूँ...सोचा कि आपसे मिलता चलूं...."सेकेंड एअर का एक लड़का मेरे सामने खड़े होकर बोला....
"क्यूँ बे, तुझे क्या हुआ...."
"बहुत कुच्छ हुआ है अरमान भाई, ये साले सीनियर्स....जब भी इनका मूड होता है सेकेंड एअर वालो को लाइन मे खड़ा कर देते है और फिर जानवरो की तरह मारते है...ग़लती हमारे बॅच से किसी ने भी की हो, मार सबको पड़ती है...किसी भी सीनियर का मूड खराब हो, तो मार पड़ती है, किसी म्सी की म्सी गर्लफ्रेंड ने उसे कुच्छ कह दिया तो वो बीकेएल आ जाता है अपनी *** चुदाने....यदि इनको नींद नही आ रही हो तो तब भी भुगतना हमे ही पड़ता है और ये साले तब तक हमे ठोकते है,जब तक इन्हे नींद ना आ जाए.बीसी उल्लू की औलाद है, दो दिन से कुत्तो ने सोने नही दिया....अब रात भर जागकर लड़का क्लास जाएगा तो क्लास मे नींद आना लाज़िमी है और यदि बाइ चान्स क्लास मे झपकी मारते हुए किसी टीचर ने देख लिया तो फिर उसकी राम-कहानी अलग......अभी कल की ही बात है, आज मिडट्म था तो मैं 1 बजे तक पढ़कर सो रहा था कि 2 बजे वो चूतिया महंत आकर मुझे मारने लगा और जब मैने उससे पुछा कि क्यूँ मार रहा है तो बोलता है कि ऐसे ही मार रहा हूँ...बीसी ये क्या तमाशा है, हमलोग भी इंसान है, कोई रंडी की चूत नही जो कोई भी आए और चोद के चला जाए.....मेरे बाप ने बहुत कहा था कि मत मत ले, मत ले...लेकिन नही लवडा हमको ही रामानुजन बनने का बड़ा शौक था, और आज वो शौक,बड़े शान से उतर रहा है..."
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12-15-2018, 12:39 AM,
RE: Porn Hindi Kahani दिल दोस्ती और दारू
पहले तो मैं उसकी बात सुनकर बहुत हंसा लेकिन जब अरुण ने इशारा करके चुप रहने को कहा तो मैं ऐसे सीरीयस हुआ जैसे कि मुझपर किसी ने गन तान के रखी हो और बोल रहा हो कि"ले बेटा अब हंस कर दिखा...."

"तू कहना क्या चाहता है....तू कहीं का तुर्रमखाँ है क्या...सबको ये झेलना पड़ता है, बीसी क्या हमने नही झेला ये सब...बेटा हमारा टाइम पर तो नंगा करके छत पर ले जाते थे और लाइन मे खड़ा करके एक-दूसरे के लुल्ली हाथ मे पकड़वा कर बोलते थे...लो बेटा ट्रेन चलाओ...."उसको बैठाकर अरुण बड़े शान से बोला, जबकि इसमे शान वाली कोई बात नही थी....
"बात वो नही है कि उसने मुझे मारा....लेकिन उसने मुझे नींद से उठाकर मारा, बात ये है....सामान मेरा सब पॅक है, बस आपको बताने आया था...."
"ना दिल पे ले, ना मुँह मे ले...लंड मे ले और जाकर अपना सामान वापस रख दे..."
"फ़ायदा क्या, आज रात फिर कोई दूसरा आएगा और फिर मारेगा..."
"तो हमलोग मर गये है क्या...अब से कोई भी आए तो बोल देना कि मिस्टर.अरमान से मिल ले..."
"तू क्या कही का तोपचंद है जो तेरा नाम ले...मेरा नाम लेना बे...बोल देना कि'यदि तुम लोगो ने मुझे छुआ भी तो अरुण तुमलोगो की मदर फक्किंग कर देगा...."
"अरमान बोलना बे, ज़्यादा पवर है इस नाम मे....इस झाटुए को तो कोई पहचानता भी नही..."
"यदि तूने इसका नाम लिया,तो अगले दिन से मैं तुझे मारूँगा..."
"इधर सुन बे..."अरुण का हाथ मरोड़ कर मैने कहा"ए आर यू एन= 4 लेटर और आ र म आ न=5 लेटर...मेरे नाम मे ज़्यादा दम है...तू जा अपना सामान वापस वही रख दे जहाँ से उठाया था....बाकी मैं देख लूँगा...."
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उस लड़के के जाने के बाद अरुण ने फिर से आराधना का टॉपिक छेड़ा...
"यार आराधना की चूत दिलाना, एक खंबा दूँगा...."
" दुनिया चाँद पर पहुच गयी और तू अबतक चूत पर अटका हुआ है....चल जल्दी, कॉलेज के लिए लेट हो रहे है..."
हमलोग एक दम टाइम पर कॉलेज पहुँचे थे या फिर कहे कि थोड़ा पहले ही पहुच गये थे...टीचर लापता था इसलिए टाइम पास करने के लिए इधर-उधर की फालतू बाते कर रहे थे...जैसे कि'अबे उस लड़की की गान्ड देख चोद-चोद कर चूतड़ का चबूतरा बना दिया है...रंडी है लावदि..माँ-बाप ने यहाँ बी.टेक करने भेजा है और ये यहाँ सी.टेक कर रही है....."

मेरी नज़र एक दूसरी लड़की की गान्ड पर जा टिकी और मेरे मुँह से अनमोल वचन निकालने ही वाले थे कि दरवाजे पर दस्तक हुई और किसी ने मेरा नाम पुकारा.....मैं उस समय फुल जोश मे था इसलिए बिना दरवाजे की तरफ देखे मैं ये बोल गया कि'बाद मे आना टाइम नही है' लेकिन फिर मुझे लगा कि ये आवाज़ किसी लड़की की है और फिर मेरे सिक्स्त सेन्स ने मुझे उस आवाज़ की पहचान एश के रूप मे करती,तब मेरी फटी और मैं धीरे-धीरे, स्लो मोशन मे अपना प्यारा सा मुखड़ा दरवाजे की तरफ किया और खड़ा होकर अरुण पर चिल्लाया...

"बोला ना बे तुझे कि बाद मे ये सब बताना, अभी मेरे पास टाइम नही है...एश तुम एक मिनट. रूको,मैं अभी आया...."
(ये पक्का आज मुझे आइ लव यू बोलेगी, आइ नो शी लव्स मी, लेकिन कहने मे शरमाती है...हाउ स्वीट 

जब एक कसाई के बकरे को अच्छा खाना मिलने लगता है तो वो बकरा बहुत खुश होता है और सोचता है कि उसका मालिक कितना अच्छा है, जबकि कहानी इसके ठीक उलट होती है जिसका अंदाज़ा उस बकरे को थोड़े दिनो बाद लगता है,जब उसके काटने की बारी आती है....

कॉलेज के उन अंतिम दिनो मे मेरा भी हाल कुच्छ उसी बकरे की तरह था जिसे भरपूर खाना मिल रहा था.मेरे जैसे लौन्डो की सबसे बड़ी डिमॅंड होती है चूत...बीसी रात यही सोचते-सोचते गुज़ार देते है कि कहीं से चोदने को मिल जाए .लेकिन मेरी डिमॅंड थी रूम और मेरी रात ये सोचते-सोचते गुजरती थी कि बीसी अब किसका रूम जुगाड़ किया जाए ताकि आराधना को चोद सकूँ.....खैर कहानी मे आते है....

उस टाइम जब मैं एश के साथ बाहर आया तो मुझे ये तो पक्का यकीन था कि कुच्छ ना कुच्छ लफडा है इसलिए मैं फ्लॅशबॅक मे गया और याद करने लगा कि अबकी बार मैने क्या किया, जो एश जानेमन मेरा पता ढूंढते-ढूंढते मेरे क्लास तक पहुच गयी.....

"कुच्छ बकेगी भी, सॉरी मेरा मतलब कुच्छ बोलेगी भी कि ऐसे ही साइलेंट मोड मे रहेगी....कहीं तू मेरा खून तो नही करने वाली ना..."

"मन तो मेरा यही करने का कर रहा है, लेकिन प्राब्लम ये है कि मेरे पास चाकू नही है,वरना खून तो कब का हो चुका होता..."

"ओये चाकू मार के बेज़्ज़ती करेगी मेरी, पूरा का पूरा तलवार घुसेड़ना...फला कोई इज़्ज़त ही नही रखी...खैर,वो सब छोड़ और टॉपिक मे आ, "
"फेरवेल फंक्षन मे आंकरिंग करने के लिए जो-जो इंट्रेस्टेड है,उसे छत्रपाल सर ने बुलाया है...."
"तो मैने कब कहा कि मैं इंट्रेस्टेड हूँ...भाड़ मे जाए छत्रपाल और भाड़ मे जा तू,उूुुुउउ.....तुषार कपूर "
"छत्रपाल सर ने कहा है कि जिन्होने गोल्डन जुबिली मे आंकरिंग की थी, उनमे से दो ग्रूप को सेलेक्ट करना है...और कसम से मुझे तुम पर इतना गुस्सा आ रहा है कि बता नही सकती....इसलिए अब सारी ज़िम्मेदारी तुम्हारी है, जाओ और कुच्छ भी करके हमारी टीम का सेलेक्षन कर्वाओ....वरना..."
"क्यूँ दिल पे ले रही है इतना और आंकरिंग नही करेगी तो मर नही जाएगी...इसलिए तू अपनी क्लास मे जा और मैं अपनी क्लास मे जाता हूँ...खम्खा मेरा कीमती वक़्त बर्बाद कर दिया..."वहाँ से अपनी क्लास की तरफ चलते हुए मैने कहा....
"यदि तुमने ऐसा किया तो मैं तुमसे बात नही करूँगी..."
"तो मत कर, कौनसा तू मुझे दारू खरीद के देती है..."अपना को-ओर्डीनटेस ज़रा सा भी चेंज किए बिना मैं क्लास की तरफ बढ़ता रहा.....
"अरमान, आइ लव यू..."
"ये क्या था बीसी ...".डाइनमिक सिचुयेशन से डाइरेक्ट स्टॅटिक सिचुयेशन मे आते हुए मैने खुद से पुछा....एश के होंठो से निकले ये चार शब्द'अरमान, आइ लव यू' मुझ पर हाइड्रोजन बॉम्ब की तरह फटे और मेरे अंदर त्राहि-त्राहि मच गयी....अचानक से मेरे बॉडी मे ब्लड सर्क्युलेशन इतना बढ़ गया कि पूरा शरीर लाल हो गया और साथ मे टेंपरेचर जो बढ़ा वो अलग....मुझे ऐसा लगने लगा जैसे मैं धीरे-धीरे कोमा मे जा रहा हूँ.मेरे सोचने समझने की सारी क्षमता एक पल मे जवाब दे गयी,कुच्छ समझ मे ही नही आ रहा था कि किधर देखु, किधर ना देखु...पीछे मुड़ु या ना मुड़ु...एश से कुच्छ बोलू या ऐसे ही मूर्ति की तरह खड़े होकर उसका इंतज़ार करू....हालत तो ये थी कि लवडा अपना नाम भी लेते हुए जीभ लड़खड़ा रही थी...हालत तो ये थी कि मैं बीच-बीच मे साँस लेना भी भूल जा रहा था और जब एका-एक पेल के साँस लेता तो ऐसी आवाज़ आती जैसे मैं अस्थमा का मरीज हूँ और खुशी तो पुछो मत...दिल कर रहा था कि होड़ को बाहर निकाल कर खूब पेलू और उससे बोलू की "बोल लवडे, और असाइनमेंट देने के लिए टीचर्स को बोलेगा...तेरी माँ का...."

आइ,एल,ओ,वी,ई,Y,ओ,यू आल्फबेट से बने जिन शब्दो को सुनने के लिए मैने चार साल बिता दिए थे और जिन शब्दो को सुनने की मुझे अब उम्मीद तक नही थी, आज वो शब्द मेरे कान के रास्ते सीधे दिल तक पहुच गये थे, जिसके कारण मेरी हार्टबीट इतनी ज़्यादा तेज़ हो गयी की मुझे लगने लगा कि अब मेरा हार्ट फैल हो जाएगा, अब मरा.....लेकिन जब अगले 5 मिनिट तक मैं ज़िंदा रहा तो मैने खुद के सिस्टम को वापस ऑन किया,जो कि एश के कारण कुच्छ देर पहले शट डाउन हो गया था.....

मुझे उस वक्त कुच्छ भी समझ नही आ रहा था कि क्या बोलू,क्या पुच्छू, क्या करू,क्या सोचु और आप सभी सज्जन पुरुष और महिला कह सकते हो कि अट लास्ट मैं भी शरमाने लगा.....
"मुझे कुच्छ समझ नही आ रहा कि क्या जवाब दूं..."दिल से हँसते-मुस्कुराते और चेहरे से गंभीर होते हुए मैं बोला....
"इसमे कहना क्या है,जो सच है वो कह दो..."
"सच...."(बीसी आज मालूम चला कि सच मीठा भी होता है,वरना लोग तो सच को कड़वा बोल-बोल कर सच की माँ-बहन करते है...")
"तुम्हे देखकर नही लगता कि तुम मुझसे प्यार करते हो..."अब एश सीरीयस होते हुए बोली...
"माँ कसम, बहुत प्यार करता हूँ...यकीन ना हो....अम्म यकीन ना हो तो......"(कोई डाइलॉग क्यूँ नही सूझ रहा )
"यकीन दिलाने की ज़रूरत नही,मुझे पता है...."
"ओके...अब चल,छत्रपाल के पास चलते है...आंकरिंग तो हम दोनो ही करेंगे,फिर चाहे मुझे बाकी ग्रूप वालो का खून ही क्यूँ ना करना पड़े...लेट'स गो बेबी "
.
रास्ते भर मैं एश के सामने कुच्छ भी आंट-शन्ट बकता रहा और हम दोनो हँसते-खिलखिलाते हुए ऑडिटोरियम पहुँचे,जहाँ छत्रपाल बेसब्री से हमारा इंतज़ार नही कर रहा था 
"तुम दोनो..."हमे देखते ही छत्रपाल बोला...
"तू इधारीच रुक,अपुन अभिच आया..."
.
"गुड मॉर्निंग सर, "(तेरी *** की चूत)
"गुड मॉर्निंग"
"सर,मैने सुना की फेरवेल मे आंकरिंग के लिए आप कॅंडिडेट ढूँढ रहे है..."
"ग़लत सुना है...जिन्होने गोल्डन जुबिली मे पर्फॉर्म किया था उनमे से बेस्ट फोर को मैने सेलेक्ट कर लिया है...."
"लेकिन उस टाइम तो मैं नही था और बेस्ट मैं हूँ, यकीन ना हो तो आडिशन करवा लो अभी..."
"रियली, तुम्हे लगता है कि मुझे इसकी ज़रूरत है....मुझे और भी बहुत से काम है..."
"क्या सर, एक चान्स तो दो..."
"सर जी,चान्स तो आपने खुद मिस किया था..."
"फिर भी एक बार....."आख़िरी बार पुछते हुए मैने कहा...
"ओके...अभी आडिशन ले लेते है...तुम अगले 5 मिनिट मे अपना दिमाग़ दौड़ा कर ऐसी 5 लाइन स्टेज मे बोलो जिसे सुनकर मैं अंदर से हिल जाऊ..."
"5 लाइन ? "
"हां..."
"डॉन'ट वरी सर, 5 से कम मे ही हिला दूँगा...."बोलकर मैं स्टेज की तरफ बढ़ा....
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