Hindi Porn Stories हिन्दी सेक्सी कहानियाँ - Printable Version

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RE: Hindi Porn Stories हिन्दी सेक्सी कहानियाँ - sexstories - 08-20-2017

अब तो माया मैडम का सर्वेंट क्वार्टर तय जगह बन गई थी. हर दूसरे दिन शाम को दो या तीन वहाँ आ जाती और मैं एक के बाद एक सभी को बारी बारी से अपनी पूरी मेहनत से उनकी प्यास को बुझाता. कभी कभी जब माया मैडम के पति रात के ड्यूटी पते तो शाम से देर रात तक यह कार्यक्रम चलता रहता. सीमा माया मैडम की पड़ोसन थी इसलिए सीमा मैडम कई बार रात के बारह बारह बजे तक रुक जाती. वो अपने पति से यह कहती कि माया अकेली है. इसलिए वो उसके यहाँ जा रही है. इस तरह की रात मेरे लिए जन्नत हो जाती. एक ही बिस्तर पर माया और सीमा मैडम मेरा साथ होती और मुझे लगातार हर तरह से इस्तेमाल करती.
एक दिन की घटना बताये बगैर ये कहानी खत्म नहीं कर सकता. उस दिन मैं माया मैडम के उसी क्वार्टर में था. माया मैडम के साथ चित्रा मैडम भी थी. चित्रा मैडम कोटि थी इसलिए हम तीनों बहुत ही मुश्किल से उस बिस्तर पर आ पा रहे थे. मैं लगातार दोनों के बीच फंसा हुआ एक एक की इच्छा उरी कर रहा था. तभी माया मैडम के पति आ गए. माया मैडम तुरंत कपडे पहनकर चली गई. अब मैं और चित्रा मैडम उस कमरे में रह गए. आवाजों से यह पता चल गया कि उनके पति के साथ और भी तीन चार लोग है. अब हम बाहर जा ही नहीं सकते थे. क्यूंकि सभी बगीचे में बैठे थे. दोनों रास्ते बगीचे से ही होकर बाहर जाते थे. मैं बुरी तरह गहरा गया. लेकिन चित्रा मैडम ने मेरा हौसला बढाया. चित्रा मैडम ने मुझे अपने से लिपटा लिया. चित्रा मैडम ने मुझे लगातार आजमाया. मैंने अपने लिंग को उनके जननांग में आगे से ; पीछे से, कभी खड़े होकर तो कभी उनके ऊपर बैठ कर ; हर तरह से उनके जनांग को भिगोये रखा. कि कभी ऐसा अगता जैसे चित्रा मैडम का जननांग एकदम ढीला और बड़ा हो गया है. मैं थोडा भी हिलता तो मेरा लिंग बाहर आ जाता.
शायद किसी को भी विश्वास नहीं होगा. उस दिन मैंने चित्रा मैडम के जननांग में मेरा लिंग लगातार दो घंटों तक रखा था. बीच बीच में एकाध मिनट के लिए निकालता और फिर डाल देता. चित्रा मैडम मेरी हिम्मत से बहुत खुश हो गई. बाहर से आवाजें अब भी आ रही थी. अब हम दोनों ही थक चुके थे. हम दोनों को नींद आ गई. मेरा लिंग अभी भी चित्रा मैडम के जनांग में था और उसी तरह हम दोनों सो गए. जब वे लोग चले गए और माया के पति उन्हें छोड़ने गए तब माया अन्दर आई. उन्होंने जब हमें इस हालत में सोते देखा तो उन्हें बड़ा अच्छा लगा. उन्होंने हमें जगाया और हम अपने अपने घर लौट आये.
इस घटना के बाद अब करीब सात महीने बीत चुके हैं. आज भी मेरा यह मसाज और संभोग का काम बिना किसी रोक टोक के जारी है. मेरी क्लब कि तनख्वाह तीन हजार है और मुझे इन पाँचों से कभी चार तो कभी कभी छह हजार तक मिल जाता है. मैं मेरी जन्नत में बहुत खुस हूँ.


RE: Hindi Porn Stories हिन्दी सेक्सी कहानियाँ - sexstories - 08-20-2017

चाची के साथ होटल में मज़े किये
मेरा नाम रवि है. बात उन दिनों की है जब मेरी उम्र 19 साल की थी और मै इंजीनियरिंग के पहले साल में बंगलौर में पढ़ रहा था. मै बनारस का रहने वाला हूँ. मेरे सेमेस्टर के एक्जाम समाप्त हो गए थे. और कुछ दिनों की छुट्टी के लिए घर आया था. मेरा घर संयुक्त परिवार का है. मेरे परिवार के अलावा मेरे चाचा एवं चाची भी साथ में ही रहते थे. मेरे चाचा पेशे से हार्डवेयर के थोक विक्रेता थे. उन्होंने काफी धन कमाया रखा था उन्होंने. उनकी शादी को सात साल हो गए थे लेकिन अभी तक कोई संतान नहीं हुई थी. चाची की उम्र 28 साल की थी. वो बनारस जिले के ही एक गाँव की थी. थी तो देहाती लेकिन देखने में मस्त थी. उनकी जवानी पुरे शवाब पर थी. झक गोरा बदन और कटीले नैन नक्श और गदराये बदन की मालकिन थी. वो लोग ऊपर के मंजिल में रहते थे. जब चाचा दूकान और मेरे पापा अपने कार्यालय चले जाते थे तो मै और चाची दिन भर ऊपर बैठ कर गप्पें हाकां करते थे. चाची का नाम मोना था. सच कहूँ तो वो मुझे अपना दोस्त मानती थी. वो मेरे सामने बड़े ही सहज भाव से रहती थी. अपने कपडे लत्ते भी मेरे सामने ठीक से नहीं पहनती थी. उनकी चूची की आधी दरार हमेशा दिखती रहती थी. कभी कभी तो सेक्स की बात भी कर डालती थी. जब भी मुझे अकेली पाती थी तो हमेशा डबल मीनिंग बात बोलती थी. जैसे बछडा भी दूध देता है. तेरा डंडा कितना बड़ा है? तुझे स्पेशल दवा की जरुरत है. आदी . दिन भर मेरे कालेज और बंगलौर के किस्से सुनते रहती थी. जब मेरे बंगलौर जाने के छः दिन शेष रह गए थे तभी एक दिन चाची ने कहा – वो लोग भी बंगलौर घुमने जाना चाहते हैं.

मैंने कहा – हाँ क्यों नहीं. आप दोनों (चाचा-चाची) मेरे साथ ही अगले शनिवार को चलिए. मै आप दोनों को वहां की पूरी सैर करवा दूंगा.

चाची ने अपना प्लान चाचा को बताया. चाचा तुरंत मान गए. मैंने उसी समय इन्टरनेट से हम तीनो का टिकट एसी फर्स्ट क्लास में कटवाया. अगले शनिवार को हमारी ट्रेन थी. अगले शनिवार को सुबह हम तीनो ट्रेन से बंगलौर के लिए रवाना हुए. अगले दिन रविवार को शाम सात बजे हम सभी बंगलौर पहुच चुके थे. मैंने उनको एक बढ़िया सा होटल में कमरा दिला दिया. उसके बाद मै वापस अपने होस्टल आ गया. होस्टल आने पर पता चला कि कल से कालेज के क्लर्क लोग अपनी वेतन बढाने के मांग को ले कर अनिश्चित कालीन हड़ताल पर जा रहे हैं. और इस दौरान कालेज बंद रहेगा. मेरे अधिकाँश मित्रों को ये बात पता चल गयी थी. इसलिए सिर्फ 25 – 30 प्रतिशत छात्र ही कालेज आये थे.

मै अगले दिन करीब 11 बजे अपने चाचा के कमरे पर गया.वहां दोनों नाश्ता कर रहे थे. चाची ने मेरे लिए भी नाश्ता लगा दिया. मैंने देखा कि चाचा कुछ परेशान हैं. पूछने पर पता चला कि जिस कम्पनी का उन्होंने फ्रेंचाइजी ले रखा है उस कम्पनी ने दुबई में जबरदस्त सेल ऑफ़र किया है . अब चाचा की परेशानी ये थी कि अगर वो वापस चाची को बनारस छोड़ने जाते और वहां से दुबई जाते तो तक तक सेल समाप्त हो जाती. और अगर साथ में ले कर दुबई जा नही सकते थे क्यों कि चाची का कोई पासपोर्ट वीजा था ही नहीं.

मैंने कहा – अगर आप दुबई जाना चाहते हैं तो आप चले जाएँ. क्यों कि मेरा कालेज अभी एक साप्ताह बंद रह सकता है. मै चाची को या तो बनारस पहुंचा दूंगा या फिर आपके वापस आने तक यहीं रहेगी. आप दुबई से यहाँ आ जाना और फिर घूम फिर कर चाची के साथ वापस बनारस चले जाना.

चाचा को मेरा सुझाव पसंद आया.

चाची ने भी कहा – हां जी, आप बेफिक्र हो कर जाइए. और वापस यहीं आइयेगा . तब तक रवि मुझे बंगलौर घुमा देगा. आपके साथ मै दोबारा घूम कर वापस आपके साथ ही बनारस चले जाऊंगी. चाचा को चाची का ये सुझाव भी पसंद आया.

लैपटॉप पर इन्टरनेट खोल कर देखा तो उसी दिन के दो बजे की फ्लाईट में सीट खाली थी. चाचा ने तुरंत सीट बुक की और हम तीनो एयरपोर्ट की और निकल पड़े. दो बजे चाचा की फ्लाईट ने दुबई की राह पकड़ी और मैंने एवं चाची ने बंगलौर बाज़ार की. चाची के साथ लंच किया. घूमते घूमते हम मल्टीप्लेक्स आ गए. शाम के सात बज गए थे. चाची ने कहा – काफी महीनो से मल्टीप्लेक्स में सिनेमा नहीं देखा. आज देखूंगी.

मैंने देखा कि कोई नई पिक्चर आयी थी इसलिए सारी टिकट बिक चुकी थी. उसके किसी हाल में कोई एडल्ट टाइप की इंग्लिश पिक्चर की हिंदी वर्सन लगी हुई है. फिल्म चार सप्ताह से चल रही थी इसलिए अब उसमे कोई भीड़ नही थी. मैंने 2 टिकट सबसे कोने का लिया और हाल के अन्दर चला गया. मुझे सबसे ऊपर की कतार वाली सीट दी गयी थी. और उस पूरी कतार में दुसरा कोई भी नही था. हमारी कतार के पीछे सिर्फ दीवार थी. मैंने जान बुझ कर ऐसी सीट मांगी थी. मेरा आगे वाले तीन कतार के बाद कोने पर एक लड़का और लड़की अकेले थे. उस कतार में भी उसके अलावे कोई नही था. उसके अगले कतार में दुसरे कोने पर एक और जोड़ा था. इस तरह से उस समय 300 दर्शकों की क्षमता वाले हाल में सिर्फ 20 – 22 दर्शक रहे होंगे. पता नही इतने कम दर्शकों के लिए फिल्म क्यों लगा रखा था. वो मेरे दाहिने और बैठी. चाची के दाहिने दिवार थी. तुरंत ही फिल्म चालू हो गयी.



RE: Hindi Porn Stories हिन्दी सेक्सी कहानियाँ - sexstories - 08-20-2017

फिल्म शुरू होने के तुरंत बाद ही मेरे बाद के चौथे कतार में बैठे लड़के एवं लड़की ने एक दुसरे के होठों को किस करना चालू कर दिया. हालांकि बंगलोरे के सिनेमा घरों में इस तरह के सीन आम बात हैं. हर शो में कुछ लड़के लड़की सिर्फ इसलिए ही आते हैं.

चाची ने उस जोड़े की तरफ मुझे इशारा कर के कहा – हाय देख तो रवि. कैसे एक दुसरे खुलेआम को चूस रहे हैं .

मैंने कहा – चाची, यहाँ आधे से अधिक सिर्फ इसलिए ही आते हैं. सिनेमा हाल ऐसे जगह के लिए बेस्ट है. तू उस कोने पर बैठे उस जोड़े को तो देख. वो भी वही काम कर रहा है. अभी तो सिर्फ एक दुसरे को किस कर रहे हैं ना. आगे देखना क्या क्या करते हैं. तू ध्यान मत दे इन सब पर. सब मस्ती करते हैं. यही तो लाइफ है.

चाची – तुने भी कभी मस्ती की या नहीं इस तरह से सिनेमा हाल में.

मैंने कहा – अभी तक तो नहीं की. लेकिन अब के बाद पता नहीं.

तुरंत ही फिल्म में सेक्सी सीन आने शुरू हो गए. मेरी चाची ने मेरे कान में फुसफुसा कर कहा – हाय राम, जरा देखो तो ये कैसी सिनेमा है.

मैंने कहा – चाची, ये बंगलौर है. यहाँ सब इसी तरह की फिल्मे रहती है. अब देखो चुपचाप आराम से . ऐसी फिल्मो के मज़े लो. बनारस में ये सब देखने को नहीं मिलेगी.

वो पूरी फिल्म सेक्स पर ही आधारित थी. मेरी चाची अब गरम हो रही थी. वो गरम गरम साँसे फेंक रही थी. उसका बदन ऐठ रहा था. शायद वो पहली बार किसी हाल में एडल्ट फिल्म देख रही थी. मैंने पूछा – क्यों चाची? पहले कभी देखी है ऐसी मस्त फिल्म?

चाची – नहीं रे. कभी नही देखी.

मैंने धीरे धीरे अपना दाहिना हाथ उनके पीछे से ले जा कर उनके कंधे पर रख दिया. मैंने देखा कि चाची अपने हाथ से अपने चूत को साड़ी के ऊपर से सहला रही है. शायद सेक्सी सीन देख कर उनकी चूत गीली हो रही थी. मेरा भी लंड खड़ा हो गया था. मैंने भी अपना बायाँ हाथ अपने लंड पर रख दिया. मैंने धीरे धीरे चाची के पीठ पर दाहिना हाथ फेरा. उसने कुछ नही कहा . वो अपनी चूत को जोर जोर से रगड़ रही थी. मैंने उनकी पीठ पर से हाथ फेरना छोड़ दाहिने हाथ से उनके गले को लपेटा और अपनी तरफ उसे खींचते हुए लाया. चाची मेरी तरफ झुक गयी.

मैंने पूछा- क्यों चाची, मज़ा आ रहा है फिल्म देखने में?

चाची ने शर्माते हुए कहा – धत ! मुझे तो बड़ी शर्म आ रही है.

मैंने कहा – क्यों ? इसमें शर्माना कैसा? तुम और चाचा तो ऐसा करते होंगे न? तेरे एक हाथ जहाँ हैं न उस से तो लगता है कि मज़े आ रहे हैं तुझे.

चाची – हाय राम, बड़ा बेशरम हो गया है तू रे बंगलौर में रह कर. बड़ा देखता है यहाँ – वहां कि कहाँ हाथ हैं. कहाँ नहीं.

मैंने चाची के कानो को अपने मुह के पास लाया और कहा – जानती हो चाची? ऐसी फिल्मे देख कर मुझे भी कुछ कुछ होने लगता है.

चाची ने अपने होठ को मेरे होठो के पास लगभग सटाते हुए कहा – क्या होने लगता है?

मैंने अपने लंड को घसते हुए कहा – वही, जो तुझे हो रहा है न. मन करता है कि यहीं निकाल दूँ.

चाची – सिनेमा हाल में निकालते हो क्या?

मैंने – कई बार निकाला है. आज तू है इसलिए रुक गया हूँ.

चाची – आज यहाँ मत निकाल. बाद में निकाल लेना.

थोड़ी देर में फिल्म की नायिका ने अपनी चूची मसलवा रही थी. हम दोनों और गर्म हो गए. तो मैंने चाची के कान में अपने होठ सटा कर कहा – देख चाची, साली के चूची क्या मस्त है. नहीं?


RE: Hindi Porn Stories हिन्दी सेक्सी कहानियाँ - sexstories - 08-20-2017

चाची – ऐसी तो सब की होती है.

मैंने – तेरी है क्या ऐसी चूची?

चाची – और नहीं तो क्या?

मैंने – तेरी चूची छू कर देखूं क्या ?

चाची – हाँ, छू कर देख ले.

मैंने अपना दाहिना हाथ से उनके चूची को पकड़ लिया और दबाने लगा. उसने अपना सर मेरे कंधे पर रख दिया और आराम से अपने चूची को दबवाने लगी. मैंने धीरे धीरे अपना दाहिना हाथ उनके ब्लाउज के अन्दर डाल दिया. फिर ब्रा के अन्दर हाथ डाल कर उनका बड़े बड़े चुचीयों को मसलने लगा. वो मस्त हुई जा रही थी.
मैंने – अपनी ब्लाउज खोल दे न. तब मज़े से दबाऊंगा.

उसने कहा – यहाँ?

मैंने कहा और नहीं तो क्या? साडी को अपने चूची से ढके रहना. यहाँ कोई नहीं देखने वाला.

वो भी गरम हो चुकी थी. उसने ब्लाउज खोल दिया. लगे हाथ उसने अपना ब्रा भी खोल दिया. और अपने नंगी चूची को अपनी साड़ी से ढक लिया. मैंने मज़े ले ले कर उसके नंगी चूची को सिनेमा हाल में ही दबाना चालू कर दिया.

मै जो चाहता था वो मुझे करने दे रही थी. मुझे पूरी आजादी दे रखी थी. थी. मैंने अपने बाएं हाथ से उनके बाएं हाथ को पकड़ा और उसके हाथ को अपने लंड पर रख दिया.

और धीरे से कहा- देखो न. कितना खड़ा हो गया है. चाची ने मेरे लंड को जींस के ऊपर से दबाना चालू कर दिया.

अब मैंने देख लिया कि चाची पूरी तरह से गर्म है तो मैंने अपना हाथ उनके ब्लाउज से निकाला और उसके पेट पर ले जा कर नाभी को सहलाने लगा. धीरे धीरे मैं अपने हाथ को नुकीला बनाया और नाभी के नीचे उनके साड़ी के अन्दर डाल दिया. चाची थोड़ी चौड़ी हो गयी जिस से मुझे हाथ और नीचे ले जाने में सहूलियत हो सके. मैंने अपना हाथ और नीचे किया तो उनकी पेंटी मिल गयी. मैंने उनकी पेंटी में हाथ डाला और उनके चूत पर हाथ ले गया. ओह क्या चूत थे. एक दम घने बाल. पूरी तरह से चिपचिपी हो गयी थी. मैंने काफी देर तक उनकी चूत को सहलाता रहा. और वो मेरे लंड को दबा रही थी. मैंने अपने दाहिने हाथ की एक ऊँगली उनके चूत के अन्दर घुसा दी. वो पागल सी हो गयी.

उसने आस पास देखा तो कोई भी हम लोग के आस पास नहीं था. उसने अपनी साड़ी को नीचे से उठाया और जांघ के ऊपर तक ले आयी. फिर मेरे हाथ को साड़ी के ऊपर से हटा कर नीचे से खुले हुए रास्ते से ला कर अपनी चूत पर रख दी. और बोली – अब आराम से कर, जो करना है.

अब मै उसके चूत को आराम से छू रहा था. उसने अपनी पेंटी को नीचे सरका दिया था. मैंने उसकी चूत में उंगली डालनी शुरू की तो उसने अपनी चूत और चौड़ी कर ली.

उसने मेरे कान में कहा – तू भी अपनी जींस की पेंट खोल ना. मै भी तेरी सहलाऊं .

मैंने जींस का चेन खोल दिया. लंड किसी राड की तरह खड़ा था. चाची ने बिना किसी हिचक के मेरे लंड को पकड़ा और सहलाने लगी . मै भी उसकी चूत में अपनी उंगली डाल कर अन्दर बाहर करने लगा. वो सिसकारी भर रही थी. मेरा लंड भी एकदम चिपचिपा हो गया था.

मैंने कहा – चाची, अब बर्दाश्त नहीं होता. अब मुझे मुठ मार कर माल निकालना ही पडेगा.

चाची – आज मै मार देती हूँ तेरी मुठ. मुझसे मुठ मरवाएगा?

मैंने कहा – तुझे आता है लंड का मुठ मारना ?

चाची – मुझे क्या नही आता? तेरे चाचा का लगभग हर रात को मुठ मारती हूँ. सिर्फ हाथ से ही नही…किसी और से भी..

मैंने कहा – किसी और से कैसे?

चाची – तुझे नही पता कि लंड का मुठ मारने में हाथ के अलावा और किस चीज का इस्तेमाल होता है?

मैंने कहा – पता है मुझे. मुंह से ना.

चाची – तुझे तो सब पता है.

मैंने कहाँ – तू चाचा का लंड अपने मुंह में ले कर चूसती है?

चाची – हाँ रे, बड़ा मजा आता है मुझे और उनको.

मैंने कहा – तू चाचा का माल कभी पी है?

चाची – बहुत बार. एकदम नमकीन मक्खन की तरह लगता है.

मैंने- तू तो बहुत एक्सपर्ट है. मेरी भी मुठ मार दे ना आज. अपने हाथों से ही सही.


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चाची ने मेरे लंड को तेजी से ऊपर नीचे करना शुरू कर दिया. सचमुच काफी एक्सपर्ट थी वो. चाची सिनेमा हाल के अँधेरे में मेरा मुठ मारने लगी. पहली बार कोई मेरा मुठ मार रही थी. मै ज्यादा देर बर्दास्त नहीं कर पाया. धीरे से बोला – हाय चाची, मेरा निकलने वाला है. चाची ने तुरन अपने साड़ी का पल्लू मेरे लंड पर लपेटा. सारा माल मैंने चाची के साड़ी में ही गिरा दिया.

फिर मैंने चाची के चूत में उंगली अन्दर बाहर करने लगा. चाची भी एडल्ट फिल्म की गर्मी बर्दाश्त नहीं कर पायी. उनका माल भी निकलने लगा. उसने तुरंत अपने चूत में से मेरी ऊँगली निकाली और अपने साड़ी के पल्लू में अपना माल पोंछ डाला.

2 मिनट बाद अचानक बोली – रवि, चलो यहाँ से, अपने होटल के कमरे में.

मैंने कहा – क्यों? अभी तो फिल्म ख़त्म भी नहीं हुई है.

चाची – नहीं, अभी चलो, मुझे काम है तुमसे.

मैंने – क्या काम है मुझसे?

चाची- वही. जो अभी यहाँ कर रहे हो. वहां आराम से करेंगे.

मैंने कहा – ठीक है चलो.

और हम लोग फिल्म चालू होने के 45 मिनट बाद ही निकल गए. हमारा होटल वहां से पांच मिनट की दुरी पर ही था. वहां से हम सीधे अपने कमरे में आये. कमरे में आते ही चाची ने अपनी साड़ी उतरा फेंकी. लपक कर मेरी शर्ट और जींस खोल दी. अब मै सिर्फ अंडरवियर में था. चाची ने अगले ही पल अपनी ब्लाउज को खोल दिया. और पेटीकोट भी उतार दी. अब वो भी सिर्फ ब्रा और पेंटी में और मै सिर्फ अंडरवियर में था.

वो मुझे अपने सीने के लपेट कर पागलों की तरह चूमने लगी. मेरे पुरे बदन को चाटने लगी.

चाची- रवि, आ जा, अब जो भी करना है आराम से कर. मुझे भी तेरी काफी प्यास लगी है . मेरी प्यास बुझा दे. चीर डाल मुझे.

मैंने अपना अंडरवियर खोल दिया. मेरा 9 इंच का लंड किसी तोप की भांति चाची के तरफ खडा था. मै आगे बढ़ा और अपना लंड चाची के हांथों में थमा दिया. चाची मेरे लंड को सहलाने लगी. बोली – बाप रे बाप ! कितना बड़ा लंड है रे.

मैंने मोना (चाची) के चुचियों का दबाते हुए कहा – मोना चाची, तू बड़ी मस्त है. चाचा को तो खूब मज़े देती होगी तू.

मोना – तू भी ले न मज़े. तू चाचा का भतीजा है. तेरा भी उतना ही हक बनता है मुझ पर. और तू मुझे सिर्फ मोना कह ना. चाची क्यों पुकारता है मुझे. अब से तू मेरा दुसरा पति है

मैंने – हाँ मोना. क्यों नहीं.

मोना – हाय, कितना अच्छा लगता है जब तू मुझे मेरे नाम से बुलाता है. सच बता कितनी को चोदा है तू अब तक?

मैंने – अब तक एक भी मोना डार्लिंग, आज तुझसे ही अपनी ज़िंदगी की पहली चुदाई शुरू करूँगा.

मैंने मोना के ब्रा को खोला और नंगी चूची को आज़ाद किया. साली की चूची तो ऐसी थी कि आज तक मैंने किसी ब्लू फिल्मों की रंडियों की चूचियां भी वैसी नहीं देखी. एकदम चिकनी और गोरी. एक तिल का भी दाग नही था. मैंने उसकी घुंडियों को अपने मुंह में लिया और चूसने लगा. मोना सिसकारी भरने लगी. मैंने उसे लिटा दिया. उसके बदन के हर अंग को चूसते हुए उसके पेंटी पर आया. उसकी पेंटी बिलकूल गीली हो चुकी थी. मैंने उसकी पेंटी के ऊपर से ही उसके चूत को चूसने लगा.

मोना पागल सी हो रही थी. मैंने धीरे धीरे उसकी पेंटी को उसकी चूत पर से हटाया. आह ! क्या शानदार चूत थी. लगता ही नहीं था कि पिछले चार साल से इसकी चुदाई हो रही थी. गोरी गोरी चूत पर काले काले झांट. ऐसा लगता था चाँद पर बादल छ गए हों. मैंने झांटों को हाथ से बगल किया और उसके चूत को उँगलियों से फैलाया. अन्दर एकदम लाल नजारा देख कर मेरा दिमाग ख़राब हो रहा था. मैंने झट से उसकी लाल लाल चूत में अपनी लपलपाती जीभ डाली. और स्वाद लिया. फिर मैंने अपनी पूरी जीभ जहाँ तक संभव हुआ उसकी चूत में घुसा कर चूस चूस कर स्वाद लेता रहा. मोना जन्नत में थी. उसने अपने दोनों टांगो से मेरे सर को लपेट लिए और अपने चूत की तरफ दबाने लगी. दस मिनट तक उसकी चूत चूसने के बाद उसके चूत से माल निकलने लगा. मैंने बिना किसी शर्म के सारा माल को चाट लिया. मोना बेसुध हो कर पड़ी थी. वो मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी.


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मैंने कहा – सच बता मोना, चाचा से पहले कितनो से चुदवाई है तू?

मोना – तेरे चाचा से पहले सिर्फ दो ने चोदा है मुझे .

मैंने कहा – हाय, किस किस ने तुझे भोग रे?

मोना – जब मै सोलह साल की थी तब स्कूल की एक सहेली के भाई ने मुझे तीन बार चोदा. फिर जब मै उन्नीस साल की थी तो कालेज में मेरा एक फ्रेंड था. हम सब एक जगह पिकनिक पर गए थे. तब उसने मुझे वहां एक बार चोदा. एक साल बाद तो मेरी शादी ही तेरे चाचा से हो गयी.

मैंने – तब तो मै चौथा मर्द हुआ तेरा न?

मोना – हाँ. लेकिन सब से प्यारा मर्द.

मै उसके बदन पर लेट गया आर उसके रसीले होठ को अपने होठ में लिए और अपनी जीभ उसके मुंह में डाल दिया. कभी वो मेरी जीभ चुस्ती कभी मै उसकी जीभ चूसता. इस बीच मैंने उसके दोनों टांगो को फैलया और उसके चूत में उंगली डाल दिया. मोना ने मेरी लंड पकड़ी और उसे अपने चूत के छेद के ऊपर ले गयी और हल्का सा घुसा दी. अब शेष काम मेरा था. मैंने उसके जीभ को चाटते हुए ही एक झटके में अपना लंड उसके चूत में पूरा डाल दिया. वो दर्द में मारे बिलबिला गयी.

बोली – अरे, रवि, फाड़ देगा क्या रे? निकाल रे .

लेकिन मै जानता था कि ये कम रंडी नहीं है. इसे कुछ नहीं होगा. मैंने उसकी दोनों बाहें पकड़ी और अपने लंड को उसके चूत में धक्के लगा शुरू कर दिया. वो कस के अपनी आँखें बंद कर रही थी और दबी जुबान से कराह रही थी. लेकिन मुझे उस पर कोई रहम नहीं आ रहा था. बल्कि उसके चीख में मुझे मजा आ रहा था. 70 -75 धक्के के बाद उसकी चीखें बंद हो हो गयी. अब उसकी चूत पूरी तरह से मेरे लंड को सहने योग्य चौड़ी हो गयी थी. अब वो मज़े लेने लगी. उसने अपनी आँखे खोल कर मुस्कुरा कर कहा – हाय रे रवि. बड़ा जालिम है रे तू. मुझे तो लगा मार ही डालेगा .

मैंने कहा – मोना डार्लिंग, मै तुझे कैसे मार सकता हूँ रे. तू तो अब मेरी जान बन गयी है. और तुझे तो आदत होगी न बचपन से?

मोना हंसने लगी. बोली – लेकिन इतना बड़ा लंड की आदत नहीं है मेरे शेर राजा. . मज़ा आ रहा है तुझ से चुदवा कर.

करीब दस मिनट तक चोदने के बाद मेरे लंड से माल निकलने पर हो गया. मैंने कहा – मोना डार्लिंग, माल निकलने वाला है.

मोना – निकलने दो न वहीँ.

अचानक मेरे लंड से गंगा जमुना बहने लगी और मै पूरा जोर लगा कर मोना की चूत में अपना लंड घुसा दिया. मोना कराह उठी.

थोड़ी देर बाद हम दोनों को होश आया. मेरा लंड उसके चूत में ही था.

मै उसके नंगे बदन पर से उठा. समय देखा तो नौ बजने को थे. मैंने पूछा – मोना नहाएगी?

मोना – हाँ रे, चल न.

मैंने उसे अपनी गोद में उठाया. उसने भी हँसते हुए अपनी दोनों बाहें मेरे गले में लपेटा और हम दोनों बाथरूम में आ गए. वहां मैंने मोना को बाथटब में डाल दिया. फिर शावर को टब की ओर घुमाया और चला दिया. अब नीचे भी पानी और ऊपर से भी पानी बरस रहा था. मै मोना के ऊपर लेट गया. अब हम ठन्डे पानी में एक दुसरे के आगोश में थे. मेरे होठ उसके होठ चूम रहे थे. मेरे एक हाथ उसके चुचियों से खेल रहे थे और मेरे दसरे हाथ उसके चूत के छेद में ऊँगली कर रहे थे. और वो भी खाली नही थी. वो मेरे लंड को दबा रही थी. दस मिनट तक ठन्डे पानी में एक दुसरे के बदन से खेलने के बाद हम दोनों का शरीर फिर गर्म हो गया. मैंने उसके टांगों को टब के ऊपर रखा और अपने लंड को उसके सुराख में डाला और पानी में डूबे डूबे ही उसे 20 मिनट तक आराम से चोदता रहा. इस दौरान मेरे और उसके होठ कभी अलग नहीं हुए. अचानक मेरे लंड ने माल निकालना चालू किया तो मै उसे चोदना छोड़ कर उसके चूत में लंड को पूरी ताकत के साथ दबाया और स्थिर हो गया और मेरे होठ का दवाब उसके होठ पर और ज्यादा बढ़ गया. जब मै उसके होठ के अपने होठ अलग किया तो उसने कहा – कितनी देर तक चोदते हो, मेरी जान तुम्हे पता है मेरा दो बार माल निकल चूका था इस चुदाई में. मै कब से कहना चाहती थी लेकिन तुमने मेरे होठों पर भी अपने होठो से ताला लगा दिया था.

मैंने कहा – मोना डार्लिंग, सच बताना, कैसा लगा मेरा लंड का करिश्मा?

मोना – मानना पड़ेगा, सच में मज़ा आ गया मुझे तो आज. अब चल कुछ खा -पी ले. अभी तो पुरी रात बांकी है.

मैंने बाथरूम के ही फोन पर से खाने के लिए चिकन, पुलाव, बियर और सिगरेट रूम में ही मंगवा लिया. थोड़ी देर में कमरे की घंटी बजी. मै टावेल लपेट कर बहार आया. और खाना टेबल पर रखवा कर वेटर को वापस किया. कमरे का दरवाजा बंद कर के मैंने मैंने मोना को आवाज दिया. मोना नंगे ही बाथरूम से बाहर आई. मैंने भी टावेल खोल दिया. फिर हम दोनों ने जम के चिकन-पुलाव खाया और बियर पी. मोना पहले भी बियर पीती थी. चाचा पिलाता था. मेरे कहने पर उस ने उस दिन 3 सिगरेट भी पी ली. उसके बाद मैंने उसकी कम से कम 10 – 11 बार चुदाई की. कभी उसकी चूत की चुदाई, तो कभी गांड की चुदाई, तो कभी मुंह की चुदाई. कभी चूची की चुदाई.

साली मोना भी कम नही थी. एक दम रंडी की तरह रात भर चुदवाते रही. सारी रात मैंने उसे लुटा. सुबह के आठ बजे तक मैंने उसकी चुदाई करी. तब जा कर मोना को थकान हुई. तब बोली – रवि, अब मै थक गयी हूँ. अब बाथरूम चल न.

मैंने उसे उठा कर बाथरूम ले गया. बाथरूम में संडास के दो सीट थे. एक देसी और एक विदेशी. उसे देसी सीट पसंद थी. मै विदेशी सीट पर बैठ गया और संडास करने लगा. वो मेरे सामने ही देसी सीट पर बैठ कर संडास करने लगी. मुझे उसकी संडास की खुसबू भी अच्छी लग रही थी.

मैंने कहा – मोना, तेरी गांड मै धोऊंगा आज.

उसने कहा – ठीक है. मै भी तेरी गांड धोउंगी .

संडास कर के हम दोनों उठे. मैंने उसे सर नीचे कर के गांड उठाने कहा . उसने ऐसा ही किया. इस से उसका गांड खुल गया. मैंने पानी से अच्छे से उसके गांड में लगे पैखाने को अपने हाथ से साफ़ किया.

फिर मैंने भी वही पोजीशन बनायी . उसने भी मेरी गांड को अपने हाथ से साफ़ किया.

फिर हम दोनों लगभग एक घंटे तक टब में डूबे रहे और एक दुसरे के अंगों से खेलते रहे. टब में दो बार उसी चुदाई करी.

फिर वापस कमरे में आ कर नाश्ता मंगवाया. और नाश्ता कर के हम दोनों जो सोये तो सीधे पांच बजे उठे.
हम दोनों नंगे थे.उसने मेरे लंड पर हाथ साफ़ करना शुरू किया. लंड दूसरी पारी के लिए एकदम से तैयार हो गया. मै मोना के बदन पर चढ़ गया और उसके चूत में अपना नौ इंच का लंड घुसेड दिया.


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तभी चाचा का फोन आया. लेकिन मैंने मोना की चुदाई बंद नही की. मोना ने मुझसे चुदवाते हुए अपने पति यानी मेरे चाचा से बात की. उन्होंने कहा कि वो दुबई पहुँच गए हैं. फिर मोना से पूछा कि क्या तुमने रवि के साथ बंगलौर घूमी या नहीं. मोना ने मुस्कुराते हुए मेरी ओर देखा और फोन पर कहा – रवि को फुर्सत ही नहीं मिलता है. जब आप आयेंगे तभी मै आपके साथ घुमुंगी. तब तक आपका इंतज़ार करती हूँ.

फोन रख कर उसने बगल से सिगरेट उठाया और जला कर कश लेते हुए कहा – क्यों रवि? तब तक तुम मुझे जन्नत की सैर करवाओगे न?

मैंने हँसते हुए अपने लंड के धक्के उसके चूत में तेज किया और कहा – क्यों नहीं मोना डार्लिंग.लेकिन तू हैं बड़ी कमीनी चीज.

मोना ने भी मेरे लंड के धक्के पर कराहते हुए मुस्कुरा कर कहा – तू भी तो कम हरामी नहीं है. पक्का मादरचोद है तू. मौका मिले तो अपनी माँ को भी चोद डालेगा तू.

मैंने कहा- पक्की रंडी है तू साली. एकदम सही पहचाना मुझे. तुझ पर तो मेरी तभी से नजर थी जब से तू मेरे घर पर चाची बन के आई थी . अब जा के मौका मिला है तुझे चोदने का.

मोना – हाय मेरे हरामी राजा. पहले क्यों नही बताया. इतने दिन तक तुझे प्यासा तो ना रहना पड़ता.

मैंने कहा – सब्र का फल मीठा होता है मेरी जान.

तब तक मेरे लंड का माल उसके चूत में निकल चुका था. अब मै उसके बदन पर निढाल सा पडा था और वो सिगरेट के कश ले रही थी.

और फिर….अगले 6 दिन तक हम दोनों में से कोई कमरे के बाहर भी नहीं निकला जब तक कि चाचा दुबई से वापस नहीं आ गए.


end


RE: Hindi Porn Stories हिन्दी सेक्सी कहानियाँ - sexstories - 08-20-2017

चचेरी और फुफेरी बहन की सील--1

मेरा नाम राज है, मैं दिल्ली में रहता हूँ, मेरी आयु 35 वर्ष है, मैं सेहत में ठीक हूँ और स्मार्ट भी हूँ ! मैं आप सभी को अपने चाचा की लड़की की चुदाई और सील तोड़ने की एकदम सही अनुभव बता रहा हूँ।

मेरे एक चाचा मेरे साथ ही रहते हैं, उनकी एक लड़की है, उसका नाम ललिता है, मेरी चाची की मृत्यु हो चुकी है। मेरी बहन 18 वर्ष की है परन्तु उसका बदन काफी भरा हुआ है और वह जवानी की दहलीज पर कदम रख चुकी है, हालांकि मेरी शादी हो गई है, पर उसको देख कर दिल में कुछ होने लगता था, जब मैं उसको खेलते हुए देखता, खेलने के दौरान उसके उभरते हुए दूध देखता तो मेरे दिल में सनसनी फ़ैल जाती थी, दौड़ने के दौरान जब गोल गोल चुनमूनियाँड़ ऊपर-नीचे होते तो मेरा लण्ड पैंट के अन्दर मचल उठता था और उसके साथ खेलने (सेक्स का खेल) के लिए परेशान करने लगता था।

क्या कमसिन खिलती हुई जवानी है इसकी ! मुझे अपनी पाँच वर्ष पुरानी बीवी तो बूढ़ी लगने लगती थी।

मैं तो जब भी अपनी बीवी को चोदता तो मुझे अपनी बहन का ही चेहरा नजर आने लगता था। हालांकि मेरी बहन मुझसे करीब सतरह वर्ष छोटी है, परन्तु मैं अपनी सेक्स भावनाओं पर काबू पाने में असमर्थ था।

चूंकि हम लोगों का सम्मिलित परिवार है इसलिए सब एक दूसरे के यहाँ आते जाते थे और एक ही घर में रहने के कारण कभी कभार कुछ ऐसा दिख जाता था कि…

एक दिन मुझे अपनी बहन को नहाते हुए देखने का मौका मिल गया।

हुआ यूँ कि मैं किसी काम से अपने चाचा के घर में गया, मैंने चाचा को आवाज़ दी पर कोई उत्तर न मिलने के कारण मैं अन्दर चलता चला गया, मुझे कोई दिखाई नहीं दिया। तभी मुझे स्नानघर से पानी गिरने की आवाज़ आई।

मैंने फिर से चाचा को आवाज़ दी तो स्नानघर से ललिता की आवाज़ आई- भैया, पापा तो ऑफिस चले गए हैं।

मैंने कहा- अच्छा !

और वापस आने के लिए मुड़ गया किन्तु तभी मेरे मन में बसी वासना ने जोर मारा, मैंने सोचा कि ललिता कैसे नहा रही है, आज देख सकता हूँ क्योंकि चाचा के यहाँ कोई नहीं था और मौका भी अच्छा है।

मैंने स्नानघर की तरफ रुख किया और कोई सुराख ढूढने की कोशिश करने लगा, जल्दी ही मुझे सफलता मिल गई, मुझे दरवाजे में एक छेद नजर आ गया मैंने अपनी आँख वहाँ जमा दी।

अन्दर का नजारा देख कर मेरा रोम रोम खड़ा हो गया, अन्दर ललिता पूरी नंगी होकर फव्वारे का आनंद ले रही थी।

हे भगवान ! क्या फिगर है इसका ! बिल्कुल मखमली बदन, काले तथा लम्बे बाल, उभरती हुई चूचियाँ, बड़ी बड़ी आँखें, बिल्कुल गुलाबी होंठ और उसकी चुनमूनियाँ तो उफ़…. उभरी हुए फांकें और उसके आसपास हल्के हलके रोयें ! उसकी गाण्ड एकदम गोल और सुडौल ! भरी हुई जांघें !

इतना दखने के बाद मेरा तो बुरा हाल हो गया था, जब फव्वारे से उसके शरीर पर पानी गिर रहा था तो मोतियों की बूंदें ऐसे लग रही थी, मेरा तो हाल बुरा हो गया, मैंने बहुत कुंवारी लड़कियों को चोदा था पर इतनी मस्त लौंडिया मैंने कभी नहीं देखी थी।

तभी मैंने देखा कि ललिता अपनी चुनमूनियाँ और चूचियों में साबुन लगा रही है, इस दौरान वो अपनी चुनमूनियाँ में अपनी ऊँगली डालने की कोशिश कर रही थी।

मेरा लण्ड तो कठोर होकर पैंट के अन्दर छटपटा रहा था, मन में भी यही आ रहा था कि कैसे भी हो ललिता को अभी जाकर चोद दूँ।

क्योंकि आज के पहले जब मैं उसको कपड़ो में देख कर चोदने के सपने देखता था और आज नंगी देखने के बाद तो काबू कर पाना बड़ा मुश्किल हो रहा था।

तभी मेरा मोबाइल बज गया, यह तो अच्छा हुआ कि मोबाइल वाईब्रेशन मोड में था और घंटी नहीं बजी।

खैर मोबाइल की वजह से मैं धरती पर वापस आ गया और चूंकि यह फ़ोन चाचा का ही था तो मुझे वहाँ से हटना पड़ा।

बाहर आकर मैंने फ़ोन उठाया, तो उधर से चाचा ने पूछा- तुम कहाँ हो?

मैंने कहा- अपने कमरे में हूँ।

तो बोले- राज, एक काम है।

मैंने कहा- बताइये !

तो वे बोले- आज मुझे ऑफिस से आने में देर हो जायेगी और ललिता को आज मैंने वादा किया था कि कुछ कपड़े दिलाने बाज़ार ले जाऊँगा, क्या तुम मेरा यह काम कर सकते हो?

मुझे तो मुँह मांगी मुराद मिल गई थी, मैंने तुरंत कहा- चाचा जी आप परेशान न हों, मैं प्रिय को कपड़े दिला दूँगा।

और उधर से उन्होंने थैंक्स कह कर फ़ोन काट दिया।

इतने में मुझे बाथरूम का दरवाजा खुलने का अहसास हुआ, मैं तुरंत वहां से हट कर अपने कमरे में आ गया। मेरे दिमाग में योजना बननी शुरू हो गई कि कैसे मौके का फायदा उठाया जाए।

फिर मैं थोड़ी देर बाद ललिता के कमरे में गया, वो अपने बाल सुखा रही थी पंखे के सामने बैठ कर।

मुझे देखते ही तुरंत खड़ी हो गई।

मैंने कहा- ललिता कैसी हो?

वो बोली- ठीक हूँ भैया।

मैंने कहा- अभी चाचा जी का फ़ोन आया था, कर रहे थे कि आज तुमको शॉपिंग ले जाना था परन्तु आफिस में काम ज्यादा है, उन्हें देर हो जायेगी और तुमको शापिंग मैं करवा लाऊँ। उसने कहा- ठीक है भैया, कितने बजे चलेंगे?

मैंने कहा- तुम तैयार हो जाओ, हम लोग अभी निकलेंगे और दोपहर का खाना भी बाहर खायेंगे क्योंकि मेरी मम्मी बुआ के घर गई हैं और तुम्हारी भाभी (मेरी पत्नी चूंकि टीचर है) तो शाम तक आएँगी, आज मैं शॉपिंग के साथ तुमको पार्टी भी दूँगा।

उसके चेहरे पर चमक आ गई।

खैर मैंने 11 बजे के करीब उसको अपने स्कूटर पर बैठाया और निकल पड़ा बाजार जाने को !

मैंने स्कूटर एक बड़े मॉल में जाकर रोका, तो ललिता चौंक कर बोली- भैया, यहाँ तो बड़े महंगे कपडे मिलेंगे?

मैंने उससे कहा- तो क्या हुआ, महँगे कपड़े अच्छे भी तो होते हैं ! और फिर तुम इतनी सुन्दर हो, अच्छे कपड़ों में और ज्यादा सुन्दर लगोगी।

तो उसका चेहरा लाल हो गया।

मॉल के अन्दर जाकर कपड़े पसन्द करते समय वो मुझसे बार-बार पूछती रही- भैया, यह कैसा लग रहा है? वो कैसा है?

खैर चार जोड़ी कपड़े चुन करके वो ट्राई रूम में गई। ट्राई रूम थोड़ा किनारे बना था और उस समय माल में ज्यादा लोग थे भी नहीं, मैं ट्राईरूम के बाहर ही खड़ा हो गया।

वो पहन कर आती और मुझसे पूछती- यह कैसा लग रहा है? ठीक है या नहीं?

उसने वो चारों जोड़ी कपड़े पसन्द कर लिए।

उसके बाद मैंने पूछा- ललिता, और कुछ लेना है?

तो वो बोली- हाँ, मगर वो मैं अकेले ही ले लूंगी।मैंने सोचा ऐसा क्या है, खैर मैंने देखा कि वो महिला सेक्शन में जा रही थी।

उसने कुछ अंडर गारमेंट लिए और जल्दी से पैक करा लिए जब वो लौट कर मेरे पास आई तो मैंने कहा- मैंने तो देख लिया है।

तो वो शर्मा गई।

मैंने उसको छेड़ते हुए कहा- तुम इनका ट्रायल नहीं दिखाओगी क्या?

तो वो और शरमा गई।

मैंने माहौल को सामान्य करते हुए कहा- मैं तो इसलिए कहा रहा था कि तुम्हारी भाभी को तो यह सब मैं ही ला कर देता हूँ, अगर तुम इसके लिए भी मुझसे कहती तो मैं तुमको अच्छी चीज दिला देता।

बात उसकी समझ में आ गई, वो बोली- भैया गलती हो गई।

मैंने कहा- चलो अभी चलते हैं।

मैं उसको महिला विभाग में ले गया और सेल्स गर्ल से विदेशी अंतर्वस्त्र दिखाने को कहा।

चूंकि ललिता थोड़ी देर पहले ही उससे कुछ अंतर्वस्त्र लाई थी, अतः उसने उसी नाप के अंतर्वस्त्र दिखाने लगी।

उन अंतर्वस्त्रों को देख कर ललिता के अन्दर की ख़ुशी मैंने उसके चेहरे से पढ़ ली, मैंने कहा- चलो जाओ और ट्राई करलो !

तो वो चेहरा घुमा कर हंसने लगी।

उसके बाद मैंने उसको मुख-शृंगार का सामान भी दिलवाया अपनी पसंद से !

हालांकि वो मना कर रही थी पर मैंने कहा- यह मेरी तरफ से है।

यह सब खरीदने के बाद हम लोग वहीं एक रेस्तरां में गए। मुझे पता था कि इस समय रेस्तरां में ज्यादातर प्रेमी प्रेमिका ही आकर बैठते थे।

मैंने एक किनारे की सीट चुनी और हम दोनों उसी पर जाकर बैठ गए।

मैंने उससे पूछा- तुम क्या खाओगी?

तो वो बोली- जो आप मंगा लेंगें वही मैं भी खा लूंगी।

मैंने उसको छेड़ते हुए कहा- अंतर्वस्त्र लेते समय तो यह ख्याल नहीं किया? और फिर मेरे कहने पर ट्राई भी नहीं किया?

तो वो शरमा गई और बोली- क्या भाभी आपकी पसंद से लेती हैं? और वो यहाँ पर ट्राई करके दिखाती हैं?

तो मैंने कहा- हाँ ! पसंद तो मेरी ही होती है पर ट्राई करके वो घर पर दिखाती है। क्या तुम मुझे घर पर दिखाओगी?

उसको कोई जवाब नहीं सूझा तो वो मेरा चेहरा देखते हुए बोली- हाँ दिखा दूँगी।

मेरा दिल जोर से धड़कने लगा। तभी वेटर आ गया और खाने का आर्डर ले गया।

खाना ख़त्म कर हम लोग करीब दो बजे घर आ गए, ललिता बहुत खुश लग रही थी क्योंकि उसको मेरे साथ शॉपिंग में कुछ ज्यादा ही अच्छा लगा।

शाम को उसने अपनी शॉपिंग का सामान मेरी माँ और बीवी को भी दिखाया पर अंतर्वस्त्र और शृंगार का सामान नहीं दिखाया।

क्रमशः..................


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चचेरी और फुफेरी बहन की सील--2

गतान्क से आगे..............

दूसरे दिन सुबह मेरी माता जी को कुछ काम से बाजार जाना था, मेरी बीवी स्कूल चली गई थी, मैं कल वाले समय पर ही चाचा जी के कमरे की तरफ चला गया और मैंने आज पहले ही निश्चय कर लिया था कि आज अपनी प्यारी सेक्सी बहना की कुँवारी चुनमूनियाँ की सील तोड़नी हैं।

इसलिए मैं केवल एक तौलिया बांधे था, मेरा अनुमान सही था, चाचा जी ऑफिस जा चुके थे और ललिता बाथरूम में नहा रही थी।

मैंने फिर से कल वाली पोजिशन ले ली, मैंने देखा कि आज ललिता की चुनमूनियाँ बिल्कुल चिकनी है, शायद उसने अपनी झांटें साफ़ की हैं नहाने से पहले। आज वो अपनी चुनमूनियाँ पर हाथ ज्यादा चला रही थी, उसकी चूचियाँ कड़ी कड़ी लग रहीं थी और आँखें बंद थी।

मेरा लण्ड ललिता की चुनमूनियाँ में घुसने के लिए मचला जा रहा था।

कुछ सोच कर मैं वहाँ से हट कर ललिता के कमरे में चला गया और ऐसी जगह बैठ गया कि वो मुझे कमरे में घुसते ही न देख पाए।

ललिता थोड़ी देर बाद कमरे में आई, वो अपने बदन को केवल एक तौलिये से ढके थी, कमरे में आते ही वो अपने ड्रेसिंग टेबल की तरफ गई और तौलिया हटा दिया।

उफ़ क्या मस्त लग रही थी मेरी बहना ! उसके शरीर पर यहाँ वहाँ पानी की बूंदें मोती की तरह लग रही थी, चुनमूनियाँ एकदम गुलाबी, चूचियाँ बिल्कुल कड़ी, उन्नत गाण्ड देख कर मेरी तो हालत ख़राब हो गई।

उसने कल वाले अंतर्वस्त्र उठा लिए, उनमे से एक को चुना और पैंटी को पहले पहनने लगी।

किन्तु उसको शायद वो कुछ तंग लगी, फिर उसने दूसरी पैंटी ट्राई किया मगर वही रिजल्ट रहा, अब उसने पैंटी छोड़ कर ब्रा उठाई लेकिन ब्रा में भी वही हुआ, उसकी चूचियाँ कुछ बड़ी लग रही थी, ब्रा भी फिट नहीं थी।

अब मुझसे बर्दाश्त भी नहीं हो रहा था, मैंने अपनी जगह से खड़ा हो गया।

मुझे देख कर उसकी आँखें फट गई, वो इतना घबरा गई कि अपनी चुनमूनियाँ या अपनी चूची छिपाने का भी ख्याल नहीं आ पाया उसको !

बस फटी हुई आँखें और मुँह खुला रहा गया।

मैं धीरे से चल कर उसके पास गया और कहा- कल अगर मेरी बात मान लेती और ट्राई कर लेती तो तुमको आज यह परेशानी नहीं होती।

अब उसको कुछ समझ आया तो जल्दी से तौलिया उठाया और लपेटने के बाद मेरी तरफ पीठ करके पूछा- भैया, आप कब आये?

मैंने उसके कंधे पर हाथ रख कर कहा- मेरी सेक्सी बहना ! मैं तो तब से यहाँ हूँ जब तुम चाचा जी के रेजर से अपनी झांटें साफ़ कर रही थी।

मैंने ऐसे ही तुक्का मारा।

अब तो तौलिया उसके हाथ से छूटते बचा।

वो मेरी तरफ बड़े विस्मय से देखने लगी और मेरे चहरे पर मुस्कराहट थी क्योंकि मेरा तीर निशाने पर लग गया था।

मैंने उसके कंधे को सहलाते हुए कहा- तुमने कुछ गलत थोड़े ही किया है जो डर रही हो? इतनी सुन्दर चीजों की साफ़ सफाई तो बहुत जरूरी होती है। अब तुम्हीं बताओ कि ताजमहल के आसपास अगर झाड़-झंखार होगा तो उसकी शान कम हो जायेगी न मेरी प्यारी बहना?

अब पहली बार वो मुस्कुराई और अपनी चुनमूनियाँ की तारीफ सुन कर उसके गाल लाल हो गए।

अगले पल ही वो बोली- खैर अब आपने ट्रायल तो देख ही लिया, अब आप बाहर जाइए तो मैं कपड़े तो पहन लूँ !

मैंने कहा- प्यारी बहना, अब तो मैंने सब कुछ देख ही लिया है, अब मुझे बाहर क्यूँ भेज रही हो?

वो बोली- भैया, आप भी बहुत शैतान हैं, कृपया आप बाहर जाइए, मुझे बहुत शरम आ रही है।

अचानक मैंने अपने दोनों हाथ उसकी कमर पर डाले और हल्का सा झटका दिया तो वो संभल नहीं पाई और उसकी चूचियाँ मेरे नंगे सीने से आकर टकराईं क्योंकि मैंने भी केवल तौलिया ही पहना हुआ था।

मैंने अपने हाथों के घेरे को और कस दिया ताकि वो पीछे न हट सके और तुरंत ही अपने होंठों को उसके गुलाबी गुलाबी होंठों पर रख दिया।

मेरे इस अप्रत्याशित हमले से उसको सँभालने का मौका ही नहीं मिला और मैंने उसको गुलाबी होंठों का रस पीना शुरू कर दिया।

वो मेरी पकड़ से छुटने के लिए छटपटाने लगी मगर मुँह बंद होने के कारण कुछ बोल नहीं पा रही थी।

थोड़ी देर उसके कुवांरे होंठों को चूसते हुए मेरे हाथ भी हरकत में आ गए, मैंने अपना एक हाथ तौलिये के नीचे से उसकी सुडौल गाण्ड पर फेरना शुरू किया और फेरते फेरते तौलिये को खीँच कर अलग कर दिया।

अब एक 18 वर्ष की मस्त और बहुत ही खूबसूरत लौंडिया बिल्कुल नंगी मेरी दोनों बाँहों के घेरे में थी और मैं उसके कुँवारे होंठों को बुरी तरह से चूस रहा था, अब मेरा हाथ उसके गाण्ड के उभार से नीचे की तरफ खिसकने लगा, उसकी छटपटाहट और बढ़ रही थी, मेरा हाथ अब उसकी गाण्ड के छेद पर था, उंगली से मैंने उसकी मस्त गाण्ड के फूल को सहलाया, तो वो एकदम चिहुंक गई।

फिर मेरी उंगलियाँ गाण्ड के छेद से फिसलती हुई उसकी कुँवारी चुनमूनियाँ तक पहुँच गई। मैं उसकी कुँवारी चुनमूनियाँ के ऊपर अपनी पूरी हथेली से सहलाने लगा, मेरा तना हुआ सात इंच का लण्ड तौलिये के अन्दर से उसके नाभि में चुभ रहा था क्योंकि उसकी लम्बाई में मुझसे थोड़ी कम थी। उसकी आँखों से गंगा-जमुना की धार निकल पड़ी क्योंकि उसको शायद मेरे इरादे समझ आ गए थे और वो यह भी समझ गई थी कि अब पकड़ से छूटना आसान नहीं, शोर भी नहीं मचा सकती थी क्योंकि उसके होंठ मेरे होंठो में अभी तक कैद थे।

इधर मेरी उंगलियाँ अब उसकी कुँवारी चुनमूनियाँ की फांकों को अलग अलग करने लगीं थी, मैंने अपनी एक ऊँगली उसकी चुनमूनियाँ के अंदर घुमा कर जायजा लेना चाहा पर उसकी चुनमूनियाँ इतनी कसी हुई थी कि मेरी उंगली उसके अन्दर जा ही नहीं सकी।

खैर मैंने उसको धीरे धीरे सहलाना चालू रखा, जल्दी ही मुझे लगा कि मेरी उंगली में कुछ गीला और चिपचिपा सा लगा और मेरी प्यारी बहना का शरीर कुछ अकड़ने लगा, मैं समझ गया कि इसकी चुनमूनियाँ को पहली बार किसी मर्द की उंगलियों ने छुआ है जिसे यह बर्दाश्त नहीं कर सकी और इसका योनि-रस निकल आया है

मैं तुरंत अपनी उँगलियों को अपने मुँह के पास ले गया, क्या खुशबू थी उसकी कुँवारी चुनमूनियाँ की !

मेरा लण्ड अब बहुत जोर से उछल रहा था तौलिये के अन्दर से, मैंने अपने हाथ से अपने तौलिए को अपने शरीर से अलग कर दिया, जैसे ही तौलिया हटा, ललिता को मेरे लण्ड की गर्मी अपने पेट पर महसूस हुई। शायद उसको कुछ समझ नहीं आया कि यह कौन सी चीज है जो बहुत गर्म है।

खैर अब मेरे और मेरी प्यारी और सेक्सी बहना के बदन के बीच से पर्दा हट चुका था, अब हम दोनों के नंगे शरीर एक दूसरे का अहसास कर रहे थे। ललिता की साँसें बहुत तेज चल रही थी।

अब मुझसे और बर्दाश्त नहीं हो रहा था, मैंने ललिता के होंठों को आज़ाद कर दिया, किन्तु उसके कुछ बोलने के पहले ही अपना एक हाथ उसके मुँह पर रख दिया और कहा- देखो ललिता, आज कुछ मत कहो, मैं बहुत दिन से तुम्हारी जवानी कर रस चूसने को बेताब हूँ। और आज मैं तुमको ऐसे नहीं छोडूंगा, शोर मचाने से कोई फायदा हैं नहीं, घर में हमारे सिवा कोई नहीं है, तो बेहतर होगा कि तुम भी सहयोग करो और मजा लूटो।

वो प्रश्नवाचक निगाहों से मुझे देखती रही, मुँह तो बंद हो था कुछ बोलने की स्थिति में नहीं थी।

अब मैंने उसके मुँह से हाथ हटा दिया और तुरंत ही उसको गोद में उठा लिया और ले जाकर सीधे बिस्तर पर लिटा दिया।

अगले ही पल फिर से उसके होंठ का रस पान शुरू कर दिया और हाथ उसकी चूचियों को धीरे धीरे मसलने लगे। हम दोनों की साँसें बहुत गर्म और तेज तेज चल रहीं थी, मेरा लण्ड उसकी कुँवारी चुनमूनियाँ की फांकों के ऊपर था।

पहली बार उसके हाथों ने हरकत की और मेरे लण्ड की अपने हाथ से महसूस करने की कोशिश की, शायद वो जानना चाह रही थी कि यह लोहे जैसा गर्म-गर्म क्या उसकी चुनमूनियाँ से रगड़ रहा था। उसने अपनी उंगलियों से पूरा जायजा लिए मेरे लण्ड का !

मैंने कहा- मेरी जान, मुझे बहुत अच्छा लगा जो तुमने मेरा लण्ड अपने हाथों से छुआ !

लण्ड का नाम सुनते ही उसने अपने हाथों को तुरंत वापस खींच लिया।

मैंने अब अपने होंठ उसकी चूची के ऊपर रख दिए, पहली बार उसके मुँह से सिसकारी निकली जो मुझे बहुत ही अच्छी लगी। खैर मैंने उसकी चूची को पीना शुरू कर दिया, चूसते चूसते दाँत भी लगा देता था। उसके बाद दूसरी चूची में होंठ लगा दिए, अब उसकी साँसें और तेज हो गईं थीं।

मैंने महसूस किया कि मेरा लण्ड जो उसकी चुनमूनियाँ की फांकों के ऊपर था, उसमें कुछ चिपचिपा सा गीलापन लग गया है। मैं समझ गया कि अब मेरी बहना की कुँवारी चुनमूनियाँ लण्ड लेने के लिए तैयार हो गई है।

मैंने अपने एक हाथ से अपने लण्ड को ललिता की चुनमूनियाँ पर ठीक से टिकाया और उसको चुनमूनियाँ के अन्दर डालने की कोशिश की पर लण्ड उसकी चुनमूनियाँ से फिसल गया। मैंने फिर कोशिश की पर फिर मेरा लण्ड फिसल गया।

अब मैंने इधर उधर देखा तो मुझे उसके कल ख़रीदे गई श्रृंगार का सामान दिख गया, उसमें एक वैसलीन की एक शीशी थी, मैं उसके ऊपर से हटा और वैसलीन की शीशी उठा कर तुरंत फ़िर से अपनी उसी अवस्था में आ गया।

मैंने लेटे लेटे ही वैसलीन की शीशी खोली और उसकी उसकी चुनमूनियाँ के उपर खूब सारी वैसलीन लगा दी, फिर मैंने अपने लण्ड के सुपारे को खोला और उसमें भी वैसलीन लगाई।

इस सबको मेरी ललिता रानी बड़े गौर से देख रही थी, शायद उसको कुछ समझ में आ रहा था या फिर उसको अन्दर से कुछ मजा तो जरूर मिल रहा होगा क्योंकि अब उसने किसी तरह का विरोध या भागने की कोशिश नहीं की थी।

अब मैंने अपने लण्ड को फिर से उसकी चुनमूनियाँ के फांकों के बीच में रखा और अन्दर धकेलने की कोशिश की किन्तु इस बार शायद चिकनाई ज्यादा होने के कारण लण्ड उसकी चुनमूनियाँ से फिर फिसल गया। 

ललिता ने तो अपने होंठ कस कर भींच लिए थे क्योंकि उसको लगा कि अब तो भैया का मोटा और लम्बा लण्ड उसकी कुँवारी चुनमूनियाँ में घुस ही जाएगा।

दोस्तो, तीन प्रयास हो चुके थे, मेरा लण्ड ऐंठन के मारे दर्द होने लगा था, अबकी मैंने अपने लण्ड को फिर से रखा और अपने दोनों हाथों को ललिता की जांघों के नीचे से निकाल कर उसके कन्धों को पकड़ लिया, इस तरह पकड़ने के कारण अब वो बिल्कुल पैर भी नहीं बंद सकती थी और हिल भी नहीं सकती थी।

अब मैंने एक जोर से धक्का मारा, ललिता के हलक से बड़ी तेज चीख निकल पड़ी, मेरे लण्ड का सुपारा उसकी चुनमूनियाँ की फांकों को अलग करता हुआ अन्दर घुस गया था।

वो चिल्लाने लगी- हाय, मैं मर गई !

और आँखों से गंगा-जमुना बहने लगी। वो बड़ी तेजी से अपना सर हिला रही थी, अब मैंने अपने होंठ फिर से उसके होंठों पर कस कर चिपका दिए और एक जोर का धक्का फिर मारा, अबकी मेरा लण्ड उसकी चुनमूनियाँ को और फाड़ता हुआ करीब दो इंच घुस गया, उसकी चुनमूनियाँ एकदम गरम भट्टी बनी हुई थी, मैं अपने लण्ड के द्वारा उसकी कुँवारी चुनमूनियाँ की गर्मी महसूस कर रहा था।

2-3 सेकेण्ड के बाद फिर से एक धक्का मारा तो अबकी आधे से ज्यादा लण्ड उसकी चुनमूनियाँ में घुस गया। अब मैं उसी अवस्था में रुक गया और उसके होंठों को कस कर चूसने लगा। उसकी चुनमूनियाँ इतनी कसी हुई थी कि मुझे लगा कि मैं आसानी से अपने लण्ड को उसकी चुनमूनियाँ में अन्दर-बाहर नहीं कर पाऊँगा और उत्तेजना के कारण जल्दी ही झड़ जाऊँगा, इसलिए मैंने जोर से एक धक्का और मारा, अबकी मेरा पूरा लण्ड उसकी चुनमूनियाँ में समां गया, मैंने अपनी जांघ पर कुछ गीला गीला महसूस किया, मुझे समझ आ गया कि इसकी चुनमूनियाँ की झिल्ली फट गई है और खून निकल रहा है।

दोस्तों मेरा ख्वाब था कि मैं किसी की सील तोडूं !

पर मुझे अपनी बीवी के साथ भी यह मौका नहीं मिला था, हालांकि मेरी बीवी ने तब मुझे यही बताया था साईकिल चलाते वक्त उसकी चुनमूनियाँ की झिल्ली फट गई थी, तो आज जब मुझे अपनी बहन ललिता की सील टूटने का अनुभव मिला तो मैं इतना उत्तेजित हो गया कि मैं अपने आप पर काबू नहीं कर पाया और इसी उत्तेजना में मेरा वीर्य निकलने लगा। मेरा गर्म-गर्म वीर्य मेरी बहन ललिता की चुनमूनियाँ के अन्दर निकल रहा था, वो भी मेरे लण्ड से निकलने वाले गर्म वीर्य को महसूस कर रही थी अपनी दोनों आँखों को बंद करके !

ललिता की चुनमूनियाँ इतनी कसी हुई थी कि वीर्य निकलने के दौरान लण्ड अपने आप झटके मरने लगता है, पर मेरे लण्ड को उसकी चुनमूनियाँ के अन्दर झटके मारने की जगह भी नहीं मिल रही थी।

खैर मेरा लण्ड वीर्य निकलने के बाद कुछ ढीला हुआ, मैं धीरे से उठा, देखा तो ललिता की चुनमूनियाँ से खून का ज्वालामुखी फट गया था, उसकी जांघ, मेरी जांघ और चादर खून से सनी हुई थी, उसकी चुनमूनियाँ से अब गाढ़ा खून (मेरे वीर्य की वजह से) निकल रहा था।

मैंने देखा ललिता बेहोश सी लग रही थी, मैं जल्दी से रसोई में गया और पानी की बोतल लाकर उसके चेहरे पर पानी के छीटें मारे, उसने धीरे से आँखें खोली, मुझे उसकी करराहट साफ़ सुनाई दे रही थी, आँखों से आंसू बंद ही नहीं हो रहे थे।

मैं वहीं पास में ही बैठ गया और उसके बालों को सहलाने लगा। थोड़ी देर बाद वो कुछ सामान्य हुई, तो मैंने उसे कहा- जान, चलो मैं तुम्हारी चुनमूनियाँ को साफ़ कर दूँ, आज मैंने तुम्हारी चुनमूनियाँ का उद्घाटन कर दिया है।

उसने थोड़ा उचक कर अपनी चुनमूनियाँ को देखा और बोली- भैया यह क्या कर दिया आपने?

मैंने कहा- बेटा परेशान मत हो, पहली बार तो यह होता ही है और अच्छा हुआ कि मैंने कर दिया, अगर कहीं बाहर करवाती तो पता नहीं कितना दर्द होता ! चलो अब उठो भी !

क्रमशः..................


RE: Hindi Porn Stories हिन्दी सेक्सी कहानियाँ - sexstories - 08-20-2017

नेहा और सीमा की तबीयत रंगीन--1



जिस सहर मैं रहता हू वो बहुत ही छोटा सहर है. सहर का पूरा मार्केट एक ही जगह है. हमारे देश के बड़े बड़े नेता जब यहा आते हैं तो यहाँ की फ़िज़ा देख कर उनकी तबीयत रंगीन हो जाती है. एक बड़ी सी झील सागर सहर को बहुत खूबसूरत बनाती है. छोटे सहर मैं चुदाई का मौका बहुत कम मिलता है. सागर वैसे भी बहुत सेक्सी लॅडीस से भरा पड़ा है. 

मैं उस समी करीब 20-22 साल का रहा हूँगा जब यह सब कुछ हुआ. अब मैं 28 मे चल रहा हू और रोज बढ़िया चुदाई करता हू. हमारे सहर मैं तीन बत्ती के पास एक दुकान है उसका नाम है "शंकर जनरल स्टोर्स" वहाँ पर लॅडीस के अंडर गारमेंट्स, कॉसमेटिक्स आइटम्स और जेंट्स अंडरगार्मेंट्स आछे मिलते हैं मैं वही से अपनी चड्डी बनियान और अखाड़े के लिए लंगोट भी लेता था. वो एक सिंधी की दुकान थी. 

एक बार मैं उस दुकान पर अपनी चड्डी बनियान लेने गया. कुछ लॅडीस भी अपना समान ले रही थी. मैने अपनी चड्डी बनियान और लंगोट ली. और उसी दुकान से एक कॉंडम का पॅकेट भी खरीद रहा था. मेरे साइड मे दो औरते करीब 30-32 साल की और उनके साथ एक लड़की 25-26 साल की बड़ी ही गदराई जवानी थी उन तीनो की. औरते तो शादीशुदा थी लड़की की शादी नही हुई थी. जब मैं कॉंडम खरीद रहा था तो मैने दुकान दार से कहा कि बड़ा साइज़ वाला और मजबूत देना प्रेशर मैं फट जाता है. मेरा इतना कहना था कि उन तीनो लॅडीस का ध्यान मेरी तरफ चला गया और जब मैने उनकी और देखा तो वो कुछ शरमाते हुए मुस्कुराने लगी. तभी वो कुछ शेविंग क्रीम और एक मर्दों की शेविंग रेज़र, सेसर खरीद ने लगी. तो मुझे कुछ अजीब सा लगा कि यह औरत मर्दों का समान क्यों खरीद रही है. मैने कौतूहल वस पूछा कि क्या मैं जान सकता हू कि आप लोग यह शेविंग क्रीम और शेविंग का समान क्यों खरीद रही है. इस पर वो ज़ोर से हस पड़ी. तो मैं चुपचाप अपना पेमेंट कर वाहा से चलने लगा. मैं दूसरा समान खरीदने लगा. थोड़ी देर बाद भीड़ मैं किसी ने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे एक तरफ खीच लिया. जब मैने उसकी तरफ नज़र डाली तो देखता हू कि यह तो उन्ही तीन लॅडीस मे से एक लेडी है. मैं पहले तो घबरा गया. फिर मैं हिम्मत जुटाते हुए बोला कि तुम क्या चाहती हो. तो वो बोली" तुम्हारी शादी हो गई'. मैने कहा नही हुई. उसने कहा तुम पूछ रहे थे कि "शेविंग का समान हम क्यों खरीद रहे हैं: जानना चाहते हो तो इस पते पर सॅटर्डे की दोपहर मैं आ जाना" इतना कहती हुई वो एक विज़िटिंग कार्ड मेरे को थमा कर भीड़ मैं गुम हो गई. 

मैं सॅटर्डे को उसके घर पहुचा उसके बताए हुए टाइम पर. बेल जैसे ही बजाई अंदर से उसी औरत की आवाज़ सुनाई दी "दरवाजा खुला है आ जाओ". मैने जैसे ही दरवाजे को धकेला तो वो खुल गया मैं अंदर पहुचा तो उसने सेक्सी मुस्कुराहट से मेरा स्वागत किया. वो पीले रॅंड की शॉडी पहनी हुई थी और साड़ी टूडी के नीचे से बाँधी थी उसके दूध बड़े बड़े थे. उसने मुझे ड्रवोयिंग मैं बिठाया और वो कहने लगी मैं अभी आई. आप क्या लेंगे चाइ कॉफी ठंडा या कुछ स्ट्रॉंग मैने कहा चाइ वो बोली ठीक है. 
जाकर पहले मैन डोर लॉक किया और किचन मैं चली गई. सेंटर टेबल पर एक इंग्लीश फेमिना मॅग्ज़ाइन पड़ी थी मैं उसके पन्ने पलटने लगा. वो तुरंत ही किचन से दो कप चाइ के साथ लौट आई. उसनेचाइ की ट्रे लेमेरी तरफ झुकते हुए अपनी दोनो गोलाईयो के दर्शन कराते हुए टेबल पर रख दी. और एक कप उठाकर मेरे तरफ बढ़ाया ' लीजिए" मैने उसके हाथो को पहली बार छुआ और लंड मैं हलचल शुरू हो गई. वो अपनी चाइ लेकर उसी सोफे पर जिस पर मैं बैठा था थोड़ी दूर बैठ गई. मैने उसका नाम पूछा तो उससने सीमा बताया. हम दोनो हल्की बाते करते रहे जिससे हम दोनो थोड़े सहज हो गये. मैने उसका हाथ अपने हाथ मैं लेकर कहा कि आप बहुत ही सुंदर और सेक्सी लगती है. इस पर वो शर्मा गईऔर मेरे स्पर्श का असर उसके गालों पर दिखने लगा था. मैने उसके हाथ पर अपना हाथ फिराते हुए उसके कंधे तक ले गया जिससे वो कुछ सिहरने लगी थी मैने समझ लिया थी कि वो अब चुंबन के लिए तैय्यार है तो मैने उसको खड़ा किया और अपनी बाहों मे लेकर उसके गालों पर प्यार भर चुबन दिया और उसको अपनी बाहों मे जोरों से कस लिया उसकी आँखो मे आँखे डाले देखता रहा. और ऐसे मैं उसके दूध बहुत कड़े थे जो मेरी छाती से चिपके थे और उसकी चूत पर मेरा कड़ा हल्लाबी लॉडा चिपका हुआ था साड़ी के उपर से. मैने मौका देखा और उसके होंठ चूसने लगा. लंबी फ्रेंच किस के साथ साथ मैं उसकी पीठ और साड़ी के ऊपर से ही उसकी गांद सहला रहा था. वो पहले तो रेज़िस्ट कर रही थी फिर मेरी बाहों मे मोम की तरह पिघलना शुरू कर दी. मैने कहा तुम्हारे दूध तो बड़े सेक्शी है और कहते हुए ब्लाउस के ऊपर से ही उनको लिक्क करने लगा वो ब्रा नही पहनी थी. मेरे होंठ उसके बूब्स पर टच होते ही उसकी सिसकारी निकलने लगी. मैं एक हाथ से उसका एक दूध दबा रहा था और एक हाथ उसकी प्यारी चूत पर फिरा रहा था. साड़ी के ऊपर से चूत पर हाथ फेरने मे इतना मज़ा आ रहा था तो नंगी चूत पर जब मैं हाथ फेरूँगा तो कितना मज़ा आएगा यह सोच कर मेरी उत्तेंजना और बढ़ गई. मैने कहा "सीमा डार्लिंग तुम वो शेविंग के समान के बारे मैं बताने वाली थी". बोली "जन्नू देव बेडरूम मे चलकर बताती हू" मैने उसको अपनी बाँहो मैं उठाकर उसको बेड रूम तक ले गया वो मेरी बाहों मैं थी तो उसके दूध मेरी छाती से चिपके थे. मेरा हल्लाबी लॉडा बहुत कड़क हो रहा था. मैने उसको ले जाकर पलंग पर लिटाया और उसको सिर से लेकर पेर तक चूमा फिर पेर से धीरे धीरे अपनी जीव ऊपर की ओर फिराता हुआ उसकी साड़ी ऊपर खिसकाने लगा उसकी टांगे बिल्कुल मखमली थी और एक अजीब से खुसबू उस्मै से आ रही थी. मैं साड़ी उसकी जाँघो तक उठा चुका था और मैं उसको तरसाना चाहता था तो मैं मूह जाँघ से ऊपर उठा कर उसकी टूडी पर ले आया और टूडी के गद्दे के चारो और अपनी जीव की नुक को गोल गोल घूमने लगा और काबी अपनी जीव उसकी गद्दे मई डाल दिया. एक हाथ से मैं उसके दूध मसल रहा था. मेरी इस हरकत से वो काफ़ी गरमा गई थी. 

मैने कहा सीमा डार्लिंग बताओ तुम क्यों वो समान खरीद रही थी. बोली पहले कपड़े तो उतारो. तो मैने उसकी साड़ी खोला फिर पेटिकोट. वो चड्डी काली कलर की पहने हुए थी जो चूत के पास काफ़ी गीली थी. मैने कहा क्या तुमने मूत लिया बोली नही डियर मैने इतनी देर मे दो बार पानी छोड़ दिया है मैं उसकी पॅंटी की लाइन्स पर उंगली फिरा रहा था जिससे वो मछली की तारह तड़पने लगी थी बोली जानी जल्दी करो मैं बहुत भूकि हू बहुत पयासी हू मैने कहा पहले वो राज बताओ बोली की देखो और उसने तुरंत झटके से अपनी चड्डी उतार दी बोली लो जान लो राज. वाह क्या एक दम सफ़ा चट बड़ी सावली सी चूत और उसपर उसका तना (क्लिट) सॉफ नज़र आ रहा था मैं उसकी चूत की खूबसूरती को देखता ही रह गया. मेरे से बर्दास्त नही हो रहा था मैने उसके पेर फैलाए और उसकी बुर के किनारो पर उसको चूमना चाटना शुरू कर दिया. सीमा दोनो हाथो से मेरे सिर को अपनी बुर् पर दबाने की कोशिश कर रही थी साथ ही साथ अपनी टाँगो को भी सिकोड कर मुझे अपनी बुर पर खिचना चाह रही थी. पर मेरी मजबूत पकड़ के कारण वो ऐसा करने मैं अपने को असहाय महसूस कर रही थी. 

मैं अब उसकी बुर का मैन दरवाजा और क्लिट बारी बारी चूस-चाट रहा था वो तड़प रही थी. सीमा कह रही थी आहह रजाआआआ सीईईईईईईईईई यह क्या हो रहा हाईईईईईईईई. मेरे बदन मैं तुमने सालों बाद आग लगा दी हाईईईईईईई हयययययययययययययी अप्प्प क्या होगाआआआआआआ शियैयीयी कहती हुई उसकी बुर झार गई मैं उसका पूरा रस पी गया मैने उसकी बुर चटाना चालू रखा वो जल्दी गरम हो गई. अब वो चुदसी थी मैने अभी अपने पूरे कपड़े पहने थे जबकि वो सिर्फ़ ब्लाउस पहने थी उसने अपना ब्लाउस खुद खोला और कहने लगी राजा अपना वो एक्सट्रा लार्ज कॉंडम वाला लंड तो दिखाओ मैं उसी दिन से हज़ारो वार तुम्हारे लंड के लिए उंगली कर चुकी हू हे जल्दी करो. मैने कहा यह शुभ काम तुम खुद करो पर एक शर्त है बोली मुझे शर्ते सभी मंजूर है जल्दी करो मैं उसके बगल मैं लेट गया और वो मेरे कपड़े उतारने लगी जैसेही उसने मेरे हल्लाबी लंड के दर्शन किए वो मूह पकड़ कर चिल्ला उठी है हिया इतना मोटा और लंबा मैं तो मर जाऊंगी. मैने कहा पहले इसे प्यार तो करो मेरा लॉडा उसकी चूत और उसके मुम्मो को सलाम कर रहा था. वो मेरा लॉडा खाने लगी और बेतहासा चूसने लगी. मैने कुछ देर उसके मम्मो के साथ खेला और सीमा की चूत को अपनी मूह मे ले लिया हम दोनो 69 मेहो गये थे. सीमा की बुर मे सौच मूच मे आग लगी हुई थी. उसका डाइवोर्स हुए 3 साल हो गये थे तब से उसकी चुदाई नही हुई थी. मैं जिस स्टाइल से चूत चाट रहा था बोली मेरे पहले पति मनोज भी इसी तरह से चूत चाटते थे पर इतनी महारत उनमे नही थी जितनी तूमम मे है तुम तो आग ही लगा दिए हो मेरे शरीर मे. अब तो जल्दी से चोदो. 
मैने उसको लिटाया पीठ के बल और उसकी दोनो टांगे फैला दी और उसकी बुर मे कुछ देर उंगली करी उसकी चूत उसके ही पानी से काफ़ी तर थी मैने अपना हल्लाबी लॉडा अपने हाथ मे लेकर उसके दरवाजे से टीकाया और उसकी बुर पर हल्के हल्के फेरने लगा वो और गरमा गई और थोड़ा यौबान रस छोड़ने लगी और बोली आप पेल दो नही तो मर जाऊंगी मैने उसकी दोनो टाँगो को उसकी छाती की तरफ मोड़ा जिससे उसकी बुर खुल गई और लंड उसके लव होल पर टीका कर बड़े प्यार से धीरे धीरे अंदर सरकाने लगा जैसे-जैसे मैं अंदर सरकाता पहले तो वो चीखती हाई मैं मर गई और दूसरे ही पल कहती देव तुम तो मास्टर हो चुदाई मे मज़ा आने लगा ऐसा कहती अभी मेने 1 इंच ही पेला था 6.6. इंच बाहर था मैं ऐसे मे ही उसको हल्के हल्के धक्के लगाने लगा जिससे वो दर्द और मज़ा दोनो के मिले जुले भावों के समुंदर मैं तैरने लगी जैसे ही मस्त होती मैं 1-1 इंच सरकाता गया लगभग 5 इंच घुसाने के बाद मैं उसके मम्मो को चूसने लगा और एक हाथ से उनको मसल्ने लगा वो दर्द मे छटपटा रही थी मेरे हल्लाबी लौडे ने उसकी बुर का भोसड़ा बना दिया था मैं जोरो से उसके निप्पल्स चूसने लगा थोड़ी देर मैं वो सहज हो कर मज़ा लेने लगी और अपनी कमर हिलाने की कोशिश करने लगी मैने अपने होंठ उसके होंठो पर रखे और पूरी ताक़त से पूरा हल्लाबी लॉडा उसकी बुर मे पेल दिया और तबाद तोड़ धक्के मारने लगा मैं उसकी कमर भी जोरो से पकड़े था जिससे वो हिल नही पा रही थी और होंठ दबाए था चिल्ला नही पा रही थी सिर्फ़ आँखू से आँसू बह रहे थे कुछेक धक्के मार कर मैं थम गया और लॉडा थोड़ा बाहर खींच कर उसकी बुर पर मालिस करी हाथ से और उसकी चुचियों को चूसने लगा जैसे ही उसके होंठ फ्री हुए बोली अपना मूसर जैसा लंड बाहर निकालो मैं मर जाऊंगी मैं उसके मम्मो को चूस रहा था और दबा रहा था साथ ही साथ उसकी चूत पर मालिश भी कर रहा था जिससे वो जल्दी ही तैश मैं आ गई. और बबाड़ाने लगी, हाई राजा सही मायने मे मुझे आज मर्द ने चोदा है चोदो राजा फ़ाआआआद दो मेरी चूवततत्त को यह तुम्हारी हाईईईईईईईई तुम्ही हो लंड बहादुर्र्र्ररर बाकी तो सब गॅंडोवावू हाईईईई चोदो मैने उसको चोदना जारी किया वो मेरे हर धक्के का जवाब नीचे से देने लगी थी मैने अपनी स्पपीड़ बड़ा दी तो बहुत उछल उछल कर चुदाई करवाने लगी हाई राजा मारूऊओ. इस मदर्चोद चूत ने कई गाजर, मूली बेगान खाए है इन 3 सालो मे सही इसकी खुराक आज मिली हाईईईई.... हाईईइ चोदो राजा तुमको पता है औरत की क्या खुराक है " मैने कहा हाअ; बोलो तो बताओ मैने कहा" चूत भर लंड तभी दूर हो चूत की ठंड ले रंडी और ले............ और लीईईईईईई सीमा बोली हाअ राजा ऐसे हैई और तेजज़्ज़्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज हाईईईईईईईईईईई मैं आअनी वाली हूऊऊओ ही ..........शीयी... सीईईईईईईईईईईईईईईईई.. आईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई मैं गैईईईईईईईई और उसकी गर्दन एक तरफ लूड़क गई उसने बहुत सारा पानी छोड़ा मैं उसको तूफ़ानी रफ़्तार से चोद रहा था लेकिन मैं झरने का नाम ही नही ले रहा था. मैने उसको कहा कि मैं वैसे भी लेट झरता हू और जब मैं चाहु तब झरता हू पर आज तो बात कुछ और ही हाईईइ तुम्हारी चूत मे तो बहुत रस है मेरे लौडे को बहुत पसंद आई तुम्हारी चूत... ले और ले मैं जोरो से उसे आसान बदल कर चोद रहा था जब उसकी चूत 3-4 बार झाड़ चुकी तो बोली देव मुझे आराम करने दो तुम अभी नही झरोगे क्योनि की मैने चाइ मे दवा मिला दी थी......... मुझे गुस्सा आ गया उसकी इस बात पर मैने पास पड़ी उसकी साड़ी उठाई उसके दोनो हाथ उसके पीठ पर बाँध दिए. सीमा कहने लगी यह क्या कर रहे हो मैं बोला बिल्कुल चुप. फिर उसकी साड़ी फाड़ कर उससे उसका मुह बाँध दिया अब उसके दोनो पेर और बाँधने थे मैने पलंग के पाए से उसके दोनो पैर बाँध कर उसको पलंग पर झुका कर बाँध दिया. उसकी छाती के नीचे तकिया लगा दिया. मैं बहुत गुस्से मे और मेरा लॉडा उससे भी ज़्यादा गुस्से मे था. मैने कहा अरी मदर्चोद बता क्रीम कहा रही है तो उसके इशारे से ड्रेसिंग टेबल की तरफ बताया मैं पॉंड्स क्रीम की पूरी बड़ी बॉटल उठा लाया और उसकी गांद जो की कुँवारी थी उस पर लगाया वो चीखना चाहती थी और हाथ पाव पटकना पर बँधी होने के कारण ऐसा नही कर पा रही थी मैने उसकी गांद के छोटे से छेद मे आधी से ज़्यादा पॉंड्स कीम की डिब्बी से क्रीम भर दी और अपने लंड पर भी खूब लगाई फिर कमरे मे इधर उधर नज़र दौड़ाई तो एक गोल डंडा पड़ा मिला पहले मैने वो डंडा उसकी गांद मे डाल कर उसको दही जैसा माथा फिर अपनी उंगलिओ से माथा जिससे थोड़ा छेद खुल सा गया मैने फिर उसके कानो मे कहा रे मदर्चोद अब तेरी गांद मारी जाएगी यह तेरी सज़ा है वो रो रही थी मैने आव-देखा-ना-ताव और अपना लंड उसकी गांद की छेद पर टीकाया और थोड़ा सुपरा अंदर किया वो अपना सिर बिस्तर पर पटक रही थी छटपटा रही थी कुछ देर मैं ऐसे ही रहा फिर थोड़ा आगे पीछे हिलता हुआ पूरा का पूरा लॉडा एक ही स्ट्रोक मे उसकी गांद की जड़ तक घुसेड दिया और जबरदस गांद मराई शुरू कर दी वो छटपटा रही थी और मैं उसकी कमर को थामे धक्के लगा रहा था फिर मैने उसके मम्मो को अपने कब्ज़े मे किया और उनको जोरो से मसलने लगा मैं जोरो से उसकी गांद मार रहा था उसकी गांद से खून बह रहा था मैं ने उसपर कोई रहम नही किया और लगा रहा जब मुझे लगा कि अब मैं झरने के करीब हू तो मैने उसकी बुर मे लॉडा पेल दिया और तबाद तोड़ धक्के मारे. मैं झाड़ा साथ ही साथ उसकी बुर भी झरी मैने अपना लॉडा वैसे ही पोज़िशन मे उसकी बुर मे रखा और उसको कहा देखो सीमा रानी अब तुमको जन्नत का मज़ा मिलने जा रहा है मैं तुम्हारा मूह खोल रहा हू चिल्लाना नही. चिल्लाओगी तो फिर तुम्हारी शामत आ जाएगी कहते हुए मैने उसका मुह खोल दिया वो रो रही थी. बोली तुम बहुत बेरहम ईसान हो तुमने मेरी गांद फाड़ डाली गांद नही मरवाने के कारण ही तो मेरा तलाक़ हुआ था मैने कहा शांत हो जाओ जनेमन्न्न जो हहो चुका सो हो चुका अब जो होने वाला है उसका मज़ा क्यों खराब कर रही हो. वो बोली अब कैसा मज़ा मेरी गांद मे बहुत दर्द हो रहा है मैं 1-2- महीने तक ठीक से बैठना तो एक तरफ़ टट्टी भी नही कर पाऊँगी मैने कहा अभी देखो एक जादू होने वाला है. और मैने उसकी बुर मे पेशाब करना चालू किया वो फिर से सिहरने लगी मेरे पेशाब की धार उसकी बुर मे तेज़ी से अंदर जा रही थी और बह रही थी उसको भी बहुत मज़ा आया. मैने उसके हाथ पैर खोल दिए थे वो वही निढाल होकर गिर पड़ी. मैने उसको उठाकर बाथरूम ले जाने की कोशिश करी लेकिन वो चल नही पा रही थी तो मैं उसको अपनी बाहों मे ले गया और उसको साफ कर बिस्तर पर पटक दिया और उसके किचन से उसको हल्दी डला दूध गुड के साथ और कुछ खाने को ले आया और मैं तय्यार होकर वाहा से चला गया. कुछ दिन बाद उसने मेरे को फोन किया और बुलाया


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