Sex Hindi Kahani राबिया का बेहेनचोद भाई - Printable Version

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Sex Hindi Kahani राबिया का बेहेनचोद भाई - sexstories - 07-01-2017

राबिया का बेहेनचोद भाई--1

यू तो मैने जवानी की दहलीज़ पर पहला कदम उमर के चौदह्वे पराव में ही रख दिया था. मेरी छातियों के उभर छोटे छोटे नींबू के आकर के निकल आए थे. घर में अभी भी फ्रॉक और चड्डी पहन कर घूमती थी. अम्मी अब्बू के अलावा एक बड़ा भाई था, जो उमर में मुझसे दो साल बड़ा था. यानी वो भी सोलह का हो चुका था और मूछों की हल्की हल्की रेखाएँ उसके चेहरे पर आ चुकी थी. मूछों की हल्की रेखाओ के साथ उसके नीचे की मुच्छे भी आ चुकी होगी ऐसा मेरा अंदाज़ है. मेरी भाई के जैसी मुच्छे तो नही आई थी मगर बगलो में और नीचे की सहेली के उपर हल्के हल्के रोए उगने शुरू हो गये थे. 15 साल की हुई और नींबू का आकर छोटे सेब के जैसा हो गया, तब अम्मी ने मुझे नक़ाब पहना दिया यानी बाहर जाने पर हर समय मुझे बुर्क़ा पहन कर घूमना परता था. घर में लड़के नहीं आते, सिर्फ़ रिश्तेदारों के सिवा . भाय्या के दोस्त भी अगर आए तो ड्रॉयिंग रूम से ही चले जाते. फ्रॉक अब कम ही पहनती थी. बाहर निकालने पर सलवार कमीज़ के अलावा बुर्क़ा पहन ना परता था. घर में अभी भी कभी कभी फ्रॉक और चड्डी पहन लेती थी. जवानी की दहलीज़ पे कदम रखते ही, अपनी चूचियों और नीचे की सहेली यानी की चूत में एक अजीब सा खिचाओ महसूस करने लगी थी. जब सोलह की हुई तो यह खिचाव एक हल्की टीस और मीठी खुजली में बदल गई थी. बाथरूम में पेशाब करने के बाद जब पानी दल कर अपनी लालपरी को धोती तो मान करता कुछ देर तक यूँही रगर्ति रहूं. गोरी बुवर का उपरी हिस्सा झांटों से बिल्कुल धक गया था. नहाते वक्त जब कपड़े उतार कर अपनी चूचियों और चूत पर साबुन लगती तो बस मज़ा ही आजाता, हाथ में साबुन लेकर चूत में दल कर थोड़ी देर तक अंदर बाहर करती और दूसरे हाथ से चूचियों को रगर्ति.....अहह... .. खुद को बात रूम में लगे बड़े आईने में देख कर बस मस्त हो जाती......बड़ा मज़ा आता था...लगता था बस अपनी चूत और चूचियों से खेलती रहूं. घर में खाली समय में लड़को के बारे में सोचते सोचते कई बार मेरी बुर पासीज जाती और मैं बाथरूम में जाकर अपनी गर्मी कम करने के लिए उनलीयों से अपनी लालपरी की उपर वाली चोंच को मसालती थी और नीचे वाले छेद में उंगली घुसने की कोशिश करती थी. शुरुआत थोड़ी तकलीफ़ से हुई मगर बाद में बड़ा मज़ा आने लगा था. रात में अपने बिस्तर पर अपनी उंगलियों से करती थी और कई बार इतनी गरम हो जाती की दिन में टीन-टीन दफ़ा बाथरूम में पेशाब करने के बहाने अपनी चूत की घुंडी रगड़ने चली जाती थी. आप सोच रहे होंगे मैं इतनी छ्होटी उमर में इतनी गरम कैसे हो गई....मेरे अंदर लंड के लिए इतना दीवानापन... क्यों कर आ गया है.... तो जनाब ये सब मेरे घर के महॉल का असर है. वैसे अभी तो मेरा कमरा अम्मी अब्बू के बगल वाला है.... मगर जब में छ्होटी थी मैं अपने अम्मी अब्बू के साथ ही सोती थी. मुझे याद आता है.....मेरी उमर उस वक़्त 7 साल की होगी....मैं अम्मी के कमरे में ही सोती थी....अम्मी और अब्बू बड़े पलंग पर साथ सोते मैं बगल में सिंगल बेड पर सोती....कमरे में नाइट बल्ब जलता रहता था....कभी- कभी रातों को जब मेरी आँख खुलती तो अम्मी और अब्बू दोनो को नंगे एक दूसरे के साथ लिपटा छिपटि कर रहे होते .... कभी अम्मी अब्बू के उपर कभी अब्बा अम्मी के उपर चड़े होते.....कभी अब्बू को अम्मी के जाँघों के बीच पति....या अम्मी को अब्बू के पेट पर बैठे हुए पाती.... कभी अब्बू को अम्मी के उपर चढ़ कर धक्के मरते हुए देखती....दोनो की तेज़ साँसों की आवाज़ और फिर अम्मी की सिसकारियाँ.....उउउ...सस्स्स्स्स्सिईईई.....मेरे सरताज....और ज़ोर सी....सीईईईई..... कभी -कभी तो अम्मी इतनी बेकाबू हो जाती की ज़ोर ज़ोर से अब्बू को गलियाँ देती...भड़वे और ज़ोर से मार....आिइ...तेरी अम्मी को छोड़ू...रंडी की औलाद....गाँड का ज़ोर लगा....गाँड में ताक़त नही......चीखतीं... .बालों को पकड़ कर खींचती.... और दोनो एक दूसरे के साथ गली गलोज़ करते हुए चुदाई में मसरूफ़ रहते.... जबकि मैं थोड़ी सी डरी सहमी सी उनका ये खेल देखती रहती.... और सोचती की दिन में दोनो एक दम शरीफ और इज़्ज़तदार बन कर घूमते है..... फिर रात में दोनो को क्या हो जाता है. सहेलियों ने समझदारी बढ़ने में मदद की और....इस मस्त खेल के बारे में मेरी जानकारी बढ़ने लगी. मेरी नीचे की सहेली में भी हल्की गुदगुदी होने लगी.....अब मैं अम्मी अब्बू का खेल देखने के लिए अपनी नींद हराम करने लगी... शायद उन दोनो शक़ हो गया या उन्हे लगा की मैं जवान हो रही हूँ....उन लोगो ने मेरा कमरा अलग कर दिया...हालाँकि मैने इस पर अपनी नाराज़गी जताई मगर अम्मी ने मेरे अरमानो को बेरहमी कुचल दिया और अपने बगल वाले कमरे में मेरा बिस्तर लगवा दिया. मैने इसके लिए उसे दिल से बाद-दुआ दी.... जा रंडी तुझे 15 दिन तक लंड नसीब नही होगा. मेरा काम अब अम्मी-अब्बू की सिसकारियों को रात में दीवार से कान लगा कर सुन ना हो गया था.....अक्सर रातों को उनके कमरे से प्लांग के चरमरने की आवाज़..... अम्मी की तेज़ सिसकारियाँ.....और अब्बू की....ऊओन्ंह... ..ऊओं... की आवाज़ें....ऐसा लगता था की जवानी की मस्ती लूटी जा रही है....की आवाज़ो को कान लगा कर सुनती थी और अपने जाँघो के बीच की लालमूनिया को भीचती हुई...अपने नींबुओ को हल्के हाथो से मसालती हुई सोचती.... अम्मी को ज़यादा मज़ा आता होगा, शाई की चूचियाँ फूटबाल से थोड़ी सी ही छ्होटी होगी. मेरी अम्मी बाला की खूबसूरत थी. अल्लाह ने उन्हे गजब का हुस्न आता फरमाया था. गोरी चित्ति मक्खन के जैसा रंग था. लंबी भी थी और मशाल्लाह क्या मोटी मोटी जांघें और चुटटर थे. गाँड मटका कर चलती तो सब गान्डुओन की छाती पर साँप लॉट जाता होगा ऐसा मेरे दिल में आता है. रिश्तेदारो में सभी कहते थे की मैं अपनी अम्मी के उपर गई हूँ....मुझे इस बात पर बरा फख्रा महसूस होता....मैं अपने आप को उन्ही के जैसा सज़ा सॉवॅर कर रखना चाहती थी. मैं अपनी अम्मी को छुप छुप कर देखती थी. पता नही क्या था, मगर मुझे अम्मी की हरकतों की जासूसी करने में एक अलग ही मज़ा आता था और इस बहाने से मुझे जिस्मानी ताल्लुक़ात बनाने के सारे तरीके मालूम हो गये थे. वक़्त के साथ-साथ मुझे यह अंदाज़ा हो गया की अम्मी - अब्बू का खेल क्या था....जवानी की प्यास क्या होती है....और इस प्यास को कैसे बुझाया जाता है. मर्द - औरत अपनी जिस्म की भूक मिटाने के लिए घर की इज़्ज़त का भी शिकार कर लेते है....अम्मी की जासूसी करते करते मुझे ये बात पता चली.....अम्मी ने अपने भाई को ही अपना शिकार बना लिया था....मुझे इस बात से बरा ताजुउब हुआ और मैने मेरी एक सहेली आयशा से पुछा की क्या वाक़ई ऐसा होता है ...या फिर मेरी अम्मी ही एक अलबेली रंडी है.....उसने बताया की ऐसा होता है और....वो खुद अपनी अम्मी के साथ भाई और उसके दोस्तूँ की चुदाई का मज़ा लेती है.... उसकी किस्मत पर मुझे बड़ा जलन हुआ.... मैं इतनी खुश किस्मत नहीं थी.....हुस्न और जवानी खुदा ने तो दी थी ...लेकिन इस हसीन जवानी का मज़ा लूटने वाला अब तक नहीं मिला था....मेरी जवानी ज़ंज़ीरों में जकड़ दी गई है....अम्मी का कड़ा पहरा था मेरी जवानी पर....खुद तो उसने अपने भाई तक को नहीं छोड़ा था....लेकिन मुझ पर इतनी बंदिश के अगर चूचियों पर से दुपट्टा सरक जाए तो फ़ौरन डांट लगती.....राबिया अब तू बच्ची नहीं.....ढंग से रहा कर....जवानी में अपने भाई से भी लिहाज़ करना चाहिए....कभी- कभी तो मुझे चिढ़ आ जाता....मन करता कह डू...साली भोंसड़ी..... रंडी... खुद तो ना जाने कितनी लंड निगल चुकी है....

अपने भाई तक को नहीं छोड़ा ....और मेरी चूत पर पहरे लगती है....खुद तो अपने शौहर से मज़े लेते समय कहती है खुदा ने जवानी दी है इसीलिए की इसका भरपूर मज़ा लूटना चाहिए और मुझ पर पाबंदी लगती है....मगर मैं ऐसा कह नही पाई कभी....घर की इसी बंदिश भरे माहौल में अपनी उफनती गरम जवानी को सहेजे जी रही थी.....घुटन भी होती थी...दिल करता था...इन ज़ंज़ीरो को तोड़ डू....अपने नक़ाब को नोच डालु...


अपने खूबसूरत गदराए मांसल चूतरों को जीन्स में कस कर...अपनी छाती के कबूतरो को टी - शर्ट में डाल कर उसके चोंच को बरछा (भाला ) बना कर लड़कों को घायल करू.... लड़कों को ललचाओ.... और उनकी घूरती निगाहों के सामने से गाँड मटकती हुई गुज़रु...पर अम्मी साली घर से निकालने ही नही देती थी....कभी मार्केट जाना भी होता था....तो नक़ाब पहना कर अपने साथ ले जाती थी. एक बार एक सहेली के घर उसकी सालगिरह के दिन जाना था....मैने खूब सज-धज कर जीन्स और टी - शर्ट पहना फिर उसके उपर से नक़ाब डाल कर उसके घर चली गई...वहा पार्टी में अम्मी की कोई सहेली आई थी उसने देख लिया....अम्मी को मेरे जीन्स पहन ने का पता चला तो मुझे बहुत डांटा ...इतनी घुटन हुई की क्या बताए.

एक बार अब्बू कही बाहर चले गये....15 दिनों की अब्बू की गैर मौजूदगी ने शायद अम्मी की जवानी को तड़पने को मजबूर कर दिया था.....जब वो नहाने के लिए गुसलखाने में घुसी तो मैने दरवाजे के छोटे छेद के पास अपनी आँखो को लगा दिया और अम्मी की जासूसी करने में मैं वैसे एक्सपर्ट हो चुकी थी. साली ने अपनी सारी उतरी फिर ब्लाउज के उपर से ही अपने को आईने में निहारते हुए दोनो हांथों को अपनी चूचियों पर रख कर धीरे-धीरे मसलने लगी...मेरे दिल की धरकन तेज हो गई....इतने लंड खा चूकने के बाद भी ये हाल....15 दिन में ही खुजली होने लगी.....यहाँ मैं 17 साल की हो गई और अभी तक....


खैर अम्मी ने चूचियों पर अपना दबाओ बढ़ाना शुरू कर दिया ....सस्सिईईईईई... ..अम्मी अपनी होंठों पर दाँत गाडते हुए सिसकारी ली......फिर ब्लाउस के बटन एक-एक कर खोलने लगी.....अम्मी की दो बड़ी- बड़ी हसीन चूंचीयाँ काले ब्रसियर में फाँसी बाहर नेकालने को बेताब हो गयी..... अम्मी ने एक झटके से दोनो चूचियों को आज़ाद कर दिया..... फिर पेटिकोट के रस्से (नारे) को भी खोल कर पेटिकोट नीचे गिरा दिया.... आईएनए में अपने नंगे हुस्न को निहार रही थी.....बड़ी-बड़ी गोरी सुडोल चूंचीयाँ... हाय !! मेरी चूंची कब इतनी बड़ी होगी....साली ने भाई और अब्बू से मसलवा मसलवा कर इतना बड़ा कर लिया है.....गठीला बदन.....ही कितनी मोटी जांघें है.....चिकनी....वैसे जांघें तो मेरी भी मोटी चिकनी और गोरी गोरी थी......तभी मेरी नज़र इस नंगे हुस्न को ....देखते हुए चूत पर गयी.....ही अल्लाह! कितनी हसीन चूत थी अम्मी की....बिल्कुल चिकनी....झांटों का नामोनिशान तक नहीं था उनकी बुर पर....


RE: Sex Hindi Kahani राबिया का बेहेनचोद भाई - sexstories - 07-01-2017

राबिया का बेहेनचोद भाई--2

. थोड़ी सी झांट छोड़ रखी थी अपनी चूत के उपरी हिस्से में पेडू के नीचे.....शायद रंडी ने डिज़ाइन बनाया हुआ था....अपने भाई को ललचाने के लिए....अब्बू तो कुत्ता था....अपना पेटिकोट भी सूँघा देती तो साला दुम हिलता चला आता उसके पास.... ही क्या गोरी चूत थी....वैसे चूत तो मेरी भी गोरी थी मगर अम्मी की चूत थोड़ी फूली हुई थी....मोटे मोटे लंड खा खा कर अपनी चूत को फूला लिया था चूत मरानी ने.....उनके नंगे हसीन जिस्म को देख कर मेरी चूत में भी जलन होने लगी.....मैं अपनी सलवार को चूतड़ से खिसका कर अपनी नंगी चूत को सहलाने लगी....और साथ ही अम्मी के मस्ताने खेल का नज़ारा भी देखती रही.....बड़ी मस्त औरत लग रही थी इस वक़्त मेरी अम्मी....थोड़ी देर तक अपने नंगे जिस्म पर हाथ फेरती रही.....


दोनो चूचियों को अपने हांथों से मसालते हुए दूसरा हाथ अपनी चूत पर ले गयी....चूत की होंठों को सहलाने लगी...और फिर सहलाते-सहलाते अपनी उँगलियों को चूत में घुसेड़ दिया....पहले तो धीरे धीरे उँगलियों को बुर के अंदर बहेर करती रही फिर उसकी रफ़्तार तेज़ होगआई....साथ ही साथ आमी अपनी गाँड को भी हिचकोले दे रही थी....बड़ा मस्त नज़ारा था....अम्मी थोड़ी देर तक अपने जिस्म से यह खेल खेलती रही फिर शावेर ओन किया और अपने जिस्म को भिगो कर साबुन लगाने लगी....खूब अच्छी तरह से उसने अपने पुर नंगे जिस्म पर साबुन लगाया.....अपनी दोनो चूचियों पर ....अपनी चिकनी चूत पर ....तो खूब झाग निकल कर उसने साबुन रग्रा....फिर अम्मी ने अपनी चूत में उंगलीयूं को घुसेड़ा ...एक ....दो...तीन ... और फिर पाँचों उंगलियाँ....चूत के अंदर दल दी.....धीरे धीरे अंदर बाहर करते हुए....


ही...अल्लाह... .क्या बताऊँ चूत मरानी कितनी गरम हो गई थी....मुँह से गु गु की आवाज़ निकलते हुए चूत में उंगलियाँ पेल रही थी.....थोड़ी देर तक अम्मी यूँही अपने बुर की चुदाई करती रही....चूतरों का हिचकोला तेज़ होता गया .....आहह....ऊओ... .और फिर अम्मी का जिस्म एक झटके के साथ शांत हो गया......अम्मी मदहोशी की आलम में फर्श पर झरने के नीचे लेट गयी.....थोड़ी देर शांत नंगे पड़ी रहने के बाद उठ कर नहाना शुरू किया....खेल ख़तम हो चक्का था.....मेरी बुर ने भी पानी छोड़ दिया था.....मैं शलवार थामे अपने कमरे में आई.....थोड़ी देर तक चूत को सहलाती रही .. एक उंगली घुसेरी....चूत के अंदर थोड़ी देर तक उंगली घुसती गयी...फिर रुक गयी....मैं अक्सर अपनी बुर एक उंगली से ही चोदा करती थी....पर अम्मी को देख कर जोश में आ गई ....बुर फैला कर दो उंगली घुसने की कोशिश की ....थोड़ा दबाव डाला तो दर्द हुआ... में ने डर कर छोड़ दिया....ही निगोरी मेरी चूत कब चौड़ी होगी....मुझे बड़ा अफ़सोस हुआ...क्या मेरी चूत फाड़ने वाला कोई पैदा नही हुआ.

वक़्त गुज़रता गया....जिस्म की भूक भी बढ़ती गयी.....लेकिन है रे किस्मत .....17 साल की हो चुकी थी लेकिन कोई लंड नही नसीब हो सका था जो मेरी कुँवारी चूत के सील को तोड़ कर मुझे लड़की से औरत बना देता...कोई रगड़ कर मसल कर मज़ा देने वाला भी मुझे नही मिला था.....मेरी शादी भी नहीं हो रही थी... अम्मी और अब्बू मेरे लिए लड़के की खोज में थे......उनका ख्याल था की 18 की होते-होते वो मेरे लिए लड़का खोज़ लेंगे....पर 18 की होने में तो पूरा साल बाकी था....तब तक कैसे अपनी उफनती जवानी को संभालू....चूत के कीड़े जब रातो को मचलने लगते तो जी करता किसी भी राह चलते का लंड अपनी चूत में ले लूँ....पर फिर दिल नही मानता....इतने नाज़-नखरो से संभाली हुई....गोरी चित्ति अनचुदी बुर किसी ऐरे गैरे को देना ठीक नही होगा....इसलिए अपने दिल को समझती....


लेकिन बढ़ती उमर के साथ चूत की आग ने मुझे पागल कर दिया था और चुदाई की आग मुझे इस तरह सताने लगी थी की.....मेरे ख्वाबो ख़यालो में सिर्फ़ लंड ही घूमता रहता था....हाय रे किस्मत ....मेरी बहुत सारी सहेलियों ने उपर-उपर से सहलाने चुसवाने....चूसने का मज़ा ले लिया था और जब वो अपने किससे बताती तो मुझे अपनी किस्मत पर बहुत तरस आता...घर की पाबंदियों ने मुझे कही का नही छ्चोड़ा था....उपर-उपर से ही किसी से अपनी चूचियों को मसलवा लेती ऐसा भी मेरे नसीब में नही था....जबकि मेरी कई सहेलियों ने तो चूत की कुटाई तक करवा ली थी.


शुमैला ने तो अपने दोनो भाइयों को फसा लिया था...उसकी हर रात...सुहागरात होती थी और अपने दोनो भाइयों के बीच सोती थी....वो बता रही की एक अपना लंड उसकी चूत से सटा देता था और दूसरा उसकी गाँड से तब जा कर उसे नींद आती थी.....पर है रे मेरी किस्मत एक भाई भी था तो दूर दूर ही रहता था और अब तो शहर छोड़ कर बाहर MBA करने के लिए एक बड़े शहर में चला गया था.
मैने अब बारहवी की पढ़ाई पूरी कर ली थी. वैसे तो हम जिस शहर में रहते है वाहा भी कई कॉलेज और इन्स्टिट्यूशन थे जहा मैं आगे की पढ़ाई कर सकती थी मगर जब से मेरी सहेली रेहाना जो की मुझ से उमर में बड़ी है..... जिसकी शादी उसी शहर में हुई थी जिसमे भाई पढ़ने गये थे....के बारे में और वाहा के आज़ादी और खुलेपन के महॉल के बारे में बताया तो....मेरे अंदर भी वहा जाने और अपनी पढ़ाई को आगे बढाने की दिली तम्मना हो गई थी.

इसे शायद मेरी खुसकिस्मती कहे या फिर अल्लाह की मर्ज़ी, मेरा भाई 6 महीने पहले ही वही के एक मशहूर कॉलेज में MBA की पढ़ाई करने के लिए दाखिला लिया था. पैसे की परेशानी तो नही थी लेकिन अम्मी अब्बू राज़ी हो जाते तो मेरा काम बन जाता..... और मैं खुली हवा में साँस लेने का अपना ख्वाब पूरा कर लेती.....जो की इस छोटे से शहर में नामुमकिन था.


मैने अपनी ख्वाहिश अपनी अम्मी को बता दी...उसका जवाब तो मुझे पहले से पता था...कुतिया मुझे कही जाने नही देगी....मैने फिर ममुजान से सिफारिश लगवाई...मामू मुझे बहुत प्यार करते थे....शायद मैं उन्ही के लंड की पैदाइश थी...उन्होने अम्मी को समझाया की मुझे जाने दे....वैसे भी इसकी शादी अभी हो नही रही......पढ़ाई कर लेने में कोई हर्ज़ नही है....फिर भाई भी वही रह कर पढ़ाई कर रहा है....मामू की इस बात पर अम्मी मुस्कुराने लगी....मामू भी शायद समझ गये और मुस्कुराने लगे..... और मुझ से कहा जाओ बेटे अपने कपड़े जमा लो......मैं तुम्हारे भाई से बात करता हूँ...मैं बाहर जा कर रुक गई और कान लगा कर सुन ने लगी....

अम्मी कह रही थी... हाए !! नही !! वहा भाई के साथ अकेले रहेगी...कही कुछ .....मामू इस पर अम्मी की जाँघ पर हाथ मारते हुए बोले....आख़िर बच्चे तो हमाए ही है ना....अगर कुछ हो गया तो संभाल लेंगे फिर.....बाद में देखेंगे....मेरे पैर अब ज़मीन पर नही थे..अब मुझे खुली हवा में साँस लेने से कोई नही रोक सकता था....दौड़ती हुई अपने कमरे में आ कर अपने कपड़ो को जमाने लगी....अम्मी से छुपा कर खरीदे हुए जीन्स और T-शर्ट....स्कर्ट-ब्लाउस....लो-कट समीज़ सलवार....सभी को मैने अपने बैग में डाल लिया....उनके उपर अम्मी की पसंद के दो-चार सलवार कमीज़ और बुर्क़ा रख दिया....अम्मी साली को उपर से दिखा दूँगी....उसे क्या पता नीचे क्या माल भर रखा है मैने....फिर ख्याल आया की खाली चुदवाने के लिए तो बड़े शहर नही जाना है....


कुछ पढ़ाई की बाते भी सोच ली जाए....ये हाल था मेरी बहकति जवानी का पहले चुदाई के बारे में सोचती फिर पढ़ाई के बारे में.....अल्लाह ने ये चूत लंड का खेल ही क्यों बनाया...और बनाया भी तो इतना मजेदार क्यों बनाया....है. थोड़ी देर बाद अम्मी और मामू मेरे कमरे में आए और दोनो समझाने लगे.... की शहर में कैसे रहना है. भाई को उन्होने दो कमरो वाला फ्लॅट लेने के लिए कह दिया है....और ऐसे तो पता नही वो कहा ख़ाता-पिता होगा....मेरे रहने से उसके खाना बनाने की दुस्वरियों का भी ख़ात्मा हो जाएगा......दोनो लड़ाई नही करेंगे....और अपनी सहूलियत और सलाहियत के साथ एक दूसरे की मदद करेंगे....दो दिन बाद का ट्रेन का टिकेट बुक कर दिया गया...भाई मुझे स्टेशन पर आकर रिसीव कर लेगा ऐसा मामू ने बताया. 

दो दिन बाद मैं जब नक़ाब पहन कर ट्रेन में बैठी तो लगा जैसे दिल पर परा सालो से जमा बोझ उतार गया.....आज इतने दिनों के बाद मुझे मेरी आज़ादी मिलने वाली थी....अम्मी की पाबंदियों से कोसों दूर मैं अपनी दुनिया बसाने जा रही थी....ट्रेन खुलते ही सबसे पहले गुसलखाने जा कर अपने नक़ाब से खुद को आज़ादी दी अंदर मैने गुलाबी रंग का खूबसूरत सा सलवार कमीज़ पहन रखा था जो थोड़ा सा लो कट था....दिल में आया की ट्रेन में बैठे बुढहो को अपने कबूतरो को दिखा कर थोड़ा लालचाऊं ..... मगर मैने उसके उपर दुपट्टा डाल लिया. चुस्त सलवार कमीज़ मेरे जिस्मानी उतार चढ़ाव को बखूबी बयान कर रहा थे.....पर इसकी फिकर किसे थी मैं तो यही चाहती थी....



बालो का एक लट मेरे चेहरे पर झूल रहा था.....जब अपने बर्थ पर जा कर बैठी तो लोगो की घूरती नज़रे बता रही थी की मैं कितनी खूबसूरत हूँ....सभी दम साढ़े मेरी खूबसूरती को अपनी आँखो से चोदने की कोशिश कर रहे थे....शायद मन ही मन आहे भर रहे थे....एक बुड्ढे की पेशानी पर पसीने की बूंदे चमक रही थी.....एसी कॉमपार्टमेंट में बुढहे को क्यों पसीना आ रहा था.....खैर जाने दे मैं तो अपनी मस्ती में डूबी हुई नई-नई मिली आज़ादी के लज़्ज़त बारे मज़े से उठा ती हुई ...मस्तानी अल्ल्हड़ चाल से चलती.... कूल्हे मटकाती हुई आई और.....पूरी बर्थ पर पसार कर बैठ गई....हाथ में मेरे सिड्नी शेल्डन का नया नोवेल था....एक पैर को उपर उठा कर जब मैने अपनी सैंडल उतरी तो सब ऐसे देख रहे थे....जैसे मेरी सैंडल चाट लेंगे या खा जाएँगे....



अपने गोरे नाज़ुक पैरो से मैने सैंडल उतरी....पैर की पतली उंगलिया जिसके नाख़ून गुलाबी रंग से रंगे थे को थोड़ा सा चटकाया....हाथो को उपर उठा कर सीना फूला कर साँस लिया जैसे कितनी तक गई हूँ और फिर नोवेल में अपने आप को डूबा लिया.



सुबह सुबह जब ट्रेन स्टेशन पर पहुचने वाली थी तो मैं जल्दी से उठी और गुसलखाने में अपने आप को थोड़ा सा फ्रेश किया आँखो पर पानी के छींटे मारे....थोड़ा सा मेक-उप किया....काजल लगाया ...फिर वापस आकर अपने बैग को बाहर निकल कर संभालने लगी. ट्रेन रुकी खिड़की से बाहर भाई नज़र आ गया.


RE: Sex Hindi Kahani राबिया का बेहेनचोद भाई - sexstories - 07-01-2017

राबिया का बेहेनचोद भाई--3

. दरवाजे के पास भीड़ कम होने पर मैं अपना समान उठा कर इठलाती हुई दुपट्टा संभालते...दरवाजे के पास आई....सामने भाई खड़ा था मगर वो आगे नही बढ़ा फिर अचानक चौंक कर आगे आया....मेरे हाथ से बैग ले लिया...मैं धीरे से इठलाती हुई नीचे उतरी और भाई को सलाम किया....और मुस्कुराते हुए कहा....ही भाई आप तो मुझे अंजानो की तरह से देख रहे थे...इतनी जल्दी अपनी बहन को भूल गये....भाई ने मुस्कुराते हुए कहा....अर्रे नही घर में तो तू ऐसे ही घरेलू कपड़ों में रहती है.....एक दम बदली हुई लग रही हो...मैं थोड़ा शरमाई फिर अदा के साथ बोली....आप भी तो भाई बदले बदले से लग रहे हो....बड़े शहर के स्टाइल …. सारे मज़े ले लिए क्या....भाई इस पर थोड़ा झेप गया और दाँत दिखाते हुए बोला....अर्रे ये सब करना पड़ता है...



मैं भी हस्ती हुई बोली....हा बड़ा शहर बड़ा कॉलेज...फिर अगर स्टाइल से ना रहे तो सब मेरे भाई को जाहिल समझेंगे....भाई भी हँसने लगा. स्टेशन से बाहर आकर हमने टॅक्सी पकड़ी और फ्लॅट के तरफ चल दिए. फ्लॅट छ्होटा सा था एक मास्टर बेडरूम एक किचन एक ड्रॉयिंग रूम कम डाइनिंग हॉल था उसी में एक तरफ बेड लगा हुआ था. भाई ने दिखाते हुए कहा....यही हमारा घर है...तू अपना समान बेडरूम में डाल दे....अब से वो तेरा कमरा हो गया.....मैं यहा बाहर वाले बेड पर सो जाऊँगा ....तुझे पूरी प्राइवसी रहेगी....मैने मन ही मन मे कहा प्राइवसी की किसको फ़िकर है....तुम भी इसी कमरे में आ जाओ पब्लिक प्रॉपर्टी बना दो....



फिर अपने रण्डीपना पर खुद ही हसी आ गई....मैं भी कैसे कैसे ख्याल रखती हूँ...थोड़ी देर बाद भाई कॉलेज के लिए निकल गया.....मैं घर के काम में मसरूफ़ हो गई....अकेला लड़का घर को जंगल बना देता है......खैर मैने पूरे घर की सॉफ सफाई कर दी....सारा समान अपने ठिकाने पर जमा दिया......खाना बना कर भाई का इंतेज़ार करने लगी.....देर रात वो घर आया और उसने मुझे अपने कॉलेज के कंप्यूटर साइन्स की डिग्री कोर्सस का अप्लिकेशन फार्म दिखाए.....बोले ले इसे भर लेना...कल तेरा अड्मिशन हो जाएगा....और कल से ही क्लास भी शुरू हो जाएगी....मैने कहा.....इतनी जल्दी भाई....मैं तो सोच रही थी अड्मिशन के कुछ दिन बाद क्लास शुरू होगी....
भाई इस पर हँसते हुए बोले....अर्रे अड्मिशन्स तो क्लोज़ हो गये थे....मैने प्रोफेसर से बात कर ज़बरदस्ती अड्मिशन कराया है तेरा....मैने उठ कर भाई को गले लगा लिया...ओह थॅंक यो भाई.....भाई ने हँसते हुए कहा.....मुझे भी खाना बनाने वाली की ज़रूरत थी...अड्मिशन तो मैं कैसे भी करवा लेता....हम दोनो हँसने लगे...मैने उसकी छाती पर प्यार से एक मुक्का मारा और कहा....जाओ मैं नही बोलती तुमसे...मैं कोई खाना बनाने आई हूँ....फिर भाई ने प्यारा से मेरा माथा चूम लिया और बोले...ही बन्नो मेरी गुड़िया....तेरा अगर दिल नही है तो मत बना खाना....मेरी गुड़िया सिर्फ़ आराम करेगी...भाई के इस प्यार भरे चुंबन से पूरे जिस्म में सनसनी दौर गई....मुझे नही पता था की उसने क्या सोच कर मेरा माथा चूमा था....मैं तो मर्द के बदन की प्यासी थी....हाथ लगते ही लहरा गई...मगर भाई ने फिर छोड़ दिया....आसमान से ज़मीन पर आ गई.

खाना खाने के बाद मैं सोने चली गई. ट्रेन का सफ़र और दिन भर काम करने के कारण थकान थी....जल्दी ही आँख लग गई....सुबह आँख खुली तो जल्दी जल्दी तैय्यर होने लगी...कपड़े पहनते वक़्त पेशोपस में थी...नक़ाब पहनु या नही....फिर सोचा चलो भाई से....पूछ लेती हूँ.......उसने कहा....यहा इसकी कोई पाबंदी नही है....कोई नही पहनता.....फिर यहाँ कौन सी अम्मी की सहेलियाँ तेरी जासूसी करने वाली है.....जो मर्ज़ी आए वो पहन ले....फिर मैने सलवार कमीज़ पहन ली......काले रंग की....जिसमे मेरा गोरा हुस्न और निखार गया...भाई भी मुझे देख कर मुस्कुरा दिए और कहा....ताबीज़ बाँध ले नज़र लग जाएगी...बहुत प्यारी लग रही है...मैं हँसते हुए उनके बाइक पर पीछे बैठ गई और उसकी पीठ पर एक मुक्का हल्के से जमा दिया. कॉलेज में अड्मिशन लेने के बाद क्लास शुरू हो गये. बिज़ी रहने के कारण ज़यादा कुछ नोटीस करने का मौका ही नही मिला....



फिर हम लोगो का यही रूटीन बन गया कॉलेज जाना 3 बजे के आस पास घर वापस आना....धीरे धीरे मैं सेट्ल हो गई....नई नई सहेलियाँ मिल गई....को-एजुकेशन वाले कॉलेज में लड़को की नज़रो की दहक भी मुझे महसूस होने लगी...पैसे वालो का कॉलेज था.... अपनी निगहों की तपिश से जलाने वालो की कमी नही थी....जायदातर की नज़रे मेरी चूचियों और चूतड़ों के उपर ही जमी रहती थी....क्लास नही होने पर.....दोस्तो के साथ गॅप सॅप करते हुए वक़्त गुजर जाता था. कुच्छेक के बॉय फ्रेंड भी थे.....मैं भी एक बॉय फ्रेंड बनाने की ख्वाहिशमंद थी......



जब से इस बड़े शहर में आई थी.....बिज़ी होने के वज़ह से.....चूत और लंड के बारे में सोचने का मौका ही नही मिला था....घर पर तो अम्मी अब्बू और मामू की हरकतों की जासूसी करने की वज़ह से हर वक़्त दिल में अपनी प्यारी सि चूत को चुदवाने के ख़याल मे डूबी रहती थी......वही जिन्न एक दफ़ा फिर मेरे अंदर कुलबुलाने लगा....जब सेट्ल हो गई तो फिर से चूत में कीड़ों ने रेंगना शुरू कर दिया.....शहर की आज़ादी ने सुलगते जज़्बातो को हवा दी....किसी मर्द के बाहों में समा जाने की ज़रूरत बड़ी शिद्दत के साथ महसूस होने लगी.....कॉलेज के लड़को को देख-देख कर जिस्म की आग और ज़यादा भड़क जाती थी....


उनके अंडरवेर में कसे लंड के बारे में सोच सोच चूत पानी छोड़ने लगती ....ख्वाब में एक आध लड़को का लंड भी अपनी नीचे की सहेली में पायबस्त करवा लिया...पर कहते है थूक चाटने से प्यास नही भुजती....ख्वाब में पिलवाने से फुद्दी की आग तो भुजने से रही....कई दफ़ा रातो को फ्रिड्ज में से बरफ का टुकड़ा निकल कर नीचे की गुलाबी छेद में डाल लेती थी....मगर इस से आग और भड़क जाती थी.....निगोरी बुर में ऐसी खुजली मची थी की बिना सख़्त लंड के अब शायद सकूँ नही मिलने वाला था.

कॉलेज में मेरी सबसे प्यारी सहेली फ़रज़ाना और तबस्सुम थी...दोनो वैसे तो मेरे से उमर में दो साल बड़ी थी मगर हम तीनो में खूब बनती थी....वो भी मेरी ही तरह मस्त....जवानी के गुरूर में उपर से नीचे तक सारॉबार थी....हम तीनो आपस में हर तरह की बाते करते थे...मैं उनको प्यार से फर्रू और तब्बू कह कर बुलाती थी.....हम तीनो आपस में लड़को के बारे में बहुत सारी बाते करते थे...तब्बू बड़ा खुल कर बताती थी....उसे चुदाई और चुदवाने के बारे में बहुत कुछ पता था.....मैं भी जानती थी....अम्मी की जासूसी करने की वजह से तजुर्बेकार हो गई थी....मगर फ़रज़ाना जायदातर इन बातो के बीच में चुप रहती.....हमारी बातो पर हस्ती और मज़ा लेती.....मगर कभी खुद से उसने कोई गंदी बात नही की.....


मगर तब्बू कुछ ऐसी बाते बतलती जो वही बता सकता है जिसने लंड ले लिया हो.....वैसे तो हमे पता था की उसकी दो तीन लड़को के साथ दोस्ती है मगर.....फिर धीरे-धीरे उसने खुद ही बता दिया की कैसे और किस किस के साथ उसने चुदाई का मज़ा लिया है....फिर क्या था हम हर रोज उसके साथ उसकी रंगीनियों की नये नये किससे सुनती थी..... कुछ दिनों बाद अचानक से तब्बासुम का कॉलेज आना बंद हो गया......किसी को कुछ पता नही था.....उसके घरवालो के साथ हमारी कोई जान पहचान तो थी नही......फिर एक लड़की ने बताया की.....उसके अब्बा का कही दूसरी जगह ट्रान्स्फर हो गया है......



रंगीन सहेली के जाने के बाद दो बेरंग सहेलियों की बीच क्या बाते होती.....मज़े की बाते धीरे धीरे कम हो गई थी..... मैं एक बार फर्रू से पुछा की उसका कोई बाय्फ्रेंड है क्या......तब उसने मुँह बिचकाया और कहा....बाय्फ्रेंड का झंझट मैं नही पालती....वो साले तो जी का जंजाल होते है....मुझे बड़ा ताज्जुब हुआ....मैने उसका हाथ पकड़ कर कहा...ही क्या बात कर रही है फर्रू जान....तूने तो मेरा दिल तोड़ दिया...मैं तो सोच रही थी काश मेरे भी दो तीन बॉय फ्रेंड होते तब्बू के जैसे....फ़रज़ाना ने मेरे गाल पर प्यार भरी चपत लगते हुए कहा....रंडी बनेगी क्या.....मैने उसकी कमर में चिकोटी काट ली और कहा....है मेरी जान.... बातो में तो हम रंडियों को भी मॅट कर देगी....और हम दोनो हँसने लगे....



फिर फर्रू ने बताया की वो इन सब चक्करो में नही पड़ती....और मुझे शराफ़त और खानदानी लड़की होने का लेक्चर पीला दिया....मैने मन ही मन गली दी साली कुतिया .....शरिफजदी बनती है....चूत में ढक्कन लगा कर घूमती रह जाएगी हरामखोर ....... फिर बातो का रुख़ दूसरी तरफ मुड़ गया.

कुछ दिन के बाद एक दिन हम इंटरनेट की प्रॅक्टिकल कर रहे थे....क्लास ख़तम हो चुका था पर मैं और मेरी एक क्लास मेट शबनम वैसे ही बैठे बाते कर रहे थे.....बात घूम फिर कर लड़को और फिर बाय्फरेंड्स पर आई तो....शबनम ने कहा....रुक मैं तुझे कुछ दिखती हू....फिर उसने एक वेबसाइट खोली उस पर बहुत सारी गंदी गंदी....तस्वीरे थी....लड़के और लड़कियों की....फिर उसने कुछ क्लिक किया और फिर एक वीडियो चालू हो गया....उसमे एक लड़की एक लड़के का लंड चूस रही थी....मेरा तो शर्म से बुरा हाल हो रहा था....दर लग रहा था कही कोई आ ना जाए....पर धड़कते दिल से मैं वो वीडियो भी देख रही थी....लड़का लड़की क्या बाते कर रहे थे ये तो नही पता....मगर लड़की का चेहरा कुछ जाना पहचाना सा लगा....
आँखे नचा नचा कर खूब प्यार से लंड चूस रही थी.....लगभग दो मिनिट का वीडियो था....जब फिल्म ख़तम हो गया तो शबनम ने पुछा क्यों समझ में आया....मैं सन्न रह गई थी... बेशखता मेरे मुँह से गलिया निकालने लगी.....ही अल्लाह कामिनी....तब्बासुम इतनी बेशरम होगी मुझे पता नही था....हरामजादी ने ऐसा क्यों किया..... अल्लाह कसम जिस दिन मिल गई कुतिया से पुच्हूँगी ज़रूर की....अपनी तस्वीर क्यों बनवाई...साली को बदनामी का दर नही लगा....इतनी गंदी वीडियो बनवा कर इंटरनेट पर डाल दी.....किसी को पता चल गया की मैं ऐसी बेशरम की सहेली थी......मैं अभी और कुछ बोलती इसके पहले ही शबनम ने मुझे रोकते हुए कहा.....मेरी जान, उसने नही बनाई ये तस्वीर.... उसके बाय्फ्रेंड ने बनाई.....



है मारजवा! मुए ने ऐसे क्यों किया.... शबनम ने समझाया ये दुनिया बड़ी हरामी.....ये जो बाय्फ्रेंड का चक्कर है बड़ा ख़तरनाक है....अगर दिलो-जान से मुहाबत करने वाला मिल जाए तो ठीक....कमीना और बेमूर्रोवत निकला तो फिर लड़की बर्बाद....तब्बासुम बेचारी ज़ज्बात और जिस्म की आग की रौ में हरमियों के चक्कर में पर गई....साले ने अपने मोबाइल से तस्वीर बना कर अपने दोस्तो के बीच बाँट दी....उन्ही में से किसी ने इंटरनेट पर डाल दिया....तभी तो शहर छोड़ कर जाना पड़ा बेचारी को....मैने तो ख्वाब में भी नही सोचा था की लड़के इतने हरामी होते है की जिसके साथ मज़ा करे....उसी को बर्बाद कर दे....लंड का नशा एक पल में ही उतार गया....मैने सुना था की लड़के तो चूत के पिस्सू होते है.....बुर के लिए गुलामी करने लगते है.....पर अब समझ में आ गया की मज़ा ख़तम होने के बाद साले हरामीपाने पर भी उतार आते है.....



मैने सब कुछ फर्रू बतलाया तो उसने मुँह बिचका कर कहा.....मैने तो पहले से कहती थी ये सब चक्कर बेकार है.....कौन कब धोखा दे जाए इसका कोई भरोसा नही.... फिर प्रेग्नेंट हो जाने का ख़तरा भी होता है.....तो यूँ कहिए की बाय्फ्रेंड बनाने का सरूर मेरे सिर से उतार गया......फर्रू की तरह अब मैं भी शरीफ बन गई थी.....एक जमाना था जब मैं और तब्बू मिल कर.....लौंडों को लंड की लंबाई चौरई का डिस्कशन करते थे.....कैसे सुपाड़े वाला लंड कितनी देर तक चोद सकता है.....कुछ लड़को का लंड टेढ़ा होता है.....वो कितना मज़ा देता है....मोटे सुपाड़े वाला कितना मज़ा देता होगा.....


RE: Sex Hindi Kahani राबिया का बेहेनचोद भाई - sexstories - 07-01-2017

राबिया का बेहेनचोद भाई--4

रह चलते कुत्ते को कुतिया को चोदते हुए देखने की कोशिश करते....दीवार और पेड़ की ऊट में खड़े मर्दो को पेशाब करते हुए देखने की कोशिश करते......अगर किसी का लंड दिख जाता फिर चूत साला सहला कर याद करते.....वगिरह वगैरह....पर वो सब अब बंद हो चुका था....मैने भी इस तरह बाते करना अब छोड़ दिया....निकाह के बाद जैसा नसीब में होगा वो मिलेगा........सेक्सी बातो से तो और आग भड़क जाती है....रात में उंगली डाल डाल कर अब कुछ होता जाता नही....



फिर एक दिन मैं फर्रू के घर गई.....फर्रू अपनी अम्मी और अपने बड़े भाई के साथ रहती थी....उसका भाई एंटी करप्षन यूनिट में किसी उची जगह पर था.....फर्रू ने बताया की उसका भाई उस से उमर में करीब सात साल बड़ा था....वैसे फर्रू भी मेरे से दो साल बड़ी थी मेरे भाई की उमर की थी....मैं ड्रॉयिंग रूम में बैठी थी तभी एक लड़का दाखिल हुआ.....मुझे देख एक पल के लिए चौंका....फिर अंदर चला गया....थोड़ी देर बाद फर्रू के खिलखिलती हुई हसी सुनाई दी....ही भाई छ्चोड़ो बाहर मेरी दोस्त है....बेचारी बोर हो रही होगी.....



ही अल्लाह बड़ी खूबसूरत पायल है....कब खरीदी आपने....उई छ्चोड़िए ना....ठीक है....कसम से....हा...पहन कर....ठीक है भाई....फिर एक दम खामोशी च्छा गई....थोड़ी देर बाद फर्रू आई तो उसके बॉल थोड़े से बिखरे हुए लग रहे थे....आँखो में अजीब सी चमक थी.....होंठो पर हल्की मुस्कुराहट तैर रही थी.....मैने सोचा क्या माजरा है....कितने मज़े से बाते कर रहे थे दोनो भाई बहन...जैसे की....मैने फर्रू से पुछा .....क्यों मुस्कुरा रही हो....वो जो लड़का अंदर गया क्या तेरा भाई था....फर्रू ने अपने चेहरे को उपर उठा कर जवाब दिया....हा....भाई जान थे....वो आज जल्दी ऑफीस से आ गये...



उसके गाल गुलाबी से सुर्ख लाल हो चुके थे....वो थोड़ा घबराई सी लग रही थी....मैने कहा....तो इसमे इतना घबराने की कौन सी बात है....अरे नही यार वो बहुत गुस्से वाले है....मैने कहा...अर्रे अभी तो तू उनसे हंस हंस कर बाते कर रही थी....बाहर तक आवाज़ आ रही थी.....शायद तेरे लिए कोई गिफ्ट लाए है.....मेरे ऐसा बोलने से फर्रू सकपका गई.....बात को इधर उधर घुमाने लगी....फिर मैं भी उठ कर चली गई ....ये सब बाते यही पर ख़तम हो गई....इसी तरह मैं एक दो दफ़ा और फर्रू के घर गई.... 

एक दफ़ा मैं सुबह के करीब आठ बजे उसके घर गई....उस रोज भाई को कही जाना था.... भाई ने फर्रू के घर तक छोड़ दिया.....दरवाजा थोड़ा सा लगा हुआ था....मैने धक्का दे कर हल्के से खोला और अंदर दाखिल हो गई..... मैने सोचा आवाज़ डू मगर....मुझे आई....उईईइ.....इश्स की आवाज़ सुनाई दी....जैसे अम्मी अपनी चूंची मसळवते या चुदवाते वक़्त आवाज़ निकलती थी....मेरा दिल ज़ोर ज़ोर से धड़कने लगा....ये क्या चक्कर है....जासूस राबिया ने ड्रॉयिंग रूम का परदा हल्का सा हटाया.....अंदर झाँका....है अल्लाह मेरे होश फाख्ता हो गये.....फर्रू का भाई पीछे से उसको अपनी आगोश में दबोचे खड़ा था...दोनो की पीठ दरवाजे की तरफ थी.... पुच पुच की आवाज़ के साथ स...इसस्स...की आवाज़...उसके भाई के दोनो हाथ उसकी छाती के नज़दीक....मेरे तो पैर काँपने लगे....दिल धड़ धड़ कर बजने लगा....वाहा खड़ा होना मेरे लिए मुस्किल हो गया....अपने आप को संभालती जल्दी से बाहर आ गई....कुछ देर तक वही खड़े रह कर अपने जज़्बातो को संभाला फिर...कॉल बेल दबा दिया....



थोड़ी देर के बाद फर्रू बाहर आई....अपने बालो को संभालते हुए....होंठो का रंग थोड़ा उड़ा हुआ लग रहा था....पर चेहरे का रंग सुर्ख लाल हो रखा था....अपनी छाती पर दुपट्टा संभालते हुए अपने बैग को कंधे पर लटकाए....थोड़ी घबराई सी बोली.....ज़यादा देर तो नही हुई....मैने उसको उपर से नीचे देखते हुए कहा.....नही यार....उसकी समीज़ की इस्त्री उसके छाती के पास खराब हो चुकी थी....सलवते पर चुकी थी.....जाहिर था की उसके भाई जान ने वाहा हाथ लगा कर मसला है....अल्लाह क्या क्या तमाशे दिखा रहा था मुझे....मेरी प्यारी सहेली फर्रू जिसको मैं सीधा समझती थी अपने सगे बड़े भाई से अपनी चूंची मसलवा रही थी.....मेरे पैर अभी भी काँप रहे थे....साली अपने भाई से फंसी है....तभी कहती है बाय्फ्रेंड की ज़रूरत नही....



जब घर में ही लंड का मज़ा मिल रहा है तो फिर बाहर....ही कसम से मैने खवाब में भी नही सोचा था....रंडी....शराफ़त का कितना जबरदस्त ढोंग करती थी.....हम दोनो कॉलेज के लिए पैदल ही चल दिया, वाहा से जयदा दूर नही था....पर मेरा दिल जितनी देर तक कॉलेज में रही धाड़ धाड़ कर बजता रहा.....



दो बजे दिन में वापस घर आई फ्रेश होकर आराम करने के लिए बिस्तर पर लेती तो.....आज सुबह हुआ वाक़या मेरे दिलो दिमाग़ में फिर से चक्कर लगाने लगा.....ही मेरी फर्रू जान अपनी बुर फड़वा चुकी है.....साली कितनी चालक है.....सब कुछ निकाह के बाद....साली ने फड़वा या भी किस से अपने सगे भाईजान से.....बाहर किसी को पता ही नही की शरिफजादी कितनी बड़ी हरामजादी और चुदक्कड़ है.....भाई का लंड बुर में लेकर सिर पर दुपट्टा डाल कर घूमती है......जैसे नीचे के छेद में कौन हलचल मचा रहा है पता ही नही......कुछ भी हो मेरे जासूसी मिज़ाज को भी थोड़ा करार आ गया था....मैं हमेशा सोचती थी की क्या साली की चूत नही खुजलाती.....उंगली करती होगी या नही.....हमेशा मेरी बातो को ताल देती थी....इधर उधर कर देती.....जैसे कितनी पाकदामन है.....जैसे इन सब चीज़ो की उसे कोई मतलब ही नही.....खैर मज़े है साली के ....चूत की खुजली आराम से मिट रही है......भाई गिफ्ट ला कर भी दे रहा है.....मज़े कर रही है......फर्रू ने अपने भाई से कैसे अपनी फड़वाई ये राज भी किसी ना किसी तरह उगलवा लूँगी....फिलहाल तो मुझे अपनी फ़िक्र करनी चाहिए.....तब्बसुम के किस्से के बाद से तो लड़को के बारे में सोचना बंद ही हो गया था....मगर फ़रज़ाना ने नई राह दिखला दी थी.


आख़िर थी तो अपनी रंडी अम्मी की बेटी....उसका कीड़ा तो मेरे अंदर भी था.....फिर फर्रू ने आज एक ऐसी राह दिखला दी थी जिसकी मुझे शिद्दत से तलाश थी.....अपनी कुँवारी अनचुदी गुलाबी रानी का सील तोड़ने के लिए एक ऐसे बंदे की तलाश थी जो प्यार से मज़ा दे.....मेरी इज़्ज़त का ख्याल रखे.....और मुसीबतो से भी बचाए...इस सब के लिए मेरी निगाहो में आज तक कोई मर्द नही था.....पर सुबह के सबक ने मेरी निगाह को अपने भाई की तरफ मोड़ दिया......हू भी तो एक जवान मर्द है....तंदुरुस्त है.....अल्लाह ने उसे भी लंड से नवाज़ा है......उसका लंड भी तो किसी ना किसी चूत को चोदने के लिए ही तो है....पता नही मेरी निगहों पर अब तक परदा क्यों कर परा था.....भाई था तो क्या हुआ..... जिसकी चूत में वो अपना लंड पेलेगा वो भी तो किसी ना किसी की बहन ही होगी....किसी और की बहन को चोदेगा.....तो फिर अपनी बहन की चूत क्यों नहीं.....
कहानी की सुरुआत शुरू से ही करती हूँ. मैं रुखसाना हूँ, मेरी उमर अभी 22 साल की है. प्यार से मुझे सब राबिया कहते है. मेरी शादी हो चुकी है और मेरे हज़्बेंड एक प्राइवेट फर्म में मॅनेजर हैं. माएके में मेरी अम्मी और अब्बा हैं. शहर में हमारे खानदान की बहुत ही अच्छी इज़्ज़त है. इज़्ज़तदार घराना होने के कारण पर्दे की पाबंदी है...लेकिन पर्दे के पीछे...




चूत पर कहा लिखा होता है की बहन की चूत है....और मैने आज तक कभी नही सुना की लंड पर लिखा होता है की भाई का लंड है......चूत चूत है, लंड, लंड.....चूत होती है लंड से चुदवाने के लिए.....चूत वाली कौन है और लंड वाला कौन इस से चूत और लंड को क्या लेना-देना.....इस तरह अपने दिल को समझाते हुए.... मैने सोच लिया की अब वक़्त बर्बाद करने से कोई फायदा नही...... भाई को ही अपनी मस्त जवानी सौंप जवानी का मज़ा लूटा जाए......आख़िर जिसकी निगाह के सामने जवान हुई उसका हक़ क्यों ना हो इस जवानी पर.....फिर ये कोई ग़लत रह या गुनाह भी नही होगा.....मैं तो अपनी अम्मी और सहेली के दिखाए रास्ते पर ही चलूंगी....वो दोनो तो ना जाने कब्से अपने अपने भाइयों का लंड अपनी बुर में पेल्वा रही है.....ये सब उपरवाले की मर्ज़ी है जो उसने मुझे ऐसा मंज़र दिखला कर रह दिखाई है......अब इस से पीछे हटना ठीक नही.....ये सब सोच कर मैने फ़ैसला कर लिया की किसी भी तरह भाई को फसा लेना है......घर का काम करते हुए मेरा दिमाग़ तेज़ी से काम कर रहा था......मैं सोच रही थी की भाई को कैसे कर फसाया जाए.....कही वो बिदक तो नही जाएगा....कही उल्टा तो नही सोच लेगा की मैं कैसी रंडी हूँ....मुझे समझदारी के साथ धीरे धीरे कदम बढ़ाना होगा..... अपना सागा भाई होने की वजह से उसको फसाने का खेल ख़तरनाक हो सकता था....वो अम्मी को बतला सकता था.....पर एक बार भाई अगर फस जाता तो फिर ऐश ही ऐश थी....... मैं ने भाई पर ही डोरे डालने का पक्का इरादा कर लिया.....पर शुरुआत कैसे करू यही मेरी समझ में नही आ रहा था.....वैसे भी आज तक ना तो किसी लड़के को फसाया है ना खुद किसी के साथ फंसी थी....



अब सीधे सीधे जा कर बोल तो नही सकती थी की भाई मुझे चोदो ....मेरी जवानी का रस चूस लो.....मेरी चूत में अपना लंड पेल दो....मैं इसी उलझन में डूबी सोचती रही की जिस राह पर चलने की मैने ठनी है....उस राह पर कदम बढ़ने के सही तरीका क्या है.....


शाम में भाई ने मुझे सोच में डूबा देखा तो बोला....क्या सोच रही है राबिया....कॉलेज में कुछ हुआ है क्या....मैने कहा नही भाई.....कुछ नही....फिर क्या हुआ....उदास है....अम्मी की याद आ रही है क्या.....मैने कहा नही भाई बस ऐसे ही फिर उठ कर किचन में चली गई....अब कैसे बताऊँ की मैं नही मेरी चूत उदास है......साले को कुछ समझ में भी तो नही आता....इतना तो समझना चाहिए की बेहन जवान हो गई है उसको लंड चाहिए....


पूछ रहा है क्यों उदास हो.....अर्रे गमगीन ना रहूँ तो और क्या करू....सारी जहाँ की लड़कियाँ चुद रही है....यहाँ मेरी चूत की खुजली मिटाने वाला कोई नही....किसी दिन सलवार खोल के चूत दिखा दूँगी.....



सुबह कॉलेज में शबनम मिली तो बड़ी खुश दिख रही थी....मैने उसके चूतड़ पर चिकोटी कटी....और जानी बहुत चहक रही हो.... माजरा क्या है....ये नये पायल...अंगूठी....नई ड्रेस.....बदले बदले से नज़र आ रहे है सरकार.....शबनम एकदम से शर्मा गई.... गाल गुलाबी हो गये फिर हँसते हुए बोली..... कुछ भी नही बस ऐसे ही काफ़ी दिनों से ये ड्रेस नही पहनी थी इसलिए....चल साली किसको बना रही है....कुछ तो बात है....कल कॉलेज क्यों नही आई थी.....फिर उसने थोड़ा शरमाते थोड़ा जीझकते हुए बताया.....अर्रे यार मेरी सगाई हो गई है....मैं एकदम से चोंक गई....कब....किसके के साथ....कैसे....एकसाथ कई सवाल मैने दाग दिए....शबनम मेरा हाथ पकड़ घसीट ती हुई बोली....कितने सवाल करती है....सब कुछ एक बार में ही जान लेगी क्या....


RE: Sex Hindi Kahani राबिया का बेहेनचोद भाई - sexstories - 07-01-2017

राबिया का बेहेनचोद भाई--5



. फिर हम दोनो कॉलेज की कैंटीन के पीछे जहाँ एक दम सन्नाटा होता है वाहा चले गये....पत्थर पर बैठने के बाद उसने कहा...हा पूछ क्या पूछ ना है....पहले तो ये बता कब हुई तेरी सगाई.....कल.....ही....तूने बताया भी नही पहले....किसके साथ...पहले से चक्कर था तेरा....शबनम झल्ला उठी....धत ! बकवास किए जा रही है....तुझे पता है मेरा किसी के साथ कोई चक्कर नही.....फिर इतनी जल्दी कैसे....जल्दी तो नही है....बस तुझे पता नही था इसलिए....अच्छा चल अब तो बता दे कौन है वो खुशकिस्मत जो मेरी शब्बो रानी के रानों के बीच की सहेली का रस चखेगा....शबनम का चेहरा लाल हो गया.....धत ! साली हर समय यही सोचती है क्या.....



ज़रा भी लिहाज़ नही है तेरे से दो साल बड़ी हूँ मैं...मैने शबनम की जाँघो पर हाथ मारते हुए कहा....तो फिर बता ना मेरी शाब्बो बाजी कौन है वो....शबनम हंस दी फिर मस्कुराते हुए शरमाते हुए बोली....खालिद नाम है उनका....खालिद अच्छा यही के है या....यही के है....मेरी खाला के लड़के....मतलब तेरे खलजाद भाई....हा....अर्रे वा तब तो पहले से देख रखा होगा तूने....हा हमारे घर से जयदा दूर नही है उनका घर.....हम जब छोटे थे साथ में खेलते भी थे.....जब बड़े हो गये तो थोड़ी दूरी आ गई...मतलब.... शबनम बोली अर्रे कामिनी मतलब क्या समझोउ....जब लड़का-लड़की जवानी की दहलीज़ पर कदम रख देते है तो फिर दूरी तो आ ही जाती है, है ना.....



मैने और छेड़ने के इरादे से पुछा ....ही मतलब बचपन का प्यार है....धत !...क्या बोलती है...अरे मैने क्या बोला....तूने ही तो कहा...बचपन में साथ खेलते थे और जब तेरी चूची बड़ी हो गई तो दूरी आ गई....इसका तो यही मतलब निकला की बचपन से अम्मी अब्बा वाला खेल चल रहा था.....धत ! साली ....मुझे खुद नही पता था की खालिद भाई...है खालिद मुझे चाहते है....मैं बीच में बोल पड़ी ....पर तू उन्हे चाहती थी....अरी नही रे....मैं उन्हे खालिद भाई कह कर बुलाती थी....जब भी कभी घर आते थे तो घर का महॉल बरा खुशनूमा हो जाता था....हम साथ में वीडियो गेम्स खेलते और हसी मज़ाक करते थे...मैं बीच में बोल पड़ी ....ही बस तुम दोनो साथ में....अरे नही रे मेरी बाकी दोनो बहनें भी...हम चारों जाने ....खालिद भाई....ओह तौबा तौबा....



खालिद के कोई भाई या बहन नही है ना.... उनका मान हमारे यहाँ बहल जाता था....ही! ये मान बहलाते बहलाते लगता है कुछ ज़यादा ही बहल गये तेरे खालिद भाई......चुप्प कर साली अब वो मेरे खाविंद है.....मैने कमर में चिकोटी काट कर कहा.....ही रब्बा....अभी से इतनी वफ़ादारी.... तू बाज आएगी या फिर तेरा कुछ और इलाज़ करना परेगा...ही! इलाज़ क्या करोगी....बस मिठाई खिला दो....खाली हाथ आ गई...बड़ी बाजी बनती हो इतना तो शरम लिहाज़ रखो की अपनी सगाई पर मुँह मीठा करा दो....भले ही अपने मियाँ से नही मिलवाना...शबनम मुस्कुराने लगी....बोली क्लास छोड़ चल मेरे साथ...मैने पुछा क्यों कर भला....अर्रे चल ना बस....घर चलते है वही तेरा मुँह भी मीठा करा दूँगी....घर पर अभी कोई नही होगा फिर आराम से बाते करेंगे....मैं भी उस से उसके खालिद भाई के बारे में खोद खोद कर पूछ ना चाह रही थी..... इसलिए थोड़ा सोचने के बाद हामी भर दी...... 

टॅक्सी पकड़ घर पहुचे....घर पर केवल उसकी अम्मी थी.....ड्रॉयिंग रूम में बैठ कर टीवी देख रही थी....उनको सलाम करने के बाद कुछ देर वही बैठी उनसे बाते करती रही फिर वो उठ कर पड़ोस में चली गई......शबनब ने टीवी ऑफ किया और कहा.... चल मेरे कमरे में वही बैठ कर बाते करेंगे.....अम्मी तो अब दो घंटे से पहले नही आने वाली.....कमरे में पहुच...दरवाजा बंद कर.... हम दोनो बिस्तर पर बैठ गये....मैं पेट के बाल हाथो के नीचे एक तकिया डाल कर लेट गई....शबनम दीवान की पुष्ट से पीठ टीका कर बैठी थी.... एसी की ठंडी हवा में....हम दोनो कुछ देर तक तो यू ही उसके घर के बारे में बाते करते रहे....फिर थोड़ा आगे सरक, शबनम का हाथ थाम पुछा ...... ही शाब्बो बाजी ये तो बता......भाई बहन से मियाँ बीबी बन ने का ख्याल कब और क्यों कर आया....



मेरे इतना बोलते ही शबनम ने मेरी पीठ पर कस कर थप्पड़ जमा दिया और हँसते हुए बोली....तू मानेगी नही....जा मैं नही बताती....साली हर बात का उल्टा मतलब निकल देती है....हाए !!! शाब्बो मेरी जान प्लीज़ बता ना....आख़िर तुम दोनो का प्यार कैसे परवान चढ़ा....हाए !!! मुझे भी तो एक्सपीरियेन्स.....बड़ी आई एक्सपीरियेन्स वाली....इसमे क्या बात है जो तेरे फाएेदे की....मैं शबनम की तुड़ी पकड़ बोली हाए !!! प्लीज़ बता ना....नही...मैं मिठाई लाती हूँ....मैं इतराती हुई बोली नही खानी मुझे.....पहले बता....हाए !!! रब्बा क्या बताऊँ तुझे....जो बताना था बता तो दिया....नही मुझे विस्तार से बता.....तुझे कब पता चला कहलीद भाई तेरी जाँघो के दरमियाँ आने चाहते है....अफ....कामिनी है तू....साली एक नंबुर की....ले दे कर वही बात....कहते हुए मेरी पीठ पर एक चपत लगाई...और ये क्या बार बार खालिद भाई...निगोरी....



मैं हँसते हुए बोली चल नही बोलूँगी.....पर कुछ तो बता....मैं थोड़ा मासूम सा मुँह बनाते हुए कहा....शबनम मेरे मासूम से चेहरे को देखती हुई मुस्कुरा दी....कुतिया साली....क्या बताऊँ ....किसने शुरुआत की...मैने पुछा ....मुझे नही पता...खाला आई थी उन्होने अम्मी से बात की....कब आई थी....करीब एक महीने पहले.....ओह...पर फिर भी पहले कुछ तो हुआ होगा....नही ऐसा तो कुछ नही था....हा कई बार खालिद भाई ओह ओह...वो कई बार बात करते करते एकदम से खामोश हो जाते....और मेरे चेहरे की तरफ देखते रहते..... बड़ा अटपटा सा लगता की ऐसा क्यों करते है....फिर राहिला ने एक दिन बताया की आपा खालिद भाई आपको अपने चस्मे के पीछे से बहुत देखते है....मैने उसको बहुत डांटा मगर....फिर मैने भी नोटीस किया मैं जब इधर उधर देख रही होती तो वो लगातार मुझे घूरते रहते....

जैसे ही मुझ से नज़रे मिलती....वो सकपका जाते.....फिर मुझे लगने लगा था की डाल में ज़रूर कुछ काला है.... शबनम की जाँघ को दबाते हुए मैं बोली....ही पूरी डाल ही काली निकली.....वो भी हँसने लगी...फिर मैने पुछा ....अच्छा ये तो बता की उन्होने कभी और कोई हरकत नही की तेरे साथ....और कोई हरकत से तेरा मतलब अगर वैसी हरकतों से है....तो नही....वैसा कुछ नही हुआ हमारे बीच....हा जब से मुझे इस बात का अहसास हुआ तो मैं उनके सामने जाने में थोड़ा हिचकिचाने लगी....फिर कभी मौका भी नही मिला...हर वाक़ूत कोई ना कोई तो होता ही था....ही कभी कुछ नही किया....क्या यार कम से कम लिपटा छिपटि, का खेल तो हो ही सकता थे तुम दोनो मे, मैं होती तो एक आध बार मसलवा लेती....चुप साली....मैं तेरे जैसी लंड की भूखी नही हू.....कौन कितना भूखा है ये तो निकाह होने दो फिर पता चलेगा....दो महीने में पेट फुलाए घुमोगी.....चल निगोरी....ही शाब्बो मैने तो सोचा एक आध बार उन्होने अब तक तेरी कबूतारीओयोन को दबा दिया होगा....



अल्लाह कसम बता ना....एक बार भी नही....अब तक शबनम भी धीरे धीरे खुलने लगी थी....उसके चेहरे पर हल्की शर्म की लाली दौर गई.... मुस्कुराती हुई बोली....पहले तो कभी नही पर कल....ही! मुझे शर्म आ रही है....कहते हुए उसने अपनी हथेली से अपना चेहरा धक लिया....ही! कल क्या...बता ना....प्लीज़...वो फिर शरमाई...ही! नही...ही! बता ना प्लीज़....फिर मुस्कुराते हुए धीरे से सिर को नीचे झुकती बोली.....ही कल जब माँगनी हो गई....फिर सब ने हमे पाच सात मिनिट के लिए अकेला कमरे में छोड़ दिया....ही! फिर क्या…??



तब खालिद मेरे पास आए....और धत !!....कैसे बोलू....ही बता ना क्यों तडपा रही है....ही फिर उन्होने मेरे गालो को हल्के से चूमा....ही मैं तो घबरा कर सिमट गई....मगर उन्होने मेरे दोनो हाथो को पकड़ लिया और हम सोफे पर बैठ गये फिर....फिर क्या मेरी जान....फिर उन्होने मुझे बताया की वो बचपन से मुझे चाहते है...और दिलो-जान से प्यार करते है....वो हमेशा मुझे ही अपने ख्वाबो में देखते थे....उन्हे बस इसी बात का इंतेज़ार था की कब उनकी नौकरी लग जाए....उन्होने ने मुझ से पुछा की मैं राज़ी हूँ या नही....मैं क्या बोलती सगाई हो चुकी थी.....मैने चुपचाप सिर हिला दिया....वो खिसक कर मेरे पास आ गये और मेरी थोड़ी को उपर उठा मेरे चेहरे को देखते हुए हल्के से मेरे होंठो पर अपनी एक उंगली फिराई....

मेरा पूरा बदन काँप उठा....फिर आगे बढ़ कर उन्होने हल्के से अपने तपते होंठों को मेरे होंठों पर रख दिया....ओह मैं बतला नही सकती....सहेली मेरा पूरा बदन कपने लगा....मेरे पैर थरथरा उठे....दिल धड़ धड़ कर बाज रहा था....तभी उन्होने मेरे होंठों को अपने होंठों में कस कर पकड़ लिया और अपना एक हाथ उठा कर हल्के से मेरी चूची पर रख दिया....और और सहलाने लगे....उफ़फ्फ़! मैं बयान नही कर सकती राबिया उस लम्हे को....मेरे बदन का रॉयन रॉयन सुलग उठा था.....लग रहा था जैसे मैं पिघल कर उनकी बाहों में पानी की तरह बह जौंगी....उनकी हथेली की पकड़ मजबूत होती जा रही थी....वो अब बेशखता मेरी चूचियों को मसल रहे थे....ये मेरा पहला मौका था....किसी लड़के के हाथ चूचियों को मसलवाने का....मेरी जाँघो के बीच सुरसुरी होने लगी थी....
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उफफफफ्फ़....!!! क्या बताऊँ मैं....ऐसा लग रहा था जैसे मेरे चारो तरफ की ज़मीन घूम रही है.....कहते कहते शबनम की साँसे उखाड़ सी गई...उसकी आँख एकदम लाल हो चुकी थी...उसने मेरा कंधा पकड़ कर एक बार भीच कर फिर छोड़ दिया....मैं बेताबी से इंतेज़ार कर रही थी की वो और आगे कुछ बोलेगी मगर वो चुप हो गई....अपनी आँखो को उसने बंद कर लिया था....लग रहा जैसे कही खो गई है....मैने हल्के से उसका कंधा पकड़ हिलाते हुए कहा....शाब्बो.....धीरे से उसने अपनी आँखे खोली और हल्के से मुस्कुराते हुए बोली....जानती है फिर क्या हुआ...क्या मैं बोली....सुनेगी तो तू बहुत हासेगी...मैने खालिद को थोड़ा पीछे धकेलते हुए उनके होंठों के चंगुल से अपने होंठों को आज़ाद करते हुए कहा...ही खालिद भाई छ्चोड़िए.....ही ये क्या कर रहे है....ही खालिद भाई ये ठीक नही...तू समझ सकती है खालिद की क्या हालत हुई होगी....वो एकदम से घबरा गये....



झट से मुझे छोड़ कर उठ खड़े हुए और फिर कमरे से बाहर निकल गये.....हम दोनो हँसने लगे....मेरा तो बुरा हाल हो रहा था हँसते हँसते ....फिर भी मैने पुछा ...ही बुरा तो नही मान गये तेरे मियाँ......नही यार मैं अपना पसीना पोच्च कर बाहर निकल गई....घर में बहुत सारे लोग थे गुप-सॅप करने लगी....मौका देख कर मैने खालिद को सॉरी बोल दिया....तो वो मुस्कुरा कर बोले....आदत तो धीरे धीरे ही जाएगी बेगम साहिबा....और मेरी कमर पर चिकोटी काट ली.....मैं फिर भाग गई इस से पहले की वो कोई और हरकत करे....ही शाब्बो डार्लिंग तूने मौका गावा दिया....मज़ा तो आया होगा तुझे....थोड़ी देर और चुप रहती तो शायद चूत में उंगली भी कर देता....या उसका लंड देख लेती....कॉलेज की तरह खुले गंदे लफ़जो का इस्तेमाल करते हुए मैने कहा....शबनम भी शरमाई नही....हँसते हुए बोली...साली पहली बार किसी लड़के ने हाथ लगाया था...

मैने ये एक्सपेक्ट नही किया था.....मुझे होश कहा था....जो मान में आया बोल दिया....अब अफ़सोस तो होता है....लगता है थोड़ी देर और मसलवा लेती....उंगली तो मैने बहुत डलवाई है....


ये सुनकर मुझे बरा ताज्जुब हुआ....ही खुद से तो मैं भी डाल लेती हूँ....मगर तूने किस से डलवा ली....जब तेरा कोई बाय्फ्रेंड नही.....ही मेरी लालपरी...तुझे नही पता......ही रब्बा....मुझे कैसे पता ....तू कैसे करती थी...डार्लिंग ये खेल ज़रा अलहाड़े किस्म का है....पर होता कैसे है ये खेल......दिखौ....कहते हुए उसने हाथ बढ़ा कर मेरी एक चूंची को समीज़ के उपर से पकड़ लिया....ही रब्बा...मैने घबरा कर उसका हाथ झटका....वो हँसने लगी और पूरे ज़ोर से हमला बोल दिया....मुझे पीछे धकेल बेड पर गिरा, मेरी पेट पर बैठ.....दोनो हाथो से मेरी दोनो चूचियों को अपनी हथेली में भर मसल दिया......आईईइ....क्या करती है मुई....उफफफ्फ़....छोड़ ....



पर उसने अनसुना कर दिया....अपना चेहरा झुकते हुए मेरे होंठों को अपने होंठों में भर मेरी चूचियों को और कस कस कर मसलने लगी.....मैं उसे पीछे धकेल तो रही थी मगर पूरी ताक़त से नही....वो लगातार मसले जा रही थी.....मैं भी इस अंजाने खेल का मज़ा लेना चाहती थी.....देखना था की शाब्बो क्या करती है.....कहा तक आगे ......कुछ लम्हो के बाद ऐसा लगा जैसे जाँघो के बीच सुरसुरी हो रही है......मुझे एक अजीब सा मज़ा आने लगा......मैने उसको धखेलना बंद कर दिया...... मेरे हाथ उसके सिर के बालो में घूमने लगे.....तभी उसने मेरे होंठों को छोड़ दिया....हम दोनो हाँफ रहे थे....वो अभी भी हल्के हल्के मेरी छातियों को सहला रही थी.....मुस्कुराते हुए अपनी आँखो को नचाया जैसे पूछ रही हो क्यों कैसा लगा....मेरे चेहरे पर शर्म की लाली दौड़ गयी......उसकी समझ में आ गया......



मेरी आँखे मेरे मज़े को बयान कर रही थी......नीचे झुक मेरे होंठों को चूमते, मेरी कानो में सरगोशी करते बोली......ऐसे होता है ये खेल......मेरे लिए ये सब अंजना सा था....शाब्बो का ये एकदम नया अंदाज था......कुछ पल तक हम ऐसे हे गहरी साँसे लेते रहे.....मेरे चेहरे पर हल्की मुस्कुराहट और शर्म की लाली फैली हुई थी..... मैने पुछा .....आगे .....शबनम ने फिर से मेरी दोनो चूंची यों को दबोच लिया और बोली.....ही साली तूने आज मेरी आग भड़का दी.....अब पूरा खेल खेलेंगे......कहते हुए वो ज़ोर ज़ोर से मेरे होंठों और गालो को चूमने चाटने लगी....मुझे फिर से मज़ा आने लगा....और मैं भी उकसा साथ देने लगी......हम दोनो आपस में एक दूसरे से लिपट गये....


RE: Sex Hindi Kahani राबिया का बेहेनचोद भाई - sexstories - 07-01-2017

राबिया का बेहेनचोद भाई--6

. एक दूसरे के होंठों को चूस्ते हुए पूरे दीवान पर लुढ़क रहे थे....तेज चलती सांसो की आवाज़ कमरे में गूज़्ने लगी....दोनो के दिल की धरकन रेल गाड़ी की तरह दौड़ रही थी.....शाब्बो मेरी गालो को ज़ोर से काट ते हुए चीखी....ही साली काट लूँगी....बहुत बक बक करती है....देखे तेरी चूत में कितनी खुजली.....कहते हुए वो अपनी कमर को नाचते हुए मेरी कमर से चिपका रगड़ रही थी....हम दोनो ने कपड़े पहन रखे थे तब भी उसकी चूत की रागड़ाई का अहसास मुझे अपनी चूत पर महसूस हो रहा था.....मैं भी उसको नोचने लगी....उसके होंठों को अपनी दाँत से काट ते हुए हाथो को उसके चूटरो पर ले गई....चूटरो के गुदज माँस को अपनी हथेली में भर कर मसालती...



दोनो चूटरो को बीच उसकी गाँड की दरार में उपर से नीचे तक अपनी हथेली चला रही थी....हंदोनो बेकाबू हो चुके थे.....तभी शाब्बो उठ कर बैठ गयी और अपने साथ मुझे भी उठा लिया....मेरी समीज़ का निचला सिरा पकड़ उपर की तरफ खिचते हुए निकल फेका....मैने भी उसको नही रोका....फिर मेरी ब्रा खोल दी.....बिस्तर पर पटक मेरी दोनो नंगी चूंची यों को अपने नरम मुलायम हाथो में पकड़ सरगोशी करती बोली.....मशाल्लाह.....क्या चूची है....ही गड्रई नाज़ुक चूंची .....ये गुलाबी रंग....ये नुकीले निपल....इसस्स.....साली आग लगाने वाली जवानी है तेरी तो....कहते हुए अपने सिर को नीचे झुखाते हुए मेरी एक चूंची के उपर अपनी जीभ चलाने लगी....और दूसरी चूंची के निपल को अपनी चुटकियों में पकड़ ज़ोर से मसल दिया.....


दर्द से मैं कराह उठी....ही रे नाखरीली....मेरे हाथ से मसलवाने.....में इतना दर्द....कोई लौंडा मसलेगा तब....ही तेरी ये लंगड़ा आम सरीखी चूचियाँ.......अल्लाह कसम.......बस चबा जाने लायक है.....फिर वो मेरी एक चूंची को अपने होंठों को बीच दबोच चूसने लगी....पुर बदन में सनसनी दौर गयी....मानो किसी सुलगती चिंगारी ने च्छू लिया हो......चूत से रस निकलना शुरू हो गया....ही साली सच में चबा जाएगी क्या.....उफफफफ्फ़.....मेरे मौला.....जालिम.....मगर उसने अपना काम जारी रखा....मेरी चूंची यों को चूस्टे-चूस्टे.....अपने एक हाथ को मेरी सलवार के नाडे पर ले गई...

मेरी धरकने और तेज़ हो गयी......ही रब्बा लगता है नंगा करेगी.....मेरे नडे को खींच सलवार खोल दिया.....चूंची चूस्टे हुए वो लेट सी गई....एक हाथ से मेरी सलवार को नीचे की तरफ खींचते हुए पूरा उतार दिया......चूची अब भी उसके मुँह में थी.....मैं तड़प रही थी.....मेरी जवानी में आग लग चुकी थी.......मेरे हाथ पैर काँप रहे थे....सुलगते जिस्म ने बेबस कर दिया.....
खुच देर तक इसी तरह चूस्टे रहने के बाद....उसने होठों को अलग किया......मेरी साँसें रुकती हुई लग रही थी......थोड़ी रहट महसूस हुई....उउफफफफ्फ़... .शाब्बो ये कौन सा खेल है....मैं मार जौंगी....मैं बेकाबू होती बोली.....पूरा जिस्म सुलग रहा है.....क्यों बेताब होती है...मेरी गुलबदन....तेरे सुलगते जिस्म की आग को अभी ठंडा किए देती हू.....कहते हुए शाब्बो ने मेरी पनटी की एलास्टिक में अपने अंगूठे को लगा एक झटके में सरसरते हुए मेरे पैरों से नीचे खींच उतार दिया.....उ अम्मी....ये क्या कर रही साली......मैं घबरा कर उठ कर बैठ गई.....पूरा नंगा कर दिया.....मुझे आगे कुछ कहने का मौका दिए बिना......शबनम ने फिर से मेरे कंधो को पकड़ मुझे दबोच लिया.....


मेरे होंठों को अपने होंठों के आगोश में ले लिया.....बदन की आग फिर से सुलग उठी.....होंठों और गालो को चूस्टे हुए धीरे धीरे नीचे की चूचियों को चूमने के बाद मेरे पेट पर अपनी जीभ फिरते हुए नीचे बढ़ती चली गई....गुदगुदी और सनसनी की वजह से मैं अपने बदन को सिकोर रही थी......जाँघो को भीच रही थी....तभी उसने अपने दोनो हाथो से मेरी जाँघो को फैला दिया.....ये पहला मौका था किसी ने मेरी जाँघो को ऐसे खोल कर फैला दिया था.......आदतन मैने अपनी हथेली से चूत ढकने की कोशिश की......शाब्बो ने हथेली को एक तरफ झटक दिया.....मैने गर्दन उठा कर देकने की कोशिश की....शबनम मेरी खुली जाँघो के बीच बैठ चुकी थी....अफ ये क्या कर रही है कामिनी....ही ज़रा भी शरम नही.....




शबनम मेरी आँखो में झँकते हुए बोली....इश्स खेल का यही तो मज़ा है....शरम की अम्मी चुद जाती है.....ही रंडी बहुत ज़बान चलती थी.....अब चूत दिखाने में.....इसस्स......देखु मेरी बन्नो की नीचे वाली सहेली कैसी है....ही रब्बा.....क्या लूंदखोर माल है.....सीईइ सलवार के अंदर ऐसा नशीला माल छुपा कर रखा है.....साली तेरी चूंची यों का अंदाज़ा तो मुझे पहले से था......जानमारू है.... सब के लंड में आग लगती होगी.....मगर ये.....तेरी जाँघो के बीच.......ऐसी गुलाब की काली चुप्पी होगी.....ही बन्नो मस्त हास्सें चूत है....फूली कचौरी है.....झाँत नही सॉफ करती.....ओह हो....रंडी ने डिज़ाइन बना रखा....है....किसको दिखती है......ही रे क्या गुदज झानतु चूत है....कहते हुए उसने सिर झुका कर मेरी चूत को चूम लिया...

उईईइ!! क्या करती है.....वैसे तो अब्बा अम्मी की चुदाई देख देख कर मुझे मालूम था की चूत की चटाई होती है....मगर जब शाब्बो ने पहली बार.....मैं थोड़ा चौंक गई थी.....उसके होंठों के च्छुने भर से पूरे बदन में कपकपि हो गई.....तभी उसने गर्दन उठा कर मुझे देखा और पुछा .....मज़ा आया.....मैं धीरे से बोली....ही बुर मैं बहुत जोरो से खुजली हो रही है.....वो मेरे चूत की फांको पर उपर से नीचे तक धीरे-धीरे उंगली चला रही थी......मेरी चूत पासीज रही थी.....चूत के पानी को अपनी उंगली के कोने पर लगा मुझे दिखती बोली.....ही चुदसी कुट्टी जैसी गरम हो गई है.....मैं उसके इस अंदाज से तारप उठी.....उफ़फ्फ़.... कुछ इंतेज़ां कर....वो बोली...ही गोरी गोरी चिकनी चूत वाली क्या मस्त माल है.....ही मदारचोड़ी.....


अल्लाह ने मेरे को लंड से नवाजा होता तो मैं तो अभी तेरी बुर मई पेल कर सारी खुजली मिटा देती.....उफ़फ्फ़.....जालिम....ही मेरी चूत भी पानी छोड़ रही है....तभी मुझे ख्याल आया की मैं तो रंडी की तरह से पूरी नंगी हूँ और ये शालि अभी तक पूरे कपड़ो में....मैं झट से उठ कर बैठ गई....शबनम के सिर को बालो से पकड़ उसकी आँखो में झँकति बोली....ही कुट्टी अपनी पानी छोड़ ती चूत दिखा ना....साली...ही मैं भी तो देखु खालिद भाई की बीबी की बुर कैसी है....कहते हुए उसकी समीज़ को उपर खीचने लगी वो भी तैय्यर थी....अपने हाथो अपनी समीज़ खोल पीछे हाथ ले जा छत से ब्रा उतार दिया....गोरी गोरी शानदार चूंची याँ आज़ाद कबूतरो की तरह चोंच उठाए नुमाया हो गई.....मैने दोनो को हाथो में ले कस कर दबा दिया....मैं बदला लेना चाहती थी.....झट से एक चूंची को अपने होंठों में दबोच दूसरी के निपल को चुटकी में पकड़ मसल दिया....



उ.....अम्मी.....सीईइ....कुतिया बदला ले रही.....पर मुझे मज़ा आ रहा था...मैं ज़ोर ज़ोर से चूंची चूस्टे हुए दूसरी चूंची को मसल रही थी.....शाब्बो गरम तो पहले से ही थी.....सीईईईईई....



ह....उईईइ....सिसकारियाँ उसके मुँह से फूटने लगी.....तभी मैने अपना हाथ उसके जाँघो के बीच डाल दिया....उसकी चूत को सलवार के उपर से अपनी मुट्ही में दबोच कर मसलने रगड़ने लगी....उईईई....नही.....उफ़फ्फ़....रुक सलवार उतार देती हू....मुझे भी उसकी पानी छ्होर्थी चूत देखनी थी......मैं रुक गई.....शाब्बो ने एक झटके में सलवार का नारा खोला और उसके साथ ही अपनी पनटी को भी नीचे खीचते हुए उतार फेका....अब हम दोनो पूरे नंगे हो चुके थे....कोई सोच भी नही सकता दो पाक दामन सारीफ़ खानदान की लड़कियाँ नंगे बदन.....सेक्स की पयासी एक दूसरे को बंद कमरे के अंदर नोच रही होगी.....

सलवार खोलने के बाद शाब्बो ने मुझे पीछे की तरफ धकेल दीवान की पुष्ट से टीका दिया....मेरी दोनो टाँगे फैला उनके बीच बैठ गई और अपनी टॅंगो को फैला मेरी कमर के इर्द-गिर्द कर दिया.....उसकी चूत भी सॉफ दिखने लगी.... एकदम चिकनी चूत ....बिना झांतो वाली.....चूत के होंठों पर सफेद पानी सा लगा दिख रहा था.....उसकी चूत पर हाथ लगा....फाँक पर उपर से नीचे हाथ चलती बोली....ही पूरा जंगल सॉफ कर रखा है....खालिद भाई के लिए.....हा चूत मारनी....उनके लिए ही सॉफ कर रखा है....तूने क्यों डिज़ाइन बना रखा है.....




हन जानू देखा था किसी को.....चूत के उपर हल्का झाँत छोड़ दिया.....मैं उसको कैसे बताती की ये डिज़ाइन अपनी अम्मी से सीखा है....हा तू सही कहती है...मैने एक बार चोदा - चोदी की फिल्म देखी थी.....ही जैसी तब्बसुम की थी....नही रे वो म्मीस थी....अंग्रेज़ो वाली....गोरो की चोदा - चोदी वाली फिल्म देखी थी....उसमे सारी अँग्रेजने ऐसे ही चूत के उपर झाँत का डिज़ाइन बनाए थी.....ही सच में....तू भी बना ले....तेरे खालिद भाई को अच्छी लगेगी....कुट्टी...झांट तो उगा लूँगी...मगर तू खालिद भाई...उईईइ टोबा....कहना बंद करेगी या नही.....ही पहले कहती थी तो नही अब शरम आ रही है....खुद ही सगाई के रोज बोल के आई है....वो और बात थी....कहते हुए उसने मेरी चूंची के निपल को ज़ोर से दबाते हुए अपनी एक उंगली मेरी चूत में पेल दी....

हम दोनो बात करते हुए एक दूसरे की चूत चूंची सहला रहे थे....मैं इस व्क़ुत उसकी चिकनी छुपरि चूत के फांको पर अपनी उंगली चला रही थी...अचानक उसके निपल दबाने और बुर में उंगली पेलने से मेरी चीख निकल गई....मैने भी उसकी चूत में दो उंगलियाँ घुसेड़ दी....पर शायद उसको इसकी आदत थी....मज़े से मेरी दो उंगलियाँ निगल गई....सात सात करती चूत में उंगली डालती मेरी चूंची से खेल रही थी....मैं कच कच उसकी बुर में उंगली पेल रही थी....तभी उसने कहा....ही बन्नो तेरी चूत तो मज़े का पानी फेक रही है...सीईईई....चल लेट जा जानेमन....तेरी रसीली बुर का रस....कहते हू उसने मुझे पीछे धकेला....अपनी चूत से मेरी उंगली निकली और थोड़ा पीछे खिषाक़ मेरी चूत के उपर झुकती चली गई...




मैं समझ गई की अब मेरी चूत चतेगी....दोनो जाँघो को फैला मैं उसको होंठों का बेसब्री से इंतेज़ार करने लगी.....ज़ुबान निकल चूत के उपरी सिरे पर फिरते हुए.....लाल नुकीले तीट से जैसे ही उसकी ज़ुबान टकराई....मेरी साँसे रुक गई....बदन ऐत गया....लगा जैसे पूरे बदन का खून चूत की तरफ दौड़ लगा रहा है.....सुरसुरी की लहर ने बदन में कप कपि पैदा कर दी....मैं आँखे बंद किए इस अंजाने मज़े का रस चख रही थी....तभी उसने तीट पर से अपनी ज़ुबान को हटा....एक कुतिया की तरह से मेरी चूत को लापर लापर चाटना शुरू कर दिया....वो बोलती भी जा रही थी....ही क्या रबड़ी जैसी चूत है....सीईईईईईई....चूत मारनी कितना पानी छोड़ रही है....लॅप लॅप करते हुए चाट रही थी....मेरी तो बोलती बंद थी....

ज़ुबान काम नही कर रही था....मज़े के सातवे आसमान पर उड़ते हुए मेरे मुँह से सिर्फ़ गुगनाने और सिसकारी के सिवा कोई और आवाज़ नही निकल रही थी....उसने मेरी चूत के दोनो फांको को चुटकी में पकड़ फैला दिया....मैने गर्दन उठा कर देखा....मेरी बुर की गुलाबी छेद उसके सामने थी....जीभ नुकीला कर चप से उसने जब चूत में घुसा अंदर बाहर किया तो....मैं मदहोश हो उसके सिर के बालो को पकड़ अपनी बुर पर दबा चिल्ला उठी....चू... चुस्स्स्स्सस्स हीईीईईईईईईई कभी सीईईईईईईईईईईईईईईईईई.... हाए !!!....कुतिया ....ये क्या कर रही है.......उईईईई....मेरी जान लेगी....पहले क्यों नही....अब जब तेरी शादी होने वाली है......उईईई.....सीईईईई.....चूस्स्स्स्सस्स....चा... आअट ... हाए !!! मेरी बुर में जीभ.....ओह अम्मी.... हाए !!!ईिइ....मेरी रंडी सहेली......बहुत मज़ा.....उफफफ्फ़ चाट........मेरी तो निकल....मैं गाइिईईईईईई.....



मेरी सिसकयारी और कराहों को बिना तब्बाज़ो दिए वो लगातार चाट रही थी....चूत में कच कच जीभ पेल रही थी.....मैं भी नीचे से कमर उचका कर उसकी ज़ुबान अपनी चूत में ले रही थी...तभी उसने चूत की दरार में से जीभ निकाल लिया और मेरी तरफ देखती हुई बोली......है ना जन्नत का मज़ा.....अपनी सिसकियों के बीच मैने हा में गर्दन हिला दिया....मेरी अधखुली आँखो में झांकती उसने अपनी दो उंगलियाँ अपने मुँह के अंदर डाली और अपने थूक से भिगो कर बाहर निकाल लिया....इस से पहले की मैं कुछ समझ पाती....अपने एक हाथ से मेरी चूत की फांको को फैला ....अपनी थूक से भीगी दोनो उंगलिया मेरी बुर के गुलाबी छेद पर लगा.....कच से पेल दिया....उईईईई.......मर गई.....मेरी चीख निकल गई....अपने हाथ से मैं ज़यादा से ज़यादा एक उंगली डालती थी.....शब्बो ने बिना आगाह किए दो उंगलियाँ मेरी चूत की संकरी गली में घुसेड़ दी थी....



उस पर मेरे चीखने का कोई असर नही था....उल्टा मेरी आँखो में झांकती अढ़लेटी हुई...अपने दाँत पर दाँत बैठाए पूरे ताक़त के साथ कच कच कर मेरी चूत में उंगली पेले जा रही थी.... ऊऊउउउईई....आअहह... ..सस्स्सिईईई... .शब्बू... वो लगातार...सटा सट चूत में उंगली पेल रही थी....दर्द कुछ ही लम्हो का था.....मेरी चूत जो पहले ही रस से सारॉबार थी....और ज़यादा रस फेकने लगी....चूत से पानी का दरिया फूट पड़ा.....मैं गाँड उठा उठा कर चूत में उंगली ले रही थी....कमर नचा रही थी....मेरी जांघें काप रही थी....उईईईई तेरे हाथों में जादू है....शब्बो और ज़ोर से हाए !!!....मेरी चूत मारनी सहेली.....मेरी निकल जाएगी....उईईई...!!!!!!!! रब्बा....!!!! 


RE: Sex Hindi Kahani राबिया का बेहेनचोद भाई - sexstories - 07-01-2017

राबिया का बेहेनचोद भाई--7

. शबू ने नीचे झुक टीट को होंठों को बीच दबा लिया.....उफ़फ्फ़....चूऊऊस..... उंगली.......पेल.... मेरी......छूटने ....वालीइीई....हुउऊउ....सीईए.. .रण्डीईईईई.... चूस्स्स्स्सस्स....मैं गइईई और शब्बो के मूह मैं ही झड़ गई....मुझे अहसास हुआ जैसे मैं हवा में उड़ रही हू....मेरी आँखे बंद हो गई...कमर अब भी धीरे धीरे उछल रही थी...पर एक अजीब सा सुकून महसूस हो रहा था.... बदन की सारी ताक़त जैसे ख़तम चुकी....ऐसा लग रहा था...हम दोनो पसीने से भर चुके थे....शबनम अभी भी मेरी चूत को उपर से चाट रही थी....मैने हल्के से उसका सिर उठा कर अपनी ओर खींच लिया.....उसके होंठों को कस कर चूमा.... हाए !!! कहा से सीखी तूने ये सारी बाजिगरी...तू नही जानती मेरी एक सहेली थी....उसकी अब शादी हो चुकी है....पर इन सब बातो को छोड़ ....




मेरी चूत भी तुझ से कुछ कह रही है....है सहेली जल्दी से आ जा.....कहते हुए वो दीवान की पुष्ट से सिर टीका लेट गई....हालांकि मैं तक चुकी थी पर मेरा फ़र्ज़ बनता था....शबनम की जाँघो के बीच बैठ उसकी चूत को उसी तरह से चाटने लगी जैसे कुछ लम्हे पहले मेरी चाटे जा रही थी....टीट को मसल कर चूसने के बाद....बुर के फांको को फैला कर....जीभ अंदर पेल कर मैं तेज़ी से घुमा रही थी....चिकनी चूत के नशीले पानी ने मेरे ठंडे जोश को फिर से गरम कर दिया था....मैं तेज़ी के साथ बुर में अपनी जीभ को अंदर बाहर कर रही थी.....शब्बो पूरी गरम हो....उईईई....आईईईईई....सीईईई...करती चिल्लाने लगी....




है मदारचूऊईईईई जम कर चूस्स्स्स्सस्स मैं....जल रही हू....उफफफ्फ़.....आग...लगा दी...मुए ने....सगाई के रोज डर कर भाग गया... हाए !!!ईिइ....पेल देता पटक कर मुझे.... हाए !!!...मैं मना करती....उफफफ्फ़..... मैं चूत छोड़ जाँघ चाटने लगी....वो और गालियाँ निकालने लगी....उफफफफ्फ़.... कुतिया .... क्यों तड़पा रही है....मैने सिर उठा कर कहा....तड़पा तो तेरा खालिद भाई गया....उसी दिन पेल देता तो....आज कहते हुए मैने अपनी उंगलियों पर थूक फेका और....उसकी चूत के गुलाबी छेद पर लगा...कच से पेल दिया....सट से दो उंगलियाँ उसकी चूत निगल गई....उसको जैसे करार आ गया...हल्की सिसकारिया लेने लगी....मैं उंगली चलाती पूछी... हाए !!! खालिद भाई का लंड जाते ही चिल्लाना बंद....मेरी बातो को समझ मुस्कुरा दी हल्की सिसकारी के साथ बोली.... साली ...साली तू खालिद भाई कहना बंद नही करेगी...

मैने हँसते हुए उंगली चलना जारी रखा...ये ले साली....सब बंद कर दिया....लंड ले....मज़ा आ रहा है... हाए !!!ईीई....सीईईईई वो गाँड उचकती चिल्लई...हा ऐसे ऐसे ही...मेरी सहेली....तुझे मेरी दुआ लगेगी....घोड़े के लंड वाला शौहर मिलेगा....ऐसे ही....तभी मैने उंगली खींच ली....




शब्बो चिल्ला उठी.....उईईईई मार जाऊओँगी मेरे को ठंडा कर.....मत तड़पा बहन की लौड़ी मादरचोदी, अरी छिनालल्ल्ल्ल्ल....जल्दी से मेरे को झड़वा दे....रंडी....मुझे उसको तड़पाने में मज़ा आ रहा था....मैं उसकी चूत को थपथपाते हुए बोली....तड़प क्यों रही है....कुतिया ....खालिद भाई का लौड़ा लेगी....हरामिन...बोल ना....खालिद भाई लंड डालो....बोल.....वो मेरा खेल समझ गई भड़क कर मेरे बालो को पकड़ मेरे चेहरे को अपनी चूत पर दबा दिया.... कुतिया ... सब समझती हू....तू तब से मेरे पीछे पड़ी है....मादरचोदी .... बाते बना रही है....उफफफ्फ़....जल्दी से मेरा पानी निकाल....मैं फिर भी शैतानी हसी हस्ती हुई....उसकी टीट को अपने अंगूठे से मसलती बोली.. हाए !!! साली....छिनाल....निकाह के बाद जब अपने खालिद भाई का लंड लेगी तो इतमीनान से चेक कर लेना....हो सकता है कही लिखा हो भाई का लंड....




उफफफफ्फ़....कुतिया मज़ाक उड़ाती है.....अल्लाह करे तेरा सागा भाई तुझे चोदे....अपने भाई का लंड ले तू....साली....मुझे खूब हसी आ रही थी....हा लूँगी....तू बोल ना तेरे खालिद भाई का लंड तेरी बुर में डालु.... मादरचोदी बातें करती है....इधर मैं चूत की आग से जली जा रही हू जल्दी कर्रर्र्ररर.....जल्दी कर्ररर....किसी का भी लंड डाल शब्बो भी खीझते हुए बोली...हा हरामिन डाल...डाल दे मेरे खालिद भाई का लंड....मैने कच से इस बार तीन उंगलियाँ पेल दी....चूत में उंगली जाते ही जैसे उसको करार आ गया हो...अपनी आँखे बंद कर ली उसने....मैं कच कच उंगली अंदर बाहर करने लगी....उसकी चूत भलभला कर पानी छोड़ रही थी....मेरी तीनो उंगलियाँ उसकी चूत में आसानी से अंदर बाहर हो रही थी....उफफफफ्फ़....सीईईईई....ऐसे ही ऐसे....




ही मेरी शब्बो आपा.. हाए !!! बाजी खालिद भाई का लंड अच्छा लग रहा है... हाए !!! बोल ना....मेरी शब्बो....खालिद भाई का लौड़ा कैसा है....मज़े का है...बहुत मज़े का है....वो अपनी आँखे बंद किए बडबड़ा रही थी....हा खालिद भाई चोदो ... हाए !!!.... बहुत मज़ा आ रहा है...ऐसे मरो मेरी चूत में.....मैं तेज़ी के साथ हाथ चला रही थी....शब्बो की जांघें कांप रही थी...मैं समझ गई की ये अब किसी भी लम्हे में झड़ जाएगी....ले मेरी बेगम....अपने खालिद भाई का लंड...अपनी संकरी चूत में....खा जा अपने खालिद भाई का लंड.....वो अब तेज़ी से कमर उचकाने लगी थी.. हाए !!! रबिया मेरा निकलेगा.. हाए !!! मैं झड़ जाउंगी....कुत्तीईईईईई.....जल्दी... जल्दी....हाथ... चला..सीईईई....खालिद....भाई.....का...लंड..बहन...की...लौड़ी...उई मैं.......गैिईईईई....कहती हुई वो दाँत पीसते झड़ने लगी.....उसकी आँखे बंद थी....वो तक कर वैसे ही अपनी जाँघों को फैलाए लेटी रही....

मैं भी धीरे से उठ उसके बगल में आ कर लेट गई...हम दोनो सहेलिया बेसुध हो पता नही कितनी देर वैसे ही पड़ी रही....जब आँख खुली तो देखा अंधेरा होने वाला है और शब्बो मुझे झकझोर रही है....मैं जल्दी से उठ खड़ी हुई....शबनम ने कहा बड़ी गहरी नींद में सोई थी....चल कपडे पहन....मैने उठ कर झट पट कपड़ा पहना अटॅच्ड बाथरूम में जा अपने आप को फ्रेश किया... हाए !!! बहुत ज़ोर की आँख लग गई थी...तेरा पहला मौका था ना....वैसे मज़ा बहुत आया...हा तू तो पहली बार में ही मेरी उस्ताद बन गई....मैं मन ही मन हंस दी...उस्ताद अम्मी की बेटी थी.....

कमरे से बाहर आई तो उसकी अम्मी मिली...तुम दोनो सो गये थे क्या...हा अम्मी वो ज़रा आँख लग गई थी...अपनी सहेली को सगाई के बारे में बताया....हा अम्मी...उसकी अम्मी फिर मुझ से बोली...बेटी निकाह में ज़रूर आना 10 रोज बाद है....सब को लाना...और कौन है घर में....जी मैं यहाँ भाईजान के साथ....हा हा उसको भी लाना...फिर मैं जल्दी से पीछा छुड़ा बाहर आ गई...टॅक्सी पकड़ घर आ गई...जब तक उसका निकाह नही हुआ तब तक चोरी छुपे हमारा ये खेल चलता रहा...कभी उसके घर...कभी मेरे घर...फिर उसका निकाह हो गया और वो हनिमून पर चली गई....



हमारी मस्ती का सिलसिला टूट गया....अब फिर वही रूटीन ....एक हफ्ते तक शबनम के साथ मज़ा करने की वजह से मेरा नशा कुछ हल्का हो गया था.....मगर उसके हनिमून पर जाने के बाद चूत की खुजली ने फिर से सतना शुरू कर दिया....फिर हर रोज फ़रज़ाना से कॉलेज में मिलना होता..... फिर वही...फ़रज़ाना की सड़ी गली बाते.....ये ठीक नही है....मुझे लड़कों की कोई ज़रूरत नही....उसकी बाते सुन दिल जल उठ ता था....दुनिया की सबसे शरीफ लड़की बनने का फरेब.....शराफ़त की नकली बाते.....दिल करता कमिनी का मुँह नोच लू साली का.... ....साली के मुँह से कुछ उगलवाना बड़ा मुश्किल था....मैने कई दफ़ा कोशिश की मगर हर बार...वो बातो का रुख़ इधर उधर मोर देती....ऐसे बनती जैसे लंड-चूत क्या आज तक किसी से चूची भी नही मसलवाई है....जब भी कभी कुतिया को देखती तो....उसके भाई की याद आ जाती....याद आता वो मेरा ड्रॉयिंग रूम में चुपके से घुसना.....


याद आता की कैसे साली आ उहह कर के अपने भाई से अपनी चूचियाँ मसलवा रही थी......अहसास होता की कितनी लकी है रंडी......मेरी तरह उंगली डाल कर नही तड़प रही....भाई के साथ मज़े लूट रही है....बाहर शहर की सबसे शरीफज़ादी कहला रही है.....घर के अंदर दोनो टाँग फैला कर मोटे सुपाड़े वाला लंड खा रही है.....

उसको देखते ही दिल में हुक सी उठ ती... हाए !!! मेरा भाई इसके भाई जैसा क्यों नही..... इस कामिनी फर्रू का भाई कितना समझदार है....मेरा भाई कितना जाहिल है....कैसे फसाया होगा फर्रू ने अपने भाई को.....या उसके भाई ने फर्रू को फसाया....खैर....जो भी हो .....मज़ा तो दोनो मिल कर लूट रहे है....खरबूजे पर चाकू गिरे या चाकू पर खरबूजा.....भाई को फसाने की जो तम्माना दिल के किसी कोने में पिछले एक महीने से दफ़न हो चुकी थी....फिर से जिंदा हो गई..... इतने दिनों तक उसके बारे में सोचते-सोचते अब भाईजान से मुझे इश्क हो चुका था.....जब भी सोचती की कोई लड़का मेरा बाय्फ्रेंड हो....तो भाईजान का मासूम चेहरा सामने आ जाता था.....



वो मेरे ख्वाबो का शहज़ादा बन चुका था.....इस बार ज़ेहनी तौर मैने अपने आप को पूरी तरह तैयार कर लिया.....पक्का फ़ैसला कर लिया....अब बिना लंड के नही तड़पूंगी .....अब या तो मेरी चूत में भाई खुद अपना लंड डालेगा....या मैं उसको सॉफ सॉफ बोल दूँगी.....अब या तो इस पार या उस पार....आगे अल्लाह की मर्ज़ी....


कॉलेज से आ कर लेटी थी.....दिल में हलचल थी....समझ में नही आ रहा था कैसे आगे बढूँ ....क्या बोल दूँ....धत !....सोच कर ही शर्म से लाल हो जाती....ऐसे कैसे बोल दूँ....कौन होगी जो जाकर सीधा बोल देगी.....मेरी चूत में खारिश हो रही है.....चोद दो....खास कर कोई बहन शायद ही अपने सगे बारे भाई को ऐसा बोल सकती है.....अम्मी ने कैसे फसाया होगा.....वो साली तो रंडी है....सीधा अपनी चूत दिखा.....मामू को कहा होगा चोद दो.....फिर ख्याल आता... नही....शुरू में जब दोनो कुंवारे थे.....तब अम्मी ने कुछ तो ऐसा किया होगा.....या फिर मामू ने....



फ़रज़ाना ने भी किसी ना किसी तरह ललचाया होगा....या उसके भाई ने......उसके भाई ने जो कुछ भी किया हो.....यहाँ तो सब कुछ मुझे ही करना था.....अपने भाई के लंड को अपनी सुराख का रास्ता दिखना था.....बतलाना था की....दुनिया मज़े कर रही है...आप भी क्यों तरस रहे हो....अपने मचलते लंड को प्यासा मत रखो......घर में जवानी से भरपुर बहन है.....उस से पूछो ....बात करो ....क्या पता उसकी चूत भी खारिश से भरी हो....क्या पता वो भी तुम्हारे लंड के पानी से अपनी प्यास बुझाना चाहती हो.....सोचते सोचते....धीरे धीरे स्याह अंधेरे से रोशनी की लकीर दिखाई पड़ने लगी.....फिर मेरी आँख लग गई.....शाम होते ही कॉल बेल की आवाज़ सुनाई दी...

ज़रूर भाई होगा..... मैने सबसे पहले अपना दुपट्टा उतार कर फेक दिया......समीज़ का एक बटन खोला....चूंची यों के नीचे हाथ लगा ब्रा में थोड़ा उभरा....फिर दरवाजा खोलने आगे बढ़ी.....समीज़ के उपर से पहले अपनी खड़ी चूंची यों के दिखला कर मुझे उसका रिक्षन लेना था....फिर आगे कदम बढ़ाती.....



मैने अपने गुलाबी होंठो को रस से सारॉबार कर....मुस्कुराते हुए दरवाजा खोला....और अपना सीना तान के उसके सामने खड़ी हो गई.....भाई ने एक नज़र मुझे देखा फिर अंदर आ गया......थोड़ी देर इधर उधर देखने के बाद चेंज करने बाथरूम में चला गया....धत !....लगता है इसने नोटीस नही क्या.....अब क्या करू....मैं वही बैठ गई और टीवी खोल लिया.....दुपट्टा फिर से ओढ़ लिया.....भाई बाथरूम से निकला.....सो रही थी क्या.....हाँ! कॉलेज से आकर तक गई थी.....फिर उसके सामने अदा के साथ हल्के से दुपट्टे को ठीक करने के बहाने से एक चूंची के उभर को नंगा किया.....इस बार उसकी नज़र गई......एक लम्हे को उसकी आँखे उभर पर रुकी.....फिर वो टीवी देखने लगा.....सोफे से उठती हुई बोली ज़रा सफाई कर लू.....



भाई ने मेरी तरफ देखा.... दुपट्टे को सीने पर से हटा सोफे पर रखा......बदन तोड़ते हुए अंगड़ाई ली.........मेरी अंगड़ाई ने चूचियों को उभर कर उसकी आँखो के सामने कर दिया.....तीर जैसी नुकीली चूचियों ने अपना पहला वॉर किया......शायद उसकी आँखो में चुभ गई....तिरछी नज़र से देखा.....भाई मेरी तरफ देख रहा था.....मेरा पहला तीर निशाने पर लगा.....झारू उठा ड्रॉयिंग रूम सॉफ करने लगी.....भाई दीवान पर बैठा था.....झारू लगते हुए उसकी तरफ घूमी......हल्का सा नज़र उठा कर देखा.....वो टीवी नही देख रहा था.... मेरी तरफ घूम गया था..... लो कट समीज़.....उस पर एक बटन खुला....अंदर से झकति मेरी गोरी कबूतरे.....मतलब गोलाइयों की झलक मिल रही थी उसे....मैं सिहर उठी.....ये पहला मौका था....भाई को चूंची दिखाने का....टांगे कापने लगी.....



मैं झट से सीधी हो गई.....झारू एक तरफ रख कर किचन में चली गई....मेरा दिल धाड़ धाड़ कर रहा था.....पेशानी पर पसीना आ गया....भाई को फसाने के खेल में मज़ा आना शुरू हो गया था.....इसके बाद वो मुझे पूरी शाम अजीब सी नज़रो से घूरता रहा....

मैं कामयाब हो चुकी थी....चिंगारी दिखा चुकी....शोला भड़कने का इंतेज़ार था.....भाई को आहिस्ता आहिस्ता सुलगाना था......खेल शुरू कर दिया मैने.....अब जब भी कभी उसके सामने जाती....जान बूझ कर दुपट्टे का पल्लू सरका देती....गर्मी का बहाना कर जब-तब अपने दुपट्टे को हटा देती.....भाई तिरछी नज़रो से....कभी गर्दन घुमाते हुए बहाने से.....कभी जब मैं नज़र नीचे करके दुपट्टे को इधर-उधर करती तो....आँखे फाड़ कर देखता....मेरी बरछे की तरह तनी चूचियाँ को भाई की नज़रो में चुभाने का मेरा इरादा हर लम्हा कामयाबी की ओर बढ़ता जा रहा था.....इसको और कामयाब बनाने के लिए मैने अपनी पुरानी सलवार कमीजे निकाल ली....अम्मी वहा पहनने नही देती थी.....जब पंद्रह की थी तब पहनती थी.....अब तो बहुत टाइट हो गई थी.....



टाइट समीज़ में चूंची ऐसे उभर कर खड़ी हो जाती जैसे क्रिकेट की नुकीली गेंद हो.....टाइट समीजो ने जल्दी ही अपना असर दिखना शुरू कर दिया....भाई मेरी तरफ देखता रहता....अगर मुझ से नज़र मिल जाती तो आँख चुरा लेता....फिर थोड़ी देर बाद तिरछी आँखो से चूचियों को घूरने लगता..... जब मेरी पीठ उसकी तरफ होती तो....लगता जैसे टाइट सलवार में कसी मेरी चूतड़ों को अपनी आँखो से तौल रहा है....मैं भी मज़े ले ले कर उसको दिखती.....कभी अंगड़ाई ले कर सीने उभरती....कभी गाँड मटका कर इतराती हुई चलती ......उसके अंदर धीरे धीरे शोला भड़कना शुरू हो चुका था......भाई जायदातर कुर्सी टेबल पर बैठ कर पढ़ता.......

मैं गाल गुलाबी कर मुस्कुराती हुई जान भूझ कर उसके पास जाती और उसका कंधा पकड़ कर उसके उपर झूक कर पूछती....क्या पढ़ रहे है भाईजान....खुद ही पढ़ते रहते हो.....अपनी खड़ी चूंची के नोक को हल्के से उसके कंधे में सटाते हुए बोलती....



कभी कभी मुझे भी गाइड कर दो तो कैसा रहेगा.....वो अपना चेहरा किताबो पर से उठा लेता....मैं उसकी आँखो में झांकती....अदा के साथ मुस्कुरा कर देखती....भाई अपने सूखे लबो पर जीभ फेरता हुआ बोलता.....क्या प्राब्लम है....मैथ्स में काफ़ी दिक्कत आ रही है भाईजान....कहते हुए मैं थोड़ा और झुकती और सट जाती....चूंची का नोक उसके कंधो के च्छू रहा होता .....मेरी जांघें उसकी कमर के पास....बाहों से टच कर रही होती.....भाई अपने में थोड़ा सा सिमट जाता....मेरी घूरती आँखो के ताव को वो बर्दाश्त नही कर पता.....फिर से सिर झुका लेता और बोलता.....किताब ले आ मैं बता देता हू.....अभी रहने दो अभी तो मैं खुद ही देख लेती हू पर बाद में मदद कर दोगे ना....हा हा क्यों नही....


RE: Sex Hindi Kahani राबिया का बेहेनचोद भाई - sexstories - 07-01-2017

राबिया का बेहेनचोद भाई--8

. फिर मैं थोड़ी देर तक उसके आस पास घूम कर यूँ ही उसको ललचाती फिर वापस अपने कमरे में चली जाती....इतने में ही मज़ा आ जाता.....किसी लड़के को अपनी जवानी दिखला कर फसाने का पहला मौका था.....



कमरे के अंदर थोड़ी देर बैठ कर अपनी उखड़ी हुई सांसो पर काबू पाती....जाँघो को भीचती अपनी नीचे की प्यासी गुलाबी रानी को दिलासा देती....फिर उठ कर किचन में जा कर खाना बनाने लगती....बीच बीच में बाहर आ कर भाई के पास आती.....वो मेरी तरफ देखता.....मैं वहा रखे तौलिए से पेशानी का पसीना पोंछती बोलती....उफ़फ्फ़ या अल्लाह कितनी गर्मी है.....बर्दाशत नही होती.....और अपने दुपट्टे को ठीक करने के बहाने बार बार अपनी खड़ी नोकदार चूंची यों को दिखती....पसीने से भीग जाने की वजह से.....पतली समीज़ के अंदर से मेरी ब्रा उसको दिखती होगी.....भाई मुस्कुराते हुए मेरी और देखता.....बात-चीत करने के बहाने उसको घूरने का ज़यादा मौका मिलता....इसलिए बोलता.....गर्मी तो है मगर तुझे कुछ ज़यादा लग रही है.....




ही ही मुझे क्यों ज़यादा लगती है कभी सोचा है....किचन में काम कर के दिखो....अपने गुलाबी होंठो को टेढ़ा कर अदा के साथ हाथ नचा कर बोलती.....तू थोड़ी देर यही बैठ जा....आराम कर ले....खाना कौन बनाएगा....कहते हुए मैं फिर वापस किचन में चली जाती.....



भाईजान मुझे किचन में जाते हुए देखते....मुझे लगता की उसकी नज़र मेरी चूतड़ों पर टिकी हुई है....मैं और ज़यादा इठला कर चलती...मटक कर अपने चूतड़ों को हिलती हुई इधर से इधर घूमती....छ्होटी सी समीज़ और चुस्त सलवार में जवानी और ज़यादा निखर जाती थी....मैं घर पर जान बूझ कर पुराने और पतले कपडे वाले समीज़ सलवार पहनती ताकि मेरा जिस्म ज़यादा से ज़यादा उसको दिखे....कपडे पसीने से भीग जाए......और बदन से चिपक जाए....फिर वो देख कर अपने आप को गरम करता रहे...

मेरी आग लगाने वाली अदाए काम करने लगी.....भाई अब मेरे आस पास ही घूमता रहता.....मेरे साथ ज़्यादा से ज़्यादा वक़्त बिताने की कोशिश करता.... मुझे भी मज़ा आता.....कौन लड़की नही चाहेगी की कोई लड़का उसका दीवाना हो....उसकी हर बात का ख्याल रखे....और उसकी हर अदा पर मार मिटे .....भाई की आँखो से पता चल जाता की वो मेरी हर अदा पर अपनी जान लुटाने को तैयार बैठा है.....मैं भी पूरे घर में उसके सामने इधर-उधर इतरा इतरा कर घूमती....मुझे लगा की खाली सलवार कमीज़ से काम नही चलेगा....दो तीन स्कर्ट ब्लाउस निकाल लिया मैने.....अब कई बार सलवार समीज़ की जगह स्कर्ट ब्लाउस पहन लेती मैं...सब पुरानी थी...टाइट और छ्होटी हो चुकी थी......पहली बार मुझे स्कर्ट ब्लाउस में देख चौंक गया.....



मगर बोला कुछ नही.....मैं भी खूब मटक मटक कर गाँड हिलाते हुए चलती....अपने उभरो को हिलती....छलकाती ....घर में घूमती......मेरी इस अदा ने उसको और दीवाना कर दिया....मेरी नंगी गोरी टांगे जो देखने को मिल रही थी उसे...सारी स्कर्ट तो छ्होटी हो कर मिनी-स्कर्ट हो गई थी.....फिर टाइट ब्लाउस मेरे हिलते कबूतर उसके पाजामे में ज़रूर हलचल मचाते होंगे.....फिर ऐतराज़ कैसा.....मेरे स्कर्ट टी - शर्ट पहन ने पर उसने कोई ऐतराज़ नही किया.....उल्टा मेरी तारीफ में कशीदे कदता.....रबिया बहुत प्यारी लग रही है.....एकदम गुड़िया जैसा.... हाए !!!....परी जैसी दिख रही है इस गुलाबी ड्रेस में......



मैने एक दिन पुछा तुम्हे मेरे टी - शर्ट और स्कर्ट पहन ने में कोई ऐतराज़ तो नही है भाई.....ना ना मुझे क्यों कर ऐतराज़ होगा भला....फिर घर में तो कोई भी ड्रेस पहन..... कहते हुए......मेरी टी - शर्ट में चोंच उठये दोनो नोकदार चूचियों को अपनी निगहों से पीने की कोशिश करता......मैं मन ही मन खुश हो रही थी......शिकार जाल में फस रहा था......
मैने अपनी हरकतों में इज़ाफ़ा कर दिया......जब वो टीवी देखता या पढ़ता रहता तो.....मैं जब नीचे झुक कर कुछ उठती तो किताबो के पीछे से मेरी गोरी टॅंगो को देखता....मैं जान बूझ कर और झुकती....ताकि मेरी स्कर्ट और उपर उठ जाए और मेरी
नंगी गोरी चिकनी जांघें उसे दिख जाए.....उसके सामने झुक झुक कर झाड़ू देती....वो मेरी समीज़ या ब्लाउस के अंदर झाँक कर चूंची देखने की कोशिश करता.....

कई बार जान बूझ कर...ज़मीन पर पेन या कुछ और गिरा कर उठती.....बार बार उसको अपनी नोकदार चूंचीयों को देखने का मौका देती.....उसकी तरफ अपनी गांड घुमा कर नीचे गिरी चीज़ों को उठती.....ताकि मेरी मस्त जाँघो का नज़ारा उसे मिले.....शबनम ने बताया था की लड़के गोरी गुन्दाज़ जाँघो के दीवाने होते है....अपनी मोटी जाँघो का नज़ारा और अच्छी तरह करवाने के लिए......भाई के सामने ड्रॉयिंग रूम में लगे दीवान पर बैठ......बार-बार अपने टाँगो का मक़ाम बदलती....कभी लेफ्ट टाँग पर राईट कभी राईट टाँग पर लेफ्ट ......इस दौरान मेरी स्कर्ट भी इधर उधर होती.....और मेरी चिकनी मोटी जाँघो का नज़ारा थोड़ा उपर तक उसको मिल जाता.....कई बार दोनो टाँग लटका कर ऐसे बैठ जाती जैसे मुझे ख्याल नही.....टांगे फैली होती.....स्कर्ट भी फैल जाती.....जाँघो का नज़ारा अंदर तक होता.....इतना अंदर तक की.....मेरी चड्डी की झलक भी उसको मिल जातीई.....


उसके पाजामे का उभर मुझे बता देता की उसकी क्या हालत है....वो कहा तक देख पा रहा है.....मुझे देख-देख कर अपने होंठो पर जीभ फेरता रहता....पाजामे के लंड को अड्जस्ट करता रहता....मैने कई बार उसको ऐसा करते पकड़ लेती.....मुझे अपनी ओर देखता पा कर वो झेप जाता....और हँसने लगता.... मैं होंठ बिचका कर मुँह घुमा लेती.....जैसे मुझे कुछ पता ही नही......



पर मैं जानती थी की उस समय मेरी चूत की क्या हालत होती.....जी करता दौड़ कर लंड को पकड़ लू और हाथ से मसल कर तोड़ कर अपनी बुर में घुसेड़ लू.....मगर मैं चाहती थी पहला कदम वही उठाए.....ताकि बाद में मुझ पर कोई उंगली ना उठे......मैं खुद उस से चुदवाना चाह रही थी.....पर मैं चाहती थी की वो मुझे खुद चोदे.....मुझे से मेरी चूत माँगे....तभी तो मेरा गुलाम बनेगा....जैसा मैं कहूँगी वैसा करेगा....किसी को कुछ बोलेगा नही....

भाई का हौसला अब आहिस्ता आहिस्ता बढ़ने लगा.....मेरी खुली अदाओ ने उसको हिम्मत दी....वो अब आगे बढ़ कर कदम उठा रहा था....मैं यही चाहती थी....भाई बात करते वक़्त अब मेरे कंधो पर हाथ रख देता था....उसका झेपना भी कम हो गया था.....जब कभी उसको अपनी चूंची यों को घूरते पकड़ लेती तो मुस्कुरा देता.....मैं भी अदा के साथ इतरा कर पूछती क्या देख रहे हो भाई.....


तो वो बोलता.... कुछ नही......अपनी प्यारी गुड़िया रानी को देखना गुनाह है क्या.....मैं हँसते हुए शर्मा कर....धत ! करती.......दूसरी और जाने लगती.....इस बात को अच्छी तरह से जानते हुए की वो मेरे मटकती गाँड को देख रहा होगा.....हाथ पीछे ले जाकर अदा के साथ....आराम से अपनी गाँड में फासे सलवार को निकाल....कमर हिलती...चूतड़ नाचती हुई...किचन में या बेडरूम में घुस जाती....कई बार बात करते-करते वो मेरा हाथ पकड़ लेता और मेरी उंगलियों से खेलने लगता.....मैं भी उस से बात करते हुए टीवी देखती रहती.....जैसे मुझे कुछ पता नही की वो क्या कर रहा है......
मैं अब अपने कमरे में पढ़ने की बजाए दीवान पर टीवी के सामने ही बैठ कर पढ़ाई करने लगी थी....किताब पढ़ते पढ़ते मैं पेट के बल लेट जाती थी.....मेरे इस तरह से लेटने की वजह से मेरी समीज़ के अंदर से मेरी गोरी गोलाईयां झाँकने लगती....कुर्सी पर बैठा भाई टीवी कम मेरी समीज़ की गोलाइयों को ज़यादा देखता.....मैं बीच बीच में अपने गले में चारो तरफ घुमा कर अपना दुपट्टा ठीक कर लेती.....



जब गोलाईयां नही देखने को मिलती तो मेरे पैरो की तरफ देखने लगता.....पेट के बल लेते हुए मैं अपनी टाँग को घुटने के पास से मोड़ कर उठा लेती थी.....जिसकी वजह से सलवार सरक कर घुटनो तक आ जाती थी....वो वही देखता रहता.....मैं अपनी टाँगो को अदा के सटा हिलती उसको सुलगाती रहती.......मेरे चूतड़ों पर से समीज़ हट जाती....गाँड की दरार में फंसी सलवार उसको दिखने लगती....वो चुप चाप बैठ कर अपना लंड फुलाता रहता....

कई बार अगर वो दीवान के पास बैठा होता तो मेरे पैर की उंगलियों पर हल्के हल्के हाथ फेरता....उसे शायद लगता की मुझे पता नही है......मैं भी चुप-चाप मज़ा लेती रहती.....जिस दिन स्कर्ट पहन कर पेट के बल लेटती .....भाई की चाँदी हो जाती थी......मैं दीवान पर टीवी की और मुँह कर के लेटी होती....सोफा थोड़ा पीछे टीवी के सामने होता.....भाई उस पर बैठा.....टीवी कम मेरी स्कर्ट के अंदर ज़यादा देखता.....वो बराबर कोशिश कर के दीवान की तरफ झुकता.....मेरी फैली स्कर्ट के बीच मेरी रानों को देखने की कोशिश करता......


मुझे लगता है साला ज़रूर उस दिन रात भर मूठ मारता होगा.....अब तो उसका ये हाल हो गया था की मेरे पास आने और मुझे छुने के लिए बहाना खोजता रहता था..... मैने अपने नखरो में भी आहिस्ता आहिस्ता इज़फा कर दिया.....सिर दर्द का बहाना करती....वो एकदम घबड़ा कर मेरे पास आ जाता कहता लाओ मरहम लगा दूँ.....सिर पर बाम कम लगता मेरे गाल और बालो को छुने में जयदा दिलचस्पी दिखता.....मैं भी चूंची उभार कर लेट जाती.....वो सिर के पास बैठ मेरी कबूतरियों को देखते हुए मरहम लगता रहता....




एक शाम जब भाई घर आया तो उसके हाथ में कोन वाली आइस-क्रीम थी....मैने पुछा हाए !!! भाईजान.... आइस-क्रीम क्यों लाए......तो भाई बोला तू कहती थी ना बहुत गर्मी है.... हाए !!! तो आइस-क्रीम खाने से गर्मी भाग जाएगी क्या..... अर्रे भगेगी नही थोड़ी कम तो ज़रूर हो जाएगी......तेरे लिया लाया हू इतने शोख से.....ले खा ना.... हाए !!! पहली बार कुछ लाए हो मेरे लिए....तू कुछ मांगती कहा है....मैं खुद से ले आया......अच्छा...



मैने शरमाते हुए उस से आइस-क्रीम ले लिया और सोफे पर बैठ.....अपना एक पैर सामने रखे स्टूल पर रख कर आइस-क्रीम खाने लगी.....भाई सामने बैठ कर मुझे आइस-क्रीम खाते हुए देखने लगा.....मैं आइस-क्रीम के गुलाबी सिरे को जीभ निकाल निकाल कर चाट ने लगी.....अपने गुलाबी रस भरे होंठो को को खोल खोल कर हल्के हल्के काट कर आइस-क्रीम खा रही थी....भाई सामने बैठा था.....उसको मेरी स्कर्ट के अंदर कसी हुई गोरी जांघें दिख रही थी.....

वो वही बैठा अपने पंत के उपर हाथ रखे मुझे आइस-क्रीम खाते हुए देख रहा था.....मैं समझ रही थी की साला सोच रहा होगा काश आइस-क्रीम की जगह मेरा लंड होता......मैं जान भूझ कर आइस-क्रीम ऐसे चूस रही थी जैसे लंड चूस रही हूँ.....फिर जीभ निकाल इतराती हुई अपने गुलाबी होंठो पर फेर रही थी.....उपर की तरफ नीचे की तरफ....


होंठो के चारो तरफ लगे क्रीम को चाटते हुए बोली.... हाए !!! भाईजान बहुत मजेदार आइस-क्रीम है.....अपने शहर में तो ऐसी आइस-क्रीम मिलती ही नही......भाई कहता.....तुझे अच्छा लगा....मैं सोच रहा था कही तुझे अच्छा नही लगे.... हाए !!! नही भाई बहुत मजेदार है.....ठीक है रोज ला दूँगा तेरे लिए... हाए !!! भाई तुमने खाया या नही......अरी मैं नही ख़ाता.....क्या भाईजान खा कर देखो ना बहुत मजेदार है....लो ...ना....लो ....लाओ मैं अपने हाथ से खिलती हू....



कहती हुई मैं इठलाती हुई उसके पास गई.....झुक कर उसके चेहरे पर अपनी गर्म गुलाबी साँसे फेंकती....आइस-क्रीम को उसके होंठों के पास लगा कर कहा....मेरा झूठा है मगर......तो क्या हुआ.....मेरी प्यारी बहन का झूठा और मजेदार होगा.....कहते हुए आइस-क्रीम को जीभ निकाल कर उपर से चाटा....तो मेरी चूत सिहर गई....झांट के बॉल खड़े हो गये.... हाए !!! कितने प्यार से चाटा.....जाँघो को भींच कर इतराती हुई बोली.... हाए !!! और चाटो ना भाई.....काट कर खाओ ना....




भाई ने हल्के दाँत से आइस-क्रीम का एक टुकड़ा काट लिया..... मेरी चूंची के गुलाबी निपल खड़े हो गये.....इसस्स....फिर नखरा करती हुई उछलती हुई इतरा कर बोली.....उूउउ.. हाए !!! पूरा नही खाना.....थोड़ा सा....खाली चाटो....तो भाई हँसने लगता....कहता अच्छा अब तुम खाओ..... तुझे खाते देख मेरा दिल भी भर जाएगा.....मैने हँसते हुए आइस-क्रीम से बड़ा सा टुकड़ा काट लिया ......फिर वापस भाई के मुँह से आइस-क्रीम सटा दिया.....भाई बोला अरी रहने दे.....

क्या भाई लो ना थोड़ा सा और....लो चाटो ना... हाए !!! थोड़ा सा चाटो....उपर लगी क्रीम.....बड़ी मजेदार है....अपनी जीभ निकाल उसने हल्के से क्रीम चाटे ......उ.....चूत ने दो बूँद रस टपका दिया..... हाए !!! अच्छा लगा ना भाई.....और लो ना.....खाली क्रीम चाटो.....उपर से.....उईईई....बदमाश भाईजान.....थोड़ी क्रीम मेरे लिए भी छोड़ो ......जाओ मैं नही देती अब.....सारी खा गये तुम तो.....भाई हँसने लगा...फिर मैं खाने लगती.....फिर खुद माँगता......




रबिया थोड़ी सी दे ना.....नही मैं नही देती तुम काट लेते हो.... हाए !!! नही खाली चाटूँगा....हल्का सा चाटूंगा....नही तुम काट लेते हो... हाए !!! नही...चटा दे ना.....थोड़ा सा.....खाली उपर से चाटूंगा.....मैं फिर इठलाती हुई उसके मुँह के पास आइस-क्रीम देती....लो चाटो.....उपर... हाए !!! काटना नही....ठीक से चाटना.....नही तो दुबारा नही दूँगी.. हाए !!! हा ऐसे ही चाटो....हा बस उपर से...लो थोड़ा और.. हाए !!! हा....लो जीभ लगा कर....बदमाशी नह्ी...ठीक से चाटो ना....अफ...गंदे तुम मनोगे नही... हाए !!! काट लिया... हाए !!!....ऐसे ही चलता रहता......उस दिन के बाद से भाई हर रोज आइस-क्रीम ले कर आता.....ऐसे आइस-क्रीम खा कर चूत ऐसे सुलगने लगती की बाथरूम में जाकर दो मिनिट तक मूत ती रहती थी मैं.....कच्ची बुर रस टपकाते.....पेशाब की तेज धार छोड़ती....
भाईजान को फंसाने के लिए अपनी हरकतों में धीरे-धीरे इज़ाफ़ा कर रही थी......इंटरनेट पर अकेले में बैठ उसमे से अपने मतलब की चीजें निकाल लेती......लड़कों को कैसे तड़पायें फंसायें...... तड़पने तद्पाने के इस खेल में मज़ा आ रहा था....सुबह मैं भाई से पहले नहाने जाती थी....पहले तो मैं अपने कपडे उसी वक़्त सॉफ कर लेती थी....मगर अब मैं अपने कपडे वही बाथरूम की खूंटी पर टाँग कर चली आती थी....सलवार समीज़ के उपर अपनी छोटी सी पैंटी और ब्रा रख देती.....ताकि भाईजान को आसानी से दिख जाए.....फिर मैं बाहर आ जाती....फिर जब वो नहा कर आता तो मैं गौर से देखती...... एक दो दिन तो कुछ नही हुआ......




मगर उसके बाद मैने देखा की जब वो नहा कर तौलिया लपेटे बाहर आता तो उसका तौलिया आगे से थोड़ा उभरा हुआ होता......चेहरा सुर्ख लाल होता......मुझ से नज़र मिलाने से कतराता.....मैं समझ गई की भाई का ऐसा हाल मेरी चड्डी और ब्रा का कमाल है......पर करता क्या है भाईजान मेरी चड्डी और ब्रा के साथ......अपना औज़ार इसके उपर रगड़ता है.....क्यों ना बाथरूम के दरवाजे में कोई दरार ढूँढ कर अंदर का मुजाहिरा किया जाए......इस से मुझे उसका लंड देखने का मौका भी मिल जाता.....


RE: Sex Hindi Kahani राबिया का बेहेनचोद भाई - sexstories - 07-01-2017

राबिया का बेहेनचोद भाई--9

. फिर मैने कॉलेज से जल्दी आ कर बाथरूम के दरवाजे में एक छ्होटा सा दरार खोज लिया.....अगले दिन बाथरूम में घुस कर नंगी होकर....भाई को याद कर मूठ मारते हुए अपनी दो उंगलियों को अपनी बुर में पेल दिया......चूत जब बहुत पनिया गई और पसिजने लगी......मैने अपनी सुर्ख लाल रंग की चड्डी की म्यानी को अपनी चूत के उपर रगड़ कर अपनी चूत का सारा पानी उस पर लगा दिया.....


फिर नहा कर अपने कपडे खूंटी पर टाँग कर बाहर निकल गई.....थोड़ी देर बाद भाई बाथरूम में घुसा.....दरवाजा बंद होते ही मैं झटपट दरवाजे के दरार के पास झुक कर खड़ी हो गई.....अंदर भाई सारे कपडे उतार कर नंगा खड़ा था..... चौड़ा चिकना सीना.....मजबूत बाहें ... हाए !!! अगर जकड़ ले तो पीस डालेगा मेरे नाज़ुक बदन को.....सख्त चूतड़.....मोटी जांघें ....उईईइ.... हाए !!! रब्बा क्या मस्त नज़ारा था...खाली चेहरे से मासूम नज़र आता था.....पूरा हट्टटा कट्टा मर्द था भाई.....




हाए !!! जाँघो के बीच पेट के नीचे काली झांटें...ज्यादा नही थी...फिर भी....काले झांटों के बीच छोटे चीनी केले जैसा उसका काला लंड अपने गुलाबी सुपाड़े के साथ... हाए !!! क्या नज़ारा था......मारजवा....जिंदगी में पहली बार.....उईईइ....कितना हसीन लग रहा था.....काले लंड के उपर गुलाबी सुपाड़ा.....मैने तस्वीरो में लड़कों का सोया लंड नही देखा....जब भी देखा खड़ा लंड ही देखा था.....पर भाई का सोया हुआ हथियार... हाए !!! रब्बा बड़ा प्यारा क्यूट सा लग रहा था....गुलाबी सुपाड़ा एक चॉक्लेट के जैसा दिख रहा था......



भाई ने एक बार बाथरूम में चारो तरफ नज़र घुमाई....फिर अपने होंठों पर जीभ फेरते हुए धीरे से चड्डी की तरफ हाथ बढ़ाया......मैं उपर से नीचे तक सनसना गई.... हाए !!! मेरी अम्मी....सीईईई.....उकसा लाड़ला बेटा उसकी बेटी की चड्डी के साथ कुछ करने वाला था.....मैं दम साधे देख रही थी....भाई ने धीरे से मेरी चड्डी और ब्रा को उतरा.....फिर मेरी ब्रा अपने हाथ में ले कर दो-तीन बार चूमा.....

छाती पर बाहों पर जाँघो पर हर जगह फिरया जैसे ब्रा से अपने बदन को रगड़ रहा है.....मैं देख रही थी....अपने हाथो से अपनी चूंचीयाँ सहलाने लगी.... साला सोच रहा होगा मेरी चूंचीयों के बारे में....सोच रहा होगा उसके पूरे बदन से मेरी चूंचीया .....घिस रही है... हाए !!! उसका लंड धीरे धीरे खड़ा हो रहा था.... हाए !!! मारजवा....अफ....पूरा खड़ा हो गया.... हाए !!! क्या मस्त लग रहा था भाई का खड़ा लौड़ा .....किसी सख़्त डंडे के जैसा.....खड़ा....लंबा और मोटा.....मेरी कलाई जितना मोटा होगा....ठीक से मेरे हाथ में भी नही आएगा......



हाए !!! सुपाड़ा देखते ही देखते फूल कर आलू जैसा हो गया.... मेरे मुँह में पानी आ गया.....गुलाबी सुपाड़ा चमक रहा था.....फूला हुआ.....आगे से थोड़ा सा नुकीला......फिर उसने ब्रा को अपने खड़े लंड पर फिराया और लंड के चारो तरफ लपेट दिया.....कितना हरामी था मेरा भाई.....फिर मेरी चड्डी अपने हाथो में ले कर अपने चेहरे के पास ले गया....



पैंटी की म्यानी को फैला कर उस पर लगे चूत के पानी को देखा जो अब तक सूखा नही था.....उसके होंठो पर मुस्कान फैल गई.....कुछ बुदबुडाया और फिर अपने होंठो को गीला कर म्यानी को नाक के पास ले जाकर सूंघने लगा.....अपनी सग़ी छोटी बहन की चड्डी को सूंघ रहा था भाई....बहन की चूत के ताजे पानी को सूंघ कर उसका लंड तेज़ी से उपर नीचे होने लगा......वो अपने दूसरे हाथ से मेरी ब्रा में लपेटे हुए अपने खड़े लंड को सहलाने लगा.....मुझे ज़रा भी अहसास नही था की भाई ऐसा भी करेगा.....



उसने अपनी जीभ को निकाल कर मेरी चड्डी की म्यानी पर रख दिया और चाटने लगा....मेरी चूत ने एक बूँद रस टपकाया....ऐसा लगा जैसे उसने मेरी चूत पर ज़ुबान रख दी.....चूत के पानी को चाटने में उसे घिंन नही आ रही थी.....वो कभी मेरी चड्डी को सूंघता कभी चाटने लगता और धीरे धीरे अपने लंड को सहलाता जाता.....भाईजान की इन हरकतों ने मुझे दीवाना कर दिया....दिल कर रहा था अंदर घुस जाऊं और सलवार उतार चूत उसके मुँह पर रख दूँ.....


चूत ऐसे कुलबुलाने लगी की अपनी सलवार उतार कर अपनी बुर में दो उंगली डाल लेने का दिल करने लगा.......पर जाँघो को भीच एक हाथ से अपने कबूतरो को मसालते हुए खुद को तस्सल्ली दिया.....और आगे का खेल देखने लगी....थोड़ी देर बाद उसने मेरी ब्रा को लंड पर से हटा कर फिर से खूंटी पर तंग दिया.....ऐसा क्यों किया उसने......खैर वो फिर से आँखे बंद कर मेरी पैंटी को अपने मूँह में पूरी तरह से भर कर चूस्टे हुए.....तेज़ी से अपना लंड मसलने लगा.... 

लंड की चमरी को उपर नीचे खीचते हुए हिला रहा था..... भाईजान मेरी चड्डी को कुत्ते के जैसे सूंघ और चाट रहे थे.....उन्हे मेरी चूत मिल गई तो क्या करेंगे......चबा जाएँगे.....खा जाएँगे....उफ़फ्फ़ ये सब सोच सोच कर मेरी चूत पसिजने लगी थी...... मैं सलवार के उपर से अपनी चूत के अनार-दाने को रगड़ते हुए.....अपनी चूची को मसलने लगी....



भाई अब जोश मे आ चुका था....चड्डी को मुँह से बाहर निकाल नाक के उपर रख सूंघते हुए खूब ताक़त लगा कर लंड हिला रहा था.....अचानक एक झटके के साथ सुपाड़े से गाढ़ा सफेद पानी फूच से निकल कर सामने की दीवार पर जा गिरा....फिर तीन चार बार और फूच फूच कर सफेद पानी निकाला....पर उतनी ताक़त के साथ नही....नीचे ज़मीन पर गिर गया....मैने पहली बार किसी सचमुच के झरते हुए लंड को देखा था....



मेरी चूत ने रस टपकाना शुरू कर दिया.....भाई एकदम पसीने से तर-बतर हो चुका था......उसके पैर काँप रहे थे.......मेरा भी यही हाल था....थोड़ी देर भाई वैसे ही खड़ा हांफता रहा फिर....उसने मेरी पैंटी को खूंटी पर टाँग दिया......मग में पानी लेकर दीवार पर लगे सफेद पानी को सॉफ किया....ज़मीन पर गिरे पानी को भी सॉफ किया....



अब मेरी समझ में आ गया की उसने लंड पर से मेरी ब्रा को क्यों हटाया.....वो नही चाहता था की ब्रा पर उसके लंड का पानी लग जाए.....वैसे अगर लगा भी देता तो मैं बुरा नही मनती.....गाढ़ी मलाई का टेस्ट मुझे भी पता लगाना था.....झड़ने के बाद उसमे खड़े होने की ताक़त नही थी वही फर्श पर बैठ गया....मेरी चूत ने भी दो चार बूँद रस टपका दिया था.....



मैं जल्दी से वहा से हट गई....कमरे के दरवाजा बंद कर जल्दी से सलवार उतरा और अपनी गीली पैंटी को उतार कर अपनी फुद्दी को देखा.....मेरी गुलाबी सहेली का रंग सुर्ख लाल हो गया था.....टीट अभी भी अपनी चोंच उठाए खड़ी थी.....मैने जल्दी से अपनी चड्डी को लपेट कर बिस्तर के नीचे छुपा दिया......कल यही चड्डी बाथरूम में छोडूंगी....

फिर एक सॉफ चड्डी पहन ली....और अपने बैग को संभालने लगी....थोड़ी देर में भाई बाहर आया.....तौलिया आगे से थोड़ा सा अभी भी उभरा हुआ था....शायद.इतना तगड़ा मूठ मार कर भी भाई का ठंडा नही हुआ....मेरे होंठों पर मुस्कान फैल गई... हाए !!! साले भाईजान अभी तो चड्डी सूंघ कर इतना तगड़ा मूठ मारते हो....चूत दिखा दूँगी तो क्या करोगे.....साले को अब भाई से बहेँचोड़ बनाने में अब ज़यादा देर नही....



सॅटर्डे का दिन था शाम में भाई थोड़ी देर से घर आया.....मैने मुँह फुलाते हुए कहा इतनी देर क्यों लगा दी.....वो थोड़ा झिझकते हुए बोला वो वो....आज दोस्तो के साथ घूमने चला गया था......अच्छा खुद तो दिन भर घूमते रहते हो......मैं यहाँ बैठ कर इंतेज़ार कर रहि हुँ.....ये भी ख्याल नही है की बेहन घर पर अकेली बैठी होगी..... हाए !!! रब्बा आज आइस-क्रीम भी नही लाए.....अब मैने झूट मूठ का रोने का नाटक करने लगी.....अपनी आँखो में आँसू भर कर मुँह फूला लिया.....भाई एक दम से घबड़ा गया और.....और मेरे सामने आ कर मेरे चेहरे को अपनी हथेली में भर उपर उठा कर.....



मेरी आँखो में झँकते हुए बोला.....अरे रे....रो मत....चल आज तुझे घुमा देता....वही बाहर आइस-क्रीम भी खिला दूँगा......हा इतनी रात में घूमने ले जाओगे......आजतक तो कभी ले नही गये......एक आइस-क्रीम ला दिया बस.......अरी ये कोई छ्होटा शहर है क्या.....अभी नौ बजे है.....अभी तो यहाँ की नाइट लाइफ शुरू होती है.....चल आज तुझे दिखता हू.....कपडे बदल ले....प्लीज़ मेरे सामने अपना मुँह मत लटका......मेरी प्यारी बहना.....चल आज खाना भी बाहर ही खाएँगे....समंदर किनारे.....थोड़ा ना नुकुर करने के बाद मैं तैयार हो गई....


काले रंग की हाफ बाजू वाली टाइट T-shirt और टाइट जीन्स जिसको मैने शबनम के साथ जा कर ख़रीदा था में अपनी मोटी जांघें कस कर तैयार हो गई..... थोड़ा डर भी रही थी....फिर सोचा ये तो मेरी जाल में फसा हुआ खिलोना है......माना नही करेगा......भाई ने भी ड्रेस चेंज कर लिया.....बालो के लट को अपने चेहरे पर बिखड़ा कर होंठो पर सुर्ख गुलाबी रंग की लिपीसटिक लगा ली......भाई ने जब देखा तो देखता ही रह गया.....उसको ख्यालो से बाहर लाने के लिए मैने कहा....क्या भाई चलना नही है क्या....

भाई सकपका कर शरमाते हुए अपनी जीन्स को अड्जस्ट करता हुआ बोला.....ये जीन्स कब ख़रीदा .....मैं चुप रही.....इतनी देर में भाई पास आ चुका था और उपर से नीचे तक मुझे देख रहा था..... उसने फिर पुछा .......मैं अपने सुर्ख लबो को रस से भिगोती थोड़ा रुआंसा होने का नाटक करती उसके पास जा.... कान में सरगोशी करते बोली....भाई प्लीज़ दिल मत तोड़ना....शबनम के साथ ख़रीदा ....सभी पहनते है....मेरा भी दिल... हाए !!! भाई प्लीज़ हमेशा नही पहनउगी....



कहते हुए उसका कंधा पकड़ उसके उपर अपना सिर रख दिया.....मुझे इस बात का पहले से ही पता था की वो मना नही कर पाएगा.....मेरे मुँह बनाने और रुआंसा होने से वो और पिघल गया......मेरी ठोड़ी पकड़ मेरे चेहरे को उपर उठा.....मेरी आँखो में झँकते हुए बोला.....अर्रे पगली तो इसमे उदास होने की क्या बात है.... हाए !!! नही भाई कही अम्मी को......अर्रे अम्मी को कौन बताएगा.....



ही भाई सच आप नही बताओगे......क्यों बताऊंगा ....इसमे बुराई क्या है....सभी तो पहनती है....कॉलेज में......मैं तो खुद सोच रहा था तुझे गिफ्ट....मैं भाई से लिपट गई....और उसके गाल को अपने सुर्ख लबो से चूम लिया.... हाए !!! मेरे प्यारे भाईजान तुम कितने अच्छे हो.....सच भाईजान आपसे अच्छा भाई कोई नही होगा.....अपनी टी - शर्ट में कसी नुकीली चूंचीयों को भाई की सीने में दबा दिया.....



आज मैने ब्रा भी नही पहना था....भाई मेरे इस अचानक प्यार से थोड़ा सकपका सा गया....पर फिर अपने आप को संभालते हुए मेरी कमर में हाथ डाल सहलाते हुए बोला.... जब दिल करे पहना कर.....यहाँ कौन रोकेगा....मैं भी तो अपनी आज़ादी के मज़े लूट रहा हू....तू भी मज़े कर.....फिर एक हाथ से मेरी ठुड्डी पकड़ मेरे चेहरे को उपर उठा मेरी झील सी गहरी आँखो में झँकते हुए बोला......वैसे एक बात कहूँ .....बड़ी प्यारी लग रही है....फ़िल्मो की हेरोईएन जैसी....

मैने धत ! करके अपनी नज़रे नीचे झुका ली....भाई का एक हाथ अभी भी मेरी कमर में था.....मेरी साँसे तेज हो गई थी.....तेज सांसो के साथ मेरी चूंचीयाँ भी उठ बैठ रही थी.....हम इतने पास थे की भाई की गर्म सांसो का अहसास अपनी गुलाबी गालो पर महसूस कर रही थी.....भाई की अगली हरकत का इंतेज़ार कर रही थी.....भाई ने हल्के से मेरा गाल चूम लिया.... हाए !!! अल्लाह.....मछली की तरह मचल कर भाई के बाहों से खुद आज़ाद किया.....और अपनी दोनो हाथो से अपने चेहरे को धक खड़ी हो गई.....



मेरे कान लाल हो चुके थे.....भाई ने सोचा उसने कुछ गड़बड़ कर दिया....घबड़ाता हुए मेरे चेहरे को अपने हाथो में ले बोला....स...सॉरी...वो मैने....वो मेरी हथेलियों को मेरे चेहरे से हटाने की कोशिश करने लगा....थोड़ा नाटक करते हुए मैने हथेलियों को चेहरे पर से हटा दिया....और गर्दन नीचे कर खड़ी हो गई....चेहरा पूरा सुर्ख लाल...आँखे नीचे झुकी हुई......



भाई ने देखा मैं रो नही रही तो उसकी हिम्मत बढ़ी और मेरी ठुड्डी पकड़ उपर करते हुए मेरी आँखो में झँकते हुए बोला....सॉरी...रबिया....वो तू इतनी प्यारी लग रही थी......मैं उसका हाथ हटा बोली...धत !...आप बारे बदमाश हो छोड़ो .....मैं दूर ज़ाने का नाटक करने लगी तो भाई ने मेरा हाथ पकड़ लिया....अर्रे रुक तो सही....हाथ छुड़ाने कोशिश करते थोड़ा शरमाने का नाटक करते हुए बोली.... हाए !!! नही छोड़ो आप बहुत ख़राब हो.....अरे क्या रबिया प्लीज़ नाराज़ मत हो....इतनी प्यारी लग रही थी इसलिए.....धत !....हाथ छोड़ो ...उई अल्लाह कितनी ज़ोर से कलाई पकड़ी है.....छोड़ो ना भाई..... चलना नही है क्या.....

हा हा चलना है ना...चलो....हाथ छोड़ता हुआ भाई बोला......फिर हम दोनो बाहर आ गये.....बाइक पर मैं जान-बूझ कर दोनो पैर एक तरफ करके बैठी.....मैं अपनी तरफ से कोई मौका नही देना चाहती थी.....भाई ने बाइक स्टार्ट करते हुए पुछा ....ठीक से बैठ गई ना.....हा हा ...साला सोच रहा होगा काश मैं दोनो पैर दोनो तरफ करके बैठती.....फिर हम समंदर किनारे पहुचे....थोड़ी देर तक ऐसे ही ठंडी हवओ का मज़ा लेते रहे....वही एक छोटे से रेस्टोरेंट में खाना खाया....फिर भाई ने एक आइस-क्रीम ख़रीदा और मुझे दिया.....



मैं लेकर खाने लगी.....भाई एक तक मुझे देख रहा था....अंजन बनती हुई मैं बोली....क्या है..... भाई मुस्कुराते हुए बोला....कुछ नही....अपने होंठों पर जीभ फेरने लगा..... मैं मुस्कुराते हुए बोली...आइस-क्रीम खाओगे क्या.....उसने मुस्कुराते हुए मेरी और देखा....मैने आँखे नचा कर जीभ निकाल कर दिखा दिया......भाई की हिम्मत बढ़ी.....मेरा हाथ पकड़ आइस-क्रीम थोड़ा सा चाट लिया....मैं बच्चो की तरह उछल कर नाटक करते हुए बोली....उउउ.....मैं नही देती अपना क्यों नही लिया......तेरा झूठा खाने की आदत हो गई है ना.....मैने शरमाने का नाटक किया......हट गंदे.....फिर प्यार से आइस-क्रीम उसके मुँह से लगा दिया.....


RE: Sex Hindi Kahani राबिया का बेहेनचोद भाई - sexstories - 07-01-2017

राबिया का बेहेनचोद भाई--10

. इसी तरह खाते हुए हम टहलने लगे.....फिर भाई ने घर चलने के बारे में पुछा ..... हाए !!! भाई थोड़ा और घूमते है ना.....नही अब रहने दे.....रात काफ़ी हो चुकी है.....किसी दिन और.....प्रॉमिस भाई.....हा प्रॉमिस.....ठीक है भाई फिर कल......ठीक है कल.....बाइक बैलेंस कर भाई बैठा तो बोला....पैर दोनो तरफ करके बैठ ना.....मैने कहा....नही मैं नही बैठ ती....अरी बाइक का बैलेंस अच्छा बनता है.....मैने मन ही मन कहा चल साले सीधा बोला ना लंड का बैलेंस ठीक करना है तुझे...... लगा कर चूंची का मज़ा लेगा, इतना क्यों तड़प रहा पूरी चूंची नंगी कर दूँगी पर थोड़ा इंतेज़ार कर....



मैने कहा...क्या भाईजान आप भी.....कोई देखेगा तो....बिलवजह शक़ करेगा.....अरी शक़ किस बात का.....आप नही जानते....शबनम बता रही थी ऐसे बाय्फ्रेंड के साथ बैठा जाता है....तुम कोई मेरे बाय्फ्रेंड हो......तू और तेरी सहेलियाँ....ऐसे तो कोई भी बैठ सकता है....फिर हमे यहाँ कौन पहचानता है.....नही रहने दो.....मुझे शरम आती है.....ठीक है जैसी तेरी मर्ज़ी कहते हुए उसने बाइक स्टार्ट कर दी.....रास्ते में उसने दो तीन बार ब्रेक लगाया मगर कुछ हुआ नही.....



खैर हम घर वापस आ गये......अगले दिन छुट्टी थी.....थोड़ी देर से उठी....देखा भाई अभी तक सो रहा है.....मैने झटपट सॉफ सफाई की और बाथरूम में जा कर नहाने लगी.....तभी मुझे अहसास हुआ की शायद कोई बाथरूम के दरवाजे के पास खड़ा है....दरवाजे पर नीचे परच्छाई सी बन रही थी....सिवाए भाई के और कौन हो सकता था....मैने सोचा इसको कुछ दिखा दूँ बहुत तड़प रहा है बेचारा.....




समीज़ खोल कर ब्रा उतार कर खूंटी पर टाँग दिया और दरवाजे की तरफ घूम एक झलक अपने कबूतरो का दिखा कर फिर से दरवाजे की तरफ पीठ कर लिया.....मैने सलवार नही खोली.....मैं जानती थी की वो चूत देखने के लिए तड़प रहा होगा......जिस दरार सो वो देखने की कोशिश कर रहा था उसके ठीक उपर एक खूँटी थी....मैने उस पर तौलिया ले कर टाँग दिया......मेरी इस हरकत से भाई की झांट जल गई होगी..... पर कुतियापने में मुझ से शायद ही कोई हरा सकता था......सिवाए अम्मी के.....अपने सुलगते झांट और लंड को लेकर बाहर दरवाजे पर क्या करता चुप-चाप वहा से चला गया.....

दिन में खाना खाया.....फिर मैं बेडरूम में जा कर सो गई.....समझ में नही आ रहा था अब आगे कैसे बढूँ .....भाई तो हिम्मत ही नही दिखा रहा था.....चोरी चुप्पे देखता था मगर डरता था.....आँखे खुली तो देखा...अंधेरा हो गया था.....भाई चाए बना रहा था....हम लोगो ने चाए पिया....फिर भाई बेडरूम में जा कर तैयार होने लगा....कहा जा रहे हो भाई....मार्केट से सामनले आता हूँ....मैने मचलते हुए अदा के साथ पुछा ....



आज कहा घूमने ले जाओगे... भाई एक पल को रुका फिर मुस्कुआरने लगा......हसो मत कल आपने प्रॉमिस किया था.....हा हा तो मैं कहा मना कर रहा हू....कहता हुआ वो चला गया... भाई तुरंत आ गया....आते ही बोला....खाना भी बाहर खाएँगे....तैयार हो जा.....और फिर तैयार होने लगा....मैने आज खूबसूरत सा समीज़ सलवार निकाला.....रेड कलर की समीज़ ब्लॅक कलर का सलवार....उस पर शानदार कशीदा....भाई तुरंत तैयार हो गया....मैं बेड रूम में थी.....मैने समीज़ पहन लिया....भाई ने आवाज़ दी....क्या हुआ तैयार नही हुई...मैं खाली समीज़ में थी....सलवार पहन रही थी.....एक पैर में थोड़ा सा सलवार फंसायें बाहर निकल... इतराते हुए बोली.....आ तो रही हू....

आप भी ना भाई शोर मचाने लगते हो...बिना सलवार के ....समीज़ की साइड से गोरी चमकती टांगे दिख गई....मेरा मकसद पूरा हुआ....भाई वही दीवान पर बैठ इंतेज़ार करने लगा.......मैने आराम से सलवार को पहना फिर....ग्रीन कलर की नाइल पोलिश ली....बाहर आ सोफे पर बैठ.....लगाने लगी....भाई देखने लगा....अच्छा तो था...गुलाबी.....क्यों कर चेंज कर रही है....



ग्रीन नैल्पोलिश आजकल का फैशिोन है भाई.....तुम भी ना......अच्छा....मुझे क्या पता......कल कैसे बोल रहे थे मैं अच्छी लग रही हू.....जब तुम्हे कुछ पता ही नही.....भाई मेरे इस सवाल से शर्मा गया....अच्छा जल्दी कर...कर तो रही हू....वो बारे गौर से देख रहा था....क्या देख रहे हो भाई.....कितने सुंदर है तेरे पैर.....गोरे छोटे ....एकदम सॉफ्ट.....धत ! आप भी ना....अरे लड़कियों के पैर ऐसे ही होते है........आज माल चलेंगे...बहुत बड़ा माल है....सब कुछ है वहा....फिर हम दोनो बाहर आ गये.....



बाइक पार्क कर बहुत देर घूमते रहे....बहुत बड़ा माल था.....लड़के लड़कियां खूब सारे....मौज मस्ती करते घूम रहे थे.....बहुत देर घूमने के बाद एक जगह मॅक-डोनल्ड से आइस-क्रीम के लिए रुके....अचानक एक जाना पहचाना चेहरा नज़र आया....गौर से देखा तो....फ़रज़ाना थी....ऐसे तो मैं नही बोलती मगर....वो एकदम सामने... हाए !!! फर्रू....वो भी रुक गई....हँसते हुए उसने मुझे गले लगाया....वो जीन्स और टी - शर्ट में थी....दुआ- सलाम हुई...

वो बोलने लगी की ऐसे ही कुछ ख़रीदारी करनी थी....तभी देखा उसका भाई दो आइस-क्रीम लिए आया....फ़रज़ाना जल्दी से बोली....अच्छा चलती हू और अपने भाई के साथ चल दी....वो भाई से नही मिलवाना चाहती थी....तभी भाईजान आइस-क्रीम ले आ गये....कौन थी....वो कॉलेज की सहेली है....क्या नाम है....क्यों तुम्हे क्या....मैने शैतानी भरी मुस्कान के साथ पुछा .....खीजने वाले अंदाज में बोला...अरी ऐसे ही पूछ रहा था.....तू तो...अरे तो नाराज़ क्यो हो रहे हो.... फ़रज़ाना है...अपने भाई के साथ ख़रीदारी करने आई थी....भाई चौंकते हुए बोला....


भाई के साथ....हा.....जैसे मैं और तुम....भाई हैरानी से बोला....वो लड़का उसका भाई था.....हा भाई वो उसके बारे भाई है....भाई गर्दन हिलाते बोला....तूने उसका हाथ देखा...मैने कहा....नही मैने गौर नही किया.....क्यों क्या हुआ....जानती है तू वो कहा से आ रही थी....नही... कहा से....वो डिस्को से आ रही थी....अब मेरी बड़ी थी हैरान होने की....डिस्को के बारे में मुझे भी पता था की वहा क्या होता है.....मैने पुछा ....पर आपको कैसे पता....इसलिए तो पूछ रहा हू तूने उसका हाथ देखा क्या...नही ना....उसके हाथ पर मुहर लगी थी....डिस्को में एंट्री के पहले.....गेट पर....एक ठप्पा लगा देते है....मैने कहा....हो सकता है गई होगी....पर इसमे ताज्जुब...भाई प्यार से मेरी आँखो में झँकते बोला....
तुझे पता है वहा क्या होता है...आइस-क्रीम लेते हुए कहा....हा लोग डांस करते.....मौज मस्ती...भाई मुस्कुराते हुए बोला....मेरी बहना तेरी सहेली भाई के साथ डांस करने गई थी क्या.....मैं शर्मा गई.....धत ! भाई के साथ डांस करेगी.....मैं तो सब समझ गई थी मगर झूट का नाटक कर रही थी... हाए !!! साली ये फ़रज़ाना के तो मज़े ही मज़े है है...भाई के साथ डिस्को में.. हाए !!! कितनी लकी है....फिर बोली....अरे हा ये तो मैने सोचा ही नही....भाई मुस्कुराने लगा...मैं थोड़ा झेप गई.....फिर मैने सवाल किया...भाई आप कभी डिस्को गये हो....नही यार....कभी मौका....क्यों भाई.....अरे यार मेरी कोई गर्लफ्रेंड तो है नही....अकेले लड़के को कौन एंट्री देगा...ऐसा क्यों भाई.....वहा कोई लड़का बगैर किसी लड़की के साथ नही जा सकता....समझी.....ऐसा....



हा फ़रज़ाना का भाई अकेले नही जा सकता....तेरी सहेली को ले गया....दोनो मज़े कर के आ गये....धत ! भाई...वो ऐसे ही घूमने गई होगी....चलो छोड़ो हमे क्या....हम दोनो चुप हो गये...कुछ देर ही घूमने के बाद.....भाई रुक गया और अचानक बोला...चलेगी...मैने ताज्जुब से आँखे नाचते पुछा .....कहा....वही जहा तेरी सहेली....डिस्को में...धत ! भाई....क्यों क्या हुआ....हम भी... हाए !!! नही मुझे शर्म आती है....अरे शर्म की क्या बात.....मेरा दिल तो बल्लियों उछल रहा था......अच्छे मकाम पर फर्रू मिल गई....कम से कम अकल तो आई....पर नखड़ा तो ज़रूरी था.....

चल ना रबिया प्लीज़....खाली घूम कर आ जाएँगे....मैने थोड़ा शरमाने का नाटक किया....फिर बोली...पर सलवार कमीज़ में.....तो क्या हुआ......ऐसे ही घूम लेंगे....डांस करने को थोड़ी कह रहा हू.....मैं धीरे से हँसते हुए गाल गुलाबी करते हुए बोली....तुम कल से मेरे पीछे परे हो....कल से....हा और क्या...कल बाइक पर बैठा रहे थे गर्लफ्रेंड की तरह....और आज तो....चलो....भाई समझ गया की मैं तैयार हू.....हम माल की दूसरी तरफ बने डिस्को की और चल दिए....भाई ने समझाया....वहा भाईजान कह कर मत बुला देना... हाए !!!..इतनी समझदार हू भाईजान...मैने भाईजान की कमर में हल्के से चिकोटी काटी...भाई ने मेरा हाथ पकड़ हल्के से दबा दिया.....






मैं भी खुशी से उछल रही थी.....शर्मो-हया और नाज़-नखड़े को थोड़ी देर के लिए अम्मी चुदाने भेज दिया मैने.....पैसे दिए....ठप्पा लगवाया और डिस्को के अंदर चले गये....ओह क्या माहौल था....छोटे शहर में तो सोच भी नही सकता कोई.....तेज म्यूज़िक....हल्की लाइट्स....हर तरफ शोर शराबे और मस्ती का माहौल....डांस फ्लोर पर लड़के -लड़कियां ....एक दूसरे की कमर में हाथ डाले....बार काउंटर पर ग्लास हाथ में पकडे लोग....टेबल पर हसी मज़ाक करते दोस्त....उफफफ्फ़....ऐसा लग रहा था जैसे जन्नत है....कही कोई गम नही....खुलेपन का माहौल....हर कोई मस्ती में डूबा ....



मैं और भाई चुप-चाप एक टेबल पर जा कर बैठ गये...हल्के हल्के मुस्कुराते हुए हमने एक दूसरे को देखा....मैने थोड़ा शरमाने का नाटक किया....भाई बोला....कितने मज़े का माहौल है....तुझे कैसा... हाए !!! भाई मुझे तो शर्म आ रही है....फिर जान-बूझ कर बोला... हाए !!! भाई कितने बेशर्म है सब....क्या मतलब.. हाए !!! देखो कैसे सब एक दूसरे की गले में बाहें डाले... हाए !!! मुझे तो शर्म आ रही है....अरी तू भी ना...ये बड़ा शहर है....फिर सब बाय्फ्रेंड-गर्लफ्रेंड है....या मियाँ-बीबी....या फिर हमारी तरह......मौज मस्ती आख़िर ऐसे ही तो होती है....हमारी तरह.....और क्या....



बहुत सारे इनमे से भाई-बहन होंगे.....मज़ा करने....धत ! कहते हुए मैने अपने गाल लाल कर लिए....भाई ने वेटर को बुला कुछ ड्रिंक्स मंगाए.....और कुछ खाने के लिए....भाई पता नही क्या पी रहा था....मैं ऑरेंज जूस ले रही थी.....थोड़ी देर बाद मेरे हाथ पर हाथ रख कर बोला....रबिया एक बात बोलू....क्या भाई....लोग डांस करते हुए कितने अच्छे लग रहे है...है ना....हा भाई...साले सीधा बोल ना.....डांस करने के अरमान जाग रहे है.....बहुत अच्छा लग रहा है देख कर....तेरा दिल नही करता डांस करने.. हाए !!! धत !....सच बता ना रबिया... हाए !!! नही...मैं नही जानती....अरे बता ना... हाए !!! नही छोड़ो ....आप का दिल करता है क्या....



भाई एक पल चुप रहा फिर बोला... हाए !!! मेरा तो बहुत दिल करता है....डांस करने का... हाए !!! तो जाओ कर लो...मैं किसी से नही कहूँगी... हाए !!! पर अकेले....क्यों अकेले डांस करने पर रोकते है क्या....अरे नही ये बात नही....अकेले डांस करता मैं गधा नही लगूंगा....सब क्या सोचेंगे....गधा तो तू है ही...चूतिये अकल से भी और लंड से भी....सीधा बोल ना तेरे साथ डांस करनी है....मैने कहा....अब डांस करने के लिए पारटनेर कहा मिलेगी....छोड़ो फिर कभी....फिर कभी कौन सा मिल जाएगी....ये रबिया प्लीज़ नाराज़ मत होना...तू चल ना....तेरा भी दिल तो करता होगा...प्लीज़...

तूने आज तक नही देखा ना....नही भाई....देख लेना कैसा होता है... हाए !!! नही भाई लोग क्या सोचेंगे..... यहाँ कौन है हमे देखने वाला.....पर भाई हम दोनो भाई-बेहन है.... अरे लोगो को क्या पता हम भाई बेहन....हमारी पेशानी पर लिखा है क्या..... नही भाई किसी को भी शक़ हो सकता है...अरे तेरी सहेली भी तो अपने भाई.....उसका पता नही...पर मुझे डर लग रहा है....तेरा डर बिलवाजह है....कही डिस्को वाले पूंछे की कौन है तो क्या......अव्वल तो पूंछेगे नही....अगर पुछा भी तो बोल देंगे... हाए !!! क्या बोलूँगी....शौहर....मैने शरारत से हँसते हुए कहा....अरे नमकूल....बाय्फ्रेंड नही बोल सकती क्या.... हाए !!! नही.....भाई को बाय्फ्रेंड....तेरी सहेली भी तो यही बोल के गई होगी.....

चल ना रबिया प्लीज़....खाली घूम कर आ जाएँगे....मैने थोड़ा शरमाने का नाटक किया....फिर बोली...पर सलवार कमीज़ में.....तो क्या हुआ......ऐसे ही घूम लेंगे....डांस करने को थोड़ी कह रहा हू.....मैं धीरे से हँसते हुए गाल गुलाबी करते हुए बोली....तुम कल से मेरे पीछे परे हो....कल से....हा और क्या...कल बाइक पर बैठा रहे थे गर्लफ्रेंड की तरह....और आज तो....चलो....भाई समझ गया की मैं तैयार हू.....हम माल की दूसरी तरफ बने डिस्को की और चल दिए....भाई ने समझाया....वहा भाईजान कह कर मत बुला देना... हाए !!!..इतनी समझदार हू भाईजान...मैने भाईजान की कमर में हल्के से चिकोटी काटी...भाई ने मेरा हाथ पकड़ हल्के से दबा दिया.....






मैं भी खुशी से उछल रही थी.....शर्मो-हया और नाज़-नखड़े को थोड़ी देर के लिए अम्मी चुदाने भेज दिया मैने.....पैसे दिए....ठप्पा लगवाया और डिस्को के अंदर चले गये....ओह क्या माहौल था....छोटे शहर में तो सोच भी नही सकता कोई.....तेज म्यूज़िक....हल्की लाइट्स....हर तरफ शोर शराबे और मस्ती का माहौल....डांस फ्लोर पर लड़के -लड़कियां ....एक दूसरे की कमर में हाथ डाले....बार काउंटर पर ग्लास हाथ में पकडे लोग....टेबल पर हसी मज़ाक करते दोस्त....उफफफ्फ़....ऐसा लग रहा था जैसे जन्नत है....कही कोई गम नही....खुलेपन का माहौल....हर कोई मस्ती में डूबा ....



मैं और भाई चुप-चाप एक टेबल पर जा कर बैठ गये...हल्के हल्के मुस्कुराते हुए हमने एक दूसरे को देखा....मैने थोड़ा शरमाने का नाटक किया....भाई बोला....कितने मज़े का माहौल है....तुझे कैसा... हाए !!! भाई मुझे तो शर्म आ रही है....फिर जान-बूझ कर बोला... हाए !!! भाई कितने बेशर्म है सब....क्या मतलब.. हाए !!! देखो कैसे सब एक दूसरे की गले में बाहें डाले... हाए !!! मुझे तो शर्म आ रही है....अरी तू भी ना...ये बड़ा शहर है....फिर सब बाय्फ्रेंड-गर्लफ्रेंड है....या मियाँ-बीबी....या फिर हमारी तरह......मौज मस्ती आख़िर ऐसे ही तो होती है....हमारी तरह.....और क्या....



बहुत सारे इनमे से भाई-बहन होंगे.....मज़ा करने....धत ! कहते हुए मैने अपने गाल लाल कर लिए....भाई ने वेटर को बुला कुछ ड्रिंक्स मंगाए.....और कुछ खाने के लिए....भाई पता नही क्या पी रहा था....मैं ऑरेंज जूस ले रही थी.....थोड़ी देर बाद मेरे हाथ पर हाथ रख कर बोला....रबिया एक बात बोलू....क्या भाई....लोग डांस करते हुए कितने अच्छे लग रहे है...है ना....हा भाई...साले सीधा बोल ना.....डांस करने के अरमान जाग रहे है.....बहुत अच्छा लग रहा है देख कर....तेरा दिल नही करता डांस करने.. हाए !!! धत !....सच बता ना रबिया... हाए !!! नही...मैं नही जानती....अरे बता ना... हाए !!! नही छोड़ो ....आप का दिल करता है क्या....



भाई एक पल चुप रहा फिर बोला... हाए !!! मेरा तो बहुत दिल करता है....डांस करने का... हाए !!! तो जाओ कर लो...मैं किसी से नही कहूँगी... हाए !!! पर अकेले....क्यों अकेले डांस करने पर रोकते है क्या....अरे नही ये बात नही....अकेले डांस करता मैं गधा नही लगूंगा....सब क्या सोचेंगे....गधा तो तू है ही...चूतिये अकल से भी और लंड से भी....सीधा बोल ना तेरे साथ डांस करनी है....मैने कहा....अब डांस करने के लिए पारटनेर कहा मिलेगी....छोड़ो फिर कभी....फिर कभी कौन सा मिल जाएगी....ये रबिया प्लीज़ नाराज़ मत होना...तू चल ना....तेरा भी दिल तो करता होगा...प्लीज़...

हाए !!!.... भाई आप भी ना.. हाए !!!....कैसी-कैसी बाते करते हो....मैं आपकी बहन हू.....मैने नाराज़ होने का दिखावा किया... हाए !!! रबिया तू भी ना...मैं कब कह रहा हू तू मेरी बहन नही.....मैं तो बस एक छोटी सी दरखास्त कर रहा हू.....मान लेगी तो.....भाई का चेहरा उतर गया...नही भाई....अच्छा लगेगा क्या....भाई-बेहन चिपक कर डांस करते....मैने चिपक जुमले पर ज़ोर देते हुए कहा...ओह हो मैं कब कह रहा हू हम चिपक कर....अलग-अलग खड़े रह कर....वो कैसे होगा...सब तो एक-दूसरे के गले में बाहें डाल कर....वो तू मेरे उपर छोड़ ना....



ही पता नही तुम कैसे कह रहे हो मेरी समझ में तो नही आ रहा....फिर हम दोनो भाई-बेहन...तू भी ना....तेरी सहेली भी तो आई थी....फिर यहाँ कौन पहचानता है की हम भाई-बेहन... हाए !!! फिर भी....आज भर के लिए मेरी गर्लफ्रेंड बन जा....धत !....बदमाश... हाए !!! गर्लफ्रेंड... खाली आज भर के लिए....बेशरम भाई... हाए !!! ज़रा भी शरम नही... हाए !!! प्लीज़ रबिया....थोड़ा करेंगे...बस थोड़ा सा.... हाए !!! अल्लाह....अफ....मैने अपना चेहरा अपने हथेली से धक लिया....थोड़ी देर तक सोचने का नाटक करती रही....भाई प्लीज़ प्लीज़ किए जा रहा था....फिर हथेली हटाई और मुस्कुराती हुई नकली दाँत पीसने का नाटक करती भाई की कंधे पर एक मुक्का मारा...बदमाश....चलो अम्मी से शिकायत करूँगी आज....कहती हुई धीरे से उठ गई...भाई को इशारा काफ़ी था....



हम दोनो डांस फ्लोर पर....मैं धीरे से बोली... हाए !!! देखो तो कितना ख़राब लग रहा है....मैं इस सलवार समीज़ में.....भाई मेरा हाथ पकड़ अपने सामने करता मेरे एक हाथ पकड़ अपने कंधे पर रखता बोला....तुझे पता है तू यहाँ की सारी लड़कियों से खूबसूरत दिख रही है....धत ! ...दूसरे हाथ से उसके पेट पर हल्की चिकोटी ली....भाई ने अपना एक हाथ मेरी कमर में डाल दिया....तू देख ना अपने चारो तरफ सब तुझे कैसे देख रहे है....वो इसलिए देख रहे होंगे क्योंकि मैं सलवार समीज़ में....अरी नही रे...देख वो लड़की कैसे अपने बॉय-फ्रेंड का मुँह मोड़ रही है....साले कामीने....



मैने भाई का दिमाग़ दूसरी तरफ मोड़ने के लिए कहा.....अरे छोड़ो ना....फिर तुम क्यों इधर उधर देख रहे हो.....मुझे देखो....भाई के चेहरे पर मुस्कान आ गई....और मेरी आँखो में देखने लगा.....मैने शर्मा कर नज़रे झुका ली....भाई सरगोशी करते बोला.....काश सच में तू मेरी गर्लफ्रेंड होती....धत !....गंदे....कहते हुए उसकी छाती पर हल्का सा मारा....तभी म्यूज़िक चेंज हुआ....सॉफ्ट म्यूज़िक.....कोई लव सॉंग....लाइट और कम हो गई लगभग अंधेरा....हम धीरे धीरे डांस कर रहे थे....भाई का हाथ धीरे धीरे मेरी कमर को सहला रहा था....म्यूज़िक और अंधेरे ने अपना असर दिखाया.....हम दोनो धीरे धीरे एक दूसरे के करीब आते जा रहे थे....

पता ही नही चला कब मैं और भाई एक दूसरे से चिपक चुके थे....मेरा सिर भाई के कंधे पर था.....भाई आराम से मेरी पीठ और कमर को सहला रहा था....मेरी चूंचीयाँ भाई की सीने से चिपकी हुई थी.....भाई का हाथ कमर से होता हुआ धीरे-धीरे नीचे की तरफ बढ़ रहा था....मेरी चूतड़ों के उपरी हिस्से पर....तेज चलती गर्म साँसे....मेरी कमर भाई की पेट से चिपक रही...मुझे अहसास हो रहा था...एक सख़्त चीज़ का....एक गर्म चीज़ का....जो की मेरी पेट के निचले हिस्से पर चुभ रहा था....वो चीज़ मेरी तो नही थी....जो मुझे से चिपका था उसकी थी....भाई की थी...ये उसके सख़्त और गर्म हो चुके लंड की चुभन थी....सारी शर्मों हया को हमने ताख पर रख दिया था....

मेरी साँसे तेज चल रही थी.....दोनो भाई-बहन एक दूसरे की बाहों में....एक दूसरे से चिपके हुए....उफ़फ्फ़....मेरी चूत पसिजने लगी....उसका पसीना निकल रहा था....भाई का लंड मेरी चूत के उपरी हिस्से पर रगड़ खा रहा था....मेरी कमर अपने आप उसकी कमर से छिपकने की कोशिश कर रही थी.....मेरा दिल कर रहा था...समा जाऊं उसके बदन में...चिपक जाऊं....भाई मुझे कस कर दबा ले अपनी बाहों में....मेरी हड्डियों को कड़का दे....चूर चूर कर दे....यही इसी डांस फ्लोर पर मेरी बुर में अपना सख़्त लंड डाल दे....हम दोनो में से कोई बात नही कर रहा था...बात करने की ज़रूरत क्या थी .....लंड और चूत आपस में सरगोशियाँ कर रहे थे.....पर तभी इस सरगोशिमें खलल पर गई....म्यूज़िक बंद हो गया...लाइट जल उठी.. हाए !!! करते हुए मैने अपने आप को भाई से अलग किया....आसमान से सीधा ज़मीन पर लाकर पटक दिया....



हम दोनो चुप थे...कोई एक दूसरे से नज़र नही मिला रहा था....भाई ने धीरे से मेरी कलाई पकड़ी और हम टेबल पर चले गये....वहा खाना भी मिलता था...उसने ऑर्डर दे दिया....हम चुप चाप खाने लगे.....खाते-खाते अचानक भाई बोला....सॉरी रबिया....मैने शरमाने का नाटक करते हुए कहा...धत ! चुप रहिए....मेरे इतना कहने से ही भाई को पता चल गया की हम दोनो के चिपक कर डांस करने का मुझे भी अहसास है और....मैं इसका बुरा नही मान रही बल्कि...शर्मा कर खुद के शामिल होने की गवाही दे रही हू....भाई ने हँसते हुए कहा....यार पता ही नही लगा....गाल गुलाबी करते मैने कहा...अफ हो भाई....चुप रहिए ना जो हुआ सो हुआ....फिर हमने चुप चाप खाना ख़तम किया...मेरी चूत की फांकें अभी भी फड़फड़ा रही थी....दिल जोरो से धड़क रहा था....आँखे अभी भी गुलाबी थी....चूंची के निपल अभी भी खड़े थे.....थोड़ी देर बाद हम दोनो नॉर्मल हो गये...


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