Holi sex stories-होली की सेक्सी कहानियाँ - Printable Version

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RE: Holi sex stories-होली की सेक्सी कहानियाँ - sexstories - 11-01-2017

'नहीं, अंकल यहाँ नहीं....हम लोग मचान पर चलते हैं. वहां हमें कोई डर नहीं रहेगा' हर्षा बोली. 'ठीक है चलो' मैंने कहा मचान का नाम सुन कर मै भी खुश हो गया. वहीँ पास में एक आम के पेड़ पर मचान बनी थी....मैंने हर्षा को सहारा देकर ऊपर मचान पर चडा दिया और फिर मैं भी ऊपर चढ़ गया. अब हमें देखने वाला कोई नहीं था....

मचान पर नर्म नर्म पुआल बिछी थी, जिस पेड़ पर मचान बनी थी उसमे ढेर सारे बड़े बड़े आम लटक रहे थे....इक्का दुक्का तोते आमों को कुतर रहे थे.

हर्षा सहमी सिकुड़ी सी मचान पर बैठ गयी. मै उसके पास में लेट गया और उसका हाथ पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिया. वो मेरे सीने से आ लगी. मैं धीरे धीरे उसके अंगों से खेलने लगा. वो हल्का फुल्का विरोध भी कर रही थी...उसके मुंह से ना नुकुर भी निकल रही थी,मैंने हर्षा की कुर्ती में हाथ डाल दिया और उसके दूध दबाने लगा. उसका निचला होठ अपने होठो में लेकर मैं उसकी निप्पलस चुटकी में भर कर धीरे धीरे मसलने लगा. धीरे धीरे हर्षा भी सुलगने लगी. आखिर जवान लड़की थी, मेरे हाथों का असर तो उस पर होना ही था.

फिर मैंने उसकी सलवार का नाडा पकड़ कर खींच दिया....और उसकी चड्ढी में हाथ डाल दिया. हर्षा को मानो करेंट सा लगा....उसका सारा बदन सिहर उठा....हर्षा की चिकनी चूत मेरी मुट्ठी में थी. वो सच में अपनी चूत को शेव कर के आई थी. मैंने खुश होकर हर्षा को प्यार से चूम लिया..और उसकी चूत से खेलने लगा.

हर्षा का विरोध अब ख़तम हो चुका था और वो भी मेरे साथ रस लेने लगी थी. फिर मैंने उसकी सलवार निकाल दी...और जब चड्ढी उतारने लगा तो हर्षा ने मेरा हाथ पकड़ लिया....'अंकल जी, मुझे नंगी मत करो प्लीज' वो अनुरोध भरे स्वर में बोली. लेकिन अब मैं कहाँ मानने वाला था. मैंने जबरदस्ती उसकी चड्ढी उतार के अलग कर दी. और फिर उसकी कुर्ती और ब्रा भी जबरदस्ती उतार दी.

उफ्फ्फ, कितना मादक हुस्न था हर्षा का. उसके दूध कैद से आजाद होकर मानो फूले नहीं समां रहे थे. हर्षा की गोरी गुलाबी पुष्ट जांघो के बीच में उसकी चिकनी गुलाबी चूत....मैं तो हर्षा को निहारता ही रह गया.....तभी वो शरमा के दोहरी हो गयी और उसने अपने पैर मोड़ कर अपने सीने से लगा लिए. और अपना मुंह अपने घुटनों में छिपा लिया.

मैंने भी अपने सारे कपडे उतार दिए और हर्षा को जबरदस्ती सीधा करके मैं उसके नंगे बदन से लिपट गया. जवान कुंवारी अनछुई लड़की के बदन से जो मनभावन मादक गंध आती है....हर्षा के तन से भी उसकी हिलोरें उठ रही थी....मै हर्षा के पैरों को चूमने लगा...उसके पैरों की अँगुलियों को मैंने अपने मुंह में भर लिया और चूसने लगा. फिर मेरे होंठ उसकी टांगो को चूमते हुए उसकी जांघो को चूमने लगे.

हर्षा के बदन की सिहरन और कम्पन मै महसूस कर रहा था. फिर मैंने अपनी जीभ उसकी चूत पे रख दी. हर्षा की चूत के लब आपस में सटे हुए थे...मैंने धीरे से उसकी चूत के कपाट खोले और अपनी जीभ से उसका खजाना लूटने लगा....तभी मानो हर्षा के बदन में भूकंप सा आ गया. उसने मेरे सिर के बाल कस कर अपनी मुट्ठियों में जकड लिए.

उसने अपनी कमर ऊपर उठा दी...फिर मैंने अपनी अंगुली की एक पोर उसकी चूत में घुसा दी और उसके दूध चूसने लगा...हर्षा का दायाँ दूध मेरे मुंह में था और उसके बाएं दूध से मै खेल रहा था...

तभी हर्षा मेरी पीठ को सहलाने लगी.....'अंकल जी, हटो आप..बहुत देर हो गयी, अब मुझे जाने दो' वो थरथराती आवाज में बोली....औरअपनी टाँगे मेरी कमर में लपेट दीं. हर्षा अपने मुंह से कुछ और कह रही थी लेकिन उसका नंगा बदन कुछ और ही कह रहा था. मै हर्षा को जिस मुकाम पे लाना चाहता था वहां वो धीरे धीरे आ रही थी.

फिर मैं उसके ऊपर लेट गया...मेरे लण्ड में भरपूर तनाव आ चुका था. और मेरा लण्ड हर्षा की चूत पे टकरा रहा था. मैं उसके ऊपर लेटे लेटे ही उसके गाल काटने लगा.

'अंकल जी, गाल मत काटो ऐसे...निशान पड जायेंगे' वो बोली....लेकिन मैंने अपनी मनमानी जारी रखी

'अब नहीं रहा जाता...' वो बोल उठी.

हर्षा की आँखों में वासना के गुलाबी डोरे तैरने लगे थे. उसकी कजरारी आँखे और भी नशीली हो चुकी थी. फिर मैं उठ कर बैठ गया और हर्षा को खींच कर मैंने उसका मुंह अपनी गोद में रख लिया. और मैं अपना लण्ड उसके गालों पर रगड़ने लगा...

'हर्षा, मेरा लण्ड अपने मुंह में लेकर चूसो ' मैंने कहा.

'नहीं, अंकल जी ये नहीं' वो बोली.

'तो ठीक है...मत चूसो, अपने कपडे पहिन लो और जाओ अब' मैंने कहा

तब हर्षा ने झट से मेरा लण्ड पकड़ लिया और झिझकते हुए अपने मुह में ले लिया....और चूसने लगी. मै तो जैसे पागल सा हो उठा...कुछ देर बाद उसने मेरी foreskin नीचे करके मेरा सुपाडा अपने मुंह में भर लिया और वो बड़ी तन्मयता से मेरा लण्ड चूमते चाटते हुए चूसने लगी.

मैंने भी हर्षा का सिर पकड़ लिया और उसे अपने लण्ड पर ऊपर नीचे करने लगा. मेरा लण्ड हर्षा के मुंह में आ जा रहा था.

कुछ देर मै यू ही हर्षा का मुंह चोदता रहा...और साथ में उसकी चूत की दरार में अपनी अंगुली भी फिराता रहा...

'अंकल जी, अब नहीं होता सहन....आप और मत तरसाओ मुझे....जल्दी से मुझे अपनी बना लो' हर्षा कांपती सी आवाज में बोली.

'ठीक है मेरी जान...मैं भी तड़प रहा हू तुम्हे अपनी बनाने के लिए.....हर्षा, अब तुम सीधी लेट जाओ और अपने पैर अच्छी तरह से फैला कर अपनी चूत की फांके खोल दो पूरी तरह से' मैंने कहा

'जी, अंकल...हर्षा शरमाते हुए बोली' और फिर उसने अपनी टाँगे फैला के अपनी चूत के होंठ अपनी अँगुलियों से खोल ही दिए

मुझे लड़की का ये पोज सदा से ही पसंद है...जब लड़की नंगी होकर अपनी चूत अपने हाथों से खोल कर लेटती है....

फिर मैंने हर्षा की खुली हुयी चूत के छेद से अपना सुपाडा सटा दिया और उसकी हथेलियाँ अपनी हथेलियों में फंसा कर धीरे धीरे अपना लण्ड उसकी चूत में घुसाने की कोशिश करने लगा. कुंवारी चूत के साथ थोड़ी मुश्किल तो होती ही है. मैंने अपने लण्ड को खूब सारा चमेली का तेल पिलाया था....और फिर हर्षा के चूसने के बाद मेरा लण्ड काफी चिकना हो चुका था.

अंततः मेरी मेहनत रंग लायी. और मेरा लण्ड हर्षा की चूत की सील को वेधता हुआ, उसका कौमार्य भंग करता हुआ उसकी चूत में समां गया.

हर्षा के मुंह से एक घुटी घुटी सी चीख निकली, उसने मुझे परे धकेलने की कोशिश की लेकिन मेरे हथेलियों में उसकी हथेलियाँ फंसी हुयी थी....वो बस तड़प के ही रह गयी.

'उई माँ...मर गयी...' हर्षा के मुंह से निकला...'हाय अंकल, निकाल लो अपना बाहर ...मुझे नहीं चुदवाना आपसे'

लेकिन मै बहुत धीरे धीरे आहिस्ता आहिस्ता उसकी चूत में अपने लण्ड को चलाता रहा. मेरा लण्ड हर्षा की चूत में रक्त-स्नान कर रहा था..और वो मेरे नीचे बेबस थी.

'आह, अंकल...बहुत दुख रही है...' हर्षा बोली. उसकी आँखों में आंसू छलक आये. मुझसे उसकी तड़प देखी नहीं जा रही थी; लेकिन मै कर भी क्या सकता था. मैंने प्यार से उसकी आँखों को चूम लिया, उसके गालों को अपना प्यार दिया..और अपनी धीमी रफ़्तार जारी रखी.

जैसा की आदि काल से होता आया है, कामदेव ने अपना रंग दिखाना शुरू किया तो हर्षा को भी मस्ती चड़ने लगी...उसके निप्पलस जो पहले किशमिश की तरह थे अब कड़क हो कर बेर की गुठली जैसे हो चुके थे. और उसका पूरा बदन कमान की तरह तन चुका था. अब हर्षा के हाथ भी मेरी पीठ पर फिसलने लगे थे.

थोड़ी देर बाद उसके मुंह से धीमी धीमी किलकारियां निकलने लगीं. तब मैंने चुदाई की स्पीड थोड़ी तेज कर दी. और अपने लण्ड को पूरा बाहर तक खींच कर फिर से उसकी चूत में पूरी गहराई तक घुसा कर उसे चोदने लगा...

'हाँ, अंकल जी, ऐसे ही करो...थोडा और जल्दी जल्दी करो ना' हर्षा अपनी कमर उठाते हुए बोली.

'हाँ, ये लो मेरी जान...' मैंने कहा और फिर मैंने अपने स्पेशल शोट्स मारने शुरू कर दिए.

'अंकल जी, अब बहुत मजा दे रहे हो आप...हाँ '

'तो ये लो मेरी रानी ...और लूटो मजा...क्या मस्त जवानी है तेरी, हर्षा' मैंने कहा

'अंकल जी, ये हर्षा ठाकुर आपके लिए ही जवान हुयी है.....आप लूटो मेरी जवानी को, जी भर कर भोग लो मेरे शरीर को ... खेलो मेरे जिस्म से, रौंद डालो मेरी चूत को, फाड़ दो मेरी चूत आह.........जैसे आप चाहो वैसे खेलो मेरी अस्मत से...

जी भर के लूटो मेरी इज्जत को...अंकल कुचल के रख दो मेरी चूत को; बहुत सताती है ये चूत मुझे' हर्षा पूरी मस्ती में आके बोले जारही थी....

फिर मैं हर्षा के क्लायीटोरिस को अपनी झांटो से रगड़ रगड़ के उसकी चूत मारने लगा, उछल उछल कर उसकी चूत कुचलने लगा. (बनाने वाले ने भी क्या चीज बनाई है चूत भी...कितनी कोमल, कितनी नाजुक, कितनी लचीली, कितनी रसभरी लेकिन कितनी सहनशील...कठोर लण्ड का कठोर से कठोरतम प्रहार सहने में सक्षम...)

'आईई अंकल....उफ्फ्फ....हाँ ऐसे ही...' वो बोली और मेरे धक्कों से ताल में ताल मिलाती हुयी नीचे से अपनी कमर चलाते हुए टाप देने लगी


RE: Holi sex stories-होली की सेक्सी कहानियाँ - sexstories - 11-01-2017

चुदो चुदाओ होली में - गांड मराओ होली में


भाभी, आज मैं तुम्हे नहीं छोडूंगा, आज तो मैं तेरे सारे बदन पर रंग लगा कर रहूँगा . चाहे तू मुझसे नाराज़ हो जाये, चाहे मुझे डांटे, चाहे मुझे अपने घर से निकाल दे, लेकिन आज मैं तेरे ब्लाउज के अन्दर हाथ दाल कर तेरी मस्त मस्त और इन बड़ी बड़ी चूंचियों पर रंग जरुर लगाऊंगा . फिर पेटीकोट के अन्दर हाथ घुसेड कर तेरी चूत में रंग लगाऊंगा . आज मैंने ठान लिया है की भाभी की चूत और चूंचियां रंग कर ही आऊँगा .
भाभी ने कहा अच्छा तो तू बड़ा सयाना बनता है रे ? तूने ही अपनी माँ का दूध पिया है क्या ? अगर तू मेरी चूत में लगाएगा रंग तो मैं भी तेरे लण्ड को रंग दूँगी . तेरे पेल्हड़ रंग दूँगी . तेरी गांड में घुसेड दूँगी रंग . तुझे नंगा करके और तेरे सारे बदन पे रंग लगाकर ही भेजूंगी यहाँ से ? मैं तेरे इस मादर चोद लण्ड से डरती नहीं हूँ . मैं पहले भी कई लण्ड रंग चुकी हूँ .ऐसा रंग लगाऊंगी तेरे लण्ड में की तू महीनो अपना लण्ड ही धोता रहेगा .
मैंने मन में सोचा बड़ी जबरदस्त है मेरी भाभी इसे चोदने में तो वाकई बड़ा मज़ा आएगा .
बस मेरा मन गुनगुनाने लगा :-
चुदो चुदाओ होली में - गांड मराओ होली में .
भाभी की बुर होली में, मेरा लौड़ा होली में . 
लौड़ा चूसो होली में, चूत चुदाओ होली में. 
चूंची मसलों होली में, लौडा पेलो होली में . 
इतने में मैंने देखा की भाभी ने बाहर का दरवाजा बंद कर दिया . अब घर में केवल मैं और भाभी . मेरी नीयत तो भाभी पर पहले ही खराब हो चुकी थी . मेरा लण्ड पैजामा के नीचे गुलाचे मार रहा था . मैंने कहा भाभी मैं तुम्हे एक कविता सुनाता हूँ . मैंने यही कविता भाभी को सुना दी तो वह बोली मैं इसमें कुछ और जोड़ देती हू
. चूंची चूसो होली में, लण्ड हिलाओ होली में
झांट बनाओ होली में, चूंची चोदो होली में 
भाभी के मुह से यह सुन कर तो मेरा लण्ड आपे से बाहर हो गया . भाभी जैसे ही मेरे पास आयी मैं उसके चेहरे पर रंग लगाना चाहता था . मैंने हाथ बढाया तो उसने हाथ रोक लिया . मैंने कहा भाभी ये क्या ? बभी ने कहा अबे भोषड़ी के मादर चोद अगर मुझे मुह में रंग लगवाना होता तो मैं दरवाजा क्यों बंद करती ? मुझे अपनी चूत में रंग लगवाना है . अपनी चूंचियों में रंग लगवाना है . चल लगा पहले मेरी चूंचियों पर रंग . भाभी मेरे सामने खड़ी हो गयी . मेरा हाथ ही नहीं बढ़ रहा था . तब भाभी बोली अरे क्या हुआ रे क्या तेरी गांड फट रही है . चल खोल न मेरा ब्लाउज . फाड़ दे मेरा ब्लाउज . फाड़ दे मेरी ब्रा . फिर बाद में जो कुछ फाड़ना हो फाड़ते रहना . मैंने उसका ब्लाउज खोला . और फिर ब्रा खोल दी . उसकी नंगी चूंचियां दखी तो मेरे तन बदन में आग लग गयी . मैं पहली बार किसी औरत की नंगी चूंचियां देख रहा था .
मैंने हाथ बढाया और चूंचियां मसलने लगा . चूमने लगा चूसने लगा चूंचियां . मैं मस्त होने लगा . मैंने थोडा रंग लगाया और फिर खूब सहलाया चूंची . उसके बाद मैंने पेटीकोट का नाडा खोल दिया . भाभी बिलकुल नंगी हो गयी . उसकी चूत बिना झांट की थी . मेरे तो होश उड़ गए . पहली बार बुर देख रहा था . मैंने हाथ लगाया तो भाभी ने कहा अरे साले पहले रंग लगा .
आज रंग दो मेरी बुर चोदी बुर को . 
मैं जब रंग लगाने लगा तो भाभी बोली अबे साले चूत में रंग अपना लौडा खोल कर लगाया जाता है . बस भाभी ने मेरी कमीज फाड़ डाली और मेरा पैजामा खोल दिया . मैं बिलकुल नंगा हो गया . मेरा लण्ड पकड़ लिया भाभी ने . लण्ड साला बढ़ने लगा . जब खूब टन्ना गया तो भाभी बोली हाय दईया कितना बड़ा है तेरा लण्ड ? ये तो भोषड़ी चोदने वाला हो गया है . मोटा भी है रे . इसका सुपाडा एकदम मुर्गी का अंडा लगता है . भाभी ने जैसे ही लण्ड चूमा तो मेरा बदन जलने लगा . उसने मुझे सोफा पर बैठा दिया और नीचे बैठ कर मेरा लण्ड मुह में ले लिया . मेरा लण्ड चूसने लगी भाभी .
दोस्तों, ये है मेरी नेहा भाभी औरमैं हूँ इसका देवर राकी . नेहा भाभी मेरी सगी भाभी नहीं है लेकिन सगी से भी बढ़कर है . मेरे मोहल्ले में रहती है . मुझसे उम्र में २ साल बड़ी है . मैं इनके घर बहुत दिनों से आता जाता था . मैं काफी घुलमिल गया था नेहा भाभी से . उसका सारा काम कर देता था . भाभी किसी भी काम के लिए केवल मुझे ही याद करती थी . हमारी नजदीकियां बढाती गयी . मैं उसकी ओर खिंचता चला गया . मैं जवान हो गया तो भाभी को मन ही मन प्यार करने लगा . चाहने लगा भाभी को . मुझे उसकी उभरी हुई चूंचियां और उभरी हुई गांड बड़ी अच्छी लगती थी . उससे भी ज्यादा अच्छी लगती थी उसकी प्यारी प्यारी बातें . धीरे धीरे भाभी मजाक करने लगी . मैं भी उसी लहजे में जबाब देने लगा . सही बात तो यह है की मेरा लण्ड भाभी के नाम से खड़ा होने लगा . मेरी इच्छा होने लगी की भाभी किसी दिन मेरा लण्ड पकड़ें ? मैं उसकी चूंचियां पकडूँ . लेकिन कभी हिम्मत नहीं हुई . मैं भाभी के नाम का सड़का मारने लगा . उसका नाम ले ले कर मुठ्ठ मारने लगा . मुझे मज़ा आता था . मैं भाभी की चूंचियां देखना चाहता था . भाभी की मैं बुर देखने के लिए मैं तड़प रहा था . मैं भाभी को चोदना चाहता था .
एक दिन किसी काम से भाभी मेरे कमरे पर आ गयी . मैं अकेले ही रहता था . मैंने अपना लैपटाप खोल रखा था . मैं एम् टी वी का वीडियो देख रहा था और उसकी गालियाँ सुन रहा था . मुझे मज़ा आ रहा था . आवाज़ पूरी खोल रखी थी . मैं काम भी करता जा रहा था और गालियाँ भी सुनता जा रहा था . भूल से दरवाजे की सिटकनी खुली रह गयी . अचानक भाभी आ गयी . मैं उस समय बाथ रूम में था . भाभी भी मजे से गालियाँ सुनने लगी . मैं जब बाहर आया तो भाभी को देख कर अवाक रह गया . लैपटाप बंद कर दिया .
मैंने कहा भाभी, आप ? इस समय ? मुझे बुला लिया होता ?
भाभी बोली :- अगर बुला लिया होता तो ये गालियाँ कहाँ सुनने को मिलती ? खोलो खोलो इसे मैं गालियाँ और सुनना चाहती हूँ .
मैंने कहा :- भाभी मुझे क्यों शर्मिंदा कर रही है आप ?
भाभी बोली :- जल्दी खोलो नहीं तो मैं तेरी गांड मारूँगी .
मैंने कहा :- सॉरी भाभी अब आगे से ऐसा नहीं होगा ?
भाभी बोली :- अरे तेरी गांड क्यों फट रही है . अब तू खोल दे नहीं तो मैं भी उसी की तरह तेरी माँ चोदूंगी . भाभी ने यह बात बड़ी सेक्सी अंदाज़ में और आँख मार कर कहा . मेरा लण्ड टन्ना गया . मैंने दरवाजा बंद किया और आवाज़ खोल दी . भाभी ने सारी गालियाँ सुनी और बोली राकी आज से तुम मुझसे गालियों में ही बात करोगे . मैं गालियों में जबाब दिया करूंगी . बड़ा मज़ा आएगा यार ?
यह कह कर भाभी चली गयी . लेकिन मेरा लण्ड खड़ा था और खड़ा ही रह गया .
दो दिन बाद मैं भाभी के घर गया .
भाभी बोली :- आओ भोषड़ी के राकी, कहाँ से गांड मरा के आ रहे हो ?
मैंने कहा :- नहीं भाभी मैं सीधे घर से ही आरह हूँ .
भाभी बोली :- मैंने कुछ सुना नहीं ? पहले गाली दो फिर बात कहो . नहीं तो तेरी मेरी खुट्टी ?
मैंने कहा :- अरे मेरी बुर चोदी भाभी, मैं तो खुद ही किसी की गांड मारने गया था लेकिन उसने उलटे मेरी गांड मार दी .
भाभी बोली :- अबे साले गांडू, तू पहले मुझसे गांड मारना सीख ले . बुर चोदना सीख ले नहीं तो बिना बुर चोदे ही रह जायेगा ज़िन्दगी भर .
मैंने कहा :- भाभी मैं तेरी बुर से ही बुर चोदना सीखूंगा .
भाभी बोली :- अबे माँ के लौड़े, पहले अपना लण्ड तो बुर चोदना वाला बना . मैं बड़े बड़े लण्ड से चुदवाती हूँ किसी छोटे लण्ड से नहीं ?
भाभी ने ऐसा कह कर मेरे सामने अपनी चूंचियां तान कर खड़ी हो गयी . मैंने उसकी चूंचियों पर हाथ रख दिया . सहलाने लगा चूंचियां . भाभी ने मेरे लण्ड पर हाथ मारा . ऊपर से लण्ड दबा कर कहा अरे यार तेरा लौडा तो खड़ा है . इसको बाहर निकालो मैं अभी देखूँगी तेरा लण्ड ? मैं पैंट खोलने ही वाला था की भाभी के मोबाईल की घंटी बज गयी . वह फोन पर बातें करने लगी . कुछ गंभीर मसला था . भाभी ने कहा राकी तुम शाम को आना .मैं अपना मन मसोस कर चला गया . दूसरे दिन अचानक मुझे नौकरी के लिए बहार जाना पड़ा . मैं भाभी से बगैर मिले चला गया और बाद में भाभी को टेलीफोन से बताया . भाभी ने कहा :- राकी तुम्हारे जाने से मुझे बहुत तकलीफ हो गयी है . अब तुम जल्दी ही वापस आ जाओ . मैं तो तेरा लण्ड भी नहीं देख सकी . उस दिन मैं बड़े मूड में थी . मैं तो चूत खोल कर चुदाने वाली थी लेकिन क्या करती मादर चोद फोन आ गया . और मैं उसी में उलझ गयी
.ख़ुशी की बात यह रही की एक साल बाद मेरा ट्रांसफर वापस यही हो गया . मैंने भाभी को बताया तो वह बहुत खुश हो गयी . हम दोनों और नजदीक आ गए . एक हफ्ते बाद होली आ गयी और मैं भाभी के साथ होली खेलने उसके घर आ गया .
तो दोस्तों, मैं सोफा पर बैठे हुए अपना लण्ड भाभी को चूसा रहा था . भाभी की मस्ती बढती जा रही थी . वह मुझे बेड पर ले गयी . मुझे चित लिटा दिया और मेरे मुह पर अपनी चूत रख कर मेरे ऊपर चढ़ बैठी . खुद झुक कर मेरा लण्ड चूसने लगी और मैं भी इधर उसकी चूत चाटने लगा . मेरा यह पहला मौका था बुर चाटने का . भाभी तो मेरे लण्ड की निकलती हुई लार बार बार चाट लेती थी .मैं फिर घूम गया और भाभी के ऊपर हो गया . मैंने दोनों हाथों से उसकी टाँगे फैलाई और चूत में मुह घुसेड दिया . उसे भी चूत चटवाने में मज़ा आ रहा था . इधर मैंने लण्ड पूरा का पूरा उसके मुह में डाल दिया था . मैं धीरे धीरे उसका मुह ही चोदने लगा .
थोड़ी देर में भाभी उठ बैठी और मुझे खड़ा कर दिया . खुद नीचे घुटनों के बल बैठ कर मेरा लण्ड चूसने लगी . पेल्हड़ चाटने लगी . जब भाभी एक हाथ से पेल्हड़ थाम कर लण्ड चूस रही थी तो मुझे बड़ा मज़ा आने लगा . मैंने कहा भाभी अब मैं झड जाऊंगा . भाभी लण्ड मुह से निकाल लो . नहीं तो मैं मुह में ही झड जाऊंगा . भाभी ने इशारा किया झड जाओ कोई बात नहीं . तेरा लण्ड बड़ा मस्त हो गया है . मैं लण्ड पीना नहीं छोडूंगी . थोड़ी देर में मैंने कहा भाभी प्लीज मेरा मुठ्ठ मार दो . तब भाभी ने लण्ड मुह से निकाला और मुठ्ठी से पकड़ कर लगाने लगी दनादन्न सड़का . वह जिस तरह से मुठ्ठ मार रही थी उससे लग रहा था की भाभी कई लण्ड का मुठ्ठ मार चुकी है . मैंने कहा हां भाभी जल्दी जल्दी मारो, और तेज और तेज हां भाभी तेरे हाथ में लण्ड बड़ा मज़ा कर रहा है . ऊई, ओ' ओहो, आ, ऊ, हूँ, आ, आहा ओ हो, उई लो भाभी मैं झड गया . भाभी जबान निकाल कर मेरा लण्ड चाटने लगी
.मैंने कहा लो भाभी, मैं तेरी बुर अभी चोद नहीं पाया ? भाभी बोली ऐसा पहली बार होता ही है . बुर तो दूसरी बार ही लण्ड खड़ा करके चोदी जाती है पगले ? अब नंबर आएगा बुर चोदने का ?
उस दिन मैंने तीन बार चोदा भाभी को . मैंने कहा हां अब आया है मज़ा होली का . होली में लण्ड और चूत दोनों बड़ी मस्ती में होते है .होली में बुर सबको अच्छी लगती है . .
यह सही बात है--



RE: Holi sex stories-होली की सेक्सी कहानियाँ - sexstories - 11-01-2017

होली में जम कर

प्रेषक : नैनसी

हाय रीडर्स. में आप के लिये एक और कहानी लेकर आई हूँ मुझे आशा है की ये आप को बहुत पसन्द आयेगी ससुराल मे यह मेरी पहली होली थी. शादी को 8 महीने हो चुके थे. होली वाले दिन सुबह से ही में बेकरार थी. दरअसल आज अपनी माँ के घर पर जाने का मौका जो मिल रहा था. ऊपर से में होली भी बड़ी धूमधाम से मनाती हूँ. सुबह करीब 10.30 बजे में और मेरा पति हमारे घर पहुँचे. हमारे घर पर सब लोग बड़ी बेसब्री से हमारा इन्तजार कर रहे थे. वहा पहुँचने पर हमारा जोरदार स्वागत हुआ. मेरी बहनों और मेरी सहेलियो ने हम दोनो को रंगो से बुरी तरह रंग दिया. में पूरी तरह से रंग में हो गयी थी.

मैने उस वक़्त एक सफेद टी-शर्ट और जीन्स पहन रखी थी. टी-शर्ट भीग कर मेरे कपड़ो से चिपक गयी थी और मेंरी ब्रा चमकने लगी थी. मेरी माँ ने मुझे इशारा किया और ऊपर के कमरे में जा कर कपड़े बदलने को कहा. में ऊपर छत पर चली गयी और दरवाजा बंद करके कमरे की लाइट चालू करके जैसे ही मैने अपनी टी-शर्ट उतार कर फैंकी, दीवार के पीछे से कोई निकल कर मेरे सामने आ कर खड़ा हो गया. ये रोहित था. उसे देख कर मेरे होश उड़ गये पर फिर खुद को संभाल कर पास पड़ी चादर से अपनी ब्रा को ढकते हुये मैने उससे कहा, “तू यहा क्या कर रहा है?”

कुछ नही मेरी जान. तुझे मिलने को आया हूँ. और क्या तू ये चादर से खुद को ढक रही है. ज़रा मुझे भी तो देख लेने दे अपनी ये कातिल जवानी.” उसने जवाब दिया.

“तू जाता है यहा से या में माँ को बुलाऊँ.” मैने कहा.

“हाये हाये… कैसे नखरे कर रही है. वो दिन भूल गयी, जब हर दुसरे दिन खुद ही मेरे सामने नंगी हो जाया करती थी.” उसने बड़ी बेशर्मी से कहा.

में कुछ बोलती इससे पहले वो मेरे पास आ गया और मेरे कंधे पर पड़ी चादर उठा कर एक तरफ फैंक दी. फिर बोला, “देख नैनसी, एक बार तुझे नंगी देख लू तो चला जाऊंगा. और तुझे वादा है की तुझे टच भी नही करूँगा.”

में फँस गयी थी. दरअसल रोहित मेरा कजन था और शादी से पहले का यार भी था और में करीब साल भर तक उसके साथ सेक्स का खेल खेलती रही थी. उसने ही मुझे जवानी का असली मज़ा लेना सिखाया था. पर अब में एक शादीशुदा औरत थी. किसी और की बीवी थी.

में थोड़ी देर तक चुपचाप खड़ी सोचती रही और फिर उससे बोली, “देख रोहित, तू सिर्फ़ देखेगा. करेगा कुछ नही.”

“तेरी कसम नैनसी…” वो बोला.

में उसकी तरफ घूमी और अपनी जीन्स खोल कर एक तरफ डाल दी. अब में सिर्फ़ ब्रा और पेन्टी में उसके सामने थी. काले रंग की मेंचिंग ब्रा और पेन्टी मेरे गोरे बदन पर क़यामत ढा रही थी. मेरी ब्रा मेरे साइज़ से छोटी थी और मेरे बूब्स उसमे समा ही नही रहे थे और मानो बाहर आने को बेताब थे. ऊपर से ब्रा के नेट के कपड़े में से मेरे हल्के भूरे निपल्स भी झाँक रहे थे.

फिर मैने अपनी पेन्टी भी उतार कर एक तरफ रख दी. उसके बाद जब मैने अपनी ब्रा उतारी तो मेरे दोनो भारी भारी बूब्स बाहर उछल पड़े. उनकी थिरकन देख कर वो मदहोश हो गया. उसने मुझे इशारा किया. मैने अपनी ब्रा उसकी तरफ उछाल दी.

उसने मेरी ब्रा लपक ली और उसे सूंघ कर बोला, “क्या बात है साली, तेरे बूब्स तो काफ़ी बड़े और भारी हो गये हैं. लगता है तेरा पति जी भर कर मसलता है इनको.”

फिर अपनी जगह पर खड़ा होता हुआ बोला, “नैनसी मेरी जान, मुझ से रहा नही जा रहा. एक बार अपनी जवानी का रस मुझे पीला दे.”

मैने कहा, “देख रोहित, तुने वादा किया था की तू सिर्फ़ देखेगा. कुछ करेगा नही.”

“कुतिया ऐसे वादे तो में पहले भी करता था और उसके बावजुद तू खुद आ कर मेरे नीचे पड़ती थी.”

“तब की बात और थी रोहित. तब में कुंवारी थी पर अब एक शादीशुदा औरत हूँ. प्लीज़ तू जा यहाँ से.”

“नैनसी, ये तो और भी अच्छा है की तू अब शादीशुदा है. अब तो तेरे पास लाइसेन्स है खुल कर ये खेल खेलने का.” इतना कह कर वो मेरे पास आ गया. में पलटी तो उसने मेरी कमर में हाथ डाल कर मुझे अपनी और खींच लिया. मेरी पीठ उसकी तरफ थी और उसने तुरन्त ही मेरे दोनो बूब्स पकड़ लिये. वही उसका खड़ा लंड में अपनी गांड की दीवार में रगड़ ख़ाता महसूस कर सकती थी.

में खुद को उससे छुडवाने की कोशिश करने लगी पर उसकी पकड़ बहुत मजबूत थी. वो बुरी तरह मेरे बूब्स को मसल रहा था और कह रहा था, “साली रांड़, शादी के बाद मस्त हो गयी है. बूब्स का साइज़ भी बड़ गया है और तेरी गांड भी गोल सी हो गयी है. बहनचोद किसी ब्लू फिल्म की रांड़ जैसी लग रही है. आज तो तुझे चोद के ही रहूगां.

वो ठीक ही कह रहा था. असल में में हो भी कुछ कुछ वेसी ही हो गयी थी. थी तो में शादी से पहले भी सेक्सी पर शादी के बाद तो में और ज़्यादा मस्त हो गयी थी. हालाँकि मेरा पति चुदाई में कोई खास एक्सपर्ट नही था और 10 मिनिट में मुश्किल से मुझे 1-2 बार ही ठंडी कर पाता था पर वो दिन रात मेरे बदन से खेलता था. तो मेरे 32 साइज़ के बूब्स अब 34 के हो गये थे. मेरा शरीर भी भर गया था और मेरे अंग अंग पर निखार सा आ गया था.

जिस तरह से रोहित मेरे बूब्स मसल रहा था और उनके निपल्स से खेल रहा था में गर्म सी होने लगी थी. उपर से उसकी पेन्ट मे कसा लंड मेरी गांड के छेद मे रगड़ ख़ाता बड़ा लंड मुझे और मदहोश कर रहा था. मेरे बूब्स टाइट हो गये थे और उनके निपल्स भी तन गये थे. मेरे मुँह से हल्की हल्की सिसकारियां निकलने लगी थी और अब मैने उसे अपने से दूर करने की कोशिश करनी बंद कर दी थी, बल्कि मैने अपने हाथ उसके हाथो पर रख दिये थे और अपनी गांड पीछे को निकाल कर उसका लंड अच्छे से महसूस करने लगी थी.

जब में पूरी तरह से गर्म हो गयी तो मै पलटी और उसकी तरफ मुँह करके खड़ी हो गयी. अचानक ही उसके बालो मे हाथ फँसा दिया और उसे किस करने लगी. उसने भी मेरे बाल पकड़ लिये और बस फिर हम एक दूसरे की जीभ चुस रहे थे. वही मैने एक हाथ से पेन्ट के उपर से उसका खड़ा लंड पकड़ा हुआ था और उसे सहला रही थी.

रोहित से में शादी से पहले भी कई बार चुद चुकी थी और मुझे मालूम था की वो चुदाई मे एक्सपर्ट था. ऊपर से उसका लंड भी मेरे पति के लंड से करीब 1.5 गुना बड़ा था. थोड़ी देर बाद हम अलग हुये और में उसके सामने घुटनो पर बैठ गयी. उसकी पेन्ट की चैन खोल कर उसका बड़ा लंड बाहर निकाला और उसे चाट कर बोली, “रोहित, बड़े दिन हो गये है लंड लिये हुये.”

“क्यो तेरा पति तुझे चोदता नही है क्या.” उसने पूछा.

“ऐसी बात नही है पर तेरे लंड के हिसाब से देखे तो उसके पास लुल्ली है. और वो सिर्फ़ चूत मारने का शौकीन है जब की तुझे तो पता है की में तो अपने बूब्स चुदवाती हूँ चूत और गांड में भी लंड लेती हूँ और लंड की मलाई की तो में दीवानी हूँ. तो तू बता मुझे मज़ा कैसे आता होगा पर साले से कह भी तो नही सकती.” इतना कह कर मैने उसका लंड मुँह मे भर लिया और अभी उसे चुसना शुरू किया ही था की दरवाजे पर किसी ने लॉक किया. में तुरन्त सीधी हो गयी और रोहित को अलमारी के पीछे छुपा दिया.

फिर अन्दर से ही अवाज़ लगाई, “कौन है.”

“अरे नैनसी में हूँ.” ये मेरे पति की अवाज़ थी.

“जी में कपड़े बदल रही हूँ.” मैने कहा.

“तो क्या हुआ. दरवाजा खोल और मुझे अन्दर आने दे. मेरे सामने कपड़े बदल लेना.” उसने कहा.

मैने धीरे से दरवाजा खोला तो वो अन्दर आ गया. में नंगी ही उसके सामने खड़ी थी. वो मुझे देख कर बोला, “नैनसी मेरा बड़ा दिल कर रहा है तेरी चूत मारने का.”

“दिल तो मेरा भी कर रहा है चुदाई करवाने का पर क्या करूं. सब लोग है घर पर.” मैने जवाब दिया.

उसने मुझे बाहों मे भर लिया और मेरे बूब्स मसलते हुये बोला, “पाँच मिनिट ही तो लगेंगे. मार लेने दे ना मुझे एक बार अपनी चूत.”



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मैने उसे पीछे धकेलते हुये कहा, “जाओ भी. कोई आ गया तो मुसीबत हो जायेगी. बाद में घर जाकर सारी रात नंगी ही रखना मुझे. फिर जी भर के मारना मेरी चूत…..”

इतना कह कर मैने उसे किसी तरह कमरे से बाहर निकाला और दरवाजा बन्द कर दिया. तब रोहित अलमारी के पीछे से निकल कर मेरे पास आ गया और एक बार फिर मुझे पकड़ लिया और किस करने की कोशिश करने लगा. उसका लंड अब भी पेन्ट से बाहर था. मैने उसका खड़ा लंड पकड़ कर हिलाते हुये कहा, “देख रोहित अभी कोई भी आ सकता है. तो बाद मे……..”

“हट रंडी, अब मेरा मन बना है तुझे चोदने का और तू कह रही है बाद मे.”

“तो ठीक है.. में मम्मी से पूछती हूँ की वो ही कोई प्रोग्राम बना दे हम दोनो का…” इतना कह कर में कपड़े पहन कर और नीचे आ गयी.

मम्मी किचन मे थी. में तुरन्त अपनी माँ के पास किचन मे गयी और उससे कहा, “मम्मी, रोहित मिला था छत पर.”

“मुझे पता है. बड़ी ज़िद कर रहा था. तो मैने ही उसे ऊपर भेजा था और इसीलिए तुझे भी ऊपर जा कर ही कपड़े बदलने को कहा था.” मम्मी ने जवाब दिया.

तो मैने माँ से कहा कोई सेटिंग करवा दे. तेरी कसम जब से शादी हुई है ढंग से ठुकाई नही हुई मेरी. पूरा शरीर तड़पता है किसी सही मर्द के लिये. आज में भी इन्जॉय करने के मूड मे हूँ. ऊपर से रोहित ने अपना बड़ा लंड दिखा कर पागल कर दिया है.” इतना कह कर मैने अपनी माँ को आँख मारी.

दरअसल मेरी माँ एक चुदक्कड़ किस्म की औरत है जो की किसी जमाने मे हमारे इलाक़े की सबसे सेक्सी और रंडी हुआ करती थी. कई मर्दो से उसके नाजायज़ संबंध थे और आज भी है. अपने बचपन मे मैने कई बार अपनी माँ को बाहर वालो के लंड लेते देखा है. में अपनी माँ के बारे मे सब कुछ जानती हूँ और कई बार मैने इसका फायदा भी उठाया है. कही ना कही मेरे रंडी बनने मे मेरी माँ का बहुत बड़ा हाथ है. यहा तक की मैने और मेरी माँ ने कई बार एक साथ एक ही लंड से भी चुदी हैं. जहा तक रोहित का सवाल है तो वो मेरे मामा का बेटा है और वो सिर्फ़ मेरा ही यार नही है, कई बार वो मेरी माँ को भी चोद चुका है. में और मेरी माँ आपस मे बिल्कुल खुली हुई हैं और चूत लंड की बातें बड़े खुल कर करती हैं.

मम्मी ने हंसते हुये कहा, “कोई बात नही. मेरी रंडी बेटी को आज बाहर वाला लंड ही चोदेगा.” फिर मेरी तरफ देख कर बोली, “लेकिन उस दिन जब मैने तुझे कहा था की मेरी एक पार्टी निपटा दे तब तो बड़ी सती सावित्री बन रही थी की नही माँ अब में शादीशुदा औरत हूँ. रांड़ तू है उस दिन में कम से कम 50 हज़ार कमा लेती.”

मैने हंसते हुये कहा, “सॉरी मम्मी, आज के बाद तू जिस किसी से चुदने को कहेगी, में ना नही करूँगी.”

ये सुनकर मम्मी ने अपना फोन उठाया और किसी को फोन लगाया, “तुझे जवान लड़की चाहिये थी ना. इन्तजाम हो गया है. कल रात की बुकिंग कर ले.”

उधर से पता नही क्या अवाज़ आई पर फोन काटने के बाद मम्मी ने मुझे कहा, “कल रात को चुदने के लिये तैयार रहना. इस बार कोई नाटक नही चाहिये.”

उसके बाद मम्मी ने रोहित को फोन करके कुछ समझाया. फिर मुझे बोली, “जा इन्जॉय कर. तेरा काम हो गया.”

करीब 12.30 बजे रोहित हमारे घर आ गया. उस वक़्त तक मेरा बाप अपने दोस्त के घर चला गया था जहा उसका दारू पीने का प्रोग्राम था. वही मेरी सब सहेलियां भी अपने अपने घर चली गयी थी और अब घर पर में, मेरा पति, मेरी माँ और रोहित ही थे.

रंग से खेलने के बाद रोहित और मेरे पति ने पीने का प्रोग्राम बनाया. बस में समझ गयी की मेरा काम बन जायेगा. वो दोनो ड्राइंग रूम मे बैठे थे और दारू पी रहे थे. रोहित ने मेरे पति के गिलास मे दो नशे की गोलियाँ मिला दी थी और थोड़ी ही देर बाद मेरा पति भी बेहोशी की हालत मे हो गया था. तब रोहित ने मुझे आवाज़ लगाई.

में और मम्मी ड्राइंग रूम मे आ गये और उसके पास खड़ी हो गयी. उसने मुझे खींच कर अपने पैरो पर बिठा लिया और मेरे एक बूब्स को ज़ोर से मसल कर बोला, “कभी अपने पति के सामने किसी और से चुदने के बारे मे सोचा है.”

में कुछ जवाब देती इससे पहले ही मम्मी बोल पड़ी, “चोद ले बेटा… इसे इसके पति और माँ के सामने चोद ले.”

अब तक रोहित मेरी टी-शर्ट उतार कर एक तरफ फैंक चुका था और मेरी ब्रा का एक स्ट्रॅप मेरे कंधे से उतार कर मेरा एक बूब्स निकाल कर मसल रहा था. मैने अपनी ब्रा की हुक खोल कर अपने पति की तरफ फैंक दी और रोहित ने मेरे दोनो बूब्स पकड़ लिये.

तब मैने रोहित से कहा, “बहनचोद सिर्फ़ दबायेगा ही या चुसेगा भी इनको.”

इतना कह कर में खड़ी हुई और घूम कर उसकी तरफ मुँह करके उसकी गोद मे बैठ गयी. अब उसका लंड मेरे नीचे दब रहा था और में उस पर अपनी चूत रगड़ रही थी वही उसने मेरा एक बूब्स पकड़ लिया था और उसके निपल को मुँह मे ले कर चुसने लगा था. मैने उसका सर पकड़ रखा था और उसे अपने बूब्स पर दबा रही थी.

मम्मी हमारे पास खड़ी थी पर मुझे उसकी कोई शर्म नही थी. दरअसल मुझे तो इस वक़्त बस लंड चाहिये था. जी भर के उसे अपने बूब्स चुसवाने के बाद में खड़ी हो गयी और अपने कपड़े उतारने लगी. इस बीच मम्मी उसके सामने ज़मीन पर बैठ गयी और उसका लंड निकाल कर चाटने लगी.

कपड़े उतार कर में नंगी हुई और मम्मी की इस हरकत पर मुझे गुस्सा आ गया. मैने चिल्लाते हुये उसे कहा, “ओ रांड़, कुछ तो शर्म कर. अपनी बेटी के माल पर ही हाथ साफ कर रही है.”

“हट रंडी, तेरा माल तो वहा बेहोश पड़ा है और जिस लंड से में खेल रही हूँ वो मेरे यार का है. तुझे चाहिये तो तू भी ले ले. पर हक़ मत जमा. समझ गयी कुतिया.” माँ ने उसका लंड मुँह से निकालते हुये कहा.

“मम्मी प्लीज़…. इस वक़्त मुझे लंड की ज़्यादा ज़रूरत है.. इससे पहले की मेरा पति होश मे आये. में इस लंड का पूरा मज़ा लेना चाहती हूँ. तू तो मेरे जाने के बाद भी रोहित का लंड ले सकती है…..प्लीज……”

“आ गयी ना अपनी औकात पर..” इतना कह कर मम्मी वहा से खड़ी हो गयी और अब में मम्मी की जगह आ कर रोहित के सामने बैठ गयी. उसके बड़े लंड को पकड़ कर में चाटने लगी और फिर धीरे से उसे अपने मुँह मे भर लिया. उसके बाद तो में मानो पागल सी हो गयी और बड़ी तेज़ी से उसका लंड चुसने लगी. में उसका लंड गले तक अपने मुँह मे ले रही थी. फिर अचानक ही रोहित ने मेरे बाल पकड़ लिये और मेरा मुँह चोदने लगा. मेरे मुँह से गू गू की आवाज़े आ रही थी.


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फिर अचानक ही रोहित ने अपना लंड मेरे मुँह से निकाल लिया मुझे अपने सामने खड़ा करके मेरी माँ से बोला, “बुआ, देख ये रांड़ कैसी मस्त जवान हो गयी है ना. बूब्स भी पहले से भारी हो गये है और गांड भी भर गयी है.”

मम्मी ने मेरे पास आ कर कहा, “हाँ रोहित, ये तो सच मे मस्त हो गयी है. अब तो इसके पैसे भी मन मर्ज़ी के मिलेंगे. अगर अब ये धन्धे पर लग जाये तो पूरे शहर मे इससे मस्त रंडी नही मिलेगी.”

रोहित का लंड मेरे थूक से सना हुआ चमक रहा था. में फिर से उसके सामने बैठ गयी और इस बार उसका लंड अपने बूब्स में फँसा लिया. रोहित ने मेरे दोनो बूब्स पकड़ लिये और मेरे बूब्स चोदने लगा. अब तक मेरी चूत से रस की धार बहने लगी थी और मेरे लिये बर्दाश्त करना मुश्किल हो रहा था. तो में खड़ी हो गयी और उसका लंड पकड़ कर उसे अपनी चूत पर रख कर उसकी गोद में बैठ गयी. पूरा लंड मेरी चूत मे समता चला गया.

मेरे मुँह से सिसकारियां निकलने लगी.”आआआआअहह………. म्‍म्म्ममममममममममाआआआआआआआआआआआअ…………. रोहित तेरा लंड बड़ा मस्त है रे………. बड़े दिनो बाद मिला है ऐसा लंड………………… मेरी चूत की प्यासस्स्स्स्सस्स……… बुझा दे रे मेरे राजा………. एयाया…..हह………..”

में उसके लंड पर उछलते हुये चिल्ला रही थी. रोहित भी नीचे से धक्के लगा रहा था. करीब 3-4 मिनिट तक उसी हालत में मुझे चोदने के बाद उसने मुझे अपने ऊपर से उठा दिया. फिर मुझे सोफे पर बिठा कर मेरे सामने बैठ गया और मेरी चूत के होठों को अपनी उंगलियों से फेलाता हुआ बोला, “नैनसी डार्लिंग क्या चूत है तेरी… खा जाने को दिल कर रहा है….”

मैने उसका सर पकड़ कर अपनी चूत की तरफ धकेलते हुये कहा, “तो खा ले ना…. तुझे मना कहा किया है…..”

जैसे ही उसकी जीभ ने मेरी चूत को टच किया मेरी चूत ने रस की धार छोड़ दी. मेने उसका सर अपनी जांघो मे फँसा लिया और गांड उछाल उछाल कर अपनी चूत उससे चटवाने लगी. बस 2 ही मिनिट मे में झड़ने लगी.

तब वो मेरे सामने खड़ा हो गया और मेरी चूत पर अपना लंड रख कर एक ही झटके मे अपना लंड मेरी चूत मे डाल दिया.

में चिल्ला पड़ी, ‘क्या कर रहा है मादरचोद…. फाड़ेगा क्या मेरी…. प्यार से मार हरामजादे…….. तेरे लिये ही खोल कर पड़ी हूँ अपनी….. आआआआअ………..हह…………….. म्‍म्म्मममममममम ……………….. म्‍म्माआआआआआआआ………………….. ”

साथ साथ अपनी गांड को नीचे से उछालते हुये उसके हर धक्के का जवाब भी दे रही थी. जब वो लंड अन्दर डालता तो में अपनी चूत को फैला देती और जब वो बाहर निकलता तो में अपनी चूत को कस लेती थी. इस तरह में चुदाई का पूरा मज़ा ले रही थी.

वही दूसरी तरफ मेरी माँ ने मेरे पति की पेन्ट खोल कर उसका लंड निकाल लिया और उसे चूसने लगी. में चिल्लाई, “ओ रांड़… क्या कर रही है…..”

“तू चुद रही है और में चुपचाप खड़ी देखती रहूँ क्या…. मुझे भी लंड लेना है… फिर क्यो ना अपने दामाद के लंड को अपनी चूत में ले लू….” मम्मी ने हंस कर जवाब दिया.

तभी रोहित ने मेरी एक टाँग उठा कर अपने कंधे पर रख ली. वो पूरे जोर से मुझे चोद रहा था और मेरे बड़े बड़े बूब्स हर धक्के के साथ हिल रहे थे. मैने अपने बूब्स पकड़ लिये और एक बूब्स का निपल अपनी जीभ से चाटा. फिर निपल्स को उंगलियो से मसलने लगी.

रोहित ने मुझे घोड़ी बना दिया और पीछे से मेरी चूत में अपना लंड डाल दिया. अब वो मुझे किसी कुतिया की तरह चोद रहा था. में पूरी मस्ती मे उसके बड़े लंड का मज़ा अपनी चूत मे ले रही थी. इस बीच में 2 बार झड़ चुकी थी और रोहित भी झड़ने के करीब था. तभी उसने अपना लंड मेरी चूत से निकाला और मेरे सामने आ कर मेरे मुँह मे डाल दिया. मेने उसका लंड पकड़ लिया और ज़ोर से हिलाने लगी. तभी उसके लंड ने वीर्य की धार छोड़ दी और मेरा पूरा मुँह उसके लंड की मलाई से भर गया. मेरे मुँह मे, चेहरे पर और बालो मे भी उसके लंड का माल लगा हुआ था. जिसे मेने बड़े प्यार से अपनी उंगलियो से साफ करके खाया.

वही मेरी माँ अब मेरे पति का लंड चुस कर झड़ चुकी थी और अब हमारे पास आ गयी. रोहित मेरे बगल मे लेटा था. मेरी माँ ने सोफे के किनारे पर बैठते हुये रोहित का लंड पकड़ा तो रोहित ने कहा, “बुआ…. आज नही…. आज तो नैनसी को चोदुंगा सिर्फ़…”

“चोद तो लिया है अब….” मम्मी ने खीचते हुये कहा.

रोहित ने मुझे उल्टा लेटा दिया और मेरे गांड के छेद मे उंगली करते हुये बोला, “बुआ तेरी लड़की का हर छेद मस्त है…. अभी तो इसकी गांड मारनी बाकी है….”

तब में रोहित की तरफ देख कर हँसी… करीब 5 मिनिट के बाद में उसका लंड फिर से पकड़ कर हिलाने लगी. उसका लंड फिर से तैयार था. पर इस बार जब उसने मुझे घोड़ी बनाया, मैने अपने पैरो को फैला कर अपनी गांड खोल दी. उसने मेरी गांड के छेद पर क्रीम लगाई और फिर अपना लंड टीका कर एक ही झटके मे अपना लंड मेरी गांड मे डाल दिया.

अब में अपने यार से गांड मरवा रही थी. में पूरी मस्ती मे चिल्ला रही थी, “रोहित…. एयाया…. हह……. गांड कैसी लगी मेरी…… शादी के बाद पहली बार गांड मरवा रही हूँ…. बहुत तड़पती हूँ गांड मे लंड लेने को…… चोद दे मेरी गांड….. फाड़ दे इसको…. मार ले मेरी गांड…. आआआ हह………..आआआ………हह……………..”

रोहित ने मेरे नाचते हुये दोनो भारी बूब्स पकड़ रखे थे और उनके निपल्स मसलता हुआ मेरी गांड मार रहा था.. वही में अपनी चूत को अपने एक हाथ से खोद रही थी…. थोड़ी देर बाद रोहित ने मेरी कसी हुई गांड मे ही अपना लंड झाड़ दिया और हम दोनो सोफे पर ही लेट गये…

फिर मैने रोहित का लंड चाट कर साफ किया. आधे घंटे बाद रोहित ने एक बार फिर मुझे पकड़ लिया और एक बार फिर मुझे चोदा.. अपने पति के होश में आने तक में करीब 5 बार झड़ चुकी थी और बुरी तरह थक गयी थी. तुम सब के लंड की प्यासी… भारी बूब्स और मस्त गांड वाली तुम्हारी रंडी नैनसी. मुझे आशा हे की तुम्हे मेरी यह कहानी जरुर पसन्द आई होगी.


RE: Holi sex stories-होली की सेक्सी कहानियाँ - sexstories - 11-01-2017

ननद ने खेली होली--1

सबसे पहले तो मुझे अप सब लोगों का धन्यवाद देना चाहिए की अप ने किस तरह से मैंने अपनी किशोर ननद को ट्रेन किया ....लेकिन अचानक हम लोगों को वापस आना पड़ा| जैसा की तय हुआ था की होली में जब हम लोग आएंगे तब तक उस का इन्ट्र्कोरस मेरा मतलब है इंटर का कोर्स खत्म हो चुका होगा और वो साल भर के लिए हम लोगों के पास आके रहेगीं जब हम उस की अच्छी तरह कोचिंग करायेंगें|

शादी में आप सब को ये भी याद होगा की मेरी ननद गुड्डी ने अपने जीजा जित से भी वादा किया था की ....इस साल जब वो होली में आयेंगे तो वो उनसे जम के होली खेलेगी,और आखिर खेलेगी भी क्यों नहीं, क्यों की उन्होंने ही तो उसकी सील पहले पह्लाल तोडी थी, और उस के बाद जो उसने चलना शुरू किया तो अपने प्यारे भइया और मेरे सेक्सी सैंया के साथ चुदावा के दम लिया. लेकिन वादा होली का इस लिए भी था की जब वो नौवें में थी और जीत उस के जीजा पहली बार होली खेलने आये तो, होली में जीत का हाथ साली के चिकने गाल से फिसल के फ्राक के अन्दर नए उभरते मॉल तक पहुँच गया और एक बार जब जीजा का हाथ साली के मॉल तक पहुँचा जाय, मामला होली का हो, भंग की तरंग का हो, तो बिना रगडन मसलन के ....लेकिन बुद्धू साली बुरा मान गई ....और वो तो जब शादी के माहोल में अपनी उस बुद्धू ननद को बुर के मजे के बारे में बताया तो ख़ुद वो अपने जीजा से सैट और पट गई ....लेकिन ये सारी बातें तो मैं आपको बता ही चुकी हूँ ननद की ट्रेनिंग में ....अब दास्ताँ उसके आगे की ....कैसे होली में हम फ़िर दुबारा उनके, राजीव के मायके गए, और राजीव मेरी ननद कम .गुड्डी के लिए तो ललचा रहे ही थे, मेरी नई बनी बहन और अपनी एक लौटी छोटी साली, मस्त पंजाबी कुड़ी अल्पना और ....उस से भी ज्यादा उस की छोटी बहन कम्मो के लिए, जिसके लिए मैंने कहा था की होली में जब आयेंगे तो ....मैं उस की भी दिल्वौंगी . तो क्या हुआ जब होली में मैं अपने ससुराल गई साजन के साथ और कैसे मनी होली मेरी ननद की ....तो ये साडी दस्ताना ....ननद ने खेली होली ...

राजीव बड़े बेताब थे और बेताब तो मैं भी थी .होली का मजा तो ससुराल में ही आता है ....ननद, नन्दोई, देवर ....और एक तरह से अब वो उनकी भी ससुराल ही हो गयी थी ....नहीं मैं सिर्फ़ उनके माल के बारे में बात नहीं कर रही थी, आख़िर वहाँ मेरी मुंहबोली छोटी बहन अल्पी भी तो थी ....जिसने ना सिर्फ़ उनकी साल्ली का पूरा पूरा हक़ अदा किया था, बल्की मेरी ननद को फंसाने पटाने में भी ....और उसकी छोटी बहन कम्मो ....थी तो अभी कच्ची कली ....लेकिन टिकोरे निकालने तो शुरू ही हो गये थे और जब से उन्होंने एक सेक्स सर्वे में ये पध्हा था की मंझोले शहरों में भी २ फीसदी लडकियां अपना पहला सेक्स संबध १४ से १६ साल की उमर में बना लेती हैं तो बस ....एक दम बेताब हो रहा था उनका हथियार. मैं चिढाती भी थी ....तय कर लो होली किसके साथ खेलनी है मेरी छिनाल ननद गुड्डी के साथ या सेक्सी साली अल्पी के साथ या सबसे छोटी साली उस कमसिन कम्मो के साथ .तो वो हंस के बोलते तीनों के साथ।

और मैं हंस के बोलती लालची ....और गप्प से उनके मोटे मस्ताये लंड का सुपाड़ा गडप कर लेती.

तो हम लोग पहुँच गये होली के ६ दिन पहले ससुराल मैं ये नहीं बताऊंगी की होली के पहले मैंने क्या तैयारी की, भांग की गुझिया, गुड्डी, अल्पी और कम्मो के लिए खूब सेक्सी ड्रेसेस और भी बहोत सारी चीजें ....ये सब मैं अपने सुधी पाठकों के लिए छोड़ती हूँ, होली का किस्सा सुनाने की जल्दी मुझे भी है और सुनाने की बेताबी आपको भी ....हाँ एक बात जरुर ज़रा कान इधर लाइये थोडी प्राइवेट बात है ....ससुराल पहुँचने के पहले बेचारे वो पाँच दिन पूरे उपवास पे थे...मेरी मासिक छुट्टी जो थी, और मैं बस उनसे ये कहती थी अरे चलिए ना वहाँ मेरी ननद बेताब होगी, इस होली में अपने भैया की पिचकारी का सफ़ेद रंग घोंटने के लिए.

सबसे पहले रास्ते में अल्पी का घर पङता था. मैंने कहा, पहले अल्पी के यहाँ रुक लेते हैं, वो बिचारी बेताब भी होगी और उसके लिए जो गिफ्ट लिया था वो दे भी देंगें।

उनकी तो बांछे खिल गयीं...अरे नेकी और पूछ पूछ...और गाडी उस के घर की और मोड़ ली।

शाम होने को थी, उसके घर पहुँच के हमने दस्तक दी, और दरवाजा खोला कम्मो ने,

सफ़ेद ब्लाउज और नेवी ब्लू स्कर्ट में क्या गजब लग रही थी. राजीव बिचारे उनकी निगाहें तो बस दोनों...अब टिकोरे नहीं रह गये थे....कबूतर के बच्चे...और चोंचें भी हल्की हल्की ...टेनिस बाल की साइज...

अल्पी है....दरवाजे पे खडे खडे उन्होंने पूछा।

और अगर मैं कह दूँ नहीं है तो....बढ़ी अदा से अपने दोनों हाथ उभारों के नीचे क्रॉस कर उन्हें और उभारते हुए वो आँख नचा के बोली, तो क्या फ़िर आप अन्दर नहीं आयेंगें. और फ़िर दोनों हाथों से उनका हाथ पकड़ के बडे इसरार से बोली,

जीजू अरे अन्दर आइये ना,कब तक खडे रहेंगे बाहर और फ़िर आख़िर आपकी सबसे छोटी साली तो मैं ही हूँ ना.

एकदम....और फ़िर साली अन्दर बुलाए और जीजा मना कर दे ये तो हो नहीं सकता. राजीव कौन सा मौका चुकने वाले थे. वो बोले और हम दोनों अन्दर घुस गये।

असल में जीजी एक गाइड कैंम्प में गयी है, कल दोपहर तक आयेगी. मैं भी अभी स्कूल से आई ही हूँ. सोफे पे राजीव के ठीक सामने बैठ के वो बोली. उसने टाँगे एक के ऊपर एक चढ़ा रखी थीं, जिससे स्कर्ट और ऊपर चढ़ गयी. उसकी गोरी गोरी जांघे साफ साफ दिख रही थीं, खूब चिकनी और थोड़ी मांसल भी हो गयी थीं. उसने दोनों हाथों से पकड़ के स्कर्ट थोड़ी नीचे भी करने की कोशिश की पर....

और मम्मी कहाँ हैं...सो रही हैं क्या मैंने पूछा।

जैसे मेरे सवाल के जवाब में फोन की घंटी बज उठी.

अच्छा मम्मी....नहीं कोई बात नहीं....कम्मो बोल रही थी.

हाँ मैं अभी स्कूल से आई...आप ६ सात बजे तक आंटी के यहाँ से आने वाली थीं ना....क्या सब लोग उस के बाद सेल में....हाँ आज तो आख़िरी दिन है....

साध्हे सात, आठ तक....कोई बात नहीं ....अरे मेरी चिंता मत करिये ....अब मैं बड़ी हो गयी हूँ.

धत मम्मी ....कोई बात नहीं दूध पी लूंगी मैं. बाई...और उसने फोन रख दिया. और अब की आके सीधे राजीव के पास ....एक दम सट के बैठ गयी और बोली ....मम्मी का फोन था।

इतना तो हम भी समझ गये थे.


RE: Holi sex stories-होली की सेक्सी कहानियाँ - sexstories - 11-01-2017

ननद ने खेली होली--2

अरोडा आंटी के यहाँ आज किटी थी....तो साध्हे छ तक लेकिन वहाँ से सेल में जा रही हैं साढे सात आठ तक....

मेरी निगाह सामने रखी घड़ी पे पढी....साढे चार...इसका मतलब....कम से कम तीन घंटे पूरे ....आल लाइन क्लियर....और जिस तरह से वो फोन पे मम्मी के लेट आने की बात जोर से दुहरा रही थी और फ़िर अब ख़ुद....और अचानक मैंने बाहर के दरवाजे की और देखा...सिटकनी भी बंद...अब इससे ज्यादा वो क्या सिगनल दे सकती थी और इसका मतलब वो सिर्फ़ शरीर से ही नहीं मन से भी बढ़ी...

और राजीव भी ये सब इशारे अच्छी तरह समझ रहे थे. वो एक दम सट के बैठ गये थे और एक हाथ कंधे के ऊपर....

जाइये जीजू मैं आपसे नहीं बोलती, इतरा के वो बोल रही थी. आपने कहा था ना की होली में जरुर आयेंगें...जब से फागुन लगा.....और जब से अल्पी दीदी के बोर्ड के इम्तहान खत्म हुए...हर रोज हम दोनों गिनते थे होली अब कितने दिन है....

आ तो गया ना अपनी प्यारी साली से होली खेलने....उसके किशोर गुलाबी गाल पे दो उंगलिया रगड़ते वो बड़े प्यार से बोले।

पता है जीजू, मेरी क्लास की लडकियां सब किस्से सुनाती थीं, उन्होंने जीजू के साथ कैसे होली खेली, कैसे जीजू को बुध्दू बना के अच्छी तरह रंगा और उनके जीजू ने भी....खूब कस कस के उनके साथ....मेरा तो कोई जीजा था नहीं...पर अबकी ....मैंने खूब उन सबों से बोला....मेरे जीजू इत्ते हैंडसम हैं स्मार्ट हैं....

अरे तू अपने जीजू की इत्ती तारीफ कर रही है ज़रा इनसे पूछ की होली के लिए कोई गिफ्ट विफ्त लाए हैं की नहीं....या इत्ती मेरी सुंदर सी बहन से वैसे ही मुफ्त में होली खेल लेंगें, मैंने कम्मो को चढाया।

बढ़ी उत्सुकता से उसने राजीव की और देखा।

एकदम लाये हैं....मेरी हिम्मत...और अब उनका एक हाथ खुल के उस किशोर साली के गुलाबी गाल छू रहा था सहला रहा था और दूसरा....उसकी बस खिलने वाली कलियों के उपरी और....एक दम चिपक के वो बैठे थे...लेकिन पहले मेरी एक पहेली बूझो....

इट इज लांग, हार्ड एंड ....लिक्स....बताओ क्या...और इगलिश में ना आए तो.....

धत जीजू....मैं इंग्लिश मीधियम कान्वेंट में पढ़ती हूँ और दो साल में कालेज में पहुँच जाउंगी...मुझे सोचने दीजिये...लांग....लंबा है कडा है....और क्म्मों की निगाहें जाने अनजाने राजीव के बल्ज की और चली गयी।

टाईट लीवैस की जींस में साफ दिख रहा था...और ऊपर से राजीव का एक हाथ अब सीधे वहीं पे....दो उंगलियाँ उस उत्तेजित शिष्ण के किनारे....

अब फंस गयी लौन्डीया ....मैंने सोचा और भुस में और आग लगाई....

देखो....तुम्हारे जीजा के पास है और मेरे पास नहीं,

हाँ और लडकियां जब हाथ में काढा काढा पकड़ती हैं तो उन्हें अच्छा लगता है, कुछ तो होंठों से भी लगा लेती हैं, वो बोले।

धत जीजू आप भी...जाइये मैं नहीं बोलती आप ऐसी वैसी बातें करते हैं....कम्मो बोली, लेकिन निगाह अभी भी टेंट पोल से चिपकी।

अरे इसमें शरमाने की क्या बात है.....जीजा साली में क्या शरम और वो भी होली में....आख़िरी क्लू .....वो होली में तुम्हारा गिफ्ट भी है....वो बेचारी और शरमा गयी.

लो पकडो ये पे....देखो है ना लांग और हार्ड ...और जब तुम अपने हाथ से ले के दबाओगी तो लीक भी करेगा....है ना.....इम्पोर्टेड है....वैसे तुम क्या सोच रही थी लांग और हार्ड....उन्होंने उसे और छेडा।

अरे लिख के देख ले कहीं तुम्हारे जीजा ने नुमाइश का माल न पकड़ा दिया हो. मैंने उसे चढाया।

ठीक कहती हो दीदी....क्या भरोसा...और लिखने के लिए उसने एक कागज़ निकालते हुए उन्हें चिढाया, इम्पोर्टेड ...चीन का बना है क्या....बारह आने वाला...क्यों जीजू।

अरे वाटरमैन है नामी देखो उस पे नाम लिखा भी है, चलो अच्छा लिखो।

क्या....पेन कागज़ पे लगा के वो बैठी...

आई उन्होंने बोला.

आई बोल के उसने लिखा और उनकी और सिर उठा के देखा. किशोर होंठों पे पेन लगाए वो बढ़ी सुंदर लग रही थी।

एल ओ वी ई वाई.....वो बोल रहे थे...

और वो ध्यान से लिख रही थी... एल ओ वी ई वाई

अचानक वो समझ गयी ...ये क्या लिखवा रहे हैं...और अचानक पेन के पिछले हिस्से से ढेर सारा गुलाबी रंग सीधे उसके चहरे......

हंसते हुए वो बोले अरे बुरा ना मानना साली जी होली है....होली की आपके लिए ख़ास गिफ्ट...मैंने सोचा होली की शुरुआत सबसे पहले सबसे छोटी साली के साथ करते हैं....

उसके गाल गुलाब हो हाय थे. और रंग सिर्फ़ उसके गुलाबी गालों पे नहीं पढा था बल्की सफ़ेद ब्लाउज पे भी, और उसके अधखिले उरोज भी लाल छीन्टो से.....बस लग रहा था अचानक जैसे कोई गुलाब खिल उठा हो. कुछ तो वो शरमाई, सकुचाई पर अगले ही पल, कातिल निगाहों से उन्हें देख के बोली,

मुझे क्या मालुम था की....जीजू का इतनी जल्दी, हाथ में पकड़ते ही गिर पढेगा।

उस का ये द्वि अर्थी दाय्लोग सुन के मुझे लगा की सच में ये मेरी छोटी बहन होने के काबिल है. मुस्कराके मैंने उसे और चढाया,

अरी कम्मो, सुन अरे ज़रा अपने जीजा को भी रंग लगा दे सीधे अपने गाल से उनके गाल पे, वो भी क्या याद करेंगें किस साली से पाला पढा है।

एक दम दीदी और आगे बढ़ के उसने अपने गोरे गुलाबी रंग से सने गाल ....सीधे उनके गालों पे, ....राजीव की तो चांदी हो गयी. इस चक्कर में अब वह कैसे उनके सीधे गोद में आ गयी उस बिचारी को पता भी नहीं चला.और गालों से गाल रगड़ते अचानक दोनों के होंठ एक पल के लिए ....कम्मो को तो जैसे करेंट लग गया ....वो वहीं ठिठुर गयी ....पर राजीव कौन रुकने वाले थे. उसके उरोजों की और साफ साफ इशारा कर के बोले,

अरी साली जी रंग तो यहाँ भी लगा है ....ज़रा इससे भी लगा दीजिये ना

वो बिचारी क्या बोलती, मैं बोली उस की और से।

अरे सब काम साली ही करेगी आख़िर तुम जीजा किस बात के हो और फ़िर तो सीधे उनके हाथ उस नव किशोरी के उभरते जोबन पे

चालाक वो बहुत थी. तुरंत बात पलटते हुए बोली ।

अरे जीजू आप इत्ती देर से आए हैं आप को अभी तक पानी भी पिलाया ....आप क्या सोचेंगें की अल्पना दीदी नहीं है तो कोई पूछने वाला नहीं है और उन की गोद से उठ के वो हिरनी ये जा ....वो जा।

और पीछे से उसके कड़े कड़े छोटे मटकते गोल नितम्बो को देख के तो राजीव की हालत ही ख़राब हो गयी. उनका बालिष्ट भर का खूंटा अब जींस के काबू में नहीं आ र्रहा था।

उसके पीछे पीछे मैं भी किचेन में पहुँची, आ चल थोड़ी तेरी हल्प करा दूँ और पास में आ के उस के कान में हल्के से कहा, अरे तू भी तो अपने जीजू का जवाब दे दे। होली का मौका है कया ऐसे ही सूखे सूखे जाने देगी उनको।

वही तो कर रही हूँ दीदी। और उसने ग्लास की और इशारा किया। जब मैंने ग्लास में झांका तो मुस्कराये बिना नहीं रह सकी।

अच्छा ये बता की कुछ कोल्ध ध्रिंक विंक है क्या। ... मैं नाश्ते का इतजाम करती हूँ और तू कर अपने जीजा का।

मेरी अच्छी दीदी. ...कोल्ध ध्रिंक फ्रिज में है और फ्रिज . वो बोली।

अरे मालुम है मुझे पहली बात नहीं आ रही हूँ, और मैं बगल के कमरे में गयी जहा फ्रिज रखा था।


RE: Holi sex stories-होली की सेक्सी कहानियाँ - sexstories - 11-01-2017

ननद ने खेली होली--3

स्प्राईट की एक बढ़ी बोतल निकाल के तीन ग्लास में। तब तक मेरी निगाह बगल में रखी ड्रिंक कैबिनेट पे पढी. ...उसे खोला तो वोडका। ... जिन - फ़िर क्या था. ...स्प्राईट के साथ. कुछ स्नैक्स रख के जब मैं बाहर पहुँची तो कम्मो बढ़ी अदा से सीधे अपने उरोजों से सटा के ग्लास रख के पूछ रही थी,

क्यों जीजू बहोत प्यास लगी है।

हाँ. ...बहोत। कौन जीजा मना करता।

गुलाबी रंग से उसका सफ़ेद ब्लाउज एक दम चिपक गया था और उसके किशोर उभारों की पुरी रूप रेखा, कटाव यहाँ तक की ब्रा की लाइन भी साफ साफ दिख रही थी। रगड़ा रगडी में ऊपर के एक दो बटन भी खुल गए थे। और हल्का हल्का क्लिवेज - साफ साफ. ...और जैसे ये काफी ना हो, उसने दांतों से हलके से अपने गुलाबी होंठ काटते फ़िर पूछा।

तो जीजा बुझा दूँ. ...ना

और जैसे ही उन्होंने हाथ बढाया. ...पूरा पूरा का ग्लास भर। जाडा लाल रंग उनकी झाक्काक सफ़ेद रंग की शर्त पुरी तरह लाल। और हम दोनों जोर जोर से हंसने लगे।

ये हुयी ना पूरी होली। ...देखा मेरी बहन का बदला। तुमने तो पूरा ही ढाला था और यहाँ इस ने पूरा का पूरा और क्या जीजी। और अभी तो ये होली की शुरू आत है। ... हंस के वो मेरे पीछे छिपती हुयी बोली।

अरे साली. ...बताता हूँ तुझे. ...और पकड़ के अब वो दुबारा उनकी गोद में. ...और इस धर पकड़ में स्कूल ड्रेस की ब्लाउज के एकाध बटन और...

अच्छा चलो. ...पहले ये कोल्ड ड्रिंक पी के थोड़ा गरमी कम करो. ...और मैंने आँख मार के राजीव को इशारा किया, और उन्होंने पकड़ के ग्लास कम्मो के होंठों पे. ...जबरन ...

स्प्राईट बुझाये प्यास बाकी सब बकवास। ...मैं हंस के बोली.

स्प्राईट कम। वोडका ज्यादा।

उन्ह। ...उन्ह. ...ये तो उसने बुरा सा मुंह बनाया.

अरे पी ले पी ले वरना ये मुझे चिढायेंगे. ...कैसी साली है ज़रा सा जीजा के हाथों. ...मैं बोली और राजीव को मौका मिल गया, एक हाथ से कास के उसकी ठुड्डी पकड़ के दूसरे से ग्लास आधी से ज्यादा खाली कर दी।

अरे आप भी तो पीजिए और अब कम्मो का नम्बर था उसने बाकी बची ग्लास अपने हाथों से अपने जीजा के मुंह से लगा के खाली कर दी.

चल अब जैसे तूने अपने गाल का रंग मेरे गालों पे रगड़ा था ना मेरी शर्त का रंग. वो लाख ना नुकुर करती रही लेकिन अपनी चौढी मजबूत छाती से उसका सीना. ...मैं जानती थी ना उनकी पकड़ की ताकता. ...अच्छी खासी औरतें भीं और ये तो बिचारी अभी बछ्डी थी।

उसके ब्लाउज के सारे बटन टूट ....यहाँ तक की सफ़ेद टीन ब्रा के स्ट्रैप भी हल्की हल्की गुलाबी हो रही थी।

अच्छा चलो अब बहोत हो गया. ...इत्ती सीधी साधी साली मिल गयी तो. ...चलो कुछ खा पी लो. ...ले कम्मो. ...मेरे हाथ से. ...और मैंने एक समोसा उस के मुंह में डाल दिया।

ओन्ह्म्मा. ...उसने मुंह बनाया तो मैंने हड़का लिया. ...अरे अभी जीजा डालते तो पूरा का पूरा गप्प कर लेती और यहाँ मैं दे रही हूँ तो मुंह बना रही है।

वो यहाँ लगी थी और उधर उन्होंने अपनी जेब से गाढ़ा लाल रंग निकाल के दोनों हाथों पे ...

अरे ये भी तो ले देख सट से अन्दर चला जायेगा. ...और फ़िर वोड़का मिली स्प्राईट. ...आधी ग्लास एक झटके में।

वो दोनों हाथ से ग्लास पकडे थी की उनका लाल रंग पुता हाथ पहले इस कमसिन किशोरी के चिकने गाल और जब तक वो समझे सम्हाले. ...सीधे ब्रा के अन्दर घुस के उस के उभारों को लाल. ...कुछ रंग से कुछ रगड़ से. ...बिचारी के दोनों हाथ तो फंसे थे. ...और राजीव ने एक हाथ से कास के उसकी पतली कमर पकड़ रखी थी।

जीजू ये फाउल है. ...ग्लास रख के वो बोली।

सब कुछ जायज है. ...होली में और साली के साथ. ...और उन के हाथ उस के अधखिले कच्चे गुलाबों का. ...रस ले रहे थे।

वो छटपटा रही थी. ...कसमसा रही थी. ...मचल रही थी

जीजू. छोडो ना. ...क्या करते हो वहाँ नहीं. ...गंदे. ...ओह्ह नहीनीई. ...ओह्ह हाँ हाँ

और तब तक इस खींचा तानी में उस की फ्रंट ओपन ब्रा का हुक टूट गया. ...और।

वो जवानी की गोलाइयां. ...गोर्री गोरी हलके हलके रंग में लिथड़ी...

ये. .अरे तू भी लगा ना मैं साथ देती हूँ अपनी बहन का. ...और उन की जेब से वार्निश की ट्यूब निकाल के कम्मो के दोनों हाथ जबरन फैला के पोत दिए और बोली, ले लगा अपने जीजू को. ...वो बिचारी. ...दोनों हाथ मेरी पकड़ में थे और उन्होंने अब ब्रा पुरी की पुरी खोल दी.

छोटे छोटे कड़े जवानी के उभार. ...सूरज उगने के पहले की लाली से निपल

बिचारे राजीव. ...आंखो और हाथ में जंग हो रही थी. ...देंखे की रगड़ें मसले. ...और जीत हाथों की हुयी।

ये फाउल है. ...उस बिचारी को टाप लेस कर दिया और ख़ुद अबकी मैं बोली. ...और उनकी शर्ट के बटन खोल के शर्ट फर्श पे. बनियान तो उन्होंने पहनी नहीं थी

ले कम्मो लगा उनकी छाती पे. ...और कम्मो भी जोश में आके उनके सीने पे रगड़ने मसलने लगी

कुछ नई आई चढ़ती जवानी का जोश

कुछ स्प्राईट में वोड़का का जोश और सबसे बाद के

जीजा के साथ होली में रगड़न मसलन का जोश

कम्मो कस कस के उनके सिने में रंग लगा रही थी और वो कम्मो की कच्ची कलियों में रस भरने में लगे थे.

ब्रा का हुक तो पहले ही टूट चुका था और ब्लाउज भी स्कर्ट से बाहर निकली बटन सार्रे खुले,

अरे कपडे क्यो बरबाद करते हो बिचार्री के होली खेलना है तो साली से खेलो कहाँ भागी जा रही है बिचार्री और ये कह के मैंने एक साथ ही उस के ब्लाउज और ब्रा को पकड़ के खींच दिया,

अरे सिने से सीना रागादो तभ हो ना जीजा साली की होली, मैंने दोनों को ललकारा।

राजीव को तो किसी ललकार की जरूरत नहीं थी...सीधे से उन्होंने कम्मो को बांहों में भर लिया और वो भी अब सीधे से. ...उनके चौड़े मजबूत सिने में उसकी नवांकुर छातियां दब रही थीं.

थोड़े ही देर में दोनों फर्श पे थे. मैंने सोफे से कुषाण निकाल के कम्मो के छोटे छोटे चूतादों और सर के निचे लगा दिया और राजीव उसके ऊपर....मौका देख के मैंने उसकी स्कूल की नेवी ब्लू स्कर्ट पकड़ के खीची और उतार दी। अब वो बस एक छोटी सी सफ़ेद पैंटी और स्कूल के जूतों में...अब राजीव उसकी उन छोटी उभरती हुई चून्चियों को निहार रहे थे. ...जिसके बार्रे में सोच के ही उनका मस्ताना लैंड तन्ना जाता था.और इती छोटी भी नहीं...बस मुट्ठी में समा जायं..और उसके बिच में छोटे से प्यार्रे गुलाबी चूचुक....

हे इसके सार्रे कपडे तुमने बरबाद कर दिए. ..अब नए कपडे देने होंगे...मैंने राजीव को छेड़ा।

एक दम दूंगा आख़िर मेरी सबसे छोटी साली है...और होली का गिफ्ट...तो दूंगा ही....लेकिन पहले बोलो तुम क्या दोगी...मेरी प्यार्री साली जी।

उसके भोले भोले चहर्रे पे बड़ी बड़ी रतनार्री आँखे कह रही थीं...जो तुम चाहो...और वैसे भी तुमने छोडा ही क्या है....

लेकिन उसके लरजते किशोर होंठों से बड़ी मुश्किल से निकला....मेरे पास है ही क्या।

अरे बहुत कुछ है। राजीव एक दम अपने पटाने वाले अंदाज में आ गए,

ये रसीले होंठ, ये गुदाज मस्त जोबन और अचानक चद्धि के ऊपर से ही उसकी चुन्मुनिया को दबोच के बोले, और ये कारूँ का खजाना.

वो बेचार्री चुप रही शायद पहली बार किसी मर्द का हाथ वहाँ पडा हो, लेकिन मैं बोल पड़ी,

अरे बोल दे वरना तू अपने जीजू को नहीं जानती....

चुप का मतलब हाँ इसका मतलब साली चाहती है की मैं तीनो ले लूँ....ये कह के कस के पैंटी के ऊपर से उन्होंने उसकी चुन्मुनिया मसल दी.

मैंने सर हिला के कम्मो की और ना का इशारा किया और होंठो पे जीभ फिराई।

उस बिचार्री ने भी उसी तरह...होंठो की और इशारा किया।

ऐसे थोडी साफ बता क्या देगी वरना और अब उनकी दो उंगलियाँ पैंटी के अन्दर घुस चुकी थीं.

मैंने हलके से फुसफुसा के बोला चुम्मी. .बोल चुम्मी ले लें।

वो बोली चुम्मी...तभ तक राजीव की निगाह हमार्री इशार्रे बाजी की और पड़ चुकी थी।

हे फाउल ये नहीं चलेगा....दोनों बहने मिल के तभी ये सस्ते में छूट गई...वो मुझसे बोले।

अरे तो मैं अपनी बहन का साथ नहीं दूँगी तो क्या तुम्हार्री उस छिनाल रंडी बहन गुडी का साथ दूँगी. हंस के मैं बोली. कम्मो भी मेरे साथ हंस ने लगी।

अच्छा चल मैं चुम्मी पे संतोस्छ कर लूंगा लेकिन बाद में ये नहीं बोलना की...नहीं जीजू नहीं....वो बोले।

ठीक है बोल दे रे कम्मो ये भी क्या याद कर्रेंगें की किसी दिल दार से पाला पडा था, मैंने चढाया।

ठीक है जीजू ले लीजिये चुम्मी आप भी क्या याद कर्रेंगें,

राजीव ने झुक के उसके अन छुए होंठों का एक हल्का सा चुम्बन ले लिया और फ़िर अगले ही पल उनके होंठों के बीच, उसके होंठ तगड़ी गिरफ्त में, कभी चूमते कभी चूसते...और थोडी देर में ही राजीव की जीभ ने उसके रसीले होंठों को फैला के सीधे अन्दर घुस गई।

मैं उसके सर के पास से हट के पैरों के पास चली गई।

उस बिचार्री को क्या मालूम उसने कितना खतरनाक फैसला किया है, राजीव के होंठ उनके बालिष्ट भर के लंड से किसी मामले में खतरनाक नहीं थे।


RE: Holi sex stories-होली की सेक्सी कहानियाँ - sexstories - 11-01-2017

ननद ने खेली होली--4

लेकिन जिस तरह से कम्मों की टाँगे फैली थीं, ये साफ था की उसे भी बहोत रस आ रहा था। मेरे हाथ अपने आप उसके जाँघों पे. ..क्या चिकनी मांसल रस दार झान्घे थीं.....और झान्घों के बीच....वो तरीकों...हल्का हल्का झलक रहा था. कच्ची कलियों को भोगने का शौक तो मुझे भी बचपन से लग गया था, होली का तो मौका था जब भाभी ने रंग लगाने के बहाने ना सिर्फ़ मेरी जम के उंगली की बल्कि पहली बार झाडा...इससे सात आठ महीने ही ज्यादा बड़ी रही हौंगी और फ़िर बोर्डिंग में....११ विन से थी...टेंथ पास कर के ही तो लड़कियां आती थीं...लेकिन आने के हफ्ते भर के अन्दर ही ऐसे जबरदस्त रागिंग....पूरी चूत पुरान. ..और सार्री नई लड़कियां....एक दूसरे की चूत में उंगली...लेस्बियन रेसलिंग....और जो सबसे सटी सावित्री बनने का नाटक करतीं उन्हें तोड़ने का काम मेरा होता...एक से एक सीधी साधी भोली भाली लड़कियों को भोगा मैंने...लेकिन ये तो उन सब से कच्ची. ...पर तन और मन दोनों से ज्यादा रसीली....मुझसे नहीं रहा गया और मैंने सहलाते सहलाते...एक झटके में पैंटी को नीचे खींच के फेंक दिया जहाँ उसकी ब्रा और स्कर्ट पड़ी थीं....

इतनी सेक्सी...मुझे तो लगा मैं देख के ही झड़ जाउंगी....खूब कसी कसी गुलाबी पुतियाँ....बस हलकी सी दरार दिख रही थी...और झांटे बस आना शुरू ही हुयीं थी....वो बहोत गोरी थी और उस की झांटे भी हलकी भूरी। मुझसे नही रहा गया और मैंने उंगलियों से हलके हलके घुमाना शुरू कर दिया। उसकी पुतियों में हलकी सी हरकत हुयी तो मैंने दूसर्रे हाथ से वहाँ हलके से दबा दिया...क्या मस्त मुलायम....

उधर राजीव के होंठ अब उसकी छोटी छोटी चून्चियों के बेस पे....पहले चूम के फ़िर लिक कर के. ..और थोडी देर में उसका एक कडा गुलाबी चुचुक राजीव के होंठों के बिच में....चूभालाते चूसते चूमते. ...वो अब सिसक रही थी दोनों हाथ राजीव के सर को पकडे अपनी और खींच रहा था।

मस्ता रही है साली...मैंने सोचा...फ़िर मेरी उंगली की टिप पुतियों के बीच... हल्का सा गीलापन था वहाँ...मैं बस हलके बिना दबाये ऊपर निचे...अंगुली की टिप करती रही।

राजीव के होंठ अब उसकी गहर्री नाभि को चूम रहे थे....मैं समझ गई की उनकी मंजिल क्या है इसलिए अब मैं फ़िर उसके सर की ओर चली गई.

क्या गुलाबी रसीले होंठ थे और चूंचिया भी एक दम कड़ी मस्त....मुझसे नहीं रह गया और मेरे होंठ उसके होंठों पे और दोनों हाथ रसीले जोबन पे....

और उसके साथ ही राजीव के होंठ उस कली के निचले होंठों पे....

तड्पाने में तो राजीव का सानी नहीं था. उसकी जीभ कभी पंख की तरह गुदगुदाती, कभी...

जीभ की बस नोक से वो उस कलि के लेबिया के किनारे किनारे...और दो चार बार चाटने के बाद उसी तरह. ..दोनों निचले होंठों को अलग कर जीभ अन्दर पेबस्त हो गई और उसने कस के अपने दोनों होंठों के बीच. ..कम्मो के निचले होंठों को....कभी वो हलके हलके चूसते तो कभी कास के उन संतरे की फानकों का रस लेते...

और साथ में मेरी जुबान भी बस अभी उसके सर उठा रहे निप्पल को फ्लिक करते....

चार पाँच बार वो उसे किनार्रे पे ले गए फ़िर रुक गए।

मैंने आँख के इशार्रे से डांटा....एक बार झड़ जाने दो बिचार्री को।

जब एक बार झड़ जायेगी तभी तो उसके चूत के जादू का पता लगेगा।

वो बिचार्री कसक मसक रही थी। चूतड़ पटक रही थी....

चूसो ना जीजा कस के और कस के....ओह्ह ओह्ह....जल बिन मछली की तरह वो तड़प रही थी।

क्या चूसून साली....चूत से मुंह उठा के पूछा उन्होंने।

अरे बोल दे ना....चूत....मैंने धीरे से उसके कान में कहा.

चूत..... बहोत डरते हुए सहमते हुए उसने कहा.

अरे मैंने सूना नहीं ज़रा जोर से बोल ना। फ़िर उन्होंने कहा।

जिजू....प्लीज...मेरी चूत. .चूसिये ना...चूत.

अरे अभी लो मेरी प्यारी साली और फ़िर दुबारा उनके होंठ उसकी चूत की पंखुडियों पे....

और अब वह जब झड़ने लगी तो वो रुके नहीं...बस अपने दोनों हाथों से उसकी कोमल कलाई पकडली और कस कस के. ..जैसे जीभ से ही उसकी कुंवार्री कच्ची चूत चोद देन....कस कस के...

वो झड़ रही थी...अपने चूतड़ पटक रही थी. ...

पर वो रुके नहीं कस के चूसते रहे... चूसते रहे....

थोडी देर में फ़िर दुबारा...अब वो चिल्ला रही थी. ...नहीं हाँ....प्लीज जिजू छोड़ दो.....

जब वो एक दम शिथिल हो गई तभ छोडा उन्होंने उसे....लथ पथ आँखे बंद किए पड़ी हुयी थी।

मैंने होंठ बढ़ा के उनके होंठों से उस कच्ची कलि का रस चख लिया....

क्या स्वाद था....फ़िर एक अंगुली से सीधे उसके मधु कोशः से...

खूब गाधा शहद वो अब मेरे पास आ के बैठ गए थे,

क्यों मजा ले लिया ना साली का। तभ तक वो कुनामुनाने लगी।

हल्के से एक चुम्बन पहले उसकी अधखुली अलसाई पलकों पे फ़िर गुलाबी गालों पे ... रसीले होंठों पे. वो हलके से अंगडाई ले के मस्ती में बोली, जिजू

और जवाब में उनके होंठों ने फ़िर से खड़े होते निपल को मुंह में भर लिया और हलके चूसने लगे।

होंठों का ये सफर कुछ देर में अपनी मंजिल पे पहुँच गया औसकी गुलाबी रस भर्री पंखुडियां उनके होंठों के बीच थीं और कुछ देर में वो फ़िर से चूतड़ पटक रही थी,

हाँ हाँ जिजू..और कस के चूसो मेरी चूत ओह ओह।

अबकी और तड़पाया उन्होंने। ५-६ बार किनार्रे पे ले जा के और फ़िर अंत में दोनों किशोर चूतड़ कस के पकड़ के उस की चूत की पुतियों को रगड़ रगड़ के जो चूसना शुरू किया।

वो झड़ती रही. झड़ती रही

और वो चूसते रहे चूसते रहे

बीचार्री मजे से बिल्बिलाती रही लेकिन. वो

वो बेहोश सी हो गई थक के तभ जा के उठे;.

तारीफ भर्री निगाहों से देखते हुए मैंने कहा, बहोत अच्छा अब तुमने उसे ऐसा मजा चखा दिखाया है इस उमर में की ख़ुद लंड के लिए भागती फिरेगी।

एकदम और प्यार से वो उसके बाल सहलाते रहे।

और जब थोडी देर में उसने आँखे खोली तो मैं बोली, देख तेरे जिजू क्या होली का गिफ्ट लाये हैं,

और उनसे मैंने कहा और आप पहना भी तो दीजिये अपने हाथ से लेविस की लो कट जीन्स टैंक टाप और सबसे बढ़ के पिंक लेसी ब्रा और थांग का सेट और ब्रा भी पुश अप थोडी पैदेदा। जब पहन के वो तैयार हुयी तो किसी सेक्सी टीन माडल से कम नहीं लग रही थी।

शीशे में देख के वो इती खुश हुयी की उसने ख़ुद उनको गले लगा लिया और बोली

थैंक्स जिजू मैं कितने दिनों से सोच रही थी..ऐसी जींस पर ये तो छोटा शहर है ना

उम्म्म जीजा को कभी थैंक्स नहीं देते मैंने हंस के कहा

जान बूझ के बड़ी अदा से वो बोली। आँख झपका के वो बोली, तो क्या देते हैं

चुम्मी हंस के राजीव बोले ...

अरे तो लीजिये ना जिजू और ख़ुद उनको बांहों में ले के कम्मो ने चूम लिया।

हम लोग चलने वाले थे की मैंने रुक के कहा, तुमने मेरी छोटी बहन के साथ नाइंसाफी की है ये नहीं चलेगा।

वो चकित और कम्मो भी

देखो तुमने तो उसका सब कुछ देख लिया और अपना अभी तक छुपा के रखा है उनके अब तक तन्नाये बल्ज पे हाथ रगड़ के मैं बोली।

हाँ सार्री लेकिन मैंने ख़ुद खोल के देखा था अगर साली चाहे तो ...वो बोले।

क्यों चैलेन्ज एक्सेप्ट करती हो मैंने कम्मो से पूछा नाक का सवाल है मेरी।

एक दम दीदी और उसने उनकी जिप खोल दी।

जैसे कोई स्प्रिंग वाला चाकू निकलता है एक बालिष्ट का पूरी तरह तन्नाया हुआ लंड बाहर आ गया।

अरे पकड़ लो काटेगा नहीं हंस के उन्होंने चिढाया

आप भी क्या याद करिएगा जिजू किस साली से पाला पडा था और उसने दोनों हाथों से उसे पकड़ लिया।

मुंह खोल के तो देख ले, मैं भी बोली।

लाल गरम खूब मोटा पहाडी आलू ऐसा तन्नाया सूपाडा सामने

बस एक बात बाकी है इन्होने तुम्हार्रे वहाँ किस्सी की थी तुम भी ले लो।

रात भर मैंने उन्हें खूब तड़पाया लेकिन झाड़ने नहीं दिया।

वैसे तो मेरी छुट्टी आज रात खत्म हो जाने की थी....पर कुछ कम्मो के साथ खेल तमाशा...एक दिन और....

वो अभी छोटी तो नहीं है....कितनी कसी हुयी पुत्तियाँ...और मेरा इतना मोटा...बेचारे परेशान।

अरे कुछ नहीं मेरे साजन ...ले लेगी बस थोडा सम्हालना पड़ेगा...उनके तनाये मस्त सुपाडे पे जीभ से फ्लिक करते मैं बोली। बाबी देखा था....पूरा हिन्दुस्तान डिम्पल को देख के मुठ मारता था क्या उमर रही होगी....और क्या पता पिकचर में रोल देने के पहले....

सही कहती हो....एक दम देखने में बाबी ऐसे ही लगती है, लम्बी गोरी, मस्त मुट्ठी में भर जायं उस साईज़ के मम्मे....गुलाबी कचकचा के काटने लायक गाल...वो और मस्ती से पागल हो गए।

और रेखा को, सावन भादों में...लगे पचासी झटके...क्या मस्त गदराये उभार थे...सोलह साल की थी....मैं अब उनकी एक बौल मुंह में ले के चूस रही थी और हाथ एक दम खड़े लंड को मुठिया रहा था...एक मिनट उसे निकाल के मैं बोली...और फ़िर दूसरी बौल को मुंह में ले के चुभालाने लगी.

और साथ साथ सोच रही थी तभी तो मैंने,....चलने के पहले मैंने कहा की बाथ रूम जाना है....तो हम साथ साथ बाथ रूम गए ...और मैंने फ़िर उसे समझाया...चूत में बीच वाली सबसे बड़ी मंझली उंगली करनी चाहिए...ना सिर्फ़ इसलिए की वो सबसे लंबी होती है बल्की अगल बगल की दोनों उंगलियों से पुत्तियों को रगड़ सकते है....और अंगूठा सीधे क्लिट पे...हल्के हल्के दबाना...और फ़िर एक बार मैंने ख़ुद किया और फ़िर उससे अपने सामने करवाया भी....जोर दे के लगभग दो पोर तक गुसवाया....इन्होने जो चुसाई की थी उसका रस अभी तक उसकी बुर में था....मैंने बोला की हम लोग के जाने के बाद.....अभी तो मम्मी के आने में टाईम है....एक बार हलके हलके....देर तक कम से कम दो बार झाड़ना....और रात में सोने के पहले...हाँ उस समय अच्छी तरह वैसलीन लगा के....फ़िर जब भी टायलेट जाय....नहाते समय...हाँ हर समय बस यही सोचे की उसके जीजू का मोटा लंड जा रहा है उसकी चूत में...और अगर किसी दिन ५-६ बार से कम उंगली किया ना तो बहोत मारूंगी उसकी पीठ पे धोल जमाते हुए मैंने कहा।

एकदम दीदी....

और इसलिए जब वो हम लोगों को छोड़ने बाहर तक आयी तो मैंने हंस के कहा,

याद रखना, थोड़ी सी पेट पूजा कहीं भी कभी भी।

हंसते हंसते वो अन्दर चली गयी।


RE: Holi sex stories-होली की सेक्सी कहानियाँ - sexstories - 11-01-2017

ननद ने खेली होली--5

मेरी जीभ अब उनके गंद के छेद को चाट रही थी...कस कस के लप लप।

ओह्ह ...मजे से वो चूतड उचका रहे थे लेकिन फ़िर बोले,

यार लेकिन उसका छेद इत्ता कसा छोटा...टाईट...उफ्फ्फ़ ...

अरे राजा...तुम बुधू हो, कच्चे कसे छेद में जायेगा, तभी तो पर्परयेगी, चीखेगी चिल्लायेगी, लेकिन मेरी कसम अगर तुमने एक सूत भी बाहर छोडा तो.....तुम तो अपनी उस बहन कम माल के बारे में भी यही कह रहे थे याद है छे महीने भी नहीं हुया....बढ़ी सीधी है....भोली है....और मैंने क्या शर्त बंधी थी १० दिन के अन्दर ५ मर्दों से चुदवाने के बाद तुम्हारे सामने वो ख़ुद खड़ी होगी चूत फैला के ...और हुआ ना वही...और देखो....इसको भी मैं इत्ती चुदवासी बना दूंगीं...हर जीजा क्या चाहता है होली में मालूम है ना...

हाँ एक दम हंस के वो बोले,

छोटी छोटी चून्चीया हों बुर बिना बाल की,

छोड़ो राजा कस के साल्ली है कमाल की।

उनका लंड चूसना रोक के मई बोली....और उसकी तो छोटी छोटी झांटे भी आनी शुरू हो गयी हैं....हल्की हल्की भूरी भूरी....

सही कहती हो सोच के रुका नहीं जाता....

अच्छा अब सो जाओ....कल वो आयेगी ना बहन कम माल...गुड्डी....तो बस उसे उसी में झाड़ना...

बेचारे उसी तरह सो गए।

अगले दिन दोपहर में हम लोग गडे वाली गली गए....यानी गुड्डी के घर।

गुड्डी और अल्पी अभी आई थीं गाईड कैम्प से....उन्हें देख के वो चमक दोनों के चहरे पे आई जो किसी सुहागन के चहरे पे आती है....होली में बाहर से कमा के लौटने वाले पति को देख के....

एक दम चुदवासी लग रही थीं।

दोनों उनके पीछे पड़ गयीं ....पिकचर दिखलाने के...तय हुया की मैं ड्राईव कर के अल्पी को उस के घर छोड़ दूंगी और तीन से छ का टिकट ले आउंगी....और लौटते हुए अल्पी को पिक अप कर लूंगी।

मैं उन दोनों के अकाल की तारीफ किए बिना नहीं रह सकी....घर में तो खुल के बात भी नहीं हो सकती थी....होली का काम फैला पडा और ढेर सारे लोग ....

लौटी तो उनकी तारीफ किए बिना नहीं रह सकी .... पतली रजाई ओढे दोनों .... गरम गरम कड़ाही से निकलती गुझिया खा रहे थे वो खिला रही थी .... लेकिन जो मैंने देखा तो .... दोनों के एक एक हाथ रजाई के अन्दर .... ऊपर से तो वो भैया भैया बोल रही थी .... और अन्दर से हाथ .... सीधे उनके पैंट के ऊपर रगड़ा .... मैंने सीधे जिप खोल के .... उनका तन्नाया मस्ताया लंड उसके हाथ में पकडा दिया .... और उसने भी गप्प से .... दोनों टांगें रजाई में वो इस तरह मोड़ के बैठी थी की राजीव का हाथ सीधे अपनी ममेरी बहन की दोनों गुदाज जाँघों के बीच में .... चुनामुनिया को रगड़ मसल रहा था .... गीली तो उसे उसके भैया ने ही कर रखा था .... मैंने गैप से एक अंगुली की टिप उसकी कसी फुद्दी में घुसेड दी। बेचारी सिसक उठी, लेकिन बनते हुए उसने उनसे गुझिया देते हुए कहा, भैया और लीजिये ना।

मैंने चिढाया, अरे बिचारी इती प्यार से दे रही है और आप ले नहीं रहे हो।

एक दम लूंगा .... क्यों उसकी आंखों में झांकते हुए वो बोले और गुझिया गप कर ली।

बिचारी शरमा के गुलाल हो गयी।

तब तक उन्हें किसी ने बुलाया .... और वो पैंट ठीक करते हुए बाहर चले गए। मुझे मौका मिला और गोल गोल घुमाते हुए मैंने आधी से ज्यादा उंगली अन्दर घुसेड दी ....

हे बड़ी टाईट लग रही क्या कई दिनों से गुल्ली डंडा नहीं खेला .... या अपने भैया के स्वागत के लिए टाईट अगेन लगा राखी है।

नहीं भाभी, थोड़ी दुखी हो के बोली, आपके जाने के बाद एक बार भी नहीं हुया पूरा सन्नाटा है ....

अरे तेरे तो इत्त्ते यार थे क्या हुया उनका .... वो गाँव से लौटने वाला था .... और फ़िर मेरे पड़ोस का नीरज .... जिसके साथ तुमने फार्म हायुस में .... ( पूरा किस्सा .... ननद की ट्रेनिंग में पढ़ें) .... .

अरे वो आप को तो मालूम ही है की वो गाँव गया था अपनी बहन की सगाई में .... वहाँ उसके बहन की ससुराल वालों ने शर्त रखी की उसकी बहन की ननद के साथ .... .और नीरज बाम्बे चला गया .... एक कोर्स करने .... ।

मैं तो सोच रही थी की उन कालीन गंज वालियों की तरह ( उसके शहर का रेड लाईट एरिया) की तरह सदा सुहागिन होगी, एक बाहर निकलता होगा तो दूसरा अन्दर जाता होगा, मैंने फ़िर छेडा। चल कोई बात नहीं होली में तो तेरे भैया कम सैंया हैं ही और फ़िर जीजा भी आयेंगे और होली के बाद तो तुझे हम लोगों के पास चलना ही है .... फ़िर तो देखना इस की क्या दुरगत करती हूँ। और मैंने गच्चे से पूरी उंगली अन्दर पेल दी।

एक दम भाभी ये भी तैयार है ..दुरगत करवाने के लिए मैंने तो पैकिंग भी कर ली है। हंस के वो बोली।

तब तक राजीव आके बोले, अरे तुम ननद भाभी गप ही मारती रहोगी या .... टाईम हो गया है पिक्चर का और वहाँ अल्पी इंतजार कर रही होगी।

अरे मेरे भैया को अपनी साली के इंतजार की बड़ी चिंता है उसने चिढाया और १० मिनट में तैयार हो के आ गयी।

क्या मस्त माल लग रही थी, टाईट गुलाबी शलवार सूट में, भरे भरे मम्मे छलक रहे थे .... क्या कटाव था और जांघे भी एक दम भरी भरी कसी कसी .... .

तब तक अचानक वो रुकी और बोली .... भाभी बस एक मिनट ....

क्या पैंटी पहनना भूल गयी .... मैंने कान में कहा....

वो तो मैंने जान बूझ के नहीं पहना .... लेकिन ज़रा शाल ले के आती हूँ क्या पता हाल में ठंडक लगे।

शाल क्या वो इत्ता बड़ा पूरा कंबल ले आयी।

अल्पी के आते ही वो दोनों तो ऐसे चालू हुईं बेचारे राजीव की हालत ख़राब .... .

हाल में घुसते ही मैंने अल्पी से कहा अरे साली के होते हुए भी जीजा सूखे सूखे .... तो मुस्करा के मेरे कान में वो बोली, अरे दीदी देखती जाईये।

हाल लगभग खाली था और सबसे पीछे की रो में हमने कोने की सीटें हथिया लीं .... दोनों उनके अगल बगल और गुड्डी की बगल में मैं।

किसिंग विसिंग तो तुरंत चालू हो गयी और थोड़ी देर में राजीव के दोनों हाथों में लड्डू थे। लेकिन दो चार लाईनें छोड़ के लोग बैठे थे .... और सीटों पे ..जितना हो सकता था उससे बहोत ज्यादा हो रहा था....

सालियों इस होली में तुम दोनों की मैं ऐसी रगडाई करूंगा ना .... राजीव ने एक साथ दोनों के मम्मे मसलते हुए कहा .... .

तो हम छोडेंगें क्या .... कच काचा के गाल काटते हुए अल्पी बोली।

इंटरवल होने वाला था।

अरे जीजू आप के गाल पे ये क्या लगा है .... ये कह के अल्पी ने अपने रुमाल से बड़े प्यार से उनके गाल को रगड़ रगड़ के पोंछ दिया।

अरे भैया .... इधर भी .... गुड्डी ने भी रुमाल निकाल के .... उनका गाल साफ कर दिया।

इंटरवल में जब हम बाहर निकले .... तो उन्हें देख के बड़ी मुश्किल से मैं हंसी दबा पायी।

और वो दोनों चुडैलें .... ऐसे की जैसे कुछ हुया ही न हो, उन्हें ले के कायुन्टर पे गयीं .... कोला पीया .... क्रीन्म रोल खरीदा .... और इंटरवल खत्म होने के ठीक पहले मैंने जब वो टायलेट से निकले मैं बोल पडी .... ज़रा शीशे में देख लीजिये कुछ लगा है .... क्या ....

अरे अल्पी तूने कैसे साफ किया था की .... गुड्डी अंदाज से बोली .... तब तक वो शीशे में चेहरा देख रहे थे .... .

एक और लाल .... योर दूसरी और काला .... .पानी लगाते ही वो और फ़ैल गया।

अब उन्हें समझ में आया की सब लोग उन्हें ही क्यों देख रहे थे।

एक ने रुमाल में लाल गुलाल के साथ गाधा रंग और दूसरी ने तो पूरी गाधी कालिख ....

जाने दीजिये होली का रंग है इत्ती आसानी से नहीं छूटेगा .... मैंने उनसे कहा और पिकचर भी शुरू हो गयी है .... अंधेरे में कौन देखेगा .... मैंने उनसे अन्दर चलने के लिए कहा।

अन्दर घुसते ही गुड्डी ने छेडा, भैया किसके साथ मुंह काला किया.... और जिस तरह से वो चीखी मैं समझ गयी अल्पी ने उसे कस के चिकोटी काटी ...

तुम्ही बैठी थी.... उस ओर....वो बोली। हाल में क्रीन्म रोल गुड्डी ऐसे चाट रही थी....जैसे कोई मोटा शिशिन चाट रही हो। और उन का हाथ अब तक अल्पी के टाप के सारे बटन खोल चुका था.....

तुम दोनों लगा चुकी ना अब मेरी बार ऐसी कस के मलाई पोतुन्गा ना गाल पे....सफेद गाढ़ी....वो बोले।

अरे जीजू ... नेकी और पूछ पूछ, ज़माना हो गया, मलाई का स्वाद चखे।

एक दम तो ये रोल क्यों खा रही है, असली रोल चख ना....मैने छेडते हुये गुड्डी के मुंह से क्रीम रोल छीन लिया और कस के उसका मुंह तन्नाये हुये जीन्स पे रगड दिया. दूसरे हाथ से मैने उनका जीप खोलते हुये लंड निकाल लिया।

एक दम भाभी और ये शाल किस दिन काम आयेगा. हंस के गुड्डी बोली।

पक्की छिनाल है...ये, मैने सोचा. कैसी प्लानिंग बना के आई।

तब तक दोनों लडकियों के सर शाल में...कभी गुड्डी, कभी अल्पी और कभी दोनों साथ..साथ...एक सुपाडा गप करती तो दूसरी...साईड से सडप सड्प...जीभ से चाटती..।

गुड्डी मेरी ओर ही बैठी थी, मेरे और उनके बीच में...मेरी प्यारी ननद ...तो मैं कैसे चुप रहती....झुकी हुई वो...सीटों के बीच के आर्म रेस्ट कब के उठ चुके थे...गदराये हुये जोबन...मैने गप से पकड लिया और लगी उन किशोर उभारों का मजा लेने पहले थोडी देर उपर से और फिर...बटन तो उसके भैया ने कब के खोल दिए थे...बहोत दिन बाद मेरे हाथों को फिर उन टीन बूब्स का मजा लगा...और दूसरा हाथ शलवार के उपर से ही पीछे से उसके मस्त चूतडों का...लेकिन मुझसे नहीं रहा गया और मैने शलवार का नाडा पूरी तरह खोल के एक दम घुटनों तक सरका दी. ( सच में उसने पैंटी नहीं पहन रखी थी....और एक दम चिकनी ....मुझे याद जिस दिन मैने उसे बताया था कि राजीव को ‘चिकनी’ पसंद है अ॑गले ही दिन उसने सारी घास फूस साफ कर दी) एक चूची मेरे हाथ में थी और दूसरी उसके भैया के...कभी दबाते कभी निपल पिंच कर देते...मेरा दूसरा हाथ उस की चिकनी चूत पे....आखिर होली में भाभी ननद की चूत की हाल चाल नहीं लेगी तो होली कैसी....थोडी ही देर में मेरी दो उंगलिया चूत में अंदर बाहर..।

और उधर वो अल्पी की चूत में उंगली कर रहे थे धक धकाधक...दोनों ही अच्छी तरह गीली हो चुकी थीं और इस का नतीज ये था की दोनों जम के चूस रहीं थीं, चाट रहीं थी..शाल काफी हट चुका था इसलिये साफ दिख रहा था की कैसे अल्पी ने आधे से ज्यादा लंड घोंट रखा था और कस के चूस रही थी....गुड्डी भी एक हाथ से उनके बाल्स सहला रही थी, लंड के बेस पे दबा रही थी और साईड से...मैने इशारा किया तो उसने अल्पी के गाल भी कस के चूम लिये और बोली ...आखिर मेरे भैया की साली है....मेरे भैया का इत्ता मोटा लंड घोंट लिया..।

मुंह से लंड निकाल के गुड्डी की ओर बढाती अल्पी बोली...अरे ननद रानी तेरी क्यों सुलग रही है,...ले तू भी ले....मेरे जीजू के लंड में बहोत ताकत है...चाट ....और जैसे कोई नदीदी ....लाली पाप पे झपटे...उसने दोनों हाथों से पकड के सीधे मुंह में गप और राजीव भी ...उसका सर पकड के अपने ५-६ दिन से भूखे तन्नाये लंड पे कस के ...दबा दिया...ओक ओक करते भी वो आल्मोस्ट पूरा लंड घोंट गई।

और वो जब झडे भी तो उन्होने साली और ‘बहन’ में कोइ भेद भाव नहीं किया....थोडा अल्पी के मुंह में थोडा गुड्डी के मुंह में और सिर्फ मुंह में ही नहीं चेहरा, बाल, भौंहें, यहां तक की चूंचीयों पे भी....खूब ढेर सारा गाढा....वैसे भी वो जब झडते थे तो आधा कटोरी से कम नहीं और आज तो इतने दिन के बाद..।


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