Kahani भड़की मेरे जिस्म की प्यास - Printable Version

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RE: Kahani भड़की मेरे जिस्म की प्यास - sexstories - 08-11-2018

राम्या अपने कमरे में जा कर पहले फ्रेश होती है फिर अपना लॅपटॉप खोल के बैठ जाती है.
जैसे ही वो ऑनलाइन होती है विमल के 15 मेसेज पेंडिंग पड़े थे.
राम्या सारे मेसेज पढ़ती है और मन ही मन मुस्कुराती रहती है. विमल के अंदर आग भड़क उठी थी वो बहुत बेचैन हो रहा था जकप की असलियत जानने के लिए और उस से मिलने के लिए. लेकिन उसने राम्या के सवाल का जवाब नही दिया था.

राम्या उसके लिए मेसेज छोड़ती है कि जब तक मेरे सवाल का जवाब नही दोगे मैं आगे कोई बात नही करूँगी. और अगर तुमने सही जवाब दिया तो तुम्हारा लंड भी चुसुन्गि और तुमसे खूब चुदवाउन्गि. बाकी बातें तुम्हारे जवाब आने के बाद और मुझे कल तक जवाब चाहिए.

राम्या लॅपटॉप बंद कर के रख देती है और नीचे चली जाती है. तब तक सीमी भी आ जाती है. राम्या सीमी को फ्रेश होकर नीचे आने के लिए कहती है और खुद किचन में जा कर माँ की मदद करने लगती है खाना बनाने में.
माँ के चेहरे पे हसी देख राम्या भी अंदर से बहुत खुश होती है और माँ के गले लग जाती है.

खाना खाने के बाद माँ राम्या को गहरी नज़रों से देखती है और फिर अपने कमरे में चली जाती है.

राम्या और सीमी भी कमरे में चले जाती हैं.
कमरे में पहुच कर दोनो एक दूसरे से चिपक जाती हैं. सीमी को भी अब राम्या के जिस्म के साथ खेलना अच्छा लगने लगा था, जब तक लंड नही ऐसे ही सही.


दोनो के होंठ आपस में जुड़ जाते हैं . दोनो एक दूसरे के जिस्म को सहलाने लगती हैं. दोनो के ही जिस्म गरम होने लगते हैं. होंठ ऐसे चिपकते हैं जैसे कभी जुदा ना होंगे. राम्या सीमी का निचला होंठ चूसने लगी और सिम्मी उसका उपरवाला. एक गहरा स्मूच दोनो में शुरू हो गया. 


दोनो के जिस्म से कपड़े कब उतरे पता ही ना चला. दोनो बिल्कुल एक दूसरे में खो चुकी थी, सीमी राम्या के पीछे आगाई और उसके साथ चिपक कर उसके उरोज़ मसल्ने लगी, राम्या ने अपनी गर्दन घुमा कर अपने होंठ सीमी के होंठों से मिला दिए.


दोनो की मस्ती बढ़ने लगी और दोनो बिस्तर पे गिर पड़ी. दोनो का स्मूच फिर शुरू हो गया और राम्या सीमी की चूत में उंगली करने लगी.


राम्या ने दरवाजा लॉक नही किया था ताकि माँ अंदर आ सके. माँ काफ़ी देर से दोनो की हरकतें दरवाजे में बनी झिरी से देख रही थी. माँ का दिल तो कर रहा था अंदर जाने के लिए पर दिमाग़ रोक रहा था सीमी के सामने इस तरहा खुलने के लिए.
दोनो की हरकते देख कर माँ गरम होती जा रही थी और राम्या सीमी के साथ चिपकी हुई सोच रही थी कि अब तक तो माँ को आजाना चाहिए.
सीमी अपने होंठ राम्या से अलग करती है.दोनो की साँसे फूल चुकी थी.
सीमी : अहह राम्या की बच्ची आग लगा के रख दी तूने.
राम्या : अभी भुजा दूँगी यार, आगे तो मेरे जिस्म में भी लग चुकी है
सीमी : चल आजा फिर एक दूसरे को ठंडा करते हैं .
राम्या दरवाजे की तरफ एक नज़र देखती है पर सीमी उसे खींच लेती है. दोनो 69 के पोज़ में आ जाती हैं.



राम्या सीमी की चूत पे झुकने से पहले फिर एक नज़र दरवाजे पे डालती है. माँ का कोई निशान नही था. राम्या ये समझ लेती है कि माँ को शरम आ रही है सीमी के सामने आने में . उसे नही पता था कि माँ तो बाहर खड़ी सब कुछ देख रही है, पर उसकी अंदर आने की हिम्मत नही हो रही.
माँ चाह कर भी अंदर नही घुस पाती और इतनी गरम हो चुकी थी कि उससे और देखा नही गया. अपनी चूत मसल्ते हुए माँ अपने कमरे में चली जाती है और बिस्तर पे गिर कर तड़पने लगती है.


RE: Kahani भड़की मेरे जिस्म की प्यास - sexstories - 08-11-2018

कुछ देर तो माँ बिस्तर पे पस्से मारती रही, जब सहा नही गया तो उठ के अपने कपड़े उतार डाले.



और बिस्तर पे गिर कर अपने उरोजो को दबाने और निचोड़ने लगी. उसकी आँखों के सामने राम्या और सीमी के जुड़े हुए जिस्म लहराने लगे और उसके जिस्म की प्यास बढ़ती चली गई.


ऊरोजो को सहलाते, दबाते, निचोड़ते उसे राम्या के हाथों की कमी महसूस होने लगी. कल तक जो सिर्फ़ लंड लिया करती थी, आज उसे अपनी ही बेटी के जिस्म की चाहत होने लगी. शायद इसलिए की उसका पति उसे चोदने के लिए माजूद नही था और जिस्म की प्यास जब भड़कती है तो इंसान अच्छा या बुरा भूल जाताहै, बस याद रहती है तो सिर्फ़ एक बात, इस प्यास को भुजाना है कैसे भी.


काफ़ी देर तक वो अपने उरोजो सेखेलती रहती है और फिर आँखें बंद कर अपने ही हाथों से अपनी चूत सहलाने लगती है और मन ही मन कल्पना करने लगती है कि राम्या उसकी चूत सहला रही है.

कल्पना करते करते अपनी ही उंगलियाँ अपनी चूत में घुसा लेती है और तेज़ी से अपनी उंगलियाँ अपनी चूत के अंदर बाहर करने लगती है.जिस्म का उन्माद बढ़ता ही रहता है और मुँह से सिसकियाँ फूटने लगती है.
आह राम्या कर और कर, और अंदर डाल, हां हां उफ़ उफ़ उफ़ ओह और तेज़ और तेज़

जो मुँह में आया वो निकलता रहा और काफ़ी देर तक उंगलियाँ चलाने के बाद उसका जिस्म अकड़ने लगा. बंद आँखों के आगे एक अंधेरा सा छा गया और चिंगारियाँ से लहराने लगी. 

अहह एक चीख के साथ उसने अपना बाँध तोड़ दिया और उसकी उंगलियाँ उसके कम रस से भीग गई, बिस्तर पे एक तालाब सा बनने लगा. जिस्म निढाल सा पड़ गया और वो अपने आनंद में खो गई.




नीचे माँ खुद को अपनी ही उंगलियों से राहत पहुँचती है, उपर दोनो बहने 69 पोज़ मे एक दूसरे की चूत को चूस, काट और चाट रही थी. दोनो पे एक पागलपन सवार था.

सीमी ने राम्या की चूत में अपनी उंगली घुसा दी और उसकी क्लिट को ज़ुबान से कुरेदने लगी. उफफफफफफफफफफफ्फ़ राम्या के जिस्म में झुरजुरी फैल गई, उसे ऐसे महसूस होने लगा जैसे लहरों की तपड़ों के साथ उसका जिस्म उपर नीचे हो रहा है. सीमी की चूत तो काफ़ी खुली हुई थी आसानी से राम्या की तीन उंगलियाँ निगल गई. राम्या ने उसकी चूत के अंदर अपनी उंगलियों की हरकतें शुरू करदी और जीब से उसके क्लिट को ज़ोर ज़ोर से चाटने लगी. एक तेज़ लहर सीमी के जिस्म में उठी और उसने राम्या की चूत पे दाँत गढ़ा दिए.

आधे घंटे तक दोनो के जिस्म उत्तेजना से तड़प्ते हुए एक दूसरे की चूत में जीब और उंगलियों का प्रहार करते रहे. लहरें जिस्म में उठती गिरती रही.

राम्या ने सीमी की चूत को पूरा मुँह में भर लिया और ज़ोर ज़ोर से चूसने लग गयी जैसे पंप चला कर चूत में से कुछ निकलना चाहती हो. सीमी तड़प उठी और उसने राम्या के क्लिट को दांतो से पकड़ लिया . एक करेंट सा लगा राम्या को और उसके चूसने की गति और ताक़त यकायक बढ़ गई जिसका सीधा असर सीमी की चूत की दीवारों पे हुआ और वो अंदर इकट्ठा होते हुए सैलाब को बहने रोकने में पूरी ताक़त लगा बैठी.

भूखी प्यासी बिल्लियों की तरहा दोनो एक दूसरे की चूत को चूस रही थी और दोनो के जिस्म इस आनंद को सह पाने की अपनी क्षमता पार कर चुके थे.

दोनो का जिस्म अकड़ने लगा और और दोनो की चूत एक साथ कुलबुलाती हुई अपने कमरस को रोकने मे असमर्थ एक तेज़ भाव के साथ बहने लगी, जिससे दोनो ही लपलप चाटते हुए चूसने लगी और अपने होंठ एक दूसरी की चूत से चिपका कर निकलते हुए कमरस को अंदर गटाकने लगी.


RE: Kahani भड़की मेरे जिस्म की प्यास - sexstories - 08-11-2018

जब दोनो का सैलाब रुक गया तो असीम आनंद को महसूस करते हुए दोनो एक दूसरे की बगल में गिर कर हाँफने लगी और अपनी साँसे दुरुस्त करने लगी.



जब दोनो की साँसे सम्भल गई तो दोनो एक दूसरे से चिपक कर एक दूसरे के चेहरे पे फैले हुए अपने रस को चाटने लगी और दोनो ने एक दूसरे का चेहरा चाट चाट कर सॉफ कर दिया.
राम्या सीमी के पीछे पड़ गई आगे की दास्तान जानने के लिए.
राम्या : अब आगे बता क्या क्या. चुदने के बाद तूने क्या किया.
सीमी : तू मेरा पीछा छोड़ेगी नही, बड़ा मज़ा ले रही है मेरी चुदाई के बारे मे जान कर . जब खुद चुदेगि तब पता चलेगा कितना मज़ा आता है. 
राम्या : उसी केलिए तो विमल को पटा रही हूँ.अब तू मेरी बात छ्चोड़ और अपनी बता.
सीमी : अच्छा बाबा ले सुन.
चुदने के बाद थोड़ी देर तो मैं अपनी साँसे संभालती रही. जब साँस ठीक हुई तो मुझे ज़ोर से पिशाब आया और में बाथरूम जाने के लिए उठने लगी. ज़रा सा ही उठी थी कि कमर में ज़ोर का दर्द हुआ और में वापस बिस्तर पे गिर पड़ी. विक्की मेरी हालत समझ गया और मुझे उठा कर बाथरूम ले गया और Wc पे बिठा दिया. बेशार्मो की तरहा मेरे सामने ही खड़ा रहा. मुझे इतनी शर्म आ रही थी कि मुतना भी मुश्किल हो रहा था. मेरे पास आ कर मेरे उरोज़ सहलाता हुआ बोला 'शरमा किसलिए रही है, अब भी कुछ बचा है छुपाने के लिए' 

मैं शर्म से दोहरी होती जा रही थी वो मेरे मम्मों से खेल रहा था, बड़ी मुस्किल से मैने मुता और फिर उसने मुझे शवर के नीचे खड़ा कर दिया. ठंडा ठंडा पानी मेरे जिस्म को राहत देने लगा.

उसने मुझे बड़े प्यार से नहलाया. उसके हाथ मेरे जिस्म पे जब घूम रहे थे मेरी साँसे तेज़ होने लगी एक सैलाब मेरे अंदर फिर से उठने लगा.


वो नीचे बैठ गया और अपना मुँह मेरी चूत से लगा दिया उफफफफफफफफफफफफ्फ़ एक तेज़ सरसराहट मेरी चूत मे होने लगी . उसने अपनी जीब मेरी चूत में घुसा दी. उूुुुुुुुुुउउइईईईईईईईईईईईईई माआआआआआ मैं चीख पड़ी . मेरी चूत में हज़ारों चीटी एक साथ रेंगने लगी मेरा बुरा हाल होने लगा और वो मज़े से मेरी चूत को अपनी जीब से रोन्दने में लगा रहा. उफ़फ्फ़ क्या बताऊ क्या हाल हो रहा था मेरा. खड़ा होना भी भारी लग रहा था. बस दिल कर रहा थे वो अपना लंड मेरी चूत में घुसा दे. मैं ज़्यादा देर तक उसकी जीब के करतब अपनी चूत में सह ना सकी मेरा जिस्म अकड़ता गया और मैं उसके मुँह में ही झाड़ पड़ी. वो चटकारे लेकर मेरा कामरस पीने लगा और तब तक पीता रहा जब तक आखरी बूँद भी उसके गले के नीचे उत्तर ना गई.

इतना मज़ा आया कि क्या बताऊ . मैं और खड़ी ना रह सकी और फर्श पे ढेर हो गई. वो मेरे साथ लिपट गया और मुझे चूमने और सहलाने लगा.



जब थोड़ी जान में जान आई तो वो खड़ा हो गया. अब मेरी बारी थी उसे मज़ा देने की. मैं घुटनो के बल बैठ गई और उसके लंड को पकड़ कर चाटने लगी. वो आँहें भरने लगा.

मैं उसके लंड को अपने मुँह के अंदर घुसाती चली गई और वो मेरे गले तक पहुँच गया. मुझे साँस लेने में तकलीफ़ होने लगी, फिर भी मैं उसके लंड को थोड़ा बाहर निकालती फिर गले तक ले जाती, उसे तो ऐसा लग रहा था जैसे चूत में ही उसका लंड घुसा हुआ हो. मैं ज़ोर ज़ोर से उसके लंड को चूसने लगी. दिल कर रहा था कि वह मेरे मुँह में ही झाड़ जाए और में उसके रस से अपनी प्यास भुजा सकूँ. पर उसके मन में कुछ और ही था.


उसने मेरे मुँह से अपना लंड निकाल लिया और मुझे झुका कर मेरे पीछे आ गया. मैं समझ गई अब ये मुझे चोदेगा. मेरे पीछे आ कर अपना लंड मेरी चूत पे घिसने लगा. मेरा हाल तो बुरा हो ही चुका था मेरी चूत काफ़ी गीली हो चुकी थी. उसने मेरी कमर को पकड़ा और अपना लंड मेरी चूत मे एक झटके में ही पेल दिया. मैं सिर्फ़ एक बार ही तो चुदि थी,मेरी चूत काफ़ी टाइट थी इसलिए मुझे बहुत दर्द हुआ पर इतना नही जितना पहली बार हुआ था.

वो सतसट मुझे पेलने लगा . मैं दर्द से कराहती रही, थोड़ी देर में मेरा दर्द गायब हो गया और मज़ा आने लगा. मैने भी अपनी गान्ड उसके लंड पे मारनी शुरू कर दी. जैसे ही वो अपना लंड बाहर निकालता मैं अपनी गान्ड पीछे कर फिर उसका लंड अंदर लेलेति.

10 मिनट तक वो मुझे बिना रुके चोदता रहा और फिर मेरी चूत में झाड़ गया. हम दोनो की साँसे फूल चुकी थी. उसके झाड़ते ही मेरी चूत भी उसके साथ झाड़ पड़ी और मैं फर्श पे ही ढेर हो गई.
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RE: Kahani भड़की मेरे जिस्म की प्यास - sexstories - 08-11-2018

अगले दिन सीमी के घरवाले पहुँच जाते हैं, इसलिए सीमी अपने नये घर चली जाती है. विक्की बेसब्री से उसका इंतेज़ार कर रहा था. ये दिन बड़ी मुस्किल से उसने निकले थे. अब दोनो को ही रात का इंतेज़ार था एक दूसरे की बाँहों में समाने के लिए.

रमेश भी घर वापस आ जाता है और अपनी पत्नी से गुफ्तगू करता है, पंडित ने जो कहा था उस बारे में. लड़कियों के नाम बदलने थे. बार बार नुकसान सहने से अच्छा था एक बार पंडित की बात मान ली जाए.

वो राम्या को बुलाता है और अपना निर्णय सुना देता है. अंधविश्वास में जब कोई पड़ जाए तो क्या कर सकते हैं. बहुत सोच विचार कर दोनो मा बाप अपनी बेटियो का नाम सीखनी की तरहा रख देते हैं और गुरुद्वारे जा कर मत्था भी टेकते हैं. अब राम्या बन गई थी सोनलप्रीत केपर कौर आंड रिया बन गयी थी जससपरीत केपर कौर.

रमेश अफिडेविट बनवाता है और भागा दौड़ी कर लड़कियो के नाम हर जगह जहाँ बहुत ज़रूरी था बदलवा देता है.

राम्या को अपना नाम बहुत प्यारा था पर जब उसके डॅड ने उसे सोनी कर के पुकारना शुरू किया तो वो सोनी के रंग में रंग गई उसे सोनी बुलाया जाना बहुत अच्छा लगने लगा.
रिया भी जससपरीत की जगह जस्सी बुलाए जाने लगी.

जब ये खबर फोन पे विमल को दी गयी तो वो बहुत नाराज़ हुआ इस तरहा अंधविश्वास में पड़कर बच्चों के नाम बदलना. पर जो हो चुका था उसे वो बदल नही सकता था और वो अपने माँ बाप की खिलाफत भी नही करना चाहता था. आज वैसे भी शाम तक उसने घर आना ही था.

शाम को जब वो घर पहुँचा तो सोनी ने दरवाजा खोला. नाम के साथ साथ उसके बदले हुए रूप को देख कर उसका लंड हरकत मे आ गया. वो आँखें फाडे सोनी को निहारता रहा. उसे लगा जैसे नाम बदलने के साथ साथ सोनी की आकर्षण शक्ति भी बहुत बढ़ चुकी है.

उसकी नज़रें सोनी के क्लीवेज और झाँकते हुए उरोजो पर टिक गई और वो अंदर घुसना भी भूल गया. सोनी मन ही मन इतरा रही थी विमल पर अपने हुस्न के जादू को सर चढ़ते देख.

सोनी गला खंखार कर : कहाँ खो गया, अंदर चल ना.

विमल को झटका लगा सर झुकता हुआ अंदर आया और सीधा अपने कमरे में चला गया.
एक तरफ जहाँ जकप ने उसका दिमाग़ खराब कर रखा था वहाँ सोनी को देख वो पागल हुआ जा रहा था. ढत्त ऐसा कैसे सोच सकता हूँ मैं सोनी के बारे में. अपने सर को झटकता है और बाथरूम में घुस जाता है.

क्यूंकी रमेश बहुत दिनो से चूत का भूखा था वो जल्दी सोने का प्रोग्राम करता है. 

सोनी की मा भी अंदर से बहुत खुश थी, आज खूब जी भर के चुदेगि. सोनी ने बहुत प्यास भड़का दी थी अपनी माँ की. सीमी जा चुकी थी और सोनी उदास सी हो कर अपने कमरे में चली जाती है और सिर्फ़ ब्रा और पैंटी में ही बिस्तर पे लेट जाती है.

विमल को नींद नही आ रही थी, उसने सोचा चलो सोनी के पास जा के कुछ समय बिताता हूँ. जैसे ही वो सोनी के कमरे के सामने पहुँचा उसे जोरदार झटका लगा. सोनी सिर्फ़ ब्रा और पैंटी में लेटी हुई कुछ सोच रही थी. विमल के पाँव वहीं दरवाजे पे जम गये.


RE: Kahani भड़की मेरे जिस्म की प्यास - sexstories - 08-11-2018

दरवाजे की झिर्री से वो सोनी के उन्नत उरोजो को निहारने लगा. उसका दिमाग़ उसे बार बार टोक रहा था वहाँ से चले जाने के लिए, पर कदम थे कि उठ ही नही रहे थे.उसके जिस्म में आग सी लग जाती है. उसका लंड फनफनाता हुआ खड़ा हो जाता है. दिल कर रहा था अंदर जा कर सोनी को दबोच ले. उफ्फ कितनी सुंदर लग रही थी गुलाबी पैंटी और ब्रा में. ब्रा भी ऐसी पहनी थी कि आधे उरोज़ बाहर झाँक रहे थे. सोनी के जिस्म से कामुकता फूट फूट कर निकल रही थी और विमल उसमे बहता चला जा रहा था. उसका हाथ अपने लंड पे पहुँच गया और वो सोनी को देखते हुए अपना लंड मसल्ने लगा.

अचानक सोनी के जिस्म में कुछ हरकत हुई और वो उठ के बैठ गई.
पकड़ा ना जाए इस डर से विमल फटाफट अपने कमरे में भाग गया. उसकी साँसे बहुत तेज़ चल रही थी. जितनी कोशिश वो करता कि सोनी के बारे में ऐसा वैसा ना सोचे उतनी ही ज़ोर से उसे सोनी का आधा नंगा जिस्म अपनी आँखों के सामने लहराता हुआ दिखता.

विमल अपने अंदर उठती हुई इस प्यास से परेशान हो उठा, कैसे वो अपनी बहन को वासना की नज़रों से देख पा रहा था. आज तक उसके दिमाग़ में कभी सोनी के बारे में ऐसा विचार नही आया था. पर जब से जकप की मेल्स आनी शुरू हुई उसका दिमाग़ खराब होता चला गया. 

विमल सारे कपड़े उतार कर बाथरूम में घुस जाता है और शवर के नीचे खड़ा हो अपने जिस्म को ठंडा करने की कोशिश करता है.

इधर सोनी भी अपने जिस्म में उठती हुई तरंगों से परेशान थी. वो भी अपने कमरे में बने बाथरूम में घुस जाती है. अपनी ब्रा पैंटी उतार देती है और शवर के नीचे खड़े हो अपने उरोज़ दबाने लगती है.




सोनी अपने जिस्म पे अच्छी तरहा क्रीम लगाती है और अपने उरोजो का मसाज करने लगती है. काफ़ी देर वो अपने उरोज़ के साथ खेलती रहती है.

उधर विमल अपने बाथरूम में एक हाथ से अपने जिस्म पर शवर का पानी डालता रहता है और दूसरे हाथ से मूठ मारने लगता है.


अपने उरोजो से खेल कर तंग आने के बाद सोनी अपनी चूत में उंगली करने लगती है जब तक वो झाड़ नही जाती. फिर अपनी उसी पैंटी और ब्रा को पहन कमरे में आ कर अपने बिस्तर पर लेट करवटें बदलती रहती है.

विमल भी मूठ मार कर अपनी पिचकारी दीवार पे छोड़ देता है और खुद को सॉफ कर एक गाउन पहनता है और बिस्तर पे लेट जाता है. उसकी आँखों में सोनी ही सोनी थी.

दोनो रात भर जागते रहते हैं और शायद सुबह होने ही वाली थी कि उनकी आँख लग जाती है.


RE: Kahani भड़की मेरे जिस्म की प्यास - sexstories - 08-11-2018

विमल और सोनी तो खुद के साथ खेलने में मस्त थे पर रमेश तो बेसब्री से अपनी बीवी का इंतेज़ार कर रहा था.
सोनी की माँ किचन संभाल कर जैसे ही अपने कमरे में घुसती है तो रमेश पहले से ही अपने कपड़े उतार के बैठ हुआ था और अपने लंड को सहला रहा था. वो फट से दरवाजा बंद करती है ताकि कोई बच्चा ग़लती से ना आजाए और बाप को इस अवस्था में देखले. चूत तो उसकी भी कुलबुला रही थी पर नारी लज्जा उसे रोक लेती है और वो दरवाजे की तरफ ही मुँह करे खड़ी रहती है. रमेश से और बर्दाश्त नही होता वो लपक कर अपनी बीवी के पास जाता है और अपनी तरफ मोदता है और अनन्फनन उसके कपड़े उतार फेंकता है.
वो छुई मुई की तरहा खड़ी रहती है और अपने पति को अपने वस्त्र उतारने में सहयोग देती रहती है.
रमेश उसे बिस्तर पे गिरा देता है और उसके उरोज़ पर टूट पड़ता है.



कामया सोनी की माँ, सिसक पड़ती है. अहह रमेश चूस लो खा जाओ, कितने दिन हो गये हैं उफफफफफफफ्फ़ आह आह उम्म्म्म चूसो और चूसो.
रमेश को चुदाई के वक़्त रंडीपना अच्छा लगता है इसीलिए कामया ज़ोर ज़ोर से सिसकती है ताकि रमेश को मज़ा आए और वो पागलों की तरहा उसकी चुदाई करे. 
रमेश कामया के एक उरोज़ को चूस्ता और दूसरे को दबाता और निचोड़ता. रमेश किसी भूके बच्चे की तरहा कामया के उरोज़ चूस्ता रहता है और बीच बीच में उसके निपल्स को अपने दाँतों से हल्के हल्के चबाने लगता है .

जैसे ही उसके दाँत कामया के निपल्स को छूते कामया की सिसकियाँ और तेज हो जाती. आज बहुत दिनो बाद कामया की चुदाई लंड से होने वाली थी इस लिए उसमे उत्तेजना बहुत बढ़ी हुई थी. उसकी सिसकियाँ इतनी ज़ोर से निकल ती थी कि उपर अपने कमरों में करवटें बदलते उसके बच्चे तक सुन लेते हैं. विमल से रहा नही जाता और वो सिर्फ़ शॉर्ट पहने नीचे आ जाता है. दरवाजा बंद था पर खिड़की का परदा थोड़ा हटा हुआ था.
अंदर से उसकी माँ की आवाज़ें आ रही थी 
आह आह उम उम उफ़ उफ़ और चूसो और चूसो आआईयईईईईई 
विमल खिड़की से अंदर झाँकने लगा और अंदर उसका बाप उसकी माँ के उरोज़ चूस रहा था. अपनी माँ को इस रूप में देख रमेश के जिस्म में उत्तेजना का संचार होने लगा उसका लंड भी अपनी नंगी माँ को देख खड़ा होने लगा. एक पल को उसके दिमाग़ में आया की चला जाए पर उसके पैर वहीं जमे रहे और आँखें खिड़की के अंदर का नज़ारा देख रही थी. उसके बाप का खड़ा लंड करीब 7" का होगा जो उसके लंड 9" के लंड से काफ़ी छोटा था. विमल के दिल में अपनी मा को चोदते का ख़याल आने लगा.

जब रमेश ने कामया के उरोज़ अच्छी तरहा चूस चूस कर लाल कर दिए तो वो हट गया और बिस्तर पे लेट गया. अब कामया की बारी थी. वो उठ कर रमेश के लंड पे झुक गई और उसे चाटने लगी. विमल को ऐसा लग रहा था जैसे उसकी माँ उसका ही लंड चाट रही हो. उसके लंड की अकड़न बढ़ती जा रही थी और उसकी शॉर्ट में एक तंबू बन चुका था. 

विमल आँखें फाडे अंदर झाँक रहा था, उसकी माँ ने उसके बाप के लंड को पहले अच्छी तरहा चाटा और फिर मुँह में ले कर चूसने लगी और धीरे धीरे लंड को पूरा अंदर ले लिया जो उसके गले तक जा रहा होगा. उसका बाप भी मस्ती में आँहें भरने लगा. क्या जबरदस्त चूस रही थी उसकी माँ.

अचानक उप्पर से किसी के उत्तरने की आवाज़ आती है, विमल फटाफट खिड़की से हट कर अंदर हाल में चला जाता है और फ्रिड्ज खोल कर पानी की बॉटल निकालता है. सोनी भी शायद अपनी माँ की चुदाई देखने आई थी. अभी उसने खिड़की में झाँका ही था कि उसे हाल में कुछ हलचल सी लगी और वो फट से हट गई वो बस इतना ही देख पायी कि उसकी माँ ने उसके बाप के लंड को मुँह में भर रखा है. 

वो भी हाल में चली गई जहाँ विमल अपना गला तर कर रहा था. सोनी की नज़र उसकी शॉर्ट में बने तंबू पे चली गई और उसका जिस्म कांप उठा. सोनी ने एक झीनी नाइटी पहन रखी थी जिसमे से उसका गोरा जिस्म छलक रहा था. विमल की नज़रें उसपे गढ़ गई, वो भूल गया कि उसका खड़ा लंड सोनी देख रही है. 

सोनी : क्या कर रहा है भाई, नींद नही आ रही क्या.

विमल : वो वो कमरे में पानी रखना भूल गया था इसीलिए नीचे आया बड़ी प्यास लग रही थी.

सोनी : कुटिलता से मुस्काती हुई बोली ' हां प्यास तो लगेगी ही, भुज गई या और तेज़ हो गई.'

विमल : क क क्याअ
सोनी : कुछ नही पानी पी ले और सो जा, बहुत रात हो चुकी है. 

विमल पानी की बॉटल ले कर अपने कमरे की तरफ भागता है.
सोनी का दिल तो कर रहा था अपने माँ बाप की चुदाई देखने का पर कहीं विमल फिर ना आजाए इस डर से वो पानी की एक बॉटल निकालती है और उपर अपने कमरे की तरफ बढ़ जाती है. 

विमल बाहर ही खड़ा हुआ था वो सोनी को उसके कमरे में जाता हुआ देखता है और एक लंबी साँस ले कर अपने कमरे में चला जाता है.
बिस्तर पे लेट कर आँखें बंद करता है तो माँ का नंगा जिस्म उसकी आँखों के आगे तैरने लगता है.

नीचे से फिर उसकी माँ की सिसकियों की आवाज़ आने लगी. विमल और सोनी दोनो ही अपने जिस्मों के अंदर बढ़ती हुई प्यास से तड़पने लगे

आह आह आह उफफफफफ्फ़ उम्म्म्मममम आाआऐययईईईईईईईईईईई

कामया की सिसकियाँ ज़ोर पकड़ती जा रही थी, ऐसा लग रहा था जैसे पूरा घर वासना के रंग में रंग गया हो. आज तो दोनो मिया बीवी ये भी भूल गये थे कि आवाज़ें उपर उनके जवान बच्चे भी सुन रहे होंगे. 

विमल के कानों में कामया की सिसकियाँ और आँखों एक आगे उसका सुंदर नंगा बदन उसे सोने नही दे रहा था. उसने खुद को बहुत रोका पर रोक नही पाया और कमरे से बाहर निकल नीचे की तरफ बढ़ता चला गया. जैसे ही वो नीचे उतर रहा था पीछे सोनी उसे उतरते हुए देख रही थी. 

विमल के कदम उसे सीधा उसी खिड़की की तरफ ले गये जहाँ से अंदर का नज़ारा दिख रहा था.


RE: Kahani भड़की मेरे जिस्म की प्यास - sexstories - 08-11-2018

विमल की आँखें तरस रही थी उस नज़ारे को देखने के लिए जिसमे उसकी माँ चुद रही थी.
विमल झाँक कर देखने लगा अंदर उसका बाप उसकी माँ पे चढ़ा हुआ था और सटा सॅट उसकी चूत में अपने लंड को पेल रहा था. कामया भी अपनी गान्ड उछाल उछाल कर उसका लंड अंदर ले रही थी.

अहह चोदो ज़ोर से चोदो उफफफफफ्फ़ उम्म्म्ममम फाड़ दो मेरी चूत 

अंदर कामया चुदती हुई चिल्ला रही थी और विमल को लग रहा था जैसे उसे ही कह रही हो, विमल के हाथ अपने खड़े लंड पे पहुँच गये और उसने उसे क़ैद से आज़ाद कर दिया.

पीछे दूर खड़ी सोनी उसके लंड की लंबाई और मोटाई देख घबरा गई, कैसे जाएगा ये मूसल उसकी चूत में. विमल ने मूठ मारनी शुरू करदी और सोनी ने अपनी चूत को मसलना

अंदर रमेश कामया को चोदते हुए उसके निपल को चूसने लगा . कामया के जिस्म में पहले से ही तूफान उठा हुआ था वो और भी भड़क गया.
रमेश कामया की चूत से लंड बाहर निकाल लेता है. कामया तड़प उठती है.
आह बाहर क्यूँ निकाला
रमेश तब उसे पलटने को कहता है, कामया पलट कर अपने घुटनो पे आती है और अपनी गान्ड उप्पर उठा देती है. वो सोच रही थी कि रमेश पीछे से चूत में लंड डालेगा पर रमेश किसी और मूड में था वो अपना लंड कामया की गान्ड के छेद से रगड़ता है और एक ज़ोर का झटका मार कर आधा लंड अंदर घुसा देता है.
आआआआआआआईयईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई
कामया बहुत ज़ोर से चीखती है और आगे को होने की कोशिश करती है. पर रमेश उसकी कमर को सख्ती से पकड़ कर एक और झटका मारता है और पूर लंड अंदर घुसा देता है.
म्‍म्म्ममममममाआआआआअरर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर गगगगगगगाऐयईईईईईईई

कामया फिर ज़ोर से चिल्लाती है.

बाहर खड़े विमल को लगा जैसे उसने अपना लंड अपनी माँ की गान्ड में पेल दिया हो, उसके हाथ तेज़ी से अपने लंड पे चलने लगते हैं.

अंदर रमेश सतसट कामया की गान्ड मारने लगता है . कामया चिल्लाती रहती है पर रमेश कोई रहम नही करता.
थोड़ी देर बाद कामया की चीखें बंद हो जाती है और सिसकियाँ शुरू हो जाती है.
विमल बाहर खड़ा हैरानी से देख रहा था कैसे उसकी माँ अब गान्ड मरवाने का मज़ा ले रही है.

हाँ हाँ और और और तेज़ चोदो चोदो मेरी गान्ड हाआआऐययईईईईई म्‍म्म्माज्जा आ रहा है उफ़ उफ़ और तेज़ और तेज़ पूरा डाल दो डाल दो फाड़ दो मेरी गान्ड

कामया तेज़ तेज़ बोल रही थी एक रंडी की तरहा और रमेश को उकसाती जा रही थी. रमेश और भी जोश में आ कर उसकी गान्ड मारने लगा.
बाहर विमल के हाथ अपने लंड पे तेज़ होते चले गए और उसे देख सोनी भी अपनी चूत में उंगल करने लगी.

विमल को अपने कानो पे भरोसा नही हो रहा था कैसी भाषा बोल रही थी उसकी माँ, दिन में कितनी भोली दिखती है कोई सोच भी नही सकता कि ऐसे भी बोलती होगी.

जब रमेश को लगा कि उसका छूटने वाला है वो अपना लंड कामया की गान्ड से निकाल लेता है पक की आवाज़ होती है जैसे किसी सोडा की बॉटल का ढक्कन खोला गया हो. विमल को अपनी माँ की गान्ड का छेद काफ़ी खुला हुआ दिखता है जो धीरे धीरे अपने नॉर्मल साइज़ पे वापस आ रहा था.

अब रमेश पीठ के बल लेट जाता है . कामया उठ कर रमेश को चूमती है उसकी छाती पे अपने उरोज़ रगड़ती है और अपनी दोनो टाँगों के बीच रमेश को ले लेती है. फिर उठकर एक हाथ से रमेश के लंड को पकड़ अपनी चूत पे लगाती है बैठती चली जाती है. रमेश का लंड कामया की चूत में घुस जाता है.
थोड़ी देर कामया लंड को अपनी चूत में अड्जस्ट करती है फिर रमेश के कंधो पे अपने हाथ रख उपर नीचे होने लगती है. रमेश भी उसकी कमर को थाम कर उसे उपर नीचे करने लगता है. विमल को अपने बाप का लंड अपनी माँ की चूत में घुसता और बाहर निकलता दिख रहा था.


RE: Kahani भड़की मेरे जिस्म की प्यास - sexstories - 08-11-2018

कामया अपनी गति तेज़ कर देती है और पागलों की तरहा रमेश के उपर उछलने लगती है.
थोड़ी देर में कामया और रमेश एक साथ झाड़ते हैं और इधर बाहर विमल भी अपनी पिचकारी छोड़ देता है.

विमल की पिचकारी को निकलता देख सोनी की उत्तेजना बहुत बढ़ जाती है और उसकी चूत भी झड़ने लगती है. सोनी वहीं ज़मीन पे बैठ जाती है, उसकी टाँगों में जैसे जान ही नही बची थी. विमल का भी हाल खराब होता है. वो भीड़ ज़मीन पे धाम से गिर जाता है.
अंदर कामया रमेश के उपर देह जाती है. रमेश का लंड अभी भी उसकी चूत में था.

कामया और रमेश एक दूसरे से चिपक जाते हैं. विमल खड़ा होने की कोशिश करता है तो सोनी फट से अपने कमरे में भाग जाती है. लड़खड़ाता हुआ विमल धीरे धीरे अपने कमरे में जा कर बिस्तर पे गिर जाता है. उसकी आँखों के सामने उसकी माँ का नंगा जिस्म ही लहरा रहा था.

अगले दिन सुबह दो प्यासे जिस्म इस दुविधा में थे कि क्या करें अपनी बढ़ती हुई प्यास को भुजाने के लिए.
सोनी खुद पहल नही करना चाहती थी. वो विमल को इतना मजबूर करना चाहती थी कि वो उसके आगे गिड़गिडाए उसके जिस्म को छूने के लिए, उसके होंठों का रस पीने के लिए, उसकी चूत में अपना लंड डालने के लिए.

सोनी ने सुबह सुबह अपना लेपटॉप खोला और विमल को मेसेज भेज दिया जकप के नाम से.
जकप : हाई मेरी जान कैसे हो. तुम्हारे लंड की बहुत याद आ रही है. अगर मुझे चोदना चाहते हो तो पहले अपनी बहन को चोद के दिखाओ. मुझे पता है बड़ी मस्त आइटम है वो. क्या तुम्हारा लंड नही खड़ा होता उसे देख कर. अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हारी मदद कर सकती हूँ. जल्दी जवाब देना. देर करोगे तो मैं किसी और से चुद जाउन्गि, फिर हाथ मलते रह जाओगे. अब ये मत पूछना कि मैं तुम्हारी बहन को कैसे जानती हूँ. वक़्त आने पे सब बता दूँगी.

ये मेसेज विमल को भेज के सोनी फ्रेश होने बाथ रूम चली जाती है.

विमल रात भर सो नही पाया एक तरफ सोनी का जवान जिस्म और दूसरी तरफ उसकी कयामत से बढ़ कर सुंदर माँ. वो दोनो के लिए ही तड़प रहा था. बस यही सोचता रहा कैसे आगे बढ़े. पहले सोनी या माँ या फिर दोनो पे ट्राइ करे जो भी पहले राज़ी हो जाए.

यही सोचते हुए वो नहाने चला जाता है. नहर कर जब वो नीचे पहुँचा तो उसके डॅड बाहर लॉन में अख़बार पढ़ रहे थे और माँ किचन में थी.

विमल किचन में जाता है और पीछे से अपनी माँ से चिपक जाता है और उसकी कमर को अपनी बाहों में जकड़ता है.

‘गुड मॉर्निंग मोम, क्या हो रहा है?’

कामया यूँ पकड़े जाने पे एक पल तो घबरा ही गई थी. पर जब विमल की आवाज़ सुनी तो उसे कुछ चैन मिला.

अपना एक हाथ पीछे ले जा कर वो विमल के बालों में हाथ फेरती है.


RE: Kahani भड़की मेरे जिस्म की प्यास - sexstories - 08-11-2018

कामया : ‘क्या बात है आज बड़ा प्यार आ रहा है मम्मी पे?’

विमल : मैं तो आपको बहुत प्यार करता हूँ ( कह कर विमल अपने माँ के बालों को सूंघने लगता है, एक भीनी सी खुश्बू उसके बालों से आ रही थी.)

कामया : ‘कुछ चाहिए क्या जो आज इतना मस्का मार रहा है, पहले तो कभी तूने ऐसा नही किया, आज क्या बात हो गई?’

विमल : नही मम्मी बस आज दिल कर रहा था आपसे बहुत प्यार करूँ, बाहर रहता हूँ, आपकी बहुत याद आती है. आपके प्यारे हाथों से बना बढ़िया खाना खाने को तो मैं तरसता ही रहता हूँ, आपसे तो बात करने के लिए भी छुट्टियों का इंतेज़ार करना पड़ता है.

कामया : ‘ओह हो, मेरा बच्चा, जब तक तेरी छुट्टी है, मैं खूब तुझ से बात करूँगी.चल अब छोड़ तेरे डॅड चाइ की वेट कर रहे हैं. तू भी उनके पास बैठ जा मैं वहीं छा ले के आ रही हूँ.’

भुजे मन से विमल कामया को छोड़ देता है और अपने डॅड के पास चला जाता है.

रमेश : बेटा कैसे चल रही है तेरी पढ़ाई.

विमल : पढ़ाई तो ठीक चल रही है डॅड पर खाने पीने की बहुत प्राब्लम होती है. मेस का खा कर तंग आ चुका हूँ. सोच रहा हूँ यही पे माइग्रेशन करवा लूँ ताकि घर पर रह सकूँ.

रमेश : तेरा दिमाग़ तो ठीक है ना, अब कितना टाइम रह गया है. तेरी ट्रैनिंग मैं यहीं अच्छी कंपनी में करवा दूँगा, मुझे हमेशा की तरहा टॉप ग्रेड चाहिए. बस मैं और कुछ नही सुनना चाहता.

विमल चुप हो कर रह गया, सोचा था घर आ जाएगा तो माँ या सोनी को पटाने के ज़यादा चान्सस मिलेंगे. पर अफ़सोस, डॅड को ये सब कैसे बोलता.

सोनी तयार हो कर नीचे आती है तो दोनो बाप बेटे की आँखें फटी रह जाती हैं. सोनी ने ड्रेस ही ऐसे पहनी थी. उसके उरोज़ ऐसे तने हुए थे जैसे कपड़े फाड़ कर अभी बाहर निकल आएँगे और ड्रेस इतनी छोटी थी की जांघे सॉफ सॉफ नज़र आ रही थी. दोनो बाप बेटे नज़रें चुरा कर सोनी के हुस्न का जाम पी रहे थे. दोनो की ही पॅंट में तंबू बन गये थे. सोनी से अपने जलवों का असर छुपा नही था. विमल को चिडाने के लिए वो अपने बाप से सट के बैठ जाती है.

कामया इतने में चाइ ले कर आ जाती है. सोनी अपनी जांघे रमेश की जाँघो के साथ हल्के हल्के रगड़ रही थी और रमेश की हालत खराब हो रही थी.

कामया को बड़ा अजीब लगता है सोनी का इस तरहा बाप से चिपक के बैठने पर, वो टोक ही देती है. सोनी ज़रा किचन से चीनी ले आना मैं शायद डालना भूल गई. सोनी किचन चली जाती है तो कामया सोनी की जगह बैठ जाती है.
सोनी जब वापस आती है तो उसे विमल के पास बैठ ना पड़ता है और वो कुछ दूरी बना कर बैठ जाती है.


RE: Kahani भड़की मेरे जिस्म की प्यास - sexstories - 08-11-2018

सोनी : डॅड हम लोग बाहर घूमने का प्रोग्राम बना रहे थे उसका क्या हुआ.

रमेश : अरे मैने तो हां कर दी थी. जगह तो तुमने बतानी थी.

विमल : ये कब डिसाइड हुआ.

सोनी : भाई बहुत बोर गये हैं कुछ दिन बाहर घूम के आते हैं. चार दिन बाद तुम्हारी लंबी छुट्टी है, तो दो दिन और कर लो, जस्सी को भी छुट्टियाँ होनेवाली हैं.

रमेश अपनी चाइ ख़तम कर के उठ जाता है. भाई तुम लोग शाम तक डिसाइड कर्लो मैं चला, मुझे आज जल्दी निकलना है.

कामया : अरे नाश्ता तो करते जाओ.

रमेश : आज वहीं करलूंगा, लेबर ज़रा बिदक रही है उसे आज ठीक करना है.


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