चूतो का समुंदर - Printable Version

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RE: चूतो का समुंदर - sexstories - 06-08-2017

सहर मे कही...किसी रूम मे....


बॉस- तुम...तुमने मुझे यहाँ क्यो बुलाया...

आदमी- बॉस एक ख़ास बात थी...

बॉस- खास बात....इतनी खास कि मुझे बुलाना पड़ा...हाँ,...

आदमी- जी बॉस...

बॉस- तो जल्दी बको..टाइम नही मेरे पास.....

आदमी- बॉस आज एक आक्सिडेंट करवाया गया...

बॉस- तो..उससे क्या...

आदमी- उसमे जूही नाम की लड़की घायल हो गई...जिस पर...

बॉस(बीच मे )- नही...ये क्या बक रहे हो...

आदमी- बॉस..मैं सच बोल रहा हूँ...जिस लड़की पर आपने नज़र रखने को बोला था...वो वही लड़की थी...जूही...

आदमी की बात सुन कर बॉस झल्ला गया और वहाँ से बुदबुदाता हुआ निकल गया....

बॉस- इतनी हिम्मत...मैं किसी को नही छोड़ूँगा....

------------------------------------------------------------------------


सीक्रेट हाउस पर.......



रिया चीख रही थी.....


रिया- तुम...तुम कौन हो..

""मैं कोई भी हूँ...बस ये जान ले कि तेरा अंत हूँ....""

रिया- ये..ये क्या कर रही हो...तुम...आअहह...ंहिी....""

सामने वाली औरत अपना काम करती रही ..और रिया चीखती रही...

रिया- मुऊम्मय्ी....ऐसा मत करो..प्लज़्ज़्ज़...लीव मी...ंही...आअहह...मुम्मय्यी...

""तेरी माँ का भी यही हाल होगा....पर अभी तेरी बारी है...""

रिया- नहिी...मुझे छोड़ दो...मैने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है...प्ल्ज़्ज़...लीव मी...

सामने वाली औरत ने बिना कोई बात सुने चाकू निकाल लिया और ज़ोर से चला दिया....

रिया- आआअहह..मम्मूऊम्म्मय्यी..उूउउम्म्म्मम....

बस एक चीख के साथ रिया की आवाज़ बंद हो गई....

थोड़ी देर बाद औरत बाहर आई और सामने खड़े सक्श से बोली....

"" काम हो गया....अब कोई आवाज़ नही निकलेगी...हहहे...""



रात के अंधेरे मे रिचा की डोरबेल बजी....रिचा पहले से ही परेशान थी....और डोरबेल की आवाज़ से वो काँप उठी...

रिचा- क्क़...कौन...

कोई आवाज़ ना आने पर रिचा का डर बढ़ने लगा....रिचा ने हिम्मत जुटा कर 2-3 बार आवाज़ दी पर कोई जवाब नही मिला...

आख़िरकार उसने डरते हुए काँपते हाथो से गेट खोला...बाहर कोई नही था...

रिचा को थोड़ी राहत मिली पर जैसे ही उसकी नज़रे नीचे रखे बॉक्स पर गई तो वो काँप गई...

रिचा ने आस-पास देखा...कोई नही था...फिर उसने काँपते हुए हाथो से बॉक्स को उठाना चाहा ....बॉक्स भारी था...
रिचा ने जैसे -तैसे बॉक्स को अंदर खिसकाया....फिर बिजली की फुर्ती से गेट को वापिस लॉक किया और जल्दी से बॉक्स खोला...

रिचा के हाथ मे बॉक्स खोलते ही एक पेपर था...जिस पर कुछ लिखा था....

""तुम्हारे करमो की सज़ा....ये लो...खुद ही देख लो...""

इतना पड़ते ही रिचा की आँखो मे ख़ौफ़ छा गया पर उसने हिम्मत कर के बॉक्स को पूरा खोला और अंदर का नज़ारा देख कर ही उसके मूह से जोरदार खीच निकल गई...

रिचा- न्न्न्नीहिईीईईईई......मेरी बाक्ककचिईीईई.....

और रिचा फुट -फुट कर रोने लगी......

रिचा ने जैसे ही बॉक्स खोला तो डर के मारे उसकी आँखे फट गई और खून से लत्फथ कपड़े देख कर वो दहाड़ मार कर रोने लगी...

ये वही कपड़े थे जो रिया ने पहने हुए थे...जब उसका किडनॅप हुआ था...

रिचा की आँखो के सामने एक दर्दनाक मंज़र था....रिया के खून से सने कपड़े...और कपड़ो के नीचे दिखता हुआ इंसान के माँस का लोथला...

रिचा इस कल्पना मात्र से काँप जाती थी कि उसकी बेटी का कुछ बुरा हुआ...और आज अपनी बेटी की ऐसी हालत देख कर तो उसका कलेजा मूह मे आ गया...

रिचा की सोचने समझने की सकती ख़त्म हो चुकी थी...वो बस अपनी बेटी को याद कर -कर के दहाड़े मार रही थी...

रिचा- आआहन्न्न...मेरी बच्ची...ये तूने क्या किया भवाँ....आआहह.न...मुझे भी उठा ले...आआहंणन्न्....

रिचा रोती रही पर उसकी इतनी हिम्मत नही हुई कि वो बॉक्स को दुबारा देखे...और उसमे रखे कपड़ो को उठा कर चेक करे....

रिचा ने तो बस खून मे सने कपड़े देख कर ही अपनी बेटी को मरा मान लिया और उसके गम मे अपने आप को और भगवान को कोस्ति हुई रोती रही...और जब दर्द की इंतहा हो गई तो वो बॉक्स के पास ही बेहोश हो गई....

""हहहे ....क्या हुआ रिचा...आज बहुत दुखी हो...हाँ....आज तुम्हे रोना भी आ रहा है...अच्छा है....

आज तुझे पता चला होगा कि आपको को तकलीफ़ होती है तो दिल पर क्या गुजरती है...है ना....

आज तूने जाना होगा...कि बुरे करमो का फल हमेशा बुरा ही होता है ...है ना...

आज तू सोच रही होगी कि अगर तू ग़लत ना करती तो शायद तेरे बेटी को खरॉच भी आती...है ना...

पर अब ये सोच कर क्या फ़ायदा....वक़्त अपना काम कर चुका है...तेरी बेटी जा चुकी है....और तू...तू कुछ नही कर सकती सिबाए उसके गम मे आँसू बहाने के...है ना....

देख रिचा...आज अपनी आँखो से अपनी करनी का नतीजा देख ले...

ग़लती की तूने...भुगता तेरी बेटी ने...वो भी बिना किसी कसूर के...

तू...तू हमेशा से ग़लती करती आई...अरे ग़लती क्या...तू गुनाह करती आई है...पर तुझे कुछ नही हुआ...और सारे गुनाहो की सज़ा तेरी मासूम बच्ची को मिल गई...

बचपन से ही तूने ग़लत काम किए...और अपने गुनाहो पर खुश भी होती रही ...हाँ...

याद कर रिचा...याद कर...तूने क्या-क्या गुनाह किए...कितनो के विश्वास को छला...कितनो को चोट पहुँचाई...कितनो की मौत की वजह बनी ...कितने परिवरो को तोड़ा....और कितनो को मारा...

याद कर साली...याद कर....सबसे पहले तूने अपने बाप को धोखा दिया....अपनी माँ की अयाशी को उससे छिपा कर...

फिर तू खुद ही अपनी भूख मिटाने के लिए मर्द के नीचे लेट गई...और लंड से भूख मिटाने लगी...

तेरा मन तब भी नही भरा...तुझे दौलत की भूख भी लग गई...

तूने दौलत पाना चाही...पर तुझे नही मिली....तेरे मन की नही हुई तो तूने लंड का सहारा लिया...जिससे दौलत भी मिल सके....

और सीने मे पाल ली एक नफ़रत....वो नफ़रत...जिसकी वजह कोई था ही नही...ये तेरी पैदा की गई नफ़रत थी...जिसमे तू जल रही थी...

तूने उस नफ़रत की आग मे 2 परिवारों को जला डाला....एक का तो लगभग नाम-ओ-निशान ही मिटा दिया...

तेरे किए गये एक करम ने कितनो की जान ली...ये याद है तुझे...याद है ना...

पर तू तब भी नही रुकी ...अपनी चाहत के चक्कर मे तूने कितनो को अपने उपेर चढ़ाया....बुड्ढे, जवान और बच्चे...सबको...छी...

और इसी के दम पर तू दौलतमंद हो गई....पर उससे क्या....तू तब भी नही मानी...

तूने बेचारे अंकित के खिलाफ भी कदम उठा लिया..और अब तू 2 तरफ से उसकी जान के पीछे पड़ गई...और यहाँ भी तू धोखा ही दे रही है...

जिन 2 के साथ तू मिली हुई है....उनको तो तेरी नफ़रत का अंदाज़ा भी नही....और तू दोनो के सहारे अपनी नफ़रत की आग बुझाने चली है...जो आग तूने खुद लगाई है...

ये सब तो कुछ नही...तूने इससे भी बढ़ कर काम कर दिया...वो काम जिसके बारे मे बड़े-बड़े सूरमा भी सोच कर ही थर्रा जाते है...पर तूने तो चुटकियों मे कर दिया...है ना....

मर्डर....हाँ..मर्डर...तूने तो मर्डर भी कर डाला...वो भी 1 नही...2-2....

हाँ रिचा...तूने 2 जाने तो अपने हाथो से ली है...और कितनी ही जाने तेरी वजह से गई सी..याद कर....याद कर रिचा...


याद आया ना....तो अब समझी...कि तेरे गुनाहो की ही सज़ा तेरी बेटी को अपनी जान देकर भुगतनी पड़ी....समझी....

अब तू खाती रह ये दौलत...और मिटाती रह अपनी भूख.....पर याद रखना...तू ही तेरी बेटी की चिता का आधार है...हहहे.....

रिचा- नही...नहियिइ....ंहिईीईईईईई....न..


RE: चूतो का समुंदर - sexstories - 06-08-2017

अपनी अंतर-आत्मा की बात सुन कर रिचा होश मे आई और हड़बड़ा कर उठ गई और चीखने लगी....और अचानक उसकी चीख उसके गले मे चुप हो गई...जब उसे अहसास हुआ कि कोई उसके सामने खड़ा हुआ है......

रिचा की चीख उसके गले मे घुट कर रह गई और उसने सामने खड़े सक्श को देखने के लिए गर्दन उपेर ही की थी....कि एक झन्नाटेदार थप्पड़ उसके गाल पर पड़ा और चटाक़ की आवाज़ रूम मे गूँज उठी...

रिचा थप्पड़ की मार से संभाल पाती उसके पहले ही एक हाथ ने उसके बालों को पकड़ा और उसे उपेर उठाते हुए खड़ा कर दिया....

रिचा- आ...अंकित...ये सब....

""चाआत्त्ताआअक्कककककककक....""

रिचा के कुछ बोलने से पहले ही मैने उसे एक और जोरदार थप्पड़ खीच दिया.....और उसके बालों को मजबूती से पकड़े हुए उसके सिर को हिला दिया....

रिचा(रोती हुई)- अंकित.....रिया...मेरी बच्ची....तुमने....क्यो...

मैं- क्यो...क्यो....(एक थप्पड़ मार कर) अब बोल कि क्यो...हाँ...बोल....(और फिर एक थप्पड़ खीच दिया....)

रिचा बिलखती हुई और दर्द से कराहती हुई रो रही थी और बार -बार अपनी बेटी का नाम पुकार रही थी....और मैं उसको बालों से पकड़े हुए उसके गालों पर थप्पड़ मारे जा रहा था....

जब मेरा गुस्सा थोड़ा कम हुआ तो मैने रिचा को ज़मीन पर पटक दिया और एक चेयर डाल कर उसके पास बैठ गया...

मैं- अब भी पूछेगी कि क्यो....हाँ....पूछ...पूछ ना....(चटाक़...)

रिचा- आ...अंकित....मेरी बच्ची....वो...वो....मासूम....

मैं- हाँ...थी वो मासूम...पर उसकी ग़लती ये थी कि वो तेरी गंदी कोख से पैदा हुई थी...बस....उसे इसी ग़लती की सज़ा मिली....समझी....समझी कि नही...

रिचा- प्प...पर...उसे क्यो....मेरी बचहिईीई....

मैं- अब कैसी बच्ची...कौन सी बच्ची....अब वो एक सरीर है बस...उसकी जान तो गई....मर गई वो...और सुन...ठीक ही मर गई....कहीं उसे तेरा असली चेहरा पता चल जाता तो वो रोज मारती....हर दिन...हर पल....

रिचा- क्यो....क्यो किया तुमने ऐसा...क्यो...क्यो...

मैं- क्यो...हाँ...क्यो का जवाब चाहिए ना....तो पूछ इस माँस के लोथडे से....शायद ये जवाब दे दे ...पूछ इससे....मैने बताया था इसे...इसकी जान निकलने से पहले....

रूचा- न्न्ंहिि.....मेरी बच्ची...आअहंणन्न्.....

मैं- अब क्यो रोती है...तुझे उसकी ज़रा भी परवाह होती ना...तो तू ऐसी ना होती...समझी....

रिचा कुछ नही बोली...बस सुबक्ती रही....मैने भी उसे रोता छोड़ा और वहाँ से निकल गया.....

मैं(जाते हुए)- अब रोती रह...और बता अपनी बेटी को कि उसे किसके करमो की कीमत चुकानी पड़ी...फिर मैं बताउन्गा की क्यो....साली..बड़ा काम करना था ना.. ..कुछ बड़ा....ले ..हो गया बड़ा...

और मैं वहाँ से सीधा हॉस्पिटल निकल गया....

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अकरम के घर....ज़िया के आने के बाद......


अकरम और सादिया अचानक आई आवाज़ सुन कर चौंक गये...पर इससे पहले कि दोनो सम्भल पाते....ज़िया रूम मे आ चुकी थी....

ज़िया के सामने अकरम और सादिया दोनो नंगे थे....सादिया नंगी बेड पर लेटी थी और अकरम उसकी जाघो के बीच मूह लगाए हुए था...और उसका लंड फुल फॉर्म मे तना हुआ था...

ज़िया को देखते ही अकरम ने सादिया की चूत से मूह हटा लिया और सादिया ने भी अपनी जाघो से अपनी चूत को छिपा लिया और हाथो से अपने बड़े बूब्स छिपाने की नाकाम कोशिश करने लगी....

जहाँ सादिया और अकरम ज़िया को अचानक देख कर शॉक्ड थे...वही ज़िया भी शॉक्ड थी....पर वजह अलग थी...

ज़िया इसलिए शोक्ड नही थी कि उसका भाई उसकी मौसी की चूत चूस रहा है....वो शोक्ड थी अकरम का तगड़ा लंड देख कर...जो अभी भी हवा मे झूल रहा था....

थोड़ी देर तक रूम मे खामोशी छाइ रही...किसी को समझ ही नही आ रहा था कि क्या बोले....सबसे ज़्यादा खराब हालत तो अकरम की थी...क्योकि उसे ये डर खा रहा था कि उसकी बेहन ने उसे इस हालत मे देख लिया....वो भी उसकी मौसी के साथ......

पर इसी भीच सादिया की आँखो मे एक चमक उठी और उसके होंठो पर मुस्कान तैर गई....

अकरम ने जब सादिया को मुस्कुराता पाया तो वो और ज़्यादा हैरान हो गया...पर बोला कुछ नही...

पर ज़िया को तो जैसे लकवा मार गया था...उसकी नज़रें अपने भाई के लंड पर ही टिकी थी....और उसका मूह खुला हुआ था...

जब अकरम ने ज़िया को चुपचाप देखा तो उसने ज़िया की नज़रों का पीछा किया और जैसे ही उसे अहसास हुआ कि वो बेहन के सामने पूरा नंगा है तो उसने अपने दोनो हाथो से अपना लंड छिपा लिया...

लंड छुपाते ही ज़िया का ध्यान टूटा और वो हक्की बक्की हो गई...और लड़खड़ाते हुए बोली...

ज़िया- त्त..तुझे मोम...मोम बुला रही...

और ज़िया बिजली की स्पीड से रूम से निकल गई.....

ज़िया के जाते ही अकरम ने सादिया को देख कर आँखो से इशारा किया कि अब क्या....मारे गये....

सादिया ने जवाब मे एक मुस्कान बिखेर दी और अकरम को रिलॅक्स रहने का बोला...

अकरम(असमंजस मे)- मुस्कुरा क्यो रही....अब क्या होगा...

सादिया- कुछ नही...मैं हूँ ना....सब संभाल लूगी....तू अभी जा...कही तेरी मॉम आ गई तो पंगा हो जायगा सच मे...

अकरम- हाँ..हाँ...मैं जाता हूँ...

और अकरम ने स्पीड मे अपने कपड़े पहने और बाहर निकल गया....

इस समय अकरम के घर मे सब परेशान थे....सादिया ये सोच कर कि क्या उसने सही कदम उठाया...

अकरम ये सोच कर कि ज़िया क्या करेगी...कैसे नज़रें मिलाउन्गा उससे....

सबनम ये सोच कर कि सच जानने के बाद उसके बेटे का क्या हाल हो रहा होगा....

और ज़िया ये सोच कर कि अकरम भाई का लौंडा कितना मस्त है...पर वो सादिया के साथ...क्यो....क्या जवान लड़कियाँ नही दिखती उसे...हाँ....

पर इस सब परेशानियो मे जल्दी ही इज़ाफा होने वाला था....जूही के आने के बाद.....


RE: चूतो का समुंदर - sexstories - 06-08-2017

आक्सिडेंट की सच्चाई........स्माल फ्लॅशबॅक...........


असल मे कुछ दिन पहले बॉस को ये पता चला कि एक लड़की अंकित को दिल-ओ-जान से प्यार करती है...और उसके मूह से ये भी सुना कि अंकित भी उसे हद से ज़्यादा प्यार करता है.......

बॉस ने ये जानकार अंकित को दर्द देने के लिए एक प्लान बनाया और ये खूसखबरी देने रिचा को कॉल किया....

( कॉल पर )

बॉस- कैसी है मेरी जान....

रिचा- ठीक हूँ...तुम बताओ...आज फ़ोन कैसे किया...वो भी इस वक़्त...

( रिचा इस समय दामिनी के घर पर थी...और बात करने बाहर आ गई...पर जहाँ वो खड़ी थी...वहाँ से उसकी बात बाथरूम मे खड़ा इंसान सुन सकता था....और बाथरूम मे दामिनी आई थी...पर लास्ट मे)

बॉस- क्यो...इस वक़्त क्या गान्ड मरवा रही है...

रिचा- नही...छोड़ो...बताओ क्या हुआ...

बॉस- असल मे मैने तुम्हे खूसखबरी देने को कॉल किया था....और वो ये है कि मैं अंकित को एक झटका देने वाला हूँ...


रिचा- झटका...पर कैसे...क्या झटका...

बॉस- डीटेल बाद मे...बस ये समझ ले कि कुछ बड़ा होगा....बड़ा...ओके...चल बाइ...

रिचा- पर...सुनो तो...ओह्ह...साले ने कॉल ही काट दिया...अब पता कैसे चलेगा कि ये करने क्या वाला है....

रिचा ने कुछ सोचा और बॉस2 को कॉल कर के सब बता दिया....और जब वो उस बड़े काम का बता रही थी...तभी उसकी बात दामिनी ने सुन ली और फिर दामिनी ने सब अंकित को बता दिया....

यहाँ बॉस ने अपने आदमी को अंकित पर नज़र रखने बोला और ये भी बोल दिया कि जो भी लड़की अंकित से मिले...उस पर नज़र रखो...और मेरे कहते ही उसे उड़ा देना...

आदमी- पर बॉस...अगर छोकरे को दर्द देना है तो उसके बाप को उड़ा दूं...

बॉस- नही...उसके बाप को जिंदा रहना है अभी...तुम बस उतना करो जितना बोला गया...समझे...

आदमी- ओके...बट पैसा ज़्यादा लगेगा..मामला खून का है...

बॉस- मिल जायगा...बस काम करो...अब जाओ...

बॉस के आदमी ने अंकित का पीछा सुरू ही किया था कि उन्हे जूही दिखाई दी...जो अंकित से गले मिली और फिर उसकी कार ले कर निकल गई....

आदमी ने जूही और अंकित की बात सुन कर जूही का नाम पता कर लिया...और बॉस को सब बता दिया कि लड़की मिल गई है और अभी कहीं जा रही है....

बॉस ने लड़की ख़त्म करने का हुकुम दे डाला और आदमी ने वैसा ही किया....

उसने एक ट्रक हाइयर किया और जूही को कार समेत उड़ा दिया......

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RE: चूतो का समुंदर - sexstories - 06-08-2017

अंकित के घर.......


रिचा को रोता हुआ छोड़ कर मैं हॉस्पिटल गया...वहाँ जूही सो रही थी तो मैने उसे डिस्टर्ब ना कर के डॉक्टर से बात करने लगा.....

डॉक्टर ने जूही को सुबह डिसचार्ज करने का बोला....तो मैं उसका ख्याल रखने का बोल कर घर आ गया.....

घर आने पर देखा कि सब लोग मेरा वेट कर रहे है...सब बहुत परेशान थे...पर मैने उस टाइम सबको रेस्ट करने का बोला और बाकी बातें बाद मे बताने का बोल कर अपने रूम मे आ गया...

रूम मे बैठा मैं आज की घटनाओ के बारे मे सोच ही रहा था कि मुझे याद आया कि जूही की खबर तो उसके घरवालो को देना ही भूल गया...

मैं- शिट...अब साला अकरम ज़रूर गुस्सा होगा...लेट कर दिया...

पर इससे पहले कि मैं कॉल करता ...मेरे पास एक लॅंडलाइन से कॉल आ गया....पिक करने पर पता चला कि वो फ़ोन हॉस्पिटल से था...

और फिर डॉक्टर की बात सुन कर मैं सन्न रह गया...अजीब सा डर मेरी आँखो मे छाने लगा और परेशानी से मेरा पसीना निकलने लगा....

डॉक्टर- हेलो..हेलो अंकित...सुन रहे हो ना...

मैं-ह..हाँ...पर जूही गायब कैसे हो सकती है....कहाँ गई वो.....????????????

डॉक्टर की बात सुनते ही मेरे माइंड मे कई तरह के ख्याल आने लगे थे....और सारे ख्याल ही ग़लत होने का आभास करा रहे थे......

कही जूही किडनेप तो नही हो गई....पर उसे किडनॅप कौन कर सकता है...और किसलिए. ...

क्या इस काम मे उसी सक्श का हाथ है जिसने आक्सिडेंट कराया......हो सकता है....

पर क्या रिचा भी इसमे शामिल है...नही ...ये नही हो सकता...मैने अभी-अभी रिचा की जो हालत की है...उसके बाद तो उसका कुछ सोचना भी इंपॉसिबल है...

पर उस रंडी का क्या भरोशा....इतनी आसानी से सुधर गई होगी...ये भी नही कह सकता....

डॉक्टर- हेलो...मिस्टर.अंकित....आर यू देयर....

मैं अपने माइंड मे इतनी जल्दी पता नही क्या -क्या सोच गया.....फिर डॉक्टर के चिल्लाने से मैं सोच से बाहर आया....

डॉक्टर- मिस्टर.अंकित....

मैं- ह..हाँ...डॉक्टर...

डॉक्टर- सॉरी मिस्टर.अंकित....आइ एम वेरी सॉरी सर...हम....

मैं(बीच मे)- चुप्प्प....सॉरी डाल अपनी....मेरी बात सुन...अगर उसे कुछ हो गया ना...तो ना तू रहेगा और ना तेरा हॉस्पिटल....समझा....

डॉक्टर- स...सर...आइ एम्म...सॉरी...

मैं- तेरी सॉरी तो मैं वहाँ आकर देखता हूँ....रुक वही...मैं अभी आया....

मैने फ़ोन कट किया और गुस्से से भरा हुआ तेज़ी से घर से निकला और कार ले कर गेट तक पहुँचा ही था कि गेट के बाहर एक कार आ कर रुक गई ...

मैं- ये साला कौन आ गया....वो भी इस वक़्त....

मैने 2-4 बार हॉर्न मारा पर वो कार टस के मस नही हुई....मेरा गुस्सा और ज़्यादा बढ़ गया और मैने कार से निकलकर कुछ बोलना ही चाहा था कि उससे पहले ही सामने वाले को देख कर मेरी बोलती बंद हो गई....

मेरे सामने और कोई नही बल्कि खुद जूही ही थी ....जो अपनी सहेली के सहारे कार से निकलने की कोसिस कर रही थी....

ये वही सहेली थी जो आक्सिडेंट के वक़्त जूही के साथ थी...उसको ज़्यादा चोट नही आई थी...बस मामूली खरोच थी...क्योकि उसने शीतबेल्ट बाँधी हुई थी....

जूही को सामने देख कर एक पल तो मेरी खुशी का ठिकाना नही रहा ...पर दूसरे ही पल मेरी आँखो मे गुस्सा आग बनकर दहकने लगा....

इस बीच जूही अपनी फ्रेंड और एक बैसाखी के सहारे कार के बाहर खड़ी हो गई थी....

मैं तेज़ी से जूही की तरफ लपका और उसे थप्पड़ मारने को मेरा हाथ उठा ही था की जूही ने अपनी आँखे बंद कर ली पर चेहरे को बिल्कुल हिलाया भी नही....

थोड़ी देर बाद जूही ने आँखे खोली तो अपने चेहरे के पास मेरा हाथ देख कर उसने स्माइल कर दी....जिससे मेरा गुस्सा और बढ़ गया...

मैं गुस्से से भरा हुआ था...पर कुछ बोल नही पाया...पता नही क्यो....मेरे मूह से सिर्फ़ एक लाइन निकली...

मैं(चिल्ला कर)- कहाँ थी तू....

जूही चुप रही पर उसकी सहेली बोल पड़ी....

सहेली- असल मे ..वो..जूही को...कोई..

जूही(बीच मे)- बस...क्या हम बाकी बातें अंदर करे....अकेले मे....

मैं कुछ समझ नही पा रहा था पर ये तो समझ गया कि कुछ खास बात ही होगी....इसलिए मैने कुछ नही कहा बस जूही के सामने से अलग हो गया....

जूही अपनी सहेली के साथ हॉल मे आ गई और मैं बाहर खड़ा अपना गुस्सा शांत करता रहा....

थोड़ी देर बाद जूही की सहेली बाहर आई और बोली...

सहेली- अंकित जी....जूही की बात सुन कर ही गुस्सा करना ...इट्स आ रिक्वेस्ट ...प्ल्ज़्ज़...गुड नाइट...

मैने भी बिना कोई बहस किए उसे बाइ बोल कर विदा किया और घर मे आ गया...जहा जूही सोफे पर लेटी हुई थी....और मुझे देख कर ही वो उठने लगी...


मैं- लेटी रहो....और बिल्कुल चुप ...समझी....

मेरी आवाज़ मे मेरा गुस्सा सॉफ नज़र आ रहा था...जिससे जूही की आँखो मे डर के भाव आ गये पर वो चुपचाप पड़ी रही....

मैं(थोड़ी देर बाद)- तुम यहाँ क्यो आई....

जूही- मैं...असल मे वो...वहाँ मुझे डर लग रहा था....

मैं- डर...किस बात का डर....और डर लगा था तो कॉल कर सकती थी....(चिल्ला कर)- वहाँ से भागी क्यो....

जूही- स...सॉरी...

मैं(चिल्ला कर)- सॉरी माइ फुट....व्हाट डू यू थिंक...हू आर यू....जो मन मे आया कर दिया....हाँ....

जूही-ज्ज्ज...जूही...

जूही के इस आन्सर ने मेरे गुस्सा को और बढ़ा दिया...

मैं- शट उप.....बड़ी आई जूही ..जूही मतलब क्या....कोई महारानी है क्या...हाअ...

जूही- मेरी बात तो...

तभी सुजाता की आवाज़ आई जो अपने रूम से निकल कर मटकती हुई हमारे पास ही आ रही थी...

सुजाता- क्या हुआ बेटा....और ये लड़की...कौन है ये...??

मैं(गुस्से से)- कोई हो..तुझे क्या....अपनी लिमिट मे रह...और मेरे बीच मे मत आया कर....गेस्ट है ना...तो गेस्ट जैसी रह...जा यहाँ से....

मेरा गुस्सा देखकर सुजाता उल्टे पैर रूम मे भाग गई...साली की गान्ड भागते हुए ज़्यादा ही मटक रही थी....मूड मे होता ना तो अभी गान्ड मार लेता....

जूही- आप प्ल्ज़ शांत हो जाइए...

मैं- तू भी चुप कर....बिल्कुल चुप...

थोड़ी देर तक हॉल मे शांति छाइ रही....इस बीच सविता भी हॉल मे आ गई थी पर चुपचाप खड़ी हुई थी...थोड़ी देर बाद मैं फिर से चिल्लाया....

मैं- आख़िर तू वहाँ से भागी क्यो...बोलेगी अब...

जूही- ववव...वहाँ कोई आया था...

जूही की इस बात ने मेरे माइंड को फिर हिला दिया...मेरा शक़ कुछ-कुछ सही हो रहा था....अभी भी वो जूही के पीछे पड़ा हुआ है...

जूही- मैं वहाँ लेटी थी तो देखा कि....

मैं(बीच मे)- बस ..चुप हो जाओ...अभी तुम्हे रेस्ट की ज़रूरत है...और मुझे कॉफी की...

मैने सविता की एक नज़र देखा तो वो किचन मे चली गई और मैने जूही को अपनी बाहों मे उठाया और उपर अपने रूम मे चला आया....

थोड़ी देर बाद मैं कॉफी पी रहा था और जूही चुपचाप मुझे देखती हुई बेड पर लेटी थी....

मैं(कॉफी ख़त्म कर के)- कौन था वो....

जूही- हुह..वो...पता नही...

मैं- मतलब...तुमने देखा नही क्या....

जूही- देखा....मतलब नही...मतलब...वो सिर ढक कर आया था....

मैं- ह्म्म्मक...तो तुमने कॉल क्यो नही किया....

जूही- मोबाइल ऑफ है...

मैं- तो तेरी सहेली...

जूही(बीच मे)- इत्तेफ़ाक़ से वो खुद मिलने आई थी...

मैं- ओके...बट डॉक्टर को बोल कर आती ना...या नर्स से...

जूही- वहाँ कोई नही था....गार्ड भी नही था....

मैं- व्हाट...पर ऐसा कैसे हो सकता है...हॉस्पिटल है वो....

जूही- पता नही....इसलिए मुझे ज़्यादा डर लगा और मैं...

मैं(बीच मे)- समझ गया....अब तुम रेस्ट करो....कल बात करेंगे....गुड नाइट....

जूही- आप भी सो जाइए....आप मेरी वजह से बहुत परेशान हो गये....

मैं- ह्म्म...तुम रेस्ट करो....मैं थोड़ी देर मे आता हूँ...ओके...और हाँ...यहा डरने की कोई बात नही...

जूही- आप साथ हो तो कोई डर नही...

मैं(जूही को देख कर)- अब सो जाओ...

और फिर मैं रूम से बाहर आ गया और अपने आदमी को कॉल लगाया....और थोड़ी देर बाद रूम मे आ गया......

जूही- अब सो जाइए....

मैं- ह्म्म..मैं सोफे पर....

जूही(बीच मे)- सोफे पर क्यो...मैं आपको खा जाउन्गी क्या....

मैं- नही...पर मैं तुम्हे खा गया तो....

जूही- तो क्या...खा जाना....

मैं(मुस्कुरा कर)- ह्म्म...चलो फिर....देखते है तुम सुबह तक बाकी रहती हो या नही....

जूही कुछ नही बोली बस मुस्कुरा दी और मैं जूही के साथ लेट गया और थोड़ी देर बाद ही हम दोनो बातें करते हुए सो गये.....


RE: चूतो का समुंदर - sexstories - 06-08-2017

मैने इस बीच जूही से सिर्फ़ नॉर्मल बातें की...ताकि उसे कोई टेन्षन ना हो...पर मेरे दिमाग़ मे चल रही टेन्षन को दूर करने के लिए मुझे इंतज़ार था अपने आदमी के कॉल का .....

सुबह जब मैं जगा तो घर मे काफ़ी आवाज़े आ रही थी....जैसे ही मैने आँखे खोली तो सामने का नज़ारा देख कर मुझे झटका लगा....

मेरे सामने रजनी, मेघा, रक्षा और अनु खड़ी हुई थी...और जूही मेरी बाहो मे सिर छिपाए सो रही थी....

मेरे सामने खड़े हर शक्स की आँखो मे कई सवाल थे...और वो सारे जवाब मुझे ही देने थे...

पर मुझे किसी की कोई फ़िक्र नही थी...सिर्फ़ अनु को छोड़ कर....बस एक वही थी...जिसे जवाब देना ज़रूरी था....

मैने अनु से नज़रे मिलाई तो मैं थोड़ा सहम सा गया...उसकी आँखो मे सवाल के साथ-साथ दर्द भी छिपा हुआ था...जो सिर्फ़ मुझे ही दिखाई दे रहा था....

मैं जूही को हटा कर बेड पर बैठा ही था कि सबने सवालो की बौछार कर दी....पर अनु बिल्कुल खामोश खड़ी रही....बिल्कुल चुप....पर उसकी आँखो मे छुपे आँसुओ ने सब कुछ कह दिया था....

मैं अनु से कुछ बोलता उसके पहले ही अनु वहाँ से निकल गई....और मैं कुछ नही कर पाया....

थोड़ी देर बाद जूही भी जाग गई और सविता की हेल्प से रेडी हो गई...मैं भी रेडी हो गया..और सब हॉल मे आ गये ....

हॉल मे मैने सबको कल की सारी बात बताई...कुछ सही और कुछ ग़लत...और सबके जाने के बाद मैं जूही को ले कर उसके घर निकलने लगा .....

तभी मेरी नज़र सीडीयों के उपेर खड़ी पारूल पर पड़ी ...जो मुझे खा जाने वाली नज़रों से घूर रही थी....

मैं समझ गया कि उसकी हालत ऐसी क्यो है...इसलिए मैने जूही को वही वेट करने छोड़ा और उपेर आ कर पारूल को रूम मे ले गया....

गेट लॉक होते ही पारूल रो पड़ी...उसके आँसू शायद बहुत देर से आँखो मे रुके हुए थे...और अब मुझ पर क़हर बनकर टूट रहे थे...

मैं- उफ्फ...ये क्या....अब रो क्यो रही है....मेरी बात...

पारूल(बीच मे)- मुझे कुछ नही सुनना...सिर्फ़ जवाब चाहिए...समझे आप...

मैं- ओके...समझ गया...तो सवाल पूछेगी या ऐसे ही जवाब चाहिए....

पारूल(आँसू पोछ कर)- मैं कौन हूँ...

मैं- क्या मतलब....

पारूल- मैं आपकी कौन हूँ...

मैं- ये क्या पूछ रही है..तू मेरी बेहन...

पारूल(बीच मे)- मेरा इस परिवार से कुछ लेना-देना है कि नही...

मैं- बिल्कुल बेटा....ये तुम्हारा भी परिवार है...पर ये सब...आख़िर हुआ क्या...किसी ने कुछ...

पारूल(बीच मे)- किसी ने नही...आप ने....सिर्फ़ आपने...

मैं- क्या...मैने क्या...मतलब...हुआ क्या...

पारूल- आपके साथ इतना बड़ा हादसा हो गया और आपने मुझे बताना भी ज़रूरी नही समझा...क्या सिर्फ़ नाम की बेहन हूँ मे....हा...

मैं- हादसा...मेरे साथ...नही तो...मुझे कुछ नही हुआ...

पारूल- झूट मत बोलिए.....मुझे सब पता है....कल आपका आक्सिडेंट हुआ है...

मैं- अरे यार...तुझे किसने बोला कि मेरा आक्सिडेंट हुआ....मैं बिल्कुल ठीक हूँ बेटा...देखो...100% परफेक्ट....फिट न्ड फाइन....देखो...

मैने अपने हाथ-पैर हिलाते हुए पारूल को दिखाए...पर उसका गुस्सा अभी भी पूरे सवाब पर था....

पारूल- झूट...झूट पर झूट....

मैं- नही यार...मैं सच बोल रहा हूँ...

पारूल- अच्छा...तो वो लड़की....उसका हाल ऐसे कैसे हो गया...वो आपके ही साथ थी ना....अंकल की कार मे...है ना...अब बोलो...हाँ...

मैं- ओह्ह...रुक...तुझे पूरी बात बताता हूँ...

फिर मैने पारूल को आक्सिडेंट की सच्चाई बता दी...जिसे सुन कर पारूल का गुस्सा भी गुल हो गया और वो माफी मागने लगी....

मैं- नही...तू सॉरी मत बोला कर...तेरा हक़ है मुझ पर...जब दिल करे गुस्सा कर..ओके....

पारूल(मेरे गले लग कर)- आइ लव यू भैया....

मैं- लव यू 2 बेटा...अब तू रेस्ट कर....मैं जूही को उसके घर छोड़ कर आता हूँ...ह्म...

और फिर मैं जूही के साथ उसके घर निकल गया.....


RE: चूतो का समुंदर - sexstories - 06-08-2017

रिचा के घर........

रिचा अपने घर पर किसी के साथ बैठी हुई पेग लगा रही थी और खिलखिला कर जश्न मना रही थी...जैसे उसकी जीत हो गई हो.....

रिचा(हँसते हुए)- हहहे....कुछ देर के लिए तो मैं सच मे सोचने लगी थी कि अंकित को सच बता दूं...और अपने पापो को धो डालु....पर अच्छा हुआ कि तुम आ गये और मुझे बहकने से रोक लिया....

बॉस2- अरे आ तो मैं पहले ही गया था...पर तभी वो कम्बख़्त अंकित आ गया तो मुझे छिपना पड़ा....और हाँ...1 पल के लिए तो मैं डर ही गया था कि कहीं तू बेटी के प्यार मे मूह ना खोल दे....मेरा तो बरसो का प्लान चोपट हो जाता....

रिचा- ह्म्म...जो हुआ अच्छा हुआ....पर कुछ देर के लिए साले ने गान्ड ही फाड़ दी थी....

बॉस2- पर तूने सोचा भी कैसे की अंकित, रिया को मार सकता है...हाँ...

रिचा- क्या करूँ...माँ हूँ ना...बेटी के प्यार मे अंधी हो गई थी...जो उसके कपड़े देख कर ही बहक गई...और नकली बॉडी को असली समझ लिया...

बॉस2- खैर...जो हुआ सो हुआ...अब आगे से याद रखना....थोड़ा संभाल कर ..हुह..

रिचा- बिल्कुल....अब देखो मैं क्या करती हूँ...साले ने मुझे नकली लाश दिखाई ना...अब इसे मैं असली लाश दिखाउन्गी. ..बस वो रफ़्तार आ जाए...फिर देखना.....

बॉस2- ह्म्म....जो करना है कर...बस संभाल कर...और जब तक रफ़्तार आता है....तब तक तू यहाँ आ ...तेरी गान्ड मारनी है....

रिचा- तो रोका किसने है...अब तो मैं खुश हूँ.....दम से मज़ा लूगी...और पूरा मज़ा दूगी...आ जा...

और फिर रिचा की गान्ड चुदाई का खेल सुरू हो गया.......


अकरम के घर....लास्ट नाइट......

अकरम और सादिया को साथ मे देख कर ज़िया का बुरा हाल हो रहा था....वो सोच नही पा रही थी कि क्या करे....

एक तरफ उसे अपने भाई के लौडे की याद गरम करती तो दूसरी तरफ वो इस अहसास को ग़लत करार देती कि आख़िर वो भाई है...उसके बारे मे ऐसा कैसे सोचु...नही...

वहीं सादिया एक खेली हुई औरत थी...वो ज़िया की आँखे देख कर समझ गई थी कि ज़िया गुस्सा नही है...बल्कि अकरम का लंड देख कर हैरान है....

सादिया तो पहले से ही अकरम के साथ आगे बढ़ चुकी थी...और उसने अपने साथ ज़िया को भी मिलने का फ़ैसला कर लिया....

यही सोच कर सादिया ने ज़िया से बात करने का सोचा और उसके रूम मे आ गई...जहा ज़िया अभी भी सोच मे डूबी हुई थी....

सादिया(अंदर आ कर)- ज़िया....

ज़िया(चौंक कर)- आ..आंटी...आप...आइए ना...

सादिया(गेट लॉक कर के)- क्या सोच रही हो...

ज़िया- आपने गेट क्यो लॉक किया आंटी...

सादिया- क्योकि जो बातें मैं तुमसे कहने वाली हूँ...वो कोई और ना सुन ले...

ज़िया- ऐसी क्या बात है....

सादिया(ज़िया के बाजू मे बैठ कर)- देखो ज़िया...तुम अब बच्ची तो हो नही जो तुम्हे सब समझाना पड़े...हाँ....

ज़िया- मैं कुछ समझी नही....आप कहना क्या चाहती हो....

सादिया- ठीक है...मैं डाइरेक्ट बात करती हूँ....तुझे अकरम का हथियार भा गया है ना....

ज़िया(शॉक्ड)- एयेए...आंटी...ये आप....मतलब...आपने ऐसा सोचा भी...

सादिया(बीच मे)- हाँ या ना....और ये भोलेपन का नाटक छोड़...मैं तेरे बारे मे सब जानती हूँ...समझी...

ज़िया- अकरम मेरा भाई है आंटी....

सादिया- और वसीम तेरा बाप था....

ज़िया- क्क्क...क्या मतलब...

सादिया- देख..मैं जानती हूँ कि तू वसीम से कई बार चुदवा चुकी है...और उसके दोस्त शरद से भी...और हाँ...अंकित का लौडा भी गुप कर गई....है ना....

ज़िया(हड़बड़ा कर)- आ..आंटी...आप ये...

सादिया- देख ज़िया....मैं सब जानती हूँ...मैने अपनी आँखो से देखा है...और ये भी जानती हूँ कि अब तुझे अकरम का लंड भा गया है...ये तेरी आँखो मे सॉफ दिख रहा था...

ज़िया कुछ नही बोली...उसकी चोरी पकड़ी गई...इसलिए वो सिर झुका कर बैठ गई...

सादिया- देख ज़िया....मैं तुझे फोर्स नही करूगी...पर तू चाहे तो मैं अकरम के साथ तेरी बात आगे बढ़ा सकती हूँ...अगर तू चाहे तो....बोल...

ज़िया(धीरे से) - वो मेरा भाई है आंटी...

सादिया- जानती हूँ....इसलिए बोला कि अगर तू चाहे तो....और जब तू बाप का ले सकती है तो भाई का क्यो नही.....

ज़िया- डॅड तो खुद आए थे....पर अकरम....वो ऐसा नही है....

सादिया- ह्म्म...पर वो मुझ पर छोड़ दे ...तू बस हाँ बोल...फिर बाकी मैं देख लुगी....

इस बार ज़िया ने कुछ नही कहा बस सादिया की आँखो मे देख कर मुस्कुरा दी.....

सादिया- ह्म्म्मय...अब मेरे कॉल का वेट कर....

और सादिया वहाँ से निकल गई...और जिया मन.ही मन खुश होने लगी...और दुआ मागने लगी कि अकरम हाँ कर दे....तो मज़ा आ जाए.....


थोड़ी देर बाद अकरम और सादिया सोफे पर बैठे हुए बाते कर रहे थे....वो इस टाइम सादिया के रूम मे थे....

अकरम- आंटी...ये ठीक नही हुआ....

सादिया- अच्छा....पर अब ये सोचने से क्या फ़ायदा....मैं पीछे हटने वाली नही...समझा...

अकरम- ऑफ हो...मैं ज़िया की बात कर रहा हूँ....उसने हमे ऐसे देख लिया....पता नही क्या सोच रही होगी...

सादिया- और क्या सोचेगी....तेरे हथियार के बारे मे ही सोच रही है....

अकरम(शॉक्ड)- क्क़...क्या....

सादिया- चौंक मत....वो तो तुझ पर फिदा हो गई....उसका बस चले तो अभी खा ले वो तेरे हथियार को...

अकरम- ये आप....नही...ऐसा नही हो सकता...

सादिया- अब तू भी सरीफ़ बनना छोड़ दे....तू भी तो उसकी गान्ड देखता रहता है ना....

अकरम(मन मे)- ये सही है कि मैं ज़िया की गान्ड देख कर बहकता था...पर उसके साथ ये सब....कभी नही....

सादिया- कहाँ खो गया....अब हाँ बोल भी दे...फिर देख ...ज़िया कैसे चूसेगी तेरा...हहहे....

अकरम- आंटी....बस करो...ऐसा कभी नही होगा...

सादिया- अच्छा...और ज़िया हाँ कहे तो...


RE: चूतो का समुंदर - sexstories - 06-08-2017

अकरम के पास कोई जवाब नही था...असल मे उसे भी कुछ -कुछ चाहत थी ज़िया की...पर वो इसे ग़लत मानता था....


सादिया- चल...अभी सब समझती हूँ....तू अपना हथियार निकाल...जल्दी...

अकरम ने सादिया के 1-2 बार कहने के बाद अपना लंड ज़िप से बाहर निकाल लिया....जो इस टाइम खड़ा हो रहा था....

सादिया- ओह हो...देख तो...ज़िया का नाम आते ही ये फूलने लगा....ह्म्म्मे....

अकरम- आंटी...ये आपका कमाल है...

सादिया- अच्छा....वैसे है बढ़ा जानदार...उउउम्म्म्म....क्यो ज़िया...कैसा लगा....

ज़िया का नाम सुनते ही अकरम शॉक्ड हो गया और पलट कर देखा तो ज़िया सोफे के पीछे से अकरम का लंड ही देख रही थी....

(असल मे सादिया ने ही ज़िया को मेसेज कर के बुलाया था...)

अकरम ने तुरंत लंड को हाथ से छिपाया और नज़रे झुका ली...तब तक ज़िया अकरम के दूसरे तरफ बैठ गई....

जैसे ही जिया सोफे पर आई तो अकरम उठ कर बाहर जाने लगा...पर सादिया ने उसे पकड़ लिया ....

सादिया- अब हाथ हटा भी दे...देख तेरी बेहन इसे देखने को कितनी बैचेन है...है ना ज़िया....

ज़िया कुछ नही बोली बस मुस्कुरा दी....फिर सादिया ने अकरम के हाथ हटा कर लंड को सहलाते हुए ज़िया से लंड पकड़ने को बोला...

ज़िया ने सहमते हुए लंड पकड़ा तो अकरम की बॉडी मे झुरजुरी फैल गई और वो ज़िया को देखने लगा...ज़िया ने बस एक स्माइल कर दी और लंड को टाइट पकड़ लिया....

सादिया- अब शर्म छोड़...और हम दोनो के मज़े ले...और हम तेरे मज़े लेगे...है ना ज़िया....



(आगे का सीन...अकरम की जुवानी....)

ज़िया सिर्फ़ शर्मा कर रह गई...और अब अकरम भी मुस्कुरा दिया...

मैं- जब सबकी यही मर्ज़ी तो यही सही....आंटी....हो जाओ सुरू....

सादिया- ह्म्म्मत....मुझे ही सुरू करना होगा....तभी ज़िया खुल कर साथ देगी...देख ज़िया....क्या मस्त लौडा है तेरे भाई का....गग़ग्गल्ल्लूउउप्प्प्प्प....

और सादिया मेरा लंड चूसने लगी....ये नज़ारा देख कर ज़िया की आँखे बड़ी हो गई...और वो आँखे फाड़ कर इस नज़ारे को एंजाय करने लगी....

लंड चूस्ते हुए सादिया ने अपनी ड्रेस से अपने बूब्स को बाहर कर दिया और महॉल को और गरम करने लगी....

सादिया-उउउंम्म.....आहह....मज़ा आ गया.....उूउउम्म्म्म....उउउम्म्म्म....

सादिया का मूह मेरे लंड पर आगे -पीछे हो रहा था और ज़िया के मूड गरम हो रहा था....

सादिया- आअहह....ले ज़िया...तू भी चख ले...ये ले...

और सादिया ने मेरा लंड ज़िया के मूह मे डाल दिया....

ज़िया के मूह मे लंड का सुपाडा गया तो ज़िया की आँखे और बड़ी हो गई...पर अगले ही पल उसने सुपाडे को होंठो मे कस लिया और सूपड़ा चूसने लगी...

ज़िया- उूउउम्म्म्म....उूुउउम्म्म्म....उूुउउम्म्म्म.....

सादिया- ह्म्म....बहुत अच्छे.....अच्छे से चूस...अपने भाई को खुश कर दे....पूरा अंदर ले....

ज़िया- उउउंम्म...उूउउंम्म...उउउंम्म...उूउउम्म्म्म...

मैं- आआहह...कम ऑन....उउउफफफ्फ़....

सादिया ने धीरे-धीरे कर के पूरा लंड ज़िया के मूह मे भर दिया और खुद झुक कर ज़िया का टॉप अलग कर के उसके ब्रा मे क़ैद बूब्स चाटने लगी...जिससे जिया की गर्मी बढ़ गई और वो तेज़ी से लंड चूसने लगी....

ज़िया- उूउउंम्म...उूउउम्म्म्म...उूउउम्म्म्म...उउउंम्म...

सादिया- सस्स्स्रररुउउप्प्प्प....आअहह...तेरे बूब्स भी टेस्टी है ज़िया....सस्स्रररुउउप्प्प्प....

मैं- ओह्ह्ह...ज़िया.....कम ऑन...ऐसे ही...ज़ोर से...आआहह....

मैं अपनी ही बेहन के मूह मे लंड डाले परम आनंद मे झूम रहा था....और सादिया की हरक़ते मेरी गर्मी ज़्यादा ही बढ़ा रही थी....

थोड़ी देर बाद सादिया ने ज़िया को रोक दिया तो ज़िया गुस्से से सादिया को देखने लगी....

सादिया- गुस्सा मत कर यार....मुझे भी मज़ा लेने दे....चल साथ मे मज़ा करते है...

फिर सादिया ने मुझे नीचे से नंगा कर दिया और सोफे पर बैठा दिया....और झुक कर मेरा लंड चाटने लगी...

सादिया- सस्स्रररुउउप्प्प...सस्स्रररुउपप..आहह...अकरम...अपनी बेहन को भी मज़ा दे...देख बेचारी का मूह उतर गया....

मैं- ह्म्म...आओ ज़िया....सुरू हो जाओ....

और मैने दोनो को अपने लंड पर झुका दिया और दोनो मेरे लंड को चूमने चाटने लगी....
सादिया ने मेरा सुपाडा मूह मे भर लिया और ज़िया ने अपनी जीभ लंड पर फिरानी सुरू कर दी....

सादिया-उूउउंम्म..उउंम्म..सस्स्रररुउउप्प्प…ओउम्म्म्मम...

ज़िया-सस्स्रररुउउप्प…सस्ररुउप्प्प्प...सस्स्रररुउउउप्प्प्प.......

सादिया- उूुउउम्म्म्म...उूुुउउम्म्म्म....आअहह...उउउंम्म...उउउंम्म..उउउंम्म...

ज़िया- सस्स्स्रर्र्ररुउुउउप्प्प्प....आअहह...सस्स्रररुउउप्प्प्प....सस्स्र्र्ररुउउप्प्प.....

मैं-आहह…..ऐसे ही..अह्ह्ह्ह....उउउहह... 

थोड़ी देर बाद सादिया उठी और उसने ज़िया के कपड़े निकाल दिए...और उसके बूब्स भी ब्रा से बाहर कर दिए....

सादिया- चल ज़िया...अब तू इतमीनान से अपने भाई का लंड चूस....

मैं- आंटी....मुझे आपकी चूत चखना है...

सादिया- अच्छा बेटा...चल...मुझे भी चूत चुसवाने मे मज़ा आता है...

फिर सादिया सोफे पर चढ़ कर मेरे मूह पर चूत रख कर खड़ी हो गई और ज़िया झुक कर तसल्ली से मेरा लंड चूसने लगी....
मैं- वाउ...सस्स्स्रररुउउउप्प्प...सस्स्रररुउउउप्प्प....सस्स्रररुउउप्प्प...

ज़िया- उउउम्म्म्म....उूुउउंम्म...सस्स्स्रररूउगग़गग....सस्स्रररुउउउगगगगग....उूउउम्म्म्मम...

सादिया- आआहह....चूस बेटा....आअहह....

मैं- सस्स्रररुउउउप्प्प्प....उूउउंम्म..उउउंम्म...सस्स्रररुउउप्प्प्प....

सादिया- ऊओ....चवा डाल...आआहह...आअहह...

ज़िया- सस्स्स्रररूउउगग़गग...सस्स्रररूउउगग़गग....उउउंम्म...उउउंम्म....उूउउम्म्म्म.....

थोड़ी देर बाद ही सादिया की चूत धार मारने लगी और मैं उसका चूत रस पी गया....

सादिया- आअहह...म्माईंन..गाइइ ..ऊओ.....ईसस्स....आअहह...


RE: चूतो का समुंदर - sexstories - 06-08-2017

यहा ज़िया भी लंड चूस्ते हुए अपनी चूत मसल रही थी...और उसकी चूत भी गरम हो चुकी थी...

सादिया- आअहह...ज़िया...अब चूसना छोड़....चूत मे ले जा ...अपने भाई को भी मज़ा दे दे....

ज़िया तो जैसे इसी इंतज़ार मे थी...ज़िया ने पलक झपकते ही अपनी पैंटी निकाली और मेरे लंड को चूत मे ले कर उछलने लगी....

मैं समझ गया कि ज़िया की चूत पूरी खुली है...पर फिर भी मस्त थी...

सादिया- वाह बेटा...भाई का लंड बहुत भा गया...एक बार मे ले गई...आजा दूध पी ले...और जोरदार चुदाई कर...

ज़िया ने आगे बढ़ कर सादिया के बूब को मूह मे भरा और तेज़ी से उछलने लगी. ..और मैं भी नीचे से धक्के मारने लगा....
सादिया- आहह…आहह…अहहह…ज्जूओर्र सीए….आहह....

ज़िया- उउउंम्म...आअहह..आहह...उउउंम्म..उउउंम..आअहह....आहहाहह

सादिया-आआहः..आह..अह्ह्ह्ह…अहहह…अहहहह…यईसस्स….यईसस्स….आहह...और तेज ज़िया....जड़ तक ले जा...अओउंम...

ज़िया- आअहह…हहहहा…आईयायाईए.उउउंम्म..उउंम....आअहह.....

ज़िया के उछलने से रूम.मे चुदाई की आवाज़े गूज़्ने लगी थी....

त्ततप्प्प….त्ततप्प्प…त्तप्प..आहह…उउउंम..हमम्म..आहः.
.त्तप्प…त्तप्प्प..आहहह..अहहहह...

थोड़ी देर की दमदार चुदाई से ज़िया झड़ने लगी और सादिया की चूत लंड खाने को तैयार हो गई....

ज़िया- आअहह ..भाई....मैं...ऊओह...आाऐयइ....एस्स..आअहह.....

ज़िया के झाड़ते ही सादिया ने उसे मेरे लंड से उतार दिया और खुद उसकी जगह लंड को चूत मे ले गई....

सादिया- आआहह....मज़ेदार....अब मुझे सवारी करवा दे....ईीस्स....

यहाँ सादिया ने उछलना सुरू किया और वहाँ ज़िया हमारी चुदाई देख कर अपनी चूत को फिर से मसल्ने लगी....

सादिया- आअहह...साली...मन नही भरा तेरा....

ज़िया- नही ...भाई का मस्त लगा....और लेना है...

सादिया- आअहह....बाद मे...आअहह...अभी मुझे...उउउंम्म...

ज़िया- ह्म्म...चल दूध पी ले....ले...

और सादिया ने भी ज़िया के बूब्स को चूस्ते हुए उछलना सुरू कर दिया...
सादिया- उउउंम..उउउंम्म..आअहह....उउउंम्म...ईीस्स...उउउम्म्म्म...

ज़िया- ले साली....पी जा...और भाई को मज़े दे...आअहह.....काट मत साली....आअहह...

मैं सादिया और ज़िया की बातें सुन कर हैरान भी था और गरम भी हो रहा था....दोनो एक-दूसरे को गाली देते हुए चुदाई एंजाय कर रही थी....

मैं- ओह आंटी....जंप....फास्ट...फास्ट...फास्ट....

सादिया- आअहह...हा बेटा....आअहह...आहह..आअहह...उउउंम्म...उउउंम्म...

ज़िया- आअहह..फाड़ दो भाई.....आअहह..ज़ोर से.....

मैं- यस ज़िया...ये ले...ये ले..ईएहह....ईएहह...

और मेरे तेज धक्को से सादिया फिर से झड़ने लगी....

सादिया- आआहह..आहह......गई...ररीईई...आअहह....

सादिया के झाड़ते ही मैने ज़िया को उपेर आने को बोला और उसको उछल कर उसे चोदने लगा...

सादिया उठ कर मेरे पीछे आ गई और अपने बूब्स मुझसे चुसवाने लगी...
सादिया- ले बेटा..दूध पी कर चोद इसे....बड़ी रंडी है साली...फाड़ दे...

ज़िया- आअहह...और तू....साली...आअहह...रंडी की माँ...आअहह....ज़ोर से भाई...ईसस्स....

मैं- उउउंम्म...ईएह...ईएहह....ईएह...उूउउंम्म...

सादिया- ऐसे ही मार बेटा...फाड़ दे...आअहह....

ज़िया- हाँ भाई...फाड़ दो....ज़ोर से भाई...ज़ोर से...आआहह....

मैं- हाँ दीदी....ये लो....आज तो तेरी फटी....यीहह. .यीहह...ईएहह....

कुछ देर की तेज तर्रार चुदाई मे ज़िया एक बार फिर से झाड़ गई...और सादिया की चूत फिर से तैयार हो गई....

ज़िया के झाड़ते ही मैने ज़िया को लिटा कर लंड उसके मूह मे पेल दिया....

मैं- ज़िया..मेरी बेहन....तुझसे चुसवाने मे मज़ा आता है...चूस ...आअहह...

ज़िया- उउउंम...आअहह...मुझे भी भाई...उउंम्म...उउउंम्म....

हम दोनो को देख कर सादिया और गरम होने लगी और अपनी गान्ड ज़िया के मूह पर कर दी...

सादिया- बेटा...लंड बाद मे चुस्वा लेना...मेरी चूत भर दे पहले...

मैं- हाँ आंटी...ज़िया चूस ले फिर भरता हूँ....ज़िया....चूस ...ज़ोर से....

ज़िया- उउउंम...उउउम्म्म्म...उूउउंम्म...उउउंम्म..उउउंम्म...उउउंम्म...

मैं- आअहह.....क्या बात है....वाअहह....एसस्स...एस्स....

सादिया- अब डाल दे बेटा....जल्दी...

मैने लंड को ज़िया के मूह से निकाल कर सादिया की चूत मे पेल दिया तो ज़िया ने जल्दी से मेरी बॉल्स को मूह मे भर लिया...

मैं- आहह...ज़िया...तुम सच मे कमाल हो....

सादिया- हाँ...पूरी रंडी है....

ज़िया- उउंम...आहह..चुप कर...मुझे चूसने दे अपने भाई को...तू चुप चाप चुदवा...उउउम्म्म्म...उउउम्म्म्म...

और फिर सादिया अपनी गान्ड हिला-हिला कर मुझसे चुदने लगी और ज़िया मेरी बॉल्स चूस्ते हुए अपनी चूत सहलाने लगी....

सादिया- आअहह..आअहह...आअहह....उउउंम्म..

ज़िया- उउउंम्म...उउउंम्म...उउउंम्म...उउउंम्म...

मैं- आअहह...मज़ा आ गया.....दोनो मस्त हो....ईएहह...

ज़िया- उउउंम्म...उउउंम्म...उउउंम्म...

सादिया- आअहह...आअहह...आहह...ईसस्स....ज़ोर से बेटा....धक्का मार....


RE: चूतो का समुंदर - sexstories - 06-08-2017

अब मैं भी मूड मे आ गया था....मैने ज़िया को रोका और सादिया को पकड़ कर तेज़ी से चोदने लगा....

तो ज़िया ने सादिया की चूत का दाना चाटना सुरू कर दिया और अपनी चूत मे उंगली करने लगी....

सादिया- आऐईयईई....ये क्या साली...मार डाला....आअहह.....

ज़िया- सस्स्ररुउपप..सस्ररुउपप...सस्ररुउपप...सस्रररुउप्प्प...सस्स्ररुउप्प्प...

मैं- ओह्ह...एस्स...एस्स...एस्स...ईसस्स....

सादिया- आअहह...ज़ोर से....आअहह...

ज़िया- उउंम्म...आआहह...उउउम्म्म्म...सस्स्रररुउउउप्प्प.....उउउम्म्म्म...

मैं- एस्स...एसस्स...आअहह...यीहह...यीहह....

रूम मे चुदाई की आवाज़े गूज़ रही थी...और हम तीनो झड़ने के करीब थे...

और कुछ देर बाद ही हम तीनो साथ-साथ झड़ने लगे....

ज़िया ने सादिया की चूत से निकलता हुआ मेरा और सादिया का मिक्स रस पी लिया और फिर सादिया ने ज़िया की चूत चाट कर उसका रस पी लिया और फिर दोनो ने मेरा लंड चूस कर सॉफ कर दिया....

दमदार चुदाई के बाद हम तीनो उसी सोफे पर ढेर हो गये और रेस्ट करने लगे.....



कहीं दूर...किसी बंद कमरे मे.....

रूम मे बेड पर एक मरीज़ पड़ा था और डॉक्टर उसका चेक अप कर रहा था....

तभी मनु रूम मे एंटर हुई और मरीज़ को देख कर डॉक्टर से बोली.....

मनु- अब क्या कंडीशन है....

डॉक्टर- ये कोमा से बाहर है...पर याददाश्त....

मनु- याददाश्त का क्या....

डॉक्टर- कहना मुस्किल है....पता नही कितना याद है ..कितना नही....

मनु- तो पता करो ना....

डॉक्टर- ह्म्म..15-20 दिन लगेगे....

मनु- ओके...टेक युवर टाइम.....

फिर मनु बाहर आई और बोली....

मनु- लगता है अंकित को सच बताना ही होगा....वो सच जो शायद उसकी जिंदगी बदल दे....या फिर...जिंदगी मिटा दे.....पता नही क्या होगा...जब उसे हक़ीक़त पता चलेगी......?????????

अकरम के घर...........

मैं जूही के साथ अकरम के घर मे एंटर हुआ तो मेरे सामने सबसे पहले गुल आ गई....जिसे देख कर लग रहा था कि वो अभी -अभी कहीं से आ रही है....क्योकि उसकी बाजू पर ट्रॅकिंग बॅग अभी भी लटका हुआ था....

गुल की नज़र जब मेरी बाहों मे झूल रही जूही पर पड़ी तो वो लगभग चिल्लाते हुए जूही का नाम लेने लगी....

गुल- जूही दी.....ये सब..कैसे....

शायद गुल ने जूही का प्लास्टर देख लिया था...इसलिए वो कुछ ज़्यादा ही ज़ोर से बोल पड़ी...

मैं या जूही जब तक गुल को समझाते...उससे पहले ही जूही की माँ सबनम किचन से निकल कर हॉल मे आ गई....

सबनम- क्या हुआ गुल...तुम जूही को....जूही....बेटा ये क्या हुआ....कैसे हुआ....

जैसे ही सबनम की नज़र मेरी तरफ पड़ी तो वो भी गुल की तरह ज़ोर से जूही के बारे मे पूछने लगी....

मैं- आंटी...रिलॅक्स.....

सबनम- अंकित...ये सब क्या है...ये जूही को...

मैं(आगे बढ़ते हुए)- रिलॅक्स आंटी....रिलॅक्स.....

फिर मैने साबधानी से जूही को सोफे पर लिटाया और सबनम को पकड़ कर उसे भी बैठा दिया....

सबमम(घबराई हुई)- बेटा...ये सब कैसे हुआ....

मैं- बताता हूँ आंटी...आप टेन्षन मत लो...पहले आराम से बैठो...सब बताता हूँ....

सबनम- हुह...

फिर मैने सबनम और गुल को जूही के आक्सिडेंट की कहानी सुना दी...जो पूरी तरह सच नही थी....ये सब सुनकर सबनम की आँखे नम हो गई और वो जूही को सहलाते हुए उसका हाल-चाल पूछने लगी....यही हाल गुल का था...बस गुल की आँखो मे पानी नही था...लेकिन दुख तो था....

फिर थोड़ी देर तक हम आपस मे आक्सिडेंट और जूही की बातें करते रहे....

हमारी बातें सुन कर सादिया और ज़िया भी नीचे आ गई...और आक्सिडेंट की वही कहानी सुन कर जूही से हमदर्दी दिखाने लगी...

सबसे लास्ट मे आया अकरम...वो भी तब...जब ज़िया उसे बुलाने गई....

अकरम आते ही जूही को देख कर घबरा सा गया...हालाकी वो रोया नही...पर उसकी आँखो मे दुख सॉफ नज़र आ रहा था....

अकरम ने जूही को देखने के बाद अपनी आँखे मेरी तरफ घुमाई....उसने मुझसे कुछ पूछा नही...पर उसकी आँखो ने बहुत कुछ पूछ लिया था....

मैने भी उसे आँखो से जवाब दे दिया...कि अभी शांत रहे...सब बताउन्गा....थोड़ा रुक...

तभी अचानक वसीम घर मे आ गया...जिसे देख कर उसकी पूरी फॅमिली हैरान थी....पर क्यो....ये नही पता...

फिर पता चला कि वसीम कल आने वाला था...पर आज आ गया तो सब हैरान हो गये....

पर हम सबसे ज़्यादा हैरान था अकरम....पता नही क्यो...पर वो वसीम को देख कर कुछ अजीब सा हो गया...उसकी आँखो मे वसीम के लिए बहुत कुछ था....पर मैं समझ नही पाया कि वो था क्या..और क्यो....????

वसीम- जूही..जूही मेरी बच्ची...तू ठीक है ना...ओह गॉड....कितनी चोट आ गई...सॉरी बेटा...सॉरी...

इस सॉरी वर्ड का मतलब शायद कोई समझा हो...पर मैं समझ चुका था...और ये भी समझ गया था कि वसीम आज ही क्यो आ टपका....

वसीम- बेटा...तू ठीक है ना...

जूही- जी डॅड...आइ म फाइन...अंकित टाइम पर आ गया था तो सब ठीक रहा...

वसीम(मुझे देख कर)- थॅंक्स अंकित...थॅंक्स...

मैं- अरे अंकल...ये क्या...ये तो मेरा फ़र्ज़ था...आख़िर मेरे फ्रेंड की बेहन है....इट्स ओके अंकल...

वसीम(जूही को देख कर)- थॅंक गॉड बेटा की तू ठीक है....तुझे पता है...मैं सारी रात परेशान था तेरे लिए...

सबनम- सारी रात....आपको रात को ही पता चल गया था क्या...पर कैसे...???

ये सवाल वसीम को अंदर तक हिला गया...एक्साइट्मेंट मे साला ये भी भूल गया था कि सबकी नज़रों मे वो आउट ऑफ सिटी गया था...तो जूही के बारे मे कैसे पता....

वसीम- म्म..मतलब...मैने रात को ख्वाब देखा था...तभी से....इसलिए तो चला आया...

सबनम- ओह्ह...अब आप सब बैठो...मैं कॉफी बना कर लाती हूँ...

फिर सबनम ने हम सबको कॉफी पिलाई...कॉफी पीने के बाद मैने और अकरम ने जूही को उसके रूम मे छोड़ दिया...और फिर मैं बाद मे आने का कह कर वहाँ से निकल आया....


RE: चूतो का समुंदर - sexstories - 06-08-2017

आज मैने और अकरम ने आपस मे कोई बात नही की थी...हम दोनो ही बस आँखो ही आँखो मे बहुत कुछ बात कर चुके थे....हमने सोचा कि अभी महॉल ठीक नही...सारी बाते बाद मे करेंगे....


क्योकि बोलने को बहुत कुछ था....कुछ मेरे पास भी...और बहुत कुछ अकरम के पास....जिससे मैं अंजान था....

अकरम के घर से निकल कर मैने कार को संजू के घर मोड़ दिया....

क्योकि एक तो मुझे अनु को समझाना था...और दूसरी बात ये ...कि मुझे वो वजह पता करनी थी...कि आज संजू मेरे घर क्यो नही आया...जबकि उसकी सारी फॅमिली मेरे घर पर थी...बस संजू नही....क्यो....???????

मैं थोड़ी दूर आगे ही पहुँचा था की मेरा फ़ोन बज उठा...ये मेरे आदमी एस का कॉल था....जिसका मुझे कल रात से इंतज़ार था....

मैने कार साइड की और कॉल पिक की....

( कॉल पर )

मैं- कहाँ थे आप...कब्से वेट कर रहा हूँ...

स- अरे...तुम तो मुझ पर चिल्लाने भी लगे....ह्म्म...

मैं- ओह..सॉरी..सॉरी...मेरा ऐसा मतलब नही था...मैं वो एक्साइट्मेंट मे....

स(बीच मे)- डोंट वरी....मैं समझ सकता हूँ....तुम बिल्कुल अपनी....

स कुछ कहते-कहते रुक गया....और मैने भी ज़्यादा माइंड नही किया....क्योकि मैं किसी और बारे मे सोच रहा था....

मैं- बिल्कुल अपनी...क्या मतलब...

स- कुछ नही....तुम बताओ...क्या बोल रहे थे....

मैं- ये लो...कल रात से मैं वेट कर रहा हूँ और आप अब पूछ रहे हो....क्या हो गया आपको....ध्यान कहाँ है...

स- ओह...हाँ...वो मैने पता कर लिया...वही बताना था...पर सुबह से एक खास काम मे फँस गया था...सॉरी...

मैं- आप प्ल्ज़ सॉरी मत बोलो....वेल...क्या पता लगा...

स- हाँ..कल रात को रफ़्तार हॉस्पिटल मे आया था...उसी ने पूरे स्टाफ को भगा दिया था....

मैं(बीच मे)- क्या...रफ़्तार...साला ये रफ़्तार की तो...अब ये गया...मैं इसकी ऐसी हालत करूगा कि साले की रूह भी काँप जाएगी....

स- अरे सुनो तो ...

मैं- क्या सुनू...साले की हिम्मत कैसे हुई...और वो आया क्यो था...क्या वो जूही को....

स(बीच मे)- अंकित...अंकित....रूको....मेरी बात सुनो...ओके...

मैं- ह्म्म...बोलो...

स- मैं ये बोल रहा था कि रफ़्तार अकेला नही था...और वो तो जूही के रूम मे आस-पास भी नही गया....

मैं- मतलब...कौन था उसके साथ...

स- पता नही...वो नकाब मे था...किसी ने नही देखा उसे....

मैं- नकाब मे....पर कौन हो सकता है....

स- इसका जवाब तो रफ़्तार ही देगा....पर डॉक्टर ने उसकी एक झलक देखी थी....और उसके बाते अनुसार वो वसीम था....

मैं- वसीम...पर वो वहाँ क्यो...उसे क्या ज़रूरत पड़ गई इस सब की...वो तो सामने से आ सकता था...जूही बेटी है उसकी...

स- ये तुम पता करो...

मैं- ह्म्म...शायद वो सबको ये बताना चाहता है कि वो सहर मे था ही नही...

स- पर उसने ऐसा क्यो किया...

मैं- वो मैं आपको बाद मे बताउन्गा....लंबी कहानी है...अभी आप ये बताओ कि रफ़्तार ने और क्या बका...वो असल मे इस सब मे कितना शामिल है...

स- पता नही....ये पता करना होगा....खुद रफ़्तार ही बता पायगा ये तो...

मैं- तो देर किस बात की उठाओ साले को...सब बक देगा....

स- नही...ऐसा नही कर सकते...

मैं- क्यो...

स- क्योकि उसके सिर पर बड़े लोगो का हाथ है....एक तो तुम जानते ही हो....एमएलए ...याद है ना....वो उसे बचा लेगा...और उपेर से रफ़्तार मोटी चमड़ी का है...आसानी से नही बकेगा कुछ....

मैं- ह्म्म...ये तो है...तो पहले एमएलए को देखता हूँ....फिर साले रफ़्तार को...

स- ह्म्म...तो कोई प्लान है या ऐसे ही देखोगे...

मैं- प्लान है...पर उससे पहले मुझे वर्मा को निपटना है...क्योकि उसे मैने टाइम दिया था....

स- अच्छा....तो वर्मा के मामले मे कोई प्रोग्रेस हुई....

मैं- ह्म्म...आज हो जाएगी...आप बस रॉनी को भेज देना....फिर वर्मा को ऐसा जॅलील करूगा कि साला कभी सर भी नही उठा पायगा....

स- ओके..पर भेजना कहाँ है...

मैं- अड्रेस दे दूँगा....

स- चलो फिर...मैं चला काम पर...

मैं- ह्म्म...वैसे एक बात पुछु...आपका वो खास काम था क्या....

स(कुछ देर चुप रहने के बाद)- वक़्त आने पर बता दूँगा बेटा....जब तक तुम खुद सोचो....शायद कुछ याद आ जाए...ह्म्म...चलो बाइ...


कॉल कट हो गया ...पर स का कहा आख़िरी सेंटेन्स मेरे माइंड को चियर गया....

मैं(मन मे)- याद आ जाए...पर क्या....ऐसा क्या हो सकता है जो हम दोनो से रिलेटेड हो...ह्म्म...

थोड़ी देर बाद मैने डिसाइड किया कि ये बात स से ही पूछुगा...फिलहाल अनु और संजू को देखा जाए...और फिर उस वर्मा के बच्चे को भी तो देखना है....उसकी तो आज माँ छोड़ दूँगा....

और मैने कार को एक बार फिर से संजू के घर दौड़ा दिया......


संजू के घर.............

जब मैं संजू के घर मे एंटर हुआ तो सब लोग हॉल मे ही मिल गये...पर वो दोनो लोग ही गायब थे....जिनसे मुझे बात करनी थी....अनु और संजू.....

मुझे देखते ही सब खुश हो गये...सिर्फ़ विनोद को छोड़ कर....उसकी तो ऐसी सकल थी जैसे मैने उसकी गान्ड मार दी हो....

मैं- संजू कहाँ है...

रजनी- पता नही बेटा...वो कल रात से गायब है...कह रहा था कि किसी दोस्त के घर रुक रहा है...

मैं- दोस्त ...कौन सा दोस्त....

रजनी- ये तो पूछा ही नही....खैर उसे छोड़ो...पहले बैठो तो सही...मैं कॉफी लाती हू....

मैं- ह्म्म....

फिर मैं कॉफी पीते हुए संजू के दाद को आक्सिडेंट के बारे मे बताता रहा....पर मेरी आँखे अभी अनु को ही ढूढ़ रही थी....

अनु तो नही आई पर रक्षा की आँखे शरारत पर उतर आई...और उसने मौका देख कर मुझे उपर चलने को बोल दिया...स्टडी के लिए.....

मैं भी उपर जाना चाहता था ताकि अनु को मिल सकु....पर वहाँ भी निराशा हाथ लगी...जब रक्षा ने बताया कि अनु किसी फ्रेंड के घर गई....

अब मैं रक्षा के रूम मे था तो रक्षा को चोदे बिना कैसे आता...साली मानी ही नही....

मैने एक राउंड रक्षा की जोरदार चुदाई की और संजू को ढूढ़ने निकल गया....

काफ़ी पूछ-ताछ करने के बाद मुझे पता चल ही गया कि संजू किसी अमर नाम के लड़के के घर गया है....

पर जब मैं वहाँ पहुँचा तो मुझे अमर नही मिला...हाँ उसका घर खुला हुआ था और अंदर वाले रूम से कुछ आवाज़े आ रही थी...

जब मैने गौर किया तो उसमे संजू की आवाज़ भी थी...मैने तुरंत कीहोल से अंदर का नज़ारा देखा तो सामने संजू किसी औरत के साथ था.....जो संजू से लिपटी पड़ी थी...और दोनो नंगे थे....

सामने का नज़ारा देख कर ...मैं ये तो समझ गया कि अंदर चल क्या रहा है...पर मेरा माइंड गरम हो गया...

ये सोच कर कि मेरा सबसे खास दोस्त मुझसे छिपा कर मज़े कर रहा है...पर क्यो...क्या मैं उसे रोकता..या उसका काम खराब करता...बिल्कुल नही...पर संजू ने मुझे क्यो नही बताया...क्यो...आख़िर क्यो...??

मैं अपने माइंड मे सवाल लिए वहाँ से निकल गया...पर वहाँ से निकलते हुए मुझे अमर ने देख लिया....और उसने अंदर जा कर सब संजू को बता दिया.....

संजू हड़बड़ी मे बाहर आया...मुझे आवाज़ दी...पर मैं वहाँ से कार दौड़ा चुका था....

मैने संजू को सुन कर भी अनसुना किया और कार दौड़ा दी...और संजू निराश हो कर खड़ा रहा....


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