Chudai ki Kahani अंजानी डगर - Printable Version

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Chudai ki Kahani अंजानी डगर - sexstories - 06-03-2018

हिंदी सेक्सी कहानियाँ अंजानी डगर पार्ट--1

यह कहानी है हम 3 दोस्तो की. बबलू, विक्की और मैं आशु (निकनेम्स), हम तीनो देल्ही के साउत-एक्स इलाक़े मे पले- बढ़े हैं. हम तीनो ही अप्पर मिड्ल क्लास से थे. पैसे की कोई टेन्षन नही पर लिमिट भी थी. दिन मे स्कूल-कॉलेज फिर शाम को साउत-एक्स मार्केट मे तफ़री. हमारी मार्केट की खास बात है कि यहा सिर्फ़ हाई-फाइ लोग ही शॉपिंग करने आते है. यह अमीरो की मार्केट जो है. एक से एक सेक्सी कपड़ो मे सुन्दर-गोरी लड़किया ही मार्केट की रौनक थी. बाकी दुनिया मल्लिका सहरावत, नेहा धूपिया, एट्सेटरा. हेरोयिन्स को जिन कपड़ो मे सिर्फ़ फ़िल्मो मे ही देख पाते है, हम उन्हे अपनी आखों के सामने देखते थे. हर लड़की के साथ कोई ना कोई बाय्फ्रेंड ज़रूर होता था. कोई लीप किस कर रहा है तो कोई कमर मे हाथ डाल कर चल रहा है. इतने शानदार नज़ारो को देखते हुए रात के 10-11 बज जाते थे. ये जश्न तो उसके बाद भी चलता रहता था पर घर पर डाँट पड़ने का भी डर होता था, इसलिए हम 11 बजे तक घर पहुच जाते थे... ऐसे हस्ते खेलते आँखे सेकते लाइफ कट रही थी, पर अचानक हमारी जिंदगियो मे बवंडर आ गया. हम तीनो बी.कॉम के फाइनल एअर के एग्ज़ॅम मे लटक गये. कॉलेज से रिज़ल्ट देख कर घर जाते समय हम एक ख़तरनाक फ़ैसला कर चुके थे... 4 दिन बाद हम तीनो मुंबई के वीटी स्टेशन पर उतरे. घर वालो का पता नही क्या हाल था. हम तीनो के पास अपने कुल 5500 रुपये थे. हमे पता था कि मुंबई मे ये 5-6 दिन से ज़्यादा नही चलेंगे. स्टेशन से सीधे हम विरार मे विक्की के दोस्त श्याम के पास पहुच गये. श्याम अपनी प्लेसमेंट एजेन्सी चलाता था. हमने उससे रहने की जगह का बंदोबस्त करने को कहा और नौकरी का भी इन्तेजाम करने को कहा. फिर हम निकल पड़े मुंबई नगरी के जलवे देखने. शाम को वापस पहुचने पर श्याम का चेहरा खिला हुआ था. विक्की- क्यो दाँत दिखा रहा है बे ? श्याम- अबे मैदान मार लिया. तुम तीनो सुनोगे तो मेरा मूह चूम लोगे. विक्की- कुत्ते तूने हमे गे समझ रखा है क्या ? तेरा मूह तोड़ देंगे. श्याम- अरे भड़क क्यो रहा है यार...मैने तुम्हारे लिए ऐसे कामो का इन्तेजाम किया है कि तुम जिंदगी भर मुझे याद रखोगे. ये लो जॉब कार्ड्स और कल सुबह 10 बजे तक अपनी-अपनी नौकरी पर पहुच जाना. मैने कहा- थॅंक यू श्याम भाई. फिर हम तीनो रात बिताने के लिए अपना समान उठाकर श्याम की बताए जगह पर पहुच गये. सुबह के 9.50 हो चुके थे और मैं अपनी नौकरी की जगह के सामने खड़ा था. जुहू मे एक शानदार सफेद रंग का बंग्लॉ था. मैं गेट और बिल्डिंग के बीच शानदार लॉन था जिस पर 1 छतरी, 2 कुर्सी और 1 मेज लगे थे. मैनगेट पर वॉचमन खड़ा था. उसके पास पहुच कर मैने जॉब कार्ड दिखाया और बोला- नौकरी के लिए आया हू. वॉचमन- मुंबई मे नये हो ? मैं (आशु)- हा. पहले देल्ही मे था. वॉचमन- फिर तो मुंबई मे टिक जाओगे, देल्ही तो मुंबई की बाप है. फिर उसने इंटेरकाम पर बात की और छोटा गेट खोल दिया और बोला- सीधे अंदर बिल्डिंग के पीछे चले जाओ. मेडम वही मिलेंगी. मैने अपना समान उठाया और बिल्डिंग के पीछे पहुच गया. बिल्डिंग के पीछे का नज़ारा आगे से भी शानदार था. वाहा भी हरियाली थी और बाउंड्री वॉल बहुत उँची थी. बिल्डिंग के साथ एक बहुत बड़ा स्विम्मिंग पूल बना था जिस पर सूरज रोशनी पड़ने से तेज चौंधा निकल रहा था. कुछ सुन-बात कुर्सी पड़ी थी और एक पर कुछ टवल जैसे कपड़े पड़े थे. एक कॉर्डलेस फोन भी पूल की मुंडेर पर रखा था. पर वाहा पर कोई मेडम नही थी. मैं वापस गेट के लिए मुड़ने ही वाला था कि अचानक पानी की आवाज़ आई. एक 30 साल की हसीना ने स्विम्मिंग पूल के पानी से अपना सिर बाहर निकाला और बोली- तुम ही केर टेकर की नौकरी के लिए आए हो? क्या नाम है तुम्हारा ? आशु- ज..जी म..मेरा नाम आशु है. मेडम- हकलाते हो क्या ? (हंसते हुए बोली) आशु- ज..जी नही. मेडम- ठीक है. अपना समान सर्वेंट क्वॉर्टर मे रख दो और 5 मिनिट मे मैं हॉल मे आ जाओ. देल्ही मे मैने आइटीआइ से हॉस्पिटालिटी, विक्की ने वीडियो फोटोग्रफी और बबलू ने टेलरिंग का कोर्स किया था. यही ट्रैनिंग आज हमारे काम आ रही थी. हमने श्याम को अपने सर्टिफिकेट दे दिए थे और उसने हमारे लिए वैसे ही काम ढूँढ दिए. उधर विक्की और बबलू भी अपनी-अपनी नौकरियो पर पहुच चुके थे. विक्की को एक फिल्म प्रोड्यूसर के पास असिस्टेंट कॅमरामेन जॉब के लिए गया था और बबलू एक टेलरिंग शॉप मे असिस्टेंट मास्टर के लिए. चलिए अपनी कहानी आगे बढ़ते हैं. फिर मैने (आशु) अपना समान उठाया और कनखियो से मेडम की तरफ देखा. पर मेडम फिर पानी मे गायब हो गयी थी. मैं सीधा वॉचमन के पास पहुचा और बोला- भाई अब ये सर्वेंट क्वॉर्टर कहा है. वॉचमन चाबी देते हुए बोला- तीसरा कमरा खाली है, वही तुम्हे मिलेगा. कमरे पर पहुच कर अपना समान रखा और नज़र कमरे को देखा और बाहर निकल गया. सीधे मैं हॉल मे पहुचा, पर वाहा कोई नही था. बिल्डिंग के अंदर क्या शानदार सजावट थी वो शब्दो मे नही बता सकता. एक खास बात थी कि बिल्डिंग की एंट्रेन्स से लेकर सब जगह आदमियो के न्यूड स्कल्प्चर्स (मूर्तिया) लगे थे. औरत की कोई नही थी. मैं हॉल से पीछे स्वीमिंग पूल का नज़ारा साफ दिखाई दे रहा था. तभी स्विम्मिंग पूल से मेडम बाहर निकली... संगेमरमर मे तराशे हुए जिस्म पर पानी से तर-बतर छोटी सी बिकिनी मे मेडम अपने सुन्बाथ चेर के पास पहुचि. सूरज की रोशनी मे मेडम के अंगो का एक एक कटाव और भी गहरा लग रहा था. मेडम की लंबी गोरी टाँगे, बिकिनी से बाहर झाँकते 36डी के बूब्स, पूरी निर्वस्त्रा कमर पर केवल एक डोरी... ये सब देख कर मेरे पूरे शरीर मे कीटाणु रेंगने लगे. दिल धड़-धड़ कर बजने लगा और मेरा लंड बुरी तरह अकड़ गया. टट्टो मे दर्द होने लगा. मेरी पॅंट मे एक पहाड़ सा उभर आया. (आप लोग यकीन मानिए की मैं अब तक (18 साल) ब्रह्मचारी ही था. मेरा वीर्य-पात अब तक नही हुया था और ना ही मुझे इस बारे मे पता था. देल्ही मे माइक्रो-मिनी और ट्यूब-टॉप पहने आध-नंगी लड़कियो की मैं मार्केट मे लड़को के साथ चुहल-मस्ती देखकर भी हम तीन दोस्तो को कभी भी मूठ मारने ख़याल नही आया थी. इसका ही नतीजा था कि मेरा लंड जब खड़ा होता था तो पूरे 8" का पत्थर बन जाता था. और कुछ ना करने पर भी कम से कम आधे घंटे बाद ही शांत होता था.) अब मेरे लिए भारी मुश्किल हो गयी थी. सामने मेडम ने अपना टवल गाउन पहन लिया था और अब मैं हॉल की तरफ आ रही थी. इधर मेरी पॅंट मेरे मन की दशा जग-जाहिर कर रही थी. मैने अपने लंड को शांत करने के लिए थोडा सहलाया पर इससे बेचेनी और बढ़ गयी. और कुछ ना सूझा तो, मैं एक सोफे की पीछे जाकर खड़ा हो गया. इससे मेरी पॅंट को उभार छिप गया था. मेडम मैं हॉल मे आ चुकी थी- पहले कभी कहीं काम किया है ? आशु- जी नही. मेडम- तुम मुंबई कब आए. आशु- जी 1 दिन पहले. मेडम- बड़े लकी हो की एक दिन मे ही जॉब मिल गया. आशु- जी. मेडम- इतनी दूर क्यों खड़े हो यहाँ आओ. मैं जैसे-तैसे वाहा बैठ गया. पता नही मेडम ने पॅंट को नोटीस किया या नही. मेडम- मैं ज़्यादा नौकर-चाकर नही रखती. जीतने ज़्यादा होते हैं उतना सिरदर्द. मुझे अपनी प्राइवसी बहुत पसंद है. वॉचमन को भी बिल्डिंग मे कदम रखने इजाज़त नही है. केवल तुम्हे ही बिल्डिंग मे हर जगह जाने की इजाज़त होगी. इसलिए तुम्हे ही पूरी बिल्डिंग की केर करनी होगी. बोलो कर सकोगे ? आशु- जी. मेडम- वैसे तो इस घर मे कुल 2 लोग ही रहते हैं, मैं और मेरे पति की बेटी दीपा. घर पर खाना नही बनता. इसके अलावा लौंडरी, चाइ-कॉफी, रख-रखाव जैसे छोटे मोटे काम करने होंगे. आशु- मेडम तन्खा कितनी मिलेगी ? मेडम मुस्कुराते हुए बोली- शुरू मे 20000 रुपये महीना मिलेगा. अगर तुम हमारे काम के निकले तो कोई लिमिट नही है. बोलो तय्यार हो ? आशु- ज..जी मेम . मेडम- ठीक है तो उपर दीपा मेडम का कमरा है, उसे जाकर जगा दो. फिर कॉफी लेकर मेरे लिविंग रूम मे पहुच जाना, एकदम कड़क चाहिए. आशु- जी. मैं तुरंत वाहा से निकल लिया. जान बची सो लखो पाए. किचन मे कॉफी मेकर मे कॉफी का समान डाल कर मैं उपर पहुच गया. वाहा 4 कमरे थे. 3 कमरे लॉक थे. मैने चौथे कमरे का दरवाजा नॉक किया, पर कोई रेस्पोन्स नही आया. थोड़ी देर बाद मैं दरवाजे का हॅंडल घुमाया तो दरवाजा खुल गया. अंदर एक दम चिल्ड था. एक गोल पलंग पर एक खूबसूरत सी लड़की सोई थी. एक दम गोरी-चित्ति, ये दीपा थी. उसके कपड़े देख कर देल्ही की याद ताज़ा हो गयी. वही ट्यूब टॉप और माइक्रो मिनी. पर यहा की बात ही अलग थी. वाहा देल्ही मे लड़कियो को डोर से देख कर ही आँखे सेक्नि पड़ती थी और यहा एक अप्सरा मेरे सामने पड़ी थी. आल्मास्ट सोने से दीपा के कपड़े अस्त-व्यस्त हो गये थे. उसकी ब्लू स्कर्ट तो कमर पर पहुच गयी थी और पूरी पॅंटी अपने दर्शन करा रही थी. उपर का वाइट टॉप भी उपर चढ़ गया था और सुन्दर सी ऑरेंज एमब्राय्डरी ब्रा दिखने लगी थी.


RE: Chudai ki Kahani अंजानी डगर - sexstories - 06-03-2018

टॉप और ब्रा के बीच उसकी क्लीवेज भी सॉफ दिखाई दे रही थी. इस हालत मे मैने दीपा को जगाना ठीक ना समझा. मैने वापस गेट के बाहर जाकर पुकारा- दीपा मेम. पर कोई हलचल नही हुई. हिम्मत जुटा कर अंदर गया और पुकारा- दीपा मेम. फिर वही हालात. मैने दीपा को हल्के से हिलाकर फिर पुकारा. पर कोई फायेदा नही. दीपा का कमसिन जिस्म देखकर मेरी हालत फिर सुबह जैसी होती जा रही थी. मेरा लंड पूरे जोश मे आ चुका था और बुरी तरह फदक रहा था. टट्टो मे भी दर्द बढ़ता जा रहा था. अब मैने दीपा को ज़ोर से हिलाया. पर वो तो जैसे बेहोश पड़ी थी. उसकी कलाईयो पर कई जगह छोटे-छोटे लाल निशान बने थे. अब मैं खुद को रोक नही पा रहा था. अब कोई चारा नही था. मैं बेड पर दीपा के बगल मे लेट गया. सब कुछ अपने आप हो रहा था. मेरी नज़र दीपा की क्लीवेज पर गढ़ी हुई थी. इतने साल जो चीज़ देख कर ललचाते थे, वो आज मेरे सामने पड़ा था. हिम्मत और डर दोनो बढ़ते जा रहे थे. फिर धीरे से अपनी उंगली दीपा की क्लीवेज पर फिरा दी. पहली बार उस जगह का स्पर्श पाकर मैं बहकने लगा. अब मेरे हाथो ने उसके बूब्स को कपड़ो के उपर से ढक लिया था. फिर मैं दीपा के योवन-कपोत (बूब्स) को धीरे-धीरे दबाने लगा. इधर मेरे हाथो का दबाव दीपा के बूब्स पर बढ़ता उधर मेरी साँसे और लंड फूलते जाते. फिर मैने उसके टॉप के स्ट्रॅप्स खोल दिए. अब दीपा केवल ब्रा मे थी. ऑरेंज रंग की ब्रा मे उसके बूब्स किसी टोकरी मे रखे सन्तरो की तरह लग रहे थे. मैने उसकी क्लीवेज पर अपनी जीभ फिरानी शुरू की. दोनो हाथो से उसके बूब्स भीच रहा था. थोड़ी देर तक उपर से दबाने के बाद मैं बदहवास सा हो गया था. मुझ बेचारे को क्या पता था कि बूब्स के अलावा भी एक लड़की के पास काम की चीज़े होती हैं. मैं तो इन्ही को देख-देख कर बड़ा हुआ था. इतना सब होने के बाद भी दीपा की तंद्रा (नींद) नही टूटी और मेरी हिम्मत और ज़ोर मारने लगी. अब मैने धीरे से अपना दाया हाथ दीपा की ब्रा मे सरकया. अंदर जाकर मेरे हाथ की उंगलियो के पोर (फिंगर-टिप) उसकी छोटी सी निपल से टकराया. थोड़ी देर मे उसका निपल मेरी दो उंगलियो के बीच फँसा था. मैं उस निपल को मसल्ने लगा. अपने निपल्स के साथ छेड़खानी दीपा सहन नही कर सकी और हरकत करने लगी. उसकी टाँगे मसल्ने लगी और मुँह से इश्स..स.सस्स की आवाज़े निकलने लगी. दीपा का हाथ अपनी जाँघ के बीच पहुच गया और धीरे-धीरे जाँघो के बीच मसलने लगा. जैसे-जैसे वो मसल्ति जाती वैसे-वैसे उसकी सिसकारिया तेज हो रही थी. अचानक एक तेज आवाज़ सुनाई दी- आशु...कॉफी... मैं एक झटके मे बेड से उछल कर खड़ा हो गया. और भागता हुआ किचन मे पहुचा. कॉफी मेकर का स्विच ऑन किया. 5 मिनिट बाद मैं कॉफी ट्रे मे लेकर मेडम के पास खड़ा था. क्रमशः............


RE: Chudai ki Kahani अंजानी डगर - sexstories - 06-03-2018

अंजानी डगर पार्ट--2

गतान्क से आगे....................

इसी तरीके से काम करोगे तो ज़्यादा दिन नही टिकोगे !- मेडम गुस्से से बोली. आशु- मेडम सॉरी..वो दीपा मेडम को काफ़ी उठाया...पर वो उठ ही नही रही. मेडम- हा अमीर बाप की बिगड़ी हुई औलाद जो है..मैं ऑफीस जा रही हू...शाम तक घर साफ मिलना चाहिए. इतना कहकर मेडम बाहर निकल गयी. 11 बज चुके थे और पेट मे चूहो ने हंगामा कर रखा था. मैं सीधे किचन मे गया और खाने की चीज़ ढूँढने लगा. पूरे किचन के डब्बे खाली थे. ऐसे लग रहा था कि चाइ-कॉफी के अलावा यहा कभी कुछ नही बना. मैं बाहर ही निकलने वाला था की फ्रिड्ज पर नज़र गयी. फ्रिड्ज पूरा मालामाल था. मैने वाहा से 2 बर्गर उठाए और ओवेन मे डाल दिए. फिर गरमा-गरम बर्गर और चिल्ड जूस पीकर शांति मिली. फिर मैं सीधे अपने कमरे पर पहुचा. कमरा साफ करके अपना समान सेट किया. तभी गेट पर नॉक हुई. वॉचमन- और भाई सब ठीक-ठाक हो गया. आशु- हा यार. वॉचमन- अपना नाम तो बता दो यार. आशु- आशु. वॉचमन- मेरा नरेश है. पिछले 15 साल से यहा काम कर रहा हू. आशु- अच्छा..तुम्हारा बाकी परिवार कहा है? नरेश- सब गाव मे हैं. आशु- अच्छा नरेश भाई एक बात तो बताओ...ये मेडम के साब कहा है? नरेश- ....मुझसे ये नही पूछो तो अच्छा है. और कुछ भी पूछ लो. आशु- अच्छा कोई बात नही.. पर ये मेडम की उम्र तो 30 साल से ज़्यादा नही लगती...फिर ये 17-18 साल की बेटी कहा से पैदा हो गयी. नरेश- तुम सब पूछ कर ही मनोगे. दीपा मेडम दीपिका मेम की सौतेली बेटी है. दीपा मेडम के पापा ने दूसरी शादी की थी. आशु- ओह तो ये बात है. मैं दीपा मेडम को उठाने गया था पर वो उठी ही नही ? नरेश- किसी को बताना नही उसे कुछ दिन से ड्रग्स लेने की आदत पड़ गई है. अच्छा मैं गेट पर चलता हू. कोई दिक्कत हो तो इंटरकम पर बता देना. आशु- ओके अब मैं भी थोड़ा आराम करूँगा. बिल्डिंग मे दुबारा पहुचने मे 2 बज गये थे. घर की सफाई करने मे कब 6 बजे पता ही ना चला. तभी कार के रुकने की आवाज़ आई. मेडम ने अंदर आते हुए कहा- दीपा कहा है ? आशु- मेडम मैं दुबारा उपर नही गया. देखने जाउ ? दीपिका- नही, वो गयी होगी अपने दोस्तो के साथ. मेरे सिर मे काफ़ी दर्द है. तुम एक बढ़िया सी कॉफी बना कर आधे घंटे बाद मेरे बेड रूम मे ले आना. उससे पहले नहा ज़रूर लेना. कितनी गंदे लग रहे हो. आशु-जी. आधे घंटे बाद मैं कॉफी लेकर मेडम के बेडरूम के बाहर खड़ा था. नॉक करने पर अंदर से आवाज़ आई, दरवाजा खुला है.. अंदर आ जाओ. कमरे के अंदर जाते ही एक दिन मे तीसरी बार मेरा लंड भड़क गया. मेडम एक स्किन कलर की नेट वाली नाइटी पहने बाथरूम से बाहर निकल रही थी. नाइटी के नीचे से उनकी ब्लॅक ब्रा सॉफ दिखाई दे रही थी. नाइटी की लंबाई उनके हिप्स तक थी और छाती के पास केवल एक बटन लगा था. 36डी साइज़ के बूब्स के उभार के कारण उनकी नाइटी नीचे से खुल गयी थी और पूरे पेट और नाभि के दर्शन हो रहे थे. नीचे उन्होने ब्लॅक पॅंटी पहनी थी. पॅंटी के नीचे गोरी पूरी टाँगे एकदम नंगी थी. मेडम- कॉफी साइड टेबल पर रख दो और यहा आ जाओ. मेडम का अंदाज मादक था. पर मेरे कानो ने जैसे कुछ सुना ही नही था. मैं एकटक मेडम के बूब्स को ही देख रहा था. मेडम ने मेरे हाथ से ट्रे ले कर टेबल पर रखी और हाथ पकड़ कर बेड पर बैठा दिया..मैं जैसे सपना देख रहा था. मेडम- क्या देख रहे हो. यह सुनकर मुझे झटका सा लगा और मे तुरंत उछल कर खड़ा हो गया. आशु- ज..जी सॉरी मेडम. मेडम- मेरी टाँगो मे बड़ा दर्द हो रहा है. क्या तुम थोड़ा दबा दोगे. आशु-जी मेडम. और मैं मेडम की टांगो के पास बैठ गया. मेडम की गोरी मखमली टाँगो पर एक भी बाल नही था. उनके बदन से भीनी-भीनी महक आ रही थी. मैने एक टांग को हाथो मे लेकर दबाना शुरू किया. तभी मेडम चीख पड़ी- क्या करते हो ? आराम से दबाओ और ये लो थोड़ा आयिल भी लगा दो. मैने वैसे ही हल्के हाथ से मालिश शुरू कर दी. मेडम आँखे बंद करके और घुटने मोड़ कर लेटी रही. मेरी नज़र फिर मेडम के मोटे-मोटे बूब्स पर जा टिकी जो ब्लॅक ब्रा के बाहर झाँक रहे थे. मेरे पूरे शरीर मे चीटिया सी रेंगने लगी थी. पर अबकी बार मैने अपने होश नही खोए. मेडम (बंद आँखे किए हुए)- अब थोड़ा उपर करो. यह सुनकर मेरे हाथ मेडम के घुटनो पर पहुच गये. मेडम (बंद आँखे किए हुए)- थोड़ा और उपर. मैं मेडम के घुटनो से जाँघ की मालिश करने लगा. जब भी मेरे हाथ नीचे से उपर की ओर जाते थे. मेडम साँस रोक लेती थी. मेडम (बंद आँखे किए हुए)- थोड़ा और उपर. आशु- वाहा तो आपकी पॅंटी है, वो तेल से गंदी हो जाएगी. मेडम- तो फिर उसे उतार दो ना. मैने वैसा ही किया. अब मेडम बूब्स के नीचे से पूरी नंगी थी. 2 मिनिट बाद मेडम ने अपनी मुड़े हुए घुटने फैला दिए. जिस जगह पर हमारा लंड होता है वाहा पर मेडम का केवल एक हल्का सा उभार था, जो की बीच से कटा हुआ था. वाहा पर बाल एक भी नही था. मेडम (बंद आँखे किए हुए)- अब ज..जाँघ को करो. मेरे दोनो हाथ मेडम की गोरी चित्ति जाँघो को धीरे से सहला रहे थे. हाथ जब भी मेडम के कटाव के पास पहुचते तो मेडम अपने दाँत भींच लेती. मेरी समझ मे कुछ नही आ रहा था. शायद मेडम बहुत थॅकी हुई थी और मेरी मसाज से उन्हे आराम मिल रहा था. मेडम (आँखे बंद किए हुए ही)- अब मेरी चिड़िया की भी मालिश करो. आशु- मेडम आपकी चिड़िया कहा है ? मेडम- अरे बुद्धू मेरी चूत के उपर जो दाना है वही चिड़िया है. आशु- मेडम ये चूत कहा होती है ? तब मेडम ने अपने दोनो हाथो से अपने कटाव की दोनो फांको को खोल दिया- ये चूत है. फिर अपनी उंगली चूत के उपर के दाने पर लगा कर कहा ये चिड़िया होतो है. अब इसकी मालिश करो. मैं मेडम की दोनो टाँगो के बीच बैठ गया और मेडम की चिड़िया को सहलाने लगा. थोड़ी देर मे ही मेडम की टाँगे मचलने लगी. मेडम-थोड़ा तेज करो.......थोड़ा तेज.........और तेज....तेज. मैं मेडम के कहे अनुसार अपनी रफ़्तार और दबाव बढ़ता गया. मेडम- टाँगो पर तो बड़ा दम दिखा रहे थे. एक चिड़िया को नही मार सकते. थोड़ा तेज हाथ चलाओ ना. यह सुनकर मैने मेडम की चूत को अपने बाए हाथ की 2 उंगलियो से खोला और दाए अंगूठे मे आयिल लगा कर मेडम की चिड़िया को बुरी तरह रगड़ने लगा. अब मेडम बुरी तरह छटपटाने लगी. मुँह से इश्स..हा..स..हा निकल रहा था. टाँगे इधर उधर नाच रही थी. अपने हाथो से मेरे बालो को पकड़ कर मेरे सिर को अपनी चूत की तरफ दबाने लगी. मेडम जितना तेज सिसकती, मेरी बेरहमी उतनी ही बढ़ती जाती. अचानक मेडम के मूह से जोरदार चीख निकली-आआआआआआअहह और चूत से एक जोरदार पिचकारी निकल कर मेरे मूह पर आ पड़ी. मैने सोचा मेडम ने मेरे मूह पर यूरिन कर दिया है. थोड़ा मेरे मूह मे भी चला गया था. उसका स्वाद अजीब सा था पर स्वादिष्ट था. मेरी जीभ अपने आप ही बाहर निकल कर मेरे मूह को चाटने लगी. मेडम ने मेरे अब तक चल रहे हाथो को ज़ोर से पकड़ लिया और बोली- तेरे हाथ तो रैल्गाड़ी की तरह चलते है. तेरी मालिश ने तो मेरी टाँगो की सारी थकान निकाल दी. पर मुझे अनमना देख कर मेडम थोड़ा अटकी और पूछा - क्या हुआ ? आशु- क्या मेडम आप भी ना. अपने मेरे मूह पर ही यूरिन कर दिया. मेडम ज़ोर के खिलखिला उठी- पगले ये यूरिन नही स्त्री-रस होता है. केवल इस रस से ही पुरुषो की प्यास बुझ सकती है. आशु- ओह....हा इसका स्वाद तो बहुत अच्‍छा था. मेडम- मैने तेरी प्यास बुझाई अब तू मेरी भी बुझा. आशु- मेडम मेरे पास तो कोई चूत या चिड़िया नही है. आपकी प्यास कैसे बुझाउ. मेडम फिर खिलखिला उठी. वो उठी और मुझे बेड पर लिटा दिया. मेडम ने मेरी पॅंट उतार दी. मेरे अंडरवेर मे 8 इंच का उभार बना हुआ था. मेडम- अरे तुमने तो यहा एक तंबू भी लगा रखा हा. इस तंबू का बंबू कहा है? मैं शर्म के मारे कुछ नही बोला. मैं जिस बात को सुबह से छिपा रहा था, मेडम सीधे वहीं पहुच गयी थी. मैं बिना हिले दुले पड़ा रहा. अब मेडम ने मेरे अंडरवेर के अंदर हाथ डाल कर मेरे लंड को पकड़ लिया. मेडम एक दम सन्न रह गयी. फिर अगले ही पल मेरा अंडरवेर भी उतर गया. मेडम- ये क्या है. पत्थर का इतना मोटा मूसल लगा रखा है. मैने आज तक नही इतना मोटा नही देखा. इसे कौन सा तेल पिलाते हो. मैं चुप ही रहा पर मेरा लंड... मेरा लंड जुंगली शेर की तरह दहाड़े लगा रहा था. मेडम ने अपने कोमल हाथो से मेरे लंड को दोबारा नापा. अंडरवेर के अंदर उनको लंड की इतनी मोटाई का विश्वास नही हुआ था. लंड को हल्का सा सहलाने के बाद उन्होने उसे बीच से कस कर पकड़ लिया और नीचे खिचने लगी. मेडम का मूह मेरे लंड के ठीक उपर था और जीभ लप्लपा रही थी. जैसे -जैसे लंड की काली खाल नीचे जा रही थी एक चिकना-गोरा-बड़ी सी सुपारी जैसा कुछ बाहर निकल आया. आशु- मेडम ये क्या है. मेडम- इसको सूपड़ा कहते है. जैसे मेरी चिड़िया ने तेरी प्यास बुझाई थी वैसे ही मेरी प्यास इस से बुझेगी. यह कहकर मेडम ने मेरे लंड को सूँघा. पता नही कैसी स्मेल थी पर मेडम एक दम मदहोश हो गयी. फिर धीरे से उन्होने अपनी जीब मेरे सूपदे पर फिराई और चाटने लगी. पूरे लंड को उपर से नीचे तक चाटने के बाद, मेडम ने सूपदे के मूह पर अपना मूह लगा दिया. उनका मूह पूरा खुला हुआ था. उन्होने एक हाथ से खाल को नीचे खीचा हुआ था. फिर धीरे-धीरे मेडम मेरे लंड को निगलने लगी. देखते ही देखते लंड का सूपड़ा मेडम के गले तक पहुच गया. अब भी मेरा लंड 2 इंच बाहर था. फिर मेडम ने मेरे लंड की लंबाई-चौड़ाई अपने मूह से नापने के बाद उसे बाहर निकाला. मेडम के मूह मे लार भर गयी थी जो उन्होने लंड पर उगल दी और एक गहरी साँस ली. अब मेरा लंड पूरा भीग गया था. मेडम उसे कुलफी की तरह चूसने लगी. बार बार मेरा लंड उनके मूह से बाहर आता फिर तुरंत अंदर चला जाता. मेडम की तेज़ी बढ़ती जा रही थी. बीच-बीच मे मेडम अपने बाए हाथ मे पकड़ी खाल को भी उपर नीचे कर देती थी. इस सब से मैं भी मदहोश हो रहा था. मैने सोचा ऐसे मेडम की प्यास तो पता नही कैसे बुझेगी, पर मेरी हालत अब काबू से बाहर थी. जो आवाज़े पहले मेडम निकाल रही थी, वैसी ही आवाज़े अब मेरे मूह से अपने आप निकल रही थी. टाँगे फदक रही थी और हाथ मेडम के सिर पर अपने आप पहुच गये थे. पर इस सब से मेडम को कोई फरक नही पड़ा था. पूरे 10 मिनिट तक चूसने के बाद मेडम ने मेरा लंड से मूह उठाया और फिर लंबी साँस ली और बोली- बड़ा स्टॅमिना है तेरे मे. पर मेरा नाम भी दीपिका है, मैं अपनी प्यास बुझा कर ही रहूंगी. अगले ही पल जोरदार चुसाई चालू हो गयी. मेडम को पता नही क्या जुनून था. पर इससे मुझे क्या, मैं तो जन्नत की सैर कर रहा था. अचनांक पता नही मेरे अंदर से कोई तूफान मेरे लंड की ओर बढ़ता सा लगा. अचनांक बहुत मज़ा सा आने लगा, जो शब्दो मे बताना असंभव है. म्‍म्म्ममममममममममममममममममममह - एक ज़ोर की आवाज़ निकली. पता नही क्या हो रहा था पर मुझे इतना मज़ा इससे पहले कभी नही आया था. मेरा रोम-रोम निहाल हो रहा था. जिस शांति की तलाश मे मेरा लंड अब तक भटक रहा था वो अजीब सी शांति मेरे लंड को मिल रही थी. इधर मेडम ने भी उपर नीचे करके चूसना छोड़ कर अपने होंठ मेरे सूपदे पर कस लिए. वो पूरा ज़ोर लगा कर मेरे लंड को आम की तरह चूसने लगी. 5-7 सेकेंड तक मेरे लंड से कुछ निकलता रहा और मेडम उसे निगलती रही. अच्छी तरह लंड की खाल को उपर तक निचोड़ लेने के बाद ही मेडम ने अपना मूह मेरे लंड से हटाया. मेडम की आँखे बंद थी. पता नही क्या हो रहा था पर मुझे नींद सी आने लगी थी. मेडम ने 1 मिनिट तक चुप रही फिर बाकी का भी निगल गयी. फिर मेडम ने मेरे लंड के सूपदे को चूमा और बोली- क्यो आया मज़ा ? आशु- मेडम क्या आपकी प्यास बुझ गयी. मेडम ने मादक अंगड़ाई लेकर कातिल नज़रो से मुझे देखा और बोली- पता नही बुझी या तूने और भड़का दी. तेरी रस का स्वाद कुछ अलग सा था एक दम ताज़ा. कोई खास बात है क्या ? आशु- मेडम आज से पहले मुझे ऐसा मज़ा कभी नही आया. मुझे तो पता भी नही था की मेरे अंदर भी कोई रस होता है. मेडम- यानी आज तेरा पहली बार का रस निकला है... तभी मैं कहु... मेडम की आँखे चमक उठी और कुछ सोचकर बोली -तू अपना समान सर्वेंट क्वॉर्टर से लाकर बगल वाले रूम मे रख ले ना. अब तू हमारे साथ ही रहेगा, पता नही कब कौन सा काम पड़ जाए. मैं हैरानी से एक टक मेडम को देखता रहा पर कुछ ना बोल सका. मेडम- अच्छा अब तेरी नौकरी भी पक्की और सॅलरी भी डबल. और बोल क्या चाहिए ? आशु- मेडम क्या आप मेरे काम से इतनी खुश है? मेडम- हा. और कुछ मन मे हो तो वो भी माँग ले. आशु- जी कुछ नही चाहिए. मेडम- तू बोल तो सही. आशु- रहने दीजिए...पर मेडम आपकी कॉफी तो ठंडी हो गई. मेडम- तेरा रस पी लिया तो कॉफी कौन पिएगा....चल तुझे एक खेल सिखाती हू...तूने कभी चूत लंड की लड़ाई देखी है... आशु- जी नही, कैसे खेलते है बताइए ना.

क्रमशः..................


RE: Chudai ki Kahani अंजानी डगर - sexstories - 06-03-2018

अंजानी डगर पार्ट--3 गतान्क से आगे.................... मैं बेड पर लेटा हुआ था. मेडम ने मेरे जाँघो के दोनो तरफ घुटने रख लिए और मुझे अपने बाकी कपड़े उतारने को कहा. मेडम की चूत मेरे लंड के ठीक उपर थी. मेरा लंड एवरेस्ट की तरह तना हुआ था. सूपड़ा भी बाहर था. लंड की लंबाई भी 10 इंच लग रही थी. मेडम ने अपने हाथ से लंड को सहलाया. पर जैसे मुझे कुछ महसूस ही नही हुआ. मेडम ने लंड का कसाव चेक किया और बोली- अरे ये तो अब तक सख़्त है. फिर मेडम ने अपनी गीली चूत का मूह मेरे सूपदे पर टीका दिया और लंड से चूत के दाने को रगड़ने लगी. इससे मेडम की चूत से थोडा पानी बाहर आ गया और वो बदहवास होने लगी. उन्होने लंड को हाथ मे पकड़ कर उस पर चूत को टीका दिया. पर मेरी नज़र तो मेडम के 36डी बूब्स पर टिकी थी. अब मूह के होंठो की तरह मेडम की चूत के होठ मेरे लंड को चूमने लगे. मेडम अपनी चूत का दबाव मेरे लंड पर बढ़ाने लगी. मेडम ने सहारे के लिए दोनो हाथ मेरे कंधो के पास बेड पर रख लिए. तभी मैने उनकी नाइटी का बटन खोल दिया और उनके बूब्स ब्रा से झाँकने लगे. मेडम की क्लीवेज की गहराई देखते ही मूह मे पानी आ गया. मैने ठान लिया कि आज इनको पाकर ही दम लूँगा. मैने हिम्मत करके अपने दोनो हाथ मेडम के बूब्स पर रख दिए, पर मेडम का ध्यान तो केवल लंड घुस्वाने पर था. मैं बूब्स को दबाने लगा. पर यहा मामला दूसरा था. मेडम ने पूरा ज़ोर लगा लिया पर लंड था कि घुसा ही नही. मेडम की चूत की चिकनाई से लंड फिसल गया और मेडम की चिड़िया तो कुचल गयी. मेडम सिसक उठी और लंड को फिर सही जगह लगाने के लिए नीचे झुक गयी और उनके मोटे मोटे बूब्स मेरे छाती पर दब गये. मैने मौका अच्छा देखा और मेरे हाथ मेडम की कमर पर पहुच गये. अगले ही पल मेडम की ब्रा की स्ट्रॅप्स खुल गये और जैसे ही मेडम उपर उठी, ब्रा कंधो से फिसलकर नीचे कलाईयो तक पहुच गयी. अब मेडम के मोटे-मोटे बूब्स मेरे मूह के उपर नाच रहे थे. मैने दोनो को पकड़ लिया और दबाने लगा. दोनो खरबूजे सख़्त थे उन पर मेरे हाथो का दबाव बढ़ता गया. थोड़ी ही देर मे मेरे हाथ मेडम के बूब्स को बुरी तरह मसल रहे थे. फिर मैने अपना सिर थोडा उपर किया और बाए बूब का निपल मूह मे दबा लिया. मेडम- आराम से...कही कट ना जाए. मेडम की स्वीकृति पाकर मेरी बाँछे खिल गयी. अब मैने मेडम के दोनो निपल बारी बारी चूसने लगा. मेडम के बूब्स के आगे दीपा के बूब्स कही नही थे. रात दिन जिस चीज़ के ख़यालो मे खोया रहता था वो आज मेरी थी. मुझे जो चाहिए था वो मिल गया था पर मेडम पूरी कोशिश के बाद भी सफल नही पा रही थी. बार बार लंड फिसलकर उनकी चिड़िया को कुचल देता था. उनकी चिड़िया ज़्यादा देर तक ये प्रहार सहन ना कर सकी और चूत ने रस की बौछार कर ही दी. मेरा लंड उनके रस से पूरी तरह भीग गया. 3 मिनिट तक जुगत लगाने के बाद मेडम की हालत पस्त हो चुकी थी. बिल्ली के बिल मे शेर इतनी आसानी से कैसे घुस सकता था. इसके लिए 50 केजी की मेडम बहुत कमजोर थी. अंत मे मेडम मेरे उपर ही धराशायी हो गयी और उनके बूब मेरे मूह पर दब गये... मेडम मेरे आगोश मे पूरी तरह नंगी पड़ी थी. मेरे हाथ उनके संगमरमरी जिस्म को धीरे-धीरे सहला रहे थे. मेरे हाथ बार-बार उनके मोटे-मोटे बूब्स पर पहुच जाते और निपल को छेड़ देते. इससे मेडम चिहुक उठती. मेडम बेहद थॅकी सी लग रही थी पर उनकी आँखो के गुलाबी डोरे उनके मन की हालत बयान कर रहे थे. मैं बेड से उठा और मेडम को खीच कर उनकी चूत अपनी ओर कर ली. मेडम- न..न..नही ये मेरी चूत मे नही घुस पाएगा. मेरी चूत फट जाएगी. आशु- मेडम प्लीज़. बस एक बार. मेडम- थोड़ा आराम कर ले, मैं कही भागी थोड़े ही जा रही हू. आशु- मेडम मेरा लंड अब काबू मे नही है. प्लीज़ आप टाँगे खोल दीजिए ना. मेडम केवल उपर से ही मना कर रही थी. मन मे तो उनके लड्डू फुट रहे थे. मेडम ने अपनी टाँगे खोल कर हवा मे उठा दी. अब उनकी चूत किसी गुलदस्ते की तरह लग रही थी. गोरी चूत के अंदर लाल चिड़िया सॉफ दिखाई दे रही थी. चूत एकदम गीली थी. मेरे लंड का सूपड़ा मेडम के चूत के उपर लहरा रहा था. मेडम ने अपने हाथ से मेरा लंड पकड़ कर चूत के मुहाने पर रख दिया और बोली- मैं कितना भी चिल्लाउ, पर पूरी बेरहमी से चोदना. मैने थोड़ा ज़ोर लगाया तो लंड का सूपड़ा 2 इंच अंदर चला गया. मेडम ने अपने दाँत भीच लिए. फिर मैने और ज़ोर से धक्का लगाया तो लंड थोड़ा और अंदर घुस गया. मेडम दर्द के मारे चीखने लगी- आआआययययययययईईईई...रुक जाओ... अभी और अंदर मत करना... बहुत दर्द हो रहा... मम्मी...आज तो मर जाउन्गि...रुक जा...फॅट जाएगी...आअहह इधर मेरा हाल भी बुरा था. जब मेडम के मूह मे लंड गया था तो सब आराम से हो रहा था. पर यहा तो जैसे पत्थर मे कील ठोकने जैसा था. लंड को जैसे ज़ोर से बाँध दिया हो. अजीब सा नशा छा रहा था. इसी नशे की खुमारी मे अचानक एक ज़ोर का धक्का लग गया. मेडम- आआआआग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्घ्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह...चिर गयी......फॅट गयी.......मार डाला........काट डाला........बाहर निकालो.....मुझसे सहन नही हो रहा....छोड़ दो मुझे.......बाहर निकालो....आआआआआआआअहह. मेडम की हालत देख कर मैं डर सा गया. 2 मिनिट तक बिना हीले रुका रहा. मैने थोड़ा झुक कर मेडम के निपल चूसने लगा. इस से मेडम उत्तेजित होने लगी. मौका अच्छा देख कर मैने फाइनल धक्का मार दिया. अब मेरा लंड 8 इंच अंदर पिछली दीवार से जा टकराया. मेडम की चूत मे तो जैसे किसी ने गरम पिघला लोहा भर दिया हो. उनकी साँसे अटक रही थी और आँखो से आँसू बह रह थे. मेडम बदहवास हो कर इधर-उधर हिल कर लंड को बाहर निकालने की कोशिश कर रही थी. दर्द उनकी सहन शक्ति के बाहर था. मैं शांत रहा. 2 मिनिट बाद धीरे से लंड को बाहर निकालने लगा. पर मेडम ने फिर नीचे खिच लिया. 3-4 बार ऐसे ही किया को मेडम की चीखे सिसकारियो मे बदलने लगी. मुझे भी इस नये खेल मज़ा आने लगा. मेडम बेड पर टाँगे फलाए लेटी थी और मैं अपनी टाँगो पर बेड के साथ खड़ा था. मेडम ने अपने हाथो से चादर पकड़ रखी थी. लंड के अंदर बाहर होने की रफ़्तार बढ़ती जा रही थी. मैने दोनो हाथो से मेडम के विशाल मुम्मे लगाम की तरह पकड़ रखे थे. पथ..पथ की आवाज़े निकल रही थी. लंड और चूत की जोरदार जंग छिड़ी थी. मेडम- इसस्स..हहा...थोड़ा तेज करो ना...आज अपनी मेडम की चूत को फाड़ दो ना...प्लीज़ थोड़ा तेज...और तेज...जो कहोगे वो करूँगी....बहुत मज़ा आ रहा है...मेरे रज्जा..मैं तेरी हू...मेरी चूत तेरी है...तेज...चोद...फाड़..काट दे इसको...इश्स हहाअ. जैसे-जैसे रफ़्तार बढ़ती जा रही थी मेडम बदहवास होती जा रही थी. मेडम की सिसकारियो का वॉल्यूम बढ़ता जा रहा था. मेडम के बेडरूम मे जोरदार चुदाई हो रही थी. दो जवानिया टकरा रही थी. लंड और चूत की जोरदार भिड़ंत हो रही थी. चिल्ड एसी था पर दोनो पसीने से भीगे हुए थे. मेडम की सिसकारिया पूरी बिल्डिंग मे गूँज रही थी. हर 2-3 मिनिट बाद मेडम कुछ ज़्यादा तेज चिल्लाने लगती और उनकी चूत से रस बहने लगता. फिर 20-25 सेकेंड के लिए वो निढाल हो जाती. पर मुझे इस सब से कोई फरक नही पड़ता था. मैं अपने काम मे लगा हुआ था. थोड़ी ही देर मे मेडम फिर मैदान मे आ जाती पर 2-3 मिनिट बाद ही झाड़ जाती. मेडम के 6 बार झड़ने के बाद अब मेरी बारी थी. अचानक मुझे भी बहुत मज़ा सा आने लगा. मैने पूरा ज़ोर लगा कर मेडम की चूत मे अपना लंड एकदम भीतर तक घुसा दिया. 10 सेकेंड तक मेरा लंड अपना रस उगलता रहा और मेडम की चूत मे भरता रहा. मेडम भी मेरे साथ झाड़ गयी. अब जाकर मुझे संतुष्टि मिली थी. मेरा लंड अपने आप छोटा होकर मेडम की चूत से बाहर आने लगा. मेडम का चेहरा खिला हुआ था. मैं मेडम की बगल मे धराशायी हो गया और मेडम मेरे बालो मे उंगलिया फिराने लगी. पूरी रात मैं और मेडम एक दूसरे से लिपट कर सोए रहे. सुबह जब आँख खुली तो मेडम कही जाने के लिए तय्यार हो रही थी. उनका समान भी पॅक रखा था. मेडम- मैं कुछ दिन के लिए बाहर जा रही हू. पीछे से सावधानी से रहना. और ये लो 50000 रुपये, तुम्हारी अड्वान्स तन्खा. तुम चाहो तो इस रूम मे भी रह सकते हो. आशु-जी. मैने मेडम का समान उठाया और ले जाकर कार मे रख दिया. मेडम के जाने के बाद मुझे दीपा का ख्याल आया. मैं सीधा उसके रूम मे पहुच गया. क्रमशः..............


RE: Chudai ki Kahani अंजानी डगर - sexstories - 06-03-2018

अंजानी डगर पार्ट--4 गतान्क से आगे.................... दीपा अपने कमरे मे नही थी. बाथरूम भी खाली था. पूरा कमरा बिखरा पड़ा था. मैने सारा कमरे को साफ करके सेट कर दिया और बाहर आ गया. धीरे-धीरे शाम हो गयी. मैं खाना खाकर सोने ही जा रहा था कि दीपा के कमरे से कुछ आवाज़ आई. मैने जाकर देखा तो 2 लड़के दीपा को उठा कर उसके कमरे मे ले जा रहे थे, शायद उसके दोस्त थे. मुझे बस उनकी पीठ ही दिख रही थी. दीपा ने स्पगेटी टॉप और मिडी पहन रखी थी. मैं जैसे ही दीपा के कमरे के दरवाजे पर पहुचा, उन लड़को की हरकते देख कर ठिठक गया. उन दोनो के हाथ दीपा के छोटे से कपड़ो मे घुसे हुए थे. दीपा नशे की हालत मे भी उनके हाथ हटाने की कोशिश कर रही थी पर कोई फाय्दा नही हुआ. फिर एक लड़का उसके के बूब्स को मसल्ने लगा. उनमे से एक लड़का बोला- यार पूरे रास्ते तू इसको नोचता आया है. अभी तक तेरा मन नही भरा क्या. जो करने आया है वो कर ना. दूसरा- हा यार, 2 हफ़्तो से जाल बिछा रखा था. आज मछली जाल मे फँसी है. पहला- जब से इसको क्लब मे देखा है उसी दिन ठान लिया था की इसकी चूत मे पहला लंड तो अपन ही डालेगा. दूसरा- तभी तूने इसे ड्रग्स के जाल मे फँसाया था ताकि इसकी चूत पर अपना ठप्पा लगा सके. पहला- चल बाते बहुत हो गयी. अब इसको नंगा कर. दीपा (लड़खड़ाती आवाज़ मे)- न...नही मु...झे छोड़ दो. मैं वैसी लड़की नही हू. पहला- साली क्लब मे अपने जिस्म की नुमाइश क्यो करने जाती थी. अब हमारा दिल तुझ पर आ गया तो हमारा क्या दोष. आज तो तेरी सुहागरात मनेगि, 2-2 दूलहो के साथ. फिर उन दोनो के हाथ तेज़ी से चलने लगे. दीपा ने उन्हे रोकने की हल्की सी कोशिश भी की. पर वो कहा रुकने वाले थे. 1 मिनिट बाद ही दीपा अपने बेड पर जन्मजात पड़ी थी. दीपा बेचारी नशे मे भी अपनी आबरू बचाने की कोशिश मे लगी थी. उसका एक हाथ निपल्स को छुपा रहा था और दूसरा कुँवारी चूत को. कमले की सारी ट्यूब-बल्ब चालू थे. दीपा गोरा-चितता छरहरा जिस्म एक दम संगेमरमर की तरह दमक रहा था. बेचारी कोशिश तो बहुत कर रही थी पर उसके पतले हाथ ज़्यादा कुछ नही छुपा पा रहे थे. ऐसा मादक हुस्न देख कर मेरा लंड भी भड़क गया था तो फिर उन लड़को की क्या कहु. एक लड़का दीपा के नंगे जिस्म को चाटने लगा और दूसरा उसके बूब्स को नोचने लगा. दीपा अपनी इस असहाय स्थिति को देख कर रोने लगी. अब दोनो लड़के पूरी तरह सुरूर मे आ चुके थे. उन्होने अपनी जीन्स की जीप खोल कर अपने लंड बाहर निकाल लिए. ये देख कर दीपा ने अपने दोनो हाथ अपनी चूत पर कस लिए. एक लड़के ने दीपा मे मूह पर अपना लंड टेक दिया और ज़बरदस्ती घुसाने की कोशिश करने लगा. दीपा ने कस कर अपने दाँत भींच रखे थे, पर लंड की बदबू से उसे उबकाई आने लगी और लंड को अपना रास्ता मिल गया. उधर दूसरा नीचे चूत पर ज़ोर आज़माइश कर रहा था. दूसरा- साली तेरी चूत तो फाड़ कर ही रहूँगा. तेरा ये रेप तुझे जिंदगी भर याद रहेगा. जो ड्रग्स तूने हमसे ली थी उसके बदले मे तेरी कुँवारी चूत ही तो ले रहा हू. चुप चाप हाथ हटा ले. पर दीपा आँखो मे आँसू और मूह मे लंड लिए अपना सिर हिला कर अपनी इज़्ज़त बक्शने की मिन्नते कर रही थी. उसकी आँखो मे याचना का भाव साफ दिख रहा था. पर वो दोनो तो जैसे वासना के पुतले बने हुए थे. रेप शब्द सुनते ही मेरा खून खौल गया. देल्ही मे रेप के अनेको किस्से अख़बारो मे पढ़ रखे थे. मैं ये जानता था कि रेप के बाद लड़की का जीवन किस तरह तबाह हो जाता है. अभी तक मैं उन दोनो को दीपा मेडम का दोस्त समझ रहा था. मुझे लग रहा था कि अमीर बाप की ये बिगड़ी हुई औलाद ही इन दोनो को खुद यहा बुला कर लाई है. पर माजरा समझ मे आते ही मेरी पिंदलिया फड़काने लगी. दीपा की इज़्ज़त अब मेरे हाथ मे थी. मैं चुपके से कमरे मे बेड के पास पहुच गया. अगले ही पल मेरी बाए पैर की राउंड किक दीपा की चूत पर चढ़े लड़के के मूह पर पड़ी. वो उड़ता हुआ जाकर ड्रेसिंग टेबल पर ज़ोर की आवाज़ के साथ ढेर हो गया. इस आवाज़ से दीपा के मूह पर चढ़ा हुआ दूसरा लड़का चोंक गया. वो जैसे ही पीछे देखने के लिए घुमा, मेरी बाए पैर की मंकी किक उसके थोबादे पर पड़ी. उसके मूह से खून की बौछार शुरू हो गयी. फिर मैने उसे उठा कर ज़मीन पर गिरा लिया और उसकी छाती पर चढ़ कर एक पंच उसकी नाक पर जड़ दिया. उसके के लिए इतना ही बहुत था और वो बेहोश हो गया. मैं तुरंत उठा और पहले वाले के पास पहुचा. वो बेचारा और भी बुरी हालत मे था पर होश मे था. ड्रेसिंग टेबल पूरी तरह टूट चुकी थी और उसके काँच उसके शरीर मे घुस गये थे. वो बुरी तरह काँप रहा था. इतना दर्द होने पर भी उसकी चू तक नही निकल रही थी. आशु- जान प्यारी है तो अपने दोस्त को उठा और यहा से दफ़ा हो जा. वो झटके से उठा और अकेला ही बाहर भाग गया. मैने उसे बहुत पुकारा पर वो गायब हो चुका था. मैने एक नज़र दीपा को देखा, वो बेसूध सी बड़ी थी. उसकी सुध लेने से पहले इस बेहोश पड़े लड़के को ठिकाने लगाने के लिए उसे घसीट कर ग्राउंड फ्लोर पर ले गया. इतने मे वॉचमन दौड़ता हुआ आया और बोला- अरे क्या हुआ. थोड़ी देर पहले ही तो ये दोनो दीपा बेटी के साथ आए थे. अभी एक लड़का पागलो की तरह गाड़ी से भागा तो मैं डर गया और भागता हुआ यहा आ गया. क्या हुआ ? आशु- कुछ नही. वो अपना दोस्त यही छोड़ गया है. आप इसे गेट के बाहर ले जाकर सड़क पर डाल दो. नरेश- ये मर गया क्या? आशु- नही बेहोश है. अगर होश मे रहता तो मैं इसे मार ही डालता. अब जल्दी करो. नरेश- ठीक है. नरेश ने उसे संभाल लिया और मैं वापस भगा. रात के 11 बज चुके थे. कमरे मे बेड पर दीपा वैसे ही नंगी पड़ी थी. मैने उसके कपड़े उठाकर उसे पहना दिए. पर वो छोटे से कपड़े दीपा की मदमस्त जवानी को छुपा पाने मे असमर्थ थे. दीपा नंगी से ज़्यादा इन टाइट छोटे कपड़ो मे गजब की सेक्सी लग रही थी. मैं कल की तरह बहक ना जाउ इसलिए उसके जिस्म पर एक चादर डाल दी. फिर ड्रेसस्सिंग टेबल के काँच समेटने लगा. साफ सफाई करके दीपा के उतारे गये कपड़ो को बाथरूम मे रखने गया तो वाहा पर एक इंजेक्षन और एक बॉटल बाथटब के स्लॅब पर पड़ी देखी. मैने दोनो चीज़ उठा ली और साथ वाले कमरे मे सोने चल दिया. सुबह के लगभग 11 बजे मेरी नींद खुली. शायद कल के काम की थकान के कारण. मैं जल्दी फ्रेश होकर दीपा के रूम मे पहुचा. वाहा बेड पर कोई नही था. बाथरूम से पानी गिरने की आवाज़ आ रही थी. थोड़ी देर बाद दीपा टवल मे लिपटी हुई बाहर निकली. उसे ऐसी हालत मे देख मैं बाहर जाने लगा. दीपा- रूको. आशु- जी. दीपा- कौन हो तुम ? दीपा की आवाज़ एकदम सुरीली थी और खनकदार भी थी. आशु- जी मैं यहा का केर..ट... नया मॅनेजर हू. दीपा- ओह...फिर तो ठीक है आशु- आप कुछ लेना पसंद करेंगी ? कोई जवाब ना पाकर मैं वापस जाने के लिए मूड गया. दीपा- अरे रूको, मेरी बात पूरी नही हुई है. मैं कुछ कहना चाहती हू. आशु- जी, कहिए. दीपा- कल रात की हेल्प के लिए थॅंक्स बोलना था. दीपा चहकति हुई बोली. पर उसके तेवर देख कर मैं गुस्से से भर गया. दीपा को अब भी अपनी ग़लती का पछतावा नही था. मैं बिना दीपा की ओर देखे हुए ही बोला- आप थॅंक्स तो ऐसे बोल रही है जैसे आपके लिए ये रोज की बात है, क्यो ? दीपा ऐसे तीखे जवाब के लिए तयार नही थी. पर वो कुछ ना बोली. आशु- जब आपने ही खुद को उन भेड़ियो के सामने परोस दिया तो इसमे उनका क्या दोष. इस बार तो मैने बचा लिया पर अगर वो ज़्यादा होते तो क्या होता... मैं दीपा को झाड़ता जा रहा था और दीपा छोटे बच्चे की तरह चुप चाप डाँट खा रही थी. 2 मिनिट तक डाँट खाकर वो धीरे से बोली- आइ..एम..सॉरी. ये सुन कर मैं दीपा की ओर मुड़ा. इसी बीच जाने कब दीपा के जिस्म पर बँधा हुआ टवल खिसक गया और दीपा एकदम निर्वस्त्रा हो चुकी थी. अब वो मेरे सामने एक दम नंगी खड़ी थी और टवल उसकी टाँगो मे पड़ा था. डाँट खाने मे व्यस्त दीपा को शायद इसका पता नही चल पाया था, पर मैं इसे दीपा की जानबूझ कर की हुई हरकत समझ बैठा. मेरा पारा और चढ़ गया. मैं कड़क आवाज़ मे बोला- डॉन'ट से सॉरी इफ़ यू आर नोट सॉरी. ये कह कर मैं कमरे से बाहर निकल गया. मेरे इस व्यवहार से भौचक्की दीपा कमरे के गेट की ओर एकटक देखती रही. उसे समझ नही आ रहा था की सॉरी बोलने के बाद मेरा गुस्सा क्यो बढ़ गया था. फिर हार कर जैसे ही आगे कदम बदाया तो उसकी टाँगो तक पहुच चुके टवल से वो लड़खड़ा गयी. अब उसे अपने नंगेपन का अहसास हुआ और मेरे गुस्से का कारण भी समझ आ गया. क्रमशः...........


RE: Chudai ki Kahani अंजानी डगर - sexstories - 06-03-2018

अंजानी डगर पार्ट--5 गतान्क से आगे.................... किचन मे ठंडा पानी पीकर मेरा गुस्सा थोड़ा शांत हुआ. दीपा को डाँट तो दिया था पर मेरी समझ मे नही आ रहा था कि अब क्या करू. तब तो दिल दिमाग़ पर हावी हो गया था. पर अब मैं वास्तविकता मे वापस आ गया था. मेरी नौकरी जाना लगभग तय थी. मैने खुद ही अपने पैर पर कुल्हाड़ी मार ली थी. मुझे क्या ज़रूरत थी दीपा से उल्टा-सीधा बोलने की.... मैं इसी उधेड़बुन मे था की दीपा की आवाज़ आई- मुझे कॉलेज जाना है, मेरा ब्रेकफास्ट ले आओ. मैने फ्रिड्ज मे से ऑरेंज जूस एक ग्लास मे भर कर किचन से बाहर चल दिया. दीपा डाइनिंग टेबल पर बैठी मुझे कातिल नज़रो से देख रही थी. मैं नज़रे नीची किए टेबल के पास पहुचा और ग्लास रख कर बोला- आप नाश्ते मे क्या लेंगी ? दीपा (नज़रे घुमा कर)- फ्रिड्ज मे बर्गर और क्रेअमरोल्ल रखे होंगे. वही ले आओ. आशु- जी बर्गर तो ख़तम हो गये, स्प्रिंग्रोल्ल और क्रेअमरोल्ल है, ले आउ ? दीपा- कैसे ख़तम हो गये....चलो वही ले आओ. दीपा की नज़र हटी तो मैने उसे एक पल को देखा. 2 दिन मे पहली बार दीपा इतनी सुंदर लग रही थी. वाइट सलवार-सूट और रेड दुपट्टा कयामत ढा रहे थे. वो इतनी शोख लग रही थी कि जो भी देखे तो बस देखता ही रह जाए. उसके बेदाग हुस्न ने एक पल को मुझे जड़ कर दिया. पर अगले ही पल सिर झटक कर मैं किचन मे चला गया. ओवन मे स्प्रिंग रोल रखे और उसे ऑन कर दिया. मैं सोच रहा था की इतनी सुंदर लड़की को ड्रग्स की लत कैसे लग गयी. ये ड्रग्स इसके जीवन को बर्बाद करके ही छोड़ेगी. ओवन की रिंग बजी तो मेरा ध्यान टूटा और मैने प्लेट मे स्प्रिंग्रोल्ल काट कर क्रेअमरोल्ल भी रख लिए. बाहर दीपा फिर वैसी ही नज़रो से मुझे देख रही थी. मैने नज़रे बचा कर ब्रेकफास्ट सर्व कर दिया. दीपा- आज तो तुम्हारी लॉटरी लग गयी....क्यो ? ये सुन कर मैं सकपका गया.. आशु- जी मैं समझा नही. दीपा- मेरा टवल खिसक गया तो तुम्हारे तो भाग खुल गये..क्यो? दीपा ब्रेकफास्ट करते हुए ही ताने मार रही थी. आशु- आपका टवल खुल गया तो इसमे मेरी क्या ग़लती है. आपको कस कर बांधना चाहिए था. दीपा- टवल खुल गया तो तुम्हे मुझे बताना तो चाहिए था. मुझे इतनी देर तक ऐसे ही देखते रहे. आशु- जी मेरा मूह तो दूसरी तरफ था. जब मैं लास्ट मे घुमा तो आप पूरी नं.... ऐसे ही खड़ी थी. दीपा- तुम्हारा मूह दूसरी तरफ था पर मैं सब जानती हू कि नज़रे कहा थी. जब तुमने देख लिया कि मेरा टवल गिर गया है तो उसी वक्त क्यो नही बताया. आशु- ज...जी मैं क्या बताता, आपको टवल खिसकने का एहसास नही हुआ ? मैने तो देखा भी नही. दीपा के चेहरे पर मुस्कान साफ दिख रही थी पर आवाज़ वैसी ही तीखी थी. दीपा- बात मत घूमाओ. सच-सच बताओ कि तुम क्या देख रहे थे. आशु- जी मैने कुछ नही देखा. मैं सच बोल रहा हू. मैने जैसे ही आपको न्यूड देखा तो मैं शरमा गया था. इसलिए मैं तुरंत वाहा से चला गया. दीपा- तुम और शरम ? हा. कल रात को क्या कर रहे थे ? दीपा की बात की टोन मे अजीब सी कशिश थी. आशु- जी मैं समझा नही. दीपा- तुम इतने नासमझ तो नही दिखते. कल रात को भी तो तुमने मुझे न्यूड देखा था. आशु- ज...जी उसमे मेरी क्या ग़लती है. मैने तो आपको उन लड़को से बचाया था. दीपा- हा. पर उसके बाद क्या किया था तुमने ? आशु- ज...जी कमरे की सफाई. दीपा- हा. बहुत स्मार्ट हो, क्यो. दीपा मेरे ही अंदाज मे मुझे ताने मार रही थी और मैं चुपचाप सुन रहा था. दीपा- मुझे नंगा बेड पर पड़ा देख कर कुछ किया था ? आशु- जी आपके उपर चादर डाल दी थी. दीपा- ओह..हो तुमने मुझे छुआ क्यो था ? आशु- जी आपको कपड़े पहनाते वक्त छू गया होगा. दीपा- केवल चादर डाल देते. कपड़ो की क्या ज़रूरत थी. आशु- आप एकदम न्यूड पड़ी थी...कोई आ जाता तो. दीपा- मेरे शरीर को छूने के लिए तुमने मुझे कपड़े पहनाने का नाटक किया. मेरा टॉप पहनाते वक्त तुम्हारी नज़रे कहा थी और तुम्हारे हाथ क्या कर रहे थे, मैं सब जानती हू. आशु- ज..जी वो टॉप पहनाते समय हाथ लग गया होगा. दीपा- लग गया होगा क्या मतलब ? आशु- मैने एक हाथ से आपका टॉप पकड़ा था और दूसरे से .... दीपा- और दूसरे से मेरे बूब्स को छेड़ रहा था...क्यो ? आशु- जी आपका टॉप इतना छोटा था कि उसमे वो घुस ही नही रहे थे. इसलिए मुझे उन्हे दबा कर घुसाना पड़ा. दीपा- वाह. किसी लड़की की बूब्स को दबाने का क्या लेटेस्ट बहाना बनाया है. आशु- जी..सॉरी...आप तब क्या होश मे थी ? दीपा के चेहरे पर कातिल मुस्कान तेर गयी. पर वो इतने से ही नही मानी. दीपा- होश मे थी या नही, तुम ये देखो कि तुमने क्या किया. आशु- जी...सॉरी..आगे से नही होगा. दीपा- ठीक है, आगे देखते है कि क्या होगा और क्या नही. मैं कॉलेज जा रही हू. ये शब्द सुन कर मेरी जान मे जान आई. फिर दीपा उठकर बाहर जाने लगी और मैं उसके कुल्हो की हरकत देखता रहा. मैने कान पकड़े की आगे से दीपा से बच कर रहना है. दीपा के जाने के बाद मैं पूरे घर मे फिर अकेला था. मैने पूरे घर का मुआयना किया. घर मे एक से एक एलेक्ट्रॉनिक आइटम पड़ी थी. स्कल्प्चर्स और पेंटिंग्स भी हर दीवार पर थी. बाथरूम तो कमरो से ज़्यादा बड़े थे. हर एक मे जेक्यूज़ी था. इतने शानदार बंगले मे मालकिन के बगल के सूयीट मे रहना, 50000 की तन्खा और सबसे बढ़कर मेडम का शानदार जिस्म. मुझे बिन माँगे इतना मिल गया था कि अपनी किस्मत रश्क हो रहा था. मेडम का ख़याल आते ही लंड मे जोश भरने लगा. ये मेडम ही थी जिन्होने मेरी जिंदगी मे इतने रंग भर दिए थे. उन्होने ही मुझे लड़के से आदमी बनाया था. मेरा पहला वीर्यापात उनकी ही कृपा से हुआ था. अचानक ही उस पहले वीर्यापात के पल को याद करके मेरे शरीर मे एक मीठी सी चीस मार गयी. ये सब सोचते हुए मैं दीपा के कमरे मे पहुच चुका था. वाहा दीपा की बड़ी सी तस्वीर देख कर उसके हुस्न मे खो गया. ऐसा बेदाग सौन्दर्य मैने अपने जीवन नही देखा था. उसकी आवाज़ की खनक मेरे कानो मे गूँज रही थी. सफेद सलवार सूट मे उसके चित्र को मेरे मन ने सज़ा लिया था. पर मैं उसके त्रिया-चरित्र को समझ नही पा रहा था. अपनी इज़्ज़त बचाने के लिए मेरी शुक्रगुज़ार होने की बजाए उसने मुझे ही कटघरे मे खड़ा कर दिया था. दीपा की इज़्ज़त को बचाते वक़्त मेरे मन मे वासना का रत्ती भर भी ख़याल नही था. उसे नंगी देख कर भी मेरा मन नही डोला था. पता नही मुझे क्या हुआ था.... इन्ही ख़यालो मे खोया हुआ मैं अपने नये कमरे मे जाकर सो गया. पता नही इस घर मे आकर मुझे इतनी नींद क्यो आ रही थी. या मैं ही इतने ऐश-ओ-आराम पाकर आलसी हो गया था. जब भी खाली होता हू तो सोने का मन करता. दीपा के जाने के बाद आँख लगी तो सीधे शाम के 6 बजे खुली. इतना सोने के बाद भी आलस आ रहा था. दीपा का ख़याल आया तो मैं उठ कर दीपा के कमरे मे गया वो खाली था. फिर मैने इंटरकम से नरेश को बात की. आशु- अरे यार वो दीपा मेडम अभी तक नही आई है. नरेश- तुझे क्यो चिंता हो रही है. दीपा अभी नही आएगी. वो रात को 10 बजे के बाद ही आती है. आशु- अच्छा ठीक है. ये कौन सा कॉलेज है जो सुबह से रात तक चलता है. फिर मुझे ख़याल आया कि वो गयी होगी अपने नशे की प्यास के लिए. सुबह मैने उसका माल तो गायब कर दिया था. मैने कुछ रुपये उठाए और किचन आदि का सामान लेने बाजार चल दिया. वापस आने मे 9 बज गये थे और बादल भी गरज रहे थे. मैं तेज कदम बढ़ने लगा. मैं मेनगेट से करीब 50 मीटर की दूरी पर था कि अचनांक तेज बरसात पड़नी शुरू हो गयी. तभी एक गाड़ी सीधे गेट के साथ वाले पेड़ से जा टकराई. जोरदार आवाज़ थी पर सड़क सुनसान थी. मैं भाग कर वाहा पहुचा. नरेश पहले ही गेट खोल कर बाहर आ चुका था. अंदर एक लड़की ड्राइविंग सीट पर बैठी थी और स्टियरिंग वील पर बेहोश पड़ी थी. एरबॅग्स खुल गये थे नही तो बचना मुश्किल था. मैने उसकी हालत देखने को ज़रा सा पलटा, वो दीपा थी. मेरे पैरो के नीचे से ज़मीन खिसक गयी. मैने उसे हिलाने डुलाने की कोशिश की पर वो होश मे नही आई. गनीमत थी की कही से खून नही निकला था. मैने तुरंत उसे अपनी दोनो बाँहो मे उठाया और बिल्डिंग की और भागा. दीपा एकदम फूल की तरह हल्की थी. उसका वेट 45 केजी से ज़्यादा नही था. तेज बरसात हो रही थी. मेनगेट से बिल्डिंग लगभग 150 मीटर दूर थी. बरसात की बूंदे दीपा के चेहरे पर पड़ रही थी. मैने उसका चेहरा ढकने के लिए उसका दुपट्टा उपर कर दिया. पर शायद मुझसे ग़लती हो गयी थी. अब बरसात से उसका सूट भीगने लगा. बिल्डिंग तक पहुचते-पहुचते हम दोनो पूरी तरह भीग चुके थे. मैं सीधे उसे उसके कमरे मे ले गया. बेहोशी मे भी उसका चाँद सा चेहरा दमक रहा था. मैने पानी के छींटे उसके चेहरे पर मारे पर कोई फायेदा नही हुआ. दीपा के शरीर मे कोई हुलचल नही थी. मैने उसकी नब्ज़ चेक की, वो चल रही थी. मैने डॉक्टर को बुलाने के लिए फोन उठाया पर वो डेड पड़ा था. बाहर इक्लोति कार का भी आक्सिडेंट हो चुका था. बारिश मे कोई कन्वेयन्स मिलने की आशा नही थी. मेरी समझ मे नही आ रहा था कि क्या करू. अब मुझे भी ठंड लग रही थी, इसलिए मैने अपनी गीली टी शर्ट और जीन्स निकाल दी. अब मैं अंडरवेर और संडो मे ही था. मैने एक नज़र दीपा को देखा. वो बेचारी भी पूरी तरह भीगी हुई थी. उसके कपड़े बदलना ज़रूरी थे नही तो सरदी होने का ख़तरा था. मैने उसके कपड़ो को हाथ लगाया ही था कि किसी ताक़त ने मुझे रोक दिया. मैं बड़े धरम-संकट मे फँस गया था. दीपा ने मुझे कपड़े पहनाने के लिए इतना झाड़ दिया था कि अब उसके कपड़े उतारने की हिम्मत ही नही हो रही थी. दूसरी ओर दीपा को इस हालत मे भी नही छोड़ सकता था. थोड़ी देर था अंतर्द्वंद चलता रहा पर अंत मे दिमाग़ पर दिल की जीत हुई. क्रमशः............


RE: Chudai ki Kahani अंजानी डगर - sexstories - 06-03-2018

अंजानी डगर पार्ट--6 गतान्क से आगे.................... दीपा एक बार फिर मेरे सामने बेसूध पड़ी थी. मैने उसको बाई तरफ पलटा और उसके सूट की बॅक की चैन नीचे खींच दी. अब उसको सीधा बैठा कर उसकी कमर से सूट को उपर किया. मेरे हाथ उसके कपड़े उतार रहे थे पर मेरी नज़रे उसकी आँखो पर टिकी थी. मैं पूरी तरह सतर्क था. सूट निकालने के लिए मैने दीपा के दोनो हाथ कंधो से उपर उठा दिए. अगले ही पल दीपा का सूट अलग हो चुका था और मैने दीपा को लिटा दिया. फिर मैने पहले सलवार उतारने के लिए नीचे की तरफ गया और सलवार का नाडा खोल दिया. अब धीरे से सलवार को भी निकाल दिया. उसकी वाइट ब्रा और पॅंटी भी एक दम भीगी हुई थी. पहले मैने उसके घुटने मोड और पॅंटी निकाल दी. सब कुछ इतनी तेज़ी से हो रहा था कि दीपा के शरीर की ओर ध्यान ही नही रहा. मैं अपनी मालकिन को नंगा कर रहा था पर मन मे कोई वासना नही थी. हा, डर सा ज़रूर था. अब अंत मे ब्रा की बारी थी. ब्रा उतारने की मेरी हिम्मत नही हो रही थी. दीपा की छोटी सी ब्रा मे दो कबूतर बाहर झाँक रहे थे. अंत मे हिम्मत जुटा कर मैने दीपा को पलटा और उसके ब्रा का हुक खोल दिया. फिर उसे सीधा लिटा कर उसके कंधो से उसकी ब्रा के स्ट्रॅप्स नीचे खिचा पर ब्रा का हुक उसके बालो मे अटक गया. हुक निकालने के लिए मैं दीपा उपर थोड़ा झुक गया. डर के मारे मेरी साँसे तेज हो गयी थी. अगले ही पल मेरी सांस उपर की उपर और नीचे की नीचे रह गयी और मैं एक दम जड़ हो गया. मेरी दोनो टाँगे दीपा के दोनो तरफ थी और घुटने कमर के पास थे. मेरे हाथ दीपा के बालो मे थे. यदि कोई भी मुझे इस हालत मे देख ले तो बस यहे समझता की मैं दीपा का रेप कर रहा हू. अचानक एक हाथ ने मेरी बनियान को कस कर पकड़ लिया और दूसरे ने मेरी गिरेबान पकड़ ली और एक तीखी आवाज़ मेरे कानो मे पड़ी- क्या कर रहे हो. डर के मारे मेरी आँखे भी बंद हो गयी थी और घिग्घी बंद गयी थी. शायद इतना तो मैं कॉलेज मे फैल होने पर भी नही डरा था. पूरा शरीर पसीने से भीग गया था. अब मैं केवल जैल जाने की सोच रहा था. बेटा अब तो तुम गये, तुम्हे तो अब भगवान भी नही बचा सकता, जैल मे चक्की तेरा इंतेजार कर रही थी..........यही सब विचार मन मे आ जा रहे थे. पता नही कोई शक्ति मुझे नीचे खींच रही थी मैं नीचे झुकता जा रहा था, पर मुझे इसका एहसास नही हुआ. दोबारा आवाज़ आई- तुम्हारी हिम्मत की तो दाद देनी पड़ेगी. अब मेरी सिट्टी पिटी गुम हो चुकी थी. पर अचानक मुझे झटका सा लगा. ये आवाज़ जानी-पहचानी सी लगी रही थी. ये तो दीपा की ही आवाज़ थी. मैने आँखे खोली तो मेरा चेहरा दीपा के चेहरे के एक दम पास था और दीपा मुझे खा जाने वाली नज़रो से घूर रही थी. दीपा- आज तो तुम रंगे हाथो पकड़े गये, क्यो ? आज का क्या बहाना है ? आशु- ज..जी..म...मैं...व...वो... दीपा- घिग्घी क्यो बाँध गयी तुम्हारी. आशु- म..मेडम...मैं..आपके... वो... कपड़े उतार रहा था. दीपा- हा इसके लिए तुम्हे मेडल दिया जाए क्या . आशु- मेडम आपका आक्सिडेंट हो गया था और आप भीग गयी थी. दीपा- आक्सिडेंट हा..आक्सिडेंट हो गया था तो मुझे डॉक्टर के पास ले जाते मेरा इलाज करते. पर नही, तुम तो मुझे अंदर ले आए और मुझे नंगा कर दिया. तुम मेरी बेबसी का फायेदा उठा कर मेरा रेप करना चाहते थे. आशु- मेडम कैसी बात कर रही हो आप. मैने तो आपकी इज़्ज़त बचाई थी. दीपा- तो इससे तुम्हे मेरी इज़्ज़त लूटने का लाइसेन्स मिल गया क्या. आशु- ज..जी वो बरसात हो रही थी और कोई कन्वेयन्स नही मिल रहा था और आप एकदम भीग गयी थी. आपको ठंड लग जाती इसलिए कपड़े उतार रहा था. दीपा- इस तरह मेरे उपर चढ़ कर ? आशु- ज..जी..म...मैं...व...वो...मैं पहली बार किसी के कपड़े उतार रहा था. मेरा मासूम सा जवाब सुन कर दीपा के चेहरे पर मुस्कान तेर गयी. उसने मुझे एक ओर धक्का देकर बेड पर गिरा दिया और खुद मेरी छाती पर मेरी तरह चढ़ बैठी. वो एक दम नंगी थी. उसकी टाँगे मेरी छाती के दोनो ओर थी और उसकी चूत के सॉफ दर्शन हो रहे थे. उसके बड़े सेबो के आकर के बूब्स एक दम तने हुए थे. उनमे हल्का सा भी ढीला पन नही था. दीपा ने दोनो हाथ मेरे गले पर लगा दिए. दीपा- कपड़े उतार कर क्या करने वाले थे तुम, बोलो ? आशु- जी मैं..क...कुछ नही...मैं क्या करता. दीपा- हाई मेरी जान. 3-3 बार मुझे पूरा नंगा देख कर भी तुम्हारा मन कुछ करने को नही करता ? आशु- जी मैं क्या कर सकता था ? दीपा- वही जो एक लड़का एक लड़की को नंगा कर के करता है. दीपा के आवाज़ मे मादकता भरती जा रही थी. उसकी आँखो मे लाल डोरे सॉफ दिखाई दे रहे थे. दीपा मेरी तरफ बड़े प्यार से देख रही थी पर मेरा दिमाग़ काम नही कर रहा था. आशु- जी क्या करते है. दीपा- बुद्धू प्यार करते है, और क्या. आशु- जी आप मेरी मालकिन है. भला कभी मलिक-नौकर मे प्यार होता है. दीपा- क्या मालकिन इंसान नही होती. उसे प्यार करने का कोई हक़ नही ?............क्या मैं तुम्हे पसंद नही हू ? आशु- मेडम आप ये क्या कह रही है. आपके हुस्न का तो मैं पहले दिन से ही दीवाना हो गया था. अगर आप मेरी हो जाए तो मुझे इस जिंदगी मे और कुछ नही चाहिए. पर आपकी और मेरी हसियत के फ़र्क को देख कर खुद को रोक लिया था. दीपा- अब तुम्हारी मालकिन तुम्हारे सामने एकदम नंगी है. तुम भी नंगे हो. उसकी हसियत तुम्हारे बराबर हो गयी ना. तुम्हारी मालकिन तुमसे अपने प्यार की भीख माँग रही है. प्लीज़ आज तुम मुझे अपनी बना लो. मुझे इतना प्यार करो की मैं मर ही जाउ. आशु- मेडम...मेरी समझ मे कुछ नही आ रहा...मुझे अपनी किस्मत पर विश्वास नही हो रहा... यह सुन कर दीपा ने झुक कर मेरे होंठो पर किस कर दिया. आशु- मेडम, आपने ये क्या किया ? दीपा- आइ लव यू...तुम्हे मेरे प्यार सबूत चाहिए था ना ? ये है मेरे प्यार की मोहर. आशु- मेडम आपने मुझे मेरे जीवन की सबसे बड़ी दौलत दे दी. दीपा- ये मेडम-मेडम क्या लगा रखा है. मेरा नाम दीपा है. तुम मुझे मेरे नाम से ही बुलाओ. आशु- मेडम आप इतनी सुंदर और दौलतमंद है और मैं ग़रीब और साधारण सा लड़का. आपको भला मुझसे कैसे प्यार हो गया. दीपा- ह्म्म...मैने बहुत से लड़को को परख कर देखा है. किसी को मेरी दौलत चाहिए तो किसी को मेरा शरीर. किसी को मुझसे प्यार नही था. पर तुम ही एक ऐसे हो जिसने मुझे 3-3 बार पूरा नंगा बेहोश देख लिया, फिर भी तुम्हारे मन मे वासना का अंश भी ना आया ..तुम्हारी आँखो की सच्चाई पर ही तो मैं मर मिटी हू...ऐसा जीवनसाथी मुझे कहा मिलेगा भला..भगवान ने आज मेरी झोली मे खुशिया डाल ही दी. आशु- और ये ड्रग्स...और वो दोनो लड़के दीपा- भचपन मे मा-बाप के बिछूड़ जाने की वजह से मैं अकेली थी. बाय्फ्रेंड तो सब भूखे थे. मुझे कोई भी समझने को तैय्यार नही था. धीरे-धीरे मैं डिप्रेशन मे आती जा रही थी. एक दिन मेरे बाय्फ्रेंड अभी ने मुझे डिप्रेशन से बचने की मेडिसिन बताकर कोकेन दे दी. पिछले 15 दीनो मे मैं पूरी तरह इस नशे की गुलाम हो चुकी थी. पर अब मुझे तुम मिल गये हो तो मुझे किसी नशे की ज़रूरत नही है. क्या तुम मेरा अतीत भुला कर अपना लोगे. दीपा की नज़रे कातर हो चुकी थी. मैने कुछ कहे बिना उठ कर बैठ गया. दीपा मेरी जाँघो पर आ गयी थी. मैने दीपा को अपनी बाँहो मे भर लिया. इससे दीपा एकदम भावुक हो गयी. उसने मुझे कस कर जाकड़ लिया और मेरे चेहरे पर बेतहाशा चूमने लगी. फिर उसने अपने होठ मेरे होंठो से चिपका दिए. उसकी जीभ मेरे मूह के हर कोने मे घूम रही थी. दीपा की इस हरकत से मुझे भी खुमारी चढ़ने लगी. मैं भी उसका बराबर साथ देने लगा. दीपा मेरे बालो मे अपने हाथ चला रही थी. उसके पिंक निपल एक दम कड़े हो चुके थे और मेरी छाती पर गढ़ रहे थे. उनकी चुभन से मैं मदहोश होता जा रहा था. उसके रसीले अधरो का रस चूस-चूस कर मैं पागल सा हो रहा था. 3 मिनिट तक एक दूसरे को बेतहाशा चूमने के बाद हम दोनो रुक गये पर एक दूसरे के साथ चिपके रहे. हम दोनो की आँखे मदहोशी के कारण बंद हो चुकी थी. अचानक दीपा थोड़ा उपर उठी और अपना छोटा सा पिंक निपल मेरे मूह मे डाल दिया. मैं छोटे से बच्चे की तरह उसे चूसने लगा. दीपा- चूस ले...मेरा बेबी...ये तेरे लिए ही तो है...चूस ले...अपनी प्यास बुझा ले... दीपा की मदहोशी हद पर पहुच चुकी थी. मैने दीपा का दूसरा बूब हाथ मे पकड़ा और उसका निपल मूह मे ले लिया. जितनी बार मेरी जीभ उसके निपल टकराती वो चिहुन्क उठती. दीपा- काट लो...छोड़ना नही...सब कुछ चूस लो...इनको पूरा मूह मे भर लो...प्लीज़ काटो इनको... दीपा बावरी सी हो गयी थी. उसने मेरे दोनो हाथ उठा कर अपने बूब्स पर रख लिए और खुद ही दबवाने लगी. मैं अब एक एक्सपीरियेन्स्ड मर्द था. थॅंक्स टू दीपिका मेडम . मुझे पता था कि लड़की को कैसे मज़ा आता है. मैने दीपा के हाथ हटा दिए और उसके बूब्स को मसल्ने लगा. दीपा- प्लीज़ दबाओ ना...प्ल्ज़ तेज दबाओ... दीपा अब पूरी तरह गरम हो चुकी थी. मेरा लंड भी पूरी तरह खड़ा हो चुका था. दीपा की चूत अंजाने मे मेरे लंड के उपर थी और मेरा लंड दीपा की गंद और चूत के भीच फँसा था. मदहोशी मे वो अपनी चूत मेरे लंड पर रगड़ने लगी. मैं समझ गया की इसकी चिड़िया कुछ ज़्यादा ही फड़फदा रही है और उसे मारने का समय आ चुका है. मैने उसे बेड पर लिटा दिया और टाँगे अपने कंधो पर रख ली. अब उसकी गुलाबी चूत मेरे सामने थी. उसकी चूत एकदम टाइट थी. कल वो तक जिस चूत को बचाती फिर रही थी आज मेरे सामने परोस रखी थी. मैने उसकी चूत को सूँघा तो एकदम मस्त हो गया. ऐसी खुश्बू मैने आज तक नही सूँघी थी. उसकी चिड़िया इतनी कोमल थी की हाथ लगाने की हिम्मत ही नही हो रही थी. अचनांक कुछ सोच कर मैने अपने जीभ बाहर निकाली और उसकी कुँवारी चिड़िया को चाटने लगा. चिड़िया के जीभ छूते ही दीपा के शरीर मे जबरदस्त तरंग दौड़ गयी. दीपा- क्या कर रहे हो मेरी जान. बहुत मज़ा आ रहा है. मैं धीरे धीरे अपनी रफ़्तार बढ़ाता जा रहा था. भीच-बीच मे उसकी चिड़िया को अपने होंठो से दबा लेता तो कभी उसकी चूत का फ्रेंच किस कर लेता. बेचारी दीपा जल-बिन मछली की तरह तड़प रही थी. बार-बार वो अपनी जंघे उछाल रही थी जिससे उसकी चिड़िया मेरे मूह से टकरा जाती थी. दीपा- मेरी जान. क्यो तडपा रहे हो. प्लीज़ कुछ करो ना. मैं पागल हो जाउन्गी. प्लीज़ कुछ तो करो ना. मुझे उसकी हालत पर तरस आ गया. मैने अपने बाए हाथ से उसकी चूत की फांको को खोला और दाए हाथ की 2 उंगलियो को काम पर लगा दिया. दीपा की हालत बयान करना संभव नही है. मेरी उंगलियो ने अपना कमाल दिखाया और 1 मिनिट के अंदर ही दीपा का रस का फव्वारा फुट गया. दीपा ने जोरदार दहाड़ के साथ रस का प्याला उडेल दिया था. अबकी बार मैं सतर्क था. सारा रस मेरे मूह मे समा गया और मैने एक भी बूँद बर्बाद नही की. मैने सिर उठाकर दीपा के चेहरे को देखा. उसके माथे पर बल पड़े थे और आँखे भीची हुई थी. शायद वो अपने पहले ऑर्गॅज़म का आनंद ले रही थी. मैने उसे छेड़ा नही और उठ कर अपने कमरे मे जाकर लेट गया. मेरे मन मे ज़रा भी वासना नही थी पर मेरा लंड पता नही क्यो विद्रोह पर आमादा था. मैं नंगा ही अपने बेड पर जे की शेप मे लेट गया था. दीपा का प्यार पाकर मुझे जो आनंद मिला था वो मैं शब्दो मे नही बता सकता. और फिर मैं इन्ही ख्यालो मे खो गया. दीपा अपने बेड पर मदहोश पड़ी थी. उसको इतना मज़ा जीवन मे पहली बार जो आया था. थोड़ी देर बाद जब उसने आँखे खोली तो मुझे नदारद पाया. वो उठकर बाथरूम मे गयी. पर मैं वाहा भी नही मिला. फिर उसने एक शॉर्ट ब्लू कोलूर की शॉर्ट जीन्स और वाइट कलर का बिकिनी-टॉप पहन लिया और अपने कमरे से बाहर निकल गयी. मेरे कमरे का गेट खुला देख कर, वो सीधे मेरे कमरे मे ही घुस आई. मैं बेड पर सीधा लेटे हुए, दीपा के ख़यालो मे खोया हुआ था. दीपा चुपचाप मेरे बेड पर टाँगो के पास आकर बैठ गयी. वो एकटक मेरे एकदम तने हुए 9 इंच के लंड को देख रही थी. अपने ख़यालो मे मैं दीपा के साथ तरह-तरह से सेक्स कर रहा था, शायद उसी की उत्तेजना से मेरा लंड क़ुतुब मीनार की तरह तना हुआ था. दीपा कुछ बोले बिना ही मेरा लंड की पास पहुच गयी. आज मेरे लंड का सूपड़ा बिना खाल खीछे ही पूरा बाहर निकला हुआ था और इसलिए लंबाई भी 9 इंच से ज़्यादा हो गयी थी. दीपा ने अपनी जीभ निकाली और जीभ की नोक को मेरे सूपदे के छेद से टच करने लगी. मैं अपने ख़यालो मे इतना खोया था कि मुझे लगा की, मेरे ख़यालो मे ही दीपा ऐसा कर रही है. दीपा के शरीर मे सुरसुरी दौड़ गयी. धीरे-दीरे उसने मेरे सूपदे को अपने मूह मे भर लिया और उसे चूसने लगी. हर सेकेंड के साथ दीपा की प्यास और रफ़्तार दोनो बढ़ती जा रही थी. मेरा लंड केवल 3 इंच ही दीपा के मूह मे था पर उसमे भी वो लंड को लोलीपोप की तरह चूस रही थी. वो केवल जीभ और होंठो का इस्तेमाल कर रही थी. फिर दीपा ने अपने बाए हाथ से मेरा लंड पकड़ लिया और लंड को अपने मूह मे गोल गोल घुमाने लगी. उसका मेरे टट्टो पर ध्यान गया. उसने मेरी दोनो गोलियो को एक एक कर के मूह मे लेकर चूसने लगी. मैं अपनी तंद्रा मे ही इसका आनंद ले रहा था, और मैं कर भी क्या सकता था . थोड़ी देर बाद दीपा वापस अपने पुराने मोर्चे पर आ डटी. आख़िर बकरे की माँ कब तक खैर मनाती. 10 मिनिट के बाद मेरे अंदर एक ज्वालामुखी सा उभरने लगा. दीपा भूखे बच्चे की तरह मेरे लंड से दूध की बूँद निकालने के लिए उसे बुरी तरह से चूस रही थी. चूसते चूस्ते पता नही कब मेरा लंड 7 इंच तक उसके मूह मे समा चुका था. अंदर बाहर- अंदर बाहर. बारबार सूपड़ा दीपा के हलक से टकरा रहा था पर इससे दीपा की रफ़्तार पर कोई फरक नही पड़ रहा था. दीपा पूरे ज़ोर-शोर से लंड को चूस रही थी और मैं आँखे बंद किए अपने सपने का आनंद ले रहा था. अनंतत: वही हुआ जो होना था. मेरे लंड ने तेज बौछारो के साथ अपना रस उगलना शुरू कर दिया. दीपा के छोटे से मूह मे मेरा वीर्य भर गया और बाहर छलकने लगा. पर उसने चूसना जारी रखा. मैं अचानक इतना मज़ा बर्दाश्त नही कर पाया और मेरे मूह से ज़ोर की आवाज़ निकल गयी. इसी के साथ मेरी आँखे खुल चुकी थी. सामने दीपा मेरे मुरझाते हुए लंड को कुलफी की तरह चूस रही थी. एक बार वीर्यापत होने के बाद भी चुसाई बर्दाश्त के बाहर थी. दीपा ने मेरे लंड से वीर्य की आखरी बूँद तक चूस ली थी. आशु- य..ये क्या...कर रही हो. दीपा-...म्‍म्म्मम...मज़ा आ गया.. आशु- अरे हटो. और कितना चुसोगी. बेचारे का सारा रस तो तुमने निकाल लिया. अब कुछ नही बचा है. दीपा ने ये सुन कर अपना सिर उपर उठाया और अपने होठ चाटते हुए बोली- क्या है. इस पर मेरा अधिकार है. मैं जो चाहे करू. आशु- इसको चूसना किसने सिखाया. (मेरे मूह से निकल ही गया) दीपा- तुम मुझे ऐसे ही छोड़ आए थे. तुम्हारे पीछे मैं यहा आ गयी पर तुम बेशार्मो की तरह नंगे लेटे हुए थे और मुझ पर अपनी बंदूक तान रखी ही. आशु- वो...मैं...तुम सो गयी थी, इसीलिए...चला आया था. दीपा- मैं अंदर आई तो देखा की तुम्हारी बंदूक तो पूरी लोडेड है. मैने सोचा की कोई अनहोनी ना हो जाए इसलिए इसको अनलोड कर रही थी. देखो मैने तुम्हारी बंदूक को अनलोड कर दिया है. दीपा की मुस्कान एकदम कॅटिली थी. वो लंड से तो उपर उठ गयी थी पर उसके हाथो ने मेरे लंड को पकड़े रखा था. उसकी छोटी सी वाइट बिकिनी मे से उसके बूब्स बाहर झाँकने की कोशिश कर रहे थे. उसके कड़े निपल बिकिनी मे उभरे हुए साफ दिखाई दे रहे थे. तभी दीपा ने एक हाथ से अपने बाए निपल को उमेथ दिया. उसकी इस हरकत को देख कर मेरे लंड ने एक बार फिर बग़ावत कर डाली. दीपा के हाथो मे ही मेरा लंड अंगड़ाइया लेता हुआ फिर से तनने लगा. दीपा इस तेज परिवर्तन को देख कर हत-प्रथ थी. दीपा- क्या बात है. तुम्हारी गन तो फिर से लोड हो गयी. ऑटोमॅटिक है क्या ? क्रमशः..........


RE: Chudai ki Kahani अंजानी डगर - sexstories - 06-03-2018

अंजानी डगर पार्ट--7 गतान्क से आगे.................... दीपा- क्या बात है. तुम्हारी गन तो फिर से लोड हो गयी. ऑटोमॅटिक है क्या ? आशु- मेडम जी. एक तो पहले ही आप इस बिकिनी मे कहर ढा रही हो, उपर से आपकी ये कातिल अदाए. उफ्फ. गन तो रिलोड होनी ही थी. दीपा अपनी तारीफ सुन कर फूली नही समा रही थी, जो उसके खिल उठे चेहरे से जाहिर था. दीपा- ओह. तो तुम्हारी गन मेरे कारण लोड हो गयी है. ये बस ऐसे ही लोड होती रहती है या कभी चलाई भी है. आशु- पहले कभी चलाई तो नही, पर मुझे पता है कि कैसे चलती है. आपको सीखना है क्या ? मैने सच को छुपाना ही ठीक समझा. दीपा- ह..हा..वही सीखने तो तुम्हारे पास आई हू. प्लीज़ सीखा दो ना. आशु- मेडम जी. ये इतना आसान नही है. दीपा- तो मैं कब मना कर रही हू. मुश्किल चीज़े सीखने मे ही तो असली मज़ा है. आशु- मेडम जी. आपको बहुत दर्द होगा. दीपा- तुम्हे अपना बनाने के लिए मैं कुछ भी सहन कर लूँगी. आशु- आप समझ नही रही. इतना दर्द होता है कि जान ही निकल जाती है. दीपा- एक लड़की के लिए उसकी इज़्ज़त जान से बढ़ कर होती है. जब मैं वही तुम पर लूटा रही हू तो जान की किसे परवाह. आशु- तो तुम पक्का फ़ैसला करके आई हो. दीपा- हा..अब ज़बान नही अपनी गन चला कर दिखाओ मेरी जान. दीपा मेरी बगल मे आकर लेट गयी और मेरी पहल का इंतेजार करने लगी. मैं डरते हुए उसकी टाँगो के बीच पहुच गया. दीपा का शानदार हुस्न देख कर सारा डर मेरे दिमाग़ से गायब हो गया. मैं बस बिकिनी टॉप और शॉर्ट जीन्स मे से बाहर झाँकते दीपा के अनुपम सौंदर्या को निहारने लगा. दीपा बेसब्री से मेरा इंतेजर कर रही थी. दीपा- क्या हुआ...कुछ करो ना. मैं दीपा के उपर आ गया पर उसे तो छुआ नही. फिर मैने उसकी बिकिनी मे उभरे हुए एक निपल को होंठो मे दबा लिया. मेरी इस पहली हरकत से ही उसकी आँखे बंद होने लगी. धीरे-धीरे मेरे होठ और जीभ उसके दोनो बूब्स के हर उतार-चढ़ाव का रासा-स्वादन करने लगे. इसी बीच पता नही कब, बेचारी छोटी सी बिकिनी के दोनो कप साइड मे सरक गये और दीपा के गुलाबी निपल उजागर हो गये. मेरी जीभ दीपा के छोटे से निप्पलो से खेलने लगी. कभी उपर नीचे चाटती तो कभी बेरेहमी से दबा देती. निप्पलो पर हुए प्रहारो से दीपा जबरदस्त गरम हो गयी थी. उसकी टाँगे एक दूसरे को मसल रही थी और मूह से सिसकारिया निकल रही थी. दीपा- प्लीज़ इनको दबाओ ना. दीपा के सॉलिड बूब्स मे कुलमुलाहट हो रही थी, जो केवल बुरी तरह मसल्ने से ही मिट सकती थी. पर मैने उन्हे छुआ तक नही और उन्हे उसी हालत मे छोड़ दिया. फिर उसके जिस्म को चाटते हुए नीचे की और जाकर दीपा की नाभि (नेवेल) को चाटने लगा. मैं और नीचे उसके तालपेट (लोवर स्टमक) को चाटने लगा. अब आगे दीपा की शॉर्ट जीन्स थी. मैने उसका बटन खोल कर ज़िप नीचे कर दी. उसके बाद जीन्स दीपा के घुटनो पर पहुच गयी. दीपा की चूत एकदम गीली थी. चूत पानी से चमक रही थी. उसकी गुलाबी चूत के दर्शन कर के मैं एक बार फिर धन्य हो गया था. मेरा लंड बार-बार फन्फना कर दीपा की चूत को सलामी दे रहा था. अब मुझे कोई रोक नही सकता था. मैने उसकी जीन्स को निकाल कर फेंक दिया और उसकी टाँगो को पूरी तरह खोल दिया. उसकी चिड़िया एकदम लाल हो चुकी थी. मैने दीपा की चूत के छेद मे अपनी एक उंगली डालनी चाही पर वो एक इंच से ज़्यादा अंदर नही घुस पाई. मैं उसकी मखमली चूत की कोमलता पर ज़ोर-आज़माइश नही कर पा रहा था. पर मेरी इस हरकत ने दीपा की चूत की आग को बुरी तरह भड़का दिया. वो अपनी गंद उछाल कर मेरी उंगली को चूत के अंदर लेने की कोशिश करने लगी. दीपा- इंतेजार किसका कर रहे हो ? अरे डरो नही एक ज़ोर का धक्का दो और अपनी गन लेकर मेरी प्रेम-गली मे घुस जाओ ना. मैं दीपा की बात पर मुस्कुरा उठा और अपनी उंगली को उसकी चूत मे थोड़ा अंदर कर दिया. दीपा- क्यो तड़पा रहे हो. प्लीज़ करो ना. दीपा उत्तेजना की अतिरेक्ता से बहाल हुए जा रही थी. पर मुझे पता था की ये सब इतना आसान नही होगा. जब दीपिका मेडम जैसी एक्सपीरियेन्स्ड औरत का बुरा हाल हो गया था तो दीपा की क्या बिसात है. उसकी चूत के छेद मे तो उंगली घुसने की जगह है नही, मेरा लंड कैसे घुसेगा. आशु- मेमसाहब, आपकी प्रेम-गली ये मेरी गन नही उंगली फँसी हुई है. आपके छेद मे मेरी गन के लिए जगह नही है. दीपा ने हैरानी से अपनी आँखे खोली और अपनी चूत की तरफ देखने लगी. दीपा- हा. तो तुम मुझसे मज़े ले रहे हो. गन-वन चलानी नही आती तो लोड क्यो करते हो. हाए कितनी शानदार गन है...पता नही तुन्हे कैसे मिल गयी. अब तुम रहने दो और यहा पर लेट जाओ और इस गन को इधर लाओ. मैं खुद ही चला लूँगी. यह सुन कर मुझे दीपिका मेडम वाला सीन याद आ गया. फिर मैने सोचा इस बेचारी को भी अपने मन की पूरी कर लेने दो भाई. आशु- अच्छा एक बात तो बता दो...ये आक्सिडेंट कैसे हो गया ? दीपा- वो तो बस नाटक था...तुम्हारी नीयत को टेस्ट करने के लिए. आशु- अच्छा जी. टेस्ट का क्या रिज़ल्ट निकला ? दीपा- वो मैं तुम्हे बता चुकी हू. तुम फर्स्ट क्लास फर्स्ट आए हो. आशु- ठीक है तो मेरा इनाम कहा है ? दीपा- इनाम तुम्हे अवॉर्ड सेरेमनी मे दिया जाएगा. आशु-अब ये सेरेमनी कब ऑर्गनाइज़ होगी. दीपा- वही तो ऑर्गनाइज़ कर रही हू मेरी जान. यह कह कर दीपा मेरे उपर सवार हो गयी. दीपा- तुम्हारी इस गन का नाम तो बता दो. तुम इसे क्या कहते हो ? आशु- मेरा नाम तो पूछा नही मेरी गन का नाम क्यो पूछ रही हो. दीपा- तुम्हारा इनाम इसी गन के द्वारा ही तो दिलवाया जाएगा ना, इसीलिए. आशु- इसको लंड कहते है जानेमन. आपके छेद का नाम पूछ सकता हू ? दीपा- मैने तो कोई नाम नही रखा पर मेरी फ्रेंड्स इसको चूत कहती है. छी ! कितना गंदा सा नाम है ना. आशु- जो है सो है. वैसे आपके इन कबूतरो को किस नाम से पुकारा जाता है, वो भी बता ही दो ? दीपा- हा इनका नाम तो तुम पूछोगे ही. सब मर्दो की नज़र चेहरे से पहले इन्ही का साइज़ तो चेक करती है. सब इन्ही पर मरते है. कोई इन्हे बूब्स कहता है कोई मुम्मे. और भी बहुत नाम है, इनके. आशु- ठीक है. चलो अब सो जाते है. बहुत रात हो गयी है. दीपा- ये तो धोखा है. मैने इनाम देने के लिए पूरी सेरेमनी ऑर्गनाइज़ कर दी है. अब तुम भाव खा रहे हो. . आशु- मेरी जान तुम्हे बहुत दर्द होगा. दीपा- मेरी सब फ्रेंड्स अपने बाय्फरेंड्स के साथ सेक्स करती है. उन्हे तो बड़ा मज़ा आता है. उनकी बाते सुन-सुन कर मेरे पागल हो गई हू. सब की चूत मे उनके बाय्फरेंड्स के लंड डेली घुसते है. उन्हे तो कभी दर्द नही होता फिर मेरी चूत मे क्या कमी है. आशु- तुम शर्त लगा लो. तुम्हारी चूत मे मेरा लंड नही घुसेगा. दीपा- ठीक है अगर तुम जीते तो जो तुम कहोगे वो दूँगी. हारे तो जो मैं कहूँगी वो देना पड़ेगा. आशु- मैं तो अब तुम्हारा हो गया हू. मेरा क्या है जो मैं दूँगा. दीपा- ज़यादा बाते नही. बोलो शर्त लगाते हो. आशु- चलो डन. इसके बाद दीपा बेड से उतर कर बाथरूम मे गयी और एक बॉटल ले आई. उसने उसकी कॅप खोली और तेल मेरे लंड पर उडेल दिया. थोड़ा उसने अपनी उंगली से अपनी चूत के अंदर भी लगा लिया. दीपा- ये शर्त तो मैं जीत कर रहूंगी. दीपा फिर मेरे उपर चढ़ गयी और अपनी चूत मेरे लंड पर टीका दी. फिर उसने अपने दाँत कस कर भीच लिए और अपने शरीर का भार मेरे लंड पर छोड़ दिया. आआआआआआआआआआआआययययययययययययययययययययययययययययईईईईईईईईईईई-एक कानफ़ादू चीख आई. एक ही झटके मे मेरा लंड दीपा के अंदर 3 इंच तक घुस चुका था. आयिल की चिकनाई से लंड चूत के कुछ अंदर तक फिसल गया था. पर 3 इंच तक जाने के बाद चूत के अंदर किसी दीवार ने उसका रास्ता रोक लिया. दीपा की मस्त टाइट चूत मे घुस कर मेरा लंड निहाल हो गया था. उधर दीपा की आँखे अपने कटोरो से बाहर निकलती सी लग रही थी. उसकी साँस भी रुक सी गयी थी. वो बिना हीले 2 मिनिट तक ऐसे ही चढ़ि रही. मेरा लंड चारो और से पड़ रहे दबाव से झानझणा रहा था. थोड़ी देर बाद दीपा का दर्द कम हुआ तो उसकी जान मे जान आई. आशु- क्या हुआ ? दर्द हो रहा है. दीपा- तुम तो चुप ही रहो. देखो घुसा कि नही. ऐसे घुसाते है. अब ये ट्रैनिंग याआद रखना. आशु- तुम्हारी हिम्मत की तो दाद देनी पड़ेगी. तुम्हे दर्द होगा इसलिए मैं हिचकिचा रहा था. पर तुमने तो एक झटके मे ही... दीपा मेरे मूह पर हाथ रख कर बोली- ज़्यादा बाते नही...अब मैने इतना घुसा दिया है. बाकी काम तुम करो. आशु- क्यो ? दीपा- मैने अपना हाइमेन अपने पति के लिए सलामत रखा था. आशु- अब ये हाइमेन क्या है ? दीपा- ये हर लड़की की चूत मे होती है. उसके वर्जिन होने की निशानी. आशु- मैं समझा नही. दीपा- ऊफफो...तुम बस ये समझो कि ये लाल-किले का दरवाजा है, जो तुम्हे अपनी गन से तोड़ना है. बसस्स. ये कह कर दीपा बेड पर टाँगे फैला कर लेट गयी. दीपा- चलो अब शुरू भी हो जाओ. क्रमशः.........


RE: Chudai ki Kahani अंजानी डगर - sexstories - 06-03-2018

अंजानी डगर पार्ट--8 गतान्क से आगे.................... ये कह कर दीपा बेड पर टाँगे फैला कर लेट गयी. दीपा- चलो अब शुरू भी हो जाओ. मेरी टाँगे थक जाएँगी. ... आशु- एक बार फिर सोच लो. शादी से पहले ये सब... दीपा (मेरी बात काटते हुए बोले)- शादी के पहले हो या बाद मे. होना तो हम दोनो के बीच ही है ना. ज़रा सोचो मेरी तो इज़्ज़त लूट ही गयी थी ना, अगर तुम नही बचाते. अब इस शरीर बस तुम्हारा ही तो है. अगर मैं तुम्हे पसंद नही तो कोई बात नही. आशु- नही नही ऐसी बात नही है. दीपा- तो फिर मुझे प्यार करो ना. मैं तुम्हारी हू. जी भर कर प्यार करो मुझे. दीपा का शानदार जिस्म सामने बिछा हुआ अपनी पूजा करने के लिए मुझे आमंत्रित कर रहा था. उसकी आँखे मुझे ऐसे देख रही थी की जैसे खुद को प्यार करने के लिए मेरी मिन्नते कर रही हो. उसके दोनो हाथ अपने निप्पलो को सहला रहे थे. उसके आग्रह को देख कर मैने अपना लंड उसकी भूखी चूत के मुहाने पर लगा दिया. दीपा- प्लीज़ घुसा दो ना मेरी चूत मे प्लीज़. मैने भी सोचा अब बचने का कोई रास्ता नही है. मैने दीपा की टाँगो को अपने कंधो पर रखा और उसकी चूत पर रख कर अपने लंड के सूपदे का दबाव डाला. वो तो अब भी बिल्कुल टाइट थी. पर उसके रस के साथ मिक्स हो चुके आयिल ने अपना कमाल कर दिया. दीपा चिहुन्क उठी. सूपड़ा चूत के अंदर था और दीपा की हालत दुबारा पहले जैसी ही हो रही थी. उसने अपने को पीछे हटाने की कोशिश की लेकिन मैने उसको कस कर पकड़ रखा था. दीपा- प्लीज़ जान एक बार निकाल लो. फिर डाल लेना. प्लीज़ बहुत दर्द हो रहा है. पर माने अभी नही तो कभी नही वाले अंदाज में एक धक्का लगाया और लंड उसकी फिर उसकी झिल्ली से जा टकराया. दीपा की तो चीख ही निकल गयी. कुछ देर इसी हालत में रहने के बाद जब दीपा की चूत मेरे लंड की आदि हो गयी तो दर्द कम होने लगा. जैसे-जैसे दर्द कम हो रहा था उस पर मस्ती सवार हो रही थी. उसकी चूत मे अजीब सी कसक उठ रही थी. इसी मस्ती की तान मे दीपा ने सिसकारी लेते हुए अपनी गंद को उचका दिया. दीपा की इस हरकत से मेरे भी तन-बदन मे आग लग गयी. दीपा का सिग्नल पाकर मैने अपने लंड को थोड़ा बाहर निकाला और पूरे ज़ोर से अपने लंड का धक्का दीपा की चूत मे दे मारा. मेरा लंड दहाड़े मारता हुआ दीपा की चूत मे 8 इंच तक घुस गया था. मेरी आँखे मूंद गयी थी. मेरे लंड ने जन्नत का दरवाजा खोल लिया था. मुझे असीम आनंद मिल रहा था. दीपा की चूत बुरी तरह से टाइट थी और लंड एकदम पॅक हो चुका था. आख़िरकार मेरे लंड के इस प्रहार से दीपा की चूत की झिल्ली फट गयी थी और उसकी चूत पर मेरे लंड ने अपना नाम लिख ही दिया था. इधर दीपा को शुरू मे चूत के अंदर, जैसे किसी चींटी ने काट लिया हो, इतना ही दर्द हुआ था. उसको अपने कौमार्या भंग का अहसास हो चुका था. जैसे किसी बेलून मे किसी ने उंगली डाल कर फोड़ दिया हो. पर झिल्ली के फटने के बाद जब लंड उसकी चूत के अंत मे जाकर टकराया तो दीपा दर्द से बिलबिला उठी. वो उठ कर मुझ से लिपट गयी और मुझे कसकर पकड़ लिया. दीपा मुझे बिल्कुल हिलने नही दे रही थी. थोड़ी देर तक हम इसी पोज़ मे रहे. अंततः दीपा की टाइट चूत ने मेरे लंड को जगह देना आक्सेप्ट कर ही लिया. जिससे उसका दर्द कम होने लगा. आशु- मैने तो कहा था कि बहुत दर्द होगा. दीपा- मेरी जान इस दर्द के बाद जो मज़ा आएगा उसकी सोचो. यह कह कर दीपा फिर बेड पर लेट गयी. मैने भी मौका अच्छा देख कर अपना लंड थोड़ा बाहर निकाला और पूरे ज़ोर से धक्का मार दिया. इस धक्के से दीपा बुरी तरह सिसक उठी- हाई रे, मेरी चूत. काट डाला तूने कसाई. अब दीपा की चूत गरम हो चुकी थी और मेरे मोटे लंड से चुदाई के लिए तैय्यार थी. मैने अपने दोनो हाथो मे उसके कबूतरो को पकड़ लिया और धीरे-धीरे लंड को अंदर बाहर करने लगा. पर दीपा की चूत बुरी तरह फदक रही थी. उसकी चुदास इतनी धीरे से बुझने वाली नही थी. वो अपनी गंद को उछालने लगी. उसकी इस हरकत को देख कर मैने भी अपनी रफ़्तार बढ़ा दी. उपर मैं दीपा के बूब्स को बुरी तरह मसल रहा था और नीचे दीपा की चूत की जबरदस्त चुदाई हो रही थी. हर बार लंड अंदर जाता और बाहर आ जाता. हर बार दीपा सिसक उठती. ...मज़ा दे दिया... कब से तेरे लंड... की .. प .. प्यासी थी. धक्के दे जान मुझे... आह. तेज कर…आह…. कभी मत निकालना इसको ... मेरी चूत ...आ ...फाड़ दो इसको…कब से परेशान कर रखा है….आज छोड़ना नही…सब कुछ लेलो….सब….तुम्हारा है…मज़ा आ गया... कमरे मे प्लॉत-प्लॉत की आवाज़े और दीपा की दर्द भरी सिसकारिया गूँज रही थी. उधर मेरा का भी यही हाल था. मैं उछल उछल कर दीपा की चूत मे लंड पेले जा रहा था कि अचानक दीपा ने ज़ोर से अपनी टाँगे भींच ली. उसका सारा बदन अकड़ सा गया था. उसने उपर उठकर मुझको ज़ोर से पकड़ लिया. उसकी चूत पानी छोड़ती ही जा रही थी. इससे मेरा का काम आसान हो गया था. अब मैं और तेज़ी से धक्के लगाने लगा. पर अब दीपा गिड०गिदाने लगी- प्लीज़ अब निकाल लो. अब सहन नही हो रहा. दीपा की सिसकारिया चीखो मे तब्दील हो चुकी थी. पर मस्त हाथी को कोई रोक पाया है कभी ? मुझे तो दीपा पर दया आ रही थी पर मेरा लंड अब मेरे काबू मे नही था. वो बस एक ही काम जानता था और वो उसे बखूबी कर रहा था. 2 मिनिट तक पूरी बेरहमी से चुदने के बाद दीपा फिर से अपनी गंद उछालने लगी. अपनी चूत की अनवरत चुदाई से वो फिर से गरम हो गयी थी. फिर सिसकने लगी थी. इसी प्रकार मैं दीपा की चूत को आधे घंटे तक बिना रुके रोन्द्ता रहा. कभी धीरे, कभी तेज. जैसे जैसे दीपा के चेहरे पर भाव आते जाते वैसे ही मेरी रफ़्तार बदलती जाती. अब तक दीपा कम से कम 6 बार पानी छोड़ चुकी थी. मेरा भी टाइम आ चुक्का था. मैने अपना लंड दीपा की चूत से बाहर निकालना चाहा पर दीपा बोली- अपना रस मेरे अंदर ही निकाल दो जान. अंत करीब जानकार मैने ज़ोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए. दीपा भी बुरी तरह चीख रही थी. फिर मैं ज़ोर की दहाड़ मार कर दीपा के उपर ही ढेर हो गया. मेरा लंड दीपा की चूत मे अपना रस उडेल रहा था और बाहर सरक रहा था. दीपा की छोटी सी चूत मे से वीर्य निकल कर बहने लगा. दीपा और मेरे दोनो को अपनी मंज़िल मिल चुकी थी. दीपा- आइ लव यू मेरी जान. मुझे नही पता था कि इसमे इतना मज़ा आता है. आशु- हा मेरी जान. आज तो शुरुआत है. सुबह उठा तो दीपा मुझ से चिपकी हुई थी. पूरी रात दीपा ने मुझे सोने नही दिया था और अब घोड़े बेच कर सो रही है. दीपा के सुंदर जिस्म का जितना बखान करू कम है. जब भी मैं उसे देखता तो अपने आप सहलाने लगता. मेरे सहलाने से थोड़ी देर मे ही दीपा की नींद खुल गयी. पर रात का नशा अभी उसकी आँखो से गया नही था. उठते ही अपने होठ मेरे होंठो पर रख कर किस किया और बोली- गुड मॉर्निंग जान. आशु- मेम, मेरी गन ने आख़िरकार आपके लाल-किले का दरवाजा तोड़ ही दिया. अब तो खुश है आप. मेरे लंड की ओर देख कर दीपा बोली- ये गन नही पूरी तोप है. मेरा तो पूरा लाल-किला ही तहस-नहस हो गया. आशु- छोटी सी कोठरी को लाल-किला कहती हो. मेरा तो बुरा हाल हो गया था. दीपा- तभी इतना उछल-उछल तोप चला रहे थे. आशु- जब भगवान ने तोप दे रखी है तो काहे का डर. दीपा- तुम अपने साथ ये तोप लेकर क्यो घूमते हो. इसका लाइसेन्स भी है तुम्हारे पास ? दीपा हंसते हुए बोली. आशु- हथियार तो रखना ही पड़ता है. पता नही कब इज़्ज़त पर ख़तरा आ जाए. दीपा- अच्छा जी. कही भी इस्तेमाल कर लेते हो इसे. हुम्म. आशु- नही कल पहली बार ही नौबत आई थी. दीपा- अच्छा जी. तो तुम्हारी इज़्ज़त लूटी जा रही थी. आशु- और नही तो क्या. मैं तो मना ही कर रहा था. दीपा- तो तुम्हारी मर्ज़ी नही थी. मैने तुम्हारी इज़्ज़त लूट ली, क्यो ? आशु- तुम ही मेरे उपर चढ़ गयी थी. दीपा- और वो मेरी चिड़िया को किसने मारा था. आशु- तो उसके बदले तुमने मेरा लंड भी तो चूस लिया था. दीपा- कभी किसी लड़के की भी इज़्ज़त लूटती है भला. .... ऐसे ही काफ़ी देर तक हम दोनो मे चुहलबाजी चलती रही. आइए दोस्तो अब इधर देखते हैं की अपने बबलू के साथ क्या हो रहा है..................... बबलू ने श्याम द्वारा दिए गये जॉब पर लिखे पते को पढ़ा. ये बांद्रा का पता था. उसने टॅक्सी पकड़ी और बांद्रा पर पहुच गया. बांद्रा मुंबई के सबसे पॉश इलाक़ो मे से एक है. बांद्रा मे बबलू को लिबास बुटीक मे पहुचना था. थोड़ा ढूँढने के बाद वो लिबास पहुच गया. लिबास के गेट साथ ही शोकेस मे बहुत ही सुंदर इंडो-वेस्टर्न ड्रेसस मॅनिकिन्स ने पहनी थी. लिबास को बाहर से देखने से ही पता चलता था कि यहा अप्पर क्लास के कस्टमर ही आते होंगे. गेट मे घुसते ही एकदम ठंडी हवा के झोंके ने उसे पूरा तरो-ताज़ा कर दिया. अंदर की सजावट शानदार थी. घुसते ही सामने गणेश जी की बड़ी सी मूर्ति थी. लिबास के अंदर की दीवारो पर भी बढ़िया सजावट की गयी थी. अंदर कम रोशनी थी, पर मॅनिकिन्स पर स्पॉट लाइट पड़ रही थी. अंदर कुल 4 लड़किया थी. 3 रॅक्स के पास काम कर रही थी और एक पेमेंट काउंटर पर थी. चारो ही लगभग साधारण नैन-नक्श की मालकिन थी. पर उनके कपड़े अट्रॅक्टिव थे. बुटीक के अंदर कस्टमर कोई नही था. बबलू सीधा पेमेंट काउंटर पर बैठी लड़की पास पहुचा. लड़की- यस. हाउ कॅन आइ हेल्प यू ? बबलू- मैं टेलर की जॉब के लिए आया हू. फिर उसने अपना जॉब-कार्ड लड़की को दे दिया. लड़की- ओह तो तुम टेलर की जॉब के लिए आए हो. ठीक है. पर शमा मेडम अभी आई नही है. तुम वाहा बैठ जाओ. वो आने वाली ही है. बबलू- ठीक है. क्रमशः......


RE: Chudai ki Kahani अंजानी डगर - sexstories - 06-03-2018

अंजानी डगर पार्ट--9 गतान्क से आगे.................... थोड़ी देर बाद फोन की बेल बजी. काउंटर वाली लड़की- हेलो.....गुड मॉर्निंग मॅम.....जी....एक आदमी आया है.....टेलर के काम के लिए....जी श्याम प्लेसमेंट एजेन्सी से...जी ठीक है. लड़की- सुनो...तुम्हारा नाम क्या है. बबलू- जी बबलू. लड़की- मेडम तो आज आएँगी नही. तुम्हे अपायंट करने से पहले 2-3 दिन ट्राइ पर रखेंगे. उसके बाद ही बाकी बाते फाइनल होंगी. बबलू- जी. लड़की- उपर मास्टर जी से जाकर मिल लो. सीढ़िया उधर है. बाबबलू- उनसे क्या कहु कि किसने भेजा है ? लड़की- उनसे कहना निशा ने भेजा है. बबलू- आपका नाम निशा है. लड़की- क्यो कोई दिक्कत है. बबलू- न..नही. फिर बबलू चुप-चाप निशा के बताई सीढ़ियो से उपर फर्स्ट फ्लोर पर पहुच गया. उपर चढ़ते ही सामने एक रूम दिखाई दिया. कमरे मे 3 स्विंग मशीन रखी थी. उनमे से एक मशीन पर एक 50-55 साल का आदमी कम कर रहा था. वाहा 2 ट्राइ रूम भी बने हुए थे. बबलू- मस्टेरज़ी नमस्ते मस्टेरज़ी- हा नमस्ते. बोलो क्या काम है. बबलू- मैं टेलर के काम के लिए आया हू. मुझे निशा मेडम ने आपके पास भेजा है. मस्टेरज़ी- अच्छा. चलो कोई तो आया. मैं अकेला परेशान हो गया था. बबलू- तो आप अकेले यहा पर काम करते है. और कोई नही है ? मस्टेरज़ी- अरे बेटा आज कल के लड़के दर्जी का काम तो जानते नही है और आ जाते है कैंची चलाने. तुम्हे भी काम आता है या नये रंगरूट हो. पहले कभी काम किया है. बबलू- जी मैने पहले कही काम तो नही किया है. पर आपका सिर पर हाथ होगा तो जल्दी सीख जाउन्गा. मस्टेरज़ी- बेटा कोई हुनर किसी के सिखाने से नही आता. ये तो अपनी काबिलियत पर होता है. दिल लगा कर सीखेगा तो जल्दी उस्ताद बन जाएगा. बबलू- जी मैं पूरी लगन से सीखूंगा. मस्टेरज़ी- देखो असली टेलर वही जो एक बार मे ही एकदम सही फिटिंग के कपड़े सिले. बबलू- जी मस्टेरज़ी- सही फिटिंग के लिए सही नाप लेना बहुत ज़रूरी है. असली ग़लती इसी मे ही होती है. बबलू- जी मस्टेरज़ी- जाओ नीचे से किसी को बुला कर लाओ. बबलू- जी बबलू नीचे जाकर निशा से बोला- जी वो मस्टेरज़ी ने किसी को उपर भेजने के लिए कहा है. निशा- क्यो क्या काम है. बबलू- वो तो पता नही. निशा ने इंटरकम से मस्टेरज़ी के पास फोन मिलाया. निशा- मस्टेरज़ी... किस को बुलाया है. मस्टेरज़ी- अरे कुछ नही... इस नये लड़के को थोड़ी सी ट्रैनिंग देनी थी. निशा- लड़की के साथ ? मस्टेरज़ी- तो क्या मैं खुद का नाप लेना सिखाउ. लॅडीस टेलर है तो किसी लेडी का ही नाप लेगा ना. निशा- ओके इतना भड़कते क्यो हो. किसे भेजू दू. मस्टेरज़ी- तूमम्म्म....ऐसा करो रश्मि को भेज दो. वही ठीक रहेगी. निशा- वही क्यो. मैं आ जाती हू. मस्टेरज़ी- ना बाबा तू रहने दे. तू उसे ही भेज दे. निशा- जैसी आपकी मर्ज़ी. फोन रखकर... निशा- रश्मि उपर जा...मस्टेरज़ी ने बुलाया है. तुम भी उपर जाओ....बबलू. बबलू ने बाकी लड़कियो की तरफ देखा कि कौन जाएगी. रॅक वाली लड़कियो मे से एक बबलू के पास आई और बोली- चलो. बाकी लड़किया भी बबलू की तरफ ही देख रही थी. एक साथ इतनी लड़कियो की अटेन्षन पाकर वो सकपका गया और नज़रे फेर ली. रश्मि आगे चल रही थी और बबलू उसके पीछे था. रश्मि का जिस्म मांसल था. चेहरा ज़्यादा आकर्षक नही था पर रंग सॉफ था. उसकी देह मे बूब्स और कुल्हो पर काफ़ी माँस था. पर उसकी कमर पतली ही थी. चेहरा अटरॅक्टिव होता तो शायद कयामत ढाती. इसी ध्यान मे मगन कब बबलू कब मस्टेरज़ी के पास पहुच गया पता ही नही चला. रश्मि- जी मस्टेरज़ी. कहिए क्या काम है ? मस्टेरज़ी- अरे. निशा ज़रा इसको लॅडीस का सही से नाप लेना सीखना है. तू ज़रा इधर आकर खड़ी हो जा. रश्मि - जी. मस्टेरज़ी- अरे हीरो. तू भी इधर आ जा. बबलू- जी. अब बबलू और मस्टेरज़ी रश्मि के सामने खड़े थे. मस्टेरज़ी ने इंचीटेप उठा लिया. मस्टेरज़ी- पहले कभी किसी का नाप लिया है. बबलू- जी वो कोर्स मे तो नाप लिखा हुआ मिलता था. उसी के हिसाब से कटिंग करके सिल्ना होता था. मैने कभी किसी का नाप नही लिया. मस्टेरज़ी- मुझे पता था. कभी कोई डिप्लोमा-डिग्री से भी कोई हुनर आता है क्या. असल जिंदगी की सच्चाई तो अब पता चलेगी. बबलू- जी. मस्टेरज़ी- चलो आज ब्लाउस से शुरुआत करते है. देखो सबसे पहले लंबाई का नाप लेते है. उसके बाद छाती और कमर का. चलो तुम लेकर दिखाओ. यह सुन कर रश्मि अपना सूट निकालने लगी. बबलू- अरे, आप ये क्या कर रही हो. मस्टेरज़ी- तो तू नाप कैसे लेगा बेटा. बबलू- जी नाप लेने के लिए कपड़े निकालने की क्या ज़रूरत है. उपर से ही ले लेता. मस्टेरज़ी- साले सब कुछ उपर से कर लेता है क्या ? इन कपड़ो के उपर थोड़े ही पहनने है, जो तू इन कपड़ो का नाप लेगा. शरीर का नाप लेना है और सही नाप लेने के लिए अंडर-गारमेंट्स मे ही नाप लेना चाहिए. बबलू- जी समझ गया. अब तक रश्मि अपना सूट उतार चुकी थी. उसके उपरी शरीर पर केवल एक ब्रा ही थी. उसके बूब्स की हालत देख कर सॉफ पता चल रहा था कि ब्रा कुछ ज़्यादा ही छोटी थी. मस्टेरज़ी- बेटा ये क्या है. रश्मि- मस्टेरज़ी, क्या करू पता नही दोनो कैसे अपने-आप ही बड़े होते जा रहे है. मस्टेरज़ी- लगता रोज इनकी खूब सेवा होती है. रश्मि (शरमाते हुए)- क्या मस्टेरज़ी आप भी ना. मस्टेरज़ी- अब बड़े हो रहे है तो क्या हुआ. ब्रा तो मम्मो के साइज़ के हिसाब से ही पहनेगी. देख बेचारो की क्या हालत हो गयी है. कुछ तो इनकी कदर किया कर. रश्मि- मस्टेरज़ी, अभी तो ये दोनो निगोडे मेरी छोटी साइज़ की ब्रा मे जैसे तैसे काबू मे रहते है. अगर बड़ी ब्रा पहनी तो फिर इनका साइज़ जग-जाहिर हो जाएगा. मस्टेरज़ी- तो क्या हुआ पगली. इन्ही पर तो हर मर्द मरता है. जा उधर जाकर ड्रॉयर मे से अपने साइज़ की ब्रा पहन ले. रश्मि- पर मस्टेरज़ी मुझे तो अपनी ब्रा का साइज़ ही नही पता है. मस्टेरज़ी- ऑफ..हो. ये भी मैं ही बताउ. यहा आने वाली हर औरत को मैं ही उनसी ब्रा का सही साइज़ बताता हू. रश्मि- हा मस्टेरज़ी. पिछली बार भी तो आपने ही बताया था मुझे. मस्टेरज़ी- वही तो मैं सोच रहा था की 3 महीनो मे ये नाषपाती से खबूजे कैसे बन गये. रश्मि- मस्टेरज़ी प्लीज़...बार-बार मत छेड़ो ना. मस्टेरज़ी- चल ठीक है. उतार दे इसको. शायद ब्रा के साइज़ के चक्कर मे दोनो बबलू को भूल गये थे. रश्मि की ब्रा को फाड़ कर बाहर निकलने को आतुर मम्मो को देख कर बबलू उत्तेजित हो रहा था. लंड तन कर एक दम सख़्त हो चुका था. रश्मि ने हाथ पीछे ले जाकर अपनी ब्रा का हुक खोल दिया. दोनो कबूतर आज़ाद होकर फुदकने लगे. वाकई मे रश्मि के मम्मो ने कहर ढा दिया था. एक पल को लगा की बबलू की साँसे रुक सी गयी हो. उसकी नज़रे रश्मि के निप्पलो पर गढ़ सी गयी थी. मस्टेरज़ी- तेरा साइज़ तो एकदम मस्त हो गया छोरी. ब्रा मे तो असली साइज़ का पता ही नही चल रहा था. ये इतने बड़े हो गये है फिर भी एक दम तने हुए है. क्या राज छुपा रखा है. रश्मि- मस्टेरज़ी मैं डेली ब्रेस्ट टोनर गेल लगाती हू. उसी का कमाल है. मस्टेरज़ी- ह्म्‍म्म...हा आज कल तो कई तरीके है. हमारे समय मे तो बस मालिश ही करते थे. रश्मि- आपने तो मस्टेरनिजी की खूब मालिश की होगी. खूब मोटे होंगे उनके मम्मे. मस्टेरज़ी- उसके मम्मो की बात मत कर. चल सीधी खड़ी हो जा. बबलू का मन कर रहा था कि काश मस्टेरज़ी की जगह उसके हाथ रश्मि के बूब्स का नाप ले रहे होते. पर वो मन मसोस कर खड़ा रह गया. मस्टेरज़ी ने इंक्फिटेप उठाया और रश्मि के बाए बूब की जड़ पर लपेट दिया और फिर दाए का नाप लिया और पॅड पर लिख दिया. फिर उन्होने कमर से लेकर मम्मो तक टेप को लपेटा और लिख लिया. मस्टेरज़ी- पूरे 36 के हो गये है तेरे कबूतर. फिर उन्होने कंधे से निपल तक का नाप लिया और बोले- तू वाहा से 36फ साइज़ की ब्रा लेले. रश्मि ड्रॉयर तक गयी और ब्रा देखने लगी. फिर एक लेकर वापस मस्टेरज़ी के पास आ गयी. रश्मि-ये वाली ठीक लगती है. मस्टेरज़ी- चल पहन ले पर कल तक वापस ला दियो. फिर मस्टेरज़ी ने बबलू की ओर देखा. बबलू जड़ हो चुका था. रश्मि के कबूतरो ने उसके होश उड़ा दिए थे. उसका लंड ने पॅंट मे ही तंबू गाड़ कर आंदोलन कर रखा था. मस्टेरज़ी- क्या हुआ बच्चू ? ये तो रोज होता है यहा. अगर तू ऐसे ही तंबू गाढ कर खड़ा हो जाएगा तो काम क्या तेरा बाप करेगा. साले रश्मि की तो कोई बात नही. पर किसी कस्टमर ने तेरा ये लंड इस हालत मे देख लिया तो तेरी खैर नही बेटा. बबलू- स...सॉरी मस्टेरज़ी. रश्मि- मस्टेरज़ी अबी नया नया है. मुंबई की हवा अभी लगी नही है. बेचारे का इतना सा ट्रेलर देख कर ये हाल हो गया, पूरी फिल्म देखेगा ओ पता नही क्या होगा. रश्मि की बात सुनकर बबलू का चेहरा शरम से लाल हो गया था. तभी फोन की घंटी बजी. मस्टेरज़ी- बोल निशा...रुक मैं ही नीचे आता हू. (फोन रखकर) रश्मि मैं 10 मिनिट मे आता हू. तू इसको नाप लेने की प्रॅक्टीस करा देना. और बबलू तू रश्मि के ब्रेस्ट, वेस्ट, लेंग्थ, और शोल्डर का नाप लेने की प्रॅक्टीस कर लेना. मैं आकर चेक करूँगा. क्रमशः........


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